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अवैध निकासी और वेतन घोटाले के बाद सख्ती, कोडरमा में तबादला लिस्ट तैयार

कोडरमा जिला मुख्यालय में लंबे समय से एक ही कार्यालय और एक ही पद पर जमे कर्मियों के स्थानांतरण की तैयारी तेज हो गई है। मुख्य सचिव के निर्देश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है। संवेदनशील पदों पर तीन वर्षों से अधिक समय से कार्यरत कर्मियों की सूची तैयार की जा रही है और माना जा रहा है कि अगले सप्ताह बड़े पैमाने पर तबादला आदेश जारी हो सकता है। जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में विभिन्न जिलों में कोषागार के माध्यम से अवैध निकासी और वेतन घोटाले के मामले सामने आने के बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। इसके बाद सभी जिलों को निर्देश जारी करते हुए डीडीओ, लेखा, कोषागार और वेतन प्रसंस्करण से जुड़े कर्मियों का अनिवार्य स्थानांतरण करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि एक ही पद या कार्यालय में दीर्घकालीन पदस्थापन पर रोक लगाई जाए। साथ ही 30 मई तक आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इधर, कोडरमा जिला मुख्यालय में कई कर्मी पांच वर्षों से अधिक समय से एक ही कार्यालय में कार्यरत हैं। कुछ कर्मियों का अन्यत्र स्थानांतरण होने के बावजूद प्रतिनियुक्ति के जरिए उन्हें फिर से पसंदीदा पदों पर बनाए रखा गया है। ऐसे में मुख्य सचिव के आदेश के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। इस संबंध में मंगलवार को जिला स्थापना समिति की बैठक बुलाई गई है, जिसमें स्थानांतरण सूची को अंतिम रूप दिया जा सकता है। वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाने को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव ने संविदा और एकमुश्त मानदेय पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को वित्तीय कार्यों से दूर रखने का निर्देश दिया है। इसके अलावा वेतन भुगतान में अनियमितताओं की पहचान के लिए एआई आधारित डेटा एनालिटिक्स प्रणाली लागू करने, रिस्क बेस्ड सैंपलिंग के जरिए संदिग्ध मामलों की जांच कराने तथा पिछले पांच वर्षों में असामान्य बजट मांगों की समीक्षा करने का आदेश दिया गया है।

नायब सिंह सैनी ने शुरू की नई डिजिटल सुविधा, किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत

 चंडीगढ़  हरियाणा में अब भवनों के निर्माण के लिए नक्शों की अनुमति ऑनलाइन तरीके से मिलेगी। इसके अलावा, किसानों को उनके वाट्सएप पर जे-फार्म भेजे जाएंगे, जिनके आधार पर वे 72 घंटे के भीतर अपनी फसल की पेमेंट प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को इन दोनों योजनाओं की शुरुआत की। हरियाणा सरकार ने 25 अप्रैल को चालू रबी खरीद सीजन के दौरान एमएसपी पर बेची गई गेहूं, सरसों व चना की फसलों के जे-फार्म किसानों के वाट्सएप पर भेजने की घोषणा की थी। छह मई तक 5 लाख 78 हजार किसानों द्वारा अपनी उपज मंडियों में बेची गई। इन किसानों को 13 लाख 77 हजार जे-फार्म जारी किए गए हैं। यह सुविधा प्रदेश में पहली बार शुरू की गई है। अब किसानों को अपना जे-फार्म लेने के लिए आढ़तियों के पास नहीं जाना पडे़गा। आसानी से मिलेगा अप्रूवल हरियाणा ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम के अंतर्गत डिजिटल प्लेटफार्म काम करेगा, जिसके माध्यम से आम नागरिकों को घर बैठे ही प्लाट और निर्माण से जुड़ी मंजूरी बिना किसी देरी के आसानी से मिल सकेंगी। पहले चरण में, पुरानी नगर पालिकाओं या कोर क्षेत्रों में प्लांड रिहायशी प्लाटों की ऑनलाइन मंजूरी शुरू की गई है। इस सिस्टम से समय की बचत होगी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और काम की जवाबदेही तय होगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्लेटफार्म की शुरुआत करते हुए कहा कि अब आम आदमी को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी व सरल बनेगी। नया सिस्टम लागू होने से पहले आर्किटेक्ट्स और नगर निकाय अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने जानकारी दी कि जे-फार्म किसानों को वाट्सएप पर भेजकर योजना की शुरुआत की जा चुकी है। भविष्य में फसल की बिक्री के बाद समस्त जे-फार्म किसानों को उनके वाट्सएप नंबर पर ही मिलेंगे। किसानों की कितने हुई आवक? मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गेहूं खरीद के लिए मंडियों में व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रदेश में एक अप्रैल से सात मई तक 84 लाख 18 हजार टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें से 83 लाख 75 हजार टन गेहूं की बिक्री हेतु किसानों का बाायोमीट्रिक सत्यापन हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब तक 82 लाख 55 हजार टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। एक सवाल के जवाब में नायब सिंह सैनी ने कहा कि बाायोमीट्रिक सत्यापन के लिए किसानों को कोई परेशान नहीं थी, बल्कि विपक्षी दलों के नेताओं को ज्यादा दिक्कत थी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक केएम पांडुरंग, शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक चंद्रशेखर खरे और मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीन आत्रे शामिल रहे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में हुए शामिल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के साथ ही सुशासन, सुरक्षा और विकास के एक नवयुग का आरंभ हो गया है। पश्चिम बंगाल अब सच्चे अर्थो में 'आमार सोनार बांग्ला' बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन एवं पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में यह राज्य अब अपने पुराने गौरव और वैभव को प्राप्त कर समग्र विकास, निवेश, सुशासन एवं जनकल्याण के नए-नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कोलकाता के बिग्रेड परेड ग्राउंड में पश्चिम बंगाल की नवगठित राज्य सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। समारोह में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह, केन्द्रीय रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह, अन्य वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्रीगण, एनडीए शासित विभिन्न राज्यों के विभिन्न मुख्यमंत्री एवं अतिविशिष्ट जनों की गरिमामय उपस्थिति में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में  सुवेन्दु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल  आर.एन. रवि ने  सुवेन्दु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद एवं नई सरकार के 5 अन्य मंत्रीगण को भी पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी को लोक कल्याण के इस नए दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए समर्पित मैदानी कार्यकर्ताओं एवं राज्य की जागरूक जनता को भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं हैं।  

वर्ष 2015-17 की तुलना में 2021-23 की सर्वे रिपोर्ट में काफी कम दर्ज की गई मृत्यु दर

लखनऊ योगी सरकार की 102 एंबुलेंस सेवा (मदर एंड चाइल्ड सर्विसेस) गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। पहले गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने से उनकी जान को खतरा रहता था। ऐसे में योगी सरकार ने 102 एंबुलेंस सेवा का सुदृढ़ीकरण कर मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है। योगी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि वर्तमान में 102 एंबुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम घटकर 7 मिनट रह गया है। इसका मतलब यह है कि आपात स्थिति में मात्र सात मिनट में चिकित्सीय सुविधा प्राप्त हो रही है। रिस्पांस टाइम में उत्तर प्रदेश पूरे देश में नंबर एक पर है।  2,270 एंबुलेंस के जरिये रोजाना 40 हजार से अधिक गर्भवती हो रहीं लाभान्वित   अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य अमित घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने के लिए बड़े कदम उठाये। इसके लिए जहां प्रदेश के शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों को सुदृढ़ किया गया, वहीं 102 एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम को कम करने के लिए विभिन्न कदम उठाए गये। उसके नतीजे आज सबके सामने हैं। सीएम योगी की दूरदर्शी सोच और मॉनीटरिंग का ही असर है कि वर्तमान में एंबुलेंस सेवा 102 का रिस्पांस टाइम मात्र 7:06 मिनट है जबकि वर्ष 2016 में रिस्पांस टाइम 11:28 मिनट था। यह रिस्पांस टाइम अचानक कम नहीं हुआ बल्कि सीएम योगी के विगत नौ वर्षों में लगातार किए गये प्रयासों और पहलों से संभव हो पाया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सीएम योगी ने 2019 और 2023 में खटारा हो चुकी क्रमश: 1,554 और 674 एंबुलेंस को हटाकर नई स्वास्थ्य तकनीक से लैस एंबुलेंस की खरीद की। इसके अलावा सेवा को बेहतर करने के लिए 306 अतिरिक्त नई एंबुलेंस को जोड़ा गया। वर्तमान में प्रदेश में कुल 2,270 एंबुलेंस सेवा 102 संचालित हैं। इसके जरिये प्रदेश में औसतन रोजाना 40,524 जच्चा-बच्चा को सहायता प्रदान की जा रही है।  प्रदेश में बेहतर एंबुलेंस सेवा से मातृ मृत्यु अनुपात में दर्ज की गई कमी  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि 102 एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम में कमी आने से प्रदेश में मातृ मृत्यु अनुपात में काफी कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (एसआरएस) के अनुसार वर्ष 2015-17 में प्रदेश की मातृ मृत्यु अनुपात 216 प्रति लाख दर्ज की गयी थी, जो कम हो करके वर्ष 2021-23 में 141 प्रति लाख पहुंच गई है। पूरे देश में सबसे कम रिस्पांस टाइम उत्तर प्रदेश का मिशन निदेशक के अनुसार, सीएम योगी के प्रयासों का ही नतीजा है कि साल दर साल एंबुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम कम होता गया। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस सेवा 102 का रिस्पांस टाइम वर्ष 2016 में 11:28 मि., वर्ष 2017 में 12:01 मि. और वर्ष 2018 में 11:21 मि. दर्ज किया गया। वहीं वर्ष 2020 में 13:42 मि. और वर्ष 2021 में 12:02 मि. रिस्पांस टाइम दर्ज किया। वर्ष 2020 और 2021 का रिस्पांस टाइम वैश्विक कोरोना बीमारी के समय का है। इसके बाद वर्ष 2022 में 7:01 मिनट और वर्ष 2023 में 7:02 मिनट दर्ज किया गया है। वहीं वर्तमान में रिस्पांस टाइम 7:06 मिनट है। सबसे बड़ी बात यह है कि पूरे देश में एंबुलेंस सेवा का सबसे कम रिस्पांस टाइम उत्तर प्रदेश का ही है, जबकि उत्तर प्रदेश देश भर में सबसे अधिक 25.74 करोड़ जनसंख्या वाला राज्य है। उत्तर प्रदेश एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम 7:06 मिनट के साथ देशभर में पहले स्थान पर है। वहीं दूसरे स्थान पर 7:57 मिनट के साथ राजस्थान, तीसरे स्थान पर 10:45 मिनट के साथ केरल है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को लेकर हरियाणा सरकार की खास तैयारी, CM नायब सैनी का बड़ा बयान

चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 12 ज्योतिर्लिंग की चर्चा करते हुए भारत सरकार द्वारा 11 मई को बनाए जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर प्रकाश डाला है। नायब सैनी ने विचार रखते हुए कहा कि हमारे देश में अनेक ऐसे पूजनीय स्थल हैं, जो हमारी आस्था और संस्कृति को मजबूत बनाते हैं। गुजरात स्थित श्री सोमनाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि यह भारत के आध्यात्मिक संकल्प का जीवंत प्रतीक है। भगवान शिव के 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखने वाला सोमनाथ मंदिर, भारत के पवित्र भूगोल में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह प्रत्येक भारतीय के जीवन में रचा-बसा हुआ है, जिसके बिना वह अपने अस्तित्व की कल्पना नहीं कर सकता। भारत सरकार 11 मई तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रही है, जो सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व है। हरियाणा सरकार इस पर्व को उसी भव्यता, आध्यात्म और उत्साह से मनाएगी, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की है। इस मंदिर ने सदियों तक आक्रमण और पुनर्निर्माण का अद्वितीय इतिहास देखा है। वर्ष 1026 में हुए आक्रमण के बाद भी हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ, जो भारतीय समाज की अटूट आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है। स्वतंत्रता के पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और 11 मई 1951 को इसका प्राण-प्रतिष्ठा समारोह सम्पन्न हुआ। इस पर्व को मनाने का यही मूल उद्देश्य है कि कितने ही उतार-चढ़ाव आए, परंतु सोमनाथ हमारी अटूट आस्था का प्रतीक बना रहा और बना रहेगा। यह भारतीय जन मानस के हृदय में वास करता है। यह पर्व उन असंख्य महान विभूतियों को स्मरण करने का भी है, जो सोमनाथ मंदिर पर क्रूर हमलों के बावजूद उनके सम्मुख डटकर खड़े रहे। 1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी, सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में उन्हें सोमनाथ मंदिर की दुर्दशा व्यथित कर रही थी। 13 नवंबर 1947 को दीपावली के समय सरदार पटेल ने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया था कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। उनके आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नये उत्साह से भर दिया। दुर्भाग्यवश सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पावन अवसर पर सोमनाथ के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की है, क्योंकि बीते 75 वर्षों में यह मंदिर केवल पुनर्निर्माण का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास और अटूट आस्था का सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने अध्यक्ष होने के नाते भी इस विरासत को संजोकर रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। आज सोमनाथ मंदिर भव्य वास्तुकला, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय संगम है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि देश की आत्मा से जुड़ा एक जीवंत तीर्थ है, जो हर दिन लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर के धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों को विश्वविख्यात कर हिंदू धर्म को प्रखर प्रतिनिधित्व दिया है। उन्होंने विकास भी विरासत भी के मूल मंत्र से प्रेरित होकर सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन तक आध्यात्मिक केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। साथ ही, उनकी पारंपरिक पहचान को भी बरकरार रखा है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व ने हिंदू धर्म को पुनर्जीवित किया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस अदभुत धार्मिक शक्ति के दर्शन मात्र से ही आपको अविस्मरणीय अनुभूति होगी।

बिहार को बड़ी सौगात: रक्सौल एयरपोर्ट से नेपाल तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी, जल्द शुरू होंगी फ्लाइट्स

रक्सौल (पूच) भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना को लेकर शनिवार को बड़ी जानकारी सामने आई। पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने अधिकारियों के साथ प्रस्तावित एयरपोर्ट एवं तिलावे नदी क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद कहा कि रक्सौल एयरपोर्ट का रनवे पटना एयरपोर्ट से करीब 360 मीटर बड़ा होगा। उन्होंने दावा किया कि यह एयरपोर्ट आकार और सुविधाओं के मामले में उत्तर बिहार का महत्वपूर्ण हवाई केंद्र बनेगा। निरीक्षण के बाद एसएसबी मुख्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद ने कहा कि यदि सभी कार्य तय समयसीमा के अनुसार पूरे हुए तो अगले लगभग 20 महीनों में रक्सौल से हवाई सेवा शुरू हो सकती है। बड़े विमानों की लैंडिंग के अनुरूप बनेगा रनवे सांसद डॉ. जायसवाल ने बताया कि प्रस्तावित एयरपोर्ट का रनवे तिलावे नदी के उस पार तक विस्तारित किया जाएगा, ताकि बड़े विमानों की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सके। उन्होंने कहा कि बड़े रनवे के कारण विमानों को इमरजेंसी ब्रेकिंग की आवश्यकता कम पड़ेगी, जिससे एयरपोर्ट तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित और आधुनिक होगा। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट निर्माण के लिए कुल 139 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शेष भूमि अधिग्रहण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। कंसल्टेंट चयन के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है और अगले तीन महीनों में विस्तृत डिजाइन एवं तकनीकी नक्शा तैयार होने के बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सांसद ने कहा कि निर्माण एजेंसी को एयरपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद दो महीने तक तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा मानक जांच एवं ट्रायल लैंडिंग की प्रक्रिया चलेगी। उत्तर बिहार और नेपाल सीमा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ सांसद ने कहा कि रक्सौल एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर बिहार एवं भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के आर्थिक, व्यापारिक और पर्यटन विकास का नया केंद्र बनेगा। एयरपोर्ट बनने से नेपाल आने-जाने वाले यात्रियों, व्यापारियों एवं पर्यटकों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही स्थानीय लोगों को पटना जाकर विमान सेवा लेने की मजबूरी समाप्त होगी। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट परियोजना के साथ-साथ बेतिया-रक्सौल और मोतिहारी-रक्सौल फोरलेन सड़क परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र की कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। वर्ष 2016 में मिली थी स्वीकृति डॉ. जायसवाल ने बताया कि वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पीएम पैकेज के तहत एयरपोर्ट परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि भूमि अधिग्रहण एवं नीतिगत कारणों से परियोजना लंबे समय तक अटकी रही। वर्ष 2023 में भूमि अधिग्रहण की अनुमति मिलने के बाद परियोजना ने गति पकड़ी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू एवं बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की पहल से रक्सौल का सपना अब साकार होता दिख रहा है। सांसद ने कहा कि वर्ष 2026 रक्सौल और चंपारण के विकास के लिए विशेष वर्ष साबित होगा। उन्होंने बताया कि दो माह के भीतर रेलवे क्रॉसिंग संख्या 33 एवं 34 पर आरओबी निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। साथ ही रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे परियोजना को भी गति मिलने की संभावना है। इस अवसर पर रक्सौल विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा, नरकटिया विधायक विशाल कुमार, सुगौली के राकेश गुप्ता उर्फ बबलू गुप्ता, पूर्व विधायक उमाकांत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक कुमार पांडेय, एसडीओ मनीष कुमार, एसडीपीओ मनीष आनंद सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।  

650वीं जयंती पर श्रद्धा का महासंगम: धार्मिक समागम और नगर कीर्तन की तैयारियां तेज

अमृतसर. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से भक्त रविदास जी की 650वीं जयंती को बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में मुख्य कार्यालय में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने की। बैठक में आगामी धार्मिक समागमों, नगर कीर्तन, सेमिनार और अन्य कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई। एडवोकेट धामी ने बताया कि 20 फरवरी 2027 को आने वाली भक्त रविदास जी की 650वीं जयंती को ऐतिहासिक तरीके से मनाया जाएगा। इसके तहत भक्त रविदास जी के जीवन, उनके दर्शन, सामाजिक संदेश और गुरबाणी से संबंधित छह बड़े सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर आठ कीर्तन दरबार भी सजाए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि भक्त रविदास जी के जन्म स्थान गोवर्धनपुर से एक विशाल नगर कीर्तन निकाला जाएगा। यह नगर कीर्तन अलग-अलग राज्यों से होता हुआ पंजाब पहुंचेगा। नगर कीर्तन के दौरान भक्त रविदास जी के उपदेशों और समाज सुधार के संदेश को लोगों तक पहुंचाया जाएगा। भक्त रविदास जी से संबंधित पुस्तकें होंगी प्रकाशित एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि भक्त रविदास जी के जीवन और इतिहास से संबंधित पुस्तकें भी विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित की जाएंगी, ताकि देश और विदेश में रहने वाले लोग उनके विचारों और शिक्षाओं से जुड़ सकें। उन्होंने बताया कि कार्यक्रमों के सफल आयोजन और संत-महापुरुषों के साथ बेहतर तालमेल के लिए एसजीपीसी सदस्यों की अलग-अलग उप समितियां बनाई हैं। ये समितियां विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों से संपर्क करेंगी। इस संबंध में 25 मई को एक और बैठक कर सुझाव लिए जाएंगे। बैठक के दौरान परीक्षाओं में सिख विद्यार्थियों के कक्कार उतरवाने के मामले पर भी चर्चा हुई। एडवोकेट धामी ने कहा कि एसजीपीसी के विरोध के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी घटनाएं न होने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिख भावनाओं से जुड़ा हुआ है और एजेंसी को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। बेअदबी कानून को लेकर पूछे गए सवाल पर धामी ने कहा कि एसजीपीसी हमेशा दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने के पक्ष में रही है, लेकिन नए कानून में शामिल कुछ प्रावधानों को लेकर संगतों में आशंकाएं हैं। उन्होंने कहा कि धर्म लोगों को प्रेम, भाईचारे और निर्मलता का संदेश देता है। सरकार को सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए लोगों की चिंताओं को दूर करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अकाल तख्त साहिब जो भी आदेश देगा, एसजीपीसी उसका पूरी तरह पालन करेगी।

सोमनाथ मंदिर को बताया भारत की आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक, सीएम सैनी का विचार

 चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 12 ज्योतिर्लिंग की चर्चा करते हुए भारत सरकार द्वारा 11 मई को बनाए जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर प्रकाश डाला है, नायब सैनी के विचार कुछ इस प्रकार है… हमारे देश में अनेक ऐसे पूजनीय स्थल हैं, जो हमारी आस्था और संस्कृति को मजबूत बनाते हैं। गुजरात स्थित श्री सोमनाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि यह भारत के आध्यात्मिक संकल्प का जीवंत प्रतीक है। भगवान शिव के 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखने वाला सोमनाथ मंदिर, भारत के पवित्र भूगोल में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह प्रत्येक भारतीय के जीवन में रचा-बसा हुआ है, जिसके बिना वह अपने अस्तित्व की कल्पना नहीं कर सकता। भारत सरकार 11 मई तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रही है, जो सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व है। हरियाणा सरकार इस पर्व को उसी भव्यता, आध्यात्म और उत्साह से मनाएगी, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की है। इस मंदिर ने सदियों तक आक्रमण और पुनर्निर्माण का अद्वितीय इतिहास देखा है। वर्ष 1026 में हुए आक्रमण के बाद भी हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ, जो भारतीय समाज की अटूट आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है। स्वतंत्रता के पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और 11 मई 1951 को इसका प्राण-प्रतिष्ठा समारोह सम्पन्न हुआ। इस पर्व को मनाने का यही मूल उद्देश्य है कि कितने ही उतार-चढ़ाव आए, परंतु सोमनाथ हमारी अटूट आस्था का प्रतीक बना रहा और बना रहेगा। यह भारतीय जन मानस के हृदय में वास करता है। यह पर्व उन असंख्य महान विभूतियों को स्मरण करने का भी है, जो सोमनाथ मंदिर पर क्रूर हमलों के बावजूद उनके सम्मुख डटकर खड़े रहे। 1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी, सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में उन्हें सोमनाथ मंदिर की दुर्दशा व्यथित कर रही थी। 13 नवंबर 1947 को दीपावली के समय सरदार पटेल ने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया था कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। उनके आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नये उत्साह से भर दिया। दुर्भाग्यवश सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पावन अवसर पर सोमनाथ के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की है, क्योंकि बीते 75 वर्षों में यह मंदिर केवल पुनर्निर्माण का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास और अटूट आस्था का सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने अध्यक्ष होने के नाते भी इस विरासत को संजोकर रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। आज सोमनाथ मंदिर भव्य वास्तुकला, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय संगम है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि देश की आत्मा से जुड़ा एक जीवंत तीर्थ है, जो हर दिन लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर के धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों को विश्वविख्यात कर हिंदू धर्म को प्रखर प्रतिनिधित्व दिया है। उन्होंने विकास भी विरासत भी के मूल मंत्र से प्रेरित होकर सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन तक आध्यात्मिक केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। साथ ही, उनकी पारंपरिक पहचान को भी बरकरार रखा है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व ने हिंदू धर्म को पुनर्जीवित किया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस अदभुत धार्मिक शक्ति के दर्शन मात्र से ही आपको अविस्मरणीय अनुभूति होगी। – लेखक नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा

हेड मास्टर पर गिरी गाज: ‘लक्ष्मी देवी भारद्वाज’ की जगह पढ़ाया ‘हाले लुइया’, DEO का एक्शन

जांजगीर-चांपा. जिले में स्कूली बच्चों को धार्मिक रूप से भड़काने और धर्मांतरित करने का मामला सामने आया है. ग्रामीणों की शिकायत के पर डीईओ ने कार्रवाई करते हुए महिला प्रधान पाठक को निलंबित कर दिया है. इसमें बड़ी बात यह है कि जिस हेड मास्टर के खिलाफ कार्रवाई हुई हैं, उनका नाम लक्ष्मी देवी भारद्वाज है, जो छात्र-छात्राओं को हिन्दू देवी-देवताओं के विरुद्ध भड़काकर ईसाई रीति-नीति से धर्मांतरित करने का प्रयास रही थीं. जानकारी के अनुसार, बलौदा के पीएमश्री कन्या प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक लक्ष्मी देवी भारद्वाज के खिलाफ ग्रामीणों ने जनसमस्या शिविर के दौरान शिकायत की थी. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महिला प्रधान पाठक स्कूल में प्रार्थना सभा में “जन गण मन” की जगह अन्य धार्मिक वाक्य सिखाती हैं. यही नहीं छात्र-छात्राओं को हिन्दू देवी-देवताओं के विरुद्ध भड़काकर ईसाई रीति-नीति से धर्मांतरित करने का प्रयास रही थीं. इसके साथ वित्तीय अनियमितता और फर्जी बिल-वाउचर के भी आरोप लगाए गए. शिविर में शिकायत सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा. जिला शिक्षा अधिकारी ने शिकायत पर महिला प्रधान पाठक को कारण बताओ सूचना जारी किया गया. प्रधान पाठक द्वारा जवाब संतोष जनक नहीं देने पर उन्हें कृत्य को गंभीर कदाचार की श्रेणी में पाते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया. इसके साथ उनका मुख्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी बलौदा, जिला जांजगीर-चांपा नियत किया गया. निलंबन काल में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी. थाने में भी दर्ज किया गया मामला धर्मांतरण करने और लोक शांति भंग होने के अंदेशे पर पीएमश्री कन्या प्राथमिक शाला, बलौदाबाजार की प्रधान पाठक लक्ष्मी भारद्वाज के खिलाफ बलौदा थाना में ईश्तगासा क्रमांक 261 / 2025 धारा 126, 135 ( 3 ) बीएनएसएस कायम किया गया है. निलंबन के साथ थाने में मामला दर्ज होने से लक्ष्मी देवी भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ गई हैं. 

प मुख्यमंत्री शुक्ल ने पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को दी बधाई

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने आज कोलकाता में पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी से भेंट कर उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक जनादेश प्रदेश में विकास, सुशासन, सुरक्षा एवं राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रति जनता के अटूट विश्वास को नई मजबूती देगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री  अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विकास एवं जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर होगा और राज्य प्रगति एवं समृद्धि के नए प्रतिमान स्थापित करेगा।