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इलाहाबाद है भाई… बयान से छाए CJI सूर्यकांत, जानें किस संदर्भ में कही यह बात

नई दिल्ली CJI सूर्यकांत ने कहा कि इसे होली ब्रेक के बाद लिस्ट करो। नहीं नहीं, इसे उसके भी एक हफ्ते बाद करो। इलाहाबाद है भाई, एक हफ्ता तो लग जाएगा भांग का नशा उतरने में। सीजेआई की यह हल्के-फुल्के अंदाज में की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में रोजाना कई मामलों की सुनवाई होती है। इसमें कुछ चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के कोर्ट में होती है। शुक्रवार को हुई एक सुनवाई चर्चा का विषय बन गई। इसमें सीजेआई सूर्यकांत ने हल्के-फुल्के अंदाज में एक केस को लिस्ट करने के मामले में कहा कि इसे होली के हफ्तेभर बाद लिस्ट करो, क्योंकि इलाहाबाद है भाई, भांग का नशा उतरने में हफ्ताभर तो लग जाएगा। बार एंड बेंच के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सुरेश देवी वर्सेज हाई कोर्ट ऑफ इलाहाबाद से जुड़ी एक सुनवाई को लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ''इसे होली ब्रेक के बाद लिस्ट करो। नहीं नहीं, इसे उसके भी एक हफ्ते बाद करो। इलाहाबाद है भाई, एक हफ्ता तो लग जाएगा भांग का नशा उतरने में।'' सीजेआई की यह हल्के-फुल्के अंदाज में की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। बता दें पूरे देशभर में होली धूमधाम से मनाई जाती है। प्रयागराज में भी होली के त्योहार को लेकर काफी उत्सुकता है। इस बार चार मार्च को रंग खेलने वाली होली पड़ रही है। कई जगह होली के दिन भांग का भी सेवन किया जाता है। माना जा रहा है कि इसी संदर्भ में सीजेआई सूर्यकांत ने यह मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की और मामले को सुनवाई के लिए होली के थोड़े और दिन बाद रखा। वहीं, एक अन्य मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने एक वकील को जमकर फटकार लगाई। पूरन चंद्र सेन बनाम राजस्थान राज्य के मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने वकील से कहा कि इन पर जुर्माना नहीं लगाया हाईकोर्ट ने? बंद वंद पहने नहीं हैं, लग रहा कोई दंगल में उतरने आया है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि हाई कोर्ट ने जुर्माना लगाया है। फिर सीजेआई ने पूछा कि आपको वकालत करते हुए कितने साल हो गए है, जिसपर वकील ने कहा कि 1995 से कर रहा हूं। सीजेआई सूर्यकांत इतना सुनते ही भड़क गए और पूछा कि आपको लाइसेंस देने की गलती किसने की। प्लीज ऐसी पिटीशन फाइल न करें। लोग आप पर विश्वास करते हैं। अगर आप यह सब फाइल करेंगे तो लोग आप पर विश्वास कैसे करेंगे। इस पर वकील ने कहा कि आरएसएस के आदर्श संविधान के खिलाफ है, जिस पर जस्टिस बागची ने जवाब दिया कि अगर आप और दबाव डालेंगे तो हमें कॉस्ट बढ़ानी पड़ेगी। आपकी आइडियोलॉजी या पॉलिटिक्स वगैरह से राय अलग हो सकती है, लेकिन इससे कोई ऑफेंस नहीं होता या आप किसी अथॉरिटी के खिलाफ एफआईआर करने को नहीं कहते। कृपया पीछे हटें, खुद को शर्मिंदा न करें।

हाई कोर्ट से राहत के बाद बंगाल में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, अमित शाह दिखाएंगे परिवर्तन यात्रा को हरी झंडी

कोलकाता बंगाल में भाजपा की प्रस्तावित ‘परिवर्तन यात्रा’ को लेकर चल रही कानूनी रस्साकशी के बीच कोलकाता हाई कोर्ट ने सशर्त अनुमति दे दी है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष की पीठ में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि एक और दो मार्च को दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक यात्रा निकाली जा सकेगी, लेकिन किसी भी स्थान पर एक हजार से अधिक लोगों की भीड़ नहीं होनी चाहिए। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को सुनिश्चित करनी होगी।   हाई कोर्ट 'परिवर्तन यात्रा' को दी सशर्त अनुमति अदालत ने यात्रा के समय को भी सीमित कर दिया है, जिसके तहत दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक ही जुलूस निकालने की इजाजत होगी। भाजपा सूत्रों के अनुसार, होली के त्योहार के मद्देनजर तीन और चार मार्च को यात्रा स्थगित रहेगी। ऐसे में पार्टी ने रणनीति बनाई है कि एक और दो मार्च को ही यात्रा का भव्य उद्घाटन कर दिया जाए, जबकि पांच मार्च से इसे पुनः सुचारू रूप से शुरू किया जाएगा। इस दौरान कूचबिहार, कृष्णनगर, कुल्टी, इस्लामपुर और संदेशखाली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से यात्रा गुजरेगी।   अब दो मार्च को शाह आएंगे कोलकाता इस राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में केंद्रीय मंत्रियों और दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगने वाला है। विशेष रूप से, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में मामूली बदलाव हुआ है; अब वे एक मार्च की बजाय दो मार्च को दक्षिण 24 परगना जिले के रायदिघी से इस यात्रा का शुभारंभ कर सकते हैं। भाजपा ने पूरे राज्य को 10 संगठनात्मक संभागों में बांटा है, जिनमें से नौ संभागों में यह यात्रा निकलेगी। कोलकाता संभाग को इस यात्रा से मुक्त रखा गया है क्योंकि वहां 14 मार्च को होने वाली ब्रिगेड रैली की तैयारियां चल रही हैं, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संबोधित करेंगे।  

इस्लामिक देशों पर रमजान में कार्रवाई पर घिरी अमेरिका सरकार, सांसद ने उठाए गंभीर सवाल

ईरान ईरान पर अमेरिकी हमलों की आशंका बढ़ने के बीच अमेरिकी सांसद ने ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मंसूबों पर सवाल उठाए हैं। सोमालियाई मूल की अमेरिकी सांसद इल्हान उमर ने शुक्रवार को अमेरिकी सरकार पर तीखे सवाल उठाए कि अमेरिका रमजान के महीने में ही मुस्लिम देशों को निशाना क्यों बनाता है। उन्होंने इस दौरान पूर्व में इराक पर अमेरिका के हमलों का भी जिक्र किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इल्हान उमर ने लिखा, “अमेरिका ने रमजान के दौरान इराक पर हमला किया था और यह जानकर दुख हो रहा है कि अमेरिका एक बार फिर रमजान में ही ईरान पर हमला करने जा रहा है। संभवतः अमेरिका को रमजान के दौरान ही मुस्लिम देशों पर हमला करना पसंद है।” अमेरिकी सांसद ने आगे कहा, “और मुझे यकीन है कि इन देशों पर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन ना करने की वजह से ये हमले नहीं किए जा रहे बल्कि इसीलिए कि वे किसकी पूजा करते हैं।” मंडरा रहा हमले का खतरा इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ट्रंप कई बार यह कह चुके हैं कि बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकला तो वे हमला करने से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन कोई सहमति बनती नहीं दिख रही है। ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि वह यूरेनियम संवर्धन जारी रखेगा और यही अमेरिका के लिए लाल रेखा है। अमेरिका ने क्षेत्र में बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान और युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। तीसरे दौर की वार्ता का क्या निकला नतीजा? इस बीच ईरान और अमेरिका ने गुरुवार को तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई घंटे तक अप्रत्यक्ष वार्ता की, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। जिनेवा में हुई वार्ता में मध्यस्थता करने वाले ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने कहा कि बातचीत में 'महत्वपूर्ण प्रगति' हुई है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता देश की 'सबसे गहन और लंबी वार्ताओं' में से एक रही। अराघची ने गुरुवार को ईरान के सरकारी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही। वहीं अमेरिका ने अभी तक वार्ता को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने दिया निर्णय स्थगित, फैसला सुरक्षित

इलाहाबाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न का मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई. हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. साथ ही कहा है कि फैसला आने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी. इस तरह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को फौरी राहत मिल गई है. कोर्ट के फैसले के बाद अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. इससे पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में उनकी अग्रिम जमानत अर्जी की पोषणीयता पर बहस हुई है, जिसमें राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के अधिवक्ताओं ने अग्रिम जमानत का विरोध किया. कुंभ और माघ मेले में यौन शोषण का आरोप लगाया गया. अदालत में एफआईआर पढ़ी गई. राज्य सरकार के वकीलों ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया. कोर्ट में दोनों पक्षों की दलील इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पोषणीयता पर सवाल उठाए। कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आ सकते। उन्होने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। शंकराचार्य के वकील ने कहा पीड़ित का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है। उसके माता-पिता और अभिभावकों का कोई पता नहीं है। सरकार ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है। इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है। शंकराचार्य के वकील ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है। कहा कि शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है। उसके ऊपर गौ हत्या, दुष्कर्म, हत्या का केस दर्ज है। वह 25 हजार रुपये का इनामी है। नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया। बच्चों के मां-बाप कहां हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि बच्चे कहां हैं। शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। कहा कि जन बच्चों को पेश किया गया है उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वहां के वह संस्थागत छात्र हैं। शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है। आरोप लगाया कि यह सब सरकारी की ओर से प्रायोजित है। बच्चों का मेडिकल करीब एक माह बाद हुआ है। सरकार ने बताया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता पिता को सौंपा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ दर्ज है पॉक्सो का केस ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के अलावा 2-3 अज्ञात लोगों पर बाल यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इलाहाबाद जिला न्यायालय की पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में केस दर्ज किया गया। यह आदेश पॉक्सो कोर्ट के पॉक्सो कोर्ट के अपर जिला जज विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर दर्ज किया गया है। उन्होंने अपने आदेश में पुलिस से कहा था कि वो पॉक्सो एक्ट के तहत निष्पक्ष रूप से इस मामले की जांच करें। साथ ही कोर्ट ने पीड़ितों की पहचान और सम्मान की सुरक्षा करने का भी आदेश दिया है। माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शुरू हुआ था विवाद इसी साल माघ मेले में ज्योतिर्मठ उत्तराखंड के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ मौनी अमावस्या के दिन मेला प्रशासन के साथ विवाद हो गया था। पालकी पर स्नान करने के लिए  जाते समय शंकराचार्य और उनके शिष्यों को प्रशासन ने भीड़ अधिक होने और भगदड़ की आशंका पर घाट से पहले ही रोक दिया। शंकाराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने बटुकों को चोटी पकड़कर घसीटा और उनकी पिटाई की। साथ ही साथ शंकराचार्य और उनके शिष्यों का भी अपमान किया। इसके विरोध में शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग पर अपने शिविर के सामने धरने पर बैठ गए जहां पर उन्हें पुलिस वाले छोड़कर गए थे। 11 दिन तक धरना चला। शंकराचार्य की मांग थी कि अधिकारी आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांग लें तो वह अपने टेक समाप्त कर देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 11 दिनों  तक धरने पर बैठे रहने पर भी जब को हल नहीं निकला तब शंकराचार्य ने 28 जनवरी को माघ मेला छोड़ दिया और काशी के लिए रवाना हो गए।   

बंगाल SIR पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट सख्त: आदेश उल्लंघन बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार हमारे आदेशों का उल्लंघन करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि हमने स्पष्ट कर दिया है कि किन दस्तावेजों की जांच की जानी है। हमारे आदेश बिलकुल स्पष्ट हैं। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से बताया गया कि चुनाव आयोग ने राज्य में मतदाता सूचियों के एसआईआर में तैनात न्यायिक अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी की कि वह अपने न्यायिक अधिकारियों को जानता है और वे किसी भी चीज से प्रभावित नहीं होंगे। न्यायिक अधिकारियों के लिए जारी किया प्रशिक्षण मॉड्यूल : बंगाल सरकार पश्चिम बंगाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने पीठ से कहा, 'चुनाव आयोग ने पीठ पीछे न्यायिक अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। एक प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किया है जिसमें कहा गया है कि उन्हें क्या स्वीकार करना चाहिए और क्या नहीं।' इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राज्य में इस प्रक्रिया के लिए तैनात न्यायिक अधिकारी इस संबंध में फैसले लेंगे। सीजेआई ने कहा, 'हम इस तरह की बातें बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसका अंत होना चाहिए। हम अपने न्यायिक अधिकारियों को जानते हैं और वे किसी भी चीज से प्रभावित नहीं हो सकते।' इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किन दस्तावेजों की जांच की जानी है। हमारे आदेशों से आगे कोई नहीं जाएगा :सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि हमारे आदेश बिलकुल स्पष्ट हैं। पीठ ने कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेशों से आगे जाएगी। पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे गतिरोध से निराश होकर शीर्ष अदालत ने 20 फरवरी को एक 'असाधारण' निर्देश जारी किया। इसमें राज्य में विवादित मतदाता सूचियों की एसआईआर में चुनाव आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों को तैनात करने का निर्देश दिया गया।  

विजय और रश्मिका ने अपने रिसेप्शन में पीएम मोदी को किया आमंत्रित, वायरल हुई तस्वीर

नई दिल्ली  विजय देवरकोंडा (Vijay Deverakonda) और रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) ने 26 फरवरी, 2026 को शादी कर ली। कपल ने उदयपुर में अपने करीबी दोस्तों और परिवार की मौजूदगी में शादी की और अब 4 मार्च, 2026 को हैदराबाद में रिसेप्शन दिया जाएगा। आज सुबह रश्मिका और विजय की गृह मंत्री अमित शाह के साथ तस्वीरें वायरल हो गईं। दोनों ने अमित शाह को भी अपने रिसेप्शन में आमंत्रित किया था। अब, VIROSH की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इस जोड़े ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर उन्हें भी रिसेप्शन में आमंत्रित किया था। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि विजय और रश्मिका प्रधानमंत्री से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें शॉल भेंट कर रहे हैं। पीएम मोदी ने दी बधाई     विजय और रश्मिका की शादी से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने दंपति को बधाई पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा, "माधवी और गोवर्धन राव देवरकोंडा जी, 26 फरवरी 2026 को होने वाले विजय और रश्मिका के विवाह समारोह में आपका निमंत्रण पाकर हमें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। देवरकोंडा और मंदन्ना परिवारों को इस हार्दिक और शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई। यह विजय और रश्मिका के जीवन में एक नए, खूबसूरत अध्याय की शुरुआत है।" पत्र में आगे लिखा था, “विजय और रश्मिका दोनों ही फिल्मों में स्क्रिप्ट के लिए नए नहीं हैं। लेकिन उनके वास्तविक जीवन का यह दिव्य रूप से रचा गया अध्याय, जो प्रेम और स्नेह से भरा है, निश्चित रूप से उनके द्वारा सिल्वर स्क्रीन पर रचे गए जादू को भी मात देगा। प्रेम और समझदारी के साथ, वे जिम्मेदारियों को साझा करें, एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करें, एक-दूसरे की खूबियों से सीखें और सच्चे साथी बनकर जीवन की यात्रा करें। इस शुभ अवसर पर कपल और उनके परिवारों को मेरी शुभकामनाएं। सादर कब होगा रिसेप्शन? रश्मिका और विजय का वेडिंग रिसेप्शन, 4 मार्च, 2026 को हैदराबाद में होगा। ऐसी उम्मीद है कि इस मौके पर साउथ और बॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स इसका हिस्सा बनेंगे।  

पाकिस्तान में रमजान के दौरान मुस्लिमों पर अत्याचार, भारत का अफगानिस्तान युद्ध पर स्पष्ट रुख

नई दिल्ली Pakistan-Afghanistan War: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर जारी संघर्ष अब एक ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां से वापसी का रास्ता कूटनीति के बजाय सैन्य ताकत तय कर रही है। शुक्रवार को काबुल, कंधार और पक्तिका में पाकिस्तानी वायुसेना की बमबारी ने पिछले साल कतर और तुर्की की कड़ी मेहनत से कराए गए संघर्षविराम की धज्जियां उड़ा दी हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने एक्स पर घोषणा करते हुए कहा, "हमारा धैर्य अब जवाब दे गया है। अब हमारे बीच खुला युद्ध है।" पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान आतंकवाद का निर्यात कर रहा है, जबकि अफगानिस्तान इसे पाकिस्तान की साम्राज्यवादी सोच करार दे रहा है। ताजा हवाई हमलों के बाद पाकिस्तान ने 130 से अधिक तालिबानी लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया है, जिसे वह रविवार को हुए अफ़गान हमलों का बदला बता रहा है। भारत का क्या है रुख? यद्यपि भारत ने इस ताजा झड़प अभी तक कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पिछला स्टैंड पूरी तरह स्पष्ट रहा है। भारत ने हमेशा से अफ़गानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया है और पाकिस्तान की आक्रामकता की निंदा की है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में जब तनाव बढ़ा था तब भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा था कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं का दोष अपने पड़ोसियों पर मढ़ने का पुराना अभ्यस्त है। आपको बता दें कि उस समय तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारतकी यात्रा पर थे। 22 फरवरी को जब पाकिस्तान ने नांगरहार और पक्तिका में हवाई हमले किए थे तब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कड़े शब्दों में कहा था, "भारत रमजान के पवित्र महीने के दौरान अफगान क्षेत्र पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा करता है, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित आम नागरिक मारे गए हैं।" भारत के साथ बढ़ता तालिबान का तालमेल पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता अफगानिस्तान और भारत के बीच बढ़ती कूटनीतिक नजदीकी है। पिछले साल अक्टूबर में अफगान विदेश मंत्री मुत्ताकी और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक ने इस्लामाबाद को बेचैन कर दिया था। अपनी बौखलाहट में पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि अफगान धरती पर "भारतीय प्रॉक्सी" सक्रिय हैं, जिसे भारत ने निराधार और बेतुका बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था। भारत का मानना है कि पाकिस्तान अफ़गानिस्तान द्वारा अपनी संप्रभुता का प्रयोग करने से चिढ़ा हुआ है।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ा तनाव, सऊदी को फोन कर पाकिस्तान ने जंग की संभावना जताई

काबुल पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. पाकिस्तान की ओर से 22 फरवरी को अफगानिस्तान में कथित TTP ठिकानों पर हमला किया गया था. अफगानिस्तान ने चेतावनी दी थी कि इसका पलटवार होगा. गुरुवार देर रात अफगान तालिबान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी. सीमा पर गोलीबारी और मोर्टार अटैक हुए. जवाब में पाकिस्तान ने फिर हवाई हमले किए हैं. अफगानिस्तान की टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक अफगान सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान एयर फोर्स के लड़ाकू विमानों ने नंगरहार प्रांत में हवाई हमले किए. सुरक्षा सूत्रों ने स्थानीय मीडिया को बताया कि पाकिस्तानी विमान अफगान हवाई क्षेत्र में घुस आया था, जिसे अफगान बलों ने निशाना बनाया और मार गिराया. हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है. अफगान पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान ने काबुल, कंधार और पक्तिया जैसे इलाकों में भी बमबारी की. इस्लामिक अमीरात के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि पाकिस्तानी सैन्य शासन ने कुछ स्थानों पर हमले किए. हालांकि उन्होंने कहा कि इन हमलों में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ. वहीं पाकिस्तान का दावा है कि उसे पहले अफगान तालिबान की ओर से ‘बिना उकसावे की गोलीबारी’ का सामना करना पड़ा और जवाब में उसने कार्रवाई की. पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय और प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने कहा कि जवाबी कार्रवाई में अफगान तालिबान के 133 लड़ाके मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए. साथ ही कई सैन्य ठिकाने और गोला-बारूद डिपो नष्ट कर दिए गए. लेकिन अफगानिस्तान के नजरिए से देखा जाए तो मामला अलग है. काबुल का कहना है कि पाकिस्तान बार-बार सीमा पार हमले कर अफगान संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है. अफगान अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी खतरा है. पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष पर चीन ने जताई चिंता अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी गोलीबारी पर चीन ने गहरी चिंता जताई है. चीन ने दोनों देशों से संयम बरतने और तुरंत युद्धविराम करने की अपील की है. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि दोनों पक्ष शांत रहें, हालात को न बढ़ाएं और जल्द से जल्द संघर्ष विराम लागू करें ताकि और खून-खराबा न हो. उन्होंने यह भी बताया कि चीन का विदेश मंत्रालय और पाकिस्तान व अफगानिस्तान स्थित उसके दूतावास दोनों देशों के संबंधित पक्षों के संपर्क में हैं.  पाकिस्तान ने सऊदी को घुमाया फोन पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव के बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री से फोन पर बात की है. बातचीत में मौजूदा हालात और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की गई.  PM शहबाज शरीफ की गीदड़भभकी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि उनकी सेना किसी भी ‘आक्रामक मंसूबे’ को कुचलने की पूरी क्षमता रखती है. यह बयान उस रात के बाद आया जब इस्लामाबाद ने काबुल, कंधार और पक्तिया के कुछ हिस्सों में हवाई हमले किए. सीमा पार झड़पें शुक्रवार को और तेज हो गईं. पाकिस्तान ने हमलों के बाद काबुल के खिलाफ ‘खुली जंग’ का ऐलान कर दिया, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है.  अफगानिस्तान-पाकिस्तान में पहले भी हुआ तनाव अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते पिछले कुछ महीनों में लगातार बिगड़ते गए हैं. अक्टूबर में हुई घातक झड़पों में दोनों तरफ 70 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद से ज्यादातर जमीनी सीमा पार रास्ते बंद पड़े हैं. इस्लामाबाद अफगानिस्तान पर आरोप लगाता है कि वह पाकिस्तान में हमले करने वाले उग्रवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती है. कतर और तुर्की की मध्यस्थता में शुरुआती युद्धविराम के बाद कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समझौता नहीं हो सका है.  

बांग्लादेश में भूकंप के तेज झटके, पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में महसूस हुआ असर

कोलकाता पश्चिम बंगाल के कोलकाता सहित कई शहरों में शुक्रवार दोपहर (27 फरवरी) को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। बताया जा रहा है कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.4 रही। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग दहशत के चलते घरों से बाहर आ गए। जानकारी के मुताबिक कोलकाता में दोपहर करीब 1.20 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, जो रिपोट्स के अनुसार बांग्लादेश में केंद्रित भूकंप का नतीजा था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय भूमध्यसागरीय भूकंपीय केंद्र (ईएमएससी) ने बताया कि शुक्रवार को बांग्लादेश में 5.4 तीव्रता का भूकंप आया। ईएमएससी ने बताया कि भूकंप का केंद्र 35 किलोमीटर (21.75 मील) की गहराई पर था। बांग्लादेश के ढाका के अगरगांव स्थित बीएमडी भूकंपीय केंद्र से दक्षिण-पश्चिम पश्चिम बंगाल में रिक्टर स्केल पर 5.4 तीव्रता का भूकंप आया। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी झटके महसूस किए गए। कोलकाता शहर से सामने आए वीडियो में लोग अपने घरों से बाहर भागते दिखाई दिए। 'सोफा और पंखा हिल रहे थे, हम भागने लगे' कोलकाता के एक स्थानीय ने बताया कि हम अपने सोफे पर बैठे थे, जब हमें अचानक झटके महसूस हुए। हम अपने घर से बाहर भागे। सोफा और पंखा हिल रहे थे, टेबल पर रखी एक बोतल नीचे गिर गई। हम सब नीचे भागे। फिलहाल अभी किसी नुकसान की खबर नहीं वहीं सोशल मीडिया पर भी भूकंप को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया सामने आई। यूजर्स ने बताया कि उन्होंने भूकंप के तेज झटके महसूस किए और अपने घरों में पंखे और अन्य चीजें हिलती हुई देखीं। फिलहाल अभी तक किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

नौसेना को मिली नई ताकत, युद्धपोत अंजदीप से मजबूत हुआ भारत का समुद्री सुरक्षा कवच

चेन्नई भारतीय नौसेना की समंदर में ताकत बढ़ चुकी है। नौसेना को एक और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत अंजदीप मिल गया है। उथले पानी में काम करने की क्षमता वाले आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की श्रृंखला का यह तीसरा युद्धपोत 27 फरवरी को चेन्नई में नौसेना में शामिल किया गया। इस समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी शामिल हुए। यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया है। 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में डिजाइन यह पोत 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें नष्ट करना है। यह पोत स्वदेशी, अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली से लैस है। चेन्नई बंदरगाह पर आयोजित एक आधिकारिक समारोह में एडमिरल त्रिपाठी ने नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, सरकारी अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में औपचारिक रूप से जहाज को कमीशन किया। किस पर रखा गया युद्धपोत का नाम अंजदीप? अंजदीप नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह युद्धपोत 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ बना है। इससे देश की रक्षा निर्माण क्षमता को बल मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। अंजदीप नौसेना के इसी नाम वाले पुराने युद्धपोत का नया अवतार है। पुराना युद्धपोत 2003 में रिटायर हो गया था। 77 मीटर लंबे इस जहाज में एक हाई-स्पीड वाटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम लगा है, जो इसे त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर संचालन के लिए 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। नौसेना ने कहा कि कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित, आईएनएस अंजदीप एक अत्याधुनिक पोत है जिसे विशेष रूप से तटीय युद्ध वातावरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है। पनडुब्बी रोधी युद्ध की भूमिका के अलावा यह युद्धपोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और खोज एवं बचाव अभियानों को अंजाम देने के लिए भी सुसज्जित है। मुख्य विशेषताएं     रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इसे डॉल्फिन हंटर के रूप में डिजाइन किया गया है।     जो तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बी का पता लगाकर उसे निष्क्रिय करने में सक्षम है।     करीब 77 मीटर लंबे इस श्रेणी के युद्धपोत वॉटरजेट से चलने वाले नौसेना के अब तक के सबसे बड़े युद्धपोत हैं।     इनमें अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट और उथले पानी में काम करने वाला सोनार सिस्टम लगाया गया है।     इससे समुद्र के काफी अंदर तक मौजूद दुश्मन के खतरों का पता लगाने और उनको नष्ट करने की क्षमता बढ़ेगी।     यह जहाज नौसेना की तटीय निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता को भी मजबूत करेगा।