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लखपति दीदियों के हौसले की उड़ान देख गदगद हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , सबको और मेहनतकर अब करोड़पति बनने की राह पर चलने कहा

रायपुर  मई की तपती गर्मी में आज लगातार दूसरे दिन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय दूरस्थ गांवों के औचक दौरे पर रहे । कबीरधाम ज़िले के पंडरिया स्थित लोखान पंचायत में आज मुख्यमंत्री का आगमन हुआ । इस अवसर पर वे बैगा बाहुल्य कमराखोल में पीएम जनमन योजना के तहत हुए कार्यों का निरीक्षण किए और वहीं पास में आम के पेड़ों के नीचे अपनी चौपाल लगा लिए । अपने बीच मुख्यमंत्री को देख ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई । बीरनमाला, कमल के फूल से मुख्यमंत्री का आत्मीय अभिनंदन करते हुए ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। इस दौरान महतारी शक्ति को सामने बैठा देख मुख्यमंत्री ने पूछ लिया कितनी महतारी यहाँ लखपति हो गई हैं ? एक साथ अनेक हाथ हवा में उठ गए । मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते सबको करोड़पति बनने की दिशा में आगे बढ़ने कहा । उन्होंने बारी- बारी से लखपति दीदियों से बातचीत की । यहाँ जंगल से बीन कर लाए  महुआ और चार को मुख्यमंत्री  साय को उपहार के रूप में देते हुए कुकदूर की लखपति दीदी मती कचरा तेलगाम ने मुख्यमंत्री से कहा कि महुआ का पौष्टिक लड्डू बनाकर खाइएगा , वरना मैं बना कर दूँगी । मुख्यमंत्री भी उनकी आत्मीयता देख भाव विभोर होकर मुस्कुराते हुए बोले कि घर जाकर बनवाकर खाऊँगा । मती कचरा तेलगाम दीदी आस पास के गांवों में बन रहे प्रधानमंत्री आवासों में सेंट्रिग प्लेट लगाती हैं और इससे उन्हें एक साल में ८० हज़ार की आय हुई है । उन्होंने कहा कि आज चौपाल लगा देख वे साहस वहाँ पहुँची और मुख्यमंत्री  के लिए भेंट स्वरूप जंगल से बीने महुआ और चार दी हैं ।  वहीं डीलर दीदी मती रजमत बाई धुर्वे ने बताया कि वे प्रधानमंत्री आवासों के लिए मटेरियल सप्लाई का काम करती हैं । उन्हें सालाना 2.50 – 3 लाख का मुनाफा हुआ है । लखपति पशु सखी मती शिवरानी पटेल का कहना है कि समूह से जुड़ सीआईएफ से उन्होंने व्यवसाय के लिए ऋण लिया और अपने खेत में सब्जी- भाजी लगायी । उन्हें सालाना डेढ़ लाख की आय हो रही । इस बिहान योजना से जीवन में आए सकारात्मक बदलाव के लिए धन्यवाद स्वरूप उन्होंने अपने खेत की सब्जियां टोकरी में मुख्यमंत्री को भेंट की । मुख्यमंत्री ने भी सभी दीदियों से बात कर प्रोत्साहित किया कि इसी तरह मन लगाकर काम करिए और आर्थिक रूप से सशक्त होइए।  ज्ञात हो कि लोखन पंचायत में 58 लखपति दीदियां हैं जो विभिन्न व्यवसाय से जुड़ आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं ।        चौपाल में हुआ नामकरण आज अपने नौनिहाल बच्चे के साथ मती ऋषि बघेल भी चौपाल पहुँची । यहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री से एक ही गुहार लगायी कि उनके बच्चे का नामकरण कर दें मुख्यमंत्री । बच्चे को गोद में लेकर दुलारते हुए मुख्यमंत्री  साय ने पूछा कि कब हुआ है इसका जन्म ? तब माँ ने बताया कि रविवार के दिन । मुख्यमंत्री ने बच्चे को स्नेह से देखते हुए नाम रविशंकर बघेल रखा और आशीर्वाद स्वरूप ५०० रुपए भी दिए । पंडरिया विधायक मती भावना बोहरा ने भी बच्चे को ५०० रुपए अपनी ओर से आशीर्वाद स्वरूप दिया ।मुख्यमंत्री के द्वारा नवजात का नाम रखते ही चौपाल में तालियाँ गूंज उठी । चौपाल में पहुंचे मेधावी विधार्थी आज कबीरधाम के पंडरिया के लोखान पंचायत के आश्रित ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की चौपाल को देख वहाँ से गुज़र रहे राजेंद्र मसराम और उनके पिता भी रुक गए । इस दौरान बातचीत में पता चला कि छिरहा के रहने वाले इस मेधावी बच्चे ने इस साल हाई स्कूल में 94.5 %  अंक के साथ ज़िले में नौवाँ स्थान प्राप्त किया है । मुख्यमंत्री ने उन्हें ख़ुश होकर पेन दिया और पूछा बड़ा होकर क्या बनना चाहते हैं ? इस पर उन्होंने बड़ा होकर आईएएस बनने के सपने को साझा किया । मुख्यमंत्री ने उन्हें खूब सारी शुभकामनाएँ दी ताकि वो अपना सपना पूरा कर सकें । यहाँ कमराखोल के बैगा बस्ती की कक्षा नवमी की बालिका भी चौपाल में मुख्यमंत्री से मिली और बताया कि आज पीएम जनमन से बने उनके आवास में मुख्यमंत्री पहुंचे थे । वहाँ मुख्यमंत्री से बात नहीं हो पायी इस लिए वे चौपाल में पहुँचीं । इस साल यह बच्ची हेम कुमारी 75% अंक कक्षा नौवी में लायी । एचसीएम ने आगे भी मन लगाकर पढ़ने की सलाह और बधाई देते हुए पेन दिया ।  घोषणाएँ बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज चौपाल लगाकर शासकीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली और प्रसन्न दिखे कि दूरस्थ अंचल तक हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है । उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर कमरखोल में  मिशन तालाब गहरीकरण (ट्यूबवेल के साथ), रामखिलावन के घर से ग्राम देवसरा तक मिट्टी मुरुम सड़क (६ किलोमीटर लगभग) , सामुदायिक भवन, मुक्तिधाम शेड निर्माण तथा  महतारी सदन ( स्व सहायता समूह की महिलाओं की माँग पर ) की घोषणा की । इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर  गोपाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक  धर्मेंद्र सिंह , सीओ जिला पंचायत  अभिषेक अग्रवाल और ग्रामीण चौपाल में उपस्थित रहे ।

DAVV का मेडिकल कॉलेज झाबुआ में: कुलगुरु ने दी जानकारी, इंजीनियरिंग कॉलेज में शुरुआत की तैयारी

झाबुआ  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) झाबुआ में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए आवश्यक भूमि आवंटित हो चुकी है, और अब प्रारंभिक कक्षाओं के संचालन हेतु एक अस्थायी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई के नेतृत्व में यह महत्वाकांक्षी परियोजना 350 से 400 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत के साथ साकार होगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन को आशा है कि इस माह के अंत तक इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय आ सकता है। दरअसल विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इस निर्णय के तहत, मध्यप्रदेश शासन ने उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 70 एकड़ भूमि आवंटित कर दी है। यह आवंटन विश्वविद्यालय को अपने स्वयं के चिकित्सा शिक्षा संस्थान की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। झाबुआ जिला अस्पताल को भी विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार किया जा रहा परियोजना के एक अहम पहलू के रूप में, झाबुआ जिला अस्पताल को भी विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन इस संबंध में निर्णय ले रहा है कि जिला अस्पताल को विश्वविद्यालय को सौंप दिया जाए, ताकि यह नए मेडिकल कॉलेज के लिए एक शैक्षणिक अस्पताल के रूप में कार्य कर सके। वर्तमान में, झाबुआ जिला अस्पताल में लगभग 250 बिस्तर उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय मेडिकल काउंसिल (NMC) के मानदंडों के अनुसार, 100 सीटों वाले मेडिकल कॉलेज के लिए 300 बिस्तरों वाले अस्पताल की आवश्यकता होती है। विश्वविद्यालय का मानना है कि जिला अस्पताल के अधिग्रहण से यह आवश्यकता पूरी हो जाएगी, जिससे छात्रों को पर्याप्त नैदानिक अनुभव मिल सकेगा। यूनिवर्सिटी का खुद का मेडिकल कॉलेज होगा कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद में मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला लिया गया था। इसमें तय किया गया था कि झाबुआ में मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा। इसके लिए मध्यप्रदेश शासन ने हायर एजुकेशन विभाग के माध्यम से यूनिवर्सिटी को जमीन भी आवंटित कर दी है। झाबुआ डिस्टिक हॉस्पिटल है, उस हॉस्पिटल को, मध्यप्रदेश शासन ये निर्णय ले रहा है कि वह यूनिवर्सिटी को सौंप दिया जाएगा। जिससे हमारा जो शैक्षणिक अस्पताल है उसके रूप में वह जिला हॉस्पिटल काम कर सकेगा। इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की मांगी अनुमति कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि यह भी कोशिश की जा रही है कि वहां पर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का इंजीनियरिंग कॉलेज है। यदि शासन उचित समझता है तो, यूनिवर्सिटी ने मांग की है कि जब तक नए परिसर में हमारा मेडिकल कॉलेज स्थापित नहीं हो जाता तब तक इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति दे दी जाए। इसके लिए नेशनल मेडिकल कांउसिल में यूनिवर्सिटी ने आवेदन भी कर दिया है। उम्मीद है इस महीने तक निर्णय आ सकता है उन्होंने बताया कि 100 सीट के लिए 300 बैड का हॉस्पिटल होना जरूरी है। वहां हमें बताया है कि वहां 250 बैड का हॉस्पिटल है। कुल मिलाकर हमें 300 बैड का हॉस्पिटल मिल जाएगा। कुलगुरु ने कहा कि अस्पताल तो हमें मिल रहा है, इसलिए उसकी लागत नहीं है, लेकिन कॉलेज बनाने के लिए कम से कम 350 से 400 करोड़ रुपए की लागत इनिशयली आएगी। उम्मीद है कि इस महीने तक इसका कुछ निर्णय हो सकता है। आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया गया कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एक अभिनव प्रस्ताव भी रखा है। जब तक झाबुआ में मेडिकल कॉलेज का नया परिसर तैयार नहीं हो जाता, तब तक राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति मांगी गई है। विश्वविद्यालय ने नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) में इस अस्थायी व्यवस्था के लिए आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया है। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि कॉलेज की स्थापना प्रक्रिया में कोई देरी न हो और शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो सके। 350 से 400 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक होगा इस परियोजना की कुल लागत का अनुमान लगाया गया है। कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के अधिग्रहण से उसकी लागत अलग होगी, क्योंकि यह शासन द्वारा सौंपा जा रहा है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के भवन और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए प्रारंभिक तौर पर 350 से 400 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक होगा। यह राशि कॉलेज के आधुनिक कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और प्रशासनिक खंड के निर्माण पर खर्च की जाएगी।  

प्रदेश के 10 लाख दिव्यांगजनों के लिए नई नीति: मोहन यादव सरकार का ऐतिहासिक कदम, एक प्लेटफार्म पर काम

भोपाल मोहन यादव सरकार प्रदेश के दस लाख दिव्यांगजनों के लिए पहली बार नीति बनाएगी। इस नीति के लागू होने के बाद सारे विभाग दिव्यांगजनों को लेकर एक प्लेटफार्म पर काम कर सकेंगे। यहां अलग-अलग विभागों के द्वारा अलग-अलग स्कीम के जरिए दिव्यांगजन को लाभ दिया जाता है।  आयुक्त दिव्यांगजन डॉ अजय खेमरिया ने इस नीति को बनाए जाने को लेकर  चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार दिव्यांगजनों के लिए कोई नीति बनाने का काम राज्य सरकार करने जा रही है। अभी अलग-अलग विभाग अलग-अलग स्कीम चलाते हैं। अभी कोई नीति नहीं होने से दिव्यांगजन के लिए समान काम नहीं हो पाता है। अभी दिव्यांगजनों के समग्र विकास के लिए जो काम हो रहे हैं, उसमें एकरूपता की कमी है, इसलिए दिव्यांगजन के लिए नीति बनाने की जरूरत है।खेमरिया ने कहा कि जिस तरह से एमपी के बच्चों के लिए बाल नीति है, महिला नीति है, उसी तरह की दिव्यांगजन नीति भी होना चाहिए। एक्सपर्ट्स, दिव्यांगजनों से करेंगे बात डॉ खेमरिया ने बताया कि नीति तैयार करने के लिए स्टेक होल्डर्स, एक्सपर्ट, हितग्राही से बात करेंगे। साथ ही विदेशों में जाकर वहां की स्थिति देखकर आने वाले, विश्वविद्यालयों में शोध करने वालों से बातचीत कर नीति बनाएंगे। एमपी के बाहर के विषय विशेषज्ञों से भी बात की जाएगी। ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों के साथ आदिवासी बेल्ट के लोगों से भी बात करेंगे। अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी जैसे इलाकों में सरकार की योजनाओं की डिलीवरी में किस तरह की दिक्कत होती है, इसकी भी जानकारी ली जाएगी। वहां के दिव्यांग जन से बात की जाएगी। अलग-अलग विभाग के अलग-अलग नार्म्स दिव्यांगजन आयुक्त खेमरिया ने कहा कि अभी दिव्यांगों के लिए सामाजिक न्याय, एमएसएमई, एनआरएलएम, महिला बाल विकास विभाग समेत अन्य विभागों के अलग-अलग काम हैं। अगले छह माह में इसका ड्राफ्ट बना लिया जाएगा और कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर 2026 में ही इसे लागू कराया जाएगा। फरवरी में सीएम को लिखा था पत्र डॉ खेमरिया ने कहा कि नीति बनाने को लेकर फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से पत्र लिखा था जिसके लिए मुख्यमंत्री ने अब अधिकृत कर दिया है। इसके अलावा सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को भी पत्र लिखा गया था। इसलिए अब दिव्यांग जन बनाने के लिए सुझाव लेने और प्रस्ताव मंगाने का काम किया जाएगा। इसके लिए ऐसे लोगों से भी संपर्क किया जाएगा जो दिव्यांगजन के लिए काम करते हैं। जो दिव्यांग हैं, उनसे भी सुझाव लिए जाएंगे ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए नीति में वास्तविक प्रयास किए जा सकें। इसके पहले कोई नीति नहीं है। अलग-अलग विभागों ने अपने हिसाब से दिव्यांगजन के लिए अलग रोस्टर, प्रावधान तय कर रखें हैं लेकिन विभागों की दिव्यांगजन को लेकर कोई नीति नहीं है। अब मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद इसके लिए नई नीति बनाकर उसे सभी विभागों में लागू कराया जाएगा। नीति के लिए इनसे भी चर्चा करने के निर्देश डॉ अजय खेमरिया को 13 अप्रैल 2026 को सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से एमपी में दिव्यांगजन अधिनियम 2016 राज्य निधि, निराश्रित निधि, के साथ योजनाओं, पुनर्वास और कल्याण से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल करते हुए दिव्यांगजन नीति का प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। शासन की ओर से कहा गया है कि विभिन्न विभागों, शासकीय और अर्द्धशासकीय संस्थाओं, एक्सपर्ट्स, संबंधित सिविल सोसायटी के सदस्यों, प्रख्यात खिलाड़ियों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं से चर्चा कर नीति के मसौदे के निर्माण और उसे अंतिम रूप देने का काम किया जाए। तेलंगाना, त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की नीति का करेंगे अध्ययन     इस नई नीति को अंतिम रूप देने से पहले तेलंगाना और त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा।     अभी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय विभाग अपनी-अपनी योजनाओं में दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।     प्रदेश में 2011 की जनगणना और यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) के आधार पर करीब 10 लाख दिव्यांगजन दर्ज हैं।     आगामी जनगणना में दिव्यांगों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है, क्योंकि पहले जहां सात श्रेणियों के आधार पर आंकड़े जुटाए गए थे, वहीं अब 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया जाएगा।     नीति में यह भी प्रस्ताव रहेगा कि 18 वर्ष से अधिक आयु के मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संभाग स्तर पर 100 बिस्तरों वाले विशेष आश्रय गृह स्थापित किए जाएं।  

Banswara में दर्दनाक घटना, 8 लोग तैरकर बचे, रेस्क्यू जारी

बांसवाड़ा बांसवाड़ा जिले में मंगलवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब संगमेश्वर नदी में 10 लोगों से भरी नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। घटना अरथूना क्षेत्र में करीब 3 बजे हुई। हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई और आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में नदी किनारे जुट गए। संतुलन बिगड़ने से पलटी नाव प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नाव का संतुलन बिगड़ने के कारण यह हादसा हुआ। नाव पलटते ही नाविक सहित 8 लोगों ने साहस दिखाते हुए तैरकर अपनी जान बचाई और सुरक्षित किनारे तक पहुंच गए। हालांकि तेज बहाव के कारण 8 साल का एक बच्चा और एक युवक नदी की लहरों में ओझल हो गए, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। रेस्क्यू अभियान में जुटी प्रशासनिक टीमें घटना की सूचना मिलते ही गढ़ी डीएसपी बाबूलाल रैगर और अरथूना पुलिस का जाब्ता मौके पर पहुंचा। प्रशासन ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू करते हुए स्थानीय गोताखोरों और सिविल डिफेंस की टीमों को मौके पर बुलाया। बचाव कार्य तेजी से जारी है। गहरे पानी में तलाश जारी सिविल डिफेंस की टीमें नावों और लाइफ जैकेट की मदद से नदी के गहरे हिस्सों में लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। नदी का तेज बहाव रेस्क्यू अभियान में चुनौती बन रहा है, फिर भी टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं ताकि दोनों लापता व्यक्तियों का जल्द पता लगाया जा सके। परिजनों में चिंता, मौके पर जुटी भीड़ हादसे के बाद नदी किनारे ग्रामीणों की भीड़ जुट गई है। लापता लोगों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है और वे लगातार प्रशासन से जल्द से जल्द राहत की उम्मीद कर रहे हैं। पूरा क्षेत्र इस घटना से गमगीन नजर आ रहा है।  

मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना से नर्सिंग के सपनों को मिला संबल

रायपुर कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिले, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सरगुजा जिले के भिट्ठीकला की रहने वाली ममता ने। ममता, जो कि वर्तमान में बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष की छात्रा हैं, आज अपनी पढ़ाई को लेकर निश्चिंत हैं और इसका श्रेय वे छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को देती हैं। संघर्षों के बीच जागी उम्मीद की किरण ममता के जीवन का सफर आसान नहीं था। पिता स्व. मोटू राम के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी माता प्यारो बाई के कंधों पर आ गई। माँ ने हार नहीं मानी और एक पंजीकृत श्रमिक के रूप में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण किया। संसाधनों की कमी के बावजूद प्यारो बाई का सपना अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाना था, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम विभाग ने साकार किया है। मेधावी शिक्षा सहायता ने आसान हुई राह ममता ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग के माध्यम से नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 45,000 रुपए की वार्षिक सहायता प्राप्त हुई है। इस राशि ने उनके शिक्षण शुल्क और पढ़ाई से संबंधित अन्य खर्चों के बोझ को कम कर दिया है। उन्होंने बताया कि मेरी मम्मी एक मजदूर हैं, फिर भी उन्होंने हमें कभी पीछे मुड़ने नहीं दिया। श्रम विभाग से मिली इस आर्थिक सहायता की वजह से मैं आज अपनी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर पा रही हूँ और अपने उज्ज्वल भविष्य का सपना देख पा रही हूँ। योजना के लिए व्यक्त किया आभार अपनी सफलता का  श्रेय देते हुए ममता ने प्रदेश के  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और श्रम विभाग के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए सशक्त माध्यम बनी है। जिससे पढ़ने और आगे बढ़ने का सपना साकार हुआ है। मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के माध्यम से ममता जैसी हजारों बेटियाँ अब न केवल शिक्षित हो रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ रही हैं।

माओवादियों का गढ़ रहे तर्रेम बना स्वास्थ्य मॉडलः राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल

रायपुर विकासखंड उसूर का अतिसंवेदनशील ग्राम तर्रेम, जो कभी माओवादी प्रभाव के कारण पिछड़े क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। जिला मुख्यालय से लगभग 80 किमी दूर स्थित ग्राम तर्रेम में अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। राज्य सरकार की पहल से क्षेत्र में पहुंच आसान हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार संभव हुआ। आयुष्मान आरोग्य मंदिर तर्रेम में प्रतिदिन 25 से 30 मरीजों की ओपीडी, सुरक्षित प्रसव सेवाएं तथा लैब जांच की सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। अस्पताल प्रबंधन, स्वच्छता, मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और 102 व 108 एम्बुलेंस सेवाओं के प्रभावी संचालन के साथ आयुष्मान भारत योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। कलेक्टर  संबित मिश्रा के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीआर पुजारी के नेतृत्व में आकांक्षी विकासखंड उसूर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर तर्रेम को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक NQAS प्रमाणन प्राप्त हुआ है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 16 फरवरी 2026 से वर्चुअल मूल्यांकन किया गया जिसमें 12 सेवाओं के आधार पर कुल 88.19ः अंक प्राप्त हुए। मूल्यांकन के दौरान स्वास्थ्य केंद्र के समस्त स्टाफ सीएचओ, आरएचओ महिला एवं पुरुष से राष्ट्रीय कार्यक्रमों और ग्रामीणों को दी जा रही सेवाओं पर विस्तार से जानकारी ली गई, जिसमें सभी कर्मी सफल रहे। इस उपलब्धि में जिला कार्यक्रम प्रबंधक  वरुण साहू, नर्सिंग ऑफिसर मानसी ताटपल्ली, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ उमेश ठाकुर, सेक्टर प्रभारी डॉ शिवा गौरी, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक श्रवण नेताम, डाटा प्रबंधक निरंजन भोई सहित समस्त स्वास्थ्य स्टाफ, सीएचओ, आरएचओ, एएनएम एवं मितानिनों का विशेष योगदान रहा।

बिहार कैबिनेट विस्तार: पीएम मोदी और अमित शाह के शामिल होने की चर्चा

पटना  कंफर्म हो गया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बिहार आ रहे हैं। सीएम सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होंगे। पटना के गांधी मैदान में वाटरप्रूफ पंडाल बनाए जा रहे हैं। डेढ़ लाख लोगों के लिए तैयारी है। 7 मई को फर्स्ट हाफ का वक्त तय है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी इसकी पुष्टि कर दी। उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख सात मई पर भी मुहर लगा दी। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने ये भी बताया कि पीएम के अलावा और कौन नेता मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होंगे। यानी तैयारी अब पूरी हो चुकी है। कौन किस दल से मंत्री बनेगा, ये भी तय है। 6 मई से मंत्री बनने वालों को फोन जाने शुरू हो जाएंगे। गांधी मैदान में बन रहा वाटरप्रूफ पंडाल दरअसल, जो जश्न 15 अप्रैल को बंगाल चुनाव की वजह से नहीं मनाया जा सका, वो अब मंत्रिमंडल विस्तार में मनाया जाएगा। गांधी मैदान में बड़ी तैयारी हो रही है। डेढ़ लाख लोगों के बैठने का इंतजाम किया जा रहा है। 3000 जवानों को सुरक्षा में लगाया जाएगा। पीएम को आना है, इसलिए तैयारी भी उसी स्तर की हो रही है। गांधी मैदान में वाटरप्रूफ बड़ा पंडाल लगाया जा रहा है। पटना के गांधी मैदान में बन रहे वाटर फ्रूफ पंडाल को 6 मई शाम तक तैयार कर देना है। उसी हिसाब से गांधी मैदान में काम चल रहा है। पटना का गांधी मैदान फिर बड़े समारोह का गवाह बनने जा रहा है। इससे पहले 20 नवंबर को जब मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार ने शपथ ली थी, तब भी बड़ी तैयारी गांधी मैदान में हुई थी। अब 6 महीने बाद बदली सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की उससे भी बड़ी तैयारी हो रही है। कैबिनेट में विस्तार में शामल होंगे पीएम मोदी और शाह     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी     गृह मंत्री अमित शाह     बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन     बिहार के सभी केंद्रीय मंत्री     पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार     एनडीए से जुड़े सभी बड़े नेता बिहार में 7 मई को मंत्रिमंडल विस्तार बिहार में सीएम सम्राट चौधरी के कैबिनेट का विस्तार 7 मई को होगा। गांधी मैदान में शपथ ग्रहण होने जा रहा है। इसके लिए गांधी मैदान को तैयार किया जा रहा है। राज्य मंत्रिमंडल में विस्तार के साथ मंत्रियों की संख्या 30 के करीब हो जाएगी। सीएम समेत 36 तक मंत्री राज्य में बन सकते हैं। अपने सहयोगियों को जेडीयू और बीजेपी की ओर से चार मंत्री पद दिया जाएगा। चिराग पासवान की पार्टी से दो मंत्री बन पाएंगे। जबकि, जीतनराम मांझी की पार्टी को एक और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को भी एक मंत्री पद मिलेगा। बीजेपी और जेडीयू के बराबर बराबर मंत्री यानी 16–16 पद मिलेंगे। बिहार में जो मंत्री बनने जा रहे हैं, उनमें जेडीयू के नाम लगभग फिक्स हैं। पुराने चेहरों के साथ दो नए लोगों को मौका मिल सकता है। खास वो, जो टीम निशांत के तौर पर सक्रिय हैं। सबसे ज्यादा कयास बीजेपी कोटे के मंत्रियों को लेकर लगाए जा रहे हैं। उनके पास पद कम हैं और दावेदार ज्यादा हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम सम्राट चौधरी की पसंद के नेताओं की लॉटरी लग सकती है।  

वित्तमंत्री शामिल हुए शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” कार्यक्रम में

रायपुर  वित्तमंत्री शामिल हुए शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” कार्यक्रम में वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने बजट में बस्तर के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं, जिससे युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे। वित्तमंत्री शामिल हुए शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा कि देश की चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ते भारत में बस्तर के युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बस्तर के युवाओं को वन उत्पाद, पर्यटन, कला-संस्कृति और कृषि से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में नवाचार के साथ कार्य कर क्षेत्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बस्तर के युवा आर्थिक रूप से सशक्त बनकर समाज निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर आज नई आशा और नई दिशा के साथ आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में पूना मारगेम से जुड़े साथियों की भागीदारी का स्वागत करते हुए बस्तर के विकास में सहभागी बनने की बात कही। अपने संबोधन में उन्होंने कई प्रेरणादायक उदाहरण साझा किए, जिनमें लोगों ने विपरीत परिस्थितियों से निकलकर नवाचार के माध्यम से आर्थिक प्रगति हासिल की। चौधरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं नौकरी छोड़कर कृषि व्यवसाय अपनाया और आत्मनिर्भरता हासिल की। उन्होंने युवाओं को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि “माँ सरस्वती के उपासक बनेंगे तो माँ लक्ष्मी स्वयं साथ आएंगी”, आज का युग ज्ञान आधारित है, इसलिए युवाओं को अपनी क्षमता और कौशल का निरंतर विकास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि अनुशासन भी सिखाते हैं। अनुशासन के साथ ईमानदारी से प्रयास कर ही बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है। साथ ही उन्होंने युवाओं को उद्यमिता (इंटरप्रेन्योरशिप) में जोखिम लेने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने बस्तर की पूर्व परिस्थितियों और दंतेवाड़ा जिले में कलेक्टर के रूप में अपने कार्यकाल के अनुभवों का भी उल्लेख किया, जिससे उपस्थित युवाओं को प्रेरणा मिली। विश्व विद्यालय द्वारा बस्तर के युवाओं हेतु नवाचार के लिए आयोजित इस कार्यक्रम की भी उन्होंने सराहना की। कार्यक्रम में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मनोज कुमार वास्तव सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे ।

महतारी वंदन योजना से सशक्त हुई केकती बाई की जिंदगी

रायपुर सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल कार्यक्रम केवल प्रशासनिक संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आम जनजीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जीवंत तस्वीर भी बन गया।इसी चौपाल में सामने आई एक ऐसी कहानी, जिसने सरकारी योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को भावनात्मक रूप से उजागर किया। ग्राम सरोधी की निवासी मती केकती मरावी, अपने पति  राजेंद्र मेरावी और तीन बच्चों—चिंरजीव, किरण और विक्रांत के साथ एक साधारण किसान परिवार से जुड़ी हैं। खेती-किसानी ही उनके जीवन का मुख्य आधार है, लेकिन सीमित आय के बीच परिवार का खर्च चलाना हमेशा एक चुनौती रहा है। केकती बाई बताती हैं कि महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में नई रोशनी लाई है। अब तक उन्हें योजना की 26 किश्तें मिल चुकी हैं, जिससे वे घर के छोटे-छोटे खर्चों में हाथ बंटा पा रही हैं। पहले जहां हर छोटी जरूरत के लिए सोच-विचार करना पड़ता था, वहीं अब उनके पास आत्मनिर्भरता का एक आधार बन गया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से वे “स्वच्छता दीदी” के रूप में भी कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इसके साथ ही उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस सिलेंडर मिलने से उनके परिवार के स्वास्थ्य में भी सुधार आया है और रसोई का काम आसान हुआ है। केकती बाई केवल अपने परिवार तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” की अध्यक्ष भी हैं। समूह के माध्यम से उन्हें 15 हजार रुपए का अनुदान मिला है, जिससे वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। भावुक होते हुए केकती बाई ने कहा कि आज उनका परिवार पहले से कहीं अधिक सशक्त और आत्मविश्वासी महसूस करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। ग्राम सरोधी की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब योजनाएं सही हितग्राहियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक मदद नहीं देतीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई राह भी खोलती हैं।

अब डुप्लीकेट वोटिंग पर लगेगी लगाम, AI से होगी मतदाताओं की पहचान

 लखनऊ पंचायत चुनाव की तारीखें भले ही अभी घोषित न हुईं हों लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस बार के चुनाव में बड़ा तकनीकी बदलाव भी देखने को मिलेगा। फर्जी वोटिंग रोकने व कोई भी मतदाता दोबारा वोट न डाल सकें, इसके लिए आयोग ने ''फेशियल रिकाग्निशन सिस्टम'' (एफआरएस) बनवाया है। इस नई व्यवस्था के तहत मतदान केंद्रों पर वोट डालने आने वाले मतदाताओं के फोटो पहचान पत्र व उनकी फोटो खींची जाएगी। यह फोटो सीधे सर्वर पर अपलोड होगी। अगर कोई भी दोबारा वोट डालने आया तो सिस्टम सतर्क कर देगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त आरपी सिंह ने बताया कि इस तकनीक के लागू होने से किसी भी व्यक्ति द्वारा दूसरे के नाम पर वोट डालने की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। यदि कोई मतदाता फर्जी तरीके से मतदान करने का प्रयास करता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा और मौके पर मौजूद पीठासीन अधिकारी उसे पकड़ सकेंगे। इसके लिए आयोग एक विशेष मोबाइल एप तैयार करवाया है। पीठासीन अधिकारियों के मोबाइल फोन में यह एप इंस्टाल किया जाएगा, जिसमें मतदाता पहचान पत्र और लाइव फोटो अपलोड कर एआइ से सत्यापन किया जाएगा। चुनाव ड्यूटी के दौरान पीठासीन अधिकारी के फोन पर न तो कोई काल आ सकेगी और न वे इससे कोई काल कर सकेंगे। आयोग पीठासीन अधिकारियों को मोबाइल डाटा के लिए 200 रुपये भी देगा। मतदान के दौरान जैसे ही मतदाता की फोटो ली जाएगी, एप तुरंत एआइ का इस्तेमाल कर जांच करेगा कि वह पहले कहीं और वोट तो नहीं डाल चुके है। इससे डुप्लीकेट वोटिंग पर पूरी तरह अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। इस पायलट प्रोजेक्ट का परीक्षण मंगलवार को शाहजहांपुर की नगर पंचायत कटरा व कुशीनगर की नगर पंचायत फाजिलनगर के अध्यक्ष पद के उपचुनाव में करीब 50 हजार मतदाताओं पर सफलतापूर्वक किया गया। अब इसे पंचायत चुनावों में 2.20 लाख पोलिंग बूथों पर व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है। वर्तमान में पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का कार्य चल रहा है। आयोग का दावा है कि इस नई तकनीक से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी, साथ ही फर्जी मतदान पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।