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प्रदर्शन के आधार पर होगा फैसला! Mohan Yadav कैबिनेट में नए चेहरों की एंट्री की चर्चा तेज

भोपाल  मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व वाली सरकार 13 जून को अपने ढाई साल पूरे करने जा रही है, लेकिन उससे पहले सत्ता के गलियारों में कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। खबर है कि बीजेपी आलाकमान ने सरकार और संगठन दोनों की परफॉर्मेंस का फीडबैक लेना शुरू कर दिया है। 17 और 18 मई को पार्टी के केंद्रीय समीक्षक भोपाल पहुंचेंगे, जहां मंत्रियों के कामकाज का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो इस बार समीक्षा सिर्फ औपचारिक नहीं होगी, बल्कि मंत्रियों के विभागीय प्रदर्शन, जिलों में पकड़, संगठन के साथ तालमेल और जनता के बीच उनकी छवि तक का आकलन किया जाएगा। माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों का प्रदर्शन कमजोर पाया जाएगा, उन्हें कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस संभावित फेरबदल की जद में कुछ बड़े और वरिष्ठ चेहरे भी आ सकते हैं। आमने-सामने होगी जवाबदेही की परीक्षा पार्टी सूत्र बताते हैं कि मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से बैठाकर उनसे सवाल-जवाब किए जाएंगे। चर्चा का फोकस सिर्फ योजनाओं की फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में कितने सक्रिय हैं, संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ उनका व्यवहार कैसा है और जनता के बीच सरकार की छवि मजबूत करने में उनकी भूमिका कितनी प्रभावी रही है। समीक्षक मंत्रियों द्वारा पेश किए गए दावों की जमीनी हकीकत भी जांचेंगे। यही रिपोर्ट आगे कैबिनेट में बने रहने या बाहर होने का आधार बन सकती है। मॉनसून सत्र से पहले हो सकता है बड़ा बदलाव राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जुलाई में प्रस्तावित मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में बड़ा बदलाव संभव है। वर्तमान में मोहन कैबिनेट में चार पद खाली हैं। ऐसे में सिर्फ विस्तार ही नहीं, बल्कि कई मंत्रियों की छुट्टी और नए चेहरों की एंट्री का रास्ता भी साफ हो सकता है। बताया जा रहा है कि पार्टी 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अभी से नई रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे नेताओं को मौका देने की तैयारी है, जिन्हें संगठन और सरकार दोनों में संतुलन बनाने वाला माना जाता है। पुराने दिग्गजों की वापसी के संकेत कैबिनेट विस्तार को लेकर जिन नामों की चर्चा है, उनमें कुछ पूर्व मंत्री और लंबे समय से संगठन में सक्रिय चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं। पिछले ढाई साल से कई नेता सत्ता और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब उन्हें मौका देकर पार्टी क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है। बीजेपी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि अगर अभी बदलाव होता है, तो नए मंत्रियों को 2028 चुनाव से पहले करीब दो साल का पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे वे अपने क्षेत्रों में सरकार की पकड़ मजबूत कर सकें। सत्ता और संगठन दोनों की अग्निपरीक्षा मध्य प्रदेश बीजेपी के लिए आने वाले महीने बेहद अहम माने जा रहे हैं। एक तरफ संगठन सरकार के प्रदर्शन को कसौटी पर कस रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में मोहन कैबिनेट का संभावित फेरबदल सिर्फ मंत्रियों की अदला-बदली नहीं, बल्कि 2028 के चुनावी रण की शुरुआती बिसात माना जा रहा है।

धार की भोजशाला से लंदन तक पहुंची मां सरस्वती की मूर्ति, जानिए क्यों अलग है यह विवाद

धार सौ बात की एक बात ये कि भोजशाला पर कोर्ट के फ़ैसले की ख़बर तो पब्लिक ने सुन ली कि हाई कोर्ट ने उसको मां सरस्वती का मंदिर माना है, लेकिन ज़्यादातर लोग मां सरस्वती की उस मूर्ती का रहस्य नहीं जानते जो माना जाता है कि वहां हुआ करती थी. कहां और क्या है वो मूर्ति जो मिली भोजशाला में? धार के लोग भले ही कहानी जानते हों लेकिन बाक़ी जगहों के लोगों को ज़्यादा नहीं पता है. और ये भी ज़्यादा जानकारी नहीं है कि ये केस अयोध्या, काशी या मथुरा वाले मामले से अलग था. अब भी वैसे ये हाई कोर्ट का फ़ैसला है और मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट तो शायद जाएगा ही. तो अभी हाई कोर्ट ने इसे मां सरस्वती का मंदिर बता दिया है, मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट गया तो वहां से भी फ़ैसला आ जाएगा, लेकिन क्या राजा भोज की स्थापित मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती की मूर्ति अब भी है? है तो कहां है? वो कहानी भी जाननी ज़रूरी है।  धार से लंदन तक की कहानी मध्य प्रदेश का धार परमार राजवंश की राजधानी हुआ करती थी आज से कोई 1000 साल पहले. वहां पर है ये भोजशाला जिसको लेकर सारा विवाद था. भोजशाला भी कहते हैं, मां वाग्देवी का मंदिर भी कहते हैं और मुसलमान इसको कमाल मौला की मस्जिद कहते आ रहे थे. लेकिन ये इमारत बाक़ी मंदिरों-मस्जिदों की तरह नहीं है क्योंकि ये प्राचीन धरोहरों का संरक्षण करने वाली एजेंजी ASI के अधीन है. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के संरक्षण में है. यानी पुरातत्व विभाग. वो इसकी देखरेख करता है. और आज से नहीं. 1909 से. यानी 100 साल से भी ज़्यादा पहले से, अंग्रेज़ों के ज़माने से।  राजभोज और भोजशाला की कहानी इसमें मंगलवार को हिंदुओं को पूजा करने की इजाज़त थी और शुक्रवार को मुसलमानों को. लेकिन विवाद बना हुआ था और फिर एक सायंटिफ़िक सर्वे करवाया गया था जिसकी रिपोर्ट दो साल पहले कोर्ट को दी गई थी और उसी के आधार पर फ़ैसला आया है. इमारत जो है वो 11वीं सदी की मानी जाती है. हिंदू पक्ष का मानना है कि ये सरस्वती मंदिर था जो परमार राजवंश के राजा भोज ने बनवाया था. राजा भोज का शासन था साल 1000 से 1055 तक. और राजा भोज के राज में संस्कृत का बहुत अध्ययन होता है. तो हिंदू पक्ष मानता है कि यहां मां वागदेवी यानी सरस्वती का मंदिर स्थापित किया गया था और ये जो पूरा कॉम्प्लेक्स जो था जिसको भोजशाला कहते हैं, ये संस्कृत अध्ययन का बड़ा केंद्र हुआ करता था. जिसको बाद में 14वीं सदी में अलाउद्दीन खिलजी से लेकर 15वीं सदी में महमूद शाह खिलजी तक ने तोड़ा और बर्बाद किया और मंदिर की जगह पर कमाल मौला मस्जिद बना दी गई थी।  भोजशाला पर मुसलमानों की क्या दलील मुसलमानों का पक्ष ये था कि ये सूफ़ी संत कमालुद्दीन चिश्ती की दरगाह थी, जिनकी मृत्यु 13वीं सदी में धार में ही हुई थी और उनकी मज़ार के पास ही ये मस्जिद बन गई थी. ब्रिटिश राज के टाइम धार एक रियासत हुआ करती थी और महाराजा सर उदाजी राव पुआर द्वितीय के शासनकाल में 1909 में इस कॉम्प्लेक्स को अंग्रेज़ों की ASI के संरक्षण में दे दिया गया था. आज़ादी के बाद 1951 में इसको मॉन्युमेंट ऑफ़ नैशनल इंपॉर्टेंस, राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित कर दिया गया था. और फिर इस घटनाक्रम में सबसे अहम फ़ैसला जो हुआ था वो हुआ था 2003 में जब ASI ने ये व्यवस्था की कि मंगलवार को हिंदू पूजा कर सकेंगे और शुक्रवार को मुसलमान. इस व्यवस्था से दोनों पक्ष ख़ुश नहीं थे और मामला अदालत में चल रहा था जिसपर हाई कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि ये मंदिर ही था और मुसलमानों को नमाज़ पढ़ने का अधिकार नहीं होगा. लेकिन जो समझने वाली बात है वो ये कि ये केस बाक़ी मामलों से अलग कैसे था।  मां सरस्वती के सबूत एक तो इस मामले में कोई ऐतिहासिक दस्तावेज़ नहीं था. दूसरा ये अग्रेज़ों के ज़माने से ही पुरातत्व विभाग के पास था. और तीसरा ये कि इस विवाद ने भले ही 1992 में अयोध्या में ढांचा गिराये जाने के बाद तूल पकड़ा हो लेकिन ये विवाद 1902 से चला आ रहा था. 2024 में जो ASI का सर्वे हुआ उसकी रिपोर्ट कहती है कि ये जो खंभों पर खड़ा हुआ बड़ा हॉल है ये एक पुराने मंदिर के अवशेषों से बना हुआ दिखता है. खंभों पर हिंदू देवी-देवताओं की आकृतियां नज़र आती हैं, मां सरस्वती की स्तुति में संस्कृत में शिलालेख दिखते हैं, परमार राजवंश के समय के पत्थर मिलने की बात है और हवन कुंड दिखता है. साथ ही कमाल मौला की दरगाह भी दिखती है और फ़ारसी में लिखी हुई भी पंक्तियां नज़र आती हैं. 1902 में धार रियासत जो थी उसमें शिक्षा के अधीक्षक होते थे के. के. लेले. कहते हैं उस टाइम वहां अग्रेज़ वायसरॉय लॉर्ड कर्ज़न को धार आना था तो उनकी यात्रा के लिए इस जगह पर एक दस्तावेज़ तैयार किया था के. के. लेले साहब ने. और भोजशाला नाम इस दस्तावेज़ में पहली बार मिलता है।  भोजशाला, धार और अंग्रेजों की एंट्री उससे पहले जो अंग्रेज़ आए 1822 में, जॉन मैल्कम 1888 में विलियम किनकेड, उन्होंने इस जगह के बारे में लिखते हुए भोजशाला नाम का इस्तेमाल नहीं किया था. लेकिन पास ही में राजा भोज के महल से कई चीज़ें विलियम किनकेड को मिल चुकी थीं. राजा भोज परमार वंश के बहुत बड़े और विद्वान राजा माने जाते थे. वो ज्ञान, कला, विज्ञान और साहित्य के बहुत बड़े प्रेमी थे. और सबसी बड़ी बात तो ये कि उन्होंने खुद 84 किताबें लिखी थीं और 100 से ज्यादा मंदिर बनवाए. राजा भोज मां सरस्वती, जिन्हें मां वाग्देवी भी कहते हैं, उनके के बहुत बड़े भक्त माने जाते थे. ये तो आप जानते ही हैं कि सरस्वती ज्ञान, विद्या, वाणी और कला की देवी हैं. इसलिए उन्होंने अपनी राजधानी धार में एक बड़ा शिक्षा केंद्र बनवाया. इसी को के. के. लेले ने अपने दस्तावेज़ में भोजशाला नाम दिया था. कहते हैं कि ये 1035 में वसंत पंचमी के दिन बनकर तैयार हुआ. भोजशाला सिर्फ एक शाला नहीं … Read more

300 साल पुराना पेड़, 8 एकड़ में फैला विस्तार… पंजाब की इस अनोखी धरोहर के आगे किसान भी छोड़ देते हैं हक

फतेहगढ़ साहिब फतेहगढ़ साहिब के छोटे से गांव चोलटी खेड़ी में स्थित लगभग 300 वर्ष पुरानी विशाल बरोटी (बरगद का पेड़) आज भी प्रकृति, आस्था और पर्यावरण संरक्षण की अनोखी मिसाल बना हुआ है। करीब आठ एकड़ क्षेत्र में फैला यह विशाल वृक्ष पंजाब का सबसे बड़ा पेड़ माना जाता है। इसकी फैली शाखाएं और जमीन में उतरती नई जड़ें इसे छोटे जंगल का रूप देती हैं।  गांव के लोगों के अनुसार यह बरोटी हर दिन और फैलती जा रही है। इसकी जड़ें लगातार धरती में आगे बढ़ रही हैं और जहां तक यह फैलती हैं, वहां किसान अपनी जमीन पर ट्रैक्टर और हल चलाना छोड़ देते हैं। गांव वाले उस हिस्से को खाली छोड़कर पेड़ को आगे बढ़ने देते हैं। गांव के लोग इसे “बाबा जी के अंग-पैर” मानते हैं और इसकी एक टहनी तक तोड़ने से डरते हैं। लोगों का विश्वास है कि यह बरोटी मनोकामनाएं पूरी करती है और जो व्यक्ति इसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, उसे भारी हानि उठानी पड़ती है।  गांव की बुजुर्ग महिलाओं और किसानों ने बताया कि वर्षों पहले कुछ लोगों ने इस बरोटी को काटने का प्रयास किया था, लेकिन बाद में उनके साथ दुर्घटनाएं हुईं और कई लोगों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। इसी कारण आज भी कोई व्यक्ति इसकी टहनी काटने या पत्ता तोड़ने की हिम्मत नहीं करता।   साधु और “भभूति” से जुड़ी है बरोटी की कथा  गांव में प्रचलित मान्यता के अनुसार कई दशक पहले एक साधु यहां खेतों में आकर ठहरे थे। उस समय एक किसान दंपती निसंतान था। साधु ने किसान की पत्नी को भभूति दी और आशीर्वाद दिया, लेकिन किसान ने उस पर विश्वास नहीं किया और वह भभूति साधुओं की धूनी में डाल दी गई। गांव वालों के अनुसार कुछ समय बाद उसी स्थान पर एक छोटा पौधा उग आया, जो धीरे-धीरे विशाल बरोटी में बदल गया। लोगों का कहना है कि जिस तरह किसान का परिवार बढ़ा, उसी तरह यह बरोटी भी लगातार फैलती चली गई। आज भी गांव के लोग इस कथा को श्रद्धा के साथ सुनाते हैं और बरोटी को चमत्कारी मानते हैं।  किसान छोड़ देते हैं जमीन  गांव वालों के अनुसार बरोटी की जड़ें और शाखाएं लगातार खेतों तक फैलती जा रही हैं। जिस खेत तक इसकी जड़ें पहुंचती हैं, वहां किसान ट्रैक्टर और हल चलाना बंद कर देते हैं। कई किसानों ने अपनी जमीन का हिस्सा पेड़ के लिए छोड़ दिया है, ताकि बरोटी बिना रोक-टोक आगे बढ़ सके।    “यह पेड़ नहीं पूरा जंगल है”  करीब आठ एकड़ में पहले इस पेड़ को लोग प्यार से बरोटी कहते हैं। जिसकी शाखाएं जमीन तक झुककर नई जड़ें बना लेती हैं। यही जड़ें आगे चलकर नए तनों का रूप लेती हैं और पेड़ लगातार फैलता जाता है। दूर से देखने पर यह किसी घने जंगल जैसा दिखाई देता है।  पक्षियों और जीव-जंतुओं का सुरक्षित आश्रय बरोटी के भीतर सैकड़ों पक्षी, मोर और अन्य जीव-जंतु रहते हैं। गांव वालों का कहना है कि गर्मियों में भी यहां ठंडक बनी रहती है। पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी प्राकृतिक धरोहर से कम नहीं है।  “विकास” के दौर में पर्यावरण बचाने की मिसाल  जहां एक ओर विकास के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, वहीं चोलटी खेड़ी की यह बरोटी लोगों को प्रकृति बचाने का संदेश दे रही है। गांव वालों का कहना है कि पंजाब में ऐसे और अधिक प्राकृतिक क्षेत्र और जंगल होने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।  विदेशी शोधकर्ताओं ने भी किया अध्ययन  गांव के निवासी डॉ. मोहनलाल के अनुसार करीब चार वर्ष पहले पेरिस से एक विशेष टीम यहां पहुंची थी। उनके साथ मुंबई और चंडीगढ़ के कई शोधकर्ता भी आए थे। टीम ने इस विशाल बरोटी का इतिहास तैयार किया और इस पर शोध कार्य भी किया। डॉ. मोहनलाल ने बताया कि पंजाब सरकार का जंगलात विभाग भी समय-समय पर इस वृक्ष का निरीक्षण करता है। विभाग की ओर से इसकी जड़ों में दवाई डाली जाती है ताकि दीमक या अन्य बीमारी से पेड़ को नुकसान न पहुंचे।    25 साल पहले बनवाया गया था मंदिर  डॉ. मोहनलाल ने बताया कि करीब 25 वर्ष पहले फतेहगढ़ साहिब के तत्कालीन एडिशनल डिप्टी कमिश्नर दविंदर वालिया द्वारा यहां एक मंदिर का निर्माण करवाया गया था। उन्होंने बताया कि बरोटी के नीचे बना प्राचीन शिव मंदिर आज भी लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है, जहां साधु-संत निवास करते हैं।  झुकी शाखा फिर खुद खड़ी हो गई  डॉ. मोहनलाल के अनुसार करीब दो वर्ष पहले बरोटी का एक बड़ा हिस्सा झुक गया था। लोगों को लगा कि अब यह हिस्सा सूख जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद वहीं से नई मजबूती के साथ वह दोबारा खड़ा हो गया। गांव के लोग इसे चमत्कार के रूप में देखते हैं।  हर साल लगता है विशाल भंडारा  हर वर्ष अगस्त महीने में यहां विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है। दूर-दूर से लोग अपनी मन्नतें लेकर यहां पहुंचते हैं और बरोटी के नीचे बने शिव मंदिर में माथा टेकते हैं। भंडारे में दाल, रोटी, सब्जी, जलेबी और अन्य मिष्ठान वितरित किए जाते हैं। गांव वालों के अनुसार इस दौरान हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।   बुजुर्ग महिला ने सुनाई मान्यता गांव की एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि कई साल पहले एक व्यक्ति बरोटी की शाखा काटने के लिए हथियार लेकर आया था। उन्होंने उसे रोकते हुए कहा था कि यह “बाबा जी के अंग-पैर” हैं और इन्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। महिला के अनुसार उस व्यक्ति ने उनकी बात नहीं मानी और बाद में उसका दुर्घटना में बड़ा नुकसान हो गया। महिला ने बताया कि आज भी आसपास के गांवों से लोग यहां श्रद्धा के साथ आते हैं और इस बरोटी को प्रणाम करते हैं।  प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम  चोलटी खेड़ी की यह बरोटी केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की जीवंत मिसाल भी है। जिस समय दुनिया पेड़ों को बचाने की मुहिम चला रही है, उस समय पंजाब के इस छोटे से गांव के लोग पीढ़ियों से एक विशाल वृक्ष को अपने परिवार की तरह संभाल रहे हैं।  

रेलवे का बड़ा प्रोजेक्ट! मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक, बीना-जबलपुर रूट पर सफर होगा आसान

जबलपुर बुंदेलखंड और महाकौशल के रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर आई है. क्योंकि पश्चिम मध्य रेलवे के द्वारा बीना-जबलपुर को बाईपास करने की योजना बनाई गई है. इतना ही नहीं इसका सर्वे करने के लिए बजट की भी मंजूरी मिल गई है. करीब 83 लाख की लागत से इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें 166 किलोमीटर लंबे रूट का सर्वेक्षण होगा. अभी लोकेशन की तलाश चल रही है कि आखिर यह रेलवे बाईपास कहां से गुजरेगा? इसका सीधा फायदा बीना रेलवे जंक्शन को मिलने वाला है।  क्योंकि यह रेलवे जंक्शन वर्तमान समय में मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के अत्यधिक दबाव से जूझ रहा है. बाईपास रेलवे ट्रैक बनने से मालगाड़ियों को निकालने की योजना है, इससे यात्री गाड़ियों को आउटर सिग्नल पर रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी  बीना रेलवे स्टेशन से रोजाना गुजरती हैं 60 से 70 मालगाड़ी बुंदेलखंड का बीना रेलवे जंक्शन एक ऐसा सेंटर है जहां से बीना-कटनी, बीना-भोपाल, बीना-झांसी, जैसी दिशाओं में ट्रैक यानी रेलवे लाइन जाती है और रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार यहां से रोजाना 60 से 70 मालगाड़ी गुजरती हैं. इतना ही नहीं मालगाड़ी के अलावा अगर यात्री ट्रेनों की बात करें तो उनकी संख्या भी 150 प्लस है. रेलवे के अनुसार बिना स्टेशन पर रुकने वाली और थ्रू निकलने वाली गाड़ियों की संख्या 155 है. आज की स्थिति की बात करें तो सभी मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें एक ही ट्रैक से निकाली जाती हैं।  ट्रेनों को सीधे बायपास से निकाला जाएगा इसकी वजह से प्लेटफॉर्म की लूप लाइन के साथ मैन अप और डाउन ट्रैक व्यस्त रहता है. इसके अलावा रेलवे यार्ड में मालगाड़ियों को प्लेस करने और चलाने में ट्रैक व्यस्त हो जाता है. ट्रैक क्लियर न मिलने के कारण सवारी गाड़ियों को स्टेशन के होम या आईबीएच सिग्नल पर रोकना पड़ता है. इसकी वजह से न सिर्फ यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, बल्कि ट्रेनें भी डिटेन होती हैं. इस दबाव को कम करने के उद्देश्य से रेलवे ने बाईपास ट्रैक बनाने का निर्णय लिया है. बाईपास बनाने के बाद मालगाड़ियों को यार्ड में लेकर चलाने के बजाए सीधे बाईपास से निकाला जाएगा।  फाइनल रिपोर्ट तैयार होने के बाद कैबिनेट को भेजी जाएगी रिपोर्ट रेलवे के इंजीनियरों के द्वारा सर्वे रिपोर्ट में यह चीज देखी जाएगी कि इसका रूट कहां से गुजरेगा. भू अर्जन करने के लिए कितनी मुआवजा राशि खर्च करनी पड़ सकती है. इस नए रेलवे ट्रैक से कितने गांव कितने शहर कनेक्ट होंगे. ट्रैफिक किस तरह का मिलेगा, इस रास्ते में नदी पर कहां पुल बनाने पड़ेंगे. कहां पहाड़ को काटकर ट्रैक बिछाना पड़ेगा. इनकी फाइनल रिपोर्ट तैयार होने के बाद उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, जिसका प्रस्ताव कैबिनेट तक जाएगा. वहां से मोहर लगने के बाद ही बजट आवंटित किया जा सकता है।  यात्री ट्रेनों को आउटर पर रोकने की नहीं पड़ेगी जरूरत बीना के एक रेलवे अधिकारी ने बताया कि बाईपास बनने के बाद रेलवे स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्म और ट्रैक खाली रहेंगे. इससे यात्री ट्रेनों को आउटर पर रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ट्रेनों को सीधे प्लेटफॉर्म पर ले सकेंगे. इसके साथ ही परियोजना का उद्देश्य न सिर्फ स्टेशन का ट्रैफिक कम करना है, बल्कि यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में भी सुधार करना है।  बाईपास बनने से दूरी होगी कम बीना से जबलपुर जाने वाली रेलवे ट्रैक की दूरी की बात करें तो यह सागर, दमोह, कटनी होते हुए गुजरता है. जिसकी दूरी लगभग 351 किलोमीटर है और किसी भी ट्रेन से सफर करने के लिए कम से कम 6 घंटे का समय लगता है, लेकिन जब यह बाईपास बन जाएगा तो इसकी दूरी लगभग आदि कम होकर 166 किलोमीटर रह जाएगी, जिससे समय की बचत होगी किराया भी कम लगने लगेगा। 

सेहत के साथ युवाओं को मिल रही मुख्यधारा की रोशनी

रायपुर बीते पांच साल सुकमा निवासी 39 वर्षीय श्रीमती सीमा सिंह के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थे। माइग्रेन के दर्द से तड़पती सीमा ने राहत की चाह में दूर-दूर के बड़े शहरों के चक्कर काटे, एलोपैथी की ढेरों दवाइयां खाईं, लेकिन बीमारी जस की तस रही। निराशा के इन बादलों के बीच उम्मीद की एक किरण तब जागी, जब वे बीते 4 मई को 'आयुष स्पेशलिटी क्लिनिक सुकमा' पहुँचीं। यहाँ अनुभवी चिकित्सक डॉ. मनोरंजन पात्रो की देखरेख में लगभग एक सप्ताह तक चले आयुर्वेदिक इलाज, सटीक दवाइयों और पंचकर्म की 'शिरोधारा' पद्धति के जादू ने कमाल कर दिया। वर्षों पुराना वह दर्द गायब हो गया जिसने उनकी रातों की नींद छीन रखी थी। दर्द से इस मुफ्ती ने सीमा के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है, जिसके लिए उन्होंने दिल से शासन-प्रशासन का आभार जताया है। बदलती स्वास्थ्य व्यवस्था की सुखद तस्वीर सीमा सिंह की यह मुस्कान सुकमा जिला प्रशासन के उन संजीदा प्रयासों का नतीजा है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए किए जा रहे हैं। कलेक्टरअमित कुमार के पदभार संभालते ही जिला आयुष चिकित्सालय की तस्वीर बदलने के प्रयास तेज कर दिए गए। अस्पताल में न केवल बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया गया, बल्कि पारंपरिक और बेहद असरदार 'पंचकर्म' चिकित्सा की भी शुरुआत की गई। प्रशासन की इसी विशेष पहल का असर है कि आज यह अस्पताल रविवार को छोड़कर सप्ताह के छह दिन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है, जहाँ हर दिन औसतन 14 से 15 मरीज डॉ. पात्रो की देखरेख में नया और स्वस्थ जीवन पा रहे हैं। बंदूकों के साए से बाहर, मुख्यधारा का सहारा कलेक्टरअमित कुमार की यह मुहिम सिर्फ मरीजों को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण भी छिपा है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ सुकमा के युवाओं के पुनर्वास की भी एक अनूठी मिसाल पेश की है। कलेक्टर की विशेष पहल पर दो आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया और उन्हें इसी आयुष चिकित्सालय में 'कलेक्टर दर' पर सम्मानजनक रोजगार प्रदान किया गया। कभी गुमराह रहे इन युवाओं के हाथों को रोजगार देकर प्रशासन ने न सिर्फ उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी है, बल्कि जिले में शांति और विकास का एक नया अध्याय भी लिखा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का सुकमा मॉडल सुकमा का आयुष चिकित्सालय आज सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि उम्मीद और पुनर्वास का एक जीवंत केंद्र बन चुका है। एक तरफ जहाँ असाध्य बीमारियों से जूझ रहे आम नागरिकों को सुकमा की वादियों में ही विश्वस्तरीय आयुर्वेदिक और पंचकर्म उपचार मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ भटके हुए युवाओं को रोजगार देकर देश की मुख्यधारा में वापस लाया जा रहा है। स्वास्थ्य क्रांति और सामाजिक सुधार के इस बेजोड़ संगम ने साबित कर दिया है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो नक्सल प्रभावित माने जाने वाले सुकमा जैसे दूरस्थ अंचलों में भी संवेदनशीलता और सुशासन की नई इबारत लिखी जा सकती है।

उच्च शिक्षा विभाग ने समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को जारी किए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के परिपालन में उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में पुलिस, होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) में शहीद होने वाले कर्मियों की विधवाओं तथा उनके आश्रित बच्चों के लिए एक अतिरिक्त सीट आरक्षित की है। आयुक्त उच्च शिक्षा द्वारा इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विभागीय निर्देशानुसार प्रत्येक स्नातक पाठ्यक्रम में स्वीकृत सीटों के अतिरिक्त एक सुपरन्यूमेरेरी (अतिरिक्त) सीट निर्धारित की गई है, इससे नियमित सीटों की संख्या प्रभावित नहीं होगी। इस आरक्षण का लाभ केवल पात्र अभ्यर्थियों को सक्षम प्राधिकारी(गृह विभाग अथवा संबंधित विभाग) द्वारा जारी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर मिलेगा। पात्र अभ्यर्थियों को ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल पर पृथक श्रेणी के अंतर्गत आवेदन करना होगा।  

यात्रा से पहले जरूर चेक करें ट्रेन टाइमिंग, भोपाल रेल मंडल में कई ट्रेनों का रूट बदला

भोपाल उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल अंतर्गत जौनपुर जंक्शन स्टेशन पर चार मई से 27 मई तक यार्ड रिमॉडलिंग कार्य किया जा रहा है। रेलवे के अनुसार यह काम यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और ट्रेनों के बेहतर संचालन के लिए किया जा रहा है। इस दौरान भोपाल मंडल से होकर गुजरने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों का मार्ग अस्थायी रूप से बदल दिया गया है। इससे भोपाल सहित मध्य प्रदेश के यात्रियों को यात्रा के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होगी। इन ट्रेनों के बदले गए मार्ग रेलवे ने बताया कि वलसाड-मुजफ्फरपुर, गोदान एक्सप्रेस, ताप्ती गंगा एक्सप्रेस, इंदौर-पटना एक्सप्रेस और एलटीटी-अयोध्या कैंट जैसी कई ट्रेनों को अलग-अलग तारीखों में परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। कुछ ट्रेनों को वाराणसी, अयोध्या, सुलतानपुर और प्रयागराज होकर निकाला जाएगा, जबकि कुछ ट्रेनों के नियमित स्टापेज भी प्रभावित हो सकते हैं।  

मासूम इंदुनाथ को मिला आयुष्मान कार्ड, नेहा को मिला श्रम कार्ड

रायपुर सुशासन शिविर में हाथों-हाथ मिला योजनाओं का लाभ’ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में आयोजित सुशासन शिविर ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहे हैं। ‘सुशासन तिहार एवं बस्तर मुन्ने अभियान’ के तहत लगाए जा रहे शिविरों में लोगों को मौके पर ही विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। गादीरास में आयोजित क्लस्टर स्तरीय शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। साथ ही मौके पर ही आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी भी बनाई गई। इससे ग्रामीणों को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ तुरंत मिल सका। शिविर में उस समय भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब सोनाकुकानार गांव से आए मासूम इंदुनाथ का आयुष्मान कार्ड तत्काल बनाकर उसके परिवार को सौंप दिया गया। अब परिवार को बच्चे के इलाज और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बड़ी राहत मिली है। परिजनों ने प्रशासन की त्वरित व्यवस्था की सराहना करते हुए खुशी जताई। इसी तरह देवी चौक सुकमा में आयोजित शिविर में नेहा नाग श्रम कार्ड बनवाने पहुंचीं। अधिकारियों ने तुरंत प्रक्रिया पूरी करते हुए मौके पर ही उनका श्रम कार्ड बनाकर सौंप दिया। हाथों-हाथ श्रम कार्ड मिलने से नेहा बेहद खुश नजर आईं। उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें बिना दफ्तरों के चक्कर लगाए इतनी जल्दी सरकारी सुविधा मिली है। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इन शिविरों में लोगों की समस्याओं का तेजी से समाधान किया जा रहा है। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी मौके पर किए जा रहे हैं। सुशासन शिविरों के माध्यम से यह स्पष्ट हो रहा है कि शासन की योजनाएं अब केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंच रहा है। सुकमा जिले में प्रशासन की यह पहल ग्रामीणों के बीच भरोसा और संतोष का नया माहौल बना रही है।

मंत्री दयाल दास बघेल ने बाल वैज्ञानिक सृष्टि और पीयूष को किया सम्मानित मांडल राष्ट्रीय विज्ञान मेला दिल्ली के लिए चयनित

रायपुर प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत मुढ़ीपार में समाधान शिविर का आयोजन हुआ। जहां विकासखंड शिक्षा अधिकारी लक्ष्मी डडसेना के मार्गदर्शन व गौरव चंद्राकर के विशेष देखरेख में तैयार किया गया बाल वैज्ञानिक सृष्टि यदु पीएमविद्यालय पिथौरा का मॉडल मल्टीपरपज स्मार्ट रोबोटिक्स एवं पियूष साहू सेंट फ्रांसिस विद्यालय पिथौरा का मॉडल सांपों की सुरक्षा वाला चारपाई का आगामी सितंबर माह 2026 में होने वाले राष्ट्रीय विज्ञान मेला दिल्ली के लिए चयनित किया गया है। इस उपलब्धि के लिए मुख्य अतिथि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्रीदयाल दास बघेल ने बाल वैज्ञानिकों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, बसना विधायक डॉ संपत अग्रवाल, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह उपस्थित थे। इस उपलब्धि के लिए उषा पुरुषोत्तम धृतलहरे जनपद अध्यक्ष, ब्रह्मा पटेल जनपद उपाध्यक्ष, रामदुलारी सीताराम सिन्हा जिला पंचायत सभापति, बीएल देवांगन जिला शिक्षा अधिकारी ने बाल वैज्ञानिक सृष्टि और पीयूष और उनके मार्गदर्शन शिक्षक गौरव चंद्राकर को बधाई और शुभकामनाएं दी।  

सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री ने कहा-जनता का विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी ताकत

रायपुर  सुशासन तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने आज रायगढ़ जिले के कुसमुरा में आयोजित सभा में जिलेवासियों को 102 करोड़ 93 लाख 24 हजार रुपए के विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के कुल 24 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 33 करोड़ 98 लाख 47 हजार रुपए लागत के 13 कार्यों का लोकार्पण तथा 68 करोड़ 94 लाख 77 हजार रुपए लागत के 11 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है।  मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि प्रदेश सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है और अब जनता स्वयं परिवर्तन और विकास को महसूस कर रही है। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि रायगढ़ से उनका आत्मीय रिश्ता वर्षों पुराना है और यहां की जनता ने उन्हें हमेशा परिवार के सदस्य की तरह स्नेह दिया है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास, संवाद और समाधान का सशक्त माध्यम बन चुका है।  मुख्यमंत्रीसाय ने बताया कि 1 मई से 10 जून तक आयोजित सुशासन तिहार के माध्यम से प्रदेशभर में आम नागरिकों की समस्याओं का प्राथमिकता के साथ निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए चलाए गए विशेष अभियान से हजारों लोगों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीब परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।  प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है तथा 13 लाख किसानों को 3716 करोड़ रुपए का बकाया बोनस दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है और सरकार अंत्योदय की भावना के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्रीसाय ने प्रशासनिक पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि आगामी समय में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रारंभ की जाएगी, जिससे आम नागरिक घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और समय-सीमा में उनका निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना एवं बिजली बिल भुगतान समाधान योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार जरूरतमंद परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों की मांगों पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने ग्राम सूपा, घुघुवा, पुटकापुरी, तारापुर, उसरौट और काशीचुआं को जोड़ने वाली सड़क निर्माण कार्य को पूर्ण कराने की घोषणा की। इसके साथ ही कुसमुरा में महतारी सदन निर्माण, धनागर सोसायटी के अंतर्गत खाद्य भंडारण हेतु गोदाम निर्माण तथा उप स्वास्थ्य केंद्र के उन्नयन की दिशा में आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समय-सीमा में विकास कार्यों को पूर्ण कर जनता को उसका लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने लगभग 5 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले कुसमुरा कॉलेज भवन निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी। कार्यक्रम में वित्त मंत्रीओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन और विकास का नया दौर प्रारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीब परिवारों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार गठन के तुरंत बाद किसानों को 3716 करोड़ रुपए का बकाया बोनस दिया गया तथा आज प्रदेश में 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना, नारी शक्ति ऋण योजना और भूमिहीन मजदूर साथी योजना जैसी योजनाओं से आम नागरिकों को सीधा लाभ मिल रहा है। लोकसभा सांसदराधेश्याम राठिया ने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार उत्साहपूर्वक आयोजित किया जा रहा है और सरकार जनता के बीच पहुंचकर विकास कार्यों को नई गति दे रही है। इस अवसर पर राज्यसभा सांसददेवेन्द्र प्रताप सिंह, नगर निगम रायगढ़ के महापौरजीवर्धन चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।