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राघव चड्ढा को मिली Z कैटेगरी सुरक्षा, पंजाब ने छीनी, केंद्र ने दी

चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पंजाब सरकार द्वारा दी गई जेड प्लस (Z+) कैटेगरी की सुरक्षा वापस ले ली गई। इस खबर के सामने आने के कुछ ही देर बाद केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें सुरक्षा मुहैया करा दी गई। मौजूदा खतरे की आशंका के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा उन्हें जेड (Z) श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। यह सुरक्षा दिल्ली और पंजाब, दोनों जगहों पर उपलब्ध होगी। उनकी सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों को तैनात किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जब तक औपचारिकता पूरी नहीं कर ली जाती है, तब तक दिल्ली पुलिस को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। आपको बता दें कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने पिछले सप्ताह ही राघव चड्ढा का सुरक्षा घेरा हटा लिया था। पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद उन्हें राज्य सरकार की ओर से सबसे उच्च स्तर की Z+ सुरक्षा प्रदान की गई थी। राघव चड्ढा और 'आप' नेतृत्व के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया। इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चड्ढा ने कहा था कि उन्हें "खामोश किया गया है, पराजित नहीं किया गया।" ‘आवाज उठाई, कीमत चुकाई’ आपको बता दें कि हाल ही में राघव चड्ढा ने इंस्टाग्राम पर ''आवाज उठाई, कीमत चुकाई'' शीर्षक वाला एक वीडियो शेयर किया था। यह वीडियो संसद में उनके द्वारा विभिन्न मुद्दे उठाते हुए दिखाने वाली कई 'क्लिप' का संकलन है। चड्ढा ने पोस्ट में कहा, ''पूरे सम्मान के साथ, मैं मेरे संसदीय प्रदर्शन पर सवाल उठाने वालों से यही कहूंगा कि मेरा काम ही बोलेगा।'' आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से दो अप्रैल को हटा दिया था। पार्टी ने उन पर आरोप लगाया है कि वह संसद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र के खिलाफ मुखर होकर बोलने से बचते रहे और इसके बजाय अपने प्रचार-प्रसार में लगे रहे। चड्ढा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए पार्टी के आरोपों को 'झूठ करार दिया और कहा कि वह संसद में लोगों के मुद्दे उठाने गए थे, हंगामा करने नहीं। राज्यसभा में 'आप' के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद से चड्ढा सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट साझा कर चुके हैं। इससे यह साफ संकेत गया है कि वह उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे।

खेल नर्सरियों की संख्या में बढ़ोतरी, युवाओं का रुझान नए खेलों की ओर

 चंडीगढ़ हरियाणा लंबे समय से कुश्ती और कबड्डी खेल के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब प्रदेश में खेलों का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है और खिलाड़ियों की एक नई पौध तैयार हो रही है। नए सत्र 2026-27 के लिए खेल विभाग की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक खेलों के साथ-साथ फुटबॉल और वॉलीबाॅल का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इन खेलों की नर्सरियों की संख्या भी लगातार बढ़ाई जा रही है और युवा खिलाड़ियों का रुझान इनकी ओर साफ दिखाई दे रहा है। प्रत्येक नर्सरी में 25 खिलाड़ी खेलते हैं। प्रदेशभर में इस बार 1063 खेल नर्सरियां अलॉट की गई हैं, जो पिछले साल की 976 नर्सरियों से 87 ज्यादा हैं। लेकिन सरकार की ओर से कुल 2 हजार नर्सरियों के संचालित करवाने का लक्ष्य है। इन नर्सरियों के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही ट्रेनिंग दी जाएगी। अब भी कबड्डी 148 नर्सरियों के साथ टॉप पर है, लेकिन फुटबॉल (69) और वॉलीबाॅल (64) तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। कुश्ती की 74 नर्सरियां हैं। अन्य खेलों की बढ़ती संख्या बताती है कि युवाओं की पसंद और नजरिया अब बदल रहा है। फुटबॉल-वॉलीबाॅल के क्रेज बढ़ने के मुख्य वजह हरियाणा में फुटबॉल कोच हरविंदर सिंह के मुताबिक इस बदलाव के पीछे सबसे पहली वजह प्रदेश के स्कूल और कॉलेज स्तर पर इन खेलों को ज्यादा बढ़ावा मिलना है। गांवों में भी अब फुटबॉल और वॉलीबाॅल के मैदान आसानी से तैयार हो जाते हैं। इससे बच्चों की भागीदारी बढ़ी है। इसी तरह दूसरी वजह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के लिए तेजी से बढ़ते मौके भी है। फुटबॉल और वॉलीबाॅल में करियर के विकल्प बढ़ने से युवा इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया और टीवी पर बड़े टूर्नामेंट देखने से भी बच्चों में इन खेलों के प्रति उत्साह बढ़ा है। वहीं, तीसरी अहम वजह इन खेलों में कम खर्च और आसान संसाधन है, जहां कुश्ती के लिए अखाड़ा और विशेष व्यवस्था चाहिए, इसी तरह दूसरे खेलों में संसाधनों की व्यवस्था पर भारी खर्च है। वहीं फुटबॉल और वॉलीबाॅल कम संसाधनों में भी खेले जा सकते हैं। जिलों में भी दिखा नया ट्रेंड खेल नर्सरियों के आंकड़ों में भी यह बदलाव साफ नजर आता है। हिसार 119 नर्सरियों के साथ सबसे बड़ा स्पोर्ट्स हब बनकर उभरा है, जबकि जींद 108 के साथ दूसरे स्थान पर है। कैथल, भिवानी, करनाल और रोहतक जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नर्सरियां अलॉट की गई हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला अभी पीछे हैं, जबकि सबसे पीछे नूंह है। इन जिलों में इतनी नर्सरियां अलॉट हिसार –     119 जीद –        108 कैथल –        82 भिवानी –      67 करनाल –     75 रोहतक –     65 सोनीपत –     65 झज्जर –        28 यमुनानगर –   28 दादरी –         25 अंबाला –        22 पंचकूला –      18 नूंह –             12  

अजमेर में पानी सप्लाई बहाल, कई इलाकों को राहत

अजमेर अजमेर में बीसलपुर पाइपलाइन मरम्मत का काम पूरा हो गया. 30 घंटे का शटडाउन खत्‍म हो गया. कई इलाकों में सप्लाई बहाल हो गई. कल तक जलापूर्ति पूरी तरह पटरी पर आने की उम्मीद है. अब लोगों को पानी की समस्‍या नहीं होगी. पहले की तरह से पानी की सप्‍लाई शुरू हो जाएगी. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने बीसलपुर-अजमेर पेयजल परियोजना के अंतर्गत 30 घंटे का शटडाउन लिया था. 30 घंटे का शटडाउन अजमेर में 12 अप्रैल रात 12 बजे से 14 अप्रैल सुबह 6 बजे तक 30 घंटे पेयजल सप्लाई बंद थी. इस दौरान 1600 एमएम और 1500 एमएम पाइपलाइन पर जरूरी तकनीकी कार्य किए गए. इन इलाको में सप्लाई बाधित शटडाउन के कारण अजमेर शहर के साथ-साथ ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद, सरवाड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित रही. शहर के प्रमुख इलाकों में वैशाली नगर, पंचशील, आदर्श नगर, माकड़वाली रोड, धोलाभाटा, क्रिश्चियनगंज, केसरगंज, रामगंज, सिविल लाइंस, फॉयसागर रोड और दरगाह क्षेत्र सहित कई कॉलोनियों में पानी की सप्लाई बंद थी. लोगों को हुई परेशानी? 30 घंटे पानी की सप्लाई बंद रहने से नागरिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. घरों में पानी स्टोरेज सीमित होने से खाना बनाना, नहाना और साफ-सफाई जैसी दैनिक जरूरतें प्रभावित हुई. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ी. होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर भी इसका असर पड़ा.

मायावती का बयान: महिला आरक्षण बिल का BSP ने किया समर्थन, SC, ST और OBC को अलग से कोटा मिलना चाहिए

 लखनऊ  बसपा प्रमुख मायावती ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का स्वागत किया है. उन्होंने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसमें SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग से कोटा देने की मांग की. मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण के पक्ष में है।  मायावती ने कहा- "हमारी पार्टी देश की संसद, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित 33% आरक्षण का और इसे आगे बढ़ाने के लिए उठाए गए सही और उचित कदम का स्वागत करती है. हालांकि इसमें काफी देरी हुई है, लेकिन देरी के बावजूद, हमारी पार्टी इसका स्वागत करती है. यदि वास्तव में शोषित और हाशिए पर पड़ी महिलाओं के लिए, विशेष रूप से SC, ST और OBC समुदायों की उन महिलाओं के लिए, जिन्हें सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से लगातार हाशिए पर धकेला जा रहा है, अलग से आरक्षण प्रदान किया जाता है, तो यह उचित और ऐतिहासिक दोनों होगा।  बकौल मायावती- "जीवन के हर पहलू में महिलाओं को समानता और आत्म-सम्मान का अधिकार देने के साथ-साथ, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 'हिंदू कोड बिल' के माध्यम से उन्हें मजबूत कानूनी अधिकार देने का भी प्रयास किया था. तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अपने संकीर्ण जातिवाद से प्रभावित होकर इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और बाद में इसे टुकड़ों-टुकड़ों में पारित किया. इस प्रकार, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को OBCs के लिए आरक्षण की कमी और महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और बेहतरी के लिए कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में देश के पहले कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।  बसपा प्रमुख ने आगे कहा कि हमारी पार्टी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के वर्तमान केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करती है. हालांकि, हमारी पार्टी हमेशा से महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में रही है. हमारी पार्टी 33 प्रतिशत आरक्षण का भी स्वागत करती है। 

शिक्षा व्यवस्था में सुधार: हरियाणा के 14 हजार स्कूलों को मिले 200 करोड़, अब ड्यूल डेस्क पर बैठेंगे छात्र

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री नायब सिंह की ओर से बजट भाषण में बताई गई योजनाओं पर क्रियान्वयन आरंभ हो गया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों को टाटपट्टी की जगह बैठने के ड्यूल डेस्क उपलब्ध कराई जाएगी। योजना को सिरे चढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने शिक्षा विभाग के लिए 200 करोड़ की रकम स्वीकृत कर दी है। अक्टूबर माह में टेंडर प्रकिया पूरी कर एक नवंबर से प्रदेश के सभी जिलों के स्कूलों में ड्यूल डेस्क पहुंचनी आरंभ हो जाएंगी। सरकार ने तय कर दिया है कि दिसंबर माह में स्कूलों में कोई भी बच्चा टाटपट्टी पर नहीं बैठेगा यह शिक्षा विभाग जिम्मेदारी होगी। तीन लाख ड्यूल डेस्क खरीदने की तैयारी बता दें कि अभी प्रदेश के कई जिलों में ऐसे स्कूल काफी संख्या में हैं जिनमें बच्चे जमीन पर टाटपट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। हालांकि पहले भी कई जिलों ड्यूल डेस्क भेजी गई थी। लेकिन उनको खरीदने में घोटाला हुआ था। जिसे देखते हुए खरीद बंद कर दी गई थी। अब विभिन्न जिला के 14 हजार स्कूलों के लिए करीब तीन लाख ड्यूल डेस्क खरीदने की तैयारी है। सरकार खरीद प्रकिया को पूरी पारदर्शिता के साथ अपनाएगी। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने बताया कि अक्टूबर माह में टेंडर प्रकिया आरंभ कर तय एजेंसी नवंबर में स्कूलों में ड्यूल डेस्क भेजने का काम करेगी। ड्यूल डेस्क लोहे की बनी होंगी और ऐसी डिजाइन की ली जाएगी कि बच्चों को बैठकर पढ़ाई करने में कियी तरह की परेशानी नही हो।

बस हादसे से दहला फतेहगढ़ साहिब: 8 लोगों की मौत, पीएम मोदी ने व्यक्त किया गहरा दुख

फतेहगढ़ साहिब. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फतेहगढ़ साहिब हादसे पर दुख प्रगट किया है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के जल्द स्वास्थ होने की कामना की है। घटना स्थल पर पहुंचे एसडीएम व अन्य अधिकारियों का ग्रमीणों ने किया विरोध। ग्रामीणों ने हादसे के लिए खस्ताहाल सड़कों को जिम्मेदार ठहराते हुए सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बैसाखी पर्व पर श्री आनंदपुर साहिब माथा टेक कर लौट रही संगत की बस मंगलवार देर रात फतेहगढ़ साहिब के गांव भटेड़ी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई। 25 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। दो गंभीर घायलों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है। हादसे के कारणों का अभी पता नहीं चला है। बस्सी पठाना तहसील के गांव मैण माजरी की संगत बैसाखी के मौके पर श्री आनंदपुर साहिब गई थी। संगत में गांव डडयाना, माजरा और शेरगढ़ बाड़ा के लोग भी शामिल थे। सभी श्रद्धालु मैण माजरी के गुरुद्वारा साहिब की पालकी वाली बस में सवार होकर देर रात लौट रहे थे। गांव मैण माजरी से करीब 3 किलोमीटर पहले गांव भटेड़ी के पास बस अचानक हादसे का शिकार हो गई। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे।

एसडीएम संजय कुमार की पहल से शिक्षकों के साथ संवाद, शिक्षा व्यवस्था पर फोकस

 गढ़वा  गढ़वा में सदर एसडीएम संजय कुमार की खास पहल ‘कॉफी विद एसडीएम’ की हर हफ्ते चलने वाली श्रृंखला में आज यानी बुधवार (15 अप्रैल) को शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विशेष बैठक होगी. अनुमंडल कार्यालय के सभागार में अपराह्न 3:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में जिले की शिक्षा व्यवस्था, चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा की जाएगी. डेढ़ वर्ष से जारी है संवाद की परंपरा ध्यान देने वाली बात यह है कि ‘कॉफी विद एसडीएम’ कार्यक्रम पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है. इस पहल के माध्यम से एसडीएम हर सप्ताह समाज के अलग-अलग वर्गों (जैसे युवा, किसान, उद्यमी आदि) से संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनते हैं. इसी कड़ी में इस बार शिक्षकों को आमंत्रित किया गया है जिससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था को धरातल पर और मजबूत किया जा सके. एसडीएम ने की सहभागिता की अपील सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने सभी कोटि के आमंत्रित शिक्षक प्रतिनिधियों से इस संवाद में सक्रिय रूप से भाग लेने का अनुरोध किया है. उन्होंने बताया कि शिक्षकों के सुझावों के आधार पर स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक सुधारों को लागू करने का प्रयास किया जाएगा.   इन मुख्य बिंदुओं पर होगा विमर्श इस संवाद कार्यक्रम में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक प्रतिनिधि शामिल होंगे. इन मुख्य विषय पर चर्चा होगी:     विद्यालयों की दैनिक व्यवस्था और अनुशासन.     नवाचारी शिक्षा को बढ़ावा देना.     छात्रों के ड्रॉप-आउट दर को कम करने के उपाय.     शिक्षकों की स्थानीय समस्याएं और संसाधनों का बेहतर उपयोग.  

टेक्नोलॉजी और टीमवर्क का कमाल: ‘ऑपरेशन तलाश’ से 192 परिवारों को मिला अपना खोया सदस्य

भिलाई नगर. दुर्ग में गुम हुए 192 लोगों को पुलिस ने उनके परिवार से मिलाया। 13 दिन तक जिले और राज्य के अलग-अलग जगहों से ढूंढने की कार्रवाई चली। दुर्ग पुलिस के किए गए प्रयासों से न केवल जिले में बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों से भी गुम इंसान को खोज निकाला। इन लोगों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया गया। इसके बाद कई घरों में खुशी लौट आई। ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चन्द्रा ने बताया कि पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जिला दुर्ग में 1 से 13 अप्रैल तक गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश के लिए विशेष अभियान ऑपरेशन तलाश चलाया। अभियान के दौरान जिले के समस्त थाना क्षेत्रों में विशेष टीमों का गठन कर खोजबीन की। पुलिस ने इसके लिए तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल किया । सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर गुमशुदा लोगों तक पहुंच बनाई गई। कई मामलों में पुलिस को दूसरे जिलों और राज्यों की पुलिस से भी मदद लेनी पड़ी। बेहतर तालमेल के कारण इन मामलों में तेजी से कारवाई हो सकी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई लोग ऐसे थे जो किसी कारण से घर छोड़कर चले गए थे, जबकि कुछ मामलों में परिवार वालों को उनकी कोई जानकारी नहीं मिल रही थी। ऐसे में पुलिस की टीमों ने लगातार कोशिश करते हुए उन्हें खोज निकाला। इस अभियान के दौरान कुल 192 गुमशुदा व्यक्तियों को सुरक्षित बरामद किया गया। इनमें 05 बालक, 09 बालिकाएं, 127 महिलाएं एवं 51 पुरुष शामिल हैं। इस अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने न सिर्फ शहर में बल्कि आसपास के इलाकों और दूसरे राज्यों में भी जाकर तलाश की। हर सुराग को गंभीरता से लिया गया और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई। गुमशुदा लोगों के मिलने के बाद जब उन्हें उनके परिवारों से मिलाया गया, तो कई भावुक पल भी देखने को मिले। दुर्ग पुलिस का कहना है कि इस तरह के अभियान आगे भी चलाए जाएंगे।

पंचायत से संसद तक महिलाओं की भागीदारी पर जोर, संजय सेठ ने किया संबोधन

रांची झारखंड के रांची में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर मंगलवार को आर्यभट्ट सभागार मोरहाबादी में सम्मेलन हुआ. इसमें हजारों महिलाएं शामिल हुईं. पूरा हॉल महिलाओं से खचाखच भरा था. नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर मौजूद जनसमूह ने पीएम नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया. ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक, निर्णय में नारी, नव भारत की तैयारी’ थीम पर आधारित यह कार्यक्रम पूरी तरह से नारी शक्ति को समर्पित रहा. पंचायत से पार्लियामेंट तक के निर्णय में होगी नारी: संजय सेठ कार्यक्रम का आयोजन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की ओर से किया गया. संजय सेठ ने कहा कि यह भव्य आयोजन न केवल नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तीकरण का प्रतीक बना, बल्कि यह संदेश भी दिया कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है. पंचायत से पार्लियामेंट तक के निर्णय में नारी होंगी. संजय सेठ ने कहा कि यह सिर्फ अधिनियम नहीं है. यह इस सपने के पूरा होने जैसा है, जो आजादी के बाद हमारे देश की मातृ शक्ति देखती थीं. बाबूलाल मरांडी ने क्या कहा? प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि केवल भारत देश में ही शक्ति की देवी के रूप में नारी की पूजा होती है. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काम किया है. निर्णय की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी होगी. मौके पर रांची की महापौर रोशनी खलखो, रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सरोज शर्मा, विनीता सिंघानिया, विजयश्री साबू, लेखिका पुष्पा सहाय और उषा जालान सहित अलग-अलग संस्था से जुड़ी महिलाएं मौजूद थीं. महिलाओं के सम्मान में सीढ़ी पर बैठे रक्षा राज्यमंत्री कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के सम्मान में रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ मंच के सामने सीढ़ी पर बैठे नजर आए. उन्होंने सम्मेलन में आईं महिलाओं का स्वागत फूल वर्षा कर किया. कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के महत्व पर विस्तार से बताया. इसे महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया. साथ ही महिलाओं को दिए गए आरक्षण के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया गया. पदयात्रा में 4000 से अधिक महिलाएं हुईं शामिल सम्मेलन के बाद आर्यभट्ट सभागार से पदयात्रा निकाली गई. इसमें 4000 से ज्यादा महिलाओं ने भाग लिया. यह पदयात्रा मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका तक निकाली गई. इस दौरान राष्ट्रपिता को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए और नारी सशक्तीकरण का संकल्प दोहराया गया.

योगी सरकार का बड़ा कदम: नोएडा-गाजियाबाद में श्रमिकों की सैलरी में ₹3000 तक की बढ़ोतरी

योगी सरकार का बड़ा फैसला: नोएडा-गाजियाबाद में श्रमिकों की सैलरी में ₹3000 तक की बढ़ोतरी हाई पावर कमेटी की सिफारिश पर अंतरिम वेतन वृद्धि लागू, 1 अप्रैल से नई दरें प्रभावी गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में श्रमिकों के वेतन में 21% तक वृद्धि अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रेणियों में नई दरें घोषित हिंसा फैलाने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश गौतमबुद्ध नगर  नोएडा और गाजियाबाद के श्रमिकों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने न्यूनतम वेतन में अंतरिम वृद्धि का ऐलान किया है। हालिया घटनाक्रमों के बाद की गई विस्तृत समीक्षा के आधार पर सरकार ने संतुलित निर्णय लेते हुए अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रेणियों में करीब ₹3000 तक वेतन बढ़ाया है, जिससे गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में 21% तक वृद्धि हुई है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। सरकार ने ₹20,000 न्यूनतम वेतन की खबरों को भ्रामक बताया है, वहीं श्रमिकों की मांगों और उद्योगों की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आगे वेज बोर्ड के माध्यम से स्थायी समाधान की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार औद्योगिक शांति, श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा तथा निवेश अनुकूल वातावरण बनाए रखने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनपद गौतम बुद्ध नगर में पूर्व की भांति सौहार्द, शांति एवं विकास की गति निरंतर बनी रहे।          एक अप्रैल से लागू होगी नई दरें औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश दीपक कुमार ने हाल ही में हुए घटनाक्रमों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए न्यूनतम वेतन में तात्कालिक रूप से अंतरिम वृद्धि का निर्णय लिया है, जिसमें सबसे अधिक बढ़ोतरी कुशल श्रेणी के श्रमिकों के लिए की गई है, वहीं गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में यह वृद्धि सबसे अधिक 21 प्रतिशत तक की गई है और यह नई अंतरिम वेतन दरें 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी। इस प्रकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में श्रमिकों को सीधी आर्थिक राहत प्रदान की गई है। साथ ही, आगामी माह में गठित होने वाले वेज बोर्ड की अनुशंसाओं के आधार पर स्थायी न्यूनतम वेतन निर्धारण की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। सरकार श्रमिकों के कल्याण हेतु स्वास्थ्य, पेंशन एवं उनके बच्चों की शिक्षा से जुड़ी नई योजनाओं पर भी विचार कर रही है। अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रेणी में हुई वेतन वृद्धि अंतरिम वेतन वृद्धि के अनुसार अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11313 से बढ़ाकर ₹13690 कर दिया गया है, अर्धकुशल श्रमिकों का वेतन ₹12445 से बढ़ाकर ₹15059 किया गया है, जबकि कुशल श्रमिकों का वेतन ₹13940 से बढ़ाकर ₹16868 कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अन्य नगर निगम वाले जनपदों के लिए अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11313 से बढ़ाकर ₹13006, अर्ध कुशल श्रमिकों का वेतन ₹12445 से बढ़ाकर ₹14306 तथा कुशल श्रमिकों का वेतन ₹13940 से बढ़ाकर ₹16025 कर दिया गया है। इसी प्रकार अन्य जनपदों के लिए अकुशल श्रमिकों का वेतन ₹11313 से बढ़ाकर ₹12356, अर्ध कुशल श्रमिकों का वेतन ₹12445 से बढ़ाकर ₹13591 तथा कुशल श्रमिकों का वेतन ₹13940 से बढ़ाकर ₹15224 कर दिया गया है।  ₹20,000 मासिक न्यूनतम वेतन संबंधी खबरें भ्रामक एवं निराधार उन्होंने बताया कि सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर हुई हिंसात्मक घटनाओं का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल प्रभाव से उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। समिति द्वारा नोएडा पहुंचकर पूरे प्रकरण की गहन जांच की गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर ₹20,000 मासिक न्यूनतम वेतन लागू होने संबंधी खबरें पूरी तरह भ्रामक एवं निराधार हैं। वास्तविक स्थिति यह है कि भारत सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर ‘फ्लोर वेज’ निर्धारित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है, जिसका उद्देश्य देशभर के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की एक समान आधार रेखा सुनिश्चित करना है। हिंसा में बाहरी तत्वों की संलिप्तता की आशंका राज्य सरकार द्वारा नियोक्ता संगठनों, श्रमिक संगठनों एवं अन्य सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का गंभीरता से परीक्षण किया जा रहा है, ताकि एक संतुलित, व्यावहारिक एवं सर्वमान्य निर्णय लिया जा सके। समिति द्वारा विभिन्न चरणों में श्रमिकों एवं नियोक्ताओं के साथ बैठकें आयोजित की गईं। श्रमिक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण था, जिसमें वेतन वृद्धि, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम का दुगुना भुगतान, श्रमिक हितों की सुरक्षा एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण जैसी मांगें शामिल थीं। उन्होंने हिंसा में बाहरी तत्वों की संलिप्तता की आशंका जताई। वहीं, नियोक्ताओं ने बताया कि वर्तमान समय में उद्योग जगत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और निर्यात में कमी ने उद्योगों पर दबाव बढ़ाया है। इसके बावजूद श्रमिकों की मांगों को उन्होंने प्रासंगिक एवं विचारणीय बताया। श्रमिकों के वेलफेयर के लिए कन्ट्रोल रूम स्थापित समिति द्वारा प्रेस वार्ता के दौरान बताया गया कि जनपद स्तर पर श्रमिकों के वेलफेयर एवं शान्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु एक कन्ट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसके नम्बर 120-2978231,  120-2978232, 120-2978862, 120-2978702 हैं, इस कन्ट्रोल रूम के माध्यम से श्रमिक अपनी किसी भी प्रकार की समस्या, शिकायत अथवा सूचना दर्ज करा सकते हैं।        असामाजिक एवं बाहरी तत्वों की पहचान के लिए अभियान जनपद में औद्योगिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वाले असामाजिक एवं बाहरी तत्वों के विरुद्ध प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। ऐसे तत्व न केवल कानून-व्यवस्था के लिए खतरा हैं, बल्कि श्रमिकों और उद्योगों के बीच विश्वास एवं सहयोग की भावना को भी कमजोर करते हैं। प्रशासन द्वारा इन तत्वों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें तकनीकी निगरानी, खुफिया तंत्र एवं स्थानीय स्तर पर सूचना संकलन को मजबूत किया गया है। पहचान किए गए दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें गिरफ्तारी, आपराधिक मुकदमे दर्ज करना तथा आवश्यकतानुसार अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत दंडात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार स्पष्ट रूप से यह संदेश देना चाहती है कि शांति एवं विकास के वातावरण को बाधित करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। … Read more