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जनजातीय छात्रों के लिए सरकार का बड़ा फोकस, शिक्षा और आवासीय सुविधाएं होंगी बेहतर: मंत्री डॉ. शाह

जनजातीय विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध करा रही प्रदेश सरकार : मंत्री डॉ. शाह विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, कोचिंग और आधुनिक सुविधाओं से किया जा रहा सशक्त भोपाल प्रदेश के जनजातीय विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जनजातीय कार्य विभाग लगातार कार्य कर रहा है। मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में प्रदेश सरकार द्वारा जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिये अनेक योजनायें संचालित की जा रही हैं। विभाग द्वारा हजारों स्कूलों, छात्रावासों और आश्रमों का संचालन किया जा रहा है, जहां लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा, छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया है कि सरकार जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जनजातीय समाज का हर बच्चा आधुनिक शिक्षा से जुड़े और अपने सपनों को पूरा कर सके। छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा प्रदेश में 17 हजार 794 प्राथमिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही 5 हजार 493 माध्यमिक विद्यालय, 1109 उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा 804 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। विभाग द्वारा 8 आदर्श आवासीय विद्यालय एवं 82 माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर भी स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश में 94 सांदीपनि विद्यालय और 26 क्रीड़ा परिसर संचालित किए जा रहे हैं। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जनजातीय विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ बेहतर आवासीय और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावास एवं आश्रमों में 1 लाख 49 हजार 104 विद्यार्थियों को सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इनमें 92 हजार 547 बालक तथा 56 हजार 557 बालिकाएं शामिल हैं। अनुसूचित जनजाति आश्रमों में 1078 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्‍त कर रहे हैं। इनमें 568 बालक और 510 बालिकाएं शामिल हैं। जूनियर छात्रावासों में 9 हजार 981 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्‍त कर रहे है। सीनियर छात्रावासों में 68 हजार 670 तथा महाविद्यालयीन छात्रावासों में 8 हजार 710 विद्यार्थियों को सुविधा दी जा रही है। मंत्री डॉ. शाह ने कहा है कि छात्रावास एवं आश्रमों में विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 5 हजार रुपये की खेलकूद  सामग्री उपलब्ध कराई जाती हैं। सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए 5 हजार रुपये तथा फर्नीचर एवं उपकरणों के लिए 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष दिए जाते हैं। उत्कृष्ट छात्रावासों में विद्यार्थियों को 2 हजार रुपये तथा महाविद्यालयीन छात्रावासों में 1 हजार रुपये प्रतिवर्ष स्टेशनरी सुविधा प्रदान की जाती है। इसके अलावा उत्कृष्ट छात्रावासों में विद्यार्थियों को प्रतिमाह 200 रुपये पोषण आहार के रूप में दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजाति छात्रावास एवं आश्रमों में समाचार पत्र-पत्रिकाओं के लिए 5 हजार रुपये , इंटरनेट सुविधा के लिए 2500 रुपये, अध्ययन भ्रमण के लिए 25 हजार रुपये तथा संधारण एवं अनुरक्षण के लिए 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष उपलब्ध कराए जाते हैं। मंत्री डॉ. शाह ने कहा कि जिला एवं विकासखंड स्तर पर संचालित उत्कृष्ट छात्रावासों में 10 माह की कोचिंग व्यवस्था भी की गई है, जिसमें 5 विषय पढ़ाए जाते हैं। अनुसूचित जनजाति छात्रावास एवं आश्रमों में विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति के रूप में बालकों को 1650 रुपये तथा बालिकाओं को 1700 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों को शिक्षा के हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।  

स्टार्टअप्स को ग्लोबल पहचान दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मंत्री काश्यप

स्टार्टअप्स को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध : मंत्री काश्यप मंत्री काश्यप से युवा उद्यमी रत्नेश ने की सौजन्य भेंट युवा उद्यमी द्वारा फ्रांस को 46 हजार आईस्ड टी प्रीमिक्स पैक्स किया का निर्यात भोपाल सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने भोपाल के युवा स्टार्टअप उद्यमी एवं प्रमाणित टी टेस्टर आरिन रत्नेश की अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स अब वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नवाचार आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने और युवाओं को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। भोपाल स्थित स्टार्टअप कंपनी हरितिमा फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फ्रांस को 46 हजार आईस्ड टी प्रीमिक्स पैक्स का सफल निर्यात किए जाने पर आरिन रत्नेश ने मंत्री काश्यप से उनके कार्यालय में सौजन्य भेंट की तथा उन्हें अपने उत्पादों की श्रृंखला भेंट कर आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह तथा उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार भी उपस्थित थे। मंत्री काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को ऐसे अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने नवाचारों को सफल व्यवसाय में परिवर्तित कर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि आरिन रत्नेश की उपलब्धि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स में वैश्विक प्रतिस्पर्धा की अपार क्षमता है। मंत्री काश्यप ने बताया कि प्रदेश सरकार स्टार्टअप्स को निवेशकों से जोड़ने, विपणन अवसर उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर द्वारा आरिन रत्नेश को वर्ष 2025 में नई दिल्ली में आयोजित India International Trade Fair (IITF-2025) में मध्यप्रदेश पवेलियन के माध्यम से अपने उत्पादों के प्रदर्शन का अवसर उपलब्ध कराया गया था। इससे उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिली और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संभावनाओं को विस्तार मिला। आरिन रत्नेश ने राज्य शासन एवं एमएसएमई विभाग द्वारा प्राप्त सहयोग और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी सहायता और उचित मंच मिलने से उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। मंत्री काश्यप ने कहा कि प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा ऐसे युवा उद्यमियों की सफलता मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप राज्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।  

नायब सैनी ने जताया पीएम मोदी का आभार, हरियाणा में दौड़ेगी ग्रीन एनर्जी ट्रेन

 जींद  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश को देश की पहली हाइड्रोजन डेमू (DEMU) ट्रेन की सौगात मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। रेलवे बोर्ड द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। क्या होगा रूट यह देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन डेमू ट्रेन होगी, जिसे हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलाया जाएगा। इसमें कुल 10 कोच होंगे। रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाली इस परियोजना के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हरियाणा विकास और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। भविष्य की परियोजनाओं के लिए 'मील का पत्थर': नायब सैनी मुख्यमंत्री ने इस ट्रेन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, "यह हाइड्रोजन डेमू ट्रेन न केवल प्रदूषण मुक्त सफर का एक आधुनिक विकल्प बनेगी, बल्कि भविष्य की हरित ऊर्जा (Green Energy) परियोजनाओं को देखते हुए एक मील का पत्थर (Milestone) साबित होगी।" हरित और आधुनिक हरियाणा का संकल्प इस ट्रेन के शुरू होने से हरियाणा देश में अत्याधुनिक और इको-फ्रेंडली रेल कनेक्टिविटी वाला पहला राज्य बन जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से चल रहे ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स से आने वाले समय में राज्य के नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और उद्योगों व रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। हाइड्रोजन ट्रेन की खासियतें यह ट्रेन अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करेगी। ट्रेन कुल 1,200 किलोवाट बिजली उत्पन्न करेगी। नई ट्रेन में डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (डीपीआरएस) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से बिजली एक ही लोकोमोटिव पर निर्भर रहने के बजाय सभी डिब्बों में वितरित की जाती है। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों को डीजल इंजनों का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।  इसके जरिए कम उत्सर्जन होता है और ये स्वच्छ परिवहन को दिशा मिलती हैं।  रेल मंत्रालय ने अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) से तकनीकी मंजूरी और रेल सुरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) द्वारा किए गए सुरक्षा परीक्षण के बाद इस परियोजना को मंजूरी दी।  

जेएसएससी ने जारी किया शेड्यूल, जून के आखिरी सप्ताह में मिलेगा एडमिट कार्ड

 रांची झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा-2024 की तिथि घोषित कर दी है। यह लिखित परीक्षा पांच जुलाई केा राज्य के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित होगी। आयोग के अनुसार, परीक्षा से संबंधित प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के लिए लिंक आयोग के वेबसाइट पर जून माह के अंतिम सप्ताह में उपलब्ध कराया जाएगा। अभ्यर्थी उक्त लिंक के माध्यम से अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र डाक अथवा किसी भी अन्य माध्यम से उपलब्ध नही कराया जाएगा। आयोग ने परीक्षा में सम्मिलित होनेवाले अभ्यर्थियों को सुझाव दिया है कि परीक्षा से संबंधित सुचिता को बरकरार रखेंगे तथा किसी प्रकार के कदाचार संबंधी प्रयास में शामिल नहीं होंगे। अन्यथा दोषी पाए जाने पर झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि इस परीक्षा के माध्यम से क्षेत्रीय कार्यकर्ता के कुल 510 पदों पर नियुक्ति होनी है। JPSC: 14 जून को होगी जेट की शिक्षा व उड़िया विषय की परीक्षा झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) के तहत शिक्षा तथा उड़िया विषय की परीक्षा 14 जून होगी। झारखंड लोक सेवा आयाेग ने साेमवार को परीक्षा की तिथि की घोषणा कर दी। यह परीक्षा उक्त तिथि को सुबह 10 बजे से अपराह्न एक बजे तक रांची में आयोजित की जाएगी। आयोग के अनुसार, उक्त दोनों विषयों के लिए अभ्यर्थी प्रवेश पत्र एवं उपस्थिति पत्रक 10 जून से आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। बता दें कि पूर्व में इन दोनों की परीक्षा निर्धारित तिथि 26 अप्रैल को नहीं हो सकी थी।

रेखा गुप्ता कैबिनेट की मंजूरी, दिल्ली में बढ़ी राशन कार्ड की आय सीमा

नई दिल्ली अब ढाई लाख तक सालाना कमाने वाले दिल्ली के लोगों का भी राशन कार्ड बनेगा। आय सीमा में यह बड़ा बदलाव किया गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया है। सरकार के इस फैसले से आय सीमा के कारण राशन योजना का लाभ नहीं ले पा रहे लोगों को भी इसका फायदा मिलेगा। बता दें कि इस योजना के तहत पहले आमदनी की सीमा 1 लाख थी, जिसे बढ़ाकर 1.2 लाख किया गया था और अब बीजेपी सरकार ने सीधे डलब से ज्यादा 2.5 लाख कर दिया है, ताकि अधिक से अधिक परिवार को इसका फायदा मिल सके। इस योजना को अब डिजिटल ट्रांजेक्शन से भी जोड़ दिया गया है। CM की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया यह फैसला मंगलवार को कैबिनेट के इस फैसले के बारे में खाद्य और आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार CBDC (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) आधारित राशन वितरण प्रणाली लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके अंतर्गत भविष्य में राशन के लिए वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में जमा की जाएगी, जिससे वे डिजिटल मुद्रा के माध्यम से जरूरत के अनुसार सरकारी राशन की दुकानों से राशन ले सकेंगे। इससे प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितता समाप्त होगा। भविष्य में इस योजना को बैंकिंग प्रणाली से भी जोड़ने का विचार मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित CBDC आधारित मॉडल को फेज वाइज राशन दुकानों पर लागू किया जाएगा और भविष्य में इसे बैंकिंग प्रणाली से भी जोड़ा जाएगा, जिसमें निजी बैंक भी शामिल होंगे। इस योजना का मकसद मिलने वाली सुविधाओं को सुनिश्चित करना, प्रणाली की कमियों को कम करना और लाभार्थियों को खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने कहा कि यह नया मॉडल सामान्य नकद व्यवस्था के स्थान पर डिजिटल मुद्रा आधारित प्रणाली को बढ़ावा देगा।  

हरियाणा को मिली बड़ी सौगात, जींद से सोनीपत के बीच चलेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

जींद. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश को देश की पहली हाइड्रोजन डेमू (DEMU) ट्रेन की सौगात मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। रेलवे बोर्ड द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। यह देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन डेमू ट्रेन होगी, जिसे हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलाया जाएगा। इसमें कुल 10 कोच होंगे। रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाली इस परियोजना के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हरियाणा विकास और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। भविष्य की परियोजनाओं के लिए 'मील का पत्थर': नायब सैनी मुख्यमंत्री ने इस ट्रेन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, "यह हाइड्रोजन डेमू ट्रेन न केवल प्रदूषण मुक्त सफर का एक आधुनिक विकल्प बनेगी, बल्कि भविष्य की हरित ऊर्जा (Green Energy) परियोजनाओं को देखते हुए एक मील का पत्थर (Milestone) साबित होगी।" हरित और आधुनिक हरियाणा का संकल्प इस ट्रेन के शुरू होने से हरियाणा देश में अत्याधुनिक और इको-फ्रेंडली रेल कनेक्टिविटी वाला पहला राज्य बन जाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से चल रहे ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स से आने वाले समय में राज्य के नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और उद्योगों व रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। हाइड्रोजन ट्रेन की खासियतें यह ट्रेन अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग करेगी। ट्रेन कुल 1,200 किलोवाट बिजली उत्पन्न करेगी। नई ट्रेन में डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (डीपीआरएस) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से बिजली एक ही लोकोमोटिव पर निर्भर रहने के बजाय सभी डिब्बों में वितरित की जाती है। हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों को डीजल इंजनों का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है। इसके जरिए कम उत्सर्जन होता है और ये स्वच्छ परिवहन को दिशा मिलती हैं। रेल मंत्रालय ने अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) से तकनीकी मंजूरी और रेल सुरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) द्वारा किए गए सुरक्षा परीक्षण के बाद इस परियोजना को मंजूरी दी।

बिहार में आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए बड़े ऐलान, मैराथन विजेताओं को मिलेगा ₹1 लाख तक इनाम

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आदिवासियों के लिए बड़े ऐलान किए हैं। आदिवासी बाहुल्य जनजातीय क्षेत्रों में मैराथन का आयोजन होगा। इसमें प्रथम विजेता को 1 लाख, द्वितीय विजेता को 75 हजार एवं तृतीय विजेता को 50 हजार रुपये का इनाम मिलेगा। इसके अलावा कैमूर के अधौरा में जहां आदिवासी समाज के लोग संघर्ष का जीवन जी रहे हैं, वहां भी डिग्री कॉलेज खोला जाएगा। पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर और कैमूर में हेलीपोर्ट बनाए जाएंगे, इससे इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभागार में बुधवार को जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 के अन्तर्गत 'बिरसा लिब्स इन न्यू भारत' थीम के तहत पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के लाभार्थियों के साथ सीएम सम्राट चौधरी ने संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बिहार में एकलव्य स्कूलों की स्थापना की गई है, जिसमें बिहार बोर्ड के साथ सीबीएसई बोर्ड के सिलेबस की पढ़ाई कराई जाएगी। इससे अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) समाज के बच्चे आगे बढ़ेंगे। होम स्टे को बढ़ावा सीएम ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में पर्यटन के लिए होम स्टे को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे लोग आदिवासी संस्कृति को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति के तहत लगभग 1 लाख 4 हजार एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है। इसमें 4155 आदिवासी समाज के विद्यार्थी हैं। प्री मैट्रिक छात्रवृति के तहत इस साल 20 लाख 46 हजार छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है, जिसमें 1.41 लाख छात्र-छात्राएं एसटी वर्ग के हैं। बिहार में वन क्षेत्र बढ़ेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बना तो बिहार का हरित आवरण 8-9 प्रतिशत ही रह गया। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वन क्षेत्र बढ़ाने के काम किया। इससे बिहार का वन क्षेत्र 15 प्रतिशत हो गया। अब इसे 17 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। सम्राट चौधरी ने कहा कि यह साल भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। देश की आजादी और आदिवासी समाज के उत्थान में भगवान बिरसा मुंडा का बहुत बड़ा योगदान रहा। वे आदिवासी समाज के नायक थे। बिरसा लिब्स इन न्यू भारत तीम के तहत एससी-एसटी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति योजना की बुधवार को शुरुआत की गई, यह अपने आप में ऐतिहासिक है। इस कार्यक्रम में एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन, विभाग के सचिव संदीप कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सीएम के ओएसडी गोपाल सिंह, शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल समेत कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल और विभिन्न विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास

मां गंगा की धारा की तरह बढ़ रही विकास यात्रा: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल और विभिन्न विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास मुख्यमंत्री बोले- प्रयागराज अब भय, अराजकता और माफियागिरी से मुक्त, विकास और सांस्कृतिक गौरव की नई पहचान बना कुंभ-2019 और महाकुंभ-2025 ने प्रयागराज को वैश्विक पहचान दिलाई, यूनेस्को ने कुंभ को दी अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की मान्यता: सीएम “चरैवेति-चरैवेति” मंत्र के साथ डबल इंजन सरकार निरंतर आगे बढ़ा रही विकास यात्रा: मुख्यमंत्री प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रयागराज नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल और विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम में कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा में सरकार कहीं रुकी नहीं, कहीं थमी नहीं। यह यात्रा मां गंगा की धारा की तरह अविरल आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने “चरैवेति-चरैवेति” के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रयागराज आज सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक गौरव और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम बन चुका है। अगले कुंभ तक यही सुविधाएं प्रयागराज की स्थायी धरोहर बन जाएंगी मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले माघ मेला और कुंभ जैसे आयोजन गंदगी, भगदड़, अव्यवस्था और अराजकता के प्रतीक बन गए थे। लोग प्रयागराज आने से भी कतराते थे। लेकिन वर्ष 2019 में जब उनकी सरकार को कुंभ आयोजन का अवसर मिला, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से प्रयागराज कुंभ को यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। इससे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को वैश्विक पहचान मिली। कुंभ-2019 और महाकुंभ-2025, दोनों आयोजनों के दौरान डबल इंजन सरकार ने प्रयागराज में व्यापक अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया। यदि इनका बेहतर रखरखाव किया जाए तो अगले कुंभ तक यही सुविधाएं प्रयागराज की स्थायी धरोहर बन जाएंगी। प्रयागराज को मिल रही नई पहचान मुख्यमंत्री ने नगर निगम और महापौर के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विरासत को विकास से जोड़ने का कार्य किया गया है। वर्ष 2024 की शुरुआत में जब महाकुंभ-2025 की तैयारियों के लिए प्रयागराज का निरीक्षण किया गया, तब यह तय किया गया था कि शहर को नई पहचान दी जाएगी। आज 161 वर्ष पुरानी नगर निगम इमारत भव्य स्वरूप में सामने है। पार्षदों के लिए आधुनिक सदन हॉल तैयार हुआ है और नगर निगम 400 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर रहा है। कहीं जोनल पार्क विकसित हो रहे हैं तो कहीं शिवालिक पार्क की नई श्रृंखला तैयार की जा रही है। उन्होंने शिवालिक पार्क को “वेस्ट टू वेल्थ” की सफल मिसाल बताते हुए कहा कि 400 टन वेस्ट मटेरियल से द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां तैयार की गईं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हैं। ऐसे प्रयास प्रयागराज को नई पहचान देते हैं। हर वार्ड और मोहल्ले तक पहुंच रहा विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले अक्षय वट के दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध नहीं थे, लेकिन वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री की प्रेरणा से अक्षय वट को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। अब श्रद्धालु वहां दर्शन कर सकते हैं और सरस्वती कूप का जल ग्रहण कर सकते हैं। महर्षि भारद्वाज का आश्रम वर्षों तक अतिक्रमण का शिकार रहा, लेकिन अब उसे मुक्त कराकर भव्य स्वरूप दिया गया है। उन्होंने महर्षि भारद्वाज को दुनिया का पहला कुलपति बताते हुए कहा कि प्रयागराज अब अपनी सांस्कृतिक गरिमा पुनः प्राप्त कर रहा है। आज प्रयागराज की सड़कें चौड़ी और स्मार्ट हो चुकी हैं तथा शहर ने स्मार्ट सिटी के रूप में विकास की नई यात्रा शुरू की है। नगर निगम और जनप्रतिनिधि हर वार्ड और मोहल्ले तक विकास पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। सुरक्षा, सुशासन और समृद्धि के लक्ष्य के साथ कार्य मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा दशहरा, ज्येष्ठ मास और मंगलवार का यह संयोग विशेष पुण्य का अवसर है। नौ वर्ष पहले प्रयागराज में भय, आतंक, अराजकता, माफियागिरी और गुंडागर्दी का माहौल था। सार्वजनिक भूमि पर कब्जे होते थे और विकास पूरी तरह ठप था। लेकिन आज प्रयागराज पूरी तरह माफिया और गुंडागर्दी से मुक्त हो चुका है। अब बेटियां, व्यापारी और आम नागरिक किसी भी समय निडर होकर निकल सकते हैं। यदि कोई बेटियों से छेड़छाड़ या अपराध का दुस्साहस करेगा तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। डबल इंजन सरकार सुरक्षा, सुशासन और समृद्धि के लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रयागराज वासियों का विशेष आभार जताते हुए कहा कि महाकुंभ के 45 दिनों तक यातायात और आवागमन में भारी असुविधा के बावजूद किसी ने विरोध या असंतोष नहीं जताया। पूरा शहर ऐसा लग रहा था मानो अपने घर का आयोजन मना रहा हो। किसी भी बड़े आयोजन की सफलता तब संभव होती है, जब जनता उसे अपना कार्यक्रम मानकर सहयोग करे। कई बड़े प्रोजेक्ट्स का होगा शुभारंभ मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के आशीर्वाद और समर्थन के कारण ही सरकार रोजगार, किसान कल्याण, गरीब कल्याण और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतार पा रही है। आज गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से प्रयागराज से दिल्ली मात्र सात घंटे में पहुंचा जा सकता है। विश्वस्तरीय तकनीक से बने इस एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी ऐसा महसूस होता है मानो वाहन स्थिर खड़ा हो। हर्षवर्धन जी के विधानसभा क्षेत्र में गंगा नदी पर लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से फोर-लेन पुल का निर्माण कराया जा रहा है और फाफामऊ पुल का कार्य भी जल्द पूरा होगा। इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण एवं शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी जी के कर-कमलों से कराने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में अभी कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य होना बाकी है और सरकार उन्हें आगे बढ़ाएगी। उन्होंने भगवान प्रयागराज, अक्षय वट, मां गंगा और भगवान वेणी माधव का स्मरण करते हुए कहा कि प्रयागराज की विकास यात्रा बिना रुके, बिना डिगे और बिना झुके निरंतर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विकास के लिए आने वाले हर प्रस्ताव पर प्रदेश सरकार पूरा सहयोग करेगी। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री एवं प्रयागराज के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी,  विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, दीपक पटेल, पीयूष रंजन निषाद, गुरु प्रसाद मौर्य, वाचस्पति, राजमणि कोल, विधान परिषद सदस्य सुरेंद्र चौधरी, विधान परिषद … Read more

पंजाब पुलिस की बड़ी कामयाबी, विदेश भागने से पहले पकड़े गए 2 कुख्यात गैंगस्टर

मुंबई/चंडीगढ़. पंजाब पुलिस को आज एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मुंबई पुलिस ने एयरपोर्ट से देश छोड़कर भाग रहे 2 वांटेड खतरनाक गैंगस्टरों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों गैंगस्टरों की पहचान जसवंत सिंह उर्फ जस्सा और करन कीड़ा के रूप में हुई है। दोनों गैंगस्टरों पर फिरौती, डराने-धमकाने, हत्या सहित अन्य कई संगीन मामले दर्ज हैं। देश छोड़ने की फिराक में थे आरोपी जानकारी के अनुसार दोनों गैंगस्टर देश छोड़कर भागने की फिराक में थे। जैसे ही पुलिस को खुफिया सूचना मिली तो सुरक्षा एजेंसियों ने मुंबई पुलिस के सहयोग से मुंबई एयरपोर्ट से दोनों गैंगस्टरों को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी नकली दस्तावेजों और अन्य तरीकों से देश छोड़ने की फिराक में थे लेकिन मौके पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जाल बिछाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों पर दर्ज हैं कई संगीन मामले जानकारी के अनुसार आरोपी करन कीड़ा एक अकाली पार्षद की हत्या के मामले में नामजद था। उक्त अकाली पार्षद की दिनदहाड़े हत्या की गई थी। जांच दौरान करन कीड़ा का नाम भी सामने आया था। तब से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। इसके अलावा पकड़े गया गैंगस्टर जसवंत सिंह उर्फ जस्सा बंबीहा गैंग से जुड़ा हुआ है। उस पर फिरौती मांगने, हत्या के प्रयास सहित अन्य कई संगीन मामले दर्ज हैं। पंजाब पुलिस को लंबे समय से दोनों गैंगस्टरों की तलाश थी। आरोपियों से बड़े खुलासे होने की संभावना जानकारी के अनुसार पंजाब पुलिस की एक टीम जल्द ही आरोपियों की कस्टडी लेने के लिए रवाना होने वाली है। इसके बाद आरोपियों को मुंबई कोर्ट में पेश कर उनका रिमांड हासिल किया जाएगा। पंजाब पुलिस ने उम्मीद जताई है कि आरोपियों से रिमांड दौरान पूछताछ में कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: इस्तीफे के बाद भी पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता

 चंडीगढ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पारिवारिक मजबूरियों के चलते नौकरी से इस्तीफा देने वाले कर्मचारी को केवल तकनीकी आधार पर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने हरियाणा में कार्यरत एक स्टेनो टाइपिस्ट को 13 वर्ष की सेवा के अनुपात में पेंशन, डीसीआरजी (डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी) तथा अन्य रिटायरल लाभ देने के आदेश जारी किए हैं। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता पंकज मेहता ने 13 वर्षों तक बेदाग सेवा दी और उसके खिलाफ कभी कोई विभागीय कार्रवाई शुरू नहीं हुई। ऐसे में अदालत “हाइपर-टेक्निकल” यानी अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाने की बजाय व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए बाध्य है। मामले के अनुसार पंकज मेहता को सितंबर 1999 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा नियमित पद पर स्टेनो टाइपिस्ट नियुक्त किया गया था। वर्ष 2012 में गंभीर पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्होंने एक माह का वेतन जमा करवाते हुए इस्तीफा दे दिया, जिसे तीन अक्टूबर 2012 को स्वीकार कर लिया गया। हाई कोर्ट ने खारिज किया दावा लगभग छह वर्ष बाद अगस्त 2018 में उन्होंने अनुपातिक पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभों की मांग करते हुए आवेदन दिया, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने पंजाब सिविल सेवा नियमों तथा हरियाणा सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2016 का हवाला देते हुए उनका दावा खारिज कर दिया। इसके बाद पंकज मेहता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि संबंधित नियम उन कर्मचारियों पर लागू होते हैं जो बर्खास्तगी या अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए इस्तीफा देते हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल पारिवारिक मजबूरियों के चलते नौकरी छोड़ी थी और उनका पूरा सेवा रिकार्ड निष्कलंक रहा है। ऐसे में 13 वर्ष की सेवा के बाद उन्हें ग्रेच्युटी और अनुपातिक पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। वहीं, जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय की ओर से तर्क दिया गया कि संबंधित नियम केवल सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर लागू होते हैं, इस्तीफा देने वालों पर नहीं। उन्होंने कहा कि तकनीकी इस्तीफा न होने के कारण सेवा स्वतः समाप्त मानी जाएगी और पेंशन का अधिकार नहीं बनता। अदालत ने दोनों पक्षों को सुना दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने जुलाई 2021 के उस आदेश को अस्थिर और कानूनन टिकाऊ नहीं माना, जिसके तहत पंकज मेहता का दावा खारिज किया गया था। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को चार महीने के भीतर याचिकाकर्ता को सेवा अवधि के अनुपात में पेंशन, डीसीआरजी और अन्य लाभ जारी करने के निर्देश दिए। हालांकि अदालत ने यह कहते हुए ब्याज देने से इनकार कर दिया कि याचिकाकर्ता ने इस्तीफे के लगभग छह वर्ष बाद अपने लाभों के लिए दावा किया था।