samacharsecretary.com

प्रशासनिक फेरबदल में बड़े बदलाव, इन अधिकारियों का तबादला और नई जिम्मेदारी सौंपी गई

रायपुर  छत्तीसगढ़ में से बड़े प्रशासनिक फेरबदल की खबर सामने आई है। यहां डिप्टी कलेक्टर टीकाराम देवांगन का तबादला किया गया है। उन्हें जिला कार्यालय कांकेर में भेजा गया है। इसके लिए कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने आदेश जारी किया है।   जारी आदेश के अनुसार, डिप्टी कलेक्टर टीकाराम देवांगन को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पखांजूर के पद से हटाया गया। उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपते हुए जिला कार्यालय कांकेर में पदस्थ किया गया है। वहीं, उनके स्थान पर मनीष देव साहू, जो डिप्टी कलेक्टर एवं नजूल अधिकारी कांकेर के पद पर कार्यरत थे, उन्हें अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पखांजूर की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस आदेश के तहत जिला प्रशासन में जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है, ताकि प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। छत्तीसगढ़ सरकार ने आगामी महत्वपूर्ण प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से शासकीय कर्मचारियों के अवकाश संबंधी नियमों को अस्थायी रूप से कड़ा कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देश को बुधवार को सभी विभागों में भेजा गया। जारी निर्देशों के अनुसार, अगले तीन महीनों तक बिना पूर्व स्वीकृति किसी भी कर्मचारी को अवकाश पर जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासनिक अधिकारीयों के अनुसार, यह निर्णय जनगणना कार्य और राज्य में प्रस्तावित 'सुशासन तिहार' जैसे बड़े कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित न हो और सभी कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण किए जा सकें। जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना अनुपस्थित रहने को अनुशासनहीनता माना जाएगा और ऐसे मामलों में विभागीय कारर्वाई की जा सकती है। वहीं, आकस्मिक परिस्थितियों में भी कर्मचारियों को अवकाश लेने से पहले दूरभाष या डिजिटल माध्यम से सूचना देना अनिवार्य होगा तथा बाद में इसकी औपचारिक पुष्टि करनी होगी। इसके अतिरिक्त, लंबी अवधि के अवकाश पर जाने से पूर्व संबंधित कर्मचारी को अपने कार्यभार का विधिवत हस्तांतरण सुनिश्चित करना होगा, ताकि कार्यालयीन कार्य प्रभावित न हों। राज्य सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों, संभागीय अधिकारियों और जिला कलेक्टरों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। इसे प्रशासनिक दक्षता बनाए रखने और प्राथमिकता वाले कार्यों को समय पर पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मध्य प्रदेश के 678 गांवों में हरियाली की लहर, वॉटर प्रोजेक्ट के लिए मोहन सरकार खर्च करेगी बड़े पैमाने पर

छिंदवाड़ा  छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना में पुर्नवास के लिए 969 करोड़ रूपये के विशेष पुर्नवास पैकेज की स्वीकृति भोपाल में हुई मंत्रीमंडल की बैठक में मिल गई है.  हुई मंत्री परिषद की बैठक में छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना में पुर्नवास के लिए स्वीकृत राशि 840 करोड़ 80 लाख रूपये को बढ़ाकर लगभग 969 करोड़ का विशेष पुर्नवास पैकेज स्वीकृत कर दिया गया है।  678 ग्राम पंचायतों की लाखों एकड़ जमीन को मिलेगा पानी छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना के अंतर्गत छिंदवाड़ा जिले में संगम 1 बांध, संगम 2 बांध, रामघाट बांध एवं पांढुर्णा जिले में बेलेंसिग रिजर्वायर बनने हैं. पांढुर्णा में कुल 4 बांध बनना है, जिससे छिंदवाड़ा एवं पांढुर्णा जिलों के 1,90,500 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी. परियोजना से छिंदवाड़ा जिले एवं पांढुर्णा जिले के 678 गांव को लाभ मिलेगा जिसमें से पांढुर्णा जिले की पांढुर्णा तहसील के 129 ग्राम, पांढुर्णा जिले की सौंसर तहसील के 124 ग्राम, छिंदवाड़ा जिले की मोहखेड़ तहसील के 132 ग्राम, बिछुआ तहसील के 76 ग्राम, छिंदवाड़ा तहसील के 7 ग्राम, जुन्नारदेव तहसील के 126 ग्राम, चांद तहसील के 34 और उमरेठ तहसील के 50 ग्राम. इस परियोजना से सिंचाई के अलावा पास के क्षेत्रों के पीने के पानी की समस्या, औद्योगिक उपयोग एवं बिजली उत्पादन के लिए पानी सुरक्षित रखने का प्रावधान है।  इन गांवों के निवासियों को मिलेगा लाभ सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि "इस परियोजना के तहत तहसील जुन्नारदेव के भावईकलां, भावईखुर्द, बिरजपुरा, दमुआ, हिरदागढ़ छिनढाना, करहैया, करमोहिनी बंधी, खापासुरजु, मांडई, नंदौरा, महेंदावीर, रामनगरी एवं सेमरकुही, तहसील मोहखेड़ के कोहटमाल, पीपलगांव, बोरगांव, कोहटरैय्यत, तिकाड़ी, बीजागोरा, भवारी रैय्यत, संगम, दीप, रहप, धगडियामाल, मेहलारी बाकुल एवं पर्वत घोघरी, तहसील पांढुर्णा के भूली, खड़की, धावड़ीखापा, खेड़ीधानभोयर, मोराडोंगरी, भुयारी एवं नीलकंठ, तहसील सौंसर के हरनबेडी, बरगाबोडी, पलासपानी, गाजनडोह के निवासियों को लाभ मिल सकेगा।  प्रभारी मंत्री द्वारा मनोनीत डूब क्षेत्र पुनर्वास प्रतिनिधि कमलेश ऊइके ने बताया कि "जमीन किसी भी शासकीय काम के लिए अधिग्रहण की जाती थी तो किसानों को काफी नुकसान होता था. मुख्यमंत्री के द्वारा चार गुना मुआवजा का जो निर्णय लिया गया है प्रभावित किसानों को इसका फायदा हो सकेगा. यह भाजपा सरकार की सोच है ताकि किसानों को सुविधाओं के साथ-साथ उनकी जमीन का उचित मुआवजा भी मिल सके।  सांसद ने मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री से की थी मुलाकात सांसद बंटी विवेक साहू ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से मुलाकात के दौरान उन्हें बताया था कि उनके संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा-पांढुर्णा के अंतर्गत बहुउद्देशीय परियोजना छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना की स्वीकृति प्राप्त है. इस योजना में जल भराव क्षमता 651.33 मिलियन घन मीटर (मि.घ.मी.) है, जिससे छिंदवाड़ा, जुन्नारदेव, मोहखेड़, बिछुआ, चौरई, उमरेठ, सौंसर एवं पांढुर्णा विकासखण्डों की 1,90,500 हेक्टेयर सिंचाई प्रस्तावित है. इस काम में प्रभावित हो रहे ग्रामीणों द्वारा स्पेशल भुअर्जन एवं पुनर्वास एवं पुर्नव्यवस्थापन पैकेज की मांग की गई है।  छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव एवं मोहखेड़ तहसील के प्रभावित ग्रामों की अधिकांश जनसंख्या जनजातीय समुदाय से है जिस कारण गैर जनजातीय खरीदी ब्रिकी निषेध है. अधिकांश प्रभावित किसानों पर एक हेक्टेयर से कम का रकबा है जिसके बाजार मूल्यों में पिछले कई सालों से कम बढ़ोत्तरी हुई है. पांढुर्णा जिले के सौंसर एवं पांढुर्णा तहसील के डूब क्षेत्र में मुख्यतः कपास नगदी फसल एवं संतरा उद्यानिकी फसल की खेती होती है जिस पर किसान निर्भर है. इस क्षेत्र के डूब से प्रभावित होने के कारण किसानों द्वारा अधिक मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया।  सांसद ने मुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री को बताया था कि इस योजना में बाधाएं आ रही हैं, जिसे शासन स्तर पर हल किया जा सकता है. जिसके अंतर्गत परियोजना में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्रस्तावित है जिसके लिए स्पेशल पैकेज की स्वीकृति शासन स्तर से लंबित है. परियोजना से वन भूमि प्रभावित हो रही है जिसके लिए छिंदवाड़ा एवं पांढुर्णा जिले के अलावा अन्य जिलों से भी गैर वन भूमि की आवश्यकता पड़ेगी. वन विभाग छिंदवाड़ा की भूमि के बदले दूसरे जिलों की भूमि को वनों के लिये आवंटित किया जाना प्रस्तावित है।  अधिग्रहण का ग्रामीण कर रहे हैं विरोध सरकार ने जब से बांध बनाने का प्रस्ताव लाया है उसके बाद से ही सभी गांव के ग्रामीण एकजुट होकर बांध बनाने का विरोध कर रहे हैं इसको लेकर कई बार जिला स्तर पर ग्रामीण और आदिवासियों ने बड़ा आंदोलन प्रदर्शन भी किया है. आदिवासी नेता झमक लाल सरेआम ने बताया कि "आदिवासी और ग्रामीणों की आमदनी का मुख्य जरिया उनकी जमीन है और आदिवासी किसानों के पास छोटे-छोटे जमीन के टुकड़े हैं जिससे उनके परिवार का पालन होता है. बांध बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण कर आदिवासियों के जीने का सहारा छीन लिया जाएगा क्योंकि जितनी जमीन का उन्हें मुआवजा मिलेगा उतने में वह जमीन कहीं खरीद नहीं सकेंगे और पुश्तैनी जमीन से उन्हें हटा दिया जाएगा. इसका फायदा बड़े जमींदार और दूसरे गांव को मिलेगा इसलिए वे जमीन देने को तैयार नहीं हैं। 

गांव ओइंड को बड़ी सौगात: मंत्री बरिंदर गोयल ने लिफ्ट इरिगेशन स्कीम का किया शुभारंभ

श्री चमकौर साहिब. पंजाब के कैबिनेट मंत्री, बरिंदर कुमार गोयल ने ओइंड गांव में लिफ्ट इरिगेशन स्कीम का उद्घाटन किया। यह प्रोजेक्ट श्री चमकौर साहिब तहसील के उन गांवों के लिए एक अहम कदम साबित होगा जो अभी भी नहर के पानी से वंचित हैं और जहां ग्राउंडवाटर लगातार गहरा होता जा रहा है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए, कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि श्री चमकौर साहिब एक ऐतिहासिक शहर है और इस इलाके से मुख्य नहरें – सरहिंद नहर और भाखड़ा मेन लाइन नहर गुजरने के बावजूद, कई गांवों को अब तक नहर के पानी की सुविधा नहीं मिल रही थी, जिसके कारण छोटे किसान मोटर कनेक्शन न होने के कारण पानी के लिए दूसरे ज़मीन मालिकों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए और नहरी सिंचाई के तहत ज़्यादा से ज़्यादा एरिया लाने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए यह लिफ्ट सिंचाई स्कीम तैयार की गई है और पूरे राज्य में इसे सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। इससे किसानों को आत्मनिर्भर बनने में भी मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत, गांव ओइंड के पास भाखड़ा मेन लाइन नहर के समराला मेजर सिस्टम से पानी लिफ्ट करके लगभग 900 mm (लगभग 3 फीट) डायमीटर वाले मेन राइजर पाइप के ज़रिए गांव गग्गों में बनने वाले D-टैंक तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद, चार अलग-अलग डिस्ट्रीब्यूशन स्कीमों के ज़रिए आस-पास के गांवों में पानी की सप्लाई पक्की की जाएगी। बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर लगभग 44.83 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इससे लगभग 4500 एकड़ खेती लायक ज़मीन को नहरी पानी की सुविधा मिलेगी। इस स्कीम से श्री चमकौर साहिब, सालोमाजरा, गग्गोन, गढ़राम खुर्द, गढ़राम कलां, पीपलमाजरा, रुड़की, तालापुर, दुगरी, कोटली, कमालपुर, रामपुर बेट समेत कई गांवों को फायदा होगा। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ खेती की पैदावार बढ़ेगी बल्कि किसानों की इनकम भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए पूरी तरह तैयार है और आने वाले समय में भी ऐसे जनहित के प्रोजेक्ट लागू किए जाएंगे। श्री चमकौर साहिब हलके के MLA डॉ. चरणजीत सिंह ने इस खास प्रोजेक्ट के लिए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल का शुक्रिया अदा किया। उद्घाटन समारोह में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने लोगों से किए सभी वादे पूरे किए हैं और राज्य के लोगों को जनहित की स्कीमों का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा पहुंचाया है। इस मौके पर असिस्टेंट कमिश्नर (जी) कम एसडीएम श्री चमकौर साहिब प्रदीप सिंह बैंस, डीएसपी श्री चमकौर साहिब मनजीत सिंह औलाख, एसई गगनदीप सिंह गिल, ईएक्स गुरशरण सिंह विर्क, एसडीओ कुलविंदर सिंह, प्रो. बिरदेविंदर सिंह बल्लां, एनपी राणा, सिकंदर सिंह सहेरी, अमनदीप सिंह मांगट, हरनेक सिंह भूरा, जगदेव भटोआ, अमृतपाल कौर नागरा, जगतार सिंह घड़ूआं व अन्य उच्च अधिकारी व गणमान्य मौजूद थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – खिवनी अभयारण्य बनेगा वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म का आदर्श मॉडल

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राकृतिक रूप से बाघों की बढ़ती मौजूदगी के कारण खिवनी वन्य-प्राणी अभयारण्य वन्यजीव संरक्षण की सफलता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का विजन खिवनी को एक सुदृढ़ बाघ आवास के साथ-साथ प्रमुख इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करना है, जिससे संरक्षण और पर्यटन दोनों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खिवनी आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म का आदर्श केंद्र बनेगा। मालवा-निमाड़ क्षेत्र के शुष्क पर्णपाती वनों में स्थित लगभग 134.7 वर्ग किलोमीटर में फैला खिवनी अभयारण्य, जो पहले केवल रातापानी जैसे बड़े वनों को जोड़ने वाला ‘ट्रांजिट कॉरिडोर’ माना जाता था, आज बाघों के सुरक्षित प्रजनन स्थल के रूप में स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस परिवर्तन को राज्य की सुनियोजित नीतियों और सतत संरक्षण प्रयासों का परिणाम बताया। खिवनी में बाघ ‘युवराज’ और ‘मीरा’ ने इसे अपना स्थायी ठिकाना बनाकर नई पहचान दी है। वन विभाग द्वारा मीरा के तीन शावकों को जन्म देने की पुष्टि की गई है। ये शावक अब अपनी मां के साथ जंगल में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान में खिवनी में लगभग एक दर्जन बाघों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है, जो इस क्षेत्र के पारिस्थितिक पुनर्जीवन का स्पष्ट संकेत है। खिवनी में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियां, जैसे जंगली कुत्तों (ढोल) की सक्रियता, तेंदुए, लकड़बग्घा, सियार और भालू की उपस्थिति तथा चौसिंगा जैसे दुर्लभ शाकाहारी जीवों की मौजूदगी ने इसे संतुलित शिकार-शिकारी श्रृंखला और सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापना का उदाहरण बना दिया है। खिवनी वन्यजीव संरक्षण की नींव 1982 में रखी गई थी। बाद में खिवनी क्षेत्र का विस्तार कर सीहोर जिले के वन क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया। अब यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा सिद्ध हो रहा है। राज्य सरकार अब ओंकारेश्वर वन्य-प्राणी अभयारण्य के विकास के माध्यम से इस ट्रांजिट कॉरिडोर नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है। खिवनी अभयारण्य केवल एक वन क्षेत्र नहीं, बल्कि पुनर्जीवन, संतुलन और नई उम्मीद की प्रेरक कहानी है, जो मध्यप्रदेश को वन्यजीव संरक्षण और इको-पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

अधूरे निर्माण के भुगतान के दबाव की खबर भ्रामक, शिक्षा विभाग ने किया खंडन

अधूरे निर्माण के भुगतान के दबाव की खबर भ्रामक, शिक्षा विभाग ने किया खंडन प्रधान अध्यापक की आत्महत्या मामले में पुलिस जांच जारी, विभाग दे रहा पूरा सहयोग रायपुर  बीजापुर जिले में प्रधान अध्यापक की आत्महत्या से जुड़ी हालिया मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा बीजापुर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अधूरे निर्माण कार्य के भुगतान के दबाव जैसी खबरें तथ्यहीन एवं भ्रामक हैं। जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा बीजापुर द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग निष्पक्ष रूप से पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग कर रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पालनार अंतर्गत प्राथमिक शाला मझारपारा में पदस्थ प्रधान पाठक श्री राजू पुजारी का 22 अप्रैल 2026 को निधन हो गया, जो एक अत्यंत दुखद घटना है। पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच के दौरान मृतक के पास से कुछ पत्र बरामद किए गए हैं, जिनके आधार पर जांच की कार्यवाही जारी है। समग्र शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कार्य शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से कराया गया था, जिसमें प्रधान अध्यापक पदेन अध्यक्ष होते हैं। निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत राशि के अनुरूप प्रथम किस्त का भुगतान नियमानुसार किया गया तथा कार्य पूर्ण होने के पश्चात माप पुस्तिका, पूर्णता प्रमाण पत्र, हस्तांतरण प्रमाण पत्र एवं फोटोग्राफ्स प्राप्त होने पर प्रगति के आधार पर रनिंग बिलों के माध्यम से राशि जारी की गई। विभाग के अनुसार, प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष दोनों का निर्माण फरवरी 2026 में पूर्ण हो चुका था तथा शेष 60 प्रतिशत राशि राज्य स्तर से प्राप्त होना लंबित है। भुगतान की प्रक्रिया में किसी प्रकार का दबाव या अनियमितता नहीं पाई गई है। जिला मिशन समन्वयक ने कहा कि कुछ समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में बिना तथ्यों की पुष्टि के प्रकाशित खबरें भ्रामक हैं, जिससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने अपील की है कि आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही समाचारों का प्रकाशन किया जाए। विभाग ने पुनः स्पष्ट किया है कि इस दुखद घटना के सभी पहलुओं की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और शिक्षा विभाग द्वारा हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

ब्यावरा में 21 मीटर चौड़ी फोरलेन सड़क का निर्माण, खाटू श्याम मंदिर पहुंचना होगा आसान

ब्यावरा  नेशनल हाईवे का संगम कहे जाने वाले ब्यावरा शहर को अब नई रफ्तार मिलने जा रही है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक और हादसों के चलते अब आधुनिक ग्रेड सेपरेटेड फोरलेन बायपास बनने जा रहा है, जो न सिर्फ ट्रैफिक को व्यवस्थित करेगा बल्कि सुरक्षित सफर भी संभव बनाएंगा। करीब 66 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले उक्त प्रोजेक्ट का काम भी शुरू हो चुका है। खास बात यह है कि इस बार पुराने अनुभवों से सीख लेकर डिजाइन तैयार किया गया है, ताकि हाईवे और लोकल ट्रैफिक पूरी तरह अलग रह सके। बायपास पर हाईवे का ट्रैफिक पूरी तरह सेपरेट रहेगा, यानी फोरलेन बायपास में एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। वहीं लोकल के ट्रैफिक के लिए दोनों तरफ सर्विस रोड बनेगा। जिससे आए दिन होने वाले सड़क हादसों से राहत मिलेगी।  दो हिस्सों में काम, मार्च-2027 डेडलाइन उक्त प्रोजेक्ट को अक्टूबर-2025 में स्वीकृति मिली। जिसकी शुरूआत में लागत 96 करोड़ रुपए थी, लेकिन बाद में 66.37 करोड़ रुपए हो गई। प्रोजेक्ट का काम अब शुरू हो चुका है। दो हिस्सो में इसका काम होना है। जिसमें पहला हिस्सा खाटू श्याम मंदिर से गुना बायपास और दूसरा हिस्सा, राजगढ़ बायपास से भोपाल बायपास शामिल है। जिसकी कुल लंबाई करीब करीब 3.5 किमी है। डेढ़ साल में इसका काम पूरा करना है। यानी मार्च-2027 तक बायपास पूरी तरह तैयार हो जाए। 21 मीटर चौड़ा होगा मुख्य फोरलेन खाटू श्याम मंदिर से लेकर भोपाल बायपास तक सेपरेटेड बायपास बनने जा रहा है। जिसमें वर्तमान प्रोजेक्ट में मुख्य सड़क की चौड़ाई करीब 10.5 मीटर होगी, ऐसे में मुख्य फोरलेन करीब 21 मीटर चौड़ा होगा। इनके बीच में 2.5 मीटर चौड़ा डिवाइडर रहेगा। साथ ही पैब्ड शोल्डर भी रहेंगे। फोरलेन के दोनों ओर 7-7 मीटर चौड़ी सर्विस रोड तैयार की जाएगी। सर्विस रोड के बगल दोनों तरफ 1.5 मीटर की नालियां भी बनेगी। अरनिया और फूंदा बाजार के पास दो अंडरपास हाईवे से लोकल के ट्रैफिक को सीधे मिलने से रोकने के लिए दो जगह अंडरपास निर्माण किया जा रहा है। जिसमें पहला बहुप्रतीक्षित अरनिया जोड़ का शामिल है। वहीं दूसरा अंडरपास फूंदा बाजार और राजगढ़ बायपास के बीच रेलवे अंडरपास के पास बनने जा रहा है। दोनों अंडरपास करीब 12 मीटर चौड़े और 5.5 मीटर ऊंचे होंगे। ऐसे में करीब 250 मीटर तक दोनों अंडरपास के आसपास एलिवेडेट जैसा मार्ग होगा। खाटू श्याम मंदिर तक अलग से बनेगा पूरा मार्ग दरअसल पहले हाईवे पर खाटू श्याम मंदिर नहीं होने से उसी हिसाब से प्रोजेक्ट डिजाइन किया गया था। खाटू श्याम मंदिर तक जाने के लिए अलग मार्ग भी नहीं है। हाईवे से ही मंदिर जाना पड़ता है। भीड़ अधिक होने से हाईवे पर हादसों का डर रहता है। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग और कलेक्टर के निर्देश पर अब खाटू श्याम मंदिर तक भी फोरलेन से साइड में अलग से रोड बनाने को योजना बनाई गई है। प्रोजेक्ट लागत बढ़ाकर मंदिर तक सेपरेट रोड बनाया जाएगा। एक नजर में प्रोजेक्ट की स्थिति-     66.37 करोड़ कुल लागत     3.5 किमी लंबाई     10.5 मीटर फोरलेन (एकतरफा)     7-7 मीटर सर्विस रोड     50 मीटर चौड़ाई कुल     02 अंडरपास     मार्च-2027 तक पूरा करना काम (नोट- दो हिस्सो में बन रहा बायपास- अरनिया जोड़ से गुना बायपास और राजगढ़ बायपास से भोपाल बायपास।) बायपास का निर्माण शुरू बायपास निर्माण का काम शुरू करा दिया गया है। जिसमें दो अंडरपास और सर्विस रोड सहित नालियों का काम होना है। फोरलेन बायपास में कई तकनीकी सुधार किए गए है। हाईवे का ट्रैफिक पूरी तरह अलग किया जाएगा।- देवांश नुअल, रीजनल मैनेजर, एनएचएआई, भोपाल दो हिस्सों में होगा काम प्रोजेक्ट का काम दो हिस्सों में होना है। दोनों जगह काम शुरू कर दिए है। मार्च-2027 तक काम पूरा करना है। अभी नालियों का काम कर रहे है, सर्विस रोड के लिए जगह बनाकर मुख्य हिस्से का काम कराएंगे।- निरंजन ठाकुर, प्रोजेक्ट मैनेजर, गोर्डेक निर्माण एजेंसी

‘पति से नहीं, उसके साथ रहूंगी…’, 2 शादीशुदा महिलाओं का प्यार, साथ रहने का लिया फैसला

विदिशा  मप्र के विदिशा जिले में रिश्तों के बदलते स्वरूप और सामाजिक ताने-बाने को चुनौती देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया है। दो विवाहित महिलाएं एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने की जिद पर अड़ी हैं। इससे उपजा विवाद अब थाने की दहलीज तक जा पहुंचा है। इस उलझे हुए रिश्ते की कहानी तब उजागर हुई जब एक पीड़ित पति ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अपनी पत्नी से तलाक दिलाने और दूसरी महिला के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई। बीते दिन जनसुनवाई के दौरान एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे के पास आवेदकों की लंबी कतार थी। अपनी बारी का इंतजार कर रहे एक युवक का आवेदन जब अधिकारी के हाथ में पहुंचा, तो वे भी चौंक गए। महिला ने स्वयं स्वीकार किया युवक ने अपनी पत्नी के किसी और पुरुष के साथ नहीं, बल्कि एक अन्य विवाहित महिला के साथ समलैंगिक संबंधों का हवाला देते हुए सुरक्षा और न्याय की मांग की थी। पीड़ित पति ने आवेदन में बताया कि उसकी शादी महज एक साल पहले जिले के ही दूसरे थाना क्षेत्र की एक युवती से हुई थी। विवाह के बाद से ही स्थितियां सामान्य नहीं थीं।  एक साल के भीतर उसकी पत्नी केवल दो-तीन बार ही ससुराल आई। जांच-पड़ताल और बातचीत में खुलासा हुआ कि पत्नी के मायके में रहने वाली उसकी एक हमउम्र रिश्तेदार महिला के साथ प्रगाढ़ संबंध हैं। पति का दावा है कि उक्त महिला ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन दोनों के बीच समलैंगिक संबंध हैं और वे आपस में समलैंगिक विवाह भी कर चुकी हैं। परेशान पति तलाक देने को है तैयार मानसिक और सामाजिक प्रताडऩा से टूट चुके है। तलाक देने के लिए तैयार पति मानसिक और सामाजिक प्रताडऩा से टूट चुके पति अपनी पत्नी को तलाक देने के लिए तैयार है। उसने पुलिस से मांग की है कि पिछले 15 दिनों से जांच के नाम पर रखा गया उसका मोबाइल वापस दिलाया जाए। उसे तलाक दिलाया जाए। तीन शादियां कर चुकी है महिला फरियादी ने मामले की गंभीरता बताते हुए कहा कि जिस महिला के मोहपाश में उसकी पत्नी है, वह पहले ही तीन शादियां कर चुकी है और तीनों पतियों को छोड़ चुकी है। आरोप है कि दो महीने पहले वह महिला कुछ अज्ञात लोगों के साथ फरियादी के घर पहुंची और उसे जान से मारने की धमकी देते हुए पत्नी को छोडऩे का दबाव बनाया। इतना ही नहीं, वह महिला सोशल मीडिया पर अनर्गल वीडियो डालकर युवक को बदनाम कर रही है और थाने में उसके खिलाफ झूठी शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। आवेदन प्राप्त हुआ है। चूंकि मामला काफी पेचीदा और संवेदनशील है, इसलिए तीनों पक्षों (पति, पत्नी और दूसरी महिला) के बयान दर्ज होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। जांच के बाद ही वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डॉ. प्रशांत चौबे, एडिशनल एसपी, विदिशा

इंदौर की किसान दीदी ने 600 बीघा खेत बचाए, पराली न जलाने की अलख जागृत की

सफलता की कहानी इंदौर की किसान दीदी ने जगाई पराली नहीं जलाने की अलख, 600 बीघा खेत बचाए भोपाल  उत्तर भारत में फसल कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है लेकिन मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के धुलेट गांव में एक महिला किसान ने इस प्रवृति को बदलने की दिशा में मिसाल पेश की है। गांव की रहने वाली श्रीमती पपीता रावत ने न केवल किसानों को जागरूक किया, बल्कि वैकल्पिक समाधान देकर पराली जलाने पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयं सहायता समूह से शुरू हुआ सफर श्रीमती पपीता रावत, जो एक स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष है ने अपनी यात्रा आजीविका मिशन से जुड़कर शुरू की। शुरुआती आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने सिलाई कार्य से शुरुआत की। कृषि गतिविधियों में रूचि के चलते बाद में स्व-सहायता समूह और बैंक से ऋण लेकर स्ट्रा रीपर मशीन खरीदी। इसके बाद उन्होंने गांव और आसपास के किसानों को पराली जलाने के नुकसान और उससे भूसा बनाने के फायदे समझाए। 600 बीघा खेत में पराली जलाने से बचाया जिले के धुलेट गांव के आसपास दूर-दूर तक कोई भी किसान अब अपने खेत में पराली (गेहूं कटाई के बाद बचे हुए ठूंठ,अवशेष) नहीं जलाता। इसका कारण महिला किसान श्रीमती पपीता रावत है। पपीता रावत बताती है -"शुरुआती दिनों में मैं घर ही रहती और मेरे पति महेश मजदूरी करने जाते थे। घर में तंगी बनी रहती। एक दिन गांव में आजीविका मिशन के अधिकारी आए। द्वारकाधीश सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाया। सिलाई मशीन ली और काम शुरू किया। इसके बाद मैंने लोन लेकर 'स्ट्रा रीपर मशीन' खरीद ली। गांव सहित आसपास के किसान परिवारों को पराली जलाने के नुकसान और भूसा तैयार करने के फायदे बताए। देखते ही देखते इस साल हमने 600 बीघा से ज्यादा खेत में फसल कटने के बाद पराली जलने से बचा लिया। इस बार पराली से भूसा तैयार कर किसानों को लाभ पहुंचाया। वे इसका उपयोग मवेशियों के 'केटल फीड' के रूप में कर रहे है। डे आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक गायत्री राठौड़ बताती है-"इस समूह को विलेज ऑर्गेनाइज़ेशन के साथ आस्था संकुल संगठन खुड़ैल से जोड़ा गया। किसान दीदी के रूप में पपीता रावत बेहतर काम कर रही ही है। पशु पालन से जुड़कर भी चार मवेशियों के माध्यम से दूध उत्पादन का व्यवसाय भी कर रही है।" पराली जलाने से यह होता है नुकासान कृषि वैज्ञानिकों का कहना है किसानों द्वारा पराली जलाने की मानसिकता बनी हुई है। प्रदेश में ही सैकड़ों एकड़ खेत में पराली जलाने से उनकी उपजाऊ क्षमता दांव पर लगी हुई है। वैज्ञानिकों के अनुसार "पराली जलाने से जहां अगले सीज़न में फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है वहीं पराली (सूखी फसल अवशेष या STUBBLE) जलाने से CO2 (कॉर्बन डाय ऑक्साइड), नाइट्रोजन ऑक्साइड सहित हानिकारक गैस बनती है जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग प्रभावित होती है। मिट्टी उर्वरता (सॉइल फर्टिलिटी) के साथ सूक्ष्मजीव और बैक्टीरिया नष्ट हो जाते है।" जिला प्रशासन और कृषि विभाग पराली न जलाने के लिए किसानों को जागरूक कर रहा है। यहां तक कि पराली जलाने पर जुर्माने का भी प्रावधान है। प्रशासन भी कर रहा प्रोत्साहित जिला पंचायत इंदौर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग पराली नहीं जलाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रहे है और नियमों के तहत जुर्माने का प्रावधान भी है। अधिकारियों का कहना है कि श्रीमती रावत जैसी किसान दीदियां न केवल खुद आत्मनिर्भर बन रही है, बल्कि समाज और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। धुलेट गांव की यह पहल दिखाती है कि जागरूकता, नवाचार और सामूहिक प्रयास से पराली जताने जैसी गंभीर समस्या का समाधान संभव है। आने वाले समय में ऐसी पहलें कृषि सुधार और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकती है।  

प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा कर रहा है मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूर्ण कर रहा है मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीएम स्वनिधि योजना में मध्यप्रदेश का देश में शीर्ष स्थान इंदौर, भोपाल और जबलपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर अर्जित की विशिष्ट उपलब्धि भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में मध्यप्रदेश की गौरवशाली उपलब्धियों पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के पथ-विक्रेता स्ट्रीट वेण्डर आज आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को स्पर्श कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने इस योजना के सफल क्रियान्वयन में देशभर में अग्रणी रहते हुए एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो अंत्योदय और समावेशी विकास के प्रति हमारी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है। इंदौर, भोपाल और जबलपुर की ऐतिहासिक सफलता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय निकायों द्वारा राष्ट्रीय रैंकिंग में अर्जित किए गए उत्कृष्ट स्थान की सराहना करते हुए बताया कि इंदौर नगर निगम ने नवीन पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत 33,332 ऋण प्रकरणों के वितरण के साथ देश के समस्त नगरीय निकायों में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। देश में 10 लाख से 40 लाख की जनसंख्या वाली श्रेणी में भोपाल ने देशभर में द्वितीय और जबलपुर ने तृतीय स्थान प्राप्त कर विकास के मानकों में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है।डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वाले भाई-बहनों के जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तन का प्रतिबिंब है। पथ-विक्रेताओं के जीवन में आ रहा गुणात्मक परिवर्तन योजना के विस्तार पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में अब तक 9.92 लाख से अधिक पथ-विक्रेताओं को इस योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। 15.69 लाख ऋण प्रकरणों के माध्यम से 2632 करोड़ रुपये की ऋण राशि सीधे हितग्राहियों तक पहुँचाई गई है। योजना के पुनर्गठित स्वरूप में अब 15 हजार, 25 हजार और 50 हजार रुपये की क्रमिक ऋण सहायता के साथ-साथ 30,000 रुपये की सीमा वाला यूपीआई-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी की आवश्यकताएं सुगमता से पूर्ण हो रही हैं। डिजिटल क्रांति और छोटे निकायों का उत्कर्ष मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिजिटल साक्षरता की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश के 7 लाख से अधिक पथ-विक्रेता डिजिटल लेन-देन अपना चुके हैं, जिन्हें 47 करोड़ रुपये से अधिक का कैशबैक प्राप्त हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि 1 लाख से कम आबादी वाले निकायों में सारणी नगर पालिका ने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया है कि संकल्प शक्ति हो तो छोटे निकाय भी राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं। इसी श्रेणी में बालाघाट (5वें), टीकमगढ़ (7वें)और हरदा (9वें)के प्रदर्शन को भी उन्होंने अनुकरणीय बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च, 2030 तक विस्तारित यह योजना आगामी समय में मध्यप्रदेश के नगरीय अर्थतंत्र को नई गति प्रदान करेगी और समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का सशक्त माध्यम बनेगी।  

काम में तेजी लाकर फोरलेन सड़क और रेल उपरिगामी पुल का निर्माण जल्द से जल्द करने के दिए निर्देश

गोरखपुर.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को निर्माणाधीन डोमिनगढ़ माधोपुर बंधा से महेसरा पुल तक फोरलेन सड़क और डोमिनगढ़ में बन रहे रेल उपरिगामी पुल (आरओबी) का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने राजघाट पुल से हाबर्ट बंधा होते हुए डोमिनगढ़, कोलिया, गाहासाढ़ बंधा होते हुए जंगल कौड़िया-कालेसर मार्ग तक फोरलेन सड़क के निर्माण की भी जानकारी ली। उन्होंने इन तीनों परियोजनाओं को सुगम यातायात और बाढ़ बचाव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।  ईको पार्क सहित 1055 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास समारोह में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री डोमिनगढ़ माधोपुर बंधा से महेसरा पुल तक फोरलेन सड़क और डोमिनगढ़ रेल उपरिगामी पुल का निरीक्षण करने पहुंचे। सबसे पहले वह लालडिग्गी के आगे बंधे पर रुके। यहां उन्होंने फोरलेन सड़क परियोजना के ड्राइंग मैप का अवलोकन किया और कार्य प्रगति के बारे में पूछा। मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड दो के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि काम में और तेजी लाकर इसे जल्द से जल्द जनता को समर्पित करने की तैयारी करें।  इसके बाद सीएम योगी ने इसी मार्ग पर इलाहीबाग के पास बंधे पर रुककर निर्माण कार्य का जायजा लिया। उन्होंने लक्षित समय सितंबर 2026 की बजाय जुलाई 2026 तक ही फोरलेन का काम पूरा करने के लिए कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए। यहां मुख्यमंत्री ने नगर आयुक्त को निर्देशित करते हुए कहा कि महेसरा तक बनने वाले फोरलेन के अंतिम छोर को खूबसूरत बनाने में नगर निगम भी योगदान दे। उन्होंने कहा कि महेसरा में सड़क से सटी वाटर बॉडी के समीप की भूमि पर कचरा पड़ा रहता है। वहां भी ईको पार्क जैसा विकास किया जा सकता है। गोरखपुर में खड़ी हो रही विकास की नई श्रृंखला : मुख्यमंत्री फोरलेन सड़क का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री ने डोमिनगढ़ चौकी के पास जगतबेला-डोमिनगढ़ रेल सेक्शन पर रहमतनगर-माधोपुर रोड पर रेल उपरिगामी पुल की प्रगति की जानकारी ली। ड्राइंग मैप देखने के बाद उन्होंने निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। डोमिनगढ़ चौकी के पास स्वागत के लिए जुटे लोगों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर में जीवन सुगमता के लिए विकास की एक नई श्रृंखला खड़ी हो रही है। उन्होंने कहा कि हाबर्ट बंधा, डोमिनगढ़ बंधा पर फोरलेन सड़क और डोमिनगढ़ में रेल उपरिगामी पुल बन जाने से घुनघुनकोठा, जगतबेला और आसपास के लोगों को आवागमन में बड़ी सहूलियत हो जाएगी। फोरलेन के रूप में तटबंध सुदृढ़ हो जाने से बाढ़ से भी बचाव होगा। फोरलेन सड़क बन जाने से जंगल कौड़िया-कालेसर या फिर सोनौली मार्ग पर जाना बेहद सुगम हो जाएगा। सिटी के बाहर मिल जाएगी फोरलेन की बेहतरीन कनेक्टिविटी : सीएम योगी सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब सिटी के बाहर-बाहर फोरलेन की बेहतरीन कनेक्टिविटी मिल जाएगी। राजघाट, टीपीनगर से होते हुए नेपाल जाने वाले मार्ग पर जाने के लिए यात्रियों को शहर के अंदर जाने की जरूरत नहीं रहेगी। इस फोरलेन से सीधे महेसरा और फिर वहां से सोनौली मार्ग पर जाना आसान होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यदायी संस्थाएं समय पर कार्य पूर्ण कर लेंगी और लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। महेसरा पुल तक जाएगी 10 किमी लंबी सड़क डोमिनगढ़ माधोपुर बंधा से बसियाडीह मंदिर होते हुए महेसरा पुल के पास गोरखपुर-सोनौली मार्ग तक 10.2 किमी लंबाई में 379.54 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन सड़क का निर्माण जारी है। इसकी कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड दो है। इस सड़क को सितंबर 2026 तक पूरा कराया जाना है। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसे जुलाई तक ही पूरा करने के लिए निर्देशित किया है।  हाबर्ट बंधे से जंगल कौड़िया-कालेसर मार्ग की होगी कनेक्टिविटी इसी तरह राजघाट पुल से हाबर्ट बंधा होते हुए डोमिनगढ़, कोलिया, गाहासाढ़ बंधा होते हुए जंगल कौड़िया-कालेसर मार्ग तक फोरलेन सड़क का निर्माण हो रहा है। 4.07 किमी लंबे इस मार्ग को फोरलेन सड़क में तब्दील करने पर 195.21 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड दो के अनुसार 75 प्रतिशत से अधिक कार्य हो चुका है और इसे मई 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। 132 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा रेल उपरिगामी पुल जगतबेला-डोमिनगढ़ रेल सेक्शन पर रहमतनगर-माधोपुर रोड पर उपरिगामी पुल का निर्माण 132 करोड़ 60 लाख 78 हजार रुपये की लागत से किया जा रहा है। 755 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण दिसंबर 2027 तक पूरा किया जाना है। इस पुल के बन जाने से टीपीनगर, कालेसर जंगल कौड़िया मार्ग से जोड़ते हुए रोहिन नदी के बाएं तट पर हाबर्ट तटबंध से माधोपुर तटबंध होते हुए मोहरीपुर का गोरखपुर-सोनौली मार्ग से सीधा संपर्क हो जाएगा। इससे सोनौली मार्ग पर जाने वाले यात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी, समय व ईंधन की बचत भी होगी।