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ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप का कड़ा आदेश: ‘जल्द निपटाओ, और भी काम हैं

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के साथ जारी युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहते और आने वाले कुछ हफ्तों में इसे खत्म करने की कोशिश में हैं. ट्रंप आने वाले कुछ हफ्तों में इस संघर्ष पर पूर्णविराम लगाना चाहते हैं ताकि वे अपने अन्य घरेलू और राजनीतिक एजेंडों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।  Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप का मानना है कि युद्ध अपने अंतिम चरण में है और उन्होंने अपने सहयोगियों को सार्वजनिक रूप से बताए गए 4-6 हफ्तों के टाइमलाइन पर टिके रहने के निर्देश दिए हैं. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने मई के मध्य में चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ बीजिंग में एक शिखर सम्मेलन की योजना बनाई है. उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक के शुरू होने से पहले ईरान युद्ध समाप्त हो जाएगा।  समस्या यह है कि ट्रंप के पास युद्ध समाप्त करने के आसान विकल्प नहीं हैं और शांति वार्ता अभी शुरुआती चरण में है. बाहरी राजनीतिक सहयोगियों के साथ बातचीत के दौरान उनका ध्यान कई बार अन्य मुद्दों पर भी गया, जिनमें आने वाले मध्यावधि चुनाव, हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन एजेंट भेजने का उनका फैसला और मतदाता पात्रता नियमों को कड़ा करने वाले कानून को कांग्रेस से पारित कराने की रणनीतियां शामिल हैं।  एक ओर तो ट्रंप युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने मध्यपूर्व में अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दबाव भी बढ़ाया है. मध्यस्थ देशों के जरिए शुरुआती बातचीत शुरू हुई है, लेकिन अभी शांति वार्ता शुरुआती दौर में ही है और कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है।   तेल और रणनीति रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सलाहकारों के सामने ये बात रखी कि युद्ध खत्म करने के किसी समझौते के तहत अमेरिका को ईरान के तेल तक पहुंच मिल सकती है. हालांकि, इस पर अभी कोई ठोस योजना नहीं बनी है।  ट्रंप जमीनी स्तर पर अमेरिकी सैनिक भेजने के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं, लेकिन इससे युद्ध लंबा खिंच सकता है, जिसे वह टालना चाहते हैं. अब तक लगभग 300 अमेरिकी सैनिक घायल और 13 की मौत हो चुकी है, जो उनकी चिंता का एक बड़ा कारण है.ट्रंप के करीबी सहयोगियों में इस बात को लेकर मतभेद है कि आगे क्या रणनीति होनी चाहिए. कुछ लोग कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, जबकि कुछ सख्त सैन्य कार्रवाई और यहां तक कि ईरान में शासन परिवर्तन की बात कर रहे हैं।  अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने का आदेश देने को तैयार हैं, लेकिन ऐसा करने से हिचक रहे हैं क्योंकि इससे युद्ध जल्दी खत्म करने का उनका लक्ष्य प्रभावित हो सकता है. उन्हें चिंता है कि यदि युद्ध जारी रहा तो अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने या घायल होने की संख्या बढ़ सकती है. अब तक लगभग 300 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और 13 की मौत हो चुकी है।  वैश्विक असर और जोखिम यदि जल्द समझौता नहीं होता, तो होर्मुज में रुकावट जारी रह सकती है, जिससे वैश्विक तेल बाजार प्रभावित होगा. वहीं इजरायल और खाड़ी देशों की भूमिका भी इस संघर्ष को और जटिल बना सकती है।  इस युद्ध का असर अमेरिकी राजनीति पर भी दिख रहा है. आगामी चुनावों और बढ़ती महंगाई के बीच ट्रंप पर दबाव है. अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होती जा रही है. हाल ही में फ्लोरिडा की एक महत्वपूर्ण सीट डेमोक्रेट्स के खाते में जाने से हड़कंप मचा है. विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई और जीवनयापन की लागत आगामी चुनावों में ट्रंप की पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।  रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप खुद भी मानते हैं कि युद्ध उनके अन्य एजेंडे से ध्यान भटका रहा है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान समझौते के लिए आगे नहीं बढ़ता, तो अमेरिका पहले से भी ज्यादा कड़ा हमला कर सकता है। 

भारत ने किया बड़ा कदम: ईरान से चीन के लिए जा रहा LPG जहाज खरीदा, रुपये में पेमेंट

मुंबई  अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण साल 2019 से थमा भारत-ईरान ऊर्जा व्यापार एक बार फिर शुरू होता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा तेल और गैस की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए दी गई 30 दिनों की विशेष छूट के बाद ईरान से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर चला एक टैंकर भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला है। शिपिंग डेटा (LSEG) के अनुसार, 'ऑरोरा' नामक प्रतिबंधित पोत ईरानी एलपीजी ले जा रहा है। आज इसके मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। दिलचस्प बात यह है कि यह कार्गो मूल रूप से चीन के लिए रवाना हुआ था, लेकिन बदलती परिस्थितियों के बीच इसे भारत की ओर मोड़ दिया गया। रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, यह खेप एक ट्रेडर के माध्यम से खरीदी गई है और इसका भुगतान भारतीय रुपयों में किया जाएगा। 3 कंपनियों के बीच वितरण भारत वर्तमान में दशकों के सबसे गंभीर गैस आपूर्ति संकट से जूझ रहा है। एलपीजी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक होने के नाते भारत अपनी 60% मांग आयात से पूरी करता है। इस खेप को देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के बीच वितरित किया जाएगा। घरेलू रसोई गैस की जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने उद्योगों को होने वाली गैस आपूर्ति में पहले ही कटौती कर दी है। एक ओर जहां सूत्रों ने खरीद की पुष्टि की है, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्तर पर अभी भी सावधानी बरती जा रही है। केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ईरान से किसी भी लोडेड कार्गो की हमें जानकारी नहीं मिली है।" होर्मुज में फंसे जहाजों की निकासी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। सरकार वहां फंसे अपने जहाजों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस और जग वसंत जैसे चार टैंकरों को सफलतापूर्वक सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। फारस की खाड़ी में फंसे खाली जहाजों पर भी एलपीजी लोड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि देश में आपूर्ति सुचारू बनी रहे।

सुक्खू सरकार का कर्ज बढ़ा, 3 साल में 41173 करोड़ लिया, 2026-27 के लिए क्या है लोन का नया लक्ष्य?

शिमला  हिमाचल प्रदेश में गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही सुक्खू सरकार ने तीन साल में अब तक 41,173 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, जबकि 32,004 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया भी है. यह जानकारी संशोधित बजट अनुमान में दी गई है।  2026-27 के बजट में 11,965 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का प्रस्ताव है. हिमाचल सरकार पर बढ़ता कर्ज और ब्याज का बोझ, साथ ही राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से सीमित कर आधार के बीच राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन गया है।  संक्षिप्त बजट के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में सरकार की कुल कर्ज देनदारी 1,03,994 करोड़ रुपये रही, जो 2026-27 में बढ़कर 1,12,319 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. सरकार पर कुल कर्ज 2022-23 में 76,681 करोड़ रुपये, 2023-24 में 85,295 करोड़ रुपये और 2024-25 में 93,625 करोड़ रुपये रहा, जो लगातार बढ़ता जा रहा है।  जानकारी के अनुसार, 2024-25 में ब्याज भुगतान 6,260.93 करोड़ रुपये और 2025-26 में 6,693 करोड़ रुपये रहा, जो 2026-27 में 7,271 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन ढांचे में भी ब्याज भुगतान में बढ़ोतरी का रुझान दिखाया गया है. इसे 2027-28 में 8,115 करोड़ रुपये और 2028-29 में 8,865 करोड़ रुपये आंका गया है. वहीं सब्सिडी को 2025-26 के 3,205 करोड़ रुपये से घटाकर 2026-27 में 858.98 करोड़ रुपये, 2027-28 में 910.52 करोड़ रुपये और 2028-29 में 965.15 करोड़ रुपये करने का अनुमान है।  स्थिति चिंताजनक बताई गई है क्योंकि वेतन, पेंशन, कर्ज भुगतान, ब्याज भुगतान और अन्य मदों पर सरकार का खर्च बजट का लगभग 80 प्रतिशत है. वहीं पूंजीगत कार्यों और अन्य गतिविधियों के लिए सिर्फ 20 प्रतिशत राशि ही बचती है।  कम बजट किया पेश गौर रहे कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार कम आकार का बजट पेश किया गया. इस बार करीब चार हजार करोड़ रुपये का कम बजट पेश किया गया है. पिछली बार बजट का आकार 58 हजार करोड़ रुपये थे. गौर रहे कि भाजपा सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में करीब 30 हजार करोड़ रुपये कर्ज लिया था. 2012 से 2025 तक हिमाचल प्रदेश का कर्ज 48 हजार करोड़ से एक लाख करोड़ पार कर गया है।  केंद्र ने रैवन्यू डेफेसिट ग्रांट बंद की केंद्र सरकार की तरफ से हिमाचल प्रदेश समेत 17 राज्यों की रैवेन्यू डेफेसिट ग्रांट बंद कर दी गई है. इससे हिमाचल प्रदेश को 35 हजार से 40 हजार करोड़ का नुकसान पांच साल में होगा. वित्त आयोग की सिफारिश पर हर साल  हिमाचल प्रदेश को 3500 करोड़ की आर्थिक सहायता दी जाती थी, जो कि अब बंद कर दी गई है. ऐसे मे अब प्रदेश में आम आदमी पर इसकी मार पड़ रही है.क्योंकि सरकार ने अब पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर सेस लगाने का विधेयक भी विधानसभा में पारित किया है. साथ ही हिमाचल में एंट्री टैक्स में भी ढाई गुना इजाफा किया गया है। 

AI स्टार्टअप की बड़ी योजना, 2,347 करोड़ से भारतीय बाजार में खुलेंगे नए रास्ते

 नई दिल्ली भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) स्टार्टअप Sarvam AI मालामाल होने जा रहा है. कंपनी 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2,347 करोड़ रुपये) की इनवेस्टमेंट के लिए AI जगत की दिग्गज कंपनियों से बातचीत कर रही है।  सरवम AI अभी एनवीडिया, वेंचर कैपिटल फर्म एसेल, इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी HCL Tech के साथ बातचीत कर रही है।  यह बातचीत सफल होती है, तो यह सरवम एआई की ग्रोथ के लिए सकारात्मक साबित होगी. डील पर सहमति बन जाती है तो Sarvam की यह फंडिंग इस साल किसी भारतीय स्टार्टअप के लिए प्राइवेट मार्केट में सबसे बड़ा निवेश राउंड बन सकती है।  Sarvam AI पहले ही Nvidia के चिप्स का यूज कर रहा है Sarvam AI पहले से ही Nvidia के चिप्स का यूज कर रहा है. HCLTech को बतौर इनवेस्टर्स के रूप में शामिल करने से आईटी कंपनी को Sarvam की AI काबिलियत का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।  साथ ही Accel जैसा बड़ा वेंचर कैपिटल फंड भारतीय AI स्टार्टअप में इनवेस्टमेंट करता है तो सरवम AI दुनिया के दूसरे देशों में भी अपनी पहुंच बना सकेगा।  Sarvam AI क्या है?  Sarvam AI, असल में एक बेंगलुरु बेस्ड AI स्टार्टअप है. हाल ही में उसके दो टूल्स चर्चा में रहे हैं, जिनके नाम Sarvam Vision और Bulbul हैं. हाल ही में इन भारतीय AI मॉडल ने बड़े प्लेयर्स को पछाड़ चुका है.  Sarvam Vision AI ने ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) में सबसे शानदार परफॉर्म किया था।  एक बेंचमार्क पर देसी AI ने चैटजीपीटी, गूगल जेमिनाई और Anthropic Claude जैसे बड़े और पॉपुलर AI मॉडल्स को पछाड़ दिया दिया था. इसकी जानकारी Sarvam AI के को-फाउंडर प्रत्युष कुमार दे चुके हैं. को-फाउंडर ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर पोस्ट करके इसकी जानकारी दी थी। 

2029 में लागू होगा महिला आरक्षण, 50% सीटें बढ़ाने की योजना हुई तैयार

नई दिल्ली बीजेपी सरकार 2034 के बजाय, देश में महिला आरक्षण अधिनियम को 2029 से लागू करने के बारे में सोच रही है. केंद्र (लोकसभा) और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लाने पर विचार-विमर्श जारी है।  इंडिया टुडे/आज तक को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीटों में बढ़ोतरी के लिए 50% 'स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला' प्रस्तावित है. गृह मंत्री अमित शाह 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने की प्रक्रियाओं को पारित कराने के लिए पार्टियों के छोटे समूहों के साथ बैठकें कर रहे हैं।  23 मार्च को, गृह मंत्री ने NCP-SP, शिवसेना (UBT), AIMIM और YSRCP के सदस्यों के साथ बैठक की. BRS आखिरी समय में सूचना मिलने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सकी।  सुप्रिया सुले, अरविंद सावंत, असदुद्दीन ओवैसी और मिधुन रेड्डी उन सदस्यों में शामिल थे जिन्होंने गृह मंत्री के साथ बैठक में भाग लिया. सरकार तीन बड़े संशोधन की तैयारी में है. सरकार की राय है कि 2034 की समय सीमा के बजाय, महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू किया जाना चाहिए।  सदस्यों को बताया गया कि केंद्र को 2027 तक जनगणना पूरी होने की उम्मीद थी. इससे 2028 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी हो जाती और दूसरी प्रक्रियाएं उसके बाद होतीं. हालांकि, अब 2011 की जनगणना को आधार माना जा सकता है।   50% सीटें बढ़ाने का फॉर्मूला तैयार! इसके तहत 50% स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला, महिलाओं के लिए वर्टिकल आरक्षण हो. अहम बात ये है कि सरकार ने लोकसभा और विधानसभा सीटों में सीधे 50% की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव दिया है. इससे लोकसभा की वर्तमान संख्या में 50% का इजाफा हो सकता है और संबंधित राज्यों में विधानसभाओं की संख्या में भी 50% की बढ़ोतरी की जाएगी। महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा की बढ़ी हुई संख्या (लगभग 813/814) में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इन 33% आरक्षित सीटों के भीतर एससी/एसटी (SC/ST) आरक्षण को अलग से लागू किया जाएगा।  संवैधानिक संशोधनों के पारित होने के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यूबीटी, एनसीपी-एसपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों के सदस्यों को सूचित किया गया कि देश में परिसीमन की प्रक्रिया लंबित है. पिछले परिसीमन के 25 साल पूरे होने के बाद, सीटों के परिसीमन (और पुनरीक्षण) की प्रक्रिया शुरू की जानी थी।  2029 में लागू हो सकता है 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लोकसभा और विधानसभा के लिए परिसीमन प्रक्रिया एक साथ शुरू की जा सकती है. बैठक में शामिल सदस्यों ने राज्यों पर प्रभाव, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन के मानदंडों के संबंध में कई सवाल उठाए. सूत्रों ने बताया कि एनसीपी-एसपी ने पूछा कि क्या ये बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में भी लागू किए जाएंगे? कहा जा रहा है कि वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के इजाफे के बारे में इन बदलावों के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं. एआईएमआईएम ने उस फॉर्मूले पर चिंता जाहिर की जिसका इस्तेमाल नए निर्वाचन क्षेत्रों को बनाने के लिए किया जा सकता है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां आदिवासी, एससी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है।  दक्षिण भारत का परिसीमन पर ऐतराज दक्षिण भारत के राजनीतिक दलों को जनसंख्या से जुड़े लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन पर कड़ा ऐतराज रहा है. डीएमके, टीडीपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों की राय है कि केंद्र सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बेहतर तरीके से लागू करने के लिए दक्षिण के राज्यों को सजा नहीं दी जानी चाहिए।  इसके अलावा, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके ने 2026 के जनसंख्या आधारित परिसीमन योजनाओं का विरोध करने के लिए JAC (संयुक्त कार्रवाई समिति) मंच बनाया था. सीएम स्टालिन ने इस पर विचार-विमर्श के लिए पंजाब के सीएम भगवंत मान सहित गैर-बीजेपी हितधारकों को बुलाया था।  महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों में 50 प्रतिशत की सीधी बढ़ोतरी का फॉर्मूला और उससे जुड़ी परिसीमन प्रक्रिया इन चिंताओं को कम कर सकती है. दक्षिण के राज्यों के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अगर ये जनसंख्या से जुड़ा नहीं है, तो दक्षिण के राज्यों और क्षेत्रीय दलों को परिसीमन का विरोध नहीं करना चाहिए. वरना आपने हमें बेहतर परिवार नियोजन के लिए सजा नहीं दी होती. हालांकि, परिसीमन फॉर्मूले के लागू होने से जुड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं।   

6th जेनरेशन वॉरफेयर: F-35 और Su-57 जैसे जेट चक्रव्‍यूह में उलझेंगे, भारत का नई रणनीति का खुलासा

बेंगलुरु  डिफेंस टेक्‍नोलॉजी में लगातार नए बदलाव आ रहे हैं. जो देश खुद को इसके अनुरूप नहीं ढाल पा रहे हैं, उनकी नेशनल सिक्‍योरिटी पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है. ईरान और अफगानिस्‍तान पर किए गए हमले इसके ताजा उदाहरण हैं. अमेरिका और इजरायल की तुलना में ईरान की डिफेंस टेक्‍नोलॉजी कमजोर है. यही वजह है कि एयर स्‍ट्राइक में ईरान को व्‍यापक नुकसान उठाना पड़ा है. तेहरान के फर्स्‍ट लाइन टॉप लीडरशिप का तकरीबन खात्‍मा हो चुका है. दूसरी तरफ, ईरानी अटैक में अमेरिका और इजरायल को भी व्‍यापक नुकसान हुआ है. THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम के होते हुए भी ईरान ने गहरे जख्‍म दिए हैं. वहीं, अफगानिस्‍तान पर पाकिस्‍तान की ओर से किए गए अटैक में भारी नुकसान हुआ है. बता दें कि काबुल के पास डिफेंसिव और ऑफेंसिव फायर पावर की बेहद कमी है. इन दोनों वॉर सिनेरियो से एक बात साबित होती है- एयर पावर और डिफेंस सिस्‍टम को और मजबूत करने की जरूरत है. भारत इसको बखूबी समझता है. यही वजह है कि 5th और 6th जेनरेशन की टेक्‍नोलॉजी में महारात हासिल करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. भारतीय वैज्ञानिक अब 6th जेनरेशन वॉरफेयर को लेकर नए प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहे हैं. प्रोजेक्‍ट के सफल रहने पर पांचवीं पीढ़ी के F-35 और Su-57 जैसे सुपर फाइटर जेट आसमानी चक्रव्‍यूह में उलझ कर रह जाएंगे. साथ ही दक्षिण एशिया का पावर बैलेंस भी भारत की तरफ झुक जाएगा. दरअसल, भारत ने छठी पीढ़ी के हवाई युद्ध की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए इंटीग्रेटेड इंडियन कॉम्बैट एरियल सिस्टम (I²CAS) के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय वायुसेना के भविष्य के कॉम्‍बैट इंफ्रास्‍ट्रक्चर को पूरी तरह बदलने की दिशा में अहम मानी जा रही है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2040 के दशक के मध्य तक एक अत्याधुनिक, नेटवर्क सेंट्रिक सिस्टम ऑफ सिस्टम्स तैयार करना है, जिसमें मानव चालित लड़ाकू विमान, ऑटोनोमस ड्रोन और एडवांस डिजिटल कॉम्‍बैट नेटवर्क एक साथ काम करेंगे. I²CAS का कॉन्‍सेप्‍ट कन्‍वेंशनल एयर कॉनफ्लिक्‍ट से अलग है, जहां अब सिंगल फाइटर जेट को स्वतंत्र प्लेटफॉर्म के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा माना जा रहा है. इस ढांचे में प्रत्येक विमान एक कमांड नोड के रूप में काम करेगा, जो एक साथ कई ड्रोन, सेंसर और वेपन सिस्‍टम्‍स को कंट्रोल कर सकेगा. यह पहल वैश्विक स्तर पर चल रहे छठी पीढ़ी के कार्यक्रमों जैसे Future Combat Air System (FCAS) और Global Combat Air Programme (GCAP) के समान है. इन कार्यक्रमों में भी AI, ड्रोन और हाई-स्पीड डेटा नेटवर्क को इंटीग्रेट करने पर जोर दिया जा रहा है. क्‍या है I²CAS? I²CAS के केंद्र में एक मानव चालित स्टील्थ फाइटर होगा, जो मदरशिप के रूप में कामय करेगा और कई मानव रहित प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करेगा. भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) के इस सिस्टम की रीढ़ बनने की उम्मीद है. इसके उन्नत संस्करण जैसे AMCA Mk2 और संभावित छठी पीढ़ी के मॉडल, युद्धक्षेत्र में कमांड और कंट्रोल हब की भूमिका निभा सकेंगे. इस ढांचे में पायलट की भूमिका भी बदल जाएगी. वह केवल विमान उड़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बैटल मैनेजर के रूप में काम करेगा, जो रियल-टाइम में ड्रोन, सेंसर और स्ट्राइक एसेट्स को ऑपरेट करेगा. I²CAS का एक महत्वपूर्ण स्तंभ लॉयल विंगमैन ड्रोन और मानव रहित कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (UCAVs) होंगे. इस दिशा में भारत पहले ही कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है. HAL CATS Warrior, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (CATS) का हिस्सा है, जिसे मानव चालित विमानों के साथ उड़ान भरने और सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉर इक्विपमेंट या हथियार ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है. इसी तरह DRDO Ghatak UCAV एक स्टील्थ फ्लाइंग-विंग यूसीएवी है, जिसे गहराई में जाकर सटीक हमले करने के लिए विकसित किया जा रहा है. इसकी कम रडार विजिबिलिटी इसे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम से बचने में मदद करेगी. कॉम्‍बैट क्‍लाउड क्‍यों है गेमचेंजर? I²CAS का एक और महत्वपूर्ण पहलू कॉम्बैट क्लाउड है, जो एक सुरक्षित और AI बेस्‍ड डिजिटल नेटवर्क होगा. यह नेटवर्क विमान, ड्रोन, सैटेलाइट और कमांड सेंटर को जोड़कर एक साझा युद्धक्षेत्र सूचना प्रणाली तैयार करेगा. इसके माध्यम से सभी प्लेटफॉर्म रियल टाइम में डेटा साझा कर सकेंगे, जिससे लक्ष्य की पहचान और हमले की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.उदाहरण के तौर पर यदि कोई स्टील्थ ड्रोन दुश्मन के रडार को पहचानता है, तो वह जानकारी कॉम्बैट क्लाउड के जरिए दूर मौजूद फाइटर जेट तक पहुंचा सकता है, जिससे वह बिना खुद को खतरे में डाले हमला कर सके. क्‍या है फ्यूचर प्‍लान? भविष्य में I²CAS में कई उन्नत तकनीकों को शामिल किए जाने की योजना है. इनमें डायरेक्टेड एनर्जी वेपन जैसे एयरबोर्न लेजर सिस्टम शामिल हैं, जिनका उपयोग मिसाइल डिफेंस और ड्रोन इंटरसेप्शन में किया जा सकता है. इसके अलावा ड्रोन स्वार्म तकनीक भी विकसित की जा रही है, जिसमें कई छोटे ड्रोन मिलकर दुश्मन की सुरक्षा प्रणाली को भेद सकते हैं. इसके साथ ही एडैप्टिव इलेक्ट्रॉनिक कैमोफ्लाज तकनीक पर भी काम चल रहा है, जो विमान की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नेचर को बदलकर उसे रडार से बचाने में सक्षम बनाएगी. यह तकनीक भविष्य के युद्धक्षेत्र में विमान की जीवित रहने की क्षमता को काफी बढ़ा सकती है. हालांकि, भारत इस परियोजना को स्वदेशी रूप से विकसित करने पर जोर दे रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विकल्प भी खुले रखे गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन, सेंसर और नेटवर्किंग तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी से इस कार्यक्रम को गति मिल सकती है. I²CAS भारत की रक्षा रणनीति में एक दीर्घकालिक परिवर्तन का संकेत है, जो देश को भविष्य के नेटवर्क सेंट्रिक और कटिंग एज टेक्‍नोलॉजिकल वॉरगेम के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

क्या भारत में फिर लगेगा लॉकडाउन? पीएम मोदी के बयान पर फैली अफवाहों की पूरी सच्चाई

नई दिल्ली क्या भारत में एक बार फिर से लॉकडाउन लगने वाला है? छह साल पहले साल 2020 में कोरोना वायरस महामारी की वजह से देशभर में लॉकडाउन लगाया गया था, जिसकी चपेट में लंबे समय तक देशभर के लोग रहे। अब ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से एक बार फिर से भारत में लॉकडाउन को लेकर लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं। संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण के बाद लोग इंटरनेट पर भारत में लॉकडाउन (Lockdown in India) जैसे कीवर्ड सर्च कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसको लेकर चल रहीं अटकलें सही हैं या नहीं। पीएम मोदी ने भाषण में ऐसा क्या कहा? अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल का संकट पैदा हो गया है। हाल ही में पीएम मोदी ने संसद में पश्चिम एशियाई संकट पर बयान दिया। लोकसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान बोलते हुए, नरेंद्र मोदी ने सोमवार को याद दिलाया कि कैसे कोरोना वायरस के समय में ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो गई थीं, और इसकी तुलना अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से हो रही मौजूदा बाधाओं से की। उन्होंने कहा, "पहले भी हमारी सरकार ने ग्लोबल संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया था।'' उन्होंने सदन को पश्चिम एशिया में तनाव के संदर्भ में भारत की स्थिति से भी अवगत कराया। पीएम मोदी ने कहा, ''हम कोरोना के समय में भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की जरूरत है। धीरज, संयम के साथ शांति मन से हर चुनौती का सामना करना है।'' क्यों ट्रेंड हो रहा लॉकडाउन शब्द? छह साल पहले पूरे देश में लॉकडाउन की औपचारिक घोषणा 24 मार्च, 2020 को की गई थी। उस समय, पीएम मोदी ने चेतावनी दी थी कि अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भारत दशकों पीछे चला जाएगा। उसके बाद लंबे समय तक लॉकडाउन लगाया गया। अब पहली बार लॉकडाउन को लगे छह साल पूरे हो गए हैं। ऐसे में लोग लॉकडाउन को सर्च कर रहे हैं। वहीं, एक दूसरा कारण संसद में पीएम मोदी का कोरोना का जिक्र करना और उसी तरह की चुनौतियों के लिए फिर से तैयार रहने की जरूरत पर जोर देने की बात कहना भी। पीएम मोदी के बयान का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे लोग लॉकडाउन का जिक्र और उसे सर्च कर रहे हैं। युद्ध के बीच लग सकता है लॉकडाउन? अगर हम बात करें कि क्या अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से भारत में लॉकडाउन लगेगा? तो इसका जवाब है नहीं, लॉकडाउन नहीं लगेगा। पीएम मोदी या फिर सरकार की ओर से कोई संकेत भी नहीं दिया गया है। कोरोना महामारी के समय उसे फैलने से रोकने के लिए लगाया गया था। उस समय दुनियाभर के देशों ने इस लॉकडाउन को अपने यहां लागू किया था। लेकिन ईरान अमेरिका युद्ध के समय हालात ऐसे नहीं हैं कि लॉकडाउन लगाया जा सके। हालांकि, कुछ कदम जरूर उठाए जा रहे हैं, जैसे तेल संकट को दूर करने के लिए, एलपीजी संकट से निपटने के लिए सरकार विभिन्न फैसले ले रही है। गैस सिलेंडर के कालाबाजारी को रोका जा रहा है, पीएनजी कनेक्शन पर जोर दिया जा रहा है आदि। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी युद्ध के जल्द खत्म होने के संकेत दिए हैं और हमले कुछ समय के लिए रोके हुए हैं। ऐसे में यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि भले ही लॉकडाउन फिर से इंटरनेट पर सर्च किया जा रहा हो, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। देश में कोई भी लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं होने जा रही है।

तनाव चरम पर: ईरान ने USS Abraham Lincoln को बनाया निशाना, पीछे हटने से किया इनकार

तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला भले ही कुछ दिनों के लिए रोक दिया हो, लेकिन तेहरान पीछे हटने को तैयार नहीं है। मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से बढ़ गया है। ईरान ने दावा किया है कि बुधवार को उसने अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन पर क्रूज मिसाइलें दागी हैं। ईरानी सेना ने सरकारी टीवी पर जारी एक बयान में अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि जब इस स्ट्राइक ग्रुप के जहाज उनकी रेंज में आएंगे तो और भी मिसाइलें दागी जाएंगी। ईरान की सेना ने बयान में कहा गया, "ईरानी नौसेना की कादर क्रूज मिसाइलों (जमीन से दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइलें) ने अमेरिका के USS अब्राहम लिंकन कैरियर को निशाना बनाया और उसे अपनी जगह बदलने पर मजबूर कर दिया।" बयान में नौसेना प्रमुख एडमिरल शहरम ईरानी का भी जिक्र किया गया, जिन्होंने कहा कि इस कैरियर ग्रुप की हरकतों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जैसे ही यह दुश्मन बेड़ा हमारी मिसाइल प्रणालियों की रेंज में आएगा, ईरानी नौसेना उस पर जोरदार हमले करेगी।" इससे पहले, ईरानी नौसेना ने अमेरिका को सीधी चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि उसके युद्धपोत अमेरिकी अब्राहम लिंकन पर कड़ी नजर रखी जा रही है, और यदि वह ईरानी क्षेत्र के करीब आता है, तो उस पर हमला किया जा सकता है। सरकारी प्रसारक 'प्रेस टीवी' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहरम ईरानी ने चेतावनी दी कि अमेरिकी अब्राहम लिंकन लगातार निगरानी में है, और यदि वह ईरान की मिसाइल प्रणालियों की सीमा में प्रवेश करता है, तो नौसेना द्वारा उसे निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप ने पीछे खींचे कदम यह नौसैनिक चेतावनी तेहरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों द्वारा अमेरिकी प्रभाव को व्यापक रूप से खारिज किए जाने के बाद आई है। इन अधिकारियों ने वॉशिंगटन के हालिया कूटनीतिक प्रयासों को केवल एक दिखावा करार दिया है। प्रेस टीवी ने बताया कि 'खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोलफागरी ने बुधवार को कहा कि अमेरिका द्वारा पहले जिस रणनीतिक शक्ति का प्रदर्शन किया जाता था, वह अब एक रणनीतिक हार में बदल गई है। ये टिप्पणियां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तनाव कम करने के लिए उठाए गए एक महत्वपूर्ण कदम के बाद आई हैं। ट्रंप ने हाल ही में ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमला करने के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम से कदम पीछे खींच लिए थे।

पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा: ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता, LPG की 92% बुकिंग अब ऑनलाइन

नई दिल्ली दुनिया भर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस को लेकर मची हाहाकार के बीच भारत सरकार ने विश्वास दिलाया है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और कच्चे तेल से लेकर प्राकृतिक गैस तक पर्याप्त मात्रा में है। पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बुधवार को इसकी जानकारी दी गई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शांति बहाली को लेकर भारत के प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से बातचीत की। भारत ने तनाव कम करने, शांति बहाली और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित व खुला रखने पर जोर दिया। दोनों वार्ताओं में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति और ऊर्जा सुरक्षा पर समन्वय पर बल दिया गया, जिसमें भारत-श्रीलंका सहयोग भी शामिल है। भारत ईरान सहित क्षेत्रीय साझेदारों के संपर्क में है और अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर रहा है। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरानी राजदूत से मुलाकात हुई। कई भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान मार्गों के जरिए लौटे हैं, जिसके लिए ईरान को धन्यवाद दिया। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव राजेश सिन्हा ने जानकारी दी कि वर्तमान में 20 भारतीय जहाज पर्शियन गल्फ क्षेत्र में हैं, जिनमें 500 से ज्यादा भारतीय नाविक मौजूद हैं। उन्होंने बताया, "पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज या नाविक से संबंधित कोई घटना रिपोर्ट नहीं हुई है। 20 भारतीय जहाज वर्तमान में पर्शियन गल्फ क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं, और इन जहाजों पर 540 भारतीय नाविक मौजूद हैं, और सभी सुरक्षित हैं। संबंधित एजेंसियां और शिपिंग अधिकारी लगातार संपर्क में हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।" अंतर मंत्रालयी प्रेस ब्रीफ में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने अपने विभाग की तैयारियों और एलपीजी-पीएनजी को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता है और रिफाइनरियां अपनी उच्चतम क्षमता पर काम कर रही हैं। देश में सालाना लगभग 26 करोड़ टन कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता मौजूद है। हाल के दिनों में कुछ जगहों पर पेट्रोल पंपों पर लाइन और पैनिक बाइंग देखी गई, लेकिन पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। सभी पंपों और सप्लाई टर्मिनलों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। शर्मा ने आगे कहा, पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) और सीएनजी की आपूर्ति सामान्य है। सरकार पीएनजी विस्तार पर जोर दे रही है और कई कदम उठाए गए हैं। लगभग 2.2 लाख उपभोक्ता एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट हो चुके हैं और करीब 2.5 लाख नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। एलपीजी के मामले में किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर पर ड्राई-आउट नहीं है (एलपीजी उपलब्ध है)। ऑनलाइन बुकिंग लगभग 92 फीसदी तक पहुंच गई है। सरकार ने कमर्शियल एलपीजी का आवंटन 20 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया है, ताकि ढाबा, होटल, कैंटीन, कम्युनिटी किचन और प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता मिल सके। अब तक 26 राज्यों ने करीब 22,000 टन कमर्शियल एलपीजी आवंटित किया है। इसके तहत 5 किलो के सिलेंडर भी बड़ी संख्या में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई जारी है। हाल ही में 2700 से ज्यादा छापे और करीब 2000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

विदेशी फंडिंग पर सरकार का बड़ा कदम: NGO के लिए नए नियम, लोकसभा में बिल पेश

नई दिल्ली एनजीओ द्वारा विदेशी अनुदान का दुरूपयोग रोकने के लिए सरकार ने शिकंजा और कस दिया है। इसके लिए सरकार की ओर से लोकसभा में विदेशी अनुदान नियमन कानून (एफसीआइए) में संसोधन का विधेयक पेश किया गया है। विधेयक में एफसीआरए लाइसेंस रद होने या समाप्त होने की स्थिति में विदेशी अनुदान से बनाई गई संपत्तियों जब्त करने और उनकी देख-रेख के लिए केंद्र और राज्य के स्तर पर नई अथॉरिटी बनाने का प्रविधान है। विपक्ष ने क्या कहा? विपक्ष की ओर विधेयक को 'खतरनाक' बताकर पेश करने का विरोध का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह वास्तव में उन लोगों के लिए 'खतरनाक' है जो विदेशी योगदान का इस्तेमाल जबरन धर्मांतरण के लिए या व्यक्तिगत लाभ करते हैं। देश में कितने एनजीओ को मिला लाइसेंस दरअसल देश में कुल 16 हजार एनजीओ को एफसीआरए लाइसेंस मिला हुआ है और उन्हें हर साल लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की विदेशी सहायता मिलती है।      नित्यानंद राय ने कहा कि 2010 के एफसीआरए कानून के कई प्रविधानों में अस्पष्टता होने के कारण उनका उल्लंघन करने वाले एनजीओ के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती थी।      प्रस्वावित संसोधन में इन नियमों को स्पष्ट कर दिया गया है। इसमें विदेशी योगदान और उनसे बनी संपत्तियों की देखरेख, पर्यवेक्षण, प्रबंधन और निपटान के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रस्तावित है। क्या कहता है नियम इसके तहत पूर्व अनुमति के तहत विदेशी अनुदान प्राप्ति और उपयोग के लिए समय-सीमा तय की जाएगी। यदि एफसीआरए के तहत दिया गया प्रमाणपत्र अपनी वैधता अवधि समाप्त होने पर नवीनीकरण के लिए समय पर आवेदन नहीं किया जाता, या आवेदन अस्वीकार हो जाता है, या समय से पहले नवीनीकृत नहीं किया जाता, तो प्रमाणपत्र स्वत: समाप्त माना जाएगा। जिस व्यक्ति का प्रमाणपत्र समाप्त हो गया है, वह प्रमाणपत्र के नवीनीकृत होने तक विदेशी योगदान न तो प्राप्त कर सकेगा और न ही उसका उपयोग कर सकेगा। प्रविधानों का उल्लंघन विधेयक को पेश करते हुए नित्यानंद राय ने कहा कि मोदी सरकार विदेशी फंडिंग के किसी भी दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं करेगी और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। वहीं, प्रस्तावित विधेयक में सजा को भी कम किया गया है। एफसीआरए के प्रविधानों का उल्लंघन कर विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले व्यक्ति के लिए पहले पांच वर्ष की सजा का प्रविधान था, जिसे घटाकर एक वर्ष कर दिया गया है।