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IAS अधिकारी की 20 करोड़ की संपत्ति जब्त, करप्शन केस में बड़ी स्ट्राइक, प्रशासनिक हलचल

रायपुर  छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां IAS अधिकारी पर एक बड़ी कार्रवाई हुई है। दरअसल भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे IAS समीर विश्नोई के खिलाफ अहम कार्रवाई करते हुए 20 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली गई है। जानकारी के मुताबिक आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस (IAS) अधिकारी समीर विश्नोई के खिलाफ कड़ा एक्शन अमल में लाया गया है। कोयला लेवी स्कैम से जुड़ा है मामला आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विश्नोई के खिलाफ की गई इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई के बाद अफरा-तफरी मच गई है। ACB/EOW की जांच के बाद विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, रायपुर ने विश्नोई और पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर अर्जित करीब 20 करोड़ रुपए की बेनामी अचल संपत्तियों को अटैच करने के आदेश से हलचल है।राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें समीर विश्नोई को कोयला लेवी घोटाले का प्रमुख आरोपी माना गया है और अब बेनामी अचल संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई  हुई है। कोयला लेवी स्कैम से जुड़ा मामला राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने अपराध क्रमांक 23/2024 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया था। समीर विश्नोई को कोयला लेवी घोटाले का प्रमुख आरोपी माना गया है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी कोयला लेवी स्कैम में विश्नोई की 5 अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैच किया जा चुका है। वहीं एसीबी/ईओडब्ल्यू की जांच में करीब 4 करोड़ रुपए मूल्य की 9 अतिरिक्त संपत्तियों का खुलासा हुआ, जिनके अटैचमेंट के लिए विशेष अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती 17 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायालय में सुनवाई के बाद सभी चिन्हित संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया गया। आदेश के बाद अब इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह रोक लग गई है। पहले भी हुई है कार्रवाई उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी इसी मामले में आरोपी रहीं सौम्या चौरसिया की अवैध संपत्तियों की कुर्की न्यायालय के आदेश से की जा चुकी है। समीर विश्नोई ने पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर फर्म बनाकर की अवैध कमाई जांच में सामने आया है कि समीर विश्नोई ने अपनी पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम परफर्म बनाकर अवैध कमाई को उसमें निवेश किया और फिर कई संपत्तियां खरीदीं। करप्शन के मामले मे महासमुंद जिले में करीब 22 एकड़ जमीन, नया रायपुर में प्लॉट, जैसे अचल संपत्तियां शामिल हैं। यही नहीं रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर भी निवेश करके प्रापटी कमाई गई है। वहीं आपको बता दें कि इससे पहले भी ED द्वारा कोयला लेवी स्कैम में विश्नोई की 5 अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैच किया जा चुका है। वहीं अब पिछले कल यानीकि 17 अप्रैल को विशेष न्यायालय में सुनवाई के बाद सभी चिन्हित संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया गया है। लिहाजा आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस विश्नोई के खिलाफ यह  बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

पैडल मारकर भगाएंगे नशा: जालंधर जिला प्रशासन की अनोखी पहल, युवाओं ने ली पंजाब को नशामुक्त बनाने की शपथ

जालंधर  पंजाब सरकार के 'नशे के विरुद्ध युद्ध' अभियान के तहत जालंधर जिला प्रशासन ने एपीजे स्कूल के सहयोग से 'साइक्लोथॉन 4.0' का आयोजन किया। इस मेगा इवेंट का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को नशीले पदार्थों के खिलाफ लामबंद करना और युवाओं को एक स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था। इस आयोजन में लगभग 2000 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, जो नशामुक्त पंजाब के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ। डीसी ने खुद संभाली कमान डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने एपीजे स्कूल से हरी झंडी दिखाकर साइक्लोथॉन को रवाना किया। खास बात यह रही कि डीसी ने न केवल इस कार्यक्रम की शुरुआत की, बल्कि खुद भी अन्य अधिकारियों के साथ साइकिल चलाकर लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार नशे के खिलाफ जंग लड़ रही है, लेकिन कोई भी लड़ाई बिना जन-सहयोग के नहीं जीती जा सकती। जालंधर के लोगों ने इस कार्यक्रम में भारी संख्या में पहुँचकर यह साबित कर दिया है कि वे इस बुराई को खत्म करने के लिए सरकार के साथ हैं। तीन श्रेणियों में हुआ रोमांचक सफर यह साइक्लोथॉन तीन अलग-अलग श्रेणियों—5 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 21 किलोमीटर—में आयोजित की गई थी। 21 किलोमीटर की मुख्य दौड़ एपीजे स्कूल से शुरू होकर गीता मंदिर, शहीद मेजर कपिल विनायक चौक और शाहपुर कैंपस जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस स्कूल पर समाप्त हुई। रास्ते में प्रतिभागियों का लोगों ने जोरदार स्वागत किया। प्रतिभागियों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, जिससे एकता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। बहुआयामी रणनीति और समाज सुधार प्रशासन केवल जागरूकता तक ही सीमित नहीं है। डीसी वालिया ने स्पष्ट किया कि जहां एक ओर नशे के कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर नशे की लत के शिकार मरीजों का मुफ्त इलाज और उनके पुनर्वास के प्रयास भी जारी हैं। पीड़ितों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले साइकिल चालकों और सहयोगियों को सम्मानित किया गया, जबकि लोक गायक दलविंदर दयालपुरी ने गीतों के माध्यम से युवाओं को नशों से दूर रहने का आह्वान किया।

शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ: झारखंड में TET नियम नहीं हुए रद्द, 21 अप्रैल से फॉर्म

रांची. राज्य सरकार ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली, 2026 को अभी रद नहीं किया है। इस नियमावली की स्वीकृति के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा गया था, जिसमें भाषा का लेकर मामला उठने के बाद प्रस्ताव को स्थगित रखा गया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के एक जिम्मेदार पदाधिकारी के अनुसार, भाषा को लेकर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। इसका समाधान निकलने के बाद प्रस्ताव को दोबारा कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। इससे पहले मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद कैबिनेट की स्वीकृति की प्रत्याशा में यह नियमावली अधिसूचित कर दी गई थी। इसके बाद जैक ने इस पात्रता परीक्षा का विज्ञापन जारी किया। इसके तहत इस परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए 21 अप्रैल से आवेदन भरे जाने हैं। इधर, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने न तो नियमावली को रद किया है और न ही आवेदन प्रक्रिया रोकने का कोई आदेश ही झारखंड एकेडमिक काउंसिल को दिया है। ऐसे में 21 अप्रैल से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बताते चलें कि कैबिनेट की बैठक में इस नियमावली में क्षेत्रीय भाषा की सूची में भोजपुरी और अंगिका को शामिल नहीं किए जाने पर दो मंत्रियों राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय ने आपत्ति की थी। इससे पहले पलामू एवं अन्य जिलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल नहीं करने का विरोध हो रहा था। अब कैबिनेट की बैठक में इन भाषाओं को शामिल करने की मांग का भी विरोध हो रहा है। स्पष्ट नियमावली गठित कर ली जाए जेटेट परीक्षा : सुदेश आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो ने स्पष्ट नीति और नियमावली गठित कर जेटेट परीक्षा आयोजित करने की मांग की है। उन्हाेंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि राज्य में वर्ष 2016 से यह पात्रता परीक्षा आयोजित नहीं हुई है, जिससे लाखों बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने जेटेट के अलावा अन्य सभी प्रतियोगिता परीक्षाएं भी समय पर पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करने का अनुरोध किया है।

वर्कशॉप के बाहर भीषण आग: मोगा में कटर की चिंगारी से कई वाहन जले

मोगा. पंजाब के मोगा शहर के बुगीपुरा चौक के निकट शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक वर्कशॉप के बाहर कटर से काम करते समय निकली चिंगारी ने भीषण आग का रूप ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही पलों में वर्कशॉप के बाहर खड़ी कई गाड़ियां इसकी चपेट में आ गईं और देखते ही देखते जलकर राख हो गईं। इस हादसे में लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार बुगीपुरा चौक स्थित मेडिसिटी के पास सिंह मोटर नाम की वर्कशॉप में शनिवार को रोजाना की तरह काम चल रहा था। इसी दौरान एक कर्मचारी पुरानी गाड़ी की मरम्मत के लिए कटर से कटिंग कर रहा था। अचानक कटर से निकली चिंगारी ने पास में मौजूद ज्वलनशील सामान को पकड़ लिया और आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने लिया विक्राल रूप शुरुआत में आग छोटी थी, लेकिन तेज हवा और आसपास खड़ी गाड़ियों के कारण कुछ ही समय में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि वहां मौजूद लोग घबरा गए। अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते आग ने पास खड़ी कई गाड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वे पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। घंटों प्रयास के बाद बुझी आग आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उसे काबू करने में काफी समय लग गया। खबर लिखे जाने तक दमकल कर्मी आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। गनीमत यह रही कि घटना के समय सड़क पर आवाजाही जारी थी, लेकिन समय रहते लोगों ने दूरी बना ली, जिससे कोई बड़ा जानी नुकसान नहीं हुआ। आसपास खड़े अन्य वाहनों को भी लोगों ने हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास किया, जिससे नुकसान कुछ हद तक कम हो सका। प्रशासन द्वारा घटना के कारणों की जांच की जा रही है, वहीं स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद भय का माहौल बना हुआ है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी में मिशन कर्मयोगी के तहत संस्थागत क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन

रायपुर : छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी रायपुर में मिशन कर्मयोगी के तहत संस्थागत क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित 40 विभागों के अधिकारियों की सहभागिता प्रशिक्षण और नवाचार पर हुआ गहन मंथन रायपुर क्षमता विकास आयोग, भारत सरकार के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, रायपुर द्वारा मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत  एक दिवसीय संस्थागत क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ शासन के लगभग 40 विभागों के नोडल अधिकारी, सचिव स्तर के अधिकारी तथा क्षमता विकास आयोग, नई दिल्ली के पर्यवेक्षक ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यशाला को चार थीम आधारित सत्रों में विभाजित किया गया था। उद्घाटन सत्र में सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग अविनाश चंपावत ने कार्यशाला के औचित्य, उद्देश्य एवं लक्ष्यों पर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए क्षमता निर्माण की आवश्यकता और प्रशासनिक दक्षता के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण व्याख्यान दिए गए। आईएएस अधिकारी कार्तिकेय गोयल ने “रोल आधारित क्षमता निर्माण एवं प्रदर्शन” विषय पर अपने विचार साझा किए। प्रशासन अकादमी के महानिदेशक एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुब्रत साहू ने “प्रशिक्षण संस्थानों की शक्ति आधारित भूमिका” पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। ट्रिपल आईटी रायपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर ओ.पी. व्यास ने “AI टेक्नोलॉजी के उपयोग एवं शिक्षण पद्धति” विषय पर नवीन तकनीकी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। वहीं, आई-गॉट कर्मयोगी की स्टेट नोडल ऑफिसर एवं अवर सचिव श्रीमती अंजू सिंह ने राज्य में कैडर आधारित प्रशिक्षण व्यवस्था की जानकारी दी। द्वितीय सत्र में सभी विभागों के नोडल अधिकारियों को चार समूहों में विभाजित कर थीम आधारित प्रेजेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके पश्चात तृतीय सत्र में समूहों द्वारा अपने-अपने प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किए गए, जो इस कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण रहा। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की नोडल अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे ने अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर “संस्थागत प्रशिक्षण की भूमिका, उद्देश्य, लक्ष्य, चुनौतियां एवं समाधान” विषय पर एक समग्र प्रस्तुति दी। इस प्रेजेंटेशन में पर्यटन विभाग के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी प्रमील वर्मा, आईएचएम रायपुर की प्रोफेसर श्रीमती  प्रिया शर्मा, सीनियर मैनेजर आईटी विकेश ऊके सहित महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, मत्स्य, पशुपालन, खेल एवं युवा कल्याण, वाणिज्य एवं उद्योग तथा परिवहन विभाग के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यशाला का समापन चतुर्थ सत्र में प्रशासन अकादमी के महानिदेशक सुब्रत साहू के प्रेरक समापन उद्बोधन के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंत में डायरेक्टर महावर ने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला प्रशासनिक क्षमता विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है, जिससे विभागों के बीच समन्वय, नवाचार और दक्षता को नई दिशा मिलेगी।

मानसून से पहले एक्शन में पंजाब सरकार: नदियों की डीसिल्टिंग के लिए कैबिनेट का अहम फैसला

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य में मानसून के दौरान संभावित बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य की प्रमुख नदियों, सहायक नदियों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई यानी डीसिल्टिंग के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य नदियों के तल में जमा सिल्ट और कचरे को हटाना है, ताकि पानी की निकासी सुचारू रूप से हो सके और आस-पास के इलाकों में जलभराव का खतरा टल सके। खेती और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा नदियों और नालों की समय पर सफाई न होने के कारण हर साल पंजाब के कई जिलों में भारी बारिश के दौरान पानी खेतों और रिहायशी इलाकों में घुस जाता है। इससे फसलों को भारी नुकसान होता है और सार्वजनिक संपत्ति भी क्षतिग्रस्त होती है। कैबिनेट के इस नए फैसले के बाद, सिंचाई और जल संसाधन विभाग को उन संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ गाद जमा होने के कारण बहाव बाधित हो रहा है। इस परियोजना के पूरा होने से किसानों की भूमि को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक का उपयोग डीसिल्टिंग की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने आधुनिक मशीनों और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के उपयोग पर जोर दिया है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सफाई का काम मानसून की दस्तक से पहले अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से की गई डीसिल्टिंग न केवल बाढ़ को रोकेगी, बल्कि नदियों की प्राकृतिक जल संग्रहण क्षमता को भी पुनर्जीवित करेगी। प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम कैबिनेट द्वारा दी गई इस मंजूरी के बाद संबंधित जिलों के प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। स्थानीय निकायों और ड्रेनेज विभाग के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि काम की गुणवत्ता और समय सीमा के साथ कोई समझौता न हो। पंजाब सरकार का यह प्रयास राज्य के बुनियादी ढांचे को आपदाओं के प्रति अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के मुआवजे पर छतरपुर में विरोध, प्रशासन के आश्वासन से खत्म हुआ आंदोलन

छतरपुर  केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले 14 गांवों के ग्रामीणों का आंदोलन फिलहाल थम गया है। मुआवजे और पुनर्वास में अनियमितताओं के आरोपों के बीच छतरपुर जिला प्रशासन ने झुकते हुए दोबारा सर्वे कराने का फैसला लिया है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल द्वारा गठित विशेष संयुक्त टीमों ने  ही जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन और विसंगतियों की जांच शुरू कर दी है। 7 दिन की डेडलाइन प्रशासन ने इस री-सर्वे को कैंपेन मोड में चलाने के निर्देश दिए हैं। संयुक्त टीमों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अगले 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और नए प्रस्ताव पेश करें। इस कदम का उद्देश्य उन पात्र लाभार्थियों को शामिल करना है जो पहले छूट गए थे और उन अपात्रों को बाहर करना है जिन्होंने गलत तरीके से लाभ लेने की कोशिश की है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है: किसी भी पात्र व्यक्ति का हक नहीं छिनना चाहिए और किसी भी अपात्र को सूची में जगह नहीं मिलनी चाहिए। पारदर्शिता ही हमारी प्राथमिकता है। पारदर्शिता के लिए दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों की ड्यूटी मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने एक अनूठी पहल की है। री-सर्वे की जिम्मेदारी उन स्थानीय कर्मचारियों को नहीं दी गई है जिन पर पहले पक्षपात के आरोप लगे थे। इसके बजाय, बिजावर सब-डिवीजन और अन्य तहसीलों के एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों को मैदान में उतारा गया है। ये टीमें स्वतंत्र रूप से वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल और स्कूल रिकॉर्ड के जरिए पात्रता की जांच करेंगी। प्रभावितों के लिए क्या है खास? कुल प्रभावित गांव 14 गांव सर्वे की समय सीमा 7 कार्य दिवस (रिपोर्ट सबमिशन) जांच का आधार वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल, स्कूल रिकॉर्ड टीम का गठन एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों की संयुक्त टीम अतिरिक्त लाभ भूमिहीन परिवारों के लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाएं

तुंगल बना इको-पर्यटन हब: वन मंत्री की पहल से बदली तस्वीर

सुकमा/रायपुर. सुकमा जिले में वन विभाग की एक सराहनीय पहल ने विकास और पुनर्वास की नई मिसाल पेश की है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तैयार किया गया तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया है। सुकमा नगर से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान पहले उपेक्षित और जर्जर था, लेकिन वन विभाग के प्रयासों से इसे एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया। यहाँ बनाए गए आकर्षक टापू और प्राकृतिक वातावरण अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं। इस केंद्र की सबसे खास पहल है “तुंगल नेचर कैफे”, जिसे ‘आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह’ की 10 महिलाएँ संचालित कर रही हैं। इनमें 5 महिलाएँ वे हैं जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 5 महिलाएँ नक्सल हिंसा से प्रभावित रही हैं। इन सभी को जगदलपुर और सुकमा के संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार किया गया है। आज ये महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों का स्वागत कर रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। जो महिलाएँ कभी संघर्ष और भय के माहौल में थीं, वे अब स्वावलंबन और आत्मसम्मान की मिसाल बन गई हैं। इस पर्यटन केंद्र की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 दिसंबर 2025 को शुरू होने के बाद केवल तीन महीनों में, 30 मार्च 2026 तक यहाँ 8 हजार 889 पर्यटक आए। इस दौरान केंद्र ने लगभग 2.92 लाख रूपए की आय भी अर्जित की। पर्यटक यहाँ स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेने के साथ-साथ तुंगल डैम में कयाकिंग, पैडल बोटिंग और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी अनुभव कर रहे हैं। यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। तुंगल इको-पर्यटन केंद्र न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि यह उन महिलाओं के साहस, आत्मविश्वास और वन विभाग की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ मानव विकास को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। बस्तर की बदलती तस्वीर में यह केंद्र एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर उभरा है।

अवैध खनन के खिलाफ मोर्चा: कैबिनेट मंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग, किसानों की बर्बादी पर जताया रोष

लुधियाना.  लुधियाना क्षेत्र में अवैध माइनिंग माफिया की सक्रियता ने स्थानीय किसानों और आम जनता की रातों की नींद उड़ा दी है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर डॉक्टर तेजपाल गिल ने अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध तरीके से की जा रही खुदाई के कारण न केवल उपजाऊ भूमि का क्षरण हो रहा है, बल्कि किसानों की तैयार फसलों को भी भारी क्षति पहुँच रही है। माफिया द्वारा की जाने वाली अनियंत्रित माइनिंग ने कृषि प्रधान क्षेत्र के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। सरकारी संपत्ति को पहुँच रहा भारी नुकसान अवैध खनन का प्रभाव केवल फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हो रहा है। डॉक्टर गिल के अनुसार, भारी वाहनों की आवाजाही और अनियंत्रित खुदाई के कारण आसपास की सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की स्थिति जर्जर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया निजी लाभ के लिए सार्वजनिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, जिसकी भरपाई अंततः आम जनता को ही करनी पड़ती है। यह स्थिति क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है। कैबिनेट मंत्री से सख्त हस्तक्षेप की गुहार समस्या की गंभीरता को देखते हुए, डॉक्टर तेजपाल गिल ने कैबिनेट मंत्री से मुलाकात की और उन्हें विस्तार से जमीनी हकीकत से अवगत कराया। उन्होंने एक औपचारिक मांग पत्र सौंपते हुए आग्रह किया कि इस मामले में तुरंत उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए। उन्होंने मांग की कि जो लोग भी अवैध खनन में लिप्त हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी मशीनों को जब्त किया जाए। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार अवैध माइनिंग को लेकर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाएगी। पर्यावरण और जनहित की रक्षा का संकल्प क्षेत्र में माइनिंग माफिया के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर भी लामबंदी शुरू हो गई है। डॉक्टर गिल ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा और किसानों के हितों को बचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा। यह मांग की गई है कि माइनिंग साइटों की नियमित निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की जाएं ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।

सशक्त होंगी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता: कैबिनेट मंत्री ने सुनीं समस्याएं, प्राथमिकता के आधार पर समाधान का आश्वासन

चंडीगढ़.  पंजाब सरकार समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए लगातार काम कर रही है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्परों का कल्याण विशेष प्राथमिकता है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार इन कार्यकर्ताओं की समस्याओं को हल करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य इन महिला कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण और उनके हक प्रदान करना है। अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान डॉ. बलजीत कौर ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आंगनवाड़ी प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया। इस बैठक में सामाजिक सुरक्षा विभाग की निदेशक शेना अग्रवाल और उप-निदेशक सुमनदीप कौर भी मौजूद रहीं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विभाग की रीढ़ हैं, जो बच्चों और महिलाओं तक सरकारी योजनाओं को पहुँचाने में सेतु का काम करती हैं। प्राथमिकता के आधार पर होगा समस्याओं का निपटारा बैठक में उठाई गई विभिन्न मांगों को सुनने के बाद कैबिनेट मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो मुद्दे प्रशासनिक स्तर पर सुलझाए जा सकते हैं, उन पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि जो मांगें सीधे सरकार के नीतिगत फैसलों से जुड़ी हैं, उन्हें हाल ही में गठित उप-समिति के समक्ष रखा जाएगा। इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए प्राथमिकता के आधार पर समाधान निकाला जाएगा ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहे। समाज की नींव मजबूत करने में अहम योगदान डॉ. बलजीत कौर ने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को बेहतर बनाने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि गाँवों और शहरों में घर-घर जाकर दी जा रही सेवा समाज की मजबूत नींव तैयार करने में सहायक है। पंजाब सरकार कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को बरकरार रखने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आवश्यकतानुसार उचित और बड़े फैसले लेने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।