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अंबेडकर जयंती पर खास कार्यक्रम: CM साय आज करेंगे 21 फीट प्रतिमा का अनावरण, भाजपा की तैयारी पूरी

रायपुर. सीएम विष्णुदेव साय आज रायपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे. वह दोपहर एक बजे शंकर नगर के दुर्गा मैदान में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर आयोजित समरसता भोज में शामिल होंगे. इसके बाद दोपहर 2 बजे रायपुर के कलेक्ट्रेट चौक जाएंगे, जहां सीएम डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति का अनावरण करेंगे.  अंबेडकर जंयती पर भाजपा प्रदेशभर में करेगी कार्यक्रम  रायपुर. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती पर भाजपा आज प्रदेशभर में कार्यक्रम करेगी. सभी कार्यालयों में माल्यार्पण और विचार गोष्ठी का आयोजन होगा. बूथ स्तर तक जयंती मनाने की तैयारी की गई है. समरसता भोज के जरिए विशेष संपर्क अभियान चलाया जाएगा. साथ ही PM मोदी और CM साय का संदेश घर-घर पहुंचाया जाएगा. वहीं रायपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रमों में बड़े नेता शामिल होंगे. BJP प्रदेश अध्यक्ष किरण देव भी कार्यक्रमों में मौजूद रहेंगे. 20 अप्रैल तक अलग-अलग जिलों में संगोष्ठियों का आयोजित होंगी. इस दौरान सामाजिक संस्थाओं और समाज प्रमुखों का सम्मान किया जाएगा. प्रदेशभर की ग्राम पंचायतों में अंबेडकर जयंती पर ग्रामसभा अंबेडकर जयंती पर प्रदेशभर की ग्राम पंचायतों मुख्यालयों में ग्रामसभा आयोजित होंगे. छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 के तहत ग्रामसभाएं लगेंगी. ग्रामसभा निर्णयों की 15 मिनट वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है. रिकॉर्डिंग को मोबाइल ऐप में अपलोड करना जरूरी होगा. वहीं केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय का नया AI पोर्टल लागू किया जाएगा. “सभासार” पोर्टल से ग्रामसभा का विवरण तैयार होगा . “वाइब्रेंट ग्राम सभा पोर्टल” में 100 प्रतिशत अपलोड सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.

आज बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करेंगे शिवराज सिंह चौहान, बैठक में होगी घोषणा

पटना  बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पहले मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान आज 3 बजे भाजपा विधायक दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और सीएम नीतीश कुमार कुछ देर में कैबिनेट की आखिरी बैठक के बाद राज्यपाल को इस्तीफा सौंप देंगे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का नेतृत्व पहली बार भाजपा करेगी। भाजपा विधायक दल की बैठक में सीएम के नाम का ऐलान होने के बाद शाम 4 बजे एनडीए विधायक दल की बैठक में गठबंधन के पांच दलों के विधायक उस नाम का अनुमोदन करेंगे। अभी जैसे जेडीयू विधायक दल के नेता नीतीश सीएम हैं, उसी तरह आगे भाजपा विधायक दल का नेता ही एनडीए विधायक दल का नेता और मुख्यमंत्री बनेगा। भाजपा और एनडीए से पहले जेडीयू के विधायक दल की बैठक 2 बजे नीतीश लेंगे। एनडीए विधायक दल की बैठक के बाद नया नेता यानी नए मुख्यमंत्री राजभवन जाकर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। बुधवार की सुबह 11 बजे लोक भवन (राजभवन) में बीजेपी की अगुवाई में एनडीए की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा, जिसमें सीमित संख्या में पांच घटक दलों के मंत्री शपथ लेंगे। समारोह में दिल्ली से भाजपा और एनडीए दलों के बड़े नेता आ सकते हैं। नए सीएम को लेकर अटकलों का दौर चल रहा है, लेकिन खुली आंखों से जो राजनीतिक घटनाक्रम दिख रहा है और कल से जिस तरह भाजपा विधायक दल के मौजूदा नेता और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आवास नई सरकार के गठन को लेकर बैठकों-मुलाकातों का केंद्र बना हुआ है, उससे यह संभावना प्रबल है कि सम्राट चौधरी ही बिहार के नए और अगले मुख्यमंत्री बनेंगे। सीएम पद के लिए नित्यानंद राय, विजय सिन्हा, जनक राम, रेणु देवी, दिलीप जायसवाल, संजय जायसवाल, मंगल पांडे जैसे कई नाम चर्चा में हैं। लेकिन भाजपा का फैसला शाम 3 बजे की बैठक में सामने आने तक कुछ तय रूप से नहीं कहा जा सकता। पांच महीने पहले सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को भाजपा विधायक दल का नेता और उप-नेता चुना गया था। भाजपा के पास विकल्प है कि वो विधायक दल का नेता या उप-नेता ना बदले, लेकिन जदयू को सांसद नीतीश की जगह पर नया नेता चुनना ही होगा, जो विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य हो। इस लिहाज से जदयू की 2 बजे की बैठक भी बहुत महत्वपूर्ण है। जदयू में नीतीश के बाद नेता बनने की रेस में विजय कुमार चौधरी का नाम सबसे आगे है। नीतीश कुमार सीएम आवास से निकले, आंबेडकर जयंती समारोह बतौर मुख्यमंत्री आखिरी सार्वजनिक कार्यक्रम नीतीश कुमार बतौर सीएम अपने अंतिम सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री आवास से निकल गए। वो आंबेडकर जयंती समारोह में शामिल होने के बाद जब सीएम हाउस लौटेंगे तो अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक करेंगे। इसके बाद वो राजभवन जाकर इस्तीफा सौंप देंगे।  भाई वीरेंद्र ने कहा- सम्राट चौधरी सीएम बनते हैं तो हम बधाई देंगे राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा है कि अगर सम्राट चौधरी सीएम बनते हैं तो वो उनको बधाई देंगे। कुछ दिन पहले तेजस्वी यादव के करीबी नेता शक्ति सिंह यादव ने भी कहा था कि अगर सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनते हैं तो राजद के कार्यकर्ता खुश ही होंगे। शक्ति यादव का तर्क था कि इससे साबित होगा कि राजद से निकले कार्यकर्ता दूसरे जगह जाकर भी सीएम बन सकते हैं। सम्राट चौधरी बिहार सीएम संकेत नंबर 08- राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा सम्राट के आवास गए एनडीए दलों के नेता और नीतीश के प्रधान सचिव दीपक कुमार के बाद कल शाम जब राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा भी सम्राट चौधरी के आवास पहुंच गए, तो यह अब तक के सारे संकेतों में सबसे मजबूत इशारा हो गया कि अगला सीएम कौन हो सकता है। कहा जा रहा है कि 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण समारोह के बारे में चर्चा करने के लिए राज्यपाल के सचिव सम्राट से मिलने गए थे। सम्राट चौधरी बिहार सीएम संकेत नंबर 07- सीएम के प्रधान सचिव दीपक कुमार सम्राट के आवास गए एनडीए के नेताओं के बाद जब कल नीतीश कुमार के प्रधान सचिव दीपक कुमार भी सम्राट चौधरी से मिलने उनके आवास पहुंचे। दीपक कुमार ही सरकार की सारी प्रशासनिक व्यवस्था पर सीएम के लिए नजर रखते हैं। दीपक कुमार हर यात्रा और कार्यक्रम में सीएम के साथ और बिल्कुल पास खड़े दिख जाते हैं। दीपक कुमार का सम्राट चौधरी के आवास जाना भी अगली सरकार के नेता का मजबूत संकेत है। JDU इन 5 नेताओं पर लगा सकती है दांव डिप्टी सीएम की रेस में कौन आगे? सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जेडीयू की ओर से उपमुख्यमंत्री कौन बनेगा. हाल ही में राजनीति में कदम रखने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम इस पद के लिए सबसे चर्चा में है. हालांकि, सूत्रों के अनुसार निशांत फिलहाल इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन उन्हें मनाने की कोशिशें जारी हैं. वहीं, दो उपमुख्यमंत्री होने की बात भी माने आ रही है. कुछ लोगों का मानना है कि नीतीश कुमार उपमुख्यमंत्री के मामले में चौका भी सकते हैं. वे निशांत के अलावा किसी अन्य नेता पर भी दाव लगा सकते हैं. इसके लिए 5 नाम सबसे प्रबल हैं. इनमें संजय झा, ललन सिंह, विजय चौधरी, अशोक चौधरी, विजेंद्र यादव शामिल हैं।      संजय झाः इन्हें नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है. पार्टी के रणनीतिकार हैं. सवर्ण (ब्राह्मण) जाति से आते हैं. वे बीजेपी से जदयू में आए हैं. लिहाजा बीजेपी में भी उनकी अच्छी पकड़ है।      ललन सिंहः ये नीतीश कुमार के पुराने साथी और बेहद भरोसेमंद हैं. ललन सिंह भी सवर्ण यानि भूमिहार जाति से आते हैं. फिलहाल लोकसभा सांसद और केंद्र में मंत्री है. इनका पार्टी पर संगठन पर मजबूत पकड़ और लंबा प्रशासनिक व राजनीतिक अनुभव है।      विजय चौधरीः इन्हें नीतीश कुमार के साथ साये की तरह देखा जाता है. विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं और नीतीश के संकटमोचक माने जाते हैं. फिलहाल राज्य सरकार में मंत्री हैं. सवर्ण जाति से आते हैं और भूमिहार है।      अशोक चौधरीः इन्हें नीतीश कुमार के मानस पुत्र माना जाता है. पासी … Read more

42 हजार कर्मचारी सड़कों पर, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से भड़काने का शक

नोएडा  उत्तर प्रदेश के नोएडा फेज दो स्थित कंपनी के दफ्तर से शुरू हुआ कर्मचारियों का आंदोलन सोमवार को उग्र रूप ले लिया। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई कंपनियों में कर्मचारियों को बाहर निकाल कर इकाई को बंद कराया गया। इसके बाद सड़कों पर उतर कर कर्मचारी प्रदर्शन करते दिखे। शहर के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। अब इसके पीछे किसी प्रकार की साजिश का अंदेशा जताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि कर्मचारियों को भड़का कर उग्र आंदोलन कराया गया। मामले की जांच के लिए एसटीएफ को लगाया गया है। एसटीएफ हिंसक और उग्र आंदोलन को भड़काए जाने की जांच करेगी। नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन को लेकर लखनऊ तक हलचल दिखी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रमिकों की समस्याओं के समाधान और जांच के लिए औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमिटी गठित की है। कमिटी की अनुशंसा के आधार पर न्यूनतम वेतनमान में अंतरिम वृद्धि का आदेश जारी किया गया है। तीनों प्रकार के श्रमिकों के वेतन में लगभग 21 फीसदी की वृद्धि की घोषणा की गई है। वहीं, पुलिस और प्रशाासन घटना की जांच और एक्शन में जुट गई है। नोएडा पुलिस का एक्शन तेज नोएडा पुलिस का मामले में एक्शन तेज हो गया है। नोएडा में मजदूरों के विरोध पर पुलिस कमिश्नर, गौतमबुद्धनगर लक्ष्मी सिंह का बड़ा बयान आया है। सीपी ने कहा कि कल हमारी ओर से अलग-अलग स्थानों पर हुई घटनाओं को लेकर 7 एफआईआर दर्ज की गई है। उपद्रव के मामले में 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनको उकसाने की दिशा में जो लोग चिह्नित किए गए थे, उनकी भी गिरफ्तारियां की गई हैं। सीपी ने कहा कि आने वाले दिनों में भी कुछ गिरफ्तारियां की जाएगी। सीपी ने जताया संदेह पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को कहा कि सोमवार को नोएडा में 83 स्थानों पर 42 हजार से अधिक कर्मचारी सड़कों पर उतरे थे। दो स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पुलिस ने न्यूनतम बल प्रयोग करते हुए श्रमिकों के प्रदर्शन को काबू में लाया गया। सीपी ने कहा कि अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को समझा-बुझाकर वापस भेजा गया। सीपी ने कहा कि जो श्रमिक हैं, ऐसा पता चला है कि कोई एक ग्रुप है जो उन्हें पीछे से उकसा रहा है। पीछे से बहुत व्यवस्थित तरीके से चीजों को आगे बढ़ा रहा है। सीपी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ऐसे बहुत से फर्जी ट्विटर और अन्य अकाउंट बनाए गए हैं। इसके माध्यम से लगातार श्रमिकों को उकसाने, हिंसा, फैक्टरियों में आगजनी करने, पुलिस से भिड़ने के लिए उकसाया जाता रहा है। कल 2 अकाउंट के बारे में पता लगा था। पिछले 2 दिनों में श्रमिकों के 2 वाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जिसमें QR कोड स्कैन करके ग्रुप में जोड़ा रहा है। पुलिस करेगी फंडिंग की जांच पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि पूरे मामले की जांच के क्रम में सामने आया है कि पीछे से कोई संगठित गिरोह कर्मचारियों को भड़का रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को भीड़ में से चुनकर गिरफ्तार किया गया है। आगे भी इस प्रकार के लोगों की गिरफ्तारियां सुनिश्चित की जाएगी। इनकी फंडिंग की भी जांच की जाएगी। अगर जांच में आता है कि देश या प्रदेश के बाहर से इन लोगों को फंडिंग की गई है तो इस दिशा में भी काम किया जाएगा। मंगलवार को भी प्रदर्शन नोएडा के फेज 2 इलाके में एक कंपनी के कर्मचारियों ने कंपनी के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारी वेतन वृद्धि सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद रही। इस दौरान श्रमिकों की ओर से किसी प्रकार की हिंसक गतिविधि की खबर अब तक नहीं है।  

UP में वोटर लिस्ट में बड़ा झटका: 2 करोड़ से ज्यादा नाम कटे, कई दिग्गजों की सीट पर खतरा!

लखनऊ उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रोसेस के बाद 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से कम हुए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर शहर में सबसे कम 33,094 वोट कटे हैं, जो प्रदेश के उन टॉप 5 शहरी क्षेत्रों में शामिल है, जहां सबसे कम गिरावट दर्ज की गई. इसके उलट डिप्टी सीएम बृजेश पाठक की लखनऊ कैंट विधानसभा सीट उन टॉप 5 क्षेत्रों में है, जहां सबसे ज्यादा 1.47 लाख वोट कम हुए हैं. यह आंकड़े मुख्यमंत्री द्वारा कार्यकर्ताओं को दी गई उस चेतावनी के बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने बूथ स्तर पर मेहनत न करने पर भयावह परिणाम भुगतने की आशंका जताई थी. पूरे सूबे में औसतन हर सीट पर 13.24 फीसदी मतदाता कम हुए हैं. विश्लेषण दिखाता है कि भारतीय जनता पार्टी की तुलना में समाजवादी पार्टी की सीटों पर वोट कम कटे हैं. बीजेपी की शहरी सीटों पर औसतन 18.11 फीसदी वोट घटे, जबकि एसपी की शहरी सीटों पर यह आंकड़ा 16.36 फीसदी रहा. दिग्गज नेताओं की सीटों पर भारी फेरबदल नेताओं की जीत के मार्जिन और कटे हुए वोटों का अंतर काफी डराने वाला है. लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से राजेश्वर सिंह 56 हजार वोटों से जीते थे, लेकिन वहां 1.42 लाख मतदाता कम हो गए. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना 82 हजार से जीते थे और 90 हजार वोट कट गए. कुंडा में राजा भैया की सीट पर 55 हजार वोट कम हुए, जबकि उनकी जीत का मार्जिन केवल 30 हजार था. इसी तरह रायबरेली में अदिति सिंह की सीट पर 56 हजार वोट कम हुए हैं. एसआईआर के आंकड़ों में एसपी की 102 सीटों पर वोट कटने का दायरा 26 हजार से 1.07 लाख तक रहा, जबकि बीजेपी की 257 सीटों पर यह 26 हजार से 3.16 लाख तक पहुंच गया. मुस्लिम बहुल अमरोहा शहर (एसपी सीट) में सबसे कम 26,233 वोट कटे, वहीं बीजेपी की साहिबाबाद सीट पर सबसे ज्यादा 3,16,484 वोट घट गए. ग्रामीण इलाकों में दोनों दलों के बीच का अंतर सिर्फ एक फीसदी के करीब है. सहयोगी दलों की स्थिति और योगी का मॉडल राजनीतिक दलों के लिहाज से देखें तो अपना दल की सीटों पर 27 हजार से 72 हजार, सुभासपा की सीटों पर 28 हजार से 50 हजार और निषाद पार्टी की सीटों पर 30 हजार से 59 हजार वोट कम हुए हैं. आरएलडी की सीटों पर भी 27 हजार से 48 हजार वोटों की कमी आई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को छोड़कर कोई बड़ा नेता अपना क्षेत्र पूरी तरह नहीं बचा पाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सेवारत शिक्षकों की TET अनिवार्यता याचिका, कहा- ‘याचिका में कोई आधार नहीं’

प्रयागराज  उत्तर प्रदेश के सरकारी जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को बरकरार रखते हुए जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।     0.1 कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "याचिका में दम नहीं"     0.2 ​क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया नियम?     0.3 ​पूर्व में भी खारिज हो चुकी है अपील     0.4 ​शिक्षकों के सामने अब क्या है रास्ता? कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "याचिका में दम नहीं" ​10 अप्रैल 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता पूर्व में दिए गए फैसलों को ही चुनौती दे रहे थे, जिसमें कोई नया कानूनी आधार नहीं पाया गया। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तय मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। ​क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया नियम? ​1 सितंबर 2025 को अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य के मामले में आए ऐतिहासिक फैसले के आलोक में अब निम्नलिखित नियम लागू होंगे:     ​दो साल की समय सीमा: जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें आगामी 2 वर्षों के भीतर TET परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।     ​अनिवार्य सेवानिवृत्ति: यदि ये शिक्षक निर्धारित समय सीमा में परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें VRS (अनिवार्य सेवानिवृत्ति) लेनी होगी।     ​सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को राहत: जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट में 5 वर्ष से कम का समय बचा है, उन्हें परीक्षा से छूट दी गई है। वे अपनी सेवानिवृत्ति तक पद पर बने रह सकते हैं।     ​पदोन्नति पर रोक: बिना TET पास किए किसी भी शिक्षक को प्रमोशन (पदोन्नति) का लाभ नहीं दिया जाएगा। ​पूर्व में भी खारिज हो चुकी है अपील ​यह पहली बार नहीं है जब शिक्षकों ने इस नियम के विरुद्ध कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले 17 नवंबर 2025 को यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटीए) की याचिका को भी न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की खंडपीठ ने खारिज कर दिया था। कोर्ट का स्पष्ट मानना है कि RTE एक्ट (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत योग्यता के मानक सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। ​शिक्षकों के सामने अब क्या है रास्ता? ​इस फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश के हजारों पुराने शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने और पदोन्नति पाने के लिए TET की तैयारी शुरू करनी होगी। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के लिए यह फैसला एक बड़े कानूनी अवरोध के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब शीर्ष अदालत ने कानूनी विकल्पों के द्वार लगभग बंद कर दिए हैं।     ​"शिक्षा के अधिकार के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना अनिवार्य है, और TET उसी गुणवत्ता का एक पैमाना है।" — सुप्रीम कोर्ट का सारांश  

CM मान का बड़ा ऐलान: पंजाब की महिलाओं को ₹1500 मासिक, जालंधर से आज रजिस्ट्रेशन की शुरुआत

चंडीगढ़. पंजाब सरकार आज मंगलवार से अपनी प्रस्तावित 'मावां धियां सत्कार योजना' के लिए महिला लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन शुरू करेगा, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री भगवंत मान जालंधर से करेंगे। इसके 1 जुलाई से शुरू होने की उम्मीद है। इस दिन से जनरल श्रेणी की महिलाओं को सीधे 1,000 और अनुसूचित जाति श्रेणी की महिलाओं 1,500 रुपये का मानदेय मिलना शुरू हो जाएगा। आप के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू में 15 अप्रैल से नौ विधानसभा क्षेत्रों जैसे आदमपुर, मलोट, श्री आनंदपुर साहिब, दिड़बा, सुनाम, मोगा, कोटकपूरा, बटाला और पटियाला ग्रामीण में पायलट आधार पर चलाई जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि 15 मई से इस प्रक्रिया का विस्तार बाकी 108 विधानसभा क्षेत्रों में भी कर दिया जाएगा। रजिस्ट्रेशन के समय आवेदकों को पंजाब आधार कार्ड, वोटर पहचान पत्र और बैंक पासबुक जमा करना होगा। इन दस्तावेज़ों का इस्तेमाल पात्रता की जांच करने और लाभार्थियों के खातों में सीधे लाभ ट्रांसफर करने में मदद के लिए किया जाएगा। यह योजना आम आदमी पार्टी (AAP) के 2022 के विधानसभा चुनावों के उस वादे को पूरा करने की दिशा में एक कदम है, जिसमें महिलाओं को वित्तीय सहायता देने की बात कही गई थी। हालांकि, पार्टी ने उस समय 18 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने अब संकेत दिया है कि योजना के लागू होने के साथ-साथ इसके अंतिम स्वरूप, जिसमें लाभार्थी के लिए पात्रता के मानदंड और 1,000 से 1,500 रुपये की सीमा के भीतर मिलने वाली सटीक राशि शामिल है को भी अधिसूचित कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के लिए पिछले कई महीनों से तैयारियां चल रही हैं, जिसमें लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार करना और बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे इस रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य पूरे राज्य में योजना को लागू करने से पहले छोटे पैमाने पर इसके सिस्टम की जांच करना है। महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजना शुरू करने वाला पंजाब अकेला राज्य नहीं है। पड़ोसी राज्यों—हरियाणा और हिमाचल प्रदेश—ने भी ऐसी योजनाओं की घोषणा की है। दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने भी हाल के वर्षों में इसी तरह के कार्यक्रम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू कल्याण और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इसके साथ ही, इस योजना से राज्य के खजाने पर सालाना 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बोझ पड़ने की संभावना है। राज्यों में पंजाब का GSDP के मुकाबले कर्ज़ का अनुपात सबसे ज़्यादा है, और नीति-निर्धारक हलकों में बार-बार होने वाले कल्याणकारी भुगतानों के लिए उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालाँकि, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने से इसका बेहतर क्रियान्वयन हो पाएगा। इस तरह इकट्ठा किया गया डेटाबेस लाभार्थियों की अंतिम संख्या तय करने में मदद करेगा।

RTI Update: 3485 में से 1883 आवेदन मंजूर, बाकी पर गिरी रिजेक्शन की गाज

दुर्ग. दुर्ग जिले के 528 निजी विद्यालयों के प्रारंभिक कक्षाओं में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत भर्ती के लिए 3485 ऑनलाइन आवेदन मिले थे। इनमें से 900 यानी करीब 26% आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए हैं। केवल 1883 आवेदन ही स्वीकृत किए गए हैं। इन्हीं आवेदनों पर लॉटरी 15 अप्रैल को निकाली जाएगी। वैसे कुल सीटों की संख्या 1427 बताई गई है। वैसे इस बार आरटीई के तहत प्रवेश के लिए निर्धारित सीटों की संख्या में भारी कटौती की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार करीब एक तिहाई सीटों की कटौती हुई है। इस वर्ष केजी-1, केजी – 2 तथा नर्सरी का कांसेप्ट खत्म कर दिया गया है। इस वजह से निजी स्कूलों में आरटीई के तहत केवल पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा रहा है, जिसके लिए प्रथम चरण में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित थी। पिछले वर्ष आरटीई की 4267 सीट थी। यानी इस बार 2840 सीटों की कटौती की गई है। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) अंतर्गत वर्ष 2026 27 के लिए प्रदेश में संचालित निजी विद्यालयों में आरटीई पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन /भर्ती की कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में अधिनियम के प्रावधान अंतर्गत नोडल अधिकारी की जानकारी, क्षेत्र का निर्धारण, मान्यता संबंधी कार्यवाही पूर्ण करना, आरक्षित सीटों का निर्धारण, प्रवेश एवं सूचना हेतु आवेदन प्राप्त करना, आवेदन पत्रों की समीक्षा तथा प्रचार प्रसार आवंटन प्रक्रिया एवं शुल्क की प्रतिपूर्ति व प्रक्रिया हेतु समय सारणी से अवगत कराया  है। प्रथम चरण में आवेदन के बाद लॉटरी एवं आबंटन 17 अप्रैल तक होगा। जानकारी के मुताबिक 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे से लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर में लॉटरी निकाली जाएगी। इसमें सहायक संचालक, 5 पालक, निजी विद्यालय संगठन से जुड़े 2 पदाधिकारी, 2 पालक संघ के प्रतिनिधि तथा 2 मीडिया प्रभारी को भी बुलाया गया है। स्कूल दाखिला 1 मई से 30 मई तक, 2025- 26 की शुल्क प्रतिपूर्ति का सत्यापन कार्य 25 मई से 25 जून तक किया जाएगा। द्वितीय चरण का शेड्यूल न्यू स्कूल रजिस्ट्रेशन 8 से 20 जून तक । नोडल प्राचार्य, डीईओ द्वारा सत्यापन, (सीट प्रकटीकरण) 8 जून से 25 जून तक छात्र पंजीयन 1 जुलाई से 11 जुलाई तक। नोडल वेरीफिकेशन 1 जुलाई से 15 जुलाई तक । लॉटरी एवं आबंटन 27 से 31 जुलाई तक, 3 अगस्त से 17 अगस्त तक स्कूल दाखिला किया जाएगा।

जयपुर केस पर बवाल: IMA के ऐलान से पूरे प्रदेश में ठप स्वास्थ्य सेवाएं

जयपुर राजस्थान में  आज (14 अप्रैल) से 24 घंटे तक पूरी तरह से प्राइवेट अस्पताल बंद रहेंगे. इस दौरान प्रदेशभर के प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी और आईपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप रहेंगी. जयपुर के एक डॉक्टर की गिरफ्तारी के खिलाफ राज्य के प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों ने 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है. प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों के इस ऐलान से राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी असर पड़ने वाला है और इस हड़ताल से मरीजों का भी भारी दिक्कत होगी. 24 घंटे का हड़ताल का ऐलान दरअसल, जयपुर में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के निदेशक डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी हुई थी. उन्हें हाल ही में चिकित्सीय लापरवाही के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था. अब पुलिस की इसी कार्रवाई के विरोध में 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' (IMA) ने मंगलवार से प्रदेशभर के निजी अस्पतालों में 24 घंटे की संपूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया. जानकारी के अनुसार, 14 अप्रैल सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह तक ओपीडी और आईपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहेंगी. डॉक्टरों का आरोप है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा लापरवाही का सबूत न मिलने के बावजूद सरकार ने मामूली अनियमितताओं के आधार पर यह दमनकारी कदम उठाया है. इस गतिरोध से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट मंडरा रहा है. IMA राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि पहले गठित एक मेडिकल बोर्ड ने मामले में चिकित्सीय लापरवाही का कोई सबूत नहीं पाया था. डॉक्टर सोनदेव बंसल की क्यों हुई गिरफ्तारी डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने डॉक्टर सोनदेव बंसल से जुड़े केस के बारे में बताया कि अक्टूबर 2025 में जितेन्द्र कुमार शर्मा ने मानसरोवर थाने में रिपोर्ट दी कि उनकी मां शशि शर्मा को 01 सितंबर 2025 को निविक हॉस्पिटल में न्यूरो के इलाज के लिए भर्ती कराया था. अस्पताल ने उनकी माता का इलाज शुरू कर दिया और उनसे इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूल कर लिये गये, जिनका आज तक कोई हिसाब किताब बिल रशीद नहीं दी. जितेंद्र ने रिपोर्ट में कहा कि उनकी मां का इलाज कुछ समय तक RGHS से भी किया गया और उनसे लाखों रुपये नकद भी लिए गए. इस दौरान अस्पताल प्रशासन आश्वासन देता रहा कि उनकी मां का इलाज अच्छा चल रहा है. हालांकि, कुछ दिनों बाद जितेंद्र की मां की मौत हो गई. जब जितेंद्र ने अपनी मां के इलाज के दस्तावेज और इलाज की रशीद व बिल मांगे तो अस्पताल ने देने से इनकार कर दिया. वही फ़र्जी फर्जी रिकार्ड तैयार किया गया. पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि अस्पताल प्रबंधक ने आरजीएचएस कार्यालय में जितेंद्र की मां को इलाज के लिए बार-बार डिस्चार्ज दिखाकर दोबारा भर्ती किया दिखाया. परिवादी की बिना सहमति से एक ही सहमति पत्र (consent form) पर कांट-छांट कर अलग-अलग डेट डालकर आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड किया गया. आरजीएचएस ऑफिस ने अस्पताल के खिलाफ जांच में अनियमितता के आरोप प्रमाणित माने है और एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार भी दस्तावेजों में कांटछांट करना प्रमाणित पाया जाने पर संचालक डॉ. सोनदेव बंसल को गिरफ्तार किया गया.

सोशल मीडिया पर फैली अफवाह पर सरकार का एक्शन: जानिए क्या है मजदूरों का असली न्यूनतम वेतन

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही उस खबर को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि राज्य में मजदूरों का न्यूनतम वेतन ₹20 हजार प्रति माह कर दिया गया है. सरकार ने इसे साफ तौर पर भ्रामक और झूठी जानकारी बताया है और लोगों से अपील की है कि वो सिर्फ आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें. शासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि ₹20 हजार न्यूनतम वेतन तय करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है. सरकार ने कहा कि इस तरह की खबरें पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है. इस तरह की अफवाहों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे आम जनता और श्रमिक दोनों प्रभावित होते हैं. हालांकि, सरकार ने यह जरूर बताया कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और श्रमिकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन में अंतरिम वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है. इस अंतरिम वृद्धि का उद्देश्य मजदूरों को तत्काल राहत देना है, ताकि उनकी आय में कुछ सुधार हो सके. सरकार ने कहा, केवल आधिकारिक सूचना पर करें भरोसा राज्य में वर्तमान न्यूनतम वेतन दरों का भी विवरण साझा किया गया है. अधिसूचित दरों के अनुसार, अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन ₹11,313.65 तय किया गया है, जबकि दैनिक वेतन ₹435.14 है. इसी तरह अर्धकुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन ₹12,446 और दैनिक वेतन ₹478.69 निर्धारित किया गया है. वहीं कुशल श्रमिकों के लिए मासिक वेतन ₹13,940.37 और दैनिक वेतन ₹536.16 रखा गया है. सरकार ने कहा कि यह दरें हाल ही में अधिसूचित की गई हैं और इन्हीं के आधार पर वर्तमान में भुगतान किया जाना चाहिए. नियोक्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन दरों का सख्ती से पालन करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता न करें. इसके साथ ही, सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अगले माह वेज बोर्ड के गठन की घोषणा की है. यह वेज बोर्ड श्रमिकों के वेतन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगा और अपनी सिफारिशें सरकार को देगा. इन सिफारिशों के आधार पर भविष्य में न्यूनतम वेतन की नई दरें तय की जाएंगी. अगले महीने बनेगा वेज बोर्ड, नई दरों पर होगी सिफारिश सरकार का मानना है कि वेज बोर्ड के माध्यम से एक संतुलित और व्यावहारिक वेतन संरचना तैयार की जा सकेगी, जिससे श्रमिकों और उद्योग दोनों के हितों का ध्यान रखा जा सके. इससे वेतन निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और सभी पक्षों को न्याय मिलेगा. राष्ट्रीय स्तर पर भी न्यूनतम वेतन को लेकर काम जारी है. केंद्र सरकार नई श्रम संहिताओं के तहत पूरे देश के लिए एक समान न्यूनतम आधार रेखा यानी फ्लोर वेज तय करने की प्रक्रिया में है. इसका उद्देश्य यह है कि देश के हर हिस्से में श्रमिकों को एक न्यूनतम स्तर का वेतन सुनिश्चित किया जा सके. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर नियोक्ताओं से अपील की है कि वे श्रमिकों के हितों का ध्यान रखें और उन्हें नियमानुसार वेतन दें. उन्होंने कहा कि श्रमिकों को ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश और बोनस जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने कार्यस्थलों पर महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सभी नियोक्ता यह सुनिश्चित करें कि महिला कर्मचारियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले. इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने अराजक और बाहरी तत्वों द्वारा की जा रही गैर-कानूनी गतिविधियों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. सरकार ने साफ किया है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सरकार ने एक बार फिर दोहराया कि वह औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. श्रमिकों की भलाई और उद्योगों की प्रगति, दोनों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम किया जा रहा है. नियोक्ताओं को निर्देश, नियमों के अनुसार दें वेतन और सुविधाएं अंत में, सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरों से सावधान रहें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें. इससे न केवल भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है, बल्कि सही जानकारी भी सभी तक पहुंचाई जा सकती है.

Census Update: मकानों से शुरू होगी जनगणना, दूसरे चरण में होगी व्यक्तियों की गणना

दुर्ग. जिले में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा हैं। करीब 15 साल बाद होने वाली इस जनगणना को इस बार पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है, जिससे प्रक्रिया को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए दो चरणों में संपन्न किया जाएगा। जिला जनगणना अधिकारी एवं कलेक्टर अभिजीत सिंह ने प्रशिक्षण के दो चरणों में होने वाली प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक मकान सूचीकरण का होगा, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में परिवार और व्यक्तियों की गणना के लिए आयोजित किया जाएगा। इस बड़े अभियान के लिए जिले में 3,850 प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं, जिनके मार्गदर्शन के लिए 79 फील्ड ट्रेनर तैनात हैं। प्रत्येक प्रगणक को लगभग 700 से 800 लोगों या 250 से 300 परिवारों की गणना का जिम्मा सौंपा गया है। 11 अप्रैल से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुका है, जिसमें 1109 प्रशिक्षकों को अलग-अलग बैच में तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण नगर निगम दुर्ग, रिसाली, भिलाई जोन-4, जामुल और दुर्ग, धमधा, पाटन व अहिवारा तहसीलों में आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान में शिक्षा, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, ट्राइबल और महिला-बाल विकास विभाग के कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम है। इस बार डेटा संग्रह मोबाइल एप के माध्यम से होगा, जिसमें प्रगणकों को डेटा एंट्री, मैप सत्यापन और सिंकिंग की प्रक्रिया सिखाई जा रही है। नागरिकों को 16 से 30 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा भी मिलेगी। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।