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जनरेशन कंपनी एमडी एस.के. कटियार के कार्यकाल में पुन: वृद्धि

जनरेशन कंपनी एमडी एस.के. कटियार के कार्यकाल में पुन: वृद्धि राज्य शासन ने 31 मार्च 2027 तक कार्यकाल बढ़ाया रायपुर  छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री संजीव कुमार कटियार के कार्यकाल में राज्य शासन ने पुन: वृद्धि की है। वे  ऊर्जा विभाग द्वारा इस संबंध में जारी आदेश में उनके कार्यकाल में 31 मार्च 2027 तक वृद्धि की गई है।  श्री कटियार के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में वित्त वर्ष 2023-24 में एबीवीटीपीएस मारवा के प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 84.4 प्रतिशत करना उल्लेखनीय है। इसके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी 33 राज्य जनित निगमों में प्रथम स्थान पर रही। इसी तरह कोरबा पश्चिम ताप विद्युत संयंत्र में जटिल स्टेशन नियंत्रण एवं इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम के नवीनीकरण का कार्य महज 46 दिनों में पूरा किया गया। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक श्री कटियार प्रमाणित ऊर्जा लेखा परीक्षक हैं तथा उन्होंने प्रबंधन में डिप्लोमा भी प्राप्त किया है। उनकी कार्यशैली में स्पष्ट दिशा-निर्देश, टीम को प्रेरित करना और अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के लिए सशक्त बनाना प्रमुख है।  

पाॅवर कंपनी से ईडी वी.के.दीक्षित, सीई प्रशांत बापट सहित नौ कर्मियों को भावभीनी विदाई

 पाॅवर कंपनी से ईडी वी.के.दीक्षित, सीई प्रशांत बापट सहित नौ कर्मियों को भावभीनी विदाई   रायपुर  छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनी से कार्यपालक निदेशक (टी एण्ड डी) वीरेंद्र कुमार दीक्षित, मुख्य अभियंता (जनरेशन) प्रशांत बापट सहित कुल 9 अधिकारी-कर्मचारियों को भावभीनी विदाई दी गई। पॉवर कंपनीज के मुख्यालय सेवा भवन में आयोजित समारोह में प्रबंध निदेशक (जनरेशन) एस. के. कटियार एवं प्रबंध निदेशक (ट्रांसमिशन) राजेश कुमार शुक्ला ने सेवानिवृत्त ईडी दीक्षित एवं सीई बापट को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। प्रबंध निदेशकगणों ने कहा कि दीक्षित एवं बापट के समर्पण, उत्कृष्ट कार्यशैली एवं अनुभवों से पॉवर कंपनी के विकास कार्यों को नई दिशा और गति मिली हैं। इस अवसर पर सेवानिवृत ईडी दीक्षित एवं बापट ने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए अपने सेवायात्रा में मिले सहयोग के लिए प्रबंधन, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।       इसी तरह एक अन्य कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी में आयोजित समारोह में मानव संसाधन विभाग में पदस्थ सहायक प्रबंधक कमलेश कुमार गुप्ता, कार्यपालक निदेशक (ट्रांसमिशन) रायपुर कार्यालय में कार्यरत सहायक प्रबंधक (वित्त एवं लेखा) मो.युसुफ खान तथा दफ्तरी बसंत कुमार विश्वकर्मा, कनिष्ठ अभियंता (सिविल) चंद्रशेखर दीवान, भिलाई संभाग में कार्यरत वरिष्ठ पर्यवेक्षक (परीक्षण) धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव एवं लाइन सहायक श्रेणी-दो घनश्याम सिंह चैहान को सम्मानित कर भावभीनी विदाई दी गई। जनरेशन कंपनी द्वारा भी सेवानिवृत्ति कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें प्रबंध निदेशक (उत्पादन) कार्यालय में सीई प्रशांत बापट को सम्मानित किया गया।       इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक वी के साय, एम एस चैहान, के एस मनोठिया, एम एस कंवर, सी एल नेताम, संदीप मोदी, संजय शुक्ला, रामायण नामदेव, एस आर बी खंडेलवाल, ए.एम. परियल मुख्य अभियंता देवेंद्र नाथ, संजय तिवारी, अब्राहम वर्गीज, के बी पात्रे, शशि धर द्विवेदी, प्रसन्ना गोसावी, सुभाष शर्मा, डी के चावड़ा, गिरीश गुप्ता, एच एन कोसरिया, आई अंसारी, संजीव सिंह, एम जामुलकर, श्रीमती रश्मि वर्मा, डॉ एच एल पंचारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन उपमहाप्रबंधक (जनसंपर्क) गोविंद पटेल एवं प्रकाशन अधिकारी श्रीमती अनामिका मंडावी ने किया। आभार प्रदर्शन अधीक्षण अभियंता पंकज चैधरी ने किया।  

इंडी गठबंधन की बैठक में नहीं पहुंचे अखिलेश तो राजभर ने राहुल से पूछा- ‘डिंपल या धर्मेंद्र को क्यों नहीं भेजा?’

‘अखिलेश से पूछिए, इंडी गठबंधन की बैठक में क्यों नहीं आए?’, ओपी राजभर का राहुल गांधी पर सीधा हमला इंडी गठबंधन की बैठक में नहीं पहुंचे अखिलेश तो राजभर ने राहुल से पूछा- ‘डिंपल या धर्मेंद्र को क्यों नहीं भेजा?’ ‘अखिलेश ऑनलाइन भी जुड़ सकते थे’, इंडी गठबंधन की बैठक से दूरी पर राजभर ने घेरा 'अखिलेश खुद नहीं गए तो डिंपल या धर्मेंद्र को भेज देते', इंडी गठबंधन की बैठक को लेकर राजभर का तीखा हमला ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के आरोपों को लेकर राजभर का राहुल पर हमला- ‘पहले चुनावों का इतिहास देखिए’ ओपी राजभर की राहुल गांधी को नसीहत- ‘ज्ञानेश कुमार पर ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय जनता के बीच जाइए’ ‘आरोप-आरोप खेलते रहिए, आपस में लड़ते रहिए’, राहुल गांधी पर ओपी राजभर का तीखा हमला लखनऊ सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को संबोधित करते हुए इंडी गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाए हैं। राजभर ने कहा कि राहुल गांधी ने इंडी गठबंधन की बैठक की, लेकिन अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि अपने दोस्त अखिलेश यादव से पूछिए कि वह ऐसा कौन सा काम कर रहे थे कि बैठक में नहीं आ सके। '6 अक्टूबर तक नामांकन था, कल ही जाने की क्या जल्दी थी' ओपी राजभर ने कहा कि राज्यसभा का नामांकन 6 अक्टूबर तक होना है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि अखिलेश यादव के लिए पहले ही नामांकन करने की ऐसी क्या जल्दी थी। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि मान लिया कि उस दिन नामांकन नहीं होता तो अखिलेश यादव के लिए पहाड़ टूट जाता, लेकिन अगर खुद नहीं जाना था तो डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव को क्यों नहीं भेजा गया। राजभर ने कहा कि डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव भी नामांकन में नहीं थे। उन्होंने आगे सवाल उठाया कि अगर नामांकन इतना जरूरी था और अखिलेश यादव खुद नहीं आ सकते थे तो वह ऑनलाइन भी इंडी गठबंधन की बैठक से जुड़ सकते थे। 'अखिलेश एसी में बैठक पीसी करके ठहाके लगा रहे थे' राजभर ने अपने पोस्ट में कहा कि जब राहुल गांधी दिल्ली में बैठक कर रहे थे, तब अखिलेश यादव ‘एसी में बैठक पीसी करके ठहाके लगा रहे थे।’ उन्होंने कहा कि कई नेता ऑनलाइन बैठक में जुड़े थे, ऐसे में अखिलेश यादव भी ऑनलाइन जुड़ सकते थे। ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना ओपी राजभर ने अपने पोस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं और बीजेपी के चुनावी इतिहास को देखा जाना चाहिए कि उनके पहले बीजेपी कितने चुनाव जीत चुकी है। राजभर ने कांग्रेस नेता अभिजीत दीपके के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि वह कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी को हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली जिता दिया। राजभर ने कहा कि उन्हें बताया जाना चाहिए कि इन तीनों राज्यों में चुनाव ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले हो चुका था। उन्होंने अपने पोस्ट में 2014, 2019 और 2024 में बीजेपी की जीत का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे। 'ज्ञानेश कुमार पर ऊर्जा बर्बाद करने की जगह जनता के बीच जाइए' ओपी राजभर ने राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार पर अपनी ऊर्जा बर्बाद करने की जगह जनता के बीच जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के बीच जाने पर ही जीत की कुछ संभावना बनेगी। राजभर ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो विपक्ष आरोप-आरोप का खेल खेलता रहेगा, आपस में लड़ता रहेगा और विपक्ष में बैठे रहने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा।

पंजाब कांग्रेस में बदलाव की तैयारी, सचिन पायलट संभालेंगे संगठन की कमान

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच अब संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदलने की अटकलों के बीच माना जा रहा है कि आज या अगले एक-दो दिन में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। हाई कमान की ओर से सिंगल को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का फैसला ले लिया गया है और इस संबंध में अमरिंदर सिंह को भी जानकारी दे दी गई है। उन्होंने भी इसकी पुष्टि की है। हालांकि, अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। कांग्रेस संगठन में बदलाव की तैयारी प्रदेश अध्यक्ष बदलने के साथ ही पंजाब कांग्रेस संगठन में कई अन्य पदों पर भी फेरबदल किए जाने की संभावना है। हाईकमान 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष के साथ नई टीम के गठन पर भी नजर रहेगी। दरअसल, एक जुलाई को कांग्रेस हाईकमान ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कमेटी का गठन किया था। इसके बाद पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आए। पंजाब कांग्रेस में दिखी गुटबाजी पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह और राणा गुरजीत सिंह समेत कई नेताओं ने संगठन से जुड़े फैसलों को लेकर असहमति जताई थी। इसके बाद प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग भी लगातार चर्चा में रही। विवाद के बीच पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन प्रभारी भूपेश बघेल को जिम्मेदारी से हटाया गया और पांच सितंबर को सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया। सचिन पायलट ने की नेताओं से मुलाकात पायलट ने इसके बाद पार्टी के विभिन्न गुटों के नेताओं से मुलाकात कर एकजुटता बनाने की कोशिश की। इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हो सके। अब वड़िंग के स्थान पर नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती सभी गुटों को साथ लेकर चलने की होगी। वहीं, वड़िंग को किसी दूसरे प्रदेश में संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा भी है। आने वाले दिनों में कार्यकारी अध्यक्षों और संगठन के अन्य पदों पर भी बदलाव हो सकते हैं। ऐसे में नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि हाईकमान पंजाब कांग्रेस की नई टीम में किन नेताओं को जगह देता है और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को किस तरह तैयार करता है।

कांकेर में दिखा लोक संस्कृति का रंग, ग्रामीणों संग थिरके कलेक्टर

कांकेर. जिले में सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत की गई है। अभियान के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जिला स्तरीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में ग्राम मोदे में जिला स्तरीय शिविर आयोजित किया गया, जहां ग्रामीणों ने पारंपरिक अंदाज में प्रशासनिक अधिकारियों का स्वागत किया। शिविर में ग्रामीणों ने बाजे-गाजे और आदिवासी अंचल की पहचान मांदरी नृत्य के साथ कलेक्टर कुंदन कुमार का स्वागत किया। ग्रामीण युवाओं को पारंपरिक नृत्य करते देख कलेक्टर भी उत्साहित हो गए। खुद को नाचने से रोक नहीं पाए कलेक्टर इसके बाद कलेक्टर कुंदन कुमार खुद को नृत्य करने से रोक नहीं पाए। उन्होंने ग्रामीण युवाओं के साथ मांदरी नृत्य में कदम से कदम मिलाया और पारंपरिक अंदाज में जमकर थिरके। कलेक्टर को अपने बीच नृत्य करता देख ग्रामीणों में भी उत्साह का माहौल बन गया। इस दौरान शिविर में मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों ने कलेक्टर के साथ नृत्य का आनंद लिया।

पंजाब में बेअदबी कानून पर मंथन, सरकार ने बनाई 7 सदस्यीय कमेटी

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (शोध) एक्ट 2026 को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने इस एक्ट से संबंधित संशोधनों पर सहमति बनाने के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस संबंध में जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है। यह कमेटी श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित कमेटी के साथ बैठकें कर एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों पर सहमति बनाने का काम करेगी। दोनों कमेटियों के बीच तालमेल के लिए पंजाब सरकार ने पीसीएस अधिकारी हरजीत सिंह संधू को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। समिति में श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, दमदमी टकसाल के मुखी संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश जसपाल सिंह, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गुरबीर सिंह और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी व पंजाब लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष जतिंदर सिंह औलख को शामिल किया गया है। विधि अधिकारी प्रीत इंदर पॉल सिंह भी इस सात सदस्यीय समिति के सदस्य हैं।  हरजीत संधू नोडल अफसर नियुक्त पंजाब सरकार द्वारा हरजीत सिंह संधू पीसीएस को 23.09.2026 के आदेशों के माध्यम से नोडल अफसर नियुक्त किया गया है। वह पंजाब सरकार द्वारा गठित कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित कमेटी के बीच तालमेल स्थापित करने के लिए जिम्मेदार होंगे। इस कमेटी द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से प्राप्त सुझावों और मार्गदर्शन को पूरे सत्कार के साथ विचार के अधीन लाया जा रहा है। पंजाब सरकार ने पीसीएस अधिकारी हरजीत सिंह संधू को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। उनका कार्य दोनों समितियों के बीच तालमेल स्थापित करना होगा। यह समिति श्री अकाल तख्त साहिब की समिति के साथ बैठकें करेगी। इन बैठकों में एक्ट के संशोधनों पर सहमति बनाई जाएगी।  यह काम करेगी कमेटी पंजाब सरकार द्वारा गठित कमेटी विचार-विमर्श करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित कमेटी के साथ आवश्यक विचार-विमर्श और तालमेल करेगी। सभी सुझावों एवं विचारों को ध्यान में रखते हुए मामले को अंतिम रूप दिया जाएगा।

मासूम का जीवन और उसकी सुरक्षा सर्वाेपरि, उपचार के साथ मिले सुरक्षित वातावरण – राजेश अग्रवाल

खेत में मिली मासूम के लिए आगे आए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, उपचार और सुरक्षा के दिए निर्देश नवजात की खबर मिलते ही सीएचएमओ से फोन पर की चर्चा, स्वास्थ्य की ली जानकारी मासूम का जीवन और उसकी सुरक्षा सर्वाेपरि, उपचार के साथ मिले सुरक्षित वातावरण – राजेश अग्रवाल रायपुर सरगुजा जिले के दरिमा क्षेत्र में खुले खेत में असहाय अवस्था में मिली नवजात बच्ची की खबर सामने आने के बाद पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मामले का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बच्ची के स्वास्थ्य और उपचार की जानकारी ली। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से फोन पर चर्चा कर नवजात को समुचित उपचार उपलब्ध कराने तथा उसकी सुरक्षित देखरेख सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अग्रवाल ने अधिकारियों से कहा कि इतनी छोटी बच्ची के उपचार और देखभाल में किसी भी स्तर पर कोई कमी नहीं होनी चाहिए। बच्ची को लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखते हुए आवश्यकता के अनुसार हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही उसकी सुरक्षा और आगे के संरक्षण के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। घटना की जानकारी मिलने पर अग्रवाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक नवजात बच्ची का इस तरह असहाय अवस्था में मिलना बेहद पीड़ादायक है। इस समय सबसे महत्वपूर्ण उसका जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा है। बच्ची को केवल बेहतर उपचार ही नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण और भविष्य के लिए आवश्यक संरक्षण भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्ची के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाए और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुरूप सभी जरूरी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। उसके आगे के संरक्षण और पालन-पोषण से संबंधित प्रक्रिया में भी संबंधित विभाग संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं। दरिमा क्षेत्र में खेत के पास मिली नवजात बच्ची को ग्रामीणों की मदद से उपचार के लिए पहुंचाया गया था। बच्ची को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। उसके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर प्रशासन एवं संबंधित विभागों को आवश्यक समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। अग्रवाल ने बच्ची के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि ईश्वर से प्रार्थना है कि यह नन्ही बच्ची जल्द स्वस्थ हो और उसके जीवन में खुशियों की नई सुबह आए। इस मासूम को उपचार के साथ सुरक्षा, संरक्षण और आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित वातावरण मिले, यही हमारी प्राथमिकता है।

डॉक्टर दंपति पर 8 वर्षीय बच्ची से मारपीट और दागने का आरोप, पुलिस ने लिया संरक्षण में

शहडोल   शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 7 आशीर्वाद कॉलोनी में जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर के घर में 8 साल की बच्ची के साथ कथित अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। बुधवार शाम बच्ची रोते हुए मोहल्ले में पहुंची और लोगों से मदद की गुहार लगाई। बांदा से लाए थे बच्ची, कराते थे घर का काम स्थानीय लोगों के अनुसार बच्ची उत्तर प्रदेश के बांदा की रहने वाली है। उसके माता-पिता नहीं हैं। आरोप है कि डॉक्टर दंपति करीब 5-6 माह पहले उसे बांदा से शहडोल लाए थे और घर में छोटी बच्ची की देखरेख के नाम पर रखा था। बच्ची का आरोप है कि उससे झाड़ू-पोछा और घर का काम कराया जाता था और विरोध करने पर मारपीट की जाती थी। गर्म चिमटे से दागने का आरोप बच्ची ने डॉक्टर की पत्नी पर गर्म चिमटे और अन्य गर्म वस्तु से दागने का आरोप लगाया है। उसकी पीठ पर जलने और चोट के निशान भी बताए जा रहे हैं। मोहल्ले वालों ने उसे रोते देख पुलिस को सूचना दी। डॉक्टर ने रिश्तेदार बताकर दी सफाई सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को संरक्षण में लेकर थाने लाई। पुलिस ने जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ बीआर प्रजापति को भी पूछताछ के लिए बुलाया । डॉक्टर ने बच्ची को अपनी पत्नी की रिश्तेदार बताते हुए कहा कि वह घूमने के लिए शहडोल आई है।  

शाही मस्जिद की मीनार का हिस्सा गिरने से हड़कंप, प्रशासन ने शुरू कराया मरम्मत काम

उज्जैन  उज्जैन के छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद में गुरुवार को हादसा हो गया। यहां ऊंची मीनार का एक हिस्सा टूटकर मस्जिद की छत पर गिर गया। इससे छत समेत मस्जिद के कुछ हिस्से को नुकसान पहुंचा। प्रशासन छत की मरम्मत करवा रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत कंठाल से गोपाल मंदिर मार्ग को चौड़ा करने की योजना है। शाही मस्जिद की मीनार समेत करीब 6 फीट हिस्सा प्रस्तावित सड़क की जद में आ रहा था। इसे मुस्लिम समुदाय के लोग हाथ से तोड़ने का काम चार दिन से कर रहे थे। प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच बातचीत के बाद इसकी सहमति बनी थी। गुरुवार को निर्माण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान मीनार का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। प्रशासन के मुताबिक, हादसे में किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई। 28 सितंबर को हुआ था विवाद शाही मस्जिद को लेकर 28 सितंबर को भी विवाद हुआ था। सोशल मीडिया पर मस्जिद को पूरी तरह तोड़े जाने से जुड़ी भ्रामक और AI से तैयार सामग्री वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस के मुताबिक, भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया था। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और हलका बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया। मामले में कई FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट्स के साथ CCTV और ड्रोन फुटेज की भी जांच कर रही है। नौ आरोपी जेल भेजे गए 30 सितंबर को मामले में गिरफ्तार नौ आरोपियों को जिला कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी को 12 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। विवाद के बाद शाही मस्जिद और आसपास के इलाके में पुलिस बल तैनात है। बाजार के कुछ हिस्सों में दुकानें भी बंद रहीं। अब तक क्या कार्रवाई हुई     सड़क चौड़ीकरण की योजना: सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत कंठाल से गोपाल मंदिर मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है। शाही मस्जिद का एक हिस्सा प्रस्तावित सड़क की जद में आया।     मस्जिद कमेटी से सहमति: प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच प्रभावित हिस्सा हटाने पर सहमति बनी। हाईकोर्ट में भी मुस्लिम पक्ष की ओर से सहयोग की बात कही गई।     28 सितंबर को बवाल: कार्रवाई के दौरान सोशल मीडिया पर मस्जिद को पूरी तरह तोड़े जाने की भ्रामक/AI सामग्री वायरल होने के बाद बड़ी भीड़ मौके पर पहुंची। पुलिस पर पथराव हुआ। पुलिस ने आंसू गैस और हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया।     पुलिस कार्रवाई: मामले में कई FIR दर्ज हुईं और आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू हुई। सोशल मीडिया अकाउंट्स और CCTV/ड्रोन फुटेज की भी जांच की गई।     9 आरोपी कोर्ट में पेश: 30 सितंबर को 9 आरोपियों को जिला कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी को 12 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।     स्थिति: विवाद के बाद शाही मस्जिद और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है तथा बाजार के कई हिस्सों में दुकानें बंद रहीं। मस्जिद विवाद में उपद्रव फैलाने वाले 100 इंस्टाग्राम ID ब्लॉक उज्जैन में शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के दौरान हुए उपद्रव के बाद पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने उपद्रव से जुड़े भड़काऊ और वायरल कंटेंट वाले 100 से अधिक इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट/पेज ब्लॉक करवाए हैं।

स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति 3 हफ्ते में छोड़ेंगे पद, हाईकोर्ट का निर्देश

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सोनीपत के कुलपति पद पर पूर्व आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट के समक्ष संबंधित कुलपति की ओर से कहा गया कि वह व्यक्तिगत कारणों से पद पर बने रहने की स्थिति में नहीं हैं और तीन सप्ताह के भीतर इस्तीफा सौंप देंगे। इसके बाद जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को इस्तीफा स्वीकार करने और कुलपति पद पर अंतरिम व्यवस्था करने के निर्देश दिए। नियुक्ति को यूजीसी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाकर दी गई थी चुनौती डॉ. डीएस मोर उर्फ देवेंद्र सिंह मोर और एक अन्य याचिकाकर्ता ने याचिका दायर की थी। इसमें संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में अशोक कुमार की नियुक्ति को गैरकानूनी और शुरू से ही अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2018 के नियमों के विपरीत की गई है। इसके अलावा कुलपति के वेतन निर्धारण से जुड़े 15 जुलाई 2024 के पत्र को भी चुनौती दी गई थी। इस्तीफा स्वीकार होने तक वरिष्ठ डीन संभालेंगे जिम्मेदारी हाई कोर्ट ने कहा कि कुलपति अपना इस्तीफा तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करेंगे और राज्य सरकार इस्तीफा मिलने के एक सप्ताह के भीतर उसे स्वीकार करेगी। इस बीच विश्वविद्यालय के कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। अदालत ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय के नियमों के नियम-दो में दी गई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि कुलपति का पद इस्तीफे के कारण रिक्त होने की स्थिति में वरिष्ठ डीन को अंतरिम तौर पर कुलपति के कर्तव्यों का निर्वहन कराया जाए। यह व्यवस्था नए कुलपति की नियुक्ति होने तक जारी रहेगी। नई नियुक्ति में यूजीसी के 2018 नियमों का सख्ती से पालन हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय के अगले कुलपति की नियुक्ति यूजीसी के 2018 के नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए की जाए। अदालत ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के डा एस. मोहन बनाम सेक्रेटरी टू द चांसलर, पुडुचेरी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी एवं अन्य मामले में 2026 में दिए फैसले को भी ध्यान में रखने को कहा है। 31 अक्टूबर तक पूरी करनी होगी सभी जरूरी कार्रवाई हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा स्वीकार करने, अंतरिम व्यवस्था करने और नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने समेत सभी आवश्यक कदम 31 अक्टूबर 2026 तक पूरे किए जाएं। मामले में अदालत की सहायता के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी के सहयोग की भी पीठ ने सराहना की।