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TET केस में बड़ा मोड़: मोहन सरकार को मिली सफलता, सुप्रीम कोर्ट ने तय की सुनवाई तारीख

भोपाल शिक्षकों के हित में लगातार प्रयास कर रहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस बार सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रदेश शासन द्वारा किए गए सतत प्रयासों को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। दरअसल, शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET-Teacher Eligibility Test) से जुड़े प्रकरण में दायर रिव्यू याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रकरण से संबंधित आवेदनों को स्वीकार करते हुए मामले को ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दे दिया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, इस महत्वपूर्ण प्रकरण की सुनवाई 13 मई को दोपहर 2 बजे के लिए निर्धारित की गई है। ये सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के अधीन की जाएगी। ये निर्णय शिक्षकों के पक्ष को विस्तार से रखने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, मामले के न्यायिक पुनर्विचार का मार्ग प्रशस्त करेगा। महत्वपूर्ण कानूनी पहल आपको बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश शासन ने शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए ये महत्वपूर्ण कानूनी पहल मानी जा रही है। सीएम ने कहा है कि, प्रदेश सरकार शिक्षकों के अधिकारों और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही इस प्रकरण में पूरी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। शासन को विश्वास है कि, न्यायालय में पेश किए जाने वाले तथ्यों के आधार पर शिक्षकों को जल्द ही न्याय भी जरूर मिलेगा। शिक्षक कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश शासन ने 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसमें शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करनी जरूरी बताया गया है। इस फैसले के बाद कई कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन मोहन यादव से उनके आवास पर मुलाकात की थी। संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पैदा हुई स्थितियों की जानकारी उन्हें दी थी। इसके बाद मुख्यमं ने सभी को आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि शिक्षकों के कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोर्ट की प्रक्रिया में किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो। सरकार हर समय शिक्षकों के साथ है। शिक्षकों को मिली सरकारी वकालत प्रदेश सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर करना शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण उम्मीद की किरण माना जा रहा है। इस कदम से ये संदेश जाता है कि, राज्य स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ शिक्षकों के अधिकारों का भी पूरी तरह से ध्यान रखा जा रहा है। न्यायालय की सुनवाई के बाद उम्मीद है कि, शिक्षकों के हितों की रक्षा और उनकी स्थिति को मजबूत करने वाले फैसले आएंगे। साथ ही, इस पूरे मामले ने शिक्षकों को ये विश्वास भी दिया कि, उनकी आवाज को सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा रही है और उनके भविष्य को संवारने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

किसानों को मिलेगा सीधा फायदा: जमीन के बदले विकसित भूखंड, 6-लेन सड़क योजना लागू

इंदौर मध्य प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट इंदौर इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का काम शुरू होने जा रहा है। इंदौर को नई ऊंचाई देने वाले 2410 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 3 मई को नैनोद में भूमि पूजन करेंगे। किसानों को बुलाने के लिए सरकारी महकमा पीले चावल बांटेगा। आने पर बकायदा उनकी जमकर खातिरदारी की जाएगी जिसके लिए एसी पंडाल और लजीज भोजन की व्यवस्था की जा रही है। इंदौर एयरपोर्ट के पीछे से पीथमपुर के सेक्टर सेवन के बीच एमपीआइडीसी इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाने जा रहा है जिसमें 20.25 किमी की लंबी सड़क होगी। 1331.02 हेक्टेयर जमीन पर ये योजना विकसित होगी जिसमें अलग अलग सेक्टर बनाए जाएंगे। सरकार जमीन के बदले किसानों को 60 फीसदी विकसित भूखंड देगी जो कि अब तक की योजनाओं में सबसे ज्यादा है। तैयार हो रहे एसी पंडाल महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का 3 मई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भूमि पूजन करने जा रहे है। आयोजन की तैयारियों को लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा ने गुरुवार को नैनोद में एक बैठक बुलाई जिसमें जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन व एमपीआइडीसी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हिमांशु प्रजापति, राऊ विधायक मधु वर्मा, एडीएम रोशन राय व एसडीएम निधि वर्मा प्रमुख रूप से मौजूद थीं। चर्चा के दौरान तय किया गया कि कॉरिडोर में प्रभावित गांव टीही, धन्नड़, भैंसलाय, सोनवाय, डेहरी, बागोदा, मोकलाय, नरलाय, शिवखेड़ा, सिंदौड़ी, सिंदौड़ा, श्रीराम तलावली, नावदा पंथ, बिसनावदा, रिंजलाय, नैनोद व कोर्डिया बर्डी के किसानों को आयोजन के लिए पीले चावल देंगे जो अपनी जमीन देकर विकास को नई रफ्तार दे रहे हैं। गर्मी में किसान परेशान न हों इसके लिए 4 हजार लोगों की क्षमता वाला एसी पंडाल तैयार किया जा रहा है। बकायदा लजीज भोजन भी होगा। कुछ किसान योजनाओं में ली जाने वाली जमीन का चार गुना मुआवजा देने की घोषणा पर मुख्यमंत्री का सम्मान करेंगे। 5 लाख को मिलेगा रोजगार इकोनॉमिक कॉरिडोर सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। यहां पर अलग अलग सेक्टर बनाए जाएंगे जिसमें हर सेक्टर का अलग लैंड यूज होगा। एयरपोर्ट के पीछे से पीथमपुर तक 75 मीटर चौड़ी सडक़ बनेगी जो इंदौर अहमदाबाद नेशनल हाईवे व एबी रोड को जोडऩे का काम करेंगी। कॉरिडोर के दोनों तरफ 300-300 मीटर जमीन ली जा रही है। इसमें फिनटेक सिटी, दलाल स्ट्रीट, आइटी हब के साथ में व्यावसायिक व औद्योगिक ह्रश्वलॉट होंगे तो बड़ा एरिया रेसीडेंशियल ह्रश्वलॉट का भी रहेगा जिसमें 20 मंजिल तक हाईराइज रहेगी।

BPSC Prelims में बड़ा बदलाव: 5वां ऑप्शन ‘E’ हुआ अनिवार्य, नहीं भरा तो नेगेटिव मार्किंग

पटना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित प्रारंभिक (बहुविकल्पीय) परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। अब प्रत्येक प्रश्न के लिए 5 विकल्प (A–E) होंगे। इस संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सटीक बनाना है। बीपीएससी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत हर प्रश्न में पांच विकल्प (A, B, C, D, E) दिए जाएंगे। इनमें विकल्प ‘E’ का अर्थ होगा—प्रश्न का उत्तर नहीं दिया गया (Not Attempted)। पुरानी व्यवस्था में 4 विकल्प पहले प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्प (A, B, C, D) होते थे और इनमें से किसी एक का चयन करना अनिवार्य नहीं था। इसी वजह से कई अभ्यर्थी प्रश्नों को बिना उत्तर दिए छोड़ देते थे, जबकि उत्तर देने वाले अभ्यर्थी उपलब्ध विकल्पों (A, B, C या D) में से किसी एक का चयन करते थे। E’ विकल्प अनिवार्य अभ्यर्थी प्रश्न का उत्तर देना चाहता है, तो वह विकल्प A, B, C या D में से किसी एक का चयन करेगा। यदि अभ्यर्थी प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता है, तो उसे अनिवार्य रूप से विकल्प ‘E’ का चयन करना होगा। नेगेटिव मार्किंग लागू बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित प्रारंभिक (बहुविकल्पीय) परीक्षा प्रणाली में पहले कई अभ्यर्थी प्रश्नों को बिना हल किए खाली छोड़ देते थे, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते थे। लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत हर प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे अभ्यर्थियों की जवाबदेही बढ़ेगी। इसके साथ ही ओएमआर शीट में किसी तरह की छेड़छाड़ की संभावना भी कम हो जाएगी। यदि अभ्यर्थी किसी प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहते हैं, तो वे विकल्प ‘ई’ का चयन कर सकते हैं। वहीं, यदि कोई अभ्यर्थी दिए गए पाँचों विकल्पों में से किसी को भी नहीं चुनता है, तो ऐसे प्रत्येक अनुत्तरित प्रश्न पर 1/3 अंक की नेगेटिव मार्किंग के रूप में कटौती की जाएगी।

2030 से पहले CO2 उत्सर्जन में गिरावट आ सकती है, 2025 में भारत का उत्सर्जन सिर्फ 0.7% बढ़ा

भोपाल  एक नए विश्लेषण से पता चला है कि भारत के कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में वर्ष 2025 में केवल 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो दो दशकों से अधिक समय में सबसे धीमी वृद्धि है। जलवायु विज्ञान, नीति और ऊर्जा पर केंद्रित ब्रिटेन स्थित ऑनलाइन प्रकाशन कार्बन ब्रीफ के लिए सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार, भारत के कुल कार्बन2 उत्सर्जन के लगभग आधे हिस्से के लिए जिम्मेदार विद्युत क्षेत्र से होने वाला उत्सर्जन 2025 में लगभग 3.8 प्रतिशत कम हो गया और यह उस वर्ष के कुल उत्सर्जन में कमी का प्रमुख कारण हो सकता है। हाल के वर्षों में भारत के CO2 उत्सर्जन में 4 से 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो विश्व में सबसे तेज़ वृद्धि दरों में से एक है। विश्लेषण के अनुसार, 2025 में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि कोविड काल को छोड़कर 2001 के बाद से सबसे कम थी। भारत के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कार्बन डाइऑक्साइड का योगदान लगभग 80 प्रतिशत है । भारत के उत्सर्जन की वृद्धि दर में कमी आना पर्यावरण की दृष्टि से वैश्विक स्तर पर अच्छी खबर है, क्योंकि भारत ग्रीनहाउस गैसों का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है। लेकिन यह भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती या औद्योगिक गतिविधियों और मांग में गिरावट का संकेत भी हो सकता है। हालांकि आधिकारिक उत्सर्जन डेटा तैयार करने और संकलित करने में वर्षों लग जाते हैं – भारत के उत्सर्जन पर नवीनतम आधिकारिक डेटा 2020 से संबंधित है – सीआरईए जैसे अध्ययन देश के उत्सर्जन का अनुमान लगाने के लिए बिजली उत्पादन, औद्योगिक उत्पादन और ईंधन खपत पर आवधिक डेटा जैसे विभिन्न संकेतकों का उपयोग करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उत्सर्जन की धीमी पड़ती यह रफ्तार कोई संयोग नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में गहरे बदलाव का संकेत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ते कदम, कोयला आधारित बिजली में गिरावट और बिजली मांग की धीमी रफ्तार इन तीनों ने मिलकर नई उम्मीदें पैदा की हैं। ऊर्जा क्षेत्र बना बदलाव की धुरी रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा और निर्णायक बदलाव बिजली क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां 2025 में उत्सर्जन में 3.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके पीछे स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में रिकॉर्ड बढ़ोतरी बड़ी वजह रही, जिससे हर साल करीब 90 टेरावाट-घंटे अतिरिक्त बिजली उत्पादन की संभावना तैयार हुई है। वहीं, बिजली की मांग में भी साफ सुस्ती दिखी, जो 2019 से 2023 के बीच 7.4 फीसदी की दर से बढ़ रही थी, वह 2025 में घटकर करीब एक फीसदी रह गई। ये संकेत साफ तौर पर दर्शाते हैं कि अब देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में स्वच्छ ऊर्जा तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और पारंपरिक स्रोतों की पकड़ कमजोर पड़ने लगी है। जीवाश्म ईंधनों की कमजोर पड़ती पकड़ विश्लेषण में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि 2025 में तेल, गैस और कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों की मांग में भी नरमी देखी गई, जो ऊर्जा क्षेत्र में बदलती प्राथमिकताओं की कहानी कहती है। तेल की मांग में हो रही वृद्धि सिमटकर महज 0.4 फीसदी रह गई, जबकि गैस की मांग में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। सबसे बड़ा बदलाव आयातित कोयले में देखने को मिला, जिसकी खपत 20 फीसदी तक घट गई, वहीं गैस आयात में भी 6 फीसदी की कमी आई है। ये आंकड़े सिर्फ गिरावट नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव का संकेत हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत अब धीरे-धीरे विदेशी ईंधनों पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है, जिससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो रही है, बल्कि देश वैश्विक ईंधन संकटों के झटकों से भी खुद को बेहतर तरीके से बचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उद्योग बढ़ा रहे उत्सर्जन हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं है, क्योंकि उद्योग अब भी उत्सर्जन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। खासकर इस्पात और सीमेंट जैसे बुनियादी उद्योगों में तेजी से विस्तार देखने को मिला है, जहां इस्पात उत्पादन में 8 फीसदी और सीमेंट उत्पादन में 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। यही वजह है कि कुल कार्बन उत्सर्जन में हल्की बढ़ोतरी बनी रही, जो यह संकेत देती है कि स्वच्छ ऊर्जा की प्रगति के बावजूद औद्योगिक क्षेत्र में बदलाव अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। क्या आ गया निर्णायक मोड़? विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का बिजली क्षेत्र अब एक 'टर्निंग पॉइंट' पर पहुंच सकता है, जहां स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ोतरी, बिजली मांग से बराबरी या उससे आगे निकल जाए। सीआरईए के प्रमुख विश्लेषक लाउरी मायल्लीवीरता के मुताबिक अगर यही रुझान जारी रहा तो यह कोयला आधारित बिजली में स्थाई गिरावट की शुरुआत हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि गुजरात, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्य पहले ही इस बदलाव की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि देश के लिए 2026 एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है, जब अक्षय ऊर्जा क्षमता में बढ़ोतरी पहली बार बिजली मांग के विस्तार को पीछे छोड़ दे, यह बदलाव भारत के बिजली क्षेत्र की दिशा और भविष्य दोनों को निर्णायक रूप से बदलने का संकेत होगा। रिपोर्ट और सीआरईए से जुड़ी विश्लेषक अनुभा अग्रवाल का इस बारे में कहना है कि जीवाश्म ईंधनों की खपत में गिरावट से न सिर्फ आयात घटा है, बल्कि वैश्विक तेल-गैस संकट के असर से भी देश को राहत मिली है। उनका कहना है कि 2025 में तापीय बिजली संयंत्रों में आयातित कोयले की खपत 20 फीसदी तक घट गई, जबकि कुल गैस आयात में भी 6 फीसदी की कमी दर्ज की गई। यह बदलाव बेहद अहम है, क्योंकि इससे देश की मौजूदा वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति संकट के प्रति संवेदनशीलता कम हुई है। उनके मुताबिक, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ना सिर्फ जलवायु के लिए नहीं, बल्कि बेहतर हवा और मजबूत ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। हालांकि इस सकारात्मक रुझान के बीच एक चिंता भी बनी हुई है। भारत अभी भी कोयला आधारित बिजली क्षमता और जीवाश्म ईंधन आधारित उद्योगों के विस्तार की योजना बना रहा है, जो आने वाले वर्षों में उत्सर्जन की दिशा तय करेगा। बिजली … Read more

मध्यप्रदेश: दमोह की स्वावलंबी गोशाला परियोजना में पीएम मोदी के आगमन की तैयारी

 भोपाल प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी का तीसरी बार मध्य प्रदेश दौरे पर आएंगे। वो यहां सूबे के दमोह जिले आ सकते हैं। उनका आगमन लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, इससे पहले पीएम मोदी चुनावी सभाओं को संबोधित करने दमोह आए थे। इसके बाद वो अब बिना किसी चुनावी सभा के जिले की पथरिया विधानसभा इलाके में स्वावलंबी गोशाला के तहत बनने जा रही 517 एकड़ जमीन में गोशाला के भूमि पूजन समारोह में शामिल होने आएंगे। पीएम मोदी आगामी 10 मई को नरसिंहगढ़ इलाके में आ सकते हैं। माना जा रहा है कि, पीएम का आना लगभग तय है। दमोह जिले में स्वावलंबी गोशाला कामधेनु निवास की स्थापना के लिए विकासखंड पथरिया के ग्राम रानगिर, कल्याणपुरा और बिजोरी में स्वीकृत 517 एकड़ जमीन का कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी के साथ निरीक्षण किया। चूंकि, उक्त गोशाला के निर्माण कार्य के भूमि पूजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा प्रस्तावित है। अंतिम चरण में चल रही तैयारियां स्वीकृत भूमि पर गोशाला के निर्माण और संचालन के लिए मेसर्स श्रीराम मानेक एग्रो प्रोडक्टस प्राइवेट लिमिटेड मुंबई को मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड भोपाल द्वारा आदेशित किया गया है। दिए गए निर्देश इस संबंध में उपसंचालक पशुपालन डॉ. बृजेंद्र असाटी ने बताया कि मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड द्वारा गोशाला के संचालन के लिए नियुक्त कंपनी को समय सीमा में भूमि की फेंसिंग और अस्थायी 200 गौवन्श की गोशाला का निर्माण 10 मई 2026 के पहले किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया जायजा एसपी ने कहा कि, इस गोशाला का भूमि पूजन वैसे तो प्रधानमंत्री के सानिध्य में होना प्रस्तावित है, जिसकी तैयारियां प्रक्रिया के अंतिम चरण में चल रही हैं। इसी के चलते कलेक्टर के साथ – साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और समय पर निर्धारित काम निपटाने के साथ साथ तैयारियों को लेकर जरूरी दिशा – निर्देश दिए।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए समयबद्ध एवं समन्वित रूप से करें कार्य: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में भर्ती प्रक्रिया एवं विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए समयबद्ध एवं समन्वित रूप से कार्य पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाये। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने ग्वालियर मेडिकल कॉलेज में सीटीवीएस एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की स्वीकृति संबंधी कार्यवाही को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान में किसी प्रकार की देरी न होने पर विशेष बल दिया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने बुधनी, दमोह एवं छतरपुर मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा आवश्यक फर्नीचर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र से इन मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण कार्य प्रारंभ हो सके, इसके लिए सभी आवश्यक कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थाओं में लंबित आउटसोर्स पदों पर भर्ती हेतु सभी जिलों में त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। साथ ही, नर्सिंग कॉलेजों में नर्सिंग शिक्षकों के 59 राजपत्रित पदों पर भर्ती के लिए मांग पत्र लोक सेवा आयोग को शीघ्र प्रेषित करने के निर्देश भी दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सीसीएचबी में नवीन पद सृजन के लिए प्रस्ताव तैयार करने तथा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में कैंसर सर्जरी ब्लॉक से सेवाएं प्रारंभ करने हेतु विशेषज्ञों की नियुक्ति की कार्यवाही प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजू एस उपस्थित रहे।  

लखपति दीदियों के हौसले की उड़ान देख गदगद हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय , सबको और मेहनतकर अब करोड़पति बनने की राह पर चलने कहा

रायपुर मई की तपती गर्मी में आज लगातार दूसरे दिन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय दूरस्थ गांवों के औचक दौरे पर रहे । कबीरधाम ज़िले के पंडरिया स्थित लोखान पंचायत में आज मुख्यमंत्री का आगमन हुआ । इस अवसर पर वे बैगा बाहुल्य कमराखोल में पीएम जनमन योजना के तहत हुए कार्यों का निरीक्षण किए और वहीं पास में आम के पेड़ों के नीचे अपनी चौपाल लगा लिए । अपने बीच मुख्यमंत्री को देख ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई । बीरनमाला, कमल के फूल से मुख्यमंत्री का आत्मीय अभिनंदन करते हुए ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे । इस दौरान महतारी शक्ति को सामने बैठा देख मुख्यमंत्री ने पूछ लिया कितनी महतारी यहाँ लखपति हो गई हैं ? एक साथ अनेक हाथ हवा में उठ गए । मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते सबको करोड़पति बनने की दिशा में आगे बढ़ने कहा । उन्होंने बारी- बारी से लखपति दीदियों से बातचीत की । यहाँ जंगल से बीन कर लाए  महुआ और चार को मुख्यमंत्री  साय को उपहार के रूप में देते हुए कुकदूर की लखपति दीदी  कचरा तेलगाम ने मुख्यमंत्री से कहा कि महुआ का पौष्टिक लड्डू बनाकर खाइएगा , वरना मैं बना कर दूँगी । मुख्यमंत्री भी उनकी आत्मीयता देख भाव विभोर होकर मुस्कुराते हुए बोले कि घर जाकर बनवाकर खाऊँगा ।  कचरा तेलगाम दीदी आस पास के गांवों में बन रहे प्रधानमंत्री आवासों में सेंट्रिग प्लेट लगाती हैं और इससे उन्हें एक साल में ८० हज़ार की आय हुई है । उन्होंने कहा कि आज चौपाल लगा देख वे साहस वहाँ पहुँची और मुख्यमंत्री  के लिए भेंट स्वरूप जंगल से बीने महुआ और चार दी हैं ।  वहीं डीलर दीदी  रजमत बाई धुर्वे ने बताया कि वे प्रधानमंत्री आवासों के लिए मटेरियल सप्लाई का काम करती हैं । उन्हें सालाना 2.50 – 3 लाख का मुनाफा हुआ है । लखपति पशु सखी  शिवरानी पटेल का कहना है कि समूह से जुड़ सीआईएफ से उन्होंने व्यवसाय के लिए ऋण लिया और अपने खेत में सब्जी- भाजी लगायी । उन्हें सालाना डेढ़ लाख की आय हो रही । इस बिहान योजना से जीवन में आए सकारात्मक बदलाव के लिए धन्यवाद स्वरूप उन्होंने अपने खेत की सब्जियां टोकरी में मुख्यमंत्री को भेंट की । मुख्यमंत्री ने भी सभी दीदियों से बात कर प्रोत्साहित किया कि इसी तरह मन लगाकर काम करिए और आर्थिक रूप से सशक्त होइए।  ज्ञात हो कि लोखन पंचायत में 58 लखपति दीदियां हैं जो विभिन्न व्यवसाय से जुड़ आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं ।        चौपाल में हुआ नामकरण आज अपने नौनिहाल बच्चे के साथ  ऋषि बघेल भी चौपाल पहुँची । यहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री से एक ही गुहार लगायी कि उनके बच्चे का नामकरण कर दें मुख्यमंत्री । बच्चे को गोद में लेकर दुलारते हुए मुख्यमंत्री  साय ने पूछा कि कब हुआ है इसका जन्म ? तब माँ ने बताया कि रविवार के दिन । मुख्यमंत्री ने बच्चे को स्नेह से देखते हुए नाम रविशंकर बघेल रखा और आशीर्वाद स्वरूप ५०० रुपए भी दिए । पंडरिया विधायक  भावना बोहरा ने भी बच्चे को ५०० रुपए अपनी ओर से आशीर्वाद स्वरूप दिया ।मुख्यमंत्री के द्वारा नवजात का नाम रखते ही चौपाल में तालियाँ गूंज उठी । चौपाल में पहुंचे मेधावी विधार्थी आज कबीरधाम के पंडरिया के लोखान पंचायत के आश्रित ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की चौपाल को देख वहाँ से गुज़र रहे राजेंद्र मसराम और उनके पिता भी रुक गए । इस दौरान बातचीत में पता चला कि छिरहा के रहने वाले इस मेधावी बच्चे ने इस साल हाई स्कूल में 94.5 %  अंक के साथ ज़िले में नौवाँ स्थान प्राप्त किया है । मुख्यमंत्री ने उन्हें ख़ुश होकर पेन दिया और पूछा बड़ा होकर क्या बनना चाहते हैं ? इस पर उन्होंने बड़ा होकर आईएएस बनने के सपने को साझा किया । मुख्यमंत्री ने उन्हें खूब सारी शुभकामनाएँ दी ताकि वो अपना सपना पूरा कर सकें । यहाँ कमराखोल के बैगा बस्ती की कक्षा नवमी की बालिका भी चौपाल में मुख्यमंत्री से मिली और बताया कि आज पीएम जनमन से बने उनके आवास में मुख्यमंत्री पहुंचे थे । वहाँ मुख्यमंत्री से बात नहीं हो पायी इस लिए वे चौपाल में पहुँचीं । इस साल यह बच्ची हेम कुमारी 75% अंक कक्षा नौवी में लायी । एचसीएम ने आगे भी मन लगाकर पढ़ने की सलाह और बधाई देते हुए पेन दिया ।  घोषणाएँ बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज चौपाल लगाकर शासकीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली और प्रसन्न दिखे कि दूरस्थ अंचल तक हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है । उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर कमरखोल में  मिशन तालाब गहरीकरण (ट्यूबवेल के साथ), रामखिलावन के घर से ग्राम देवसरा तक मिट्टी मुरुम सड़क (६ किलोमीटर लगभग) , सामुदायिक भवन, मुक्तिधाम शेड निर्माण तथा  महतारी सदन ( स्व सहायता समूह की महिलाओं की माँग पर ) की घोषणा की । इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर  गोपाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक  धर्मेंद्र सिंह , सीओ जिला पंचायत  अभिषेक अग्रवाल और ग्रामीण चौपाल में उपस्थित रहे ।

5 राज्यों में विधानसभा चुनाव परिणामों पर मुख्यमंत्री ने कहा, यह जनादेश ‘नए भारत’ के संकल्प की शक्ति

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के ऐतिहासिक परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे पीएम मोदी के प्रति देशवासियों के अटूट विश्वास का प्रतीक बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व और लोक-कल्याणकारी नीतियों पर जनता का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को बधाई अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व एवं लोक-कल्याणकारी नीतियों पर देशवासियों का अटूट विश्वास है, जो आज विधानसभा चुनाव के ऐतिहासिक परिणामों के रूप में पुनः परिलक्षित हुआ है। पश्चिम बंगाल में पहली बार, असम में लगातार तीसरी बार और पुडुचेरी में दूसरी बार भाजपा गठबंधन की सरकार बनना इसी अगाध विश्वास का सुफल है। जन-जन का यह अभूतपूर्व जनादेश प्रधानमंत्री जी के 'नए भारत-विकसित भारत' के विराट संकल्प की सिद्धि को एक नई गति प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक विजय के लिए बंगाल, असम एवं पुडुचेरी के भाजपा संगठन से जुड़े सभी समर्पित पदाधिकारियों, कर्मठ कार्यकर्ताओं व विजयी प्रत्याशियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने आगे लिखा कि सुशासन व राष्ट्रवाद को अपना बहुमूल्य आशीर्वाद प्रदान करने वाली जनता-जनार्दन का हृदय से आभार एवं अभिनंदन।    

रतलाम के डायल 112 हीरोज संवेदनशीलता और तत्परता से भटकी बीमार महिला को दिलाया उपचार

भोपाल रतलाम जिले के थाना इंडस्ट्रियल एरिया क्षेत्र में डायल-112 जवानों की मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही से मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं बीमार महिला को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया गया। इस कार्यवाही ने यह स्पष्ट किया कि डायल-112 सेवा हर जरूरतमंद तक सहायता पहुँचाने के लिए सदैव सजग है। 03 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना इंडस्ट्रियल एरिया क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बड़बड़ में 40 वर्षीय महिला भटकी हुई अवस्था में मिली है, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं बीमार है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही संबंधित क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया। घटनास्थल पर पहुँचकर प्रधान आरक्षक  शेर सिंह एवं पायलट  विशाल राव ने महिला को सुरक्षित संरक्षण में लिया और आसपास के क्षेत्र में उसके परिजनों की तलाश एवं पूछताछ की, किंतु महिला की पहचान संबंधी कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए डायल-112 जवानों ने मानवता का परिचय देते हुए महिला को एफआरव्ही वाहन के माध्यम से तत्काल मेडिकल कॉलेज रतलाम पहुँचाया। डायल-112 जवानों की इस संवेदनशील और जिम्मेदार कार्रवाई से एक असहाय महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकी। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा केवल आपात घटनाओं में ही नहीं, बल्कि बेसहारा, बीमार एवं असहाय व्यक्तियों की सहायता के लिए भी समान रूप से प्रतिबद्ध और तत्पर है।  

इंदौर मेट्रो के लिए एमपी ट्रांसको ने ऊर्जीकृत किया 200 एमवीए क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना को विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति करने के लिए 220 केवी सब स्टेशन मांगलिया,इंदौर में 200 एमवीए क्षमता का नया पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया है। उन्होंने बताया कि चुनौतियों के बावजूद इंदौर जैसे शहर मे यह कार्य मेट्रो परियोजना की आवश्यकताओं के साथ ही शहर की विद्युत अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। घनी आबादी वाला शहरी क्षेत्र होने के कारण खजराना में अतिरिक्त विद्युत पारेषण अवसंरचना विकसित करना तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। तकनीकी कौशल से निकाला सब स्टेशन में उपयुक्त स्थान ऊर्जा मंत्री ने बताया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए एमपी ट्रांसको, जबलपुर के प्लानिंग एवं डिजाइन विंग के विशेषज्ञ इंजीनियरों ने अपने तकनीकी कौशल, अनुभव एवं विशेषज्ञता का परिचय देते हुए 220 केवी सब स्टेशन मांगलिया, इंदौर में पावर ट्रांसफार्मर तथा दो फीडरों के लिए उपयुक्त स्थान का चयन किया। परिणामस्वरूप इंदौर शहर से खजराना मेट्रो स्टेशन तक विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना संभव हो सका। उन्होंने इस कार्य को सफलता पूर्वक पूरा करने के लिए एमपी ट्रांसको को बधाई देते हुए कहा है कि यह एमपी ट्रांसको के इंजीनियर्स की उत्कृष्टता, समर्पण और कौशल के कारण संभव हो पाया। दो डेडिकेटेड सर्किट के माध्यम से की जायेगी आपूर्ति एमपी ट्रांसको इंदौर के अधीक्षण अभियंता  अनिल लाठी ने बताया कि इंदौर मेट्रो ने खजराना स्थित अपने मेट्रो रेल सबस्टेशन के लिए डिपॉजिट स्कीम के अंतर्गत मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी से विद्युत आपूर्ति की मांग की थी। जिसके लिए मेट्रो इंदौर द्वारा निर्धारित राशि 26.26 करोड रुपये जमा कराने के बाद यह कार्य एम.पी. ट्रांसको के सुपरविजन में कराया गया। इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से इंदौर मेट्रो परियोजना के संचालन के लिये महत्वपूर्ण खजराना मेट्रो रेल सबस्टेशन को दो 132 केवी डेडिकेटेड सर्किटों के माध्यम से पर्याप्त एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति हो सकेगी।