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‘सैफई से आती थी नौकरी की सूची’, भूपेंद्र चौधरी ने सपा पर बोला हमला, बोले- परिवार और जाति से आगे नहीं बढ़ रहा एजेंडा

लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भाजपा नेताओं ने सपा और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने समाजवादी पार्टी को युवा विरोधी पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान नौकरियों में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताएं आम थीं। उन्होंने कहा कि उस दौर में निकलने वाली सरकारी नौकरियों की सूची सैफई से आती थी और एक परिवार व एक बिरादरी तक सीमित रहती थी। ‘सैफई से आती थी नौकरी की सूची’ भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा युवाओं के विरोध में रही है। उनके मुताबिक सपा सरकार में जमकर पेपर लीक होते थे और परीक्षाएं ठेके पर कराई जाती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी नौकरी निकलती थी, वह केवल एक परिवार और एक बिरादरी के लिए होती थी और उसकी सूची सैफई से आती थी। ‘हारते हैं तो ईवीएम को दोष देते हैं’ भूपेंद्र चौधरी ने ईवीएम के मुद्दे पर भी सपा को घेरा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी जब चुनाव जीतती है तो ईवीएम पर सवाल नहीं उठाती, लेकिन चुनाव हारने के बाद उसी ईवीएम को दोष देने लगती है और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। ‘परिवार और जाति से आगे नहीं बढ़ता सपा का एजेंडा’ अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा जाति की राजनीति की है। सर्व समाज को साथ लेकर चलने की बात उसके एजेंडे में कभी नहीं रही। उन्होंने कहा कि जब सपा विपक्ष में होती है तो सर्व समाज की बात करती है, लेकिन सत्ता में आते ही उसका एजेंडा परिवार और जाति तक सिमट जाता है। भूपेंद्र चौधरी ने AI वीडियो को लेकर भी सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह के वीडियो जारी करना प्रदेश की 25 करोड़ जनता का अपमान है। उन्होंने कहा कि जनता ने योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया है और AI के जरिए उसकी तस्वीर बदलकर पेश करना जनता के जनादेश का अपमान है। ‘अखिलेश को सोते हुए सरकार बनती नजर आ रही’ भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव 2027 में समाजवादी पार्टी और उसके नेता को सोते हुए सरकार बनती नजर आ रही है। अखिलेश यादव के ‘जेन जी’ वाले बयान पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उनके ‘जेन जी’ का मतलब जनता ने देखा है। दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के हर जिले में एक-एक माफिया पैदा करने का काम किया और उन्हीं के संरक्षण में सरकार चलती थी। उन्होंने कहा कि अखिलेश सरकार के दौरान जितनी वैकेंसी निकलीं, उनमें से एक भी नियुक्ति वह नहीं कर पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में युवाओं के हाथ में कट्टा देने और वसूली करने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि ‘जेन जी’ पहले भी भाजपा के साथ था, आज भी भाजपा के साथ है और आगे भी भाजपा के साथ ही रहेगा। PDA मतलब- 'पराया धन अपना’ दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के सत्ता से बाहर होते ही उनकी ‘पर्ची और खर्ची’ बंद हो गई। इसी वजह से आज सपा PDA की राजनीति कर रही है। उन्होंने अखिलेश यादव के पुराने बयान का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने चौरसिया, शाक्य और वर्मा समाज के लोगों को बोलने से रोकने की बात कही थी। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव ने पहले भी इन समाजों का अपमान किया और आज भी कर रहे हैं। PDA को लेकर उन्होंने तंज कसा कि अखिलेश यादव के लिए PDA का मतलब ‘पराया धन अपना’ है। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, समाजवादी पार्टी के लोगों का मानसिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सपा की पूरी राजनीति X, प्रेस और अब पोस्टर तक सीमित होकर रह गई है। ‘अखिलेश और सपा फ्रस्टेशन में’ उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहसिन रजा ने भी सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के लोग फ्रस्टेशन में हैं, क्योंकि पूरा प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम से सहमत है। मोहसिन रजा ने कहा कि मोदी और योगी सरकारों ने कानून-व्यवस्था पर काम कर लोगों को सुरक्षा देने का काम किया है और यही वजह है कि विपक्ष परेशान है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का यह अंतिम चुनाव है और 2027 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी। ‘अखिलेश खुद कार्यक्रम जारी करते हैं और खुद कैंसिल करते हैं’ कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने अखिलेश यादव के रद्द हुए दौरों को लेकर सपा के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पहले अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा रद्द हुआ और फिर बुलंदशहर का दौरा भी रद्द हो गया। इसके बाद सरकार पर परमिशन नहीं देने का आरोप लगाया गया। अनिल कुमार ने कहा कि ये बातें निराधार हैं। उनके मुताबिक अखिलेश यादव खुद कार्यक्रम जारी करते हैं और खुद ही उसे कैंसल कर देते हैं। अनिल कुमार ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में देश में बड़ा बदलाव हुआ है। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। उन्होंने कहा कि विपक्ष हर काम को नकारने की आदत बना चुका है।

मानसून में बारिश का असमान वितरण, खेती पर असर; बिहार के 14 जिलों में बाढ़ का संकट

 पटना  मानसून की विदाई का समय करीब आ गया है, लेकिन बिहार में अबकी बार बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है। स्थिति यह है कि मानसून सीजन समाप्त होने में कुछ ही सप्ताह शेष हैं, इसके बावजूद राज्य के किसी भी जिले में सामान्य के मुकाबले 60 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश दर्ज नहीं हो सकी है। कई इलाकों में कम बारिश के कारण खेती प्रभावित हुई, वहीं दूसरी ओर नदियों में नेपाल और पड़ोसी राज्यों से आए पानी के कारण 14 जिलों में बाढ़ की विकट स्थिति बनी हुई है। यानी बारिश की कमी और बाढ़, दोनों तस्वीरें एक साथ देखने को मिल रही है। ऐसे तमाम झंझावात के बीच किसानों ने कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 99 प्रतिशत धान की रोपनी कर दी। महत्वपूर्ण यह है कि 26 जिलों में सौ प्रतिशत या उससे अधिक रोपनी हुई है। पांच जिलों में किसानों ने सौ प्रतिशत से अधिक धान लगाया है। ऐसे जिलों में जहानाबाद, गोपालगंज, मूंगेर, शेखपुरा एवं किशनगंज जिले हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून में बिहार में बारिश का वितरण लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा। कई दौर में अच्छी बारिश हुई, लेकिन उसका क्षेत्रवार फैलाव समान नहीं रहा। कुछ जिलों में एक-दो दिनों में भारी बारिश हुई, जबकि लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने से कुल मौसमी आंकड़ा सामान्य से नीचे बना रहा। किसानों के लिए बारिश का असमान वितरण चिंता मौसम की इस असमानता का सीधा असर खरीफ (शारदीय) फसलों पर पड़ा है। जिन क्षेत्रों में समय पर पर्याप्त बारिश नहीं हुई, वहां धान समेत अन्य फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। वहीं, बाद में बाढ़ ने कई इलाकों में खेतों में पानी जमा कर दिया। इससे फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है। सितंबर की बारिश पर टिकी उम्मीद मानसून की विदाई से पहले सितंबर की बारिश किसानों और जलस्रोतों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मौसम विभाग ने बिहार समेत कई राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश जताई है। ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश राज्य के मौसमी आंकड़े को कुछ सुधार सकती है, लेकिन मानसून के अंतिम चरण तक भी यदि व्यापक बारिश नहीं हुई तो इस साल का मानसून बिहार के लिए कम बारिश, असमान वितरण और बाढ़ की दोहरी मार के रूप में दर्ज हो सकता है।

राशन कार्डधारकों के लिए जरूरी खबर: 180 दिन में ई-केवाईसी नहीं कराई तो नाम सूची से हटेगा

सुनेल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) के लाभार्थियों को लेकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। अब एनएफएसए सूची में किसी लाभार्थी का नाम जुड़ने के बाद 90 दिन के भीतर ई-केवाईसी करवाना अनिवार्य होगा। निर्धारित अवधि में ई-केवाईसी नहीं कराने पर 91वें दिन लाभार्थी का नाम एनएफएसए सूची से स्वतः अस्थायी रूप से निलंबित हो जाएगा। इसके बाद भी निर्धारित अवधि में ई-केवाईसी नहीं कराने पर नाम स्थायी रूप से सूची से हटा दिया जाएगा। विभाग ने यह व्यवस्था लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करने और अपात्र नामों को सूची से हटाने के उद्देश्य से लागू की है। 180 दिन में ई-केवाईसी नहीं तो स्थायी रूप से बाहर नई व्यवस्था के तहत नाम जुड़ने के बाद पहले 90 दिन ई-केवाईसी के लिए निर्धारित हैं। इस अवधि में केवाईसी नहीं कराने पर नाम अस्थायी रूप से निलंबित होगा। इसके बाद अगले 90 दिन में भी ई-केवाईसी नहीं कराने पर लाभार्थी का नाम एनएफएसए सूची से स्वतः स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा। खास बात यह है कि यह प्रक्रिया परिवार के बजाय प्रत्येक लाभार्थी के स्तर पर लागू होगी। अपात्र परिवारों पर भी पहले निलंबन, फिर स्थायी कार्रवाई एनएफएसए सूची में शामिल कोई परिवार अपात्र पाया जाता है तो संबंधित जिला रसद अधिकारी उसे विभागीय पोर्टल पर अस्थायी रूप से निलंबित कर सकेंगे। निलंबन के बाद 90 दिन की अवधि में जांच के दौरान परिवार पात्र पाया जाता है तो उसे दोबारा सक्रिय किया जा सकेगा। वहीं 90 दिन की अवधि पूरी होने के बाद अपात्र परिवार का नाम स्वतः स्थायी रूप से सूची से हटा दिया जाएगा और उसे दोबारा शामिल नहीं किया जा सकेगा। निलंबित नाम सूची में दिखेगा, लेकिन राशन नहीं मिलेगा अस्थायी रूप से निलंबित लाभार्थी का नाम राशन डीलर की एनएफएसए सूची में दिखाई देता रहेगा, लेकिन उसे खाद्यान्न का वितरण नहीं किया जा सकेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अस्थायी निलंबन और स्थायी रूप से नाम हटाने की पूरी प्रक्रिया स्वचालित होगी और इसमें किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा। अतिरिक्त खाद्य आयुक्त पूनम प्रसाद सागर के आदेश के अनुसार यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। छह माह से राशन नहीं उठाया तो भी होगी कार्रवाई भारत सरकार की 22 जुलाई 2025 की अधिसूचना की पालना में छह माह से खाद्यान्न का उठाव नहीं करने वाले लाभार्थी परिवार भी इस व्यवस्था के दायरे में रहेंगे। छह माह की अवधि पूरी होने के बाद ऐसे परिवारों का नाम स्वतः अस्थायी रूप से निलंबित होगा और संदेश के जरिए सूचना दी जाएगी। इसके बाद 90 दिनों में जिला रसद अधिकारी जांच कर सकते हैं। परिवार स्वयं भी सूची में फिर से सक्रिय होने के लिए आवेदन कर सकता है। लेकिन 90 दिन की अवधि पूरी होने के बाद नाम स्वतः स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा। ई-केवाईसी कराई तो 24 घंटे में फिर सक्रिय होगा नाम प्रवर्तन अधिकारी गोविन्द देथा ने बताया कि विभाग के आदेश के अनुसार 90 दिन की अवधि पूरी होने के बाद अस्थायी रूप से निलंबित लाभार्थी के पास ई-केवाईसी करवाने का एक और अवसर रहेगा। यदि वह आगामी 90 दिनों के भीतर राशन डीलर के पास जाकर ई-केवाईसी पूरी करवा लेता है तो 24 घंटे के भीतर उसका नाम एनएफएसए सूची में स्वतः फिर सक्रिय हो जाएगा। नाम अस्थायी रूप से निलोंबत होने और दोबारा सक्रिय होने की सूचना दी जाएगी।  

छत्तीसगढ़ में संविदा भर्ती के खिलाफ नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन, नियुक्तियों का जताया विरोध

रायपुर. पदोन्नति के पदों पर की गई संविदा नियुक्तियों को निरस्त करने और नर्सिंग संवर्ग की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ ने तीन दिवसीय सांकेतिक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शन के पहले दिन गुरुवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर परिसर में संघ के पदाधिकारियों और नर्सिंग कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। संघ का कहना है कि लंबे समय से नर्सिंग संवर्ग की कई मांगें लंबित हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से इनके निराकरण की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। इन्हीं मांगों को लेकर तीन दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन के जरिए शासन का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। पदोन्नति के पदों पर संविदा नियुक्ति का विरोध एसोसिएशन की प्रमुख मांग नर्सिंग डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक के पदों पर की संविदा नियुक्तियों को निरस्त करना है। संघ ने मांग की है कि पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग की योग्यता रखने वाले नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों को वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नति दी जाए। संघ ने बताया कि नर्सिंग डेमोंस्ट्रेटर के 22 और सहायक प्राध्यापक के 18 पदों पर सीधी भर्ती के आदेश स्वीकृत होने के बावजूद अब तक विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। एसोसिएशन ने इन पदों पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के पात्र नर्सिंग कर्मचारियों को पदोन्नति का अवसर देने की मांग की है। अलाउंस और वेतन बढ़ाने की मांग नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के नर्सिंग संवर्ग के ग्रेड-पे और वेतनमान में वृद्धि से संबंधित प्रस्ताव को शासन स्तर पर भेजकर जल्द स्वीकृति देने की मांग की है। इसके अलावा नर्सिंग ऑफिसर और सीनियर नर्सिंग ऑफिसर पदनाम से संबंधित घोषणा के अनुरूप आदेश जारी करने की मांग भी रखी गई है। संघ ने नर्सिंग अलाउंस 7,200 रुपये और वॉशिंग अलाउंस 1,800 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की है। वहीं संविदा और कलेक्टर दर पर कार्यरत स्टाफ नर्सों के लिए न्यूनतम 40 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन निर्धारित करने की मांग भी शामिल है। लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने की मांग एसोसिएशन ने नर्सिंग सिस्टर, सहायक नर्सिंग अधीक्षक, उप नर्सिंग अधीक्षक, डेमोंस्ट्रेटर और सहायक प्राध्यापक के पदों पर लंबित पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है। साथ ही स्टाफ नर्सों के रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करने और पहले से कार्यरत संविदा एवं कलेक्टर दर के स्टाफ नर्सों को नियमित पदों पर प्राथमिकता देने की मांग की गई है। इसके अलावा समयमान वेतनमान से संबंधित आदेश जारी करने की मांग भी संघ ने रखी है। 1500 से बढ़ाकर 15 हजार रुपये दें स्टाइपेंड नर्सिंग छात्र-छात्राओं के स्टाइपेंड को लेकर भी एसोसिएशन ने सरकार से बड़ा बदलाव करने की मांग की है। संघ के मुताबिक वर्ष 1998-99 से नर्सिंग विद्यार्थियों को 1,500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जिसमें पिछले 27 वर्षों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। एसोसिएशन ने इसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है। प्रदर्शन के पहले दिन चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमित नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों के साथ संविदा और डेली वेजेस पर कार्यरत स्टाफ नर्सों ने भी हिस्सा लिया। संघ ने कहा कि तीन दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन के माध्यम से शासन तक अपनी मांगें पहुंचाई जा रही हैं और लंबित मुद्दों के शीघ्र निराकरण की उम्मीद है।

डूंगरपुर में शराब तस्करी का बड़ा खुलासा, वाशिंग मशीनों के पीछे छिपे मिले 395 कार्टन

डूंगरपुर राजस्थान-गुजरात सीमा पर पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 50 लाख रुपए की अंग्रेजी शराब बरामद की है। तस्कर शराब को वाशिंग मशीनों की आड़ में कंटेनर के जरिए गुजरात ले जाने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने रतनपुर चौकी पर नाकाबंदी के दौरान कंटेनर को जब्त करते हुए चालक को गिरफ्तार कर लिया। कंटेनर से अंग्रेजी शराब के कुल 395 कार्टन बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में बिछीवाड़ा थाना पुलिस ने ऑपरेशन स्वच्छता के तहत की। नगर निकाय चुनावों को देखते हुए जिले में पुलिस की ओर से संदिग्ध वाहनों और अवैध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है। इसी दौरान पुलिस को रतनपुर बॉर्डर के रास्ते अवैध शराब की खेप गुजरने की सूचना मिली थी। मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई बिछीवाड़ा थानाधिकारी देवेंद्र सिंह देवल के अनुसार, मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर रतनपुर चौकी पर नाकाबंदी की गई थी। इसी दौरान उदयपुर की तरफ से गुजरात की ओर जा रहे एक बंद बॉडी कंटेनर ट्रक को पुलिस ने रुकवाकर उसकी जांच की। पूछताछ में चालक ने अपनी पहचान भीलवाड़ा निवासी त्रिलोक सिंह के रूप में बताई। वाशिंग मशीनों के पीछे रखी थी शराब चालक ने पुलिस को बताया कि कंटेनर में वाशिंग मशीनें भरी हुई हैं। हालांकि, पुलिस द्वारा सामान से संबंधित बिल और बिल्टी मांगे जाने पर वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इस पर पुलिस को संदेह हुआ और कंटेनर की गहन तलाशी ली गई। 395 कार्टन शराब पकड़ी गई तलाशी के दौरान कंटेनर में वाशिंग मशीनों के पीछे और उनकी आड़ में शराब के कार्टन छिपाकर रखे हुए मिले। पुलिस ने कंटेनर से सभी कार्टन बाहर निकलवाकर उनकी गिनती कराई। जांच में कुल 395 कार्टन अंग्रेजी शराब बरामद हुई। पुलिस के मुताबिक बरामद शराब की बाजार कीमत करीब 50 लाख रुपए आंकी गई है। पुलिस जांच में जुटी पुलिस ने शराब की खेप और कंटेनर को जब्त कर लिया है। साथ ही चालक त्रिलोक सिंह को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे गुजरात में किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। पुलिस मामले में तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर शराब तस्करी से जुड़े कनेक्शन का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

अब स्कूल से गायब हुए तो तुरंत घर पहुंचेगा मैसेज, चंडीगढ़ के 111 सरकारी स्कूलों में नई व्यवस्था

चडीगढ़. घर से निकलकर स्कूल न जाने के बजाय पार्कों या मार्केट्स में घूमना अब आसान नहीं होगा। स्कूल बंक करते ही तुरंत अभिभावकों के पास मैसेज पहुंच जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की अटेंडेंस को स्कूल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एसएमआईएस) से जोड़ दिया है। यह व्यवस्था 111 सरकारी स्कूलों के करीब 1.70 लाख छात्रों के लिए लागू की गई है। अब कोई विद्यार्थी सुबह गैरहाजिर पाया जाता है तो माता-पिता के मोबाइल नंबर पर टेक्स्ट मैसेज भेजा जाएगा। स्कूल शुरू होने के करीब एक घंटे के अंदर अभिभावकों को पता चल जाएगा कि उनका बच्चा स्कूल पहुंचा है या नहीं। स्कूल शिक्षा विभाग के डायरेक्टर नितिश सिंगला का कहना है कि नई व्यवस्था से स्कूल बंक करने वाले विद्यार्थियों पर नजर रखने के साथ-साथ माता-पिता और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी। कई बार विद्यार्थी स्कूल पहुंचने से पहले ही पार्कों या मार्केट में चले जाते हैं। कुछ स्कूल के समय बाहर बैठकर मस्ती करते हैं और क्लास छोड़ देते हैं। माता-पिता को अकसर यह पता नहीं चलता था कि उनका बच्चा स्कूल पहुंचा है या नहीं। स्कूल की ओर से भी गैरहाजिर छात्र की जानकारी तुरंत माता-पिता तक नहीं पहुंच पाती थी। अब नई व्यवस्था के जरिए इस समस्या को दूर करने की कोशिश की गई है। स्कूल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम को छात्रों की अटेंडेंस से जोड़ा गया है। दाखिले के समय स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज माता-पिता के मोबाइल नंबर पर टेक्स्ट मैसेज भेजकर बताया जाएगा कि छात्र स्कूल में मौजूद नहीं है। इससे छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा। नई व्यवस्था के तहत छात्रों को सुबह की प्रार्थना सभा के बाद अटेंडेंस के समय क्लास में मौजूद रहना होगा। छात्र स्कूल समय के दौरान बाहर जाना चाहता है तो माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। बिना अनुमति गेट पार नहीं करने दिया जाएगा। इसका मकसद स्कूल के समय छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।  इस तरह की अटेंडेंस व्यवस्था ज्यादातर निजी स्कूलों में पहले से लागू थी। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने इसे सरकारी स्कूलों में भी शुरू कर दिया है। 

पूर्व डीजीपी बृजलाल ने सपा अध्यक्ष पर लगाया तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप

अखिलेश रोज गढ़ते हैं फर्जी नैरेटिव, बंधुराष्ट्र के लिए राष्ट्र प्रथम जरूरी- बृजलाल पूर्व डीजीपी ने सपा अध्यक्ष पर लगाया तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप आतंकियों के मुकदमें वापस लेने और मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर साधा निशाना मुलायम सिंह यादव सरकार में मेरठ पीएसी कैंप हमलों से जुड़े मुकदमे वापस लेने का भी लगाया आरोप बृजलाल बोले- पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी, जनता तुष्टिकरण की राजनीति को नकारेगी लखनऊ राज्यसभा सांसद एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव रोज कोई न कोई फर्जी नैरेटिव गढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव सत्ता में आने पर बंधुराष्ट्र बनाने की बात कर रहे हैं, लेकिन बंधुराष्ट्र के निर्माण के लिए पहली आवश्यकता राष्ट्र प्रथम की भावना है। पार्टी हित और निजी हित बाद में होना चाहिए। बृजलाल ने आरोप लगाया कि सपा की अब तक की राजनीति विशुद्ध तुष्टिकरण पर आधारित रही है। आतंकवाद के मुद्दे पर सपा को घेरा बृजलाल ने कहा कि भारत में इस्लामिक आतंकवाद का अंतिम लक्ष्य देश को गजवा-ए-हिंद के जरिए इस्लामिक राष्ट्र बनाना है। आतंकवादी देश और समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं, इसलिए सभी को मिलकर उनके कुत्सित इरादों को विफल करना चाहिए। वोट बैंक की राजनीति के लिए अखिलेश यादव और उनकी पार्टी आतंकियों के साथ खड़ी नजर आती रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद वर्ष 2013 में अखिलेश यादव ने आतंकियों से जुड़े 14 चार्जशीट वापस लेने का आदेश दिया था। इनमें रामपुर सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर हमला, न्यायालयों में हुए बम धमाके और अन्य आतंकी घटनाओं से जुड़े मामले शामिल थे। लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या ब्लास्ट का भी किया जिक्र पूर्व डीजीपी ने कहा कि 23 नवंबर 2007 को लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या की अदालतों में आतंकियों ने धमाके किए थे, जिनमें करीब डेढ़ दर्जन वकील और अन्य लोग मारे गए। इसी समूह से जुड़े आतंकियों पर 22 मई 2007 के गोलघर ब्लास्ट का भी आरोप था। इन मामलों में गिरफ्तार आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसे अखिलेश सरकार ने वापस लेने का प्रयास किया। बृजलाल ने कचहरी ब्लास्ट के मामलों में गिरफ्तार खालिद मुजाहिद और हकीम तारिक कासमी का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट भी वापस लेने की कोशिश की गई। इसके बाद अखिलेश सरकार ने उनके समेत तत्कालीन सेवानिवृत्त डीजीपी विक्रम सिंह, दो एसपी, डीएसपी सहित 38 पुलिसकर्मियों पर हत्या की साजिश का मुकदमा दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि खालिद और हकीम की बाराबंकी में हुई गिरफ्तारी से जुड़े मुकदमे को भी वापस लेने का प्रयास किया गया, लेकिन न्यायालय के हस्तक्षेप से ऐसा नहीं हो सका और हकीम तारिक कासमी को आजीवन कारावास की सजा हुई। केवल अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि उनके पिता मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में भी आतंकियों से जुड़े कई मुकदमे वापस लिए गए थे।  मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर भी अखिलेश पर हमला बृजलाल ने अखिलेश यादव के भाईचारे के दावे पर भी सवाल उठाए। 2013 के कवाल कांड और उसके बाद हुए मुजफ्फरनगर दंगे का जिक्र करते हुए कहा कि 26 अगस्त 2013 को मलिकपुरा, शामली निवासी सचिन और गौरव कवाल गांव गए थे, जहां शाहनवाज कुरैशी से विवाद हुआ। अगले दिन दोबारा हुए विवाद में शाहनवाज की चाकू लगने से मौत हुई और इसके बाद सचिन तथा गौरव की भीड़ ने हत्या कर दी। बृजलाल ने आरोप लगाया कि अपराधियों को पकड़ने के बाद तत्कालीन मंत्री आजम खान ने उन्हें छुड़वा दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद मामला बढ़ता गया और मुजफ्फरनगर में साम्प्रदायिक दंगा हुआ, जिसमें 60 लोगों की मौत हुई तथा करीब 50 हजार लोगों को राहत शिविरों में रहना पड़ा। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी केवल मुस्लिम राहत शिविरों में गए, जबकि हिंदू राहत शिविरों में नहीं गए। अखिलेश यादव पर भी पीड़ित हिंदुओं की सुध नहीं लेने का आरोप लगाया और कहा कि उस दौरान अखिलेश सैफई महोत्सव में व्यस्त रहे। सिर्फ अपने सरकारी आवास पर मुस्लिम नेताओं को स्टेट प्लेन से बुलाकर बातचीत की, जबकि पीड़ित हिंदुओं की कोई सुध नहीं ली गई। कब्रिस्तान, बेटियों और मदरसों की योजनाओं को लेकर निशाना बृजलाल ने कहा कि अखिलेश भाजपा पर लोगों को बांटने का आरोप लगाते हैं, लेकिन उनके शासनकाल के कामकाज में हिंदुओं के साथ भेदभाव दिखाई देता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद मुस्लिम कब्रिस्तानों की बाउंड्री के लिए अलग बजट आवंटित किया गया, जबकि हिंदू श्मशान घाटों के लिए ऐसा प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने हमारी बेटी, उसका कल योजना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि 10वीं पास मुस्लिम बेटियों को उच्च शिक्षा या विवाह के लिए एकमुश्त 30 हजार रुपये दिए गए, जबकि हिंदू बेटियों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं थी। पीडीए की बात करने वाले अखिलेश को पिछड़ों और दलितों की बेटियों की चिंता नहीं रही। बृजलाल ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मुस्लिमों को उर्दू अनुवादक बनाकर लाभ पहुंचाया गया, लेकिन संस्कृत के उत्थान के लिए ऐसा प्रयास नहीं किया गया। मदरसों के आधुनिकीकरण के नाम पर धन खर्च किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अन्य स्कूलों की अनदेखी हुई। उन्होंने योगी सरकार की कायाकल्प योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत स्कूलों के भवनों का कायाकल्प किया गया और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। सरकारी योजनाओं में 20 प्रतिशत वरीयता का आरोप बृजलाल ने कहा अखिलेश सरकार में सरकारी योजनाओं में मुसलमानों को 20 प्रतिशत वरीयता दी गई, जबकि दलितों और पिछड़ों की चिंता नहीं की गई। लखनऊ और गाजियाबाद में हज हाउस बनाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए काशी, मथुरा, अयोध्या, विंध्याचल और चित्रकूट समेत बौद्ध तीर्थों की अनदेखी की गई। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अखिलेश यादव रोजाना नए-नए फर्जी नैरेटिव गढ़कर प्रदेशवासियों को भ्रमित कर रहे हैं। अखिलेश का लक्ष्य तुष्टिकरण के जरिए परिवार की सरकार बनाना है। उन्होंने इसे पीडीए यानी परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी करार देते हुए कहा कि परिवारवादी सरकार अब उत्तर प्रदेश में नहीं बनेगी।

अब एक मंच पर मिलेगी पढ़ाई की पूरी डिजिटल सामग्री, PM e-VIDYA से छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

डिजिटल शिक्षा को घर-घर पहुंचा रही योगी सरकार, पीएम ई-विद्या पर एक मंच में मिलेंगे पढ़ाई के जरूरी संसाधन – एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़े आवश्यक संसाधन निःशुल्क उपलब्ध – डिजिटल लर्निंग को अधिक समावेशी, सुलभ और प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल – एंड्रॉयड और आईओएस दोनों उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है पीएम ई-विद्या ऐप – एससीईआरटी के माध्यम से डिजिटल संसाधनों को विद्यार्थियों और शिक्षकों तक पहुंचाने पर जोर लखनऊ  योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल को लगातार विस्तार दे रही है। सरकार का जोर है कि डिजिटल संसाधन विद्यार्थियों की पहुंच से दूर रहने वाली सुविधा न होकर सीखने का सहज, सुलभ और प्रभावी माध्यम बनें। इसी दिशा में पीएम ई-विद्या डिजिटल प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों और शिक्षकों को पढ़ाई से जुड़े आवश्यक संसाधन एक ही मंच पर निःशुल्क उपलब्ध करा रहा है। एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान के मुताबिक, पीएम ई-विद्या के माध्यम से डिजिटल लर्निंग को व्यापक स्तर पर विद्यार्थियों तक पहुंचाने और उपलब्ध शैक्षिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल संसाधनों की आसान उपलब्धता विद्यार्थियों के सीखने के अवसरों को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। एक ही मंच पर सामग्री उपलब्ध होने से डिजिटल शिक्षा को अधिक समावेशी, सुलभ और प्रभावशाली बनाने में मदद मिलेगी। सोशल मीडिया के माध्यम से भी पीएम ई-विद्या ऐप के बारे में जानकारी साझा की जा रही है, जिससे विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक इससे जुड़ सकें।  ज्ञात हो कि योगी सरकार की डिजिटल शिक्षा नीति का लक्ष्य तकनीक को शिक्षा का विकल्प बनाने के साथ-साथ उसे सीखने की प्रक्रिया का प्रभावी सहयोगी बनाना है। पीएम ई-विद्या इसी सोच को व्यापक डिजिटल पहुंच में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एक मंच पर पढ़ाई के जरूरी संसाधन पीएम ई-विद्या को विद्यार्थियों के लिए डिजिटल शिक्षा के एक उपयोगी मंच के रूप में देखा जा रहा है। इसमें पढ़ाई से जुड़े आवश्यक डिजिटल संसाधनों तक एक ही स्थान से पहुंच बनाने की सुविधा है। इससे विद्यार्थियों को सीखने के लिए अलग-अलग माध्यमों पर निर्भरता कम होगी और डिजिटल सामग्री तक पहुंच अधिक सहज होगी। निशुल्क उपलब्ध डिजिटल संसाधन पीएम ई-विद्या की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि डिजिटल लर्निंग से जुड़े संसाधन निशुल्क उपलब्ध हैं। इससे विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार डिजिटल माध्यम का उपयोग कर अध्ययन कर सकते हैं। शिक्षक भी उपलब्ध डिजिटल संसाधनों को अपनी कक्षा शिक्षण प्रक्रिया के सहयोगी माध्यम के रूप में उपयोग कर सकते हैं। एंड्रॉयड और आईओएस पर ऐप उपलब्ध पीएम ई-विद्या ऐप एंड्रॉयड और आईओएस, दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। एंड्रॉयड उपयोगकर्ता इसे गूगल प्ले स्टोर तथा आईओएस उपयोगकर्ता एप्पल ऐप स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। इससे विभिन्न डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने वाले विद्यार्थी और शिक्षक इस मंच से जुड़ सकते हैं। कोट: योगी सरकार प्रदेश के बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल संसाधनों के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। पीएम ई-विद्या जैसे प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर पढ़ाई से जुड़े आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रभावी बनाते हैं। हमारा प्रयास है कि तकनीक का लाभ प्रदेश के अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचे और डिजिटल शिक्षा उनके सीखने का मजबूत माध्यम बने। संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा कोट: डिजिटल संसाधनों की आसान और निशुल्क उपलब्धता विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए सीखने और सिखाने के नए अवसर खोलती है। पीएम ई-विद्या के माध्यम से एक ही मंच पर शैक्षिक संसाधनों की उपलब्धता से डिजिटल लर्निंग को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। एससीईआरटी एवं विभागीय स्तर पर हमारा प्रयास है कि इन संसाधनों का विद्यालयी शिक्षण में अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो। मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक

नर्सिंग छात्रों के परीक्षा परिणाम पर डिप्टी CM शुक्ल ने की समीक्षा, हाईकोर्ट के आदेश पर जल्द कार्रवाई के निर्देश

नर्सिंग छात्रों के परीक्षा परिणाम के संबंध में उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने की समीक्षा हाईकोर्ट के आदेश के तारतम्य में आवश्यक कार्यवाही प्राथमिकता से सुनिश्चित करने के निर्देश छात्रों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता, समाविष्ट संस्थानों को तत्काल सूचित कर परिणाम जारी करने की करें कार्यवाही भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में नर्सिंग छात्रों के परीक्षा परिणाम से संबंधित विषय की समीक्षा करते हुए विभागीय अधिकारियों से वस्तुस्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश के तारतम्य में संबंधित प्रकरण में आवश्यक कार्यवाही को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि छात्रों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप सभी आवश्यक प्रक्रियाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण की जाएं, जिससे पात्र छात्रों को उनके परीक्षा परिणाम प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि समाविष्ट संस्थानों को प्राथमिकता से सूचित कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, जिससे संबंधित छात्रों के परीक्षा परिणाम जारी किए जा सकें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो और विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक कदम समन्वय के साथ उठाए जाएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अनसूटेबल कॉलेजों के छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें सूटेबल कॉलेजों से संबद्ध/संलग्न किए जाने के विषय में भी आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित प्रभावित न हों, इसके लिए नियमानुसार उपलब्ध विकल्पों पर शीघ्र कार्यवाही की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि न्यायालयीन आदेश , विभागीय नियमों एवं विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रकरण का निराकरण प्राथमिकता से किया जाए। साथ ही, संबंधित संस्थानों एवं विश्वविद्यालय के बीच आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करते हुए प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जाए। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस, एमपीएनआरसी के रजिस्ट्रार डॉ. उपेन्द्र धोटे सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।  

शाहजहांपुर ने फिर मारी बाजी, CM डैशबोर्ड रैंकिंग में टॉप पर; रामपुर दूसरे नंबर पर

सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग में एक बार फिर शाहजहांपुर अव्वल, रामपुर को मिला दूसरा स्थान – जनशिकायतों के निस्तारण में मारी बाजी, फीड बैक में भी रहा अव्वल – अगस्त की रैंकिंग में रामपुर दूसरे व बरेली तीसरे स्थान पर – जन समस्याओं के प्रति सीएम योगी की गंभीरता का दिख रहा असर, प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा निस्तारण लखनऊ  योगी सरकार द्वारा पिछले साढ़े नौ वर्षों से प्रदेश में सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर धरातल पर साफ देखा जा सकता है। सीएम डैशबोर्ड की अगस्त की रैंकिंग में एक बार फिर शाहजहांपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं, रामपुर ने दूसरा और बरेली ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। रामपुर, शाहजहांपुर और बरेली के जिलाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने यह उपलब्धि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण, बेहतर फीडबैक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधारात्मक पहल से हासिल किया है।   शाहजहांपुर ने 9.53 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया शाहजहांपुर के जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शाहजहांपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इसके साथ ही सीएम डैशबोर्ड के जरिये मिलने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण तरीके से त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की अगस्त माह की रैंकिंग में शाहजहांपुर को 10 में से 9.53 अंक प्राप्त हुए। इसी के साथ शाहजहांपुर ने प्रदेशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं रामपुर ने 9.48 अंक हासिल कर प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। रामपुर ने 10 में से 9.48 अंक प्राप्त कर बाजी मारी रामपुर डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिलों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई, फीडबैक की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पहलू शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि जुलाई में सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से जिले की 68 योजनाओं की मॉनीटरिंग की गई। इसमें से 65 कार्यक्रमों में जिले ने ए ग्रेड प्राप्त किया। जिले ने वैकल्पिक ऊर्जा, ऊर्जा, कृषि विभाग, समाज कल्याण, लोक निर्माण विभाग, नियोजन विभाग, ग्राम्य विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, पशुपालन, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, मत्स्य विभाग, उद्योग विभाग, सहकारिता एवं सिंचाई के कार्यक्रमों में शत-प्रतिशत लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए ए श्रेणी प्राप्त की है। सीएम डैशबोर्ड की अगस्त की रैंकिंग में रामपुर को 10 में से 9.48 अंक प्राप्त हुए। इसी के साथ एक बार फिर रामपुर ने सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग में पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा रामपुर पिछले कई माह से सीएम डैशबोर्ड की रैंकिंग में टॉप टेन में जिलों में बना हुआ है। वहीं बरेली ने 9.43 अंक हासिल कर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। टॉप टेन जिलों में आजमगढ़, पीलीभीत और मैनपुरी ने स्थान प्राप्त किया सीएम डैशबोर्ड की अगस्त माह की रैंकिंग में कई जिलों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए शीर्ष 10 में स्थान बनाया है। इसमें आजमगढ़ और पीलीभीत ने बराबर-बराबर 9.36 अंक हासिल कर चौथा, मैनपुरी ने 9.34 अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह महराजगंज ने 9.27 अंक प्राप्त कर छठवां, अंबेडकरनगर ने 9.26 अंक प्राप्त कर सातवां, सुल्तानपुर ने 9.24 अंक प्राप्त कर आठवां, हरदोई ने 9.23 अंक प्राप्त कर नौवां और सोनभद्र ने 9.21 अंक प्राप्त कर टॉप टेन में जगह बनायी है।