samacharsecretary.com

AAP का चौंकाने वाला कदम: राघव चड्ढा की सुरक्षा हटाई, पंजाब में सियासी हलचल तेज

चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी (आप) और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया और अब पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा भी वापस ले ली है। इस घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चंडीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुआई वाली पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा को दी गई पंजाब पुलिस की सुरक्षा हटा दी है। गौरतलब है कि चड्ढा को पंजाब के सह-प्रभारी और राज्यसभा सांसद होने के नाते यह सुरक्षा मिली हुई थी। सुरक्षा वापसी को पार्टी के अंदर बढ़ती दूरी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले 2 अप्रैल को आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को भी सूचित कर दिया कि अब चड्ढा को पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। इस फैसले के बाद से ही चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी। राघव चड्ढा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि उन्हें “खामोश” करने की कोशिश की गई है, लेकिन वे हार मानने वालों में नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उनकी खामोशी को कमजोरी न समझा जाए। इसके जवाब में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज, आतिशी और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान खुलकर सामने आए और चड्ढा पर पार्टी लाइन से हटने के आरोप लगाए। इसी बीच दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया कि केंद्र सरकार राघव चड्ढा को जेड प्लस सुरक्षा देने की तैयारी में है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केंद्र सरकार चड्ढा पर इतनी मेहरबान क्यों दिख रही है। हालांकि, चड्ढा के करीबी सूत्रों का कहना है कि अभी उन्हें केंद्र से कोई सुरक्षा नहीं मिली है, लेकिन जल्द ऐसी संभावना बन सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपनेता पद से हटाने और सुरक्षा वापस लेने जैसे फैसले पार्टी के भीतर गहराते मतभेदों की ओर इशारा करते हैं। वहीं, केंद्र से संभावित सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने इस पूरे विवाद को और पेचीदा बना दिया है। फिलहाल, राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती दूरी ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज हो सकता है।

रणधीर वर्मा चौक पर प्रदर्शन, निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ विरोध

 धनबाद धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर झारखंड अभिभावक महासंघ ने एकदिवसीय धरना दिया। धरना मे झारखंड अभिभावक महासंघ के अध्यक्ष पप्पू सिंह ने छौ घंटे का उपवास धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर झारखंड अभिभावक महासंघ के बैनर तले एकदिवसीय धरना का आयोजन किया गया. इस धरना का मुख्य मुद्दा निजी विद्यालयों द्वारा की जा रही अवैध शुल्क वसूली और न्यायालय तथा न्यायाधिकरण के आदेशों की अनदेखी था. बड़ी संख्या में अभिभावक इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अपनी नाराजगी जाहिर की. महासंघ अध्यक्ष ने रखा छह घंटे का उपवास धरना के दौरान महासंघ के अध्यक्ष पप्पू सिंह ने छह घंटे का उपवास भी रखा. उन्होंने कहा कि अभिभावकों के हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उनके उपवास को बाद में झारखंड ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सदस्य श्वेता किन्नर ने जूस पिलाकर समाप्त कराया. अवैध शुल्क वसूली पर गंभीर आरोप अभिभावकों का आरोप है कि जिले के अधिकांश निजी विद्यालय झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण के आदेशों का उल्लंघन कर मनमानी फीस वसूल रहे हैं. स्कूल “री-एडमिशन” के नाम पर विभिन्न प्रकार के शुल्क जैसे परीक्षा शुल्क, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क, लाइब्रेरी शुल्क और खेलकूद शुल्क के रूप में भारी रकम वसूल रहे हैं, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है. जबरन किताब और सामान खरीदने का दबाव धरना में यह भी आरोप लगाया गया कि कई विद्यालय अभिभावकों को चिन्हित दुकानों से ही किताबें, कॉपियां और स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर करते हैं. इतना ही नहीं, जूते, मोजे और अन्य सामग्री भी तय दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जाता है. यह प्रथा न केवल अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालती है, बल्कि नियमों का भी उल्लंघन है. कानूनी प्रावधानों की अनदेखी अभिभावकों ने बताया कि यह सभी गतिविधियां झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम, 2017 के खिलाफ हैं. साथ ही शिकायत वाद संख्या 01/2005, एक्जीक्यूशन केस 1/2005 और शिकायत वाद संख्या 8/2008 में दिए गए निर्देशों की भी अवहेलना हो रही है. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें झारखंड अभिभावक महासंघ ने जिला प्रशासन से कई मांगें रखीं. इनमें निजी विद्यालयों की शुल्क संरचना की जांच, अवैध वसूली पर रोक, किताब-कॉपी और अन्य सामग्री की जबरन खरीद पर प्रतिबंध और दोषी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शामिल है. महासंघ का कहना है कि इन मांगों को जल्द पूरा किया जाना चाहिए. चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी धरना के दौरान महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि चार दिनों के भीतर जिला प्रशासन अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन के साथ बैठक कर कोई समाधान नहीं निकालता है, तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो यह आंदोलन व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. सैकड़ों अभिभावकों की रही भागीदारी इस धरना में महासंघ के महासचिव मनोज मिश्रा, वरीय उपाध्यक्ष मुकेश पाण्डेय, कोषाध्यक्ष प्रेम ठाकुर, मीडिया प्रभारी रतिलाल महतो सहित कई पदाधिकारी और सैकड़ों अभिभावक शामिल हुए. सभी ने एकजुट होकर निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई. इस धरना-प्रदर्शन में दिलीप सिंह, उदय प्रताप सिंह, बॉबी पाण्डेय, पूजा रत्नाकर, पिंकी सिंह, सोहराब खान, जीतेन्द्र अग्रवाल, रवि कुमार, टिंकू सरकार, मिहिर दत्ता, मगधेश कुमार, रविंदरनाथ सोनार, अभिषेक सिंह, भगवान दास शर्मा, तारकेश्वर तिवारी, रोबिन धिवर, श्याम पाण्डेय, मंटू सिंह, गणेश चौरसिया, प्रभात सूरौलिया, अजय वर्मा, शालिनी मिश्रा, प्रवीण गोधा, अविनाश पाण्डेय, कुल्लू चौधरी, प्रेम पाण्डेय, धीरेन्दर ब्रह्मचारी, विनय अग्रवाल, विक्की जायसवाल, श्रीकांत रक्षित, कन्हैया कुमार, सुकुमार कुम्भकार, सचिन ठाकुर, सत्येंदर पाण्डेय, राज गुप्ता,सुरेश यादव आदि भी उपस्थित थे.

किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों को सोलर पम्प उपयोग के लिए करें प्रोत्साहित योजनाओं को समयबद्ध कर लाएं परिणाम किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने के लिए संभाग एवं जिला स्तर पर हों कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की योजनाओं की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को निर्बाध रूप से सस्ती बिजली सुलभ कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इस काम केलिए सरकार किसानों को हर जरूरी मदद देने को तैयार है। किसानों को सस्ती बिजली मिलेगी, तो वे अपना उत्पादन भी बढ़ा सकेंगे और प्रदेश की प्रगति में भी योगदान दे सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप ऊर्जा प्राप्ति के लिए उन्हें स्वयं ऊर्जा उत्पादक बनाया जाए। इसके लिए किसानों को हरित ऊर्जा उत्पादन से जोड़ा जाए। ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाकर ही हम किसानों का जीवन स्तर बेहतर बना सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों को सोलर पम्प का उपयोग करने के लिए हर तरीके से प्रोत्साहित किया जाए। किसानों को जो इससे जुड़ना चाहते हैं, विभाग उनका हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन भी करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की प्रचलित योजनाओं की अद्यतन प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि राज्य के हित में किसानों और नागरिकों सभी को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य के लिए समर्पित और फोकस्ड होकर आगे बढ़ें। किसानों को सोलर पम्प से जोड़ने के साथ-साथ प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की प्रगति में भी तेजी लाएं। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 2 लाख से अधिक किसानों को सोलर पम्प से जोड़ने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ें। विभाग अपनी योजनाओं के वार्षिक लक्ष्यों की समीक्षा करें और नई जरूरतों के मुताबिक इन लक्ष्यों में वृद्धि करें, ताकि कम समय में अधिकतम लोगों को लाभ मिले। इसके लिए विभाग अपनी योजनाओं को टाइम फ्रेम में लेकर आएं और तय समय सीमा में ही लक्ष्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। इससे तेज और अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। निकाय पदाधिकारियों के साथ भोपाल में होगा एक दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी नगरीयनिकाय कचरा बेचकर और प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना (रूफ टॉप स्कीम) में तेजी से प्रगति लाकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। नगरीय निकायों के पदाधिकारियों एवं अधिकारियों को इस विषय में प्रशिक्षण देने के लिए भोपाल में एक दिन का उन्मुखीकरण कार्यक्रम किया जाए। यह कार्यक्रम जल्दी ही किया जाए, ताकि निकायों को काम करने के लिए अधिकतम समय मिल सके। राज्य के ऊर्जा हितों का रखें विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तरप्रदेश सरकार के साथ मिलकर मुरैना में 2 हजार मेगावॉट (2 गीगावॉट) की अल्ट्रा मेगा रिन्यूएबल एनर्जी पावर पार्क की स्थापना की प्रगति की जानकारी लेकर कहा कि इस मेगा परियोजना में राज्य के ऊर्जा हितों का विशेष ध्यान रखा जाए। अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मनु श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा मात्र पीक पीरियड में ही ग्रीन एनर्जी सप्लाय की मंशा व्यक्त की गई है। इस संबंध में उत्तरप्रदेश सरकार के वरिष्ठतम विभागीय अधिकारियों के साथ समुचित समन्वय किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) प्रोडक्शन के लिए तय किए गए लक्ष्यों को और भी परिशोधित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना (कुसुम बी) में अब तक 27 हजार 100 सोलर पम्प स्थापित किए जा चुके हैं। अगले दो साल में 4 लाख पम्पों को सौर ऊर्जीकृत करने का लक्ष्य है। इसके क्रियान्वयन के लिए विभाग ने 36 इकाईयां चुन ली हैं। इस योजना के पहले चरण में विभाग को एक लाख आवेदन मिल चुके हैं। अपर मुख्य सचिव श्रीवास्तव ने बताया कि सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना (कुसुम सी) के तहत विभाग ने लगभग 10 लाख किसानों को सौर ऊर्जीकरण से जुड़ने के लिए 493 सब स्टेशनों के जरिए किसानों को दिन के समय भी बिजली उपलब्ध कराने का बड़ा लक्ष्य लिया है। अब तक 2.50 लाख पम्प इंस्टाल कर दिये गये हैं। विभाग का लक्ष्य किसानों को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से समर्थ बनाना भी है। सौर ऊर्जीकरण के लिए विभाग ने मासिक प्लान भी तैयार कर लिया है। रूफ टॉप स्कीम पर विभाग ने विशेष ध्यान केन्द्रित किया है। बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा एवं मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, वित्त सचिव लोकेश जाटव, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैस सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

आशा भोंसले को मोहन यादव सरकार की बड़ी श्रद्धांजलि, मध्य प्रदेश सरकार शुरू करेगी राष्ट्रीय सम्मान

भोपाल भारतीय संगीत के स्वर्णिम युग की एक और महान आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में सुर सम्राज्ञी आशा भोंसले का निधन हो गया। मध्य प्रदेश सरकार ने इस महान हस्ती की विरासत को संजोने और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए उनके नाम पर एक विशेष 'राष्ट्रीय पुरस्कार' शुरू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। लता मंगेशकर के बाद अब आशा भोंसले के नाम पर सम्मान मध्य प्रदेश के संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ इस प्रस्ताव पर अंतिम चर्चा के बाद पुरस्कार की रूपरेखा तय की जाएगी। मंत्री लोधी के अनुसार, 'राज्य में पहले से ही लता मंगेशकर के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाता है। अब उनकी छोटी बहन और संगीत जगत की दिग्गज आशा भोंसले के नाम पर पुरस्कार स्थापित करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा।' प्रस्तावित आशा भोंसले एक्सीलेंस अवॉर्ड का उद्देश्य न केवल स्थापित कलाकारों को सम्मानित करना होगा, बल्कि इसके जरिए उभरते हुए गायकों को नकद पुरस्कार, प्रदर्शन के अवसर और मेंटरशिप भी प्रदान की जाएगी। यह कदम मध्य प्रदेश सरकार के उस अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य की सांस्कृतिक विरासत और संगीत प्रतिभाओं को वैश्विक मंच दिया जा रहा है। आठ दशकों का सफर और 12,000 गीतों का जादू आशा भोंसले का संगीत सफर किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। 1943 में मात्र 10 साल की उम्र से गायकी शुरू करने वाली आशा ताई ने आठ दशकों के करियर में कई भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जिसके लिए उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। उनकी बहुमुखी आवाज ने फिल्मी गीतों से लेकर गजल, भजन और पॉप संगीत तक, हर विधा को जीवंत किया। साल 2000 में उन्हें दादा साहब फाल्के और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। आशा भोंसले केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की एक जीवंत संस्था थीं। उनके नाम पर पुरस्कार शुरू करना मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान न केवल उनकी यादों को संजोएगा, बल्कि संगीत की दुनिया में नए सितारों को चमकने का मौका देगा। धर्मेंद्र सिंह लोधी, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, मध्य प्रदेश अधिकारियों का मानना है कि यह पुरस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनेगा। जिस तरह आशा ताई ने अपनी मेहनत से एक अलग पहचान बनाई, यह पुरस्कार भी संगीत की नई पौध को उसी ऊंचाई तक पहुंचने का हौसला देगा। हालांकि पुरस्कार की शुरुआत की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन इस पहल ने देशभर के संगीत प्रेमियों के बीच एक सकारात्मक लहर पैदा कर दी है।  

मुख्यमंत्री साय ने कहा: सहकार से समृद्धि के संकल्प को साकार करेगा नवगठित पैक्स

सहकार से समृद्धि के संकल्प को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होंगे नवगठित पैक्स: मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का किया वर्चुअल शुभारंभ प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर हुई 2 हजार 573 किसानों को आसानी से मिलेगी खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण की सुविधा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से प्रदेश की नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया।उन्होंने इसे प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह कदम ऐतिहासिक है।                 मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नई समितियों के शुरू होने से अब पूरे प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 2 हजार 573 हो गई है। उन्होंने प्रदेश के अन्नदाता किसानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक और सहकारिता के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दे रही है, ताकि गांव और किसान समृद्ध बन सकें। उन्होंने बताया कि अब पैक्स समितियां बहुउद्देश्यीय सोसायटी के रूप में कार्य करेंगी, जिससे किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं उनके गांव के पास ही उपलब्ध होंगी। साथ ही धान बेचने की प्रक्रिया भी आसान होगी और किसान अपनी नजदीकी समिति में ही धान बेच सकेंगे।            मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले से कार्यरत 2058 समितियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए कंप्यूटरीकृत किया गया है और इनमें माइक्रो एटीएम भी लगाए गए हैं, जिनसे किसान 20 हजार रुपये तक की राशि निकाल सकते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नवगठित 515 समितियों में से 197 समितियां आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित की गई हैं, जिससे दूर-दराज के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये समितियां केवल खाद-बीज वितरण तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि भविष्य में दुग्ध उत्पादन, मछली पालन जैसे सहायक कृषि गतिविधियों से भी जुड़ेंगी।  साथ ही समितियों में लोक सेवा केंद्र भी शुरू किए जाएंगे, जहां एक ही स्थान पर 25 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे इन समितियों के सदस्य बनकर इसका अधिकतम लाभ उठाएं और इनके संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाएं।              इस अवसर पर सहकारिता मंत्री केदार कश्यप वर्चुअल उपस्थित रहे, साथ ही कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत तथा सचिव सहकारिता सी.आर. प्रसन्ना, सहकारिता विभाग के प्रबंध संचालक के.एन. कांडे सहित विभिन्न जिलों से लगभग 2500 जनप्रतिनिधिगण, किसान और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तर प्रदेश में टाटा समूह की उपस्थिति दोगुनी होगी, राज्य बनेगा बड़ा निर्यात हब: एन. चंद्रशेखरन

उत्तर प्रदेश में टाटा समूह की उपस्थिति होगी दोगुनी, राज्य बनेगा बड़ा निर्यात हब: एन. चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन बोले- यूपी में अपार संभावनाएं, अगले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ेगा निवेश और रोजगार लखनऊ  टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के सबसे संभावनाशील औद्योगिक राज्यों में एक है और आने वाले वर्षों में यहां टाटा समूह की उपस्थिति दोगुनी से अधिक होने जा रही है। राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत नेतृत्व के कारण उद्योगों के विस्तार के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। एन चंद्रशेखरन ने ये बातें राजधानी में टाटा मोटर्स की 10 लाखवीं बस के फ्लैग ऑफ अवसर पर कहीं। यूपी बनेगा देश का प्रमुख ग्रोथ इंजन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि यूपी में तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत नीतिगत समर्थन और निवेश के अनुकूल वातावरण इसे औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बना रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास की गति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। राज्य सरकार की नीतियों और सहयोग के कारण उद्योगों को विस्तार का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मौजूद अपार संभावनाएं, बढ़ती आर्थिक गतिविधियां और युवा कार्यबल इसे देश का प्रमुख ग्रोथ इंजन बनाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में प्रदेश न केवल औद्योगिक, बल्कि तकनीकी और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छुएगा। अगले पांच वर्षों में 20 लाख वाहनों के उत्पादन का लक्ष्य उन्होंने कहा कि लखनऊ स्थित टाटा प्लांट केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि सप्लायर्स, पार्टनर्स और स्थानीय समुदाय के साथ विकसित एक सशक्त इकोसिस्टम है, जो टाटा समूह और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच विश्वास और साझेदारी का प्रतीक है। 34 वर्षों में 10 लाख वाहनों के उत्पादन का यह माइलस्टोन इस मजबूत संबंध और निरंतर विकास यात्रा को दर्शाता है। एन चंद्रशेखरन ने विश्वास जताया कि जिस प्रकार अब तक की प्रगति हुई है, अगले पांच वर्षों में 20 लाख वाहनों के उत्पादन का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले दशकों में वैश्विक स्तर पर सबसे तेज गति से बढ़ेगी और उत्तर प्रदेश इस विकास यात्रा में अग्रणी भूमिका निभाएगा। टीसीएस की यूपी यूनिट्स में अगले 5 वर्षों में होंगे 40 हजार प्रोफेशनल्स एन चंद्रशेखरन ने बताया कि टाटा मोटर्स का पोर्टफोलियो तेजी से विस्तृत हो रहा है, जिसमें पारंपरिक डीजल वाहनों के साथ-साथ सीएनजी, इलेक्ट्रिक और भविष्य में हाइड्रोजन आधारित वाहन भी शामिल होंगे। इससे उत्तर प्रदेश न केवल देश के लिए, बल्कि वैश्विक बाजार के लिए भी एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र बन सकता है। टाटा समूह की अन्य कंपनियों के विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के वर्तमान में लगभग 20,000 प्रोफेशनल्स लखनऊ, नोएडा और वाराणसी में कार्यरत हैं, जिनकी संख्या अगले पांच वर्षों में 40,000 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा पावर, डिफेंस, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी समूह का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। मथुरा व गोरखपुर में भी सक्रिय पहल, सीएम का जताया आभार उन्होंने कहा कि टाटा समूह केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक क्षेत्रों में भी सक्रिय योगदान दे रहा है। जल संरक्षण, स्किल डेवलपमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में पहल करते हुए समूह मथुरा में जल स्रोतों के पुनर्जीवन और गोरखपुर में एआई टेक्नोलॉजी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना जैसे कार्य कर रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के सहयोग और दूरदर्शी नीतियों के कारण ही यह विकास संभव हो पाया है।

डीएम गौतमबुद्धनगर की अध्यक्षता में औद्योगिक इकाइयों की आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकारों की बैठक आयोजित

डीएम गौतमबुद्धनगर की अध्यक्षता में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों की आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकारों की बैठक कार्मिक या श्रमिक के उपद्रवी व्यवहार पर संबंधित एजेंसी होगी ब्लैक लिस्ट, की जाएगी लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई समस्त संविदाकार शासन की गाइडलाइंस के अनुसार निर्धारित वेतन देना करें सुनिश्चित राज्य सरकार श्रमिकों एवं नियोजकों दोनों के हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध  गौतमबुद्धनगर जनपद में शासन की गाइडलाइंस का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने एवं औद्योगिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों की आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकारों के साथ बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकार उद्योग को चलाने तथा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सभी आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकारों की जिम्मेदारी है कि वे अपने कार्मिकों व श्रमिकों समेत शांति व्यवस्था बनाए रखें। डीएम ने निर्देश दिया कि सभी संविदाकार शासन की गाइडलाइंस का शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें। अगर किसी भी एजेंसी द्वारा या एजेंसी के कार्मिक/श्रमिक द्वारा उपद्रवी व्यवहार किया जाएगा तो उसकी जिम्मेदारी एजेंसी की भी होगी। ऐसे में उस एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करते हुए एजेंसी का लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है ।   जिलाधिकारी ने राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का उल्लेख करते हुए बताया कि अकुशल श्रमिक के लिए 13,690, अर्धकुशल श्रमिक के लिए 15,059 तथा कुशल श्रमिक के लिए 16,868 रुपए प्रतिमाह वेतन निर्धारित किया गया है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संविदाकार इन वेतन मानकों का पूर्ण रूप से अनुपालन सुनिश्चित करें एवं श्रमिक के बैंक खातों में पूर्ण वेतन हस्तांतरित करें। किसी भी प्रकार के नियमों का उलंघन व श्रमिकों का शोषण करने पर सख्त कार्रवाई होगी। जिलाधिकारी ने कहा कि उद्योग, श्रमिक एवं नियोजक तीनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उद्योगों का सुचारु संचालन रोजगार के अवसरों को सुरक्षित रखता है, वहीं नियोजकों की स्थिरता से श्रमिकों का भविष्य भी सुनिश्चित होता है। यदि औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव सभी पक्षों के साथ-साथ प्रदेश के समग्र विकास पर पड़ता है।   डीएम ने सभी से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना पर ध्यान न दें और औद्योगिक शांति बनाए रखते हुए आपसी सहयोग एवं विश्वास के साथ कार्य करें। जिलाधिकारी ने यह भी आश्वस्त किया कि राज्य सरकार श्रमिकों एवं नियोजकों दोनों के हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और किसी भी समस्या के समाधान हेतु प्रशासन तत्परता से कार्य करेगा। बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त राजस्व अतुल कुमार, डीडी फैक्ट्री बृजेश, संबंधित विभागों के अधिकारीगण एवं विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के संविदाकार उपस्थित रहे।

नई एनडीए सरकार में बड़ा फैसला: गृह विभाग सीएम सम्राट चौधरी के पास

पटना बिहार का मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने विभागों का बंटवारा कर दिया है। सीएम सम्राट ने अपने पास 29 विभाग अपने पास रखे हैं। वहीं, जेडीयू के दोनों डिप्टी सीएम विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव के बीच 18 विभाग बांटे हैं। विजय को 10, तो बिजेंद्र को 8 विभागों की जिम्मेदारी मिली है। गृह विभाग सीएम ने अपने पास ही रखा है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) अध्यक्ष नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद एनडीए की नई सरकार का गठन बुधवार को हुआ। सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री और जेडीयू के विजय चौधरी एवं बिजेंद्र यादव ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। फिलहाल इन्हीं तीनों नेताओं के बीच विभागों का बंटवारा किया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नए मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया जाएगा, इसके बाद नए सिरे से विभागों का बंटवारा होगा। मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम के बीच फिलहाल विभागों का बंटवारा अस्थायी तौर पर किया गया है। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ दिनों का समय लग सकता है। तब तक सम्राट, विजय एवं बिजेंद्र ही व्यवस्था संभालेंगे। इस तरह हुआ विभागों का बंटवारा सीएम सम्राट ने अपने पास जो विभाग रखे हैं, उनमें अधिकतर वही हैं, जो पूर्ववर्ती नीतीश सरकार में भाजपा कोटे के मंत्रियों के पास थे। इसके साथ ही, लोजपा-आर, हम और रालोमो के पास जो विभाग थे वो भी सीएम ने अपने पास रखे हैं। वहीं, नीतीश सरकार के दौरान जो विभाग जेडीयू के मंत्रियों के पास थे, उनका बंटवारा दोनों नए डिप्टी सीएम के बीच किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास ये विभाग-     सामान्य प्रशासन     गृह     मंत्रिमंडल सचिवालय     निगरानी     निर्वाचन     राजस्व एवं भूमि सुधार     खान एवं भू-तत्व     नगर विकास एवं आवास     स्वास्थ्य     विधि     उद्योग     पथ निर्माण     कृषि     लघु जल संसाधन     श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण     युवा, रोजगार एवं कौशल विकास     पर्यटन     कला एवं संस्कृति     डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन     आपदा प्रबंधन     पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण     अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण     सूचना प्रावैधिकी     खेल     सहकारिता     पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन     गन्ना उद्योग     लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण     पंचायती राज     (ऐसे सभी विभाग जो किसी को आवंटित नहीं हैं) डिप्टी सीएम विजय चौधरी को मिले ये विभाग-     जल संसाधन     संसदीय कार्य     सूचना एवं जनसंपर्क     भवन निर्माण     अल्पसंख्यक कल्याण     शिक्षा     विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा     ग्रामीण विकास     परिवहन     उच्च शिक्षा डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव को इन विभागों की जिम्मेदारी-     ऊर्जा     योजना एवं विकास     मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन     वित्त     वाणिज्य-कर     समाज कल्याण     खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण     ग्रामीण कार्य

सतना जिले के मानेंद्र केवट ने रचा इतिहास, प्रदेश मेरिट में तीसरा स्थान

सतना  सतना जिले के रामपुर बाघेलान स्थित सांदीपनि शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र मानेंद्र केवट ने एमपी बोर्ड हायर सेकेंडरी परीक्षा 2026 में गणित समूह में प्रदेश मेरिट सूची में तीसरा स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने 500 में से 490 अंक हासिल कर शानदार प्रदर्शन किया। उनकी इस उपलब्धि से विद्यालय, परिवार और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। शिक्षकों ने इसे मेहनत और लगन का परिणाम बताया, वहीं परिजनों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

धर्म परिवर्तन से जनसेवा तक, साध्वी बउक दास की प्रेरक कहानी

गोपालगंज बिहार के गोपालगंज से श्रद्धा, संघर्ष और जनसेवा की एक अनोखी कहानी सामने आई है, जो सांप्रदायिक सौहार्द और समर्पण की मिसाल बन गई है। कभी मुस्लिम परिवार में जन्मी आसमा खातून आज बउक दास के नाम से जानी जाती हैं। उनका जीवन धर्म परिवर्तन, निजी संघर्ष और समाजसेवा की ऐसी यात्रा है, जिसने उन्हें क्षेत्र में एक साध्वी और जननेता के रूप में पहचान दिलाई है। आसमा खातून से बउक दास बनने की यात्रा पंचदेवरी प्रखंड के डेरवा गांव के एक मुस्लिम परिवार में जन्मी आसमा खातून का बचपन मदरसे और नमाज के बीच बीता। लेकिन बचपन से ही उन्हें मंदिर की घंटियों की आवाज आकर्षित करती थी। परिवार और धर्मगुरुओं के विरोध के बावजूद उनका झुकाव सनातन धर्म की ओर बढ़ता गया। करीब 30 साल पहले उन्होंने अपने अंतर्मन की आवाज सुनकर घर छोड़ दिया। बाद में उनकी मुलाकात फुलवरिया प्रखंड के मदरवानी गांव निवासी रामाकांत यादव से हुई, जिनसे प्रेम विवाह के बाद वे रामांती बन गईं। लेकिन यह सुखद समय अधिक लंबा नहीं रहा। रामाकांत की जेल में मृत्यु हो गई और परिवार ने भी उनका साथ छोड़ दिया। इसके बाद रामांती ने अकेले ही पति का अंतिम संस्कार किया और झरही नदी के किनारे जंगल में जीवन शुरू कर दिया। इसी एकांत और भक्ति के कारण लोगों ने उन्हें बउक दास नाम दिया। जनसेवा के लिए किया अन्न का त्याग बउक दास केवल साध्वी नहीं, बल्कि जनसमस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने वाली सामाजिक योद्धा भी हैं। करीब दो दशक पहले इलाके में आवागमन के लिए सिर्फ चचरी पुल था। लोगों की परेशानी देखकर उन्होंने झरही नदी में मचान बनाकर एक साल तक जल सत्याग्रह किया। उनके आंदोलन के बाद सरकार ने पुल का निर्माण कराया। लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। पुल बन गया, लेकिन संपर्क मार्ग कच्चा रह गया, जिससे बारिश में लोगों को भारी परेशानी होती थी। इसके विरोध में उन्होंने छह साल तक अन्न का त्याग कर दिया। उनकी शर्त थी कि जब तक पक्की सड़क नहीं बनेगी, वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगी। लंबे उपवास से उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। बाद में सामाजिक लोगों की मदद से एक साल पहले गड्ढों में मिट्टी भरवाई गई, जिसके बाद उन्होंने फिर से अन्न ग्रहण किया। पशु-पक्षियों से गहरा लगाव, बना ‘भाव आश्रम’ बउक दास ने जिस जंगल को साफ कर अपनी कुटिया बनाई, वहां अब एक शिव मंदिर और भाव आश्रम स्थापित है। उनकी आध्यात्मिकता का आलम यह है कि उनकी आवाज पर कौओं और अन्य पक्षियों का झुंड उनके पास आ जाता है। वे रोज अपने हाथों से पक्षियों को दाना खिलाती हैं। स्थानीय लोग उन्हें सिद्ध संत मानते हैं और उनके अनुयायी बन चुके हैं। बउक दास का बयान उन्होंने कहा, “मेरा जन्म ईश्वर की भक्ति के लिए हुआ था। भले ही मैं मुस्लिम परिवार में पैदा हुई, लेकिन मेरी आत्मा हमेशा सनातन की ओर रही। अब मेरा जीवन समाज और महादेव के चरणों में समर्पित है।” स्थानीय लोगों का कहना है कि एक महिला जिसने अपना पूरा जीवन समाजसेवा में लगा दिया है, आज भी अपने स्वास्थ्य और मूलभूत मांगों को लेकर संघर्ष कर रही है। लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि बउक दास की सेहत और उनकी जायज मांगों पर तुरंत ध्यान दिया जाए।