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4 साल की मासूम की सर्पदंश से मौत, स्वजन का आरोप- वेंटिलेटर के लिए मांगे पैसे

ग्वालियर सांप के काटने के बाद जिंदगी और मौत से जूझ रही चार वर्षीय कासवी की जया आरोग्य अस्पताल के कमलाराजा अस्पताल में मौत हो गई। बच्ची को गंभीर हालत में बाल रोग विभाग के पीआईसीयू में भर्ती कराया गया था। मासूम की मौत के बाद स्वजन ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपचार को लेकर हंगामा किया। स्वजन का आरोप है कि बच्ची को समय पर वेंटीलेटर नहीं मिल सका और वेंटीलेटर लगाने के नाम पर पांच हजार रुपये की मांग की गई। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बच्ची की हालत अस्पताल पहुंचने से पहले ही बेहद गंभीर थी और चिकित्सकों ने उसे बचाने के हरसंभव प्रयास किए। पीएम के बाद बच्ची का शव स्वजन को सुपुर्द बेहट रनगवां निवासी कोमल सिंह कुशवाह की चार वर्षीय बेटी कासवी को रविवार की रात सांप ने काट लिया था। मासूम की मौत के बाद स्वजन का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्वजन को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का शव स्वजन के सुपुर्द कर दिया गया। नाना बोले-समय पर वेंटीलेटर मिलता तो बच सकती थी जान बच्ची के नाना रामसहाय ने आरोप लगाया कि कासवी की हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी और उसे वेंटीलेटर की जरूरत थी। उनका कहना है कि वेंटीलेटर लगाने के एवज में डाक्टरों द्वारा पांच हजार रुपये की मांग की गई। स्वजन का आरोप है कि यदि बच्ची को समय रहते वेंटीलेटर मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। वेंटीलेटर के लिए रुपये मांगने के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि बच्ची की हालत पहले से ही अत्यंत गंभीर थी। अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया और उसे बचाने के लिए आवश्यक प्रयास किए गए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। – डॉक्टर अजय गौड़, विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग केआरएच  

एफआईआर और चार्जशीट के ऑनलाइन प्रेषण, ई-साक्ष्य, नाफिस तथा ई-समन के त्वरित क्रियान्वयन पर विशेष बल

रायपुर उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने नवीन आपराधिक कानूनों के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों तथा अधिकारियों को समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को अधिक त्वरित, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है तथा इसके लिए कानून में उल्लिखित प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण की जानी चाहिए। नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में गृह मंत्री  शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (एनसीएलआई) डैशबोर्ड की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की बेहतर स्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त की। डैशबोर्ड के प्रत्येक मापदंड की बिंदुवार समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की रैंकिंग में और सुधार के लिए हर स्तर पर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप जुलाई माह से राज्य की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उप मुख्यमंत्री ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी मापदंडों में सुधार की गति बनाए रखने के निर्देश दिए। एफआईआर से न्यायालय तक की प्रक्रिया हो त्वरित कार्यात्मक दक्षता के मापदंड पर सुधार के संबंध में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि एफआईआर और चार्जशीट सीधे न्यायालय तक पहुंचाने की व्यवस्था शीघ्र पूर्ण की जाए, ताकि विवेचना से लेकर विचारण तक की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो। इसी मापदंड के अंतर्गत उन्होंने नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (नाफिस) तथा ई-साक्ष्य के उपयोग को बढ़ाने के लिए सभी थानों को तकनीकी एवं कार्यात्मक दृष्टि से शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।  शर्मा ने यह भी कहा कि ई-समन जारी होने के बाद उसकी तामील शीघ्र सुनिश्चित की जाए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर चार्जशीट ऑनलाइन माध्यम से न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जाए। प्रशासकीय सुधार के अंतर्गत लंबित अधिसूचनाएं शीघ्र जारी हों  गृह मंत्री  शर्मा ने प्रशासकीय सुधार के अंतर्गत आवश्यक अधिसूचनाएं और प्रक्रियात्मक व्यवस्थाएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी व्यवस्थाओं के साथ-साथ मैदानी स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है, तभी नए कानूनों का वास्तविक लाभ नागरिकों तक पहुंच सकेगा। राज्य स्तरीय कठिनाइयों के समाधान पर विचार-विमर्श बैठक में नवीन आपराधिक कानूनों, सीसीटीएनएस तथा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के क्रियान्वयन में राज्य स्तर पर आ रही कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरडी), नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के अधिकारियों के साथ इनके तकनीकी और प्रक्रियात्मक समाधान पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन बिंदुओं पर केंद्रीय स्तर से सहयोग अथवा तकनीकी समाधान अपेक्षित है, उन पर समन्वय स्थापित कर शीघ्र निराकरण कराया जाए, जिससे छत्तीसगढ़ नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में और बेहतर प्रदर्शन कर सके।   बैठक में महानिदेशक एनसीआरबी  अमित गर्ग, महानिदेशक बीपीआरडी  आलोक मित्तल, गृह विभाग की प्रमुख सचिव गृह सु निहारिका बारिक, गृह सचिव सु नेहा चंपावत एवं  हिमशिखर गुप्ता, पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम, महानिदेशक जेल  हिमांशु गुप्ता, संचालक अभियोजन  प्रदीप गुप्ता, अपर पुलिस महानिदेशक  विवेकानंद सिन्हा, सीएपीटी भोपाल  अनिल किशोर यादव उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागीय पुलिस महानिरीक्षक, जिले के पुलिस अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग के मेडिको-लीगल नोडल अधिकारी और अभियोजन अधिकारी, तथा दिल्ली से एनसीआरबी एवं एनआईसी के अन्य अधिकारी बैठक में सम्मिलित हुए। क्या है एनसीएलआई डैशबोर्ड  नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (एनसीएलआई) डैशबोर्ड भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से तीनों नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के देशव्यापी क्रियान्वयन की प्रगति की निगरानी की जाती है।

सतत एवं सघन मॉनिटरिंग प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला : प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह

भोपाल  प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  सुखवीर सिंह ने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में विभिन्न बीमारियों की रिपोर्टिंग व्यवस्था और स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने मीजल्स, डायरिया, मलेरिया, डेंगू, सीवियर एक्यूट मालन्यूट्रिशन (सैम), स्नेक बाइट सहित विभिन्न रोगों एवं असामान्य स्वास्थ्य घटनाओं की समयबद्ध रिपोर्टिंग, निगरानी, उपचार एवं नियंत्रण की कार्यवाही की समीक्षा की। प्रमुख सचिव  सिंह ने कहा कि सघन और समयबद्ध रिपोर्टिंग प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला है। सही समय पर प्राप्त होने वाली स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के आधार पर आवश्यक चिकित्सकीय सेवाओं, मानव संसाधन, दवाओं एवं अन्य संसाधनों का योजनाबद्ध तरीके से सुदृढ़ीकरण किया जा सकता है एवं किसी बीमारी अथवा प्रकोप की स्थिति को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है। प्रमुख सचिव  सिंह ने निर्देश दिए कि प्रदेश में किसी भी असामान्य स्वास्थ्य घटना, रोग क्लस्टर, मृत्यु अथवा मामलों में असामान्य वृद्धि की शीघ्र पहचान सुनिश्चित की जाए। सूचना प्राप्त होते ही समयबद्ध रिपोर्टिंग, वैज्ञानिक तरीके से आउटब्रेक इन्वेस्टिगेशन तथा त्वरित उपचार, नियंत्रण एवं रोकथाम की गतिविधियां समानांतर रूप से प्रारंभ की जाएं। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य संबंधी सूचना को किसी भी स्तर पर रोका नहीं जाए। यदि किसी असामान्य घटना अथवा मामलों में क्षेत्र विशेष में अचानक वृद्धि की जानकारी प्राप्त होती है तो इसकी सूचना तत्काल जिला सर्विलांस इकाई को दी जाए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर एंट्री पूर्ण होने की प्रतीक्षा में सूचना देने में विलंब नहीं होना चाहिए। आवश्यकता होने पर फोन अथवा संदेश के माध्यम से तत्काल सूचना दी जाए तथा इसके बाद पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टि पूर्ण की जाए। गंभीर असामान्य स्वास्थ्य घटना की स्थिति में सत्यापन की कार्यवाही के साथ-साथ स्टेट सर्विलांस यूनिट, आयुक्त कार्यालय एवं जिला प्रशासन को भी तत्काल सूचित किया जाए। प्रमुख सचिव  सिंह ने असामान्य स्वास्थ्य घटना अथवा संभावित प्रकोप की स्थिति में पहले 24 घंटे की कार्रवाई को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए समयबद्ध कार्ययोजना के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 0–2 घंटे: क्लिनिकल स्टेबिलाइजेशन, तत्काल सूचना एवं प्रारंभिक लाइन-लिस्ट तैयार करना। 2–6 घंटे: रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) को क्षेत्र में सक्रिय करना, ऐक्टिव केस सर्च, सैंपल कलेक्शन तथा एक्सपोज़र की जानकारी एकत्र करना। 6–12 घंटे: टाइम-प्लेस-पर्सन एनालिसिस, संभावित कारणों की पहचान तथा कंट्रोल मेजर्स प्रारंभ करना। 12–24 घंटे: अपडेटेड लाइन-लिस्ट, लेबोरेटरी स्टेटस की समीक्षा, प्रीलिमिनरी रिपोर्ट तैयार करना एवं आगामी 72 घंटे की कार्ययोजना निर्धारित करना। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले में "पहचान–सूचना–जांच–नियंत्रण" की प्रक्रिया पहले दिन से ही प्रारंभ होनी चाहिए। बैठक में रोग निगरानी एवं रिपोर्टिंग व्यवस्था में विभिन्न स्तरों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट की गईं। जिला स्तर पर कलेक्टर के मार्गदर्शन में सीएमएचओ/डीएसओ द्वारा समग्र निगरानी, विभागीय समन्वय, आरआरटी को सक्रिय करने तथा दैनिक समीक्षा की जाएगी। ब्लॉक स्तर पर बीएमओ द्वारा केस सत्यापन, लाइन-लिस्टिंग, ऐक्टिव केस सर्च, सैंपल कलेक्शन, ट्रीटमेंट/रेफरल तथा आवश्यक लॉजिस्टिक्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य संस्थाओं में संस्था प्रभारी/नोडल अधिकारी द्वारा केस आइडेंटिफिकेशन, ट्रीटमेंट, आइसोलेशन, पोर्टल एंट्री, सैंपलिंग एवं रेफरल की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। मैदानी स्तर पर एएनएम, सीएचओ, एमपीडब्लू, आशा एवं एएमडब्ल्यू द्वारा घर-घर निगरानी, रिस्क आइडेंटिफिकेशन, हेल्थ एजुकेशन एवं फॉलो-अप की गतिविधियां की जाएंगी। जननी सुरक्षा एवं प्रसूति सहायता योजनाओं की समीक्षा प्रमुख सचिव  सिंह ने बैठक में जननी सुरक्षा योजना एवं प्रसूति सहायता योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना है और पात्र हितग्राहियों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना इसका महत्वपूर्ण पक्ष है। उन्होंने कहा कि त्वरित हितलाभ अंतरण इन योजनाओं की मूल भावना है। ये योजनाएं सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी हैं, इसलिए इनके क्रियान्वयन में पूर्ण संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ कार्य किया जाए।प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर हितलाभ अंतरण सुनिश्चित किया जाए। पेंडिंग प्रेग्नेंसी एंट्री के प्रकरणों पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने इन्हें प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक लंबित प्रकरण की समीक्षा की जाए, लंबित रहने के कारणों की पहचान कर उसका शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा पात्र हितग्राहियों को समय पर भुगतान मिले। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में पानी की गुणवत्ता की करें जांच प्रमुख सचिव  सिंह ने प्रदेश के समस्त स्वास्थ्य संस्थानों में एक सप्ताह के भीतर पानी की गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन स्वास्थ्य संस्थानों में पानी की गुणवत्ता अथवा संबंधित व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है, वहां उसका तत्काल निराकरण प्राथमिकता से कराया जाए। जांच एवं सुधारात्मक कार्रवाई की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। प्रमुख सचिव ने स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए और भुगतान से संबंधित किसी भी लंबित प्रकरण का शीघ्र निराकरण किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रशासनिक एवं वित्तीय स्तर पर आवश्यक समन्वय करते हुए भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजू एस, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना, मेडिकल कॉलेजों के डीन, अधीक्षक, क्षेत्रीय संचालक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा संबंधित विभागीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।  

सहकारी मिल में अफसर नहीं चला सकता मनमानी, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई की रद्द

चंडीगढ़  सहकारी संस्थाओं में सरकारी हिस्सेदारी या किसी अधिकारी का पद उसे संस्था के वैधानिक अधिकारों से अधिक शक्ति नहीं देता। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सोनीपत सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक के खिलाफ हुई विभागीय कार्रवाई को रद करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा कि किसी सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का अधिकार मिल की अपनी प्रबंधन समिति के पास है। केवल उपयुक्त पद पर बैठे अधिकारी या हरियाणा राज्य सहकारी चीनी मिल संघ के प्रबंध निदेशक के पत्र के आधार पर ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती। मामला सोनीपत सहकारी चीनी मिल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक अश्वनी कुमार से जुड़ा है। वह हरियाणा सिविल सेवा के अधिकारी हैं और तीन सितंबर 2019 को उन्हें मिल का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया था। मिल के विस्तार से जुड़ी एक परियोजना में ठेकेदार को भुगतान किए जाने के बाद तकनीकी सलाहकार ने काम और उपकरणों की आपूर्ति को लेकर आपत्तियां उठाई थीं। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हुई। अश्वनी कुमार को 13 फरवरी 2023 को आरोपपत्र जारी किया गया। विभागीय जांच पूरी होने के बाद उन पर 25 जुलाई 2025 को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की बड़ी सजा लगा दी गई। आरोप था कि काम में कमियां सामने आने और सक्षम अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद उन्होंने ठेकेदार को भुगतान जारी कर दिया, जिससे सहकारी संस्था को आर्थिक नुकसान हुआ। अश्वनी कुमार ने हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का अधिकार उपयुक्त प्रबंधन समिति के पास था, लेकिन ऐसा कोई प्रस्ताव रिकॉर्ड में नहीं है। हाई कोर्ट ने हरियाणा सहकारी समितियां अधिनियम की धारा 25, 31 और 39 तथा संबंधित उपनियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि सहकारी संस्था की अंतिम सत्ता उसके सदस्यों की सामान्य सभा में निहित होती है और संस्था का संचालन उसके निदेशक मंडल के माध्यम से होता है। प्रबंध निदेशक भी समिति के नियंत्रण और अधीक्षण में काम करता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हरियाणा राज्य सहकारी चीनी मिल संघ और सोनीपत सहकारी चीनी मिल दो अलग-अलग सहकारी संस्थाएं हैं। शुगरफेड सदस्य मिलों को सलाह, तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन दे सकता है, लेकिन उसके प्रबंध निदेशक को किसी सदस्य चीनी मिल के प्रबंध निदेशक पर अनुशासनात्मक नियंत्रण हासिल नहीं है। कोर्ट ने कहा कि उपायुक्त यदि पदेन अध्यक्ष भी हों, तब भी अध्यक्ष का पद उन्हें प्रबंधन समिति की सामूहिक शक्तियां अकेले इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं देता। रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला, जिसमें मिल की प्रबंधन समिति ने भुगतान रोकने या प्रबंध निदेशक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया हो। हाई कोर्ट ने माना कि कार्रवाई की पूरी नींव ही अधिकार क्षेत्र की गलती पर आधारित थी। अदालत ने 25 जुलाई 2025 का अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश और उससे जुड़ी पूरी विभागीय कार्रवाई रद कर दी। अश्वनी कुमार को कानून के अनुसार सभी परिणामी सेवा लाभ देने के भी निर्देश दिए गए। फैसला 20 अगस्त 2026 को सुनाया गया।ो  

उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बनेगी एक समान नीति

लखनऊ योगी सरकार ने प्रदेश में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को लेकर महत्वपूर्ण पहल की है। विद्यार्थियों को स्वस्थ, सुरक्षित और तनावमुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक समान छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति तैयार की जाएगी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न पहलुओं, संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं के विस्तार और विद्यार्थियों को समय पर परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा एम.पी. अग्रवाल, विशेष सचिव निधि वास्तव समेत विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। तनाव और भावनात्मक चुनौतियों से निपटने पर फोकस योगी सरकार उच्च शिक्षा को केवल डिग्री और रोजगार तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास पर जोर दे रही है। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार करना है, जहां पढ़ाई के दबाव, परीक्षा की चिंता, करियर को लेकर तनाव अथवा भावनात्मक परेशानियों से जूझ रहे विद्यार्थियों को समय रहते उचित सहायता मिल सके। नीति के तहत राज्य से लेकर जिला और संस्थान स्तर तक मानसिक स्वास्थ्य सहायता की समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार काउंसलिंग और विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। राज्य स्तर पर नोडल व्यवस्था, जिलों में होगी निगरानी प्रस्तावित व्यवस्था में निदेशक, उच्च शिक्षा को राज्य स्तर पर नोडल एवं कार्यान्वयन प्राधिकारी बनाया जाएगा। वहीं प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में संचालन समिति नीति के क्रियान्वयन, बजट और नियमित समीक्षा की निगरानी करेगी। जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। यह समिति जिले के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के साथ समन्वय करते हुए मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करेगी। हर संस्थान में बनेगा मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष योगी सरकार की प्रस्तावित नीति का सबसे अहम पहलू प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष की स्थापना है। यहां विद्यार्थियों को सुरक्षित और गोपनीय वातावरण में काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों को काउंसलर, मनोवैज्ञानिक अथवा अन्य विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य पोर्टल विकसित कर विद्यार्थियों के लिए प्रारंभिक टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है। शिक्षकों और कर्मचारियों को भी दिया जाएगा प्रशिक्षण विद्यार्थियों की मानसिक परेशानियों को शुरुआती स्तर पर पहचानने के लिए शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और छात्र प्रतिनिधियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण में तनाव, भावनात्मक परेशानी और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संकेतों को समझने तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों तक सहायता पहुंचाने की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षित शिक्षक छोटे समूहों में विद्यार्थियों के साथ मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और जीवन कौशल से जुड़े संवाद कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे। गंभीर तनाव या आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए हेल्पलाइन और रेफरल व्यवस्था विकसित की जाएगी। पूरी प्रक्रिया में विद्यार्थी की गोपनीयता और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नीति से जोड़ा जाएगा प्रस्तावित नीति में मानसिक स्वास्थ्य को केवल काउंसलिंग तक सीमित न रखते हुए इसे विद्यार्थियों के समग्र विकास से जोड़ने की योजना है। इसके लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियां और करियर काउंसलिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। सोशल मीडिया के माध्यम से भी सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संदेश और जागरूकता सामग्री विद्यार्थियों तक पहुंचाई जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है। पोर्टल और डैशबोर्ड से होगी निगरानी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी के लिए उच्च शिक्षा विभाग में समेकित पोर्टल एवं डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से संस्थानों में संचालित मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों, सहायता व्यवस्था और प्रगति की निगरानी की जा सकेगी। योगी सरकार की इस पहल से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा संस्थागत तंत्र विकसित होने की उम्मीद है, जहां पढ़ाई के साथ उनकी मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को भी प्राथमिकता मिले। सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षा को अधिक विद्यार्थी केंद्रित, संवेदनशील, सुरक्षित और समावेशी बनाना है।

इंदौर में पेड़ गिरने से कार में फंसी बुजुर्ग की मौत, डेढ़ घंटे बाद निकाला गया शव

 इंदौर  मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सोमवार शाम को भारी बारिश के बीच एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। सेंट्रल जेल के समीप मुख्य सड़क से गुजर रहे वाहनों पर अचानक एक विशाल पेड़ आ गिरा। इस दर्दनाक दुर्घटना में कार सवार नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की डिप्टी कलेक्टर पूर्णिमा सिंघी की बुजुर्ग मां की जान चली गई, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराकर लौट रहा था परिवार, डेढ़ घंटे तक कार में दबे रहे लोग प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक बुजुर्ग महिला की पहचान 75 वर्षीया राधा देवी सिंघी के रूप में हुई है, जो हाल ही में मोतियाबिंद का इलाज कराकर लौट रही थीं। हादसे में उनकी भतीजी वैशाली जायसवाल (55) और पोते/भतीजे प्रखर सिंघी (25) घायल हो गए हैं। दोनों घायलों को तत्काल उपचार के लिए पास के निजी गोकुलदास अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  

मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता दी जायेगी

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने सोमवार को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर के बंडा क्षेत्र में अवैध शराब सेवन से प्रभावित मरीजों से मिले। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मृतक के परिजनों को 4-4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।  देवड़ा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं तथा पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे प्रकरण में कठोर कार्रवाई करने की बात की है।  देवड़ा ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी शराब दुकानों की जांच, स्टॉक की नियमित निगरानी तथा अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री से जुड़े नेटवर्क की गहन जांच करें और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करें। उपमुख्यमंत्री  देवड़ा को जानकारी दी गई कि अवैध शराब से प्रभावित एवं उपचाररत मरीजों का ध्यान रखा जाये। ईलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाये। एक गंभीर मरीज को भोपाल एम्स भेजा गया है। अधिकांश मरीजों की स्थिति अब स्थिर है। जानकारी दी गई की थाना बंडा में भारतीय न्याय संहिता और मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के विभिन्न प्रावधानों के तहत 30 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।   उप मुख्यमंत्री मरीज और उनके परिजनों से मिले उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने सोमवार को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचकर आईसीयू एवं क्रिटिकल केयर वार्ड में भर्ती मरीजों मिले। उन्होंने उनके स्वास्थ्य की जानकारी डॉक्टरों से प्राप्त कर निर्देश दिये कि ईलाज की सभी व्यवस्था की जाये। मरीजों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और परिजनों से भी चर्चा कर उन्हें आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ है। उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम 24 घंटे उपलब्ध रहे तथा दवाओं, उपकरणों और अन्य चिकित्सा संसाधनों की कोई कमी न होने दी जाए। 

सिलाई, किराना दुकान से लेकर बटेर-मुर्गी पालन और हैचरी तक आजीविका की कई गतिविधियां

रायपुर  छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर महिलाएं अपने हुनर और मेहनत को स्थायी आजीविका का माध्यम बना रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत अंडी की मती रानू कैवर्त ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने मेहनत, हुनर और बिहान से मिले सहयोग के बूते आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है। कभी सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करने वाली रानू कैवर्त आज अपने गांव में महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। शिव गुरु महिला स्व-सहायता समूह की सचिव के रूप में उन्होंने समूह से मिले मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग का बेहतर उपयोग करते हुए आजीविका की अनेक गतिविधियों को अपनाया। उनके प्रयासों का परिणाम है कि अब विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है। एक नहीं, कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आमदनी रानू कैवर्त ने आत्मनिर्भर बनने के लिए किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कई गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाया। उनके समूह द्वारा सिलाई कार्य, कपड़ों की दुकान, किराना स्टोर, बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन गतिविधियों ने परिवार के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए हैं। सिलाई कार्य और कपड़ों की दुकान से जहां उन्हें अपने हुनर को आय में बदलने का अवसर मिला, वहीं किराना दुकान तथा पशु-पक्षी पालन से आमदनी के अतिरिक्त साधन तैयार हुए। हैचरी और देशी मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों ने उनके व्यवसाय को और विस्तार दिया। अलग-अलग गतिविधियों को आपस में जोड़कर रानू ने ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का प्रभावी उपयोग किया है। बिहान से मिला अवसर, मेहनत ने बदली तस्वीर रानू बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। बिहान से प्राप्त आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और समूह की सामूहिक शक्ति ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। उन्होंने इस सहयोग को अपनी मेहनत और लगन से जोड़ा और धीरे-धीरे आजीविका के कई साधन विकसित किए। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि अवसर, संसाधन, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपने परिवार और गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं। रानू का प्रयास अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर अपने हुनर को आजीविका में बदलने के लिए प्रेरित कर रहा है। महतारी वंदन योजना से मिला अतिरिक्त संबल रानू कैवर्त को महतारी वंदन योजना के तहत प्रत्येक माह मिलने वाली आर्थिक सहायता का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। नियमित आर्थिक सहयोग से उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे उनके आर्थिक आत्मविश्वास को भी मजबूती मिली है और वे अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार रानू कैवर्त ने अपनी सफलता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और बिहान से मिले सहयोग ने उनके जैसे ग्रामीण परिवारों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। आज वे अपने हुनर और मेहनत के दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। रानू कैवर्त की सफलता ग्रामीण छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां सरकारी योजनाओं का सहयोग, स्व-सहायता समूह की सामूहिक शक्ति और महिलाओं की मेहनत एवं उद्यमशीलता मिलकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं। ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में बढ़ते रानू के कदम यह संदेश देते हैं कि सही अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक बदलाव की मजबूत वाहक बन सकती हैं।

रसोई गैस को लेकर बड़ी राहत, ग्रामीण-शहरी उपभोक्ताओं के लिए LPG रिफिल बुकिंग अंतर हुआ समान

 पटना  गांव में रसोई गैस जल्दी खत्म हो जाए तो अगला सिलेंडर बुक कराने के लिए 45 दिन का इंतजार… यह परेशानी अब दूर होगी। ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी रिफिल बुकिंग का अंतर अब एक समान 25 दिन कर दिया गया है। यानी पिछली रिफिल की डिलीवरी के 25 दिन बाद ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता भी अगला सिलेंडर बुक करा सकेंगे। अब तक ग्रामीण वितरकों से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग का अंतर 45 दिन था। ऐसे में चार-पांच सदस्यों वाले परिवार में गैस जल्दी खत्म होने पर उपभोक्ताओं को बुकिंग की निर्धारित अवधि पूरी होने तक इंतजार करना पड़ता था। कई उपभोक्ताओं को इस दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था से ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है गांव में भी शहर जैसी सुविधा एलपीजी उपभोक्ताओं के बीच लंबे समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बुकिंग अंतर को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शहरी क्षेत्र में 25 दिन बाद रिफिल बुक कराने की सुविधा थी, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं को 45 दिन इंतजार करना पड़ता था। अब दोनों के लिए 25 दिन का समान अंतराल होने से यह अंतर समाप्त हो गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस की खपत परिवार के आकार और खाना पकाने की जरूरत पर निर्भर करती है, क्षेत्र पर नहीं। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए भी समान बुकिंग व्यवस्था होने से उन्हें समय पर रिफिल मिल सकेगा। पटना में घरेलू सिलेंडर 1031.50 रुपये पटना में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1031.50 रुपये है। सितंबर में घरेलू सिलेंडर की कीमत में बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 3034.50 रुपये बताई गई है। उपभोक्ताओं के लिए बदलाव एक नजर में व्यवस्था पहले अब ग्रामीण क्षेत्र में रिफिल बुकिंग 45 दिन 25 दिन शहरी क्षेत्र में रिफिल बुकिंग 25 दिन 25 दिन पटना में घरेलू सिलेंडर 14.2 किलो 1031.50 कमर्शियल सिलेंडर 19 किलो 3034.50

लखनऊ ने रचा इतिहास, स्वच्छ हवा के मामले में देशभर में पहला स्थान; मिला ₹1.50 करोड़ का पुरस्कार

लखनऊ स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में लखनऊ ने देशभर में पहला स्थान हासिल कर राजधानी का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित स्वच्छ वायु दिवस कार्यक्रम में लखनऊ को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत नेशनल बेस्ट परफॉर्मिंग सिटी रैंक-1 का सम्मान प्रदान किया गया। इसके साथ ही नगर निगम के जोन-4 स्थित वार्ड संख्या-70 (पेपर मिल) को 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ वार्ड चुना गया। सम्मान समारोह में महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव और पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान ने पुरस्कार प्राप्त किया। लखनऊ को प्रथम स्थान के साथ 1.50 करोड़ रुपये और वार्ड-70 को 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। दिल्ली में मिला राष्ट्रीय सम्मान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा तथा पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह सम्मान प्रदान किया। स्वच्छ वायु के क्षेत्र में किए गए कार्यों के मूल्यांकन के बाद लखनऊ को देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला शहर घोषित किया गया। प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का मिला पुरस्कार नगर निगम ने पिछले वर्षों में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई स्तरों पर काम किया। डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1100 इलेक्ट्रिक वाहनों को सड़क पर उतारा गया। इनके संचालन की निगरानी जीपीएस आधारित कंट्रोल कमांड सेंटर से की जा रही है। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग ढांचे का भी विस्तार किया गया। धूल कम करने के लिए मशीनों का सहारा सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें लगाई गईं। प्रमुख मार्गों पर नियमित सफाई और पानी का छिड़काव किया गया। वहीं 559.85 किलोमीटर सड़कों को पूरी तरह पक्का कर धूल प्रदूषण को कम करने की दिशा में काम किया गया। कचरा प्रबंधन बना सफलता की बड़ी वजह शहर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे के शत-प्रतिशत वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था विकसित की गई। ताजा कचरे की डंपिंग बंद कर दी गई है। निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के निस्तारण के लिए अलग व्यवस्था और 300 टीपीडी क्षमता का संयंत्र भी संचालित किया जा रहा है। इससे प्रदूषण नियंत्रण में उल्लेखनीय मदद मिली। हरियाली और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, वर्टिकल गार्डन विकसित करने, इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ाने और यातायात सुधार के लिए भी व्यापक काम किया गया। वर्तमान में शहर में 140 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। इसके साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक पर कार्रवाई, नालों की सफाई और नदियों में कचरा जाने से रोकने जैसे कदम भी उठाए गए। महापौर बोलीं- यह पूरे लखनऊ की उपलब्धि महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना पूरे शहर के लिए गर्व की बात है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, नगर विकास मंत्री के मार्गदर्शन, नगर निगम की टीम की मेहनत और शहरवासियों के सहयोग को दिया। इन पांच कारणों से नंबर-1 बना लखनऊ — 1100 इलेक्ट्रिक कूड़ा वाहन सड़क पर उतारकर डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी लाई गई। — 97 मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों से सड़क की धूल नियंत्रित की गई और नियमित पानी का छिड़काव कराया गया। — 100 प्रतिशत वैज्ञानिक कचरा निस्तारण की व्यवस्था लागू कर ताजा कचरे की डंपिंग बंद की गई। — 559.85 किलोमीटर सड़कों का पक्कीकरण कर उड़ती धूल और प्रदूषण को कम किया गया। —हरियाली, इलेक्ट्रिक बसों और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने पर लगातार काम किया गया।