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कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मिली मंजूरी, सीएम योगी ने पीएम मोदी का जताया आभार

कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी मिलने पर सीएम योगी ने पीएम मोदी का जताया आभार बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और कानपुर रिंग रोड को मिलेगी निर्बाध कनेक्टिविटी 117.7 किमी लंबे हाईवे पर खर्च किए जाएंगे 7,145 से अधिक करोड़ रुपये लखनऊ,   उत्तर प्रदेश को बेहतर सड़क संपर्क और औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ी सौगात मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने कानपुर-कबरई एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण को मंजूरी दे दी है।  7,145 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाली इस परियोजना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि 'विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प को नई शक्ति देने वाले इस दूरदर्शी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक आभार। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट में लिखा कि भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और कानपुर रिंग रोड को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे आवागमन सुगम होगा, निवेश को नई गति मिलेगी और क्षेत्र के औद्योगिक विकास को सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा। डेढ़ घंटे में पूरा होगा सफर राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के अंतर्गत बनने वाला यह 117.7 किलोमीटर लंबा चार लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे भविष्य में छह लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इस हाईवे के बनने के बाद कानपुर से कबरई तक का सफर, जो अभी करीब साढ़े तीन घंटे में पूरा होता है, वह घटकर करीब डेढ़ घंटे रह जाएगा। बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश को मिलेगा फायदा यह हाईवे कानपुर, कबरई, सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के बीच तेज और सुगम संपर्क उपलब्ध कराएगा। इससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों का जुड़ाव मध्य प्रदेश के खनिज, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों से और मजबूत होगा। इससे व्यापार, उद्योग और माल परिवहन को भी गति मिलेगी। रोजगार के नए अवसर इस परियोजना के निर्माण से बड़ी संख्या में रोजगार का भी सृजन होगा। अनुमान है कि निर्माण कार्य के दौरान करीब 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी।

भोपाल: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत, आईईएचई में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का तिलक लगाकर हुआ स्वागत

महाविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की हुई शुरुआत, आईईएचई भोपाल में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का तिलक लगाकर किया गया आत्मीय स्वागत Working Together Towards Excellence के संकल्प के साथ शुरू हुई नई शैक्षणिक यात्रा भोपाल प्रदेश के समस्त महाविद्यालयों में बुधवार से नए शैक्षणिक सत्र 2026 की शुरुआत हो गई है। उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (आईईएचई), भोपाल में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए "दीक्षारंभ प्रवेश उत्सव एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम" उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासित एवं प्रेरणादायी वातावरण, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं तथा उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं से परिचित कराते हुए उच्च शिक्षा की नई यात्रा के लिए तैयार करना था। इस अवसर पर संस्थान के वार्षिक संकल्प "Working Together Towards Excellence" को विद्यार्थियों के समक्ष मार्गदर्शक विचार के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत नवप्रवेशित विद्यार्थियों का मुख्य प्रवेश द्वार पर अक्षत एवं तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया। हरित वसुंधरा क्लब के तत्वावधान में विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों द्वारा वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। इसके पश्चात विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों, अनुशासन, अध्ययन संसाधनों, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तथा उच्च शिक्षा में सफलता के लिए आवश्यक कौशलों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम करने तथा संस्थान की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर संस्थान के संचालक डॉ. (प्रो.) प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि उच्च शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता एवं कौशल विकास का सशक्त आधार है। उन्होंने कहा कि आईईएचई भोपाल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने संस्थान के इस वर्ष के संकल्प "Working Together Towards Excellence" का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्कृष्टता का लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब शिक्षक एवं विद्यार्थी सहयोग, समर्पण और सहभागिता की भावना के साथ मिलकर कार्य करें। उन्होंने सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को उज्ज्वल एवं सफल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। दीक्षारंभ समारोह के अंतर्गत वाणिज्य, कला एवं विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों के लिए पृथक-पृथक अभिमुखीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में विद्यार्थियों का शिक्षकों से परिचय कराया गया तथा पाठ्यक्रम, अध्ययन पद्धति, अकादमिक अवसरों, अनुसंधान गतिविधियों एवं संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी गई | मानसिक स्वास्थ्य के बारे में दी गई जानकारी दीक्षारंभ कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण "Mental Health and Wellness Program" रहा। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यबल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन एवं सकारात्मक जीवनशैली के महत्व से अवगत कराया गया। 1 जुलाई 2026 को आयोजित सत्र में एम्स भोपाल की बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. अनुराधा कुशवाहा ने विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक वातावरण में सहज रूप से समायोजित होने, अध्ययन एवं व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने तथा मानसिक रूप से सुदृढ़ रहने के व्यावहारिक उपाय बताए। वहीं, 2 जुलाई 2026 को सागर पब्लिक स्कूल, भोपाल की मनोवैज्ञानिक डॉ. इंदु सिंह विद्यार्थियों से संवाद कर मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देंगी। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के शिक्षकों ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा व्यक्तित्व विकास, ज्ञान विस्तार एवं उज्ज्वल भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक, सांस्कृतिक, खेल एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। बच्चों के साथ पहुंचे अभिभावक इस अवसर पर कुल 756 नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि 117 अभिभावकों  ने भी कार्यक्रम में सहभागी होकर संस्थान की शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान संस्थान का वार्षिक टैगलाइन "Working Together Towards Excellence" विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के सामूहिक संकल्प के रूप में प्रतिध्वनित हुआ। उल्लेखनीय है कि संस्थान की सामान्य परिषद के अध्यक्ष उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, कार्यसमिति के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, एवं आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा के मार्गदर्शन में संस्थान निरंतर उत्कृष्टता एवं नवाचार की दिशा में अग्रसर है।  

रोली-चंदन का तिलक, पुष्पवर्षा और स्वागत गीतों के साथ बच्चों का किया गया आत्मीय स्वागत

स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण में 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में हुआ भव्य प्रवेशोत्सव – रोली-चंदन का तिलक, पुष्पवर्षा और स्वागत गीतों के साथ बच्चों का किया गया आत्मीय स्वागत – शत-प्रतिशत नामांकन, आउट ऑफ स्कूल बच्चों की विद्यालय वापसी और नियमित उपस्थिति पर रहेगा विशेष फोकस – जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यालय प्रबंधन समितियों और समुदाय की सहभागिता से अभियान को मिला जन आंदोलन का स्वरूप लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के  सहारनपुर से स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण का शुभारंभ करने के साथ ही उत्तर प्रदेश के लगभग 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में नए शैक्षिक सत्र का उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ। विद्यालय पहुंचे नन्हे विद्यार्थियों का रोली-चंदन का तिलक लगाकर, पुष्पवर्षा, स्वागत गीतों और तालियों की गूंज के बीच आत्मीय अभिनंदन किया गया। प्रवेशोत्सव के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों के लिए विद्यालयों में उत्सव जैसा वातावरण तैयार किया गया, जिससे नए सत्र की शुरुआत उत्साह और आत्मीयता के साथ हो सके। योगी सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्कूल चलो अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित एवं प्रेरक शिक्षण वातावरण तथा सीखने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। अभियान के दूसरे चरण में विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान, उनका नामांकन, ड्रॉपआउट बच्चों की पुनर्वापसी तथा नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य शिक्षा को जनभागीदारी का अभियान बनाते हुए यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा विद्यालय और शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। नए शैक्षिक सत्र के साथ शुरू हुआ यह अभियान उसी संकल्प को धरातल पर साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के स्कूल अभियान के शुभारंभ के साथ ही सभी जनपदों के परिषदीय विद्यालयों में प्रवेशोत्सव आयोजित किए गए। शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता से बच्चों का स्वागत किया गया। अनेक विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रेरक गतिविधियां, पौधरोपण, पुस्तक वितरण और परिचय सत्र आयोजित किए गए, जिससे बच्चों का विद्यालय से भावनात्मक जुड़ाव मजबूत हो सके। हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने का संकल्प अभियान के दूसरे चरण में विशेष रूप से ऐसे बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जो अभी तक विद्यालय से नहीं जुड़े हैं या बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं। घर-घर संपर्क, अभिभावकों से संवाद और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्रत्येक पात्र बच्चे को विद्यालय तक लाने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और बेहतर अधिगम वातावरण सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे। पहले चरण में 20 लाख से अधिक नए नामांकन स्कूल चलो अभियान के पहले चरण में प्रदेशभर में 20 लाख से अधिक बच्चों का नया नामांकन कराया गया। अभियान के अंतर्गत तीन वर्ष आयु के बच्चों का बाल वाटिका तथा छह वर्ष आयु के बच्चों का कक्षा एक में नामांकन कराया जाएगा। साथ ही विद्यालय छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक पात्र बच्चे तक पहुंचने के लिए व्यापक जनजागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। बच्चों के सर्वांगीण विकास को गति विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार, समय पर निःशुल्क पाठ्य सामग्री का वितरण तथा बालिकाओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण अभियान जैसे प्रयास बच्चों के सर्वांगीण विकास को गति दे रहे हैं। अभियान का लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को विद्यालय तक पहुंचाकर उसे सीखने, आगे बढ़ने और विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनाना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- दादा ईश्वरदास रोहाणी जनसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित कर्मयोगी थे

जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित कर्मयोगी थे दादा ईश्वरदास रोहाणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा, विधि, पत्रकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय 12 विभूतियों का सम्मान स्व. ईश्वरदास रोहाणी के जीवन मूल्यों पर केंद्रित पुस्तक का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में गौरव शिखर सम्मान समारोह-2026 को किया संबोधित जबलपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संस्कारधानी जबलपुर की प्रतिभाओं ने संपूर्ण देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे दादा स्व. ईश्वरदास रोहाणी स्मृति गौरव शिखर सम्मान 2026 में 12 महान विभूतियों का सम्मान गौरवशाली क्षण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रोहाणी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम पर आधारित है। हम विश्व को एक परिवार मानते हैं। इसी प्रकार स्व. रोहाणी भी अपने कार्यों के बलबूते आज समाज कल्याण के प्रतीक बने। वे एक कर्मयोगी थे, जिन्होंने गरीब से गरीब के जीवन को रोशन करने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठन निर्माण के प्रति समर्पित राष्ट्र-साधक स्व. रोहाणी का अद्वितीय योगदान प्रेरणादायी रहेगा। उनकी शुचिता और विराट व्यक्तित्व यादगार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को जबलपुर में आयोजित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. रोहाणी की पावन स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रोहाणी के जीवन मूल्यों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल हरविंदर सिंह चंद्रा ने की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राचीन समृद्ध संस्कृति गुरुकुल परंपरा से पल्लवित थी। भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। इसी आश्रम में श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल बनीं, जो आज भी हमें कठिन समय में अपने मित्रों की सहायता के लिए प्रेरित करती है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने समाज को कर्म की श्रेष्ठता का संदेश दिया है। इन 12 हस्तियों का हुआ सम्मान कार्यक्रम में समाज के विभित्र क्षेत्रों में अपनी साधना और उत्कृष्ट योगदान से राष्ट्र निर्माण में संलग्न 12 विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य के लिए सुरेखा चुडास्मा, समाज सेवा में जीवन समर्पित करने वाले डॉ. कैलाश गुप्ता, महिला सशक्तिकरण के लिए सुज्ञानेश्वरी दीदी, संस्कृति एवं कुटुंब प्रबोधन के लिए नंदलाल नेगांधी, युवा प्रेरणा के लिए सरबजीत सिंह कलासी, सनातन ज्ञान के लिए पंडित रोहित दुबे, उद्योग के क्षेत्र में नितिन चंडोक, चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. वाई. आर. यादव, पत्रकारिता के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार श्याम कटारे, सेवानिवृत्त अधिकारियों की श्रेणी में सब लेफ्टिनेंट (रिटा.) आर. एन. तिवारी, विधि के क्षेत्र में पूर्व सांसद आर. एन. सिंह, न्याय क्षेत्र में जस्टिस देवव्रत माधव धर्माधिकारी का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यक्रम में सम्मानित हुईं विभूतियों के कार्य नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। कार्यक्रम के आयोजक और विधायक अशोक रोहाणी ने कहा कि स्व. रोहाणी ने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों को सम्मानित करने की शुरुआत की थी। उनका मानना था कि ऐसे आयोजन से समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे, विधायक नीरज सिंह लोधी, विधायक संतोष बरकड़े, विधायक अभिलाष पांडे, विधायक अजय विश्नोई, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।  

मध्य प्रदेश में CM हेल्पलाइन का हाल बेहाल, 1.77 लाख शिकायतें तीन माह से ज्यादा समय से अटकीं

भोपाल  प्रदेश में आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन खुद धीमी पड़ती नजर आ रही है। सरकारी समीक्षा में सामने आया है कि एक लाख 77 हजार से अधिक शिकायतें ऐसी हैं, जिनका तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी निपटारा नहीं हो सका। सबसे ज्यादा लंबित मामले राजस्व, गृह और नगरीय विकास एवं आवास विभाग से जुड़े हैं। इन विभागों से संबंधित शिकायतें महीनों तक अटकी रहने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। यहीं नहीं 200 से ज्यादा शिकायतों को तो अटेंड भी नहीं किया गया। यही वजह है कि सीएम हेल्पलाइन में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।    सबसे ज्यादा दबाव राजस्व विभाग पर लंबित शिकायतों के मामले में राजस्व विभाग सबसे ऊपर है। विभाग में 1.02 लाख से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं, जबकि इनमें 30 हजार से अधिक मामले ऐसे हैं, जिन्हें 100 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। भूमि सीमांकन, नामांतरण, खसरा सुधार और अवैध कब्जे जैसे मामलों में लोगों को सबसे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। अकेले अवैध कब्जे से जुड़ी हजारों शिकायतें अब भी लंबित हैं।  पुलिस से जुड़ी शिकायतों में भी नहीं मिल रही राहत गृह विभाग में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां 54 हजार से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं और इनमें करीब 16 हजार मामले 100 दिन की सीमा पार कर चुके हैं। सबसे अधिक शिकायतें एफआईआर दर्ज नहीं होने, पुलिस जांच में देरी और गिरफ्तारी नहीं किए जाने से जुड़ी हैं। इससे कानून व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के निराकरण पर सवाल उठ रहे हैं। शहरों की बुनियादी सुविधाओं के मामले भी अटके नगरीय विकास एवं आवास विभाग में भी हजारों शिकायतों का समाधान तय समय में नहीं हो पाया है। साफ-सफाई, सीवेज, पेयजल, प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़कों की मरम्मत और अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में लोग लंबे समय से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।  शिकायतें बढ़ीं, समाधान की रफ्तार घटी इस वर्ष जनवरी से अब तक सीएम हेल्पलाइन में 81 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी है जो अभी तक संबंधित स्तर पर लंबित है। वहीं एल-3 और एल-4 स्तर पर भी करीब 1.92 लाख शिकायतें तय समय सीमा के बाद भी निपटारे का इंतजार कर रही हैं। वहीं, राजस्व विभाग के  अधिकारी का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की नियमित समीक्षा की जाती है और उनका निदान किया जाता है। कुछ शिकायतें नीतिगत होने के कारण उनमें समय लगता हैं।  

मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसान हितैषी योजनाओं का हो रहा प्रभावी क्रियान्वयन

रायपुर  मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को मजबूती देने का सशक्त माध्यम बन रही है। योजना के माध्यम से मिलने वाली राशि किसानों को समय पर बीज, उर्वरक तथा अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था करने में सहायक सिद्ध हो रही है, जिससे खेती की लागत का दबाव कम होने के साथ कृषि कार्य भी निर्धारित समय पर पूरे हो रहे हैं। गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले की ग्राम पंचायत सारबहरा के किसानएवन सिंह इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त की राशि प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उन्होंने बीज, उर्वरक तथा अन्य आवश्यक कृषि कार्यों में किया।एवन सिंह का कहना है कि समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता ने खेती की तैयारियों को आसान बनाया है। इससे कृषि कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होती और खेती की उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायता मिलती है। इसी ग्राम पंचायत के किसाननरेश यादव, जो लगभग चार एकड़ भूमि में खेती करते हैं, भी योजना का नियमित लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छोटे एवं मध्यम किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हुई है। योजना से प्राप्त राशि के माध्यम से कृषि कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री खरीदना आसान हुआ है, जिससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उनका मानना है कि समय पर मिलने वाली सहायता किसानों को बेहतर योजना बनाकर खेती करने के लिए प्रेरित करती है और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया जा रहा है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पात्र किसानों तक केंद्र सरकार की सभी कृषि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पहुंचे। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना इसी दिशा में किसानों के लिए एक भरोसेमंद आर्थिक सहारा बनकर उभरी है। योजना का सफल क्रियान्वयन किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। समय पर मिलने वाली सहायता से किसान खेती की बेहतर तैयारी कर रहे हैं, आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के प्रति उत्साहित हो रहे हैं तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक आत्मविश्वास के साथ कार्य कर रहे हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि किसानों की समृद्धि ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार है। इसी सोच के अनुरूप किसान कल्याण, कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि को गति देने के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन निरंतर जारी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों की सफलता की कहानियां इस बात का प्रमाण हैं कि समय पर मिलने वाला आर्थिक सहयोग खेती को नई ऊर्जा देने के साथ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रहा है।

Bhopal News: महिला अपराधों में 20% बढ़ोतरी, पूर्व चाइल्डलाइन डायरेक्टर ने माता-पिता को दी अहम सलाह

भोपाल  राजधानी में महिला सुरक्षा के दावों के बीच एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। सरकारी आंकड़ों और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शहर में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में लगातार तेजी आ रही है। स्थिति कितनी संवेदनशील है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में दुष्कर्म के मामलों में सीधे 20 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भोपाल इस वक्त महिला सुरक्षा के मामले में एक तरह से 'बारूद के ढेर' पर बैठा है। हर दिन एक रेप और एक छेड़छाड़ की वारदात पुलिस से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में भोपाल में दुष्कर्म के 305 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 367 हो गए। इस साल यानी 2026 के शुरुआती पांच महीनों (जनवरी से मई) के आंकड़े भी डराने वाले हैं। इस अवधि में अब तक 167 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 164 मामले आए थे। इसका सीधा मतलब यह है कि राजधानी में औसत रूप से हर दिन एक दुष्कर्म और एक छेड़छाड़ का मामला पुलिस स्टेशन पहुंच रहा है। हालांकि, इस साल छेड़छाड़ के मामलों में 7% की मामूली गिरावट (155 केस) देखी गई है। 60% मामलों में 'सोशल मीडिया' का खूनी खेल इस पूरे ट्रेंड पर चिंता जताते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक गहरे और नए खतरे की ओर इशारा किया है, वह है सोशल मीडिया। भोपाल में हो रहे महिला और बाल अपराधों का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार अब फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बन चुके हैं। हमने जितने मामलों का विश्लेषण किया है, उनमें से लगभग 60% मामलों का कोई न कोई लिंक सोशल मीडिया से जुड़ा है। छोटी बच्चियों, किशोरियों और यहां तक कि नाबालिग लड़कों को भी ऑनलाइन शिकार बनाया जा रहा है। पॉक्सो के कई मामलों में बच्चों को ऑनलाइन बातचीत के जरिए प्रभावित किया गया। आरोपी फर्जी नाम, गलत उम्र और झूठी पहचान बताकर पहले बच्चों का भरोसा जीतते हैं, और फिर यह दोस्ती प्रताड़ना, ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण में बदल जाती है। अर्चना सहाय, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व डायरेक्टर, चाइल्डलाइन, भोपाल 'माता-पिता की बात सुनना बंद कर रही हैं लड़कियां' अर्चना सहाय ने पारिवारिक ताने-बाने पर पड़ रहे इसके असर को लेकर सचेत किया। उन्होंने बताया कि कई मामलों में लड़कियां ऑनलाइन बने दोस्तों के प्रभाव में इस कदर आ जाती हैं कि वे अपने माता-पिता की बातें सुनना तक बंद कर देती हैं। कुछ मामलों में तो बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी या घर से भागने जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। उन्होंने अपील की है कि बच्चों को स्मार्टफोन देने से पहले पैरेंट्स उन्हें सायबर सेफ्टी के बारे में जरूर शिक्षित करें। अधिकांश मामलों में 'अपराधी' कोई अनजान नहीं इधर, पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं, बल्कि पीड़िता का कोई परिचित, रिश्तेदार या सोशल मीडिया का करीबी दोस्त ही निकलता है। हालांकि, मामलों की संख्या बढ़ने के पीछे पुलिस का तर्क है कि अब समाज में जागरूकता बढ़ी है, जिससे लोग चुप रहने के बजाय थानों में आकर एफआईआर दर्ज करवा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि जांच अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है।  

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) पर बड़ा अपडेट, मतांतरित आदिवासियों के सुझावों की कानूनी समीक्षा जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें आदिवासियों के साथ-साथ मतांतरित आदिवासी भी कानून के दायरे से बाहर रखे जा सकते हैं। इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई वाली समिति को जन परामर्श में बड़ी संख्या में सुझाव मिले हैं। अधिकतर का पक्ष है कि जब आदिवासी मतांतरित हो गया तो फिर उसे आदिवासियों को मिलने वाले अधिकार व सुविधा नहीं मिलने चाहिए। सैद्धांतिक तौर पर सभी इससे सहमत भी हैं लेकिन समिति कानूनी प्रावधान देख रही है। जन परामर्श में मिले विविध सुझाव जन परामर्श के दौरान भोपाल में पूर्व न्यायाधीश मोहन पी तिवारी ने आदिवासियों को लेकर यह तर्क रखा था कि इनकी अपनी परंपराएं और व्यवस्थाएं हैं, इसलिए इन्हें कानून के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। जहां तक बात मत परिवर्तन करने वाले आदिवासियों की है, तो वे मतांतरण के बाद आदिवासी तो रह नहीं गए। ब्राह्मण व ऊंची जातियों के बच्चों से विवाह कर रहे हैं, फिर भी आदिवासी बने हुए हैं। वनवासी कल्याण आश्रम एसएस कुमरे ने भी इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समाज की लड़की अगर दूसरी जाति में विवाह करती है तो उस पर यूसीसी लागू होना चाहिए। इसी तरह के अन्य सुझाव भी आए हैं। कानूनी पहलुओं का अध्ययन सूत्रों का कहना है कि समिति में इस विषयों को लेकर काफी विचार-विमर्श हुआ है। कानूनी पहलू देखे गए। दरअसल, संविधान के प्रविधान अनुसार अनुसूचित जनजातियों के लिए धर्म आधारित कोई रोक-टोक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि आदिवासी व्यक्ति किसी भी धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) को अपना ले, फिर भी वह कानूनी रूप से अपना अनुसूचित जनजाति का दर्जा और उससे जुड़े अधिकार बनाए रख सकता है। जाति प्रमाण पत्र भी बनते हैं और आरक्षण का लाभ भी मिलता है।  

MP News: बेतवा में अब नहीं मिलेगा जहरीला पानी, सीवेज और औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए बड़ा एक्शन

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार नमामि गंगे मिशन के तहत बेतवा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने जा रही है। सरकार का फोकस केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैज्ञानिक और दीर्घकालिक योजना के जरिए पूरे नदी तंत्र को पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके लिए भोपाल में अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर पूरे प्रोजेक्ट की योजना तैयार कराई जा रही है। बेतवा नदी के लिए व्यापक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए इंजीनियरों को तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। बेतवा जहां सबसे ज्यादा प्रदूषित, वहीं से होगी संरक्षण की शुरुआत मध्यप्रदेश में नमामि गंगे परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बेतवा नदी का उद्गम रायसेन जिले के जंगलों में स्थित झिरी नामक स्थान पर है। लेकिन उद्गम के बाद भोपाल, रायसेन और विदिशा जिलों में यह नदी प्रदूषण का शिकार हो रही है। भोपाल की कलियासोत नदी और बेतवा का संगम भोजपुर के पास होता है, जहां नदी की स्थिति काफी खराब है। वहीं मंडीदीप के पास बेतवा का बड़ा हिस्सा जलकुंभी से ढक गया है। ऐसे में इन तीनों जिलों में बेतवा के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है। सीवेज ट्रीटमेंट पर सबसे ज्यादा फोकस भोपाल की कलियासोत नदी से लेकर बेतवा नदी में मिलने वाले सीवेज को रोकने और प्रदूषण कम करने के लिए तीनों जिलों के नगरीय निकायों के इंजीनियरों को विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मंडीदीप में उद्योगों का प्रदूषित पानी सीधे बेतवा में मंडीदीप में उद्योग स्थापित होने के बाद से अब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बन पाया है। इसके कारण उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित पानी सीधे बेतवा नदी में मिल रहा है। इसका असर नदी के साथ-साथ आसपास की खेती पर भी पड़ रहा है। सरकार की कोशिश है कि बेतवा की धारा निर्मल और अविरल बनाई जा सके। अधिकारियों ने बताया कि नमामि गंगे भारत सरकार का एकीकृत नदी संरक्षण मिशन है, जिसका उद्देश्य गंगा और उसकी सहायक नदियों का संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास सुनिश्चित करना है। मध्यप्रदेश का गंगा बेसिन 34 जिलों और 283 शहरी निकायों तक फैला है। इसमें चंबल, बेतवा, सिंध, काली सिंध, धसान, केन, क्षिप्रा, गंभीर, टोंस, सोन और पावती जैसी 11 प्रमुख नदियां शामिल हैं। बेतवा पर बढ़ा प्रदूषण का दबाव प्रस्तुति में बताया गया कि बेतवा नदी इस समय अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, नदी तटों के कटाव और पर्यावरणीय प्रवाह में कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक और टिकाऊ डीपीआर तैयार की जाएगी। डीपीआर में शामिल होंगे ये प्रमुख बिंदु डीपीआर में केवल सीवेज प्रबंधन ही नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट जल एवं ठोस कचरा प्रबंधन, पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाना, नदी तटों का पुनर्स्थापन, जैव विविधता संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र का उपचार और जनभागीदारी जैसे विषय भी शामिल किए जाएंगे। अधिकारियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण सरकार का मानना है कि डीपीआर तैयार करने में क्षेत्रीय अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। इसलिए उन्हें डेटा संग्रह, विभिन्न विभागों के समन्वय, हितधारकों से परामर्श और परियोजना क्रियान्वयन की तकनीकी जानकारी दी जा रही है, ताकि नमामि गंगे मिशन के लक्ष्यों को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। प्रदेश में 824.57 करोड़ की आठ परियोजनाएं पहले से मंजूर नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण में मध्यप्रदेश को 824.57 करोड़ रुपए की आठ परियोजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं। इनमें इंदौर, उज्जैन और नागदा में सीवेज प्रबंधन, चित्रकूट की मंदाकिनी, मंदसौर की शिवना, ग्वालियर की मोरार नदी से जुड़े कार्य तथा मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की चार प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण की परियोजनाएं शामिल हैं। इन सभी योजनाओं को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता से लागू किया जा रहा है। नमामि गंगे मिशन (मध्यप्रदेश) की प्रमुख जानकारी भारत सरकार ने वर्ष 2014 में नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया था। पहले चरण में गंगा किनारे के पांच राज्यों में सीवेज, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और अन्य परियोजनाएं शुरू की गई थीं। दूसरे चरण में गंगा की सहायक नदियों वाले राज्यों, जिनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है, में नदी प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी परियोजनाएं स्वीकृत की गईं। मध्यप्रदेश में स्वीकृत परियोजनाएं मध्यप्रदेश में कुल आठ परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिनकी कुल लागत 824.57 करोड़ रुपए है। इनमें तीन परियोजनाएं नगरीय विकास एवं आवास विभाग (इंदौर, उज्जैन और नागदा) को सीवेज एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए मिली हैं। एक परियोजना चित्रकूट (सतना) में मंदाकिनी नदी पर घाट निर्माण के लिए है। एक परियोजना मंदसौर में शिवना नदी के पर्यावरण उन्नयन के लिए है। दो परियोजनाएं ग्वालियर में मोरार नदी के पुनर्जीवन और रिवर फ्रंट विकास के लिए हैं। एक परियोजना मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए है। इनमें सबसे बड़ी परियोजना इंदौर की कान्ह एवं सरस्वती नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना है, जिसकी स्वीकृत लागत 511.15 करोड़ रुपए है। क्रम परियोजना लागत (करोड़ रु.) 1 ग्वालियर में मोरार नदी का पुनर्जीवन एवं विकास 39.24 (स्वीकृति), 22.19 (अवार्ड) + 18% GST 2 मोरार नदी रिवर फ्रंट विकास (फेज-II), ग्वालियर 32.44 3 मंदसौर में शिवना नदी का पर्यावरण उन्नयन 28.91 (स्वीकृति), 27.12 (अवार्ड) 4 चित्रकूट (सतना) में मंदाकिनी नदी पर घाट निर्माण 31.88 (स्वीकृति), 26.22 (अवार्ड) 5 इंदौर में कान्ह एवं सरस्वती नदी प्रदूषण नियंत्रण हेतु अतिरिक्त विकेन्द्रीकृत STP 511.15 (स्वीकृति), 416.46 (अवार्ड) 6 उज्जैन में इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं STP कार्य 101.57 7 नागदा में इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं STP कार्य 65.98 8 MPPCB प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण 13.40      

दिल्ली को मिली मेगा टनल परियोजना, यूपी में बनेगा नया हाईवे; जानिए कैबिनेट की अहम मंजूरियां

नई दिल्ली  पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़े फैसले हुए हैं. सरकार ने कुल 14,115 करोड़ रुपये के दो प्रमुख हाईवे और टनल प्रोजेक्ट्स पर मुहर लगा दी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ब्रीफिंग के दौरान इन अहम प्रोजेक्ट्स की पूरी डिटेल शेयर की. दिल्ली में लंबे समय से भयंकर जाम से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए यह एक बहुत बड़ी खुशखबरी है. सरकार ने दिल्ली के अंदर 6 लेन वाले आधुनिक द्वारका टनल के निर्माण को अपनी मंजूरी दे दी है. इस बड़े प्रोजेक्ट पर कुल 6,970 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आएगा. इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य को भी विकास का एक बड़ा तोहफा मिला है. यूपी में कानपुर से कबरई तक एक बिल्कुल नया 4 लेन हाईवे बनाया जाएगा. इस एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे प्रोजेक्ट की कुल लागत 7,145 करोड़ रुपये तय की गई है. अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘ये फैसले देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देंगे’. दोनों प्रोजेक्ट्स को मिलाकर सरकार कुल 14,115 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।  क्या है दिल्ली के द्वारका टनल प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल और खासियत?     दिल्ली के इस नए प्रोजेक्ट के तहत नेशनल हाईवे 148AE पर 6 लेन का टनल बनाया जाएगा. यह शिवमूर्ति इंटरचेंज को वसंत कुंज के नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगा. शिवमूर्ति इंटरचेंज द्वारका एक्सप्रेसवे (NH-248 BB) का एक बहुत अहम हिस्सा है. इस टनल के बनने से वेस्ट और साउथ दिल्ली के बीच सफर काफी तेज हो जाएगा।      इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर होगी. सबसे खास बात यह है कि इसमें से 3.1 किलोमीटर लंबा टनल साउदर्न रिज फॉरेस्ट के नीचे से गुजरेगा।      सरकार ने इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 5 साल का समय तय किया है. इसका सीधा मतलब है कि दिल्लीवासियों को अगले कुछ सालों में जाम से बड़ी राहत मिल जाएगी. यह एक आधुनिक ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट प्रोजेक्ट है. इसे हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के आधार पर डेवलप किया जाएगा।  यूपी वालों की बल्ले-बल्ले: 242 किलोमीटर लंबे हाईवे से फर्राटे भरेंगी गाड़ियां यूपी को मिले 7,145 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट से विकास को तेज रफ्तार मिलेगी. सरकार ने कानपुर से कबरई तक 242 किलोमीटर लंबे 4 लेन हाईवे को मंजूरी दे दी है. यह अहम प्रोजेक्ट भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का एक बड़ा हिस्सा है. इसे बीओटी मोड यानी टोल के आधार पर डेवलप किया जाएगा।  इस हाईवे के बनने से कानपुर, हमीरपुर और महोबा जैसे जिलों को सीधा फायदा पहुंचेगा. महोबा एक एस्पिरेशनल जिला है और वहां विकास की नई किरण पहुंचेगी. सरकार ने इस पूरे काम को सिर्फ ढाई साल में खत्म करने का लक्ष्य रखा है. कबरई में एग्रीगेट माइनिंग का बड़ा काम होता है. वहां से कानपुर और भोपाल तक माल की सप्लाई के लिए इस हाईवे की सख्त जरूरत थी।  नए हाईवे से कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर और कबरई में ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि कानपुर से कबरई का सफर अब साढ़े तीन घंटे की बजाय सिर्फ डेढ़ घंटे में पूरा होगा. सफर के समय में सीधे 58 प्रतिशत की भारी कमी आएगी।  इस हाईवे पर गाड़ियां 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की शानदार स्पीड से दौड़ सकेंगी. यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति के 4 इकोनॉमिक नोड्स और 10 लॉजिस्टिक नोड्स को भी आपस में जोड़ेगा।