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रीवा में जल प्रदाय एवं सीवरेज परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा शहर में संचालित जल प्रदाय योजना एवं सीवरेज परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कार्यों की वर्तमान स्थिति, गुणवत्ता, समय-सीमा और वित्तीय विषयों पर विस्तार से चर्चा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कार्य तय समय-सीमा में पूरे किए जाएँ, जिससे नागरिकों को समय पर बेहतर सुविधाएँ मिल सकें।बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास  संजय दुबे, आयुक्त  संकेत भोंडवे तथा नगर निगम रीवा के आयुक्त  अक्षत जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने जल प्रदाय व्यवस्था के अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से ओवरहेड वाटर टैंक के निर्माण और जल वितरण नेटवर्क के विस्तार को आगामी वर्षा ऋतु से पहले पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि कार्यों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए, जिससे समयबद्ध क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान आमजन की दिनचर्या प्रभावित न हो, इसके लिए कार्यों को सुव्यवस्थित एवं चरणबद्ध तरीके से किया जाए। नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर भी उन्होंने बल दिया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सीवरेज कार्यों की समीक्षा करते हुए शेष पाइपलाइन बिछाने और हाउस सर्विस कनेक्शनों को प्राथमिकता के साथ जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सीवरेज नेटवर्क का समय पर पूरा होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्होंने एसटीपी निर्माण कार्य को भी शीघ्र गति से पूरा करने के निर्देश दिए।  

बंगाल चुनाव में प्रचंड जीत पर भाजपा नेताओं ने सीएम योगी को दी बधाई

गोरखपुर  पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत पर भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी। पश्चिम बंगाल के चुनाव में सीएम योगी की रैलियों ने भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में जबरदस्त माहौल बनाया और सोमवार को चुनाव परिणाम आने के बाद गोरखपुर के भाजपाई खुशी से झूम उठे।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को लखनऊ से महराजगंज होते हुए देर शाम गोरखपुर पहुंचे। एमपी पॉलिटेक्निक ग्राउंड के हेलीपैड पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह, भाजपा के महानगर संयोजक राजेश गुप्ता आदि ने मुख्यमंत्री की अगवानी करते हुए पुष्पगुच्छ देकर उनका भावपूर्ण स्वागत किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी नेताओं ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली शानदार जीत के लिए उल्लास और उमंग के साथ सीएम योगी को बधाई दी।  हेलीपैड पर भाजपा नेताओं की बधाई स्वीकार करने के बाद मुख्यमंत्री गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले शिवावतार महायोगी गोरखनाथ का विधि विधान से दर्शन पूजन किया। तत्पश्चात वह अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की समाधि स्थल पर गए और उनकी प्रतिमा का दर्शन, पूजन कर आशीर्वाद लिया।

20 हजार की सुपारी पर हत्या के मामले, बिहार में शूटरों पर कड़ी नजर

पटना बिहार में 350 शूटर सुपारी लेकर हत्या की वारदात को अंजाम देते हैं। सीआईडी और बिहार एसटीएफ ने सूबे के सुपारी शूटरों की सूची बनाई है। सूबे में सुपारी लेकर हत्याओं का सिलसिला चला है। 20 हजार की सुपारी पर भी हत्या की वारदात को अंजाम दिया जा रहा है। हत्या की वारदात पर लगाम लगाने के लिए बिहार एसटीएफ ने सुपारी शूटरों पर कार्रवाई की योजना बनाई है। सूची में शामिल शूटर की वर्तमान गतिविधियों के संबंध में एसटीएफ जांच कर रही है। अहियापुर के बाड़ा जगन्नाथ में बीते माह प्रॉपर्टी डीलर प्रभाकर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें बकाए रुपये हड़पने के लिए सुपारी देकर हत्या कराने की बात सामने आई थी। पुलिस ने हत्या की सुपारी देने वाले दो आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसमें चिह्नित दो सुपारी शूटरों को अब तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। अहियापुर में चलती बाइक पर सिर में गोली मारने वाले शूटर प्रॉपर्टी डीलर प्रभाकर सिंह के अलावा तीन अन्य घटनाओं को पूर्व में अंजाम दे चुके हैं। मीनापुर इलाके के मिट्ठू सहनी गिरोह के चार सुपारी शूटर ने डेढ़ साल पहले मीनापुर इलाके में महज 20 हजार की सुपारी पर खेत में काम कर रहे किसान की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना में शामिल शूटर हाल ही में जमानत पर मुक्त हुए हैं। इसके अलावा स्मैकिया गिरोह से जुड़े शूटर भी वारदात को अंजाम दे रहे हैं। सीआईडी के डीआईजी संजय कुमार के अनुसार प्रोफेशनल कीलिंग की वारदात में कमी लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसमें 350 सुपारी शूटर की सूची बनाई गई है। उनपर बिहार एसटीएफ की टीम नजर रख रही है। निगरानी में संदिग्ध गतिविधि पाए जाने के बाद टीम त्वरित कार्रवाई करती है। सुपारी शूटर की निगरानी होने से प्रोफेशनल कीलिंग की वारदात में पिछले सालों की अपेक्षा कमी आई है।

पश्चिम बंगाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के विकास मॉडल पर जताया भरोसा, सोनार बांग्ला का करेंगे निर्माण : डिप्टी सीएम अरुण साव

रायपुर  उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में भाजपा-एनडीए की ऐतिहासिक जीत पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि यह जनादेश प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा और समर्पित कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का परिणाम है। वहीं लखीमपुर लोकसभा प्रभार के सभी भाजपा प्रत्याशियों की जीत हुई है।  उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि, पश्चिम बंगाल की जनता ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को सम्मान देते हुए भाजपा पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि, स्वामी विवेकानंद, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, रविन्द्रनाथ टैगोर और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की पावन धरती के गौरव को पुनर्स्थापित करने और ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प को साकार करने के लिए भाजपा पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।  साव ने कहा कि यह विजय पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम, त्याग और संघर्ष से मिली है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इस जीत को राष्ट्रहित की जीत बताया। उप मुख्यमंत्री  साव ने असम विधानसभा चुनाव की जीत पर कहा कि राज्य की जनता ने लगातार तीसरी बार भाजपा को समर्थन देकर विकास और स्थिर नेतृत्व पर अपनी मुहर लगाई है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।   साव ने कहा कि असम की जनता ने कांग्रेस के आतंक, नकारात्मक और तुष्टिकरण के विचारों को स्पष्ट रूप से नकार दिया है। यह जीत विकसित असम बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।  उन्होंने बताया कि, मैं असम के 9 विधानसभाओं में गली-गली और गांव-गांव घूमकर जनसमर्थन जुटाया , ये विजय कांग्रेसी षड्यंत्र और देश विरोधी विचार के खिलाफ असम की जनता के प्रण की जीत है। वहीं उप मुख्यमंत्री  साव ने पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में भाजपा-एनडीए को मिली जीत पर बधाई दी। विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में पुडुचेरी विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। लखीमपुर लोकसभा प्रभार के इन भाजपा प्रत्याशियों ने दर्ज की जीत उप मुख्यमंत्री  साव को भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने असम के लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रभार दिया था, इसमें भाजपा के सभी आठों प्रत्याशी ने प्रचंड मतों से जीत दर्ज की है। धेमाजी विधानसभा में डॉ रनोज पेगू, जोनाई में भुवन पेगु जी, सिसिरबोरगांव में जीवन गोगोई जी, लखीमपुर में मानव डेका जी, ढकुआखाना में नबा कुमार दलई जी, डुम डुमा में रुपेश गोवाला जी, सदिया में बलिन चेतिया जी एवं रोंगोनदी में ऋषिराज हजारिका जी ने भारी मतों से जीत दर्ज की है।

खाट में बैठकर मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से किया सीधा संवाद, सुनी समस्याएं, समाधान के दिए निर्देश

रायपुर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज  खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकासखंड छुईखदान के ग्राम सरोधी पहुंचे, जहां उन्हें अपने बीच पाकर ग्रामीणों में उत्साह, आत्मीयता और अपनत्व का अनोखा दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री के आगमन से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण उन्हें देखने और उनसे मिलने उमड़ पड़े। गांव की महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने महुआ, चार, आम और रखियां बड़ी भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया, वहीं स्कूली बच्चों ने अपने हाथों से तैयार गुलमोहर और कनेर के फूलों के गुलदस्ते भेंट कर अपनी खुशी और सम्मान व्यक्त किया। यह स्वागत ग्रामीण संस्कृति और सादगी की जीवंत झलक बन गया। ग्राम सरोधी के पूर्व माध्यमिक शाला परिसर में कटहल और गुलमोहर के पेड़ों की छांव तले मुख्यमंत्री ने खाट पर बैठकर चौपाल लगाई और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस सहज और आत्मीय वातावरण में उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से हम आपके बीच आकर आपका हाल-चाल जानने, सुख-दुख सुनने और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने आए हैं। यह अभियान 1 मई से 10 जून तक चलेगा, जिसमें सरकार स्वयं आपके द्वार तक पहुंचेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रतीक है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचे। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह समस्याओं का संकलन कर समाधान शिविरों के माध्यम से उनका निराकरण किया गया था और इस वर्ष भी उसी प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी रूप में लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि उनकी सरकार को अभी महज 28 माह हुए हैं, लेकिन मोदी की गारंटी के तहत अधिकांश वादों को पूरा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और दो वर्षों का बकाया बोनस भी दिया गया है।  उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 4000 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी गई है, जिससे वनांचल क्षेत्र के लोगों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही  रामलला दर्शन योजना और तीर्थ यात्रा दर्शन योजना के माध्यम से लोगों को धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने विशेष रूप से पेयजल समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनसमस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के साथ और समयबद्ध तरीके से किया जाए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम सरोधी एवं आसपास के क्षेत्रों के लिए कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की। इनमें राशन पीडीएस दुकान की स्थापना, नवीन ग्राम पंचायत भवन, पूर्व माध्यमिक शाला के लिए नए भवन का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही गंडई से बकरकट्टा मार्ग का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण, तेन्दूभाठा से जोम ओटेबंध तक सड़क निर्माण, साल्हेवारा-पंडरापानी मार्ग पर मगुरदा नाला पर पुल निर्माण, पीएचसी बकरकट्टा में 108 एम्बुलेंस की तैनाती, बकरकट्टा से नवागांव सड़क का नवीनीकरण तथा क्षेत्र में 33 केवी सब स्टेशन की स्वीकृति दी गई।  इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव  रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित थे।

सुशासन तिहार: सरोधी में महिला स्व सहायता समूह ने मुख्यमंत्री को भेंट की स्थानीय उत्पादों की टोकरी

रायपुर सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” की महिलाओं ने मुख्यमंत्री को आम, रखिया बड़ी, कुटकी, चार और पपीता से सजी टोकरी भेंट की। महिला समूह द्वारा भेंट किए गए ये स्थानीय उत्पाद गांव की समृद्ध परंपरा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।  मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए महिलाओं के प्रयासों को प्रोत्साहित किया और कहा कि स्व सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस दौरान समूह की महिलाओं ने बताया कि वे स्थानीय संसाधनों से उत्पाद तैयार कर अपनी आय बढ़ा रही हैं और शासन की योजनाओं से उन्हें निरंतर सहयोग मिल रहा है।

कैबिनेट के निर्णय के तहत टावर बेस पर 200% और लाइन कॉरिडोर पर 30% का होगा भुगतान

लखनऊ  योगी सरकार ने बिजली की हाईटेंशन लाइनों (765, 400, 220 और 132 केवी) से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत देते हुए मुआवजा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब टावर (खंभे) के नीचे आने वाली जमीन पर किसानों को 200% यानी जमीन की कीमत का दोगुना मुआवजा मिलेगा। इसके साथ ही जिन खेतों के ऊपर से बिजली की लाइनें गुजरती हैं (राइट ऑफ वे/कॉरिडोर), वहां जमीन की कीमत का 30% मुआवजा दिया जाएगा। योगी कैबिनेट का इस निर्णय से किसानों को कुल मिलाकर 21% से 33% तक अधिक लाभ मिलने का अनुमान है। पहले यह थी व्यवस्था ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने बताया कि 2018 से पहले टावर के नीचे या लाइन के कॉरिडोर में आने वाली जमीन पर प्रायः कोई मुआवजा नहीं मिलता था। 2018 में कुछ सुधार हुआ और टावर बेस के नीचे जमीन की कीमत का करीब 85% मुआवजा देने का प्रावधान किया गया, लेकिन लाइन के नीचे (कॉरिडोर) आने वाली जमीन के लिए तब भी कोई व्यवस्था नहीं थी। इससे किसानों में असंतोष रहता था और परियोजनाओं को पूरा करने में भी बाधाएं आती थीं। अब यह किया गया बदलाव नई व्यवस्था में टावर (खंभे) के नीचे की जमीन पर 200% (दोगुना) मुआवजा निर्धारित किया गया है। तारों के नीचे आने वाले क्षेत्र (रो कॉरिडोर) पर 30% मुआवजा प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गई है। मुआवजा जिलाधिकारी द्वारा तय सर्किल रेट के आधार पर दिया जाएगा। किसानों को होगा आर्थिक लाभ इस फैसले से अब किसानों को पहले की तुलना में काफी ज्यादा और न्यायसंगत मुआवजा मिलेगा। जहां पहले या तो मुआवजा नहीं मिलता था या कम मिलता था, वहीं अब जमीन के उपयोग पर सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि बिजली परियोजनाओं में उनकी सहमति और सहयोग भी बढ़ेगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यह निर्णय किसानों के हित में एक बड़ा कदम है। इससे उन्हें उचित मुआवजा मिलेगा और विकास कार्यों के साथ किसान हितों का संतुलन भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे भविष्य में पारेषण परियोजनाओं को भी गति मिलेगी।

झारखंड में माओवादी नेटवर्क पर ड्रोन ‘नेत्रा’ और ‘स्विच’ से सुरक्षा बलों को मिली निर्णायक बढ़त

रांची झारखंड में माओवादियों के विरुद्ध अभियान में हाल के वर्षों में मिली सफलता के पीछे उन्नत तकनीक, हाई रिजॉल्यूशन कैमरे से लैस नेत्रा की भूमिका भी सराहनीय है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के इस हाईटेक ड्रोन की नजर से माओवादी लाख कोशिश के बावजूद नहीं बच पा रहे हैं। बोकारो व हजारीबाग के वन क्षेत्र में एक-एक करोड़ के इनामी कई बड़े माओवादियों के विरुद्ध सफल अभियान की बात हो या फिर सारंडा में एक साथ 17 माओवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने का वीरता पूर्ण कार्य हो, माओवादियों के विरुद्ध अभियान में शामिल जवानों के साथ नेत्रा कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। नेत्रा हाईटेक है। यह सीआरपीएफ के लगभग सभी कैंप में है। यह पांच किलोमीटर तक का चक्कर लगाने में सक्षम है। घने जंगल क्षेत्र में सूक्ष्म गतिविधियों तक को देखने में सक्षम है। अगर कोई छुप जाए तो नहीं दिखेगा, लेकिन वह कब तक छुपेगा। सीआरपीएफ का यह नेत्रा दिनभर उड़ता रहता है। कहीं भी हल्की भी हलचल दिखती है तो उसे यह नेत्रा अपने कैमरे में कैद कर लेता है। देता है सटीक लोकेशन, सुरक्षा कैंपों की भी करता है निगरानी किसी भी कैंप की सुरक्षा में संतरी ड्यूटी लगाई जाती है। जंगल में सुरक्षा बलों के कैंप के बीच में अगर 10 किलोमीटर की भी दूरी है तो नेत्रा उस दूरी को नाप देता है। दोनों सुरक्षा कैंपों के बीच से कोई गुजरेगा तो यह हाईटेक ड्रोन उसे आसानी से अपने कैमरे में कैद कर सुरक्षा बलों को इसकी सूचना दे देगा। यह सटीक लोकेशन देता है। अगर माओवादी कहीं दिखे तो उनके लॉन्गीट्यूड व लेटीट्यूड के साथ लोकेशन मिलने पर अभियान में शामिल सुरक्षा बल आसानी से उनकी घेराबंदी कर लेते हैं, जिससे उनके बचकर भागने की संभावना नहीं के बराबर हो जाती है। यह घने जंगल में भी इंसान की मौजूदगी की जानकारी ले लेता है। रात व कम रोशनी में भी यह बेहद प्रभावी है। स्विच ड्रोन भी है बेहद कारगर माओवादियों के विरुद्ध अभियान में सुरक्षा बलों के पास एक अन्य ड्रोन भी है, जिसका नाम स्विच है। यह बिना आवाज के कम ऊचाई पर उड़ान भरता है और माओवादियों के क्षेत्र में कारगर साबित हो रहा है। दुश्मन के ठिकानों का पता लगाने के लिए इसमें भी लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता है। एक साल के भीतर मिली बड़ी सफलताएं     21 अप्रैल 2025 : बोकारो जिले के ललपनिया स्थित लुगू पहाड़ी पर सुरक्षा बलों व पुलिस के साथ मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक सहित आठ बड़े माओवादी मारे गए।     16 जुलाई 2025 : बोकारो जिले के गोमिया थाना क्षेत्र के बिरहोरडेरा जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का इनामी माओवादी कुंवर मांझी ढेर। इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के एक जवान परनेश्वर कोच बलिदान हो गए थे।     15 सितंबर 2025 : हजारीबाग जिले के गोरहर थाना क्षेत्र के पनतीतरी जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में एक करोड़ का इनामी सहदेव सोरेन, 25 लाख का इनामी रघुनाथ हेम्ब्रम व दस लाख का इनामी बीरसेन गंझू मारा गया।     17 अप्रैल 2026 : हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने आपरेशन कोतीनीर चलाया, जिसमें 15 लाख का इनामी सहदेव महतो उर्फ अनुज महतो सहित चार माओवादी ढेर हो गए।     22 जनवरी 2026 : पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी अनल दा सहित 17 माओवादी ढेर। आपरेशन मेगाबुरू में मिली यह सफलता।     माओवादियों के विरुद्ध अभियान में सुरक्षा बलों का ड्रोन कैमरा बेहद कारगर साबित हो रहे हैं। इनकी बदौलत बेहतर तरीके से अभियान चल रहा है। – साकेत कुमार सिंह, आईजी सीआरपीएफ, झारखंड चैप्टर  

SLP खारिज, पेपर लीक पर सख्त रुख कायम: राजस्थान SI भर्ती 2021 में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

जयपुर राजस्थान एसआई भर्ती पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चयनित उम्मीदवारों को राहत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने इस संबंध में दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि हुई है जिसमें बड़े पैमाने पर पेपर लीक के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वह ऐसी गंभीर अनियमितताओं से ग्रस्त चयन प्रक्रिया को मंजूरी नहीं दे सकता, जहां राजस्थान में बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुआ था. राजस्थान सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने आज इन मामलों की सुनवाई की. ये याचिकाएं राजस्थान हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के 4 अप्रैल 2026 के फैसले से उपजी थीं, जिसमें पूरी भर्ती रद्द कर नई परीक्षा के आदेश दिए गए थे. वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और पी.एस. पटवालिया की विस्तृत दलीलों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करने की सहमति नहीं दी और याचिकाओं को खारिज कर दिया. कोर्ट की गंभीर टिप्पणियां सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया की अखंडता पर गंभीर टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने नोट किया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के एक सदस्य की पेपर लीक से जुड़े मामले में गिरफ्तारी हुई थी, जिसकी जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी थी. यह गंभीर व्यवस्थागत भ्रष्टाचार का संकेत देता है. कोर्ट ने जोर दिया कि ऐसी स्थिति में 'दागी' और 'निर्दोष' उम्मीदवारों को अलग करना ही कानूनी रूप से टिकाऊ रास्ता है, जो इस मामले में संभव नहीं था, इसलिए पूरी प्रक्रिया अविश्वसनीय हो गई. बेंच ने अपने पूर्व फैसले का हवाला दिया, जहां केवल 44 दागी एमबीबीएस उम्मीदवारों के कारण पूरे देश में परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जो परीक्षा धांधली के मामलों में सख्त मानक को रेखांकित करता है. परीक्षार्थियों की दलील याचिकाकर्ताओं ने दलीलें दी कि कोई बड़े पैमाने पर पेपर लीक नहीं था, जो सांख्यिकीय विश्लेषण और अंकों के बेल-कर्व वितरण पर आधारित थी. उनकी दलील थी कि केवल 6.3% उम्मीदवार ही कथित रूप से दागी थे, और अलगाव संभव था. इनमें से 838 से अधिक उम्मीदवारों को नियुक्ति मिल चुकी थी और वे दो वर्ष से अधिक सेवा दे चुके थे, जिसमें प्रशिक्षण पर भारी सार्वजनिक व्यय हुआ था. फिर भी, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निष्कर्ष में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाया कि प्रक्रिया दोषपूर्ण थी.

स्थानीय स्वाद को मिलेगी वैश्विक पहचान, पारंपरिक व्यंजनों को चिह्नित कर उनकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग व मार्केटिंग को दिया जाएगा बढ़ावा

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सोमवार को कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। फैसलों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने, किसानों को राहत, युवाओं के कौशल विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर रहा। इनमें एक महत्वपूर्ण निर्णय ‘एक जनपद-एक व्यंजन (ओडीओसी)’ योजना का रहा, जिसे प्रदेश की नई पहचान के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके साथ ही कैबिनेट ने सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए नई ट्रांसफर पॉलिसी को भी मंजूरी दे दी है।  ‘एक जनपद एक व्यंजन’: हर जिले का स्वाद बनेगा ब्रांड एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि सरकार ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ की तर्ज पर ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत हर जिले के पारंपरिक व्यंजन को चिह्नित कर उसकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना में गुणवत्ता सुधार, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और निर्यात अवसर विकसित करने पर विशेष फोकस रहेगा। खाद्य कारोबार से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को 25% तक की सब्सिडी (अधिकतम ₹20 लाख) दी जाएगी। इसके लिए ₹150 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा व जौनपुर की इमरती जैसे व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है। ट्रांसफर पॉलिसी 2026-27: 31 मई तक होंगे स्थानांतरण कैबिनेट बैठक में अधिकारियों/कर्मचारियों की नई स्थानांतरण नीति 2026-27 को मंजूरी दी गई है। इसके तहत, सभी ट्रांसफर 31 मई 2026 तक किए जाएंगे। नीति के तहत समूह ‘क’ व ‘ख’ के ऐसे अधिकारी, जिन्होंने किसी जनपद में 3 वर्ष या मंडल में 7 वर्ष पूरे कर लिए हैं, उनका स्थानांतरण अनिवार्य होगा, जबकि विभागाध्यक्ष/मंडलीय कार्यालय में तैनाती की अवधि इसमें शामिल नहीं होगी। मंडलीय कार्यालय में तैनाती की अधिकतम अवधि 3 वर्ष होगी। समूह ‘क’ व ‘ख’ के स्थानांतरण संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20% और समूह ‘ग’ व ‘घ’ के कार्मिकों के स्थानांतरण संवर्गवार कार्यरत कुल कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10% की सीमा तक किए जा सकेंगे। समूह ‘ख’ व ‘ग’ के ट्रांसफर यथासंभव मेरिट आधारित ऑनलाइन प्रणाली से होंगे तथा समूह ‘ग’ में पटल/क्षेत्र परिवर्तन के नियमों का कड़ाई से पालन होगा। दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को सुविधा अनुसार तैनाती, आकांक्षी जनपदों में प्राथमिकता पोस्टिंग और स्थानांतरण सत्र के बाद समूह ‘क’ व ‘ख’ के ट्रांसफर हेतु मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री की स्वीकृति अनिवार्य जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। पीडब्ल्यूडी में सख्ती: गुणवत्ता से समझौता नहीं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कार्यों की गुणवत्ता सुधारने और अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर रोक लगाने के लिए कैबिनेट ने निविदा निस्तारण की नई प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। इसके तहत ₹5 करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लिए एसबीडी और ₹5 करोड़ से कम के कार्यों के लिए टी-1 व टी-2 प्रणाली लागू होगी। कम दर पर टेंडर लेने वाले निविदादाताओं से अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी अनिवार्य की गई है। 15% से अधिक कम दर वाले ठेकेदारों के चयन से पहले उनके निर्माणाधीन और पूर्ण कार्यों की गुणवत्ता की जांच होगी, जबकि 15% से कम दर पर बोली लगाने वाले ऐसे ठेकेदार जिनका प्रदेश में कोई कार्य नहीं चल रहा या पिछले दो वर्षों में कोई कार्य पूरा नहीं किया है, उनसे भी अतिरिक्त सिक्योरिटी ली जाएगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित होगा। किसानों को राहत: हाईटेंशन लाइनों पर बढ़ा मुआवजा कैबिनेट ने बिजली की हाईटेंशन लाइनों से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। टावर के नीचे आने वाली जमीन पर अब 200% मुआवजा मिलेगा, जबकि लाइन के नीचे आने वाली जमीन पर 30% मुआवजा दिया जाएगा। इससे किसानों को कुल मिलाकर 21% से 33% तक अधिक लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल पार्क से औद्योगिक विकास को रफ्तार संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के तहत प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्कों का विकास किया जाना है। इसके लिए बंद पड़ी कताई मिलों की जमीन का उपयोग किया जाएगा। कैबिनेट ने 4 कताई मिलों की 251.8 एकड़ भूमि का हस्तकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग के पक्ष में निशुल्क हस्तांतरण की मंजूरी दी। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। लखनऊ में 546 करोड़ की सड़क परियोजना राजधानी लखनऊ में आउटर रिंग रोड के रैथा अंडरपास से पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क तक 6 लेन के निर्माण तथा आईआईएम से रैथा अंडरपास मार्ग का 2 लेन में चौड़ाकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए ₹546.51 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इससे टेक्सटाइल पार्क की कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ ही औद्योगिक विकास एवं परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी। अन्य अहम फैसले कैबिनेट ने 35 करोड़ पौधरोपण अभियान (₹147 करोड़ बजट), प्रत्येक जिले में वन ट्रिलियन डॉलर सीएम फेलोशिप कार्यक्रम के तहत एक ओटीडी फेलो (आर्थिक विकास) एवं एक ओटीडी फेलो (डेटा विश्लेषण) की तैनाती,  नए निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 का प्रवर्तन, फिरोजाबाद में निजी अमरदीप विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी और हाईकोर्ट रिसर्च एसोसिएट का कार्यकाल 2 से बढ़ाकर अधिकतम 3 वर्ष करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए हैं।