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दिल्ली महापौर चुनाव: भाजपा ने 156 वोटों से दर्ज किया शानदार जीत

नई दिल्ली भाजपा के उम्मीदवार प्रवेश वाही दिल्ली नगर निगम के नए महापौर निर्वाचित हुए हैं। प्रवेश वाही तीन बार से पार्षद रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने महापौर और उपमहापौर पद पर उम्मीदवार नहीं उतारा है जबकि भाजपा ने आनंद विहार से पार्षद मोनिका पंत ने उपमहापौर पद के लिए उम्मीदवार उतारा है। कांग्रेस ने कबीर नगर से पार्षद जरीफ को महापौर पद और मुबारकपुर से पार्षद राजेश कुमार गुप्ता ने उपमहापौर पद उम्मीदवार बनाया है। प्रवेश वाही तीन बार से पार्षद रहे हैं। इसके साथ ही अब उपमहापौर और सदन से स्थायी समिति के सदस्यों का भी चयन होगा। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने महापौर चुनाव के लिए कार्यवाही को लेकर पूर्व महापौर एवं मुखर्जी नगर से पार्षद राजा इकबाल सिंह को पीठासीन अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया। महापौर चुनाव में सभी सांसदों और भाजपा में शामिल राज्य सदस्य स्वाति मालीवाल और भाजपा के 11 मनोनीत विधायक और सभी पार्षदों ने मतदान किए। भाजपा ने आनंद विहार से पार्षद मोनिका पंत ने उपमहापौर पद के लिए उम्मीदवार उतारा है। कांग्रेस ने कबीर नगर से पार्षद जरीफ को महापौर पद और मुबारकपुर से पार्षद राजेश कुमार गुप्ता ने उपमहापौर पद उम्मीदवार बनाया है। ये है बहुमत महापौर चुनाव गुप्त मतदान द्वारा होता है। इसमें पार्षदों पर दल बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता है। कुल 249 पार्षद, सात सांसद व तीन राज्य सभा सदस्य व 14 मनोनीत विधायक के तहत कुल 273 वोट हैं। इसके तहत 137 वोटों का बहुमत होता है। ग्रीन पार्क से पार्षद सरिता फोगाट का कुछ महीने पहले कैंसर से मृत्यु हो जाने के कारण यह वार्ड खाली है। इसके तहत कुल 249 पार्षद हैं। AAP के ये है सदस्य आप के पास 100 पार्षद, तीन मनोनीत विधायक और दो राज्य सभा सदस्य संजय सिंह और एन डी गुप्ता हैं। कुल मतदान हुए – महापौर चुनाव के लिए कुल 165 मतदान हुए – महापौर के लिए भाजपा को 156 मतदान मिले – कांग्रेस को 9 मतदान मिले – इनवेलिड वोट शून्य पड़े प्रवेश वाही का सफर – पूर्वी उत्तरी दिल्ली नगर निगम में – तीन बार जोन के चेयरमैन, स्थाई समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, रोहिनी बी वार्ड से अभी पार्षद है। BJP के पक्ष में 142 वोट, बहुमत से पांच ज्यादा भाजपा के 123 पार्षद हैं। जबकि आम आदमी पार्टी के 100 पार्षद हैं। इसके अतिरिक्त इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (आईवीपी) के 15 पार्षद, कांग्रेस के नौ पार्षद, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक से एक पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद हैं। भाजपा के सभी 123 पार्षदों, सातों सांसद व 11 विधायकों को मिलाकर स्वाति मालीवाल के हाल ही भाजपा में शामिल होने से कुल 142 वोट हैं। जिसके तहत भाजपा द्वारा बहुमत का आंकड़ा आराम से छुआ जा रहा हैं।

केंद्र सरकार की नई योजना, दलहन खेती पर ₹4500 प्रति क्विंटल तक प्रोत्साहन

साहिबगंज  केंद्र सरकार दलहन की खेती को बढ़ावा देगी। इसके तहत खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। यह 1800 रुपये प्रति क्विंटल से लेकर 4500 रुपये प्रति क्विंटल तक होगी। केंद्र सरकार ने दाल की आयात पर निर्भरता को देखते हुए दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ किया है। यह अभियान 2030-2031 तक चलेगा। इन छह वर्षो में केंद्र सरकार 11440 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस दौरान किसानों को उच्च उत्पादन के लिए आधार बीज दिए जाएंगे। किसानों को जागरूक व प्रशिक्षण देकर अधिक से अधिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला कृषि विभाग, केवीके, बीज मुहैया कराने वाली कंपनी ने बैठक कर लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अभियान के तहत केंद्र सरकार प्रति हैक्टेयर दलहन के लिए तीन हजार से लेकर 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि देगी। सरकार किसान के बीज पर टैग लगाकर खरीदेगी या किसान चाहें सरकार का टैग मिलने के बाद बाजार में बेच सकते हैं। मॉनिटरिंग टीम जांच करेगी: किसानों को आधार बीज (फाउंडेशन सीड) उपलब्ध कराने के बाद कृषि विभाग की मॉनिटरिंग टीम किसानों के खेत में जाकर जांच करेगी। इस दौरान फसल की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। यदि किसान का बीज मानक के अनुरूप हुआ तो विभाग किसान को मदद करेगी। साथी पोर्टल पर निबंधन कराना होगा। गुणवत्तापूर्ण बीज होने पर सरकार भी उसे खरीद लेगी। खरीदे हुए दलहन का एमएसपी के दरों पर भुगतान भी करेगी साथ ही अलग से प्रोत्साहन राशि भी देगी। किसान चाहे तो खुले बाजार में अपनी फसल को बेच भी सकते हैं। किस दाल में कितना लक्ष्य: जिले में अरहर, केलाई, मूंग, चना, मसूर आदि की खेती होती है। कृषि विभाग ने 2026-2027 में 40 क्विंटल अरहर उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें प्रति क्विंटल किसान को 4500 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए चार हेक्टेयर भूमि की जरूरत पड़ेगी। इसी तरह 20 हेक्टेयर में उड़द या केलाई को लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें प्रति क्विंटल तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 10 हेक्टेयर में मूंग की खेती का लक्ष्य है। इसमें प्रति क्विंटल तीन हजार रुपये दिया जाएगा। 220 क्विंटल चना के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें प्रति क्विंटल 1800 रुपये सरकार प्रोत्साहन राशि देगी। 90 क्विंटल मसूर के उत्पादन का लक्ष्य है। इसमें प्रति क्विंटल तीन हजार रुपये दिया जाएगा। 28 क्विंटल रागी उत्पादन का लक्ष्य है। प्रति क्विंटल तीन हजार रुपये दिया जाएगा   दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का शुभारंभ केंद्र सरकार ने किया है। पल्स मिशन कृषि निदेशालय, झारखंड रांची के आदेशानुसार दलहन के क्षेत्र में झारखंड भी आत्मनिर्भर बने इस दिशा में लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को अधिक से अधिक जागरूक कर उत्पादन कराया जाएगा। सरकार दो तरह से किसान की आय बढ़ाने जा रही है। 50 फीसद अनुदान पर आधार बीज मुहैया कराएगी साथ ही किसान का बीज भी खरीदेगी और अलग से प्रोत्साहन राशि भी देगी। किसान भाईयों से अनुरोध है कि कृषि कार्यालय आकर संपर्क करे और दलहन की खेती करें। – प्रमोद एक्का, जिला कृषि पदाधिकारी, साहिबगंज  

लेखा प्रशिक्षण के लिए आवेदन 01 मई से आमंत्रित आवेदन की अंतिम तिथि 29 मई तक

रायपुर संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन के आदेशानुसार आगामी लेखा प्रशिक्षण सत्र जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026 के लिये 01 मई 2026 से 29 मई 2026 के मध्य की अवधि में आवेदन पत्र स्वीकार किये जायेंगें।  इस तिथि के पूर्व एवं पश्चात प्राप्त आवेदन- पत्रों पर विचार नही किया जाएगा। निर्धारित प्रपत्र में आवेदन पत्र ही मान्य होगा। प्राचार्य शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला से मिली जानकारी के अनुसार लेखा प्रशिक्षण सत्र जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026 के लिए 3 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर चुके लिपिक वर्गीय कर्मचारी अपने कार्यालय प्रमुख के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र में के आवेदन पत्र भेज सकते है। यह आवेदन शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला,नगर घड़ी चौक रायपुर को 29 मई  2026 तक कार्यालयीन समय में प्राप्त हो जाना चाहिए।  मानक आवेदन पत्र पर ही आवेदन स्वीकार किये जायेंगें। आवेदन जिस सत्र के प्रशिक्षण हेतु किया गया है, उस सत्र के लिये ही मान्य होगा। पूर्व प्रचलित आवदेन पत्र स्वीकार नही किये जायेगें। आवेदन पत्र के साथ अन्य आवश्यक सुसंगत दस्तावेज संलग्न होना चाहिए। आवेदन का निर्धारित प्रारूप एवं निर्देश रायपुर संभाग के समस्त जिला कोषालयों के सूचना पटल पर अवलोकन किये जा सकते हैं।

युवा खिलाड़ियों को मिलेगा विदेश में ट्रेनिंग का मौका, RCA की नई पहल

जयपुर  राजस्थान के उभरते हुए क्रिकेट सितारों के लिए एक सुनहरा दौर शुरू होने वाला है. अब हमारे प्रदेश के बच्चे न सिर्फ देश की पिचों पर अपना जलवा बिखेरेंगे, बल्कि सात समंदर पार जाकर विदेशी जमीन पर क्रिकेट के गुर भी सीखेंगे. राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) ने डेनमार्क के साथ एक ऐसी 'ऐतिहासिक डील' की है, जो आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट के भविष्य को बदल सकती है. डेनमार्क और राजस्थान के बीच 'क्रिकेट दोस्ती' मंगलवार शाम डेनमार्क के राजदूत रासमस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन और RCA एडहॉक कमेटी के बीच एक बेहद खास मुलाकात हुई. इस बैठक का नतीजा यह निकला कि अब राजस्थान और डेनमार्क के बीच क्रिकेट एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू होने जा रहा है. यह संभवतः भारत के क्रिकेट इतिहास में अपनी तरह की पहली पहल है, जहां एक राज्य की क्रिकेट बॉडी सीधे किसी दूसरे देश के साथ इस स्तर का करार कर रही है. इस समझौते की 3 बड़ी बातें आसान शब्दों में समझें राजस्थान के नन्हे क्रिकेट खिलाड़ी (विशेषकर अंडर-19 पुरुष और महिला टीम) ट्रेनिंग और मैच खेलने के लिए डेनमार्क जाएंगे. इतना ही नहीं, डेनमार्क के खिलाड़ी भी राजस्थान आएंगे, जिससे दोनों तरफ के बच्चों को अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का अनुभव मिलेगा. इससे खिलाड़ियों को विदेशी कोचिंग और खेल की नई तकनीकों को समझने का मौका मिलेगा. क्यों खास है यह पहल? RCA एडहॉक कमेटी के संयोजक डॉ. मोहित जसवंत यादव और सदस्य आशीष तिवाड़ी के प्रयासों से यह डील मुमकिन हुई है. आशीष तिवाड़ी ने बताया कि डेनमार्क के राजदूत सवाई मान सिंह स्टेडियम (SMS Stadium) की सुविधाओं को देखकर काफी प्रभावित हुए. उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे जल्द ही डेनमार्क क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) के साथ मिलकर इसे एक औपचारिक समझौते का रूप देंगे.

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को बताया आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का अद्भुत संगम

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी में  काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विश्व की अनूठी 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' का सूक्ष्म अवलोकन किया। प्रधानमंत्री  मोदी ने घड़ी के डिजिटल फलक पर प्रदर्शित हो रहे भारतीय पंचांग, मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की गणना की सराहना करते हुए इसे आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का अद्भुत संगम बताया। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा वर्ष 2024 में कालगणना के केन्द्र महाकाल की नगरी उज्जैन में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गौरवशाली अतीत को सहेजते हुए उसे वर्तमान में जीवंत बनाए रखने की मंशानुरूप वैदिक घड़ी को देश के सभी ज्योतिर्लिंगों में स्थापित किया जा रहा है। सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अर्पित की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैशाख कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (3 अप्रैल 2026) को यह घड़ी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी, जिसे 4 अप्रैल को मंदिर प्रांगण में स्थापित किया गया था। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को वैदिक काल गणना के समस्त घटकों को समवेत कर बनाया गया है। यह घड़ी सूर्योदय से परिचालित है, जिस स्थान पर जो सूर्योदय का समय होता है उस स्थान की काल गणना तदनुसार दिखाई देती है। स्टेंडर्ड टाइम भी उसी से जुड़ा रहता है। इस घड़ी में वैदिक समय, लोकेशन, भारतीय स्टेंडर्ड टाइम, भारतीय पंचांग, विक्रम सम्वत् मास, ग्रह स्थिति, भद्रा स्थिति, चंद्र स्थिति आदि की जानकारी समाहित है। जानिए क्या है 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' भारत का समय- पृथ्वी का समय संस्कृति विभाग अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा भारतीय कालगणना पर आधारित विश्व की प्रथम विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। यह घड़ी भारत की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से पुनर्स्थापित करने का एक अभिनव प्रयास है। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण फाल्गुन 2080, कृष्ण पक्ष, पंचमी, वरुण मुहूर्त (13वाँ मुहूर्त) में किया गया। (दिनांक 29 फ़रवरी 2024) वैदिक समय प्रणाली यह घड़ी एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के मध्य समय की गणना करती है। दो सूर्योदयों के बीच एक पूर्ण दिवस को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया जाता है। सूर्योदय से सूर्यास्त = 15 मुहूर्त सूर्यास्त से अगले सूर्योदय = 15 मुहूर्त इस प्रकार एक पूर्ण वैदिक दिवस 30 मुहूर्त का होता है। मुहूर्त, कला एवं काष्ठा प्रत्येक मुहूर्त सामान्यतः लगभग 48 मिनट के बराबर होता है, किंतु इसकी अवधि घड़ी की भौगोलिक स्थिति, सूर्योदय-सूर्यास्त समय तथा सूर्य के कोण के अनुसार परिवर्तित होती है। मुहूर्त मुहूर्त = 30 कला 1 कला = 96 सेकंड 1 कला = 30 काष्ठा 1 काष्ठा = 3.2 सेकंड अर्थात् 30 मुहूर्त : 30 कला : 30 काष्ठा इनकी अवधि भी पर्यवेक्षक के स्थानानुसार परिवर्तित हो सकती है। समय निर्धारण का आधार यह घड़ी सूर्य के कोण तथा पर्यवेक्षक की स्थान-विशिष्ट भौगोलिक स्थिति को सम्मिलित कर समय का निर्धारण करती है। सूर्योदय के समय के अनुसार ही स्थान का वैदिक समय प्रदर्शित किया जाता है। घड़ी में प्रदर्शित जानकारी वैदिक समय, भारतीय मानक समय, स्थान, पंचांग, विक्रम सम्वत्, तिथि, मुहूर्त, योग, करण, नक्षत्र, सूर्य राशि, चन्द्र राशि। प्रधानमंत्री  मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार अपनी ऐतिहासिक स्मृतियों और गौरवशाली अतीत को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वाराणसी के बाद आगामी समय में अयोध्या के  राम मंदिर सहित देश के सभी ज्योतिर्लिंगों पर भी ऐसी वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना है। यह पहल न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करती है, बल्कि नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध विरासत और काल-गणना की प्रामाणिक पद्धति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।  

Dengue Alert: संजीव अरोड़ा ने दिए सख्त आदेश, फॉगिंग में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

चंडीगढ़. राज्य में डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उद्योग एवं वाणिज्य, निवेश प्रोत्साहन, बिजली और स्थानीय निकाय मंत्री संजीव अरोड़ा ने राज्य भर के नगर निगम कमिश्नरों और अतिरिक्त उपायुक्तों (जनरल व शहरी विकास) को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में समय पर और व्यापक स्तर पर फॉगिंग अभियान सुनिश्चित किया जाए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां, जो मच्छरों के जरिए फैलती हैं, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अधिकारियों को तुरंत फॉगिंग अभियान शुरू करने के निर्देश दिए। अरोड़ा ने कहा कि फॉगिंग केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि इसे नियमित और प्रभावी ढंग से चलाया जाए। उन्होंने खास तौर पर यह सुनिश्चित करने को कहा कि यह अभियान पीक सीजन से पहले ही पूरी तरह सक्रिय हो जाए और अक्टूबर तक लगातार जारी रहे, ताकि मच्छरों के प्रजनन और बीमारियों के फैलाव पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अधिकारियों को स्थिति पर कड़ी नजर रखने के आरोप उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति पर कड़ी नजर रखें और फील्ड स्तर पर चल रही गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग करें। इसके साथ ही सभी संबंधित अधिकारी जल्द से जल्द अपने-अपने क्षेत्रों में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट उनके कार्यालय को सौंपें, ताकि जवाबदेही तय की जा सके और काम में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। सरकार के इस कदम को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हर साल मानसून से पहले और उसके दौरान डेंगू-मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है, ऐसे में समय रहते फॉगिंग और रोकथाम के उपाय लागू करना बेहद जरूरी होता है। मंत्री के निर्देशों के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और विभिन्न शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में फॉगिंग अभियान को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस बार पहले से बेहतर रणनीति और सख्ती के साथ इन बीमारियों पर काबू पाया जा सकेगा।

मैजेंटा लाइन पर ट्रेनों में देरी, ऑटोमैटिक गेट नहीं खुल रहे, यात्री फंसे

नई दिल्ली दिल्ली मेट्रो के इलेक्ट्रिक सिग्नल फेल होने की खबर सामने आ रही है। इसके चलते हौज खास से बोटेनिकल गार्डन की ओर जाने वाली ट्रेन आधा घंटे से रुकी हुई है। बताया जा रहा है कि इलेक्ट्रिक बोर्ड पर अगली मेट्रो के आने का समय 129 मिनट दिखाई दे रहा है। DMRC ने बताया मैजेंटा लाइन पर है समस्या DMRC ने भी अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से इसकी जानकारी दी है। DMRC ने सर्विस अपडेट जारी करते हुए लिखा- “सिग्नलिंग की समस्या के कारण कालकाजी मंदिर और बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशनों के बीच मैजेंटा लाइन पर ट्रेन सर्विस में देरी हुई। बाकी सभी लाइनों पर सर्विस नॉर्मल हैं।” मेट्रो गेट खुल रहे, लेकिन ऑटोमैटिक बैरियर बंद अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, मेट्रो के गेट स्टेशन पर मेट्रो के गेट खुल रहे हैं। लेकिन, गेट के सामने लगे ऑटोमैटिक बैरियर नहीं खुल रहे, इस कारण कोई यात्री न ही मेट्रो से उतर पा रहा है और न ही चढ़ पा रहा है। इसके साथ ही पता चला है कि मेजेंटा लाइन पर करीब 40 मिनट में मेट्रो ने केवल 2 स्टेशन तय किए हैं।      मेट्रो कोच के स्क्रीन बोर्ड में दिखा- स्टेशन होल्ड दानिश रहमान नामक एक्स यूजर ने DMRC के ट्वीट पर जवाब में एक फोटो शेयर की हैं। फोटो मेट्रो के कोच की है। भीड़-भाड़ के बीच स्क्रीन बोर्ड पर लिखा दिखाई दे रहा है- "डिले" स्टेशन होल्ड। इस यात्रा सेवा में थोड़ा विलंब होगा। इस असुविधा के लिए खेद है। यूजर ने लिखा- कोई ट्रेन नहीं चल रही DMRC के ट्वीट पर मोहन कुमार नामक यूजर ने भी जवाब दिया। उन्होंने कई तस्वीरें शेयर कीं। उन्होंने लिखा- कालिंदी कुंज मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो सर्विस में देरी हो रही है। कोई ट्रेन नहीं चल रही है। यात्री प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहे हैं। DMRC इस समस्या को ठीक करने के लिए काम कर रहा है।  

7 MPs की ‘घर वापसी’ के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मिलेंगे CM भगवंत मान, मनीष सिसोदिया का बयान- AAP एकजुट है

  चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगने के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ऐलान किया है कि वो 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने का मुद्दा उठाएंगे. उन्होंने कहा, ''मैं 5 मई को दोपहर 12 बजे राष्ट्रपति से मिलने जा रहा हूं और इस मुद्दे को उनके सामने रखूंगा।  उन्होंने कहा कि वह सांसदों को वापस बुलाने के सवाल पर भी राष्ट्रपति से चर्चा करेंगे, भले ही मौजूदा कानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान न हो. हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने पाला बदलकर BJP का दामन थाम लिया. इनमें राघव चड्ढा, राजिंदर गुप्ता, हरभजन सिंह, अशोक मित्तल आदि सांसद शामिल थे।  इनमें से छह सांसद पंजाब से थे. CM भगवंत मान ने इन नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें एक बार फिर गद्दार करार दिया. BJP की ओर से इस शब्द पर आपत्ति जताए जाने पर उन्होंने कहा, ''जो लोग जनता के जनादेश का दुरुपयोग करते हैं, वे निश्चित रूप से गद्दार हैं.'' इस घटनाक्रम के बाद AAP ने कई जगह विरोध प्रदर्शन किए थे।  हरभजन सिंह समेत कुछ सांसदों के घरों के बाहर गद्दार तक लिख दिया गया था. इस पूरे विवाद के बीच मनीष सिसौदिया ने पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ''हम सब एकजुट हैं. हम सब साथ हैं. कुछ लोगों के जाने से AAP को कोई नुकसान नहीं होगा. ये मामला विचाराधीन है और हमने अपनी आपत्तियां पहले ही दर्ज करा दी हैं।  पंजाब के AAP अध्यक्ष अमन अरोरा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ''ये लोग पीठ में छुरा घोंपने वाले हैं. राघव चड्ढा और संदीप पाठक कई विधायकों को पार्टी में लाए थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विधायक भी पार्टी छोड़ देंगे.'' वहीं जालंधर के नकोदर से विधायक इंद्रजीत कौर ने इस पूरे मामले को ज्यादा तूल न देने की बात कही है।   उन्होंने कहा, ''पार्टी नेताओं से बड़ी होती है. नेता आते-जाते रहते हैं, लेकिन संगठन कायम रहता है.'' उन्होंने BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ऐसे नेताओं का इस्तेमाल कर बाद में उन्हें छोड़ देती है, जैसा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के मामले में हुआ. उन्होंने कहा कि उनसे किसी ने पार्टी छोड़ने के लिए संपर्क नहीं किया है. वो AAP के साथ खड़ी हैं। 

‘सेवा सेतु’ से सुशासन और पारदर्शिता को मिलेगी नई मजबूती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चिप्स के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के उन्नत संस्करण 'सेवा सेतु' का किया शुभारंभ 'सेवा सेतु’ से सुशासन और पारदर्शिता को मिलेगी नई मजबूती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आधुनिक तकनीक और AI से सशक्त हुआ सुशासन: ‘सेवा सेतु’ से 441 सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर अब सेवाएं नागरिकों के हाथ में: ‘सेवा सेतु’ से घर बैठे मिलेगी 441 सरकारी सुविधाएं ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी नागरिक सेवाओं की डिजिटल सुविधा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा आमजन तक प्रभावशाली, पारदर्शी और डिजिटल नागरिक सेवाओं की सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत संचालित ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना के उन्नत संस्करण ‘सेवा सेतु’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव और विजय शर्मा सहित मंत्रिमंडल के सभी मंत्रीगण उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से डिजिटल नागरिक सेवाएं और अधिक सशक्त और प्रभावी होंगी। वर्ष 2003 में प्रारंभ हुए चॉइस (CHOICE) मॉडल से लेकर वर्ष 2015 के ई-डिस्ट्रिक्ट और अब ‘सेवा सेतु’ तक छत्तीसगढ़ ने डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में एक लंबी और उल्लेखनीय यात्रा तय की है तथा यह प्लेटफॉर्म अब नागरिक सशक्तिकरण का एक मजबूत माध्यम बन चुका है, जिससे लाखों नागरिकों को लाभ मिला है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से अब एक ही पोर्टल पर 441 शासकीय सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 54 नई सेवाएं और 329 री-डायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब व्हाट्सएप के माध्यम से भी सेवाओं की जानकारी सहज रूप से प्राप्त की जा सकेगी। आय, जाति, निवास, राशन कार्ड और विवाह पंजीयन जैसे प्रमुख प्रमाण-पत्रों सहित अब तक 3.2 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं और इतने ही प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 30 से अधिक विभागों के एकीकरण के साथ यह प्लेटफॉर्म एक सशक्त “वन स्टॉप सॉल्यूशन” के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘सेवा सेतु’ राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को नई मजबूती प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना का संचालन राज्य स्तर पर चिप्स (CHiPS) द्वारा किया जा रहा है, जबकि जिला स्तर पर जिला कलेक्टर के नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट ई-गवर्नेंस सोसाइटी (DeGS) के माध्यम से इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। नई प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधार, व्हाट्सएप और ‘भाषिणी’ जैसी उन्नत तकनीकों का एकीकृत उपयोग किया गया है, जिससे नागरिक व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे, सेवा की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और डिजिटल प्रमाण-पत्र भी प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही आधार आधारित ई-केवाईसी, डिजी लॉकर, ई-प्रमाण और उमंग जैसे प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण कर सेवाओं को और अधिक सरल, सुरक्षित और सुलभ बनाया गया है।  ‘सेवा सेतु’ में ट्रेजरी और ई-चालान का एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन भुगतान कर तत्काल डिजिटल रसीद प्राप्त कर सकेंगे तथा डीबीटी के माध्यम से योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी, जिसकी रीयल-टाइम ट्रैकिंग एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से संभव होगी। पोर्टल में क्यूआर कोड आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, क्लाउड स्टोरेज, डिजिटल सिग्नेचर, रीयल-टाइम डैशबोर्ड और एमआईएस रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं तथा यह पोर्टल 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे भाषा की बाधा समाप्त हो गई है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत सेवाओं की समय-सीमा सुनिश्चित करने के लिए ऑटोमेटिक पेनल्टी कैलकुलेशन, समय-सीमा संकेतक और स्वतः शिकायत पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता को और मजबूती मिलेगी। राज्य में सेवाओं की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 800 से अधिक लोक सेवा केंद्र, 1000 से अधिक चॉइस सेंटर और 15,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर सक्रिय हैं, जहां से नागरिक आसानी से सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।  ‘सेवा सेतु’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जनसेवा के केंद्र में रखते हुए आवेदन प्रक्रिया को सरल और तकनीकी रूप से बाधारहित बनाया गया है, जिससे शासन और नागरिकों के बीच की दूरी तेजी से कम हो रही है और सेवाएं सीधे नागरिकों के हाथों तक पहुंच रही हैं।व्हाट्सएप इंटरफेस के माध्यम से नागरिक विभिन्न सेवाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे, पावती रसीद और दस्तावेजों के लिंक तुरंत प्राप्त कर सकेंगे तथा अनुमोदन के पश्चात डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र सीधे व्हाट्सएप पर प्राप्त कर सकेंगे।  वर्तमान में यह सुविधा 25 सेवाओं के लिए उपलब्ध है, जिसे शीघ्र ही सभी सेवाओं तक विस्तारित किया जाएगा। प्रत्येक प्रमाण-पत्र में क्यूआर कोड आधारित सत्यापन की सुविधा दी गई है, जबकि कैप्चा, ओटीपी और ईमेल आधारित प्रमाणीकरण जैसी व्यवस्थाएं सुरक्षा को सुदृढ़ करती हैं। नागरिकों की पहचान को विश्वसनीय बनाने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी की सुविधा प्रारंभ की गई है तथा सुरक्षित लॉगिन हेतु डिजिलॉकर और ई-प्रमाण जैसी प्रणालियों को एकीकृत किया गया है।  ‘भाषिणी’ के सहयोग से यह पोर्टल 22 भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है, जिससे हर नागरिक अपनी भाषा में सेवाओं का लाभ ले सकेगा। नागरिक ‘सेवा सेतु’ में उपलब्ध सेवाओं का लाभ वेब पोर्टल, लोक सेवा केंद्र, चॉइस सेंटर या कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे तथा फीडबैक सुविधा के माध्यम से अपने सुझाव भी दे सकेंगे, जिनके आधार पर इस परियोजना को निरंतर बेहतर बनाया जाएगा।  इस अवसर पर मुख्यसचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह,  मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

आंगनबाड़ी केंद्रों में बदलाव, नन्हे कदम बनेंगे सशक्त भारत के भविष्य की नींव

रायपुर देश का भविष्य जिन नन्हे कदमों से आगे बढ़ता है, वे आज आंगनबाड़ी केंद्रों में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और मुस्कान के साथ संवर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र कभी केवल पोषण और देखभाल तक सीमित माने जाते थे, वे अब प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर, सूरजपुर, रायगढ़, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जैसे जिलें में दिख रहा यह सकारात्मक बदलाव अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रेरणास्रोत बन रहा है। भवन ही बन गया शिक्षक : ‘बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड’ की अभिनव पहल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से निर्मित आधुनिक आंगनबाड़ी भवनों ने Building as Learning Aid (BALA) की अवधारणा को साकार रूप दिया है। लगभग 11.69 लाख रुपए की लागत से बने इन भवनों में दीवारों, फर्श, सीढ़ियों और खुले स्थानों को शिक्षण सामग्री के रूप में विकसित किया गया है। रंग-बिरंगी चित्रकारी के माध्यम से बच्चों को हिंदी-अंग्रेजी वर्णमाला, अंक, आकृतियाँ, दिशाएँ, जीव-जंतु और स्थानीय परिवेश की जानकारी सहजता से मिल रही है। अब हर दीवारें बोलती हैं, हर कोना सिखाता है आंगनबाड़ी स्वयं एक जीवंत पाठशाला बन गई है। धमतरी का ‘बाला मॉडल’ : सीखने का नया अनुभव धमतरी जिले में बाला मॉडल ने प्रारंभिक बाल शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मनरेगा, आईसीडीएस और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से 81 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ, जिनमें से 51 पूर्ण हो चुके हैं। ग्राम उड़ेंना का केंद्र इस बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहाँ विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं। दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, गणितीय अवधारणाएँ और भाषा चार्ट, फर्श पर रंग और आकार तथा सीढ़ियों पर गिनती जैसे नवाचार बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की रुचि को बढ़ा रहे हैं। शिक्षा के साथ रोजगार का मजबूत आधार मनरेगा के तहत आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण ने दोहरा लाभ दिया है। एक ओर गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना विकसित हुई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे परिवारों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीणों के पलायन में कमी आई है। इस प्रकार आंगनबाड़ी केवल बच्चों के विकास का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का माध्यम भी बन गया है। खेल-खेल में सीखता बचपन, खिलखिलाता माहौल महासमुंद के शहरी क्षेत्रों से लेकर नारायणपुर के दूरस्थ वनांचल तक, आंगनबाड़ी केंद्रों में नया वातावरण साफ दिखाई देता है। आकर्षक दीवारें, शैक्षणिक चार्ट, कविताएँ और खेल सामग्री ने इन्हें आधुनिक प्ले-स्कूल जैसा रूप दे दिया है। बच्चे अब उत्साह के साथ केंद्र आते हैं और भाषा, गणित व व्यवहारिक ज्ञान को आनंदपूर्वक सीखते हैं। पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का केंद्र आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। यहाँ पोषण, पूरक पोषण आहार टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। दीवारों पर लिखे संदेश “जितनी बेहतर वजन रेखा, उतना स्वस्थ बच्चा” और “लड़का-लड़की एक समान” सामाजिक परिवर्तन का संदेश भी दे रही हैं। कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नोनी सुरक्षा योजना और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो रहा है। इससे माताओं और बालिकाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। स्वच्छता, सुरक्षा और जनभागीदारी आरओ जल, स्वच्छ रसोई, सुरक्षित खेलघर और नियमित साफ-सफाई ने केंद्रों को बाल-अनुकूल बनाया है। महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की उपस्थिति और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सशक्त भारत की मजबूत नींव आंगनबाड़ी केंद्रों का यह परिवर्तन राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर साकार कर रहा है। 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित प्रत्येक केंद्र अब बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार का समन्वित मॉडल बन चुका है। आज आंगनबाड़ी केंद्र वास्तव में “बच्चों की पहली पाठशाला” बन गए हैं, जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और रोजगार मिलकर एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की नींव रख रहे हैं। * डॉ. दानेश्वरी संभाकर उप संचालक (जनसंपर्क)