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Apple Fitness Plus का भारत में आगमन, क्या घर बैठे फिटनेस हासिल करना अब होगा आसान?

नई दिल्ली Apple भारत में अपनी नई सर्विस की शुरुआत करने जा रहा है,  जिसका नाम ऐपल फिटनेस प्लस है. भारत में इसकी शुरुआत 15 दिसंबर से होगी. वैसे तो ग्लोबल मार्केट में यह सर्विस साल 2020 में शुरू हो चुकी है और अब 5 साल के बाद भारत में ये सर्विस शुरू होने जा रही है. यह एक सब्सक्रिप्शन बेस्ड सर्विस है. इसमें 12 अलग-अलग टाइप के वर्कआउट मोड्स मिलते हैं, जिसमें एक योग का भी नाम शामिल है. Apple Fitness Plus के बारे में डिटेल्स में जानते हैं कि कौन-कौन फीचर्स और कंटेंट मिलेगा.  iPhone समेत कई प्रोडक्ट पर चला सकेंगे  Apple Fitness Plus सर्विस का एक्सेस आईफोन, आईपैड और Apple TV पर किया जा सकेगा. इसमें 5 मिनट से लेकर 45 मिनट तक के सेशन मिलते हैं. इसमे एक्सरसाइज को वीडियो के जरिए दिखाया जाता है.  Apple Fitness Plus कंपनी के ईकोसिस्टम पर बेहतर रिजल्ट और एक्सपीरियंस देता है. वर्कआउट के दौरान यूजर्स अगर Apple Watch या AirPods Pro 3 को पहनते हैं तो हार्ट बीट, कैलोरीज संबंधित डिटेल्स को मोबाइल स्क्रीन पर देख सकते हैं.  Apple Fitness+ के खास फीचर्स     Apple Fitness+ के तहत यूजर्स को योग, स्ट्रेंथ, पिलाटिस, डांस, साइक्लिंग, रोइंग, ट्रेडमिल वॉक/रन, किकबॉक्सिंग, मेडिटेशन जैसे 12 टाइप के वर्कआउट मिलते हैं.      ऐपल फिटनेस प्लस की कंपेटेबिलिटी कंपनी के प्रोडक्ट के साथ है, जिसमें iPhone / iPad / Apple TV + Apple Watch के नाम शामिल हैं. iPhone, iPad या Apple TV पर वर्कआउट देख सकते हैं.      ऐपल फिटनेस प्लस की मदद से जब एक्सरसाइज करेंगो तो हार्टबीट, कैलोरी बर्न और अन्य डिटेल्स स्क्रीन पर नजर आती है.       ऐपल फिटनेस प्लस के तहत यूजर्स अपनी पसंद या जरूरत के मुताबिक एक्सरसाइज को कस्टमाइज कर सकते हैं. इन एक्सरसाइज को घर या फिर कहीं बाहर भी किया जा सकेगा. इससे एक्सरसाइज को लेकर जारी रुटीन टुटेगा नहीं.  Apple Fitness Plus के भारत में प्लान्स  Apple Fitness Plus की शुरुआत 15 दिसंबर से हने जा रही है. यहां मंथली सब्सक्रिप्शन 149 रुपये है और एनुअल प्लान के लिए 999 रुपये खर्च करने होंगे. सबस्क्रिप्शन को परिवार के 5 अन्य सदस्यों के साथ शेयर किया जा सकता है. 

iPhone ऑफ होने पर भी ढूंढ़ सकते हैं—इस स्मार्ट फीचर से होगा कमाल

नई दिल्ली अक्सर लोग कहीं फोन रखकर भूल जाते हैं। ऐसे में अगर फोन की बैटरी खत्म हो गई और वह स्विच ऑफ हो गया तो उसे ढूंढने में समस्या हो जाती है। जिसका समाधान एपल ने निकाल दिया है। एपल के iPhone में फाइंड माई फीचर की मदद से iPhone बंद होने के बाद भी उसे ट्रैक किया जा सकता है। यह तकनीक ब्लूटूथ सिग्नल, आसपास मौजूद एपल डिवाइस और फाइंड माई नेटवर्क पर काम करती है। जिससे डिवाइस की आखिरी लोकेशन आपके पास पहुंच जाती है। आज ही ऑन करें ये सेटिंग iPhone यूजर्स आज ही Find My iPhone ऑन कर लें। इसके लिए सेटिंग्स में जाएं। अपना नाम फाइंड माई में जाकर Find My iPhone ऑन करें। एक बार यह ऑन होते ही बैटरी खत्म होने या फोन बंद होने पर भी उसके लोकेशन डेटा को रिले किया जा सकता है। Find My सेटिंग्स में एक और जरूरी विकल्प होता है। Find My Network। इसे ऑन करने से आपका iPhone आसपास के नए-पुराने Apple डिवाइसों से Bluetooth के जरिये जुड़कर अपनी लोकेशन अपडेट करता रहता है। दूसरे डिवाइस से तुरंत लोकेशन चेक करें अगर आपका फोन खाे जाए तो किसी दूसरे iPhone, iPad या Mac पर Find My एप खोलें या सीधे iCloud.com पर लॉगइन करें। जैसे ही डिवाइस से कनेक्शन बनेगा, आपको मैप पर उसकी आखिरी लोकेशन दिख जाएगी। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपकी डिवाइस कहां पर है। Find My एप में Lost Mode एक्टिव करने से आपका डिवाइस तुरंत रिमोटली लॉक हो जाता है और स्क्रीन पर एक कस्टम मैसेज दिखता है। जिसमें आप अपना वैकल्पिक नंबर जोड़ सकते हैं। iPhone ऑन होते ही आएगा नोटिफिकेशन   Find My एप में Notify When Found भी ऑन कर लें। इससे जैसे ही आपका iPhone दोबारा ऑन होगा या नेटवर्क से जुड़ेगा, आपको तुरंत नोटिफिकेशन मिलेगा। इससे आप बार-बार मैप चेक करने की टेंशन से बच जाते हैं।

आधार यूजर्स सावधान! फोटोकॉपी पर लगी रोक, UIDAI ने जारी किया बड़ा अपडेट

नई दिल्ली आपको होटल में चेक इन करना है, बैंक में खाता खुलवाना हो, लोन लेना है या फिर अपने बच्चों का स्कूल-कॉलेज में दाखिला करवाना है आदि। आपको यही नहीं बल्कि, ऐसे ही कई अन्य कामों के लिए भी आधार कार्ड की जरूरत पड़ती है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई द्वारा भारत के नागरिकों का आधार कार्ड बनाया जाता है। आधार कार्ड में आपकी बायोमेट्रिक और डेमोग्राफिक जानकारियां होती हैं। जैसे, नाम, पता, जन्मतिथि और फिंगर प्रिंट आदि। इन सबके बीच आपने एक चीज नोटिस की होगी या आप खुद ही इसे करते होंगे कि होटल में चेक इन करने के लिए या कई अन्य जगहों पर अपने आधार की फोटोकॉपी देते होंगे? पर अब ऐसा बंद होने जा रहा है क्योंकि यूआईडीएआई इसको लेकर जल्द ही एक नया नियम लागू कर सकता है। तो चलिए जानते हैं इस नए नियम के बारे में। आधार कार्डधारक अगली स्लाइड्स में इस बारे में जान सकते हैं… क्या कहता है नया नियम?     दरअसल, अब तक आपको जहां पर आधार की फोटोकॉपी देनी पड़ती थी। उस पर अब जल्द ही रोक लग जाएगी, क्योंकि आधार एक ऐसा नया नियम लाने जा रही है जिसके तहत अब कोई भी आपसे आधार की फिजिकल फोटोकॉपी न ले सकेगा और न ही उसे स्टोर कर सकेगा। क्यों पड़ी इस नए नियम का जरूरत?  अभी कई जगहों पर लोगों को अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी देनी होती है जिसे यूआईडीएआई द्वारा गलत माना गया। सरकार का मानना है कि पेपर आधारित आधार कार्ड वेरिफिकेशन न सिर्फ कानून के खिलाफ है बल्कि, ये कार्डधारकों की प्राइवेसी के लिए भी बड़ा खतरा बन जाता है। इसलिए अब इस नए नियम को लाया जा रहा है। कैसे काम करेगा और कब से लागू हो सकता है नया नियम?     यूआईडीएआई ने इस नए नियम को लेकर नया फ्रेमवर्क मंजूर किया है जिसके बाद अब जो भी संस्था ऑफलाइन आधार वेरिफिकेशन करना चाहते हैं उसे पहले यूआईडीएआई में रजिस्टर करना होगा और इसके बाद वो क्यूआईर कोड या एप बेस्ड वेरिफिकेशन का इस्तेमार कर सकेगी। जिसे भी ऑफलाइन आधार वेरिफिकेशन करना है उसे यूआईडीएआई के साथ रजिस्ट्रेशन के बाद एक सुरक्षित एपीआई का एक्सेस मिलेगा जिससे वे डिजिटल तरीके से आधार की जांच कर सकेंगे। यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार के मुताबिक, इस नियम को मंजूरी मिल चुकी है और उसे जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा। कहां-कहां देनी होती है आधार की फोटोकॉपी?     दरअसल, मौजूदा समय में हमें कई जगहों पर आधार की फोटोकॉपी देनी पड़ती है। इसमें होटल में चेक इन करते समय, इवेंट आयोजन करवाते समय, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, कई एग्जाम सेंटर पर आदि। पर इस नए नियम के बाद फिजिकल फोटोकॉपी लेना और उसे स्टोर करना रूक जाएगी।  

गुनगुने पानी के गरारे करें कफ रहेगा दूर

सर्दी का मौसम आ ही गया। इस मौसम की अनेक समस्याओं में कफ भी एक है। इसके अनेक कारण हैं, पर सिर, पैर, छाती और कान पर लगने वाली ठंडी हवा एक बड़ा कारण बन जाती है। कफ से बचाव या उपचार के लिए प्राकृतिक चिकित्सा बेहद फायदेमंद है। आइए जानें, इससे बचाव के प्राकृतिक उपाय। जल और चिकनाई का प्रतीक है कफ। आयुर्वेद में कफ को भारी, ठंडा, मृदु, चिकना, मीठा और स्थिर आदि गुणों से युक्त माना गया है। जो द्रव्य इसके विपरीत गुणों वाले होते हैं उनसे कफ शांत होता है। कफ कुपित होने के कारण:- -कफकारी आहार की अधिकता। -चिकने, बहुत ठंडे पदार्थों का बहुत अधिक सेवन। -मीठे और भारी पदार्थों का अधिक सेवन। -चावल, उड़द, मक्खन, मांसाहार और खट्टे रस वाले पदार्थों का सेवन भी कफ बनाता है। -एक भोजन के पचे बिना दूसरा भोजन करने की प्रवृत्ति से भी कफ बढ़ जाता है। -असंयमित दिनचर्या जैसे दिन में सोना, देर तक सोए रहना, ज्यादा देर बैठे-बैठे काम करना, आलस्यपूर्ण दिनचर्या, -योग-व्यायाम अथवा श्रम का अभाव आदि से भी कफ बढ़ता है। -अधिक शीत सहने या एसी का अधिक देर तक प्रयोग करने से भी कफ हो जाता है। कफ शांत करने के उपाय:- -उपरोक्त कारणों को दूर करते हुए कफकारी पदार्थों का सेवन बंद करना चाहिए। -शीतल आहार बंद करना चाहिए। -सुबह नमक-हल्दी युक्त गुनगुने पानी के गरारे करें। ऐसा सर्दी के पूरे मौसम में करें। -पेट को साफ रखें, कब्ज न रहने दें। -शहद मिला गुनगुना पानी सुबह खाली पेट लेना चाहिए। -त्रिफला, चना, मूंग, आंवला, गिलोए, लहसुन, नीम आदि पदार्थ कफ को शांत करते हैं। -रात को ज्यादा खाने से भी सुबह कोल्ड हो जाता है, इसलिए कफ शमन के लिए रात का भोजन हल्का लें। -उबले व स्वच्छ जल का सेवन करना चाहिए। -गर्म पानी से स्नान करना चाहिए। -गर्म वातावरण में रहना, समय पर सोना, समय पर जागना, समय पर खाना आदि उत्तम और आवश्यक उपाय हैं। उपवास चिकित्सा:- -उपवास करने से कफ का प्रकोप बहुत जल्द शांत होता है, इसलिए सप्ताह में एक दिन या 15 दिन पर या फिर -कम से कम माह में एक बार उपवास अवश्य रखें। -कच्ची सब्जियां, फल, सब्जियों का रस, फलों का रस, नारियल पानी, नीबू पानी, हल्दी युक्त दूध आदि आहार तथा रसाहार को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए एवं दैनिक जरूरत के अनुसार लेना चाहिए। -कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम, शेक आदि का इस्तेमाल न करें। डब्बा बंद खाद्य पदार्थ, मांसाहार, ओवर ईटिंग, बहुत -ज्यादा मीठे पदार्थ, खट्टे पदार्थ के इस्तेमाल से बचना चाहिए। -एक साथ ठंडा-गर्म खाना और बंद कमरे में रहने से बचना चाहिए। -विशेष परिस्थिति में विशेषज्ञ की देख-रेख में एक बार अवश्य उपवास करें। प्राकृतिक चिकित्सा:- -गुगगुने पानी का अनीमा करें। -पैरों का गर्म स्नान करें। इसके लिए एक टब में सहने योग्य गर्म पानी रखें। सिर पर कपड़ा ओढ़ कर अपने दोनों -पैर उस टब में रख कर बैठ जाएं। पानी की गर्माहट खत्म हो जाए तो पैर टब से निकाल लें। -15-20 कटि स्नान (हिप बाथ) करें। इसे गर्म पैरों के स्नान की तरह किया जाता है। -भाप स्नान और सूखा घर्षण भी लाभकारी है। सूखे घर्षण में पूरे शरीर को रगड़ कर शरीर को गर्म करना होता है। -प्रति दिन 10 मिनट सूर्य स्नान अवश्य करें। आहार-विहार:- -अजवाइन के पानी की भाप लें। सौंफ, अदरक, इलाइची, तुलसी पत्ता, मुलेठी, पुदीने का काढ़ा दिन में एक से दो बार लें या ग्रीन टी का इस्तेमाल करें। -सितोपलादि चूर्ण शहद में मिला कर सुबह-शाम एक छोटा चम्मच लें। नाभि पर सरसों का तेल गुनगुना करके लगाएं और दिन भर में एक-दो बार नाक में बादाम का तेल लगाएं। -गुनगुने पानी में हल्का नमक डाल कर जल नेति करें। इससे नाक साफ हो जाएगी और कफ-बलगम निकल जाएगा। -सुबह खाली पेट तीन से पांच गिलास गुनगुना पानी पीकर कुंजल क्रिया करें। कागासन में बैठ कर तीन से पांच गिलास पानी लगातार पिएं। फिर खड़े होकर नीचे झुकते हुए बायां हाथ पेट के ऊपरी भाग पर दबाएं और सीधे हाथ की तीन उंगलियां जीभ के ऊपरी भाग पर दबा कर उल्टी करें। यह कुंजल क्रिया है। हृदय रोगी, हाई बीपी के रोगी और अल्सर के रोगी इस क्रिया को न करें। पूरे शरीर की मालिश:- नहाने से पहले प्रति दिन तिल के तेल से पूरे शरीर की मालिश करें। इससे भी कफ शांत होगा और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। योग उपचार:- सूर्य नमस्कार, वीर भद्रासन, उत्तानपादासन, अष्टपाद उत्तानासन, भुजंगासन, मकरासन, आदि में से किसी का चयन अपनी जरूरत के अनुसार करें। सूर्यभेदी प्राणायाम, उज्जायी, भस्त्रिका, कपालभाति आदि का अभ्यास करना भी फायदेमंद रहता है।  

सर्द के मौसम में एड़ियों की करें सही देखभाल!

सर्द का मौसम शुरू हो गया है….ऐसे में एड़ियो की अगर सही देखभाल ना की जाए तो एड़ियां सूखे हो जाते है और फटने लगते है। सूखे और खुजली करने वाले पैर असुविधा का सबसे बड़ा कारण होते है। अगर इनका उपचार ना किया जाय तो इनमे दरार बन सकती है जो दर्द कारण बन सकते है और जिनमें जीवाणु आसानी से पनप सकते हैं। इससे आपमें संक्रमण भी हो सकता है। कुछ यूं करें इनका उपचार करे अपने पैरों को नम रखे औऱ एक अच्छे माश्चराइजर का प्रयोग करें। और हो सके तो आप रुई के मोजे पहने ताकि आप पैंरो की नमी बरकरार रहे। आफ चाहे तो लोशन की सरसो का तेल भी प्रयोग कर सकती है। आरामदायक जूते पहनें जिनकी वजह से आपके पैरों को काफी जगह मिल सके। अपने पैरों को साफ करने के लिए एक अच्छा जीवाणुरोधी साबुन का ही इस्तेमाल करें। अपने पैंरो के डेड स्किन को हटाने के लिए एक प्युमिक स्टोन का प्रयोग करे, जो सख्त त्वचा को कम कर सके और बाद में टूट सकती है। और आप इसमें सावधान भी रहें ताकि जैसे ही आपको कोई भी दर्द महसूस हो तो आप रुक सके। अपने पैरों पर कम से कम हफ्तें में एक बार नीबू घीसे और आप अपने पैरों को गर्म पानी के टब में भी डुबो सकते हैं जिसमे की 1 कप इप्सम नमक मिला हुआ हो। अक्सर यह संभव नहीं हो पाता है की आप अपनी सूखी त्वचा का घरेलू उपचार कर पाए। सूखी त्वचा किसी अन्य बीमारी का भी संकेत हो सकती है और इसलिए जरूरी है की आप डॉक्टर की सलाह ले।  

बिना बीप कोई भी फोन कॉल रिकॉर्ड करें

  बेस्ट कॉल रिकार्डर एक पूरी तरह से कस्टमाइज किया जा सकने वाला एस60 सिंबयिन सॉफ़्टवेयर है, इसके द्वारा आपके मोबाइल फोन पर आने वाली और की जाने वाली सभी कॉलें रिकॉर्ड की जा सकती हैं भले ही वह नम्बर आपकी फोन लिस्ट में हो या फिर न हों। यह कॉल रिकार्डिंग साफ्ट्वेयर बहुत ही सरल है। इसके सेटिंग विकल्प बेहद आसानी से समझ में आने वाले हैं। इसमें उपलब्ध महत्वपूर्ण गुण हैं… -इसमें कॉल रिकॉर्ड करते समय बीप की आवाज बंद कर सकते हैं -इसमें स्वतः ही कॉल रिकॉर्ड होने लगती है, बात-चीत कितनी भी लम्बी क्यों न हो, रिकॉर्ड की जा सकती है। -यदि आप फोन मेमोरी इस्तेमाल करते हैं तो आप रिकॉर्ड की गयी कॉल कहां पर सुरक्षित की जायेगी इसे निश्चित कर सकते हैं। -इसमें आप यह सेट कर सकते हैं कि किस नम्बर से आने वाली कॉल को रिकॉर्ड किया जायेगा या फिर आने वाली कॉल ही रिकॉर्ड की जायेंगी या फिर सिर्फ की जाने वाली कॉल ही। -इसका प्रयोग करने पर आपके मोबाइल की बैटरी खर्च होने की दर बहुत ही कम है। -इसका इंटरफेस बेहद सरल और समझ में आने वाला है।  

क्यों महिलाओं में हार्ट अटैक बन रहा है खतरनाक साइलेंट किलर? जानिए अहम बातें

लगभग 48 फीसद महिलाओं की मौत के ज्यादातर कारणों में से एक हैं- हार्ट अटैक। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए यह एक साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है। महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों के मुकाबले अलग होते हैं। आज की बदलती जीवनशैली में कम उम्र में भी महिलाएं हार्ट अटैक का शिकार बन रही हैं। फास्ट फूड का सेवन, तनाव, अनियमित खानपान और घर-बाहर की भागदौड़ में उनका स्वास्थ्य इग्नोर हो रहा हैं। ऐसें में छोटी-मोटी बीमारियों के अलावा बड़ी बीमारियां भी उन्हें चपेट में ले रही हैं। हार्ट अटैक के लक्षणों और अगर समय रहते न पहचाना गया, तो ये मृत्यु का कारण बनते हैं। पुरुषों में जहां हार्ट अटैक के लक्षणों में सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी शामिल है, वहीं महिलाओं में दर्द के बिना सांस लेने में दिक्कत होती है, इस वजह से कई महिलाएं इसे मामूली परेशानी समझ लेती हैं और नतीजा हार्ट अटैक। सांस संबंधी परेशानी में तुरंत डॉक्टर के पास जरूर जाएं ताकि समय रहते इलाज किया जा सकें। सर्वे के मुताबिक लगभग 40 फीसद महिलाओं में ऐसी परेशानी देखने को मिली है। इसके अलावा अगर आपके शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द हैं तो यह खतरनाक हो सकता है, जैसे गर्दन, पीठ, कंधा बगैरह। इनमें अगर दर्द ज्यादा हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह हार्ट अटैक के लक्षणों में से एक हो सकते हैं। इन जगहों से दिल की कई धमनियां जुड़ी रहती हैं। इसीलिए इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। दिल तक खून पहुंचाने वाली दाई धमनी में अगर कोई रूकावट आ जाए तो यह हार्ट अटैक का कारण बनते हैं। इस परिस्थिति में उल्टी, मितली और पेट की गड़बड़ी जैसे लक्षण महिलाओं में दिखते हैं। इसलिए ऐसे लक्षणों को हल्के में न लें, ये हार्ट अटैक के लक्षण भी हो सकते हैं। बेवजह की थकान और अचानक से तेज नींद आना हार्ट अटैक का कारण बनता हैं। कई महिलाओं में यह परेशानी देखने को मिलती हैं कि अचानक उन्हें बेवजह थकान महसूस होने लगती है और फिर हार्ट अटैक के कारण उन्हें अस्पताल में एडमिट होना पड़ा। कई महिलाएं तो ऐसी हालात को दिन-भर की थकान समझ बैठती है और नतीजा अच्छा नहीं होता। मेनोपॉज के बाद अचानक घबराहट या पसीना आए तो किसी भी महिला के लिए शायद नार्मल बात होगी। मगर मेनोपॉज के पहले ही अगर यह लक्षण नजर आने लगे, तो बुद्धिमानी इसी में हैं कि समय रहते संभल जाइए। वरना ये लक्षण आपको अस्पताल पहुंचा सकते हैं।  

इन 5 बातों को AI से शेयर करना पड़ सकता है भारी, अभी जानें क्या न बताएं ChatGPT-Gemini को

नई दिल्ली ChatGPT और Gemini का इस्तेमाल आजकल ज्यादातर लोग करते हैं। ऑफिस के काम से लेकर पढ़ाई करने तक, कई तरह के सवाल इन एआई मॉडल से पूछे जाते हैं। लोग ' चैटजीपीटी ' और 'जेमिनी नैनो बनाना' के साथ अपनी फोटो भी शेयर करते हैं। इतना ही नहीं, इससे इंटरव्यू में पूछे जाने वाले सवाल का आंसर भी लोग मांगते हैं। इसके अलावा, एआई मॉडल से अपने हाथ की फोटो शेयर करके अपना भविष्य जानने की भी कोशिश करते हैं। हालांकि, एआई मॉडल के साथ सारी जानकारी शेयर करना आपके लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। आपको बैंक अकाउंट डिटेल और पासवर्ड जैसी पर्सनल डिटेल चैटजीपीटी के साथ शेयर नहीं करनी चाहिए। पर्सनल जानकारी शेयर ना करें चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे एआई मॉडल के साथ कभी भी पर्सनल डिटेल शेयर नहीं करनी चाहिए। आपको अपने किसी भी अकाउंट का पासवर्ड या फिर लॉग इन डिटेल, आधार कार्ड नंबर, पैन कार्ड की जानकारी नहीं देनी चाहिए। ये जानकारी लीक होने से आपको नुकसान हो सकता है। इनका कोई भी गलत इस्तेमाल कर सकता है। बैंकिंग डिटेल शेयर करना पड़ सकता है भारी आपको अपनी बैंकिंग डिटेल जैसे अकाउंट नंबर, डेबिट-क्रेडिट कार्ड डिटेल, IFSC कोड, CVV नंबर एआई मॉडल के साथ शेयर नहीं चाहिए। ये डिटेल लीक हो जाने पर आपका बैंक अकाउंट खाली भी हो सकता है। सहेली समझ सीक्रेट ना करें शेयर ऐसी कई रिपोर्ट आती रहती हैं कि एआई मॉडल के साथ शेयर किए गए डेटा के आधार पर कंपनियां उन्हें ट्रेनिंग देती हैं। इससे डेटा के लीक होने की भी संभावना होती है। इस कारण चैटजीपीटी या फिर Google जेमिनी के साथ ऐसा कोई भी सीक्रेट शेयर ना करें, जिसके बाहर आ जाने से आपके लिए मुसीबत हो सकती है। मेडिकल कंडीशन शेयर करके इलाज ना पूछें ChatGPT और Gemini जैसे एआई मॉडल काफी स्मार्ट होते हैं। इन्हें सभी बारे में अच्छी जानकारी होती है, लेकिन इनके द्वारा बताई गई सभी बातें सही हों, ये जरूरी नहीं है। इस कारण लोगों को अपनी मेडिकल कंडीशन के बारे में ज्यादा जानकारी एआई चैटबॉट के साथ शेयर नहीं करनी चाहिए और उनका बताया गया इलाज नहीं अपनाना चाहिए। ध्यान रखें कि वे चैटबॉट हैं डॉक्टर नहीं। रोमांट‍िक बातें नहीं करनी चाहिए लोग एआई चैटबॉट को अपने सुख और दुख का साथी बना लेते हैं। उनसे अपने दिल की और रोमांट‍िक बातें करते हैं। एआई चैटबॉट आपसे रोमांट‍िक बातें तो कर सकते हैं, लेकिन आपके इमोशन को नहीं समझ सकते। वे इंसान नहीं है। मशीन की तरह जवाब देते हैं। इसील‍िए एआई चैटबॉट के साथ कोई भी न‍िजी बात या अपने इमोशन शेयर करने से बचें।

तेज़-तर्रार रोबोट ने समुंदर की गहराई से धरती पर पहला अविश्वसनीय खजाना खोजा

  जर्मनी के वैज्ञानिकों ने एक खास रोबोट की मदद से प्रशांत महासागर में 1,300 मीटर गहराई तक पहुंचकर कुछ ऐसा देखा जो धरती पर पहले कभी नहीं देखा गया। यह खोज पापुआ न्यू गिनी के पास कोनिकल ज्वालामुखी के पास हुई है। रोबोट ने वहां एक नया हाइड्रोथर्मल क्षेत्र ढूंढा जिसका नाम करंबुसेल रखा गया है। अब इस रोबोट की चर्चा दुनिया भर में हो रही है, उसने ऐसा काम कर दिखाया जो शायद ही कोई इंसान कर पाता। चलिए जान लेते हैं कि इस रोबोट में क्या खूबियां है और रोबोट ने जो खोजा है वह क्या है? काइल 6000 में क्या-क्या खूबियां? इंडियन डिफेंस रिव्यू की रिपोर्ट (Ref.) बताती है कि इस खोज में सबसे बड़ा हाथ रहा जर्मनी के GEOMAR संस्थान के रोबोट 'काइल 6000' का है। यह रोबोट 6,000 मीटर तक की गहराई में जा सकता है, यानी दुनिया के 90% से ज्यादा समुद्री तल तक पहुंच सकता है। अंधेरे में भी यह शानदार तस्वीरें और वीडियो लेता है। इसके मजबूत हाथों से पत्थर, पानी और गैस के नमूने लेना बहुत आसान हो गया। रोबोट को दूर से ही कंट्रोल किया जाता है, इसलिए इंसान को खतर खतरनाक गहराई में जाने की जरूरत नहीं पड़ी। रोबोट ने गर्म पानी और ठंडी मीथेन गैस दोनों जगहों से सैंपल लिए और सारी जानकारी जहाज तक पहुंचाई। इसे जहाज से एक पतली फाइबर ऑप्टिक केबल से जोड़ा जाता है और बिजली से चलता है। रोबोट में क्या-क्या लगा है? इसमें दो मजबूत रोबोटिक हाथ लगे हैं जिनसे वैज्ञानिक सैंपल ले सकते हैं, पत्थर तोड़ सकते हैं या कोई भी मुश्किल काम कर सकते हैं। सात इलेक्ट्रिक मोटरों की मदद से ये आगे-पीछे और ऊपर-नीचे आसानी से चलता है। इसमें हाई डेफिनेशन कैमरे और लेजर स्केल हैं जिनसे समुद्र के अंदर की बहुत साफ तस्वीरें और वीडियो मिलते हैं। ये अपने आप दिशा, ऊंचाई और जगह पर रुक भी सकता है, भले ही तेज धारा बह रही हो। कुल मिलाकर ये समुद्र की गहराई में वैज्ञानिकों का सबसे भरोसेमंद साथी है। हाइड्रोथर्मल क्षेत्र खोज निकाला करंबुसेल में पहली बार ऐसा देखा गया कि बहुत गर्म पानी (51 डिग्री तक) और ठंडी मीथेन गैस (3 से 20 डिग्री) सिर्फ 30-40 सेंटीमीटर की दूरी पर एक साथ निकल रही हैं। मीथेन गैस की मात्रा 80% से ज्यादा है, जो दुनिया के किसी भी हाइड्रोथर्मल क्षेत्र से बहुत ज्यादा है। रोबोट ने दिखाया कि यहां चिमनी जैसे ढांचे नहीं बने, बल्कि सीधे चट्टानों की दरारों से पानी और गैस निकल रही है। समुद्र के तल पर क्या-क्या मिला? रोबोट ने साफ तस्वीरें लीं जिसमें सैकड़ों-हजारों जीव एक साथ रहते दिखे। वैज्ञानिकों ने 23 ऐसे जीव गिने जो शायद सिर्फ यहीं मिलते हैं। ये जीव सूरज की रोशनी के बिना, गैस और गर्म पानी से मिलने वाली केमिकल एनर्जी से जिंदा रहते हैं। रोबोट काइल 6000 की बदौलत उस दुनिया को देखा और समझा गया जो पहले किसी ने नहीं देखी। यह खोज बताती है कि समुद्र की गहराई में अभी कितने रहस्य छुपे हैं और उन्हें बचाना कितना जरूरी है। रोबोट ने और क्या-क्या दिखा? रोबोट ने चट्टानों के टुकड़े भी उठाए। उनमें सोना, चांदी और दूसरे कीमती धातु के पुराने निशान मिले। इससे पता चला कि लाखों साल पहले यहां बहुत गर्म पानी ने सोने का खजाना बनाया था। आज भी वही ज्वालामुखी गर्मी नीचे काम कर रही है। यह खूबसूरत जगह पास ही के बड़े सोने की खदान के ठीक सामने है। कंपनियां यहां समुद्र तल से खनिज और तेल-गैस निकालने की तैयारी कर रही हैं। वैज्ञानिक चिंता जता रहे हैं कि अगर खदान शुरू हुई तो यह अनोखी दुनिया हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।

क्या रात में स्मार्टवॉच पहनना सुरक्षित है? पूरी जानकारी

नई दिल्ली क्या आप स्मार्टवॉच इस्तेमाल करते हैं? ऐसे में इस बात की दुविधा आपको भी होती होगी कि सोते समय स्मार्टवॉच पहनी जाए या नहीं? कई लोग इसे कोई बड़ी बात नहीं मानते, वहीं कई लोग सोते समय अपने शरीर पर किसी भी गैजेट के होने से परहेज करते हैं। चलिए फिर आज तमाम दुविधाओं का अंत करते हुए पता लगाते हैं कि स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहिए या नहीं? इसके बाद आप इस बात का फैसला बेहतर तरीके से कर पाएंगे कि स्मार्टवॉच को सोते समय पहनना है या नहीं। नींद की क्वालिटी ट्रैक करने के लिए स्मार्टवॉच कंपनियां अपनी घड़ियों में खासतौर पर स्लीप मोड फीचर देती हैं। इस फीचर की मदद से यूजर अपनी नींद की क्वालिटी का सही ट्रैक पता कर सकता है। स्मार्टवॉच हल्की, गहरी और REM स्लीप को मापती है, जिससे आपको समझ आता है कि आपकी नींद कितनी बेहतर या खराब है। इसके अलावा स्मार्टवॉच आपको नींद सही से पूरी न होने पर चेतावनी भी दे सकती है, ताकि आप ठीक से नींद लेने पर ध्यान दे सकें। अगर आपका मकसद अपनी नींद की क्वालिटी पता करना या फिर नींद की क्वालिटी सुधारना है, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहिए। दूसरों को बिना डिस्टर्ब किए जागने के लिए अगर आप सुबह जल्दी उठते हैं और नहीं चाहते कि आपके फोन का अलार्म बाकी सभी की नींद खराब करे, तो भी आप स्मार्टवॉच पहन कर सो सकते हैं। दरअसल आप स्मार्टवॉच पर अलार्म लगाकर सोएंगे, तो वह आवाज करने की जगह आपके हाथ पर वाइब्रेट होकर आपको जगाएगी। इससे आप समय से उठ पाएंगे और किसी की नींद खराब भी नहीं होगी। बता दें कि ऐपल या सैमसंग जैसी महंगी स्मार्टवॉच में अलार्म के लिए खासतौर पर सॉफ्ट तरह की वाइब्रेशन का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि आपकी नींद तीखी और झटकेदार वाइब्रेशन से ना टूटे। हेल्थ से जुड़े सभी अपडेट पाने के लिए स्मार्टवॉच सोते समय आपके दिल की धड़कन से लेकर खून में मौजूद ऑक्सीजन तक लगातार नापता है। यह आपके स्ट्रेस लेवल आदि पर भी नजर रखती है। ऐसे में अगर आप अपने स्वास्थ्य को लेकर अलर्ट रहना चाहते हैं, तो रात में स्मार्टवॉच पहन कर सो सकते हैं। ऐसे में अगर आपकी हेल्थ से जुड़ी कोई मेट्रिक खतरे के निशान पर जाती है, तो यह आपको समय रहते सजग कर सकती है। नींद में अड़चन से बचना हो तो अगर आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें कलाई में कुछ भी पहनकर सोने से असुविधा होती है, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर नहीं सोना चाहिए। दरअसल कई बार स्मार्टवॉच की वजह से कलाई में घर्षण, पसीना या भारीपन महसूस हो सकता है। ऐसे में स्मार्टवॉच पहन कर सोने से किसी तरह का फायदा होने की जगह, सोने में ही असुविधा हो सकती है। बेहतर बैटरी लाइफ के लिए अगर आप अपनी स्मार्टवॉच से बेहतर बैटरी लाइफ चाहते हैं, तो उसे रात में पहनकर नहीं सोना चाहिए। अगर आप रातभर स्मार्टवॉच को नींद या स्वास्थ्य से जुड़ी बाकी डिटेल्स मापने के ल‍िए इस्‍तेमाल करते हैं, तो उठने के बाद स्मार्टवॉच की बैटरी बेहद कम मिलती है। ऐसे में दिन में सबसे पहले आपको अपनी स्मार्टवॉच को चार्ज करना पड़ता है। अगर आप ऐसा नहीं चाहते, तो रात में स्मार्टवॉच पहन कर न सोएं। अगर नींद कच्ची है तो अगर आपकी नींद कच्ची है या फिर आप हल्के शोर या रोशनी से उठ जाते हैं, तो आपको स्मार्टवॉच पहन कर नहीं सोना चाहिए। हो सकता है कि आपकी स्मार्टवॉच रात में किसी तरह के नोटिफिकेशन के चलते वाइब्रेट होने लगे या फिर स्मार्टवॉच के सेंसर की लाल-हरी लाइट आपकी नींद तोड़ दे। ऐसे में स्मार्टवॉच को पहने कर सोने से बचें। देखा जाए, तो स्मार्टवॉच पहन कर सोना पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है। ऐसे में अपनी आदत के अनुसार चुनें कि आप स्मार्टवॉच पहन कर सोना चाहते हैं या नहीं।