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डिजिटल क्रांति: छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सेवाएं

राजस्व विभाग की नई पहल ​डिजिटल क्रांति: छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सुविधाएँ ​रायपुर          मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए भूमि और राजस्व संबंधी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 'सुशासन' के संकल्प को साकार करते हुए, अब नागरिकों को खसरा-बी-1, नामांतरण और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। नागरिकों की सुविधा हमारी प्राथमिकता-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजस्व विभाग की इस डिजिटल पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्व सेवाओं का डिजिटलीकरण आम आदमी के समय और श्रम की बचत सुनिश्चित करेगा। यह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। ​ भ्रष्टाचार मुक्त और सुगम राजस्व प्रशासन का लक्ष्य – राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा      राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जानकारी दी कि विभाग अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है। हमारा उद्देश्य तकनीक के उपयोग से मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। 'डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम' (DILMP) के माध्यम से हम राज्य को अत्याधुनिक राजस्व तंत्र प्रदान कर रहे हैं, जिससे नागरिक घर बैठे अपनी भूमि का विवरण प्राप्त कर सकें। ​निःशुल्क डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रति ​मोबाइल ऐप की सुविधा और SMS से अपडेट       ​राजस्व विभाग द्वारा दी जा रही प्रमुख ऑनलाइन सुविधाओं में नागरिक अब ​निःशुल्क    खसरा और बी-1 की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति राज्य के किसी भी कोने से कभी भी बिल्कुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा या बी-1 में किसी भी संशोधन या बदलाव की सूचना सीधे पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम SMS अलर्ट  के माध्यम से प्राप्त होती है, जो किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने में सहायक है। कृषि ऋण के लिए बैंक में गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे खरीद-बिक्री के समय पारदर्शिता बनी रहती है। अब नामांतरण के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ता। उप पंजीयक कार्यालय में पंजीयन होते ही स्वतः नामांतरण प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी तरह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध विशेष मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक कहीं से भी अपने स्मार्टफोन से जमीन का रिकॉर्ड देख और डाउनलोड कर सकते हैं। राजस्व विभाग के इन नवाचारों से छत्तीसगढ़ राज्य राजस्व प्रशासन में एक नई डिजिटल क्रांति का गवाह बन रहा है।       ​       अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित राजस्व प्रशासन DILMP के तहत राज्य की सभी तहसीलों में 'मॉडर्न रिकॉर्ड रूम' स्थापित कर राजस्व प्रशासन को पूरी तरह अत्याधुनिक और पेपरलेस बनाना है। इन सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और समय की बचत करना है। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILMP) ​वर्ष 2008-09 में शुरू हुई। यह केंद्र-प्रवर्तित योजना 1 अप्रैल 2016 से पूर्णतः केंद्रीय योजना के रूप में संचालित है।​ वर्तमान में  राज्य के 20 हज़ार 286 गांवों के खसरा और 19 हज़ार 694 गांवों के नक्शों का कंप्यूटरीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इसके साथ ही, 'प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना' के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कर उन्हें अत्याधुनिक बनाया गया है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों के साथ ऑनलाइन जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे काम में गति और सटीकता आई है। ​असर्वेक्षित ग्रामों का सर्वेक्षण         राज्य के 1 हज़ार 89 ग्रामों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1,018 का नक्शा उपलब्ध कराया गया है। प्रथम चरण में 717 गांवों का और 454 गांवों का द्वितीय चरण में सत्यापन पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही 233 गांवों का डेटा 'भुईयां' एवं 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है।         ​इसी तरह राज्य की 50 तहसीलों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर राजस्व सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 252 में से 172 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत हैं, जिनमें से 155 का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही राज्य के राजस्व ​कार्यालयों का डिजिटलीकरण एवं इंटरकनेक्टिविटी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को ऑनलाइन कर उन्हें तहसील कार्यालयों के साथ इंटरनेट के माध्यम से जोड़ दिया गया है। ​प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत राज्य के सभी राजस्व ग्रामों के खसरा नक्शों का जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 19,694 गांवों में से 18,959 गांवों में यह कार्य पूर्ण हो चुका है।       इस डिजिटल पहल से आम नागरिकों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में स्पष्टता और सुगमता आई है, जो निश्चित रूप से राज्य के चहुंमुखी विकास में सहायक सिद्ध होगी।​

कीट प्रकोप से कपास फसल प्रभावित, हरियाणा के किसान अब बाजरा और ग्वार की तरफ मुड़े

ढिगावा मंडी. हरियाणा में कपास की खेती करने में किसान रूचि नहीं दिखा रहे हैं। मार्केट में अच्छा भाव मिलने के बावजूद भी किसानों का कपास से मोह भंग हो चुका है। मार्केट में नरमा कपास इस समय आठ से 10 हजार रुपये क्विंटल बिक रही है। इसके बावजूद किसान कपास की फसल की बिजाई करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे। जिसके कारण पिछले साल से 60 से 65 प्रतिशत तक कपास का रकबा घट सकता है। कपास की फसल से किसानों का मोह भंग होने का कारण गुलाबी सुंडी है। गुलाबी सुंडी ने पिछले साल कपास की फसल में कहर ढाया था। जिसके कारण किसानों ने समय से पहले कपास की फसल काटकर अगली फसल की बिजाई कर दी थी। सरकार और कृषि विभाग को भी पहले से ही इस बार कपास का रकबा घटने का अंदेशा था। जिसके चलते गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण पाने के लिए खरीफ सीजन से पहले ही प्रयास शुरू कर दिए गए थे। अधिकारियों ने किया था किसानों से संपर्क कृषि विभाग के अधिकारियों ने काटन मिल में जाकर निरीक्षण किया और वहां रखे बिनौले को ढक कर रखने के आदेश दिए थे, ताकि बिनौले से निकल कर गुलाबी सुंडी का फैलाव ना हो। वहीं खेतों में रखे कपास के फसल अवशेष (लकड़ी) भी उठाने या नष्ट करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से संपर्क किया। ताकि फसल अवशेष में अगर गुलाबी सुंडी है, तो वो भी नष्ट हो जाए और कपास की अगली फसल में जाए। लेकिन कृषि विभाग के प्रयासों के बावजूद कपास की फसल की बिजाई करने में किसान कम रुचि ले रहे हैं। पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी भिवानी जिले का लोहारू, बहल क्षेत्र कपास उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां के किसान बाजरा, ग्वार, मूंग की फसलों का रुख कर रहे हैं। दैनिक जागरण टीम ने किसानों से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि भूजल स्तर तेजी से गिरना, समर्थन मूल्य पर अनिश्चितता, गुलाबी सुंडी व सफेद मक्खी का प्रकोप किसानों ने कपास की खेती छोड़ने का प्रमुख कारण बताया। बता दें की भिवानी जिले में पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी। 15 मई तक कपास की बिजाई के लिए अनुकूल समय माना जाता है, लेकिन अभी तक नाममात्र एकड़ पर ही कपास की बिजाई हो पाई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आठ से 10 हजार एकड़ में और कपास की बिजाई हो सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगले पांच दिन मौसम कपास फसल बिजाई के लिए अनुकूल है। क्योंकि वर्षा से तेजी से बढ़ रहे तापमान में गिरावट आई है।

पंजाब में CM भगवंत मान का ऐतिहासिक निर्णय, विधानसभा में प्रस्ताव से 6 महीने के लिए सुरक्षित होगी AAP सरकार

चंडीगढ़  पंजाब में आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्यसभा सांसदों की बगावत के बाद अब पंजाब में पार्टी को मजबूत बनाए रखने के लिए आलाकमान बड़ा कदम उठा रहा है. सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'ऑपरेशन लोटस' से बचने के लिए AAP सरकार पंजाब विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव ला सकती है।  पंजाब विधानसभा चुनाव का विशेष सत्र 1 मई को बुलाया गया है. यह असेंबली सेशन बुलाया तो श्रमिक दिवस के मौके पर गया है, लेकिन उम्मीद है कि इसमें बहुमत का प्रस्ताव लाया जाएगा. इसका फायदा यह है कि विधानसभा में एक बार बहुमत साबित होने के बाद अगले 6 महीने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार सुरक्षित हो जाएगी।  सरकार गिरने की चिंता से मुक्त होना चाहती है AAP दरअसल, 7 राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने के बाद पंजाब में विधायकों की टूट की अटकलें लग रही हैं. अगर ऐसा होता है तो साल 2022 के विधानसभा चुनाव में 92 सीट जीतने वाली AAP पर सरकार बचाने का संकट गहरा सकता है. इसलिए विशेष सत्र में प्रस्ताव लाकर पार्टी बहुमत पर मुहर लगाना चाहती है ताकि सियासी चिंता को संवैधानिक तरीके से खत्म किया जा सके।  सत्र से पहले मान कैबिनेट की बैठक पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र से पहले सुबह भगवंत मान सरकार की कैबिनेट बैठक होगी. यह बैठक सुबह 9.30 बजे बुलाई गई है. विशेष सत्र अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर बुलाया गया है. हालांकि इसमें सरकार कॉन्फिडेंस मोशन भी ला सकती है. पंजाब के 6 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में जाने के बाद कुछ विधायकों के भी पाला बदलने की अटकलें हैं।  इससे पहले भी अक्टूबर 2022 में सरकार कॉन्फिडेंस मोशन लाई थी जब आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर राज्य में ऑपरेशन लोटस के तहत विधायकों को तोड़ने की कोशिश के इल्जाम लगाए थे। 

सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 40 साल से यूपी में बंजर है कांग्रेस, अब सपा की बारी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. सीएम योगी ने कहा कि सपा ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर डकैती डालने का काम किया है. आज विपक्ष महिलाओं के श्राप से श्रापित हो चुका है. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि 40 वर्ष बीत गए, लेकिन उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बंजर जमीन बन गई है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सपा ने कांग्रेस का समर्थन किया है, इसलिए सपा भी जल्द ही बंजर बन जाएगी।  सीएम योगी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ हुए अन्याय और मौलवियों के सामने नाक रगड़ने की वजह से कांग्रेस की दुर्गति हुई. उन्होंने याद दिलाया कि यदि शाहबानो मामले में न्याय मिल गया होता तो कांग्रेस की यह हालत नहीं होती. कांग्रेस ने तीन तलाक की कुप्रथा का समर्थन किया और अब भी सुधरने के बजाय देश को कठमुल्लापन की ओर ले जाना चाहती है।  देख सपाई बिटिया घबराई मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्ष में डबल इंजन कि सरकार के कार्यों के परिणाम सामने है. पहले देख सपाई बिटिया घबराई का नारा पब्लिक लगाती थी. पहले लोग अपने बेटियों को पढ़ने के लिए UP से बाहर भेजते थे. आज महिला वर्क फ़ोर्स 26% और अर्थव्यवस्था 3 गुणा बढ़ी है. NCRB के मुताबिक हत्या में 43% गिरावट आई. दहेज़ उत्पीड़न में 19%, रेप दुष्कर्म में 67% की कमी आई. आज देश के सबसे बड़े राज्य के सदन में आधी आबादी के सम्मान पर चर्चा हो।  पूजा पाल का किया जिक्र  मुख्यमंत्री ने सपा पर माफियाओं के सामने नतमस्तक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा विधायक पूजा पाल इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं. उन्होंने कहा कि जब राजू पाल की हत्या हुई थी, तब सपा माफियाओं के सामने झुक गई थी. सीएम ने आरोप लगाया कि सपा की सहानुभूति न तो पिछड़ों, दलितों और न ही पूजा पाल जैसे लोगों के प्रति है।  महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष की आलोचना योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर संसद में महिला आरक्षण बिल गिराने का आरोप लगाया और कहा कि बिल गिराने के बाद सपा और कांग्रेस के नेता एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे. उन्होंने कहा कि विपक्ष के इस आचरण से पूरा देश आहत है. सीएम ने सदन में कुछ पुरानी घटनाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने मई 2014 में बदायूं की चचेरी बहनों से हुई घटना, जुलाई 2016 में बुलंदशहर के राजमार्ग पर हुए सामूहिक बलात्कार और आजम खान द्वारा इसे “राजनीतिक साजिश” बताने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि एक महिला ने एक विधायक पर बलात्कार का आरोप लगाया था, लेकिन न्याय मिलने के बजाय उस महिला की हत्या कर दी गई. लखनऊ के मोहनलालगंज में हुई शर्मनाक घटना का भी उन्होंने जिक्र किया. सीएम योगी ने कहा कि आजम खान और एसटी हसन जैसे नेता जेल से बयान देते थे और विपक्ष आज भी महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति संवेदनशील नहीं है। 

राजस्थान में वन्यजीव सर्वे का नया तरीका, चांदनी रात और कैमरा ट्रैप से होगी गिनती

चित्तौड़गढ़ राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी नियमों और परंपराओं पर भी दिखने लगा है. चित्तौड़गढ़ जिले के जंगलों में इस साल 1 मई से शुरू होने वाली वन्यजीव गणना (Wild Life Census) बेहद खास होने वाली है, क्योंकि वन विभाग ने दशकों से चली आ रही परंपरा को बदलते हुए गणना के समय में बड़ा बदलाव किया है. सुबह नहीं, शाम से होगी शुरुआत आमतौर पर वन्यजीवों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होती थी, लेकिन इस बार झुलसा देने वाली गर्मी को देखते हुए वन विभाग ने नया प्लान तैयार किया है. चित्तौड़गढ़ की जिला उप वन संरक्षक मृदुला सिन्हा ने बताया कि पहली बार यह गणना सुबह के बजाय 1 मई को शाम 5 बजे से शुरू होगी और अगले दिन 2 मई को शाम 5 बजे तक लगातार 24 घंटे चलेगी. यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण का सटीक डेटा मिल सके, क्योंकि गर्मी के कारण जानवर दिन में बाहर निकलने से कतरा रहे हैं. चांदनी रात में 'वॉटरहॉल' तकनीक का सहारा यह गणना बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित की जा रही है. पूर्णिमा की दूधिया चांदनी में वन कर्मियों को बिना किसी कृत्रिम रोशनी या टॉर्च के वन्यजीवों को देखने में आसानी होती है. इसके लिए दो मुख्य तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पहली वॉटरहॉल तकनीक. चूंकि गर्मी में जानवर पानी पीने जलस्रोतों पर जरूर आते हैं, इसलिए सीतामाता सेंचुरी में 47 और बस्सी सेंचुरी में 24 पानी के कुंड चिह्नित किए गए हैं. वहीं दूसरी, हाई-टेक निगरानी तकनीक. रात के अंधेरे में सक्रिय रहने वाले पैंथर और दुर्लभ उड़न गिलहरी की सटीक पहचान के लिए सीतामाता में 22 और बस्सी में 14 अत्याधुनिक 'कैमरा ट्रैप' लगाए गए हैं. मचान पर 24 घंटे 'पहरा' जंगल के नालों और केनाल के पास विशेष मचान बनाए गए हैं, जहां वन विभाग की टीमें तैनात रहेंगी. एसीएफ राम मोहन मीणा और एसीएफ यशवंत कंवर के निर्देशन में कर्मचारियों को पदचिह्नों (Pugmarks) की पहचान और कैमरा ट्रैप प्रबंधन की विशेष ट्रेनिंग दी गई है. मचान पर बैठने वाले स्टाफ के लिए भोजन और पानी का इंतजाम भी विभाग द्वारा किया गया है.

फर्जी क्राइम ब्रांच कॉल और धमकियों का डर: बिजनौर में महिला की आत्महत्या से सनसनी

  बिजनौर बिजनौर जिले में साइबर अपराध का अब तक का सबसे क्रूर चेहरा सामने आया है। साइबर अपराधियों ने महिला को कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर इतना डराया, धमकाया कि शादी की सालगिरह से एक दिन पहले उसने फांसी लगाकर जान दे दी। अंतिम संस्कार के समय साइबर ठग का फोन आने पर परिजनों को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को तहरीर दी गई। पुलिस ने अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज की है। महिला गृहिणी थी। पति एक फैक्टरी में नौकरी करता है। पुलिस के अनुसार, कोतवाली शहर के गांव फरीदपुर भोगी निवासी गृहिणी मोनिका (28) पत्नी रणधीर ने सोमवार की रात घर में दुपट्टे से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। मंगलवार की सुबह साथ सोई दोनों बेटियां जिया (8) और नंदनी (11) उठीं तो मां को दुपट्टे से लटका देखा। उनकी चीखें सुनकर परिजन आ गए। सूचना पर मायके वाले पहुंचे। शुरुआत में मामला किसी लड़के से जुड़ा होने की आशंका हुई तो लोकलाज के डर से अंतिम संस्कार करने बैराज ले गए। मोनिका के भतीजे संयोग ने बताया कि अंतिम संस्कार के समय मोनिका के मोबाइल पर लगातार घंटी बज रही थी। जब फोन उठाया तो वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखा। उसने खुद को क्राइम ब्रांच से बताया।   मोनिका से बात कराने के लिए कहा। उसकी बातचीत से रिश्तेदारों का शक साइबर अपराध की ओर गया। श्मशान घाट से आने के बाद मंगवार की शाम को कमरे में तलाश की गई तो एक डायरी में सुसाइड नोट मिला। इसमें मोनिका ने एक लड़के द्वारा परेशान करने, ब्लैकमेल करने की बातें लिखी थीं। मोनिका का मोबाइल चेक किया तो व्हाट्सएप पर पांच ऐसे नंबर मिले, जिन पर ऑडियो, कॉल, मिस्डकॉल, मैसेज पड़े थे। इनमें कोई खुद को क्राइम ब्रांच से बता रहा तो किसी ने मोनिका पर तस्करी का आरोप लगाया। पाकिस्तान सीरीज के नंबरों से आए मैसेज साइबर अपराधियों ने मोनिका को फंसाने के लिए मजबूत जाल बिछाया था। क्राइम ब्रांच अफसर से लेकर तस्कर तक का रोल साइबर अपराधी करते थे। दस दिन से ज्यादा समय तक मोनिका को डिजिटल अरेस्ट कर कार्रवाई की धमकी देते रहे। वह बात नहीं करती थी तो अलग-अलग नंबरों से मैसेज आते। ऑडियो रिकॉर्डिंग में उसकी जिंदगी तबाह करने, उसके परिवार के लोगों, रिश्तदारों को देख लेने की धमकी दी गई। परिजनों से पूछताछ की गई है। मामला साइबर अपराध से जुड़ा लग रहा है। परिजनों की तहरीर पर शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अभिषेक झा, एसपी बिजनौर    

सीएस कार्यालय पर घूसखोरी का गंभीर मामला, स्वास्थ्य विभाग ने जांच के दिए आदेश

पटना  बिहार के सरकारी स्वास्थ्य महकमे पर निजी स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों से अवैध वसूली का आरोप लगा है। मुजफ्फरपुर सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मियों द्वारा जिले के अल्ट्रासाउंड संचालकों से लाइसेंस रिन्यूअल के नाम पर प्रत्येक माह हर केंद्र से दो हजार रुपये की अवैध वसूली का मामला सामने आया है। शहर के अल्ट्रासाउंड संचालकों ने इसकी लिखित शिकायत स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय से की है। इसके बाद विभाग ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। अनुमान के अनुसार सिर्फ मुजफ्फरपुर में ही मंथली वसूली का आंकड़ा 60 लाख से अधिक है। राज्य के अन्य जिलों में ऐसी वसूली की संभावना पर विभाग विचार कर रहा है। जांच कर कार्रवाई का आदेश आने के बाद मुजफ्फरपुर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा है अल्ट्रासाउंड संचालकों ने शिकायत में कहा है कि प्रावधानो के अनुसार अल्ट्रासाउंड केंद्र चलाने के लाइसेंस का रिन्यूअल ऑनलाइन किया जाना है। इसके बावजूद सीएस कार्यालय के संबंधित कर्मचारी संचालकों को ऑफलाइन फॉर्म भरने और उसे विशेष दूत के माध्यम से जमा करने को बाध्य करते हैं। ऑफलाइन आवेदन जमा करने गए व्यक्ति से दो हजार रुपये की वसूली के बाद ही आवेदन जमा किया जाता है। समाजसेवी संस्थाओं से भी शिकायत मिली संचालकों की शिकायत के बाद इस मामले में स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख डॉ. रेखा झा ने सिविल सर्जन को जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। निदेशक प्रमुख ने कहा है कि संचालकों के अलवा समाजसेवी संस्थाओं से भी शिकायत मिली है। इसकी जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाए और दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विभाग को सूचित किया जाए। साथ ही उन्होंने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सभी तरह के आवेदन पोर्टल पर ऑनलाइन हों। तीन हजार से अधिक सेंटर से लिए ऑफलाइन आवेदन स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख ने निर्देश के साथ जिले के लाइसेंस रिन्यूअल का आंकड़ा भी भेजा है। उन्होंने बताया कि अगस्त 2025 में विभाग को अकेले मुजफ्फरपुर से अल्ट्रासाउंड सेंटरों के लाइसेंस रिन्यूअल के 3401 आवेदन ऑफलाइन प्राप्त हुए। शिकायत में संचालकों ने यह भी आरोप लगाया है कि वसूली करने वाले कर्मियों की शह पर ही अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाए जा रहे हैं। क्या कहते हैं अधिकारी? इस मामले में मुजफ्फरपुर के प्रभारी सीएस डॉ सीके दास ने कहा है कि सिविल सर्जन अवकाश पर हैं। उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं हैं। विभाग से जो आदेश आया है उनका पूरी तरह से अनुपालन कराया जाएगा। शिकायतकर्ताओं से भी जानकारी ली जाएगी। सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन पर विभाग की नजर है।

पुलिस विभाग में एक साथ 14 पुलिसकर्मियों का तबादला, जानें किसे कहां किया गया तैनात

रायपुर   छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा मरवाही जिले में एक बार फिर पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। यहां एक साथ 14 पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर के आदेश जारी हुए हैं। यह आदेश एसपी मनोज खेलारी द्वारा जारी किए गए। इसके तहत 5 टीआई (निरीक्षक), 2 सब इंस्पेक्टर (उप-निरीक्षक), 1 एएसआई (सहायक उप-निरीक्षक), 2 प्रधान आरक्षक और 4 आरक्षकों को इधर उधर किया गया है। नए आदेश के मुताबिक, ​ शनिप रात्रे को गौरेला थाना प्रभारी, शैलेंद्र सिंह को मरवाही थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं सिद्धार्थ शुक्ला को यातायात प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो जिले की यातायात व्यवस्था को सुधारने का जिम्मा संभालेंगे। प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए अंजना केरकेट्टा को नवगठित अजाक थाना के साथ-साथ महिला थाना प्रभारी का दोहरा दायित्व दिया गया है। इसके साथ ही अजय वारे को शिकायत शाखा का प्रभारी और मनोज हनौतिया को साइबर सेल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि जिले में पहली बार अजाक (अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण) थाने का गठन किया गया है, जो विशेष शिकायतों के निवारण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ​

मोबाइल मेडिकल यूनिट बनी वनांचलों की संजीवनी, साढ़े तीन महीनों में 2000+ ग्रामीणों का हुआ इलाज

​वनांचलों की 'संजीवनी' बनी मोबाइल मेडिकल यूनिट: साढ़े तीन माह में 2000 से अधिक ग्रामीणों का हुआ निःशुल्क उपचार ​विशेष पिछड़ी जनजातियों के द्वार तक पहुँचा अस्पताल  पीएम जनमन योजना से बदली दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीर ​रायपुर     छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। ​पैदल चलने की मजबूरी हुई खत्म    ​पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है। ​एक ही छत के नीचे जांच और दवा      ​इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है। ​निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं। ​नियोजित व्यवस्था और मुनादी से सूचना      ​प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है। ​परंपरा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम       ​इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

UGC NET 2023 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, आवेदन की आखिरी तारीख 20 मई

लुधियाना  देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने और जूनियर रिसर्च फैलोशिप (जे.आर.एफ.) हासिल करने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एन.टी.ए.) ने यू.जी.सी. नेट जून सत्र के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 29 अप्रैल से शुरू हो गई है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवार अब एन.टी.ए. की आधिकारिक वैबसाइट पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। शैड्यूल के अनुसार रजिस्ट्रेशन और फीस भुगतान की अंतिम तिथि 20 मई निर्धारित की गई है। इसके बाद उम्मीदवारों को आवेदन में सुधार के लिए 22 मई से 24 मई तक करेक्शन विंडो का मौका दिया जाएगा। विभाग द्वारा एग्जाम सिटी स्लिप 10 जून को और एडमिट कार्ड 15 जून को जारी किए जाएंगे जबकि मुख्य परीक्षाओं का आयोजन 22 जून से 30 जून के बीच किया जाएगा।