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1 मार्च से बदलेंगे अहम नियम: ट्रेन टिकट, LPG, UPI से लेकर सिम तक की कीमतों में बदलाव

नई दिल्‍ली हर महीने आर्थिक बदलाव होते हैं, जो लोगों की मंथली खर्च को प्रभावित करते हैं. मार्च 2026 में भी कई महत्‍वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं, जिसमें एलपीजी गैस से लेकर सिम और रेलवे टिकट संबंधी नियम शामिल हैं. ये बदलाव आपकी जेब को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं. आइए जानते हैं अगले महीने से कौन-कौन से नियम बदल रहे हैं.  एलपीजी गैस सिलेंडर  हर महीने की शुरुआत में एलपीजी के दाम में बदलाव आता है. पिछले कुछ समय से कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में ही बदलाव देखा गया है. रसोई गैस सिलेंडर के दाम अभी भी स्थिर हैं. पिछले महीने कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में लगभग ₹49 तक बढ़ोतरी की थी. इस महीने भी इसमें बदलाव की उम्‍मीद की जा रही है.   रेलवे टिकट  1 मार्च 2026 से जनरल और प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने का नियम बदलने जा रहा है. अब भारतीय रेलवे का पुराना UTS ऐप 1 मार्च से बंद किया जा सकता है, जिसकी जगह पर अब नया RailOne ऐप पूरी तरह से एक्टिव हो जाएगा. इस नए एप पर जनरल टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट और लोकल यात्रा से जुड़ी सभी चीजें उपलब्ध होंगी.   सिम बाइंडिंग का नियम सरकार डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए 1 मार्च से सिम बाइंडिंग का नया नियम लेकर आ रही है. इस नियम के तहत आपका WhatsApp, Telegram और Signal जैसे ऐप्‍स अब सीधे आपके सिम से लिंक रहेंगे. अगर आप अपने फोन से सिम निकालते हैं तो ये ऐप्‍स तुरंत काम करना बंद कर देंगे. आप वाई-फाई या किसी अन्‍य नेटवर्क के माध्‍यम से भी इन ऐप्‍स को बिना सिम के ऑपरेट नहीं कर पाएंगे.  UPI पेमेंट  1 मार्च से डिजिटल पेमेंट सिस्टम में सुरक्षा को और मजबूत किया जाने वाला है. बड़ी रकम का ऑनलाइन ट्रांसफर अब सिर्फ UPI PIN से नहीं होगा, बल्कि बैंक हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए अतिरिक्त बायोमेट्रिक्स या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होने जा रहा है.  मिनिमम बैलेंस का नियम देश के बड़े सरकारी बैंक 1 मार्च 2026 से मिनिमम बैलेंस को लेकर बदलाव करने जा रहे हैं. पहले किसी एक दिन बैंक अकाउंट में बैलेंस कम होने पर पेनल्‍टी  लग जाती थी, लेकिन अब एवरेज मंथली बैलेंस के आधार पर पेनल्‍टी लगाई जाएगी.   CNG, PNG और ATF के रेट पेट्रोलियम डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को हवाई जहाज में इस्‍तेमाल होने वाले एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) के साथ CNG (सीएनजी) और पीएनजी (PNG) के दामों में बदलाव करती हैं.  उम्‍मीद है कि 1 मार्च से भी इन  नियमों में बदलाव हो सकता है.

गर्मियों का आगाज: मार्च के पहले हफ्ते में गुजरात-महाराष्ट्र में बढ़ेगा तापमान, दिल्ली का मौसम जानें

 नई दिल्ली होली से पहले ही गर्मी बढ़ने लगी है. उत्तर भारत से लेकर पश्चिम तक के राज्यों में अधिकतर तापमान सामान्य से ज्यादा और 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है. इस बीच मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में मार्च के पहले ही हफ्ते में काफी गर्मी पड़ने वाली है. अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है. IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अगले 7 दिनों में दिन का तापमान धीरे-धीरे 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. इससे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हिमाचल-उत्तराखंड के निचले इलाकों में गर्मी बढ़ेगी.बता दें कि कई जगहों पर तापमान पहले से ही सामान्य से 3-5 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जा रहा है. इन राज्यों में गर्मी और उमस की चेतावनी     गुजरात में 4 और 5 मार्च को कुछ इलाकों में बहुत गर्म और उमस भरी स्थिति बनी रह सकती है.     वीकेंड तक मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भी अधिकतम तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री ज्यादा रहने की संभावना है.     महाराष्ट्र में अगले 5 दिनों में तापमान 3-4 डिग्री बढ़ सकता है, जबकि गुजरात में अगले 5 दिनों में 3-5 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है. दक्षिण भारत में तेज गर्मी, उत्तर में बढ़ेगा पारा मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर के मुताबिक, दक्षिण भारत के कई शहरों जैसे इरोड, सलेम, मदुरै, अनंतपुर और कर्नूल में तापमान पहले ही 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. मध्य भारत में अकोला, अमरावती (विदर्भ) और राजकोट (सौराष्ट्र) में भी पारा 37 डिग्री तक पहुंच गया है. जबकि उत्तर भारत में अभी गर्मी उतनी तेज नहीं हुई है और पंजाब-हरियाणा में तापमान 35 डिग्री के पार नहीं गया है. हालांकि, पश्चिम राजस्थान के बाड़मेर और फलोदी जैसे सीमावर्ती इलाके में पारा 35 डिग्री के करीब पहुंच चुका है. मार्च के दूसरे पखवाड़े में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है. मार्च के पहले हफ्ते में कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम? मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में आसमान साफ और मौसम शुष्क रहेगा. मार्च के पहले हफ्ते में तापमान में इजाफा होगा. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, मार्च के पहले हफ्ते में ही देश की राजधानी का अधिकतम तापमान बढ़कर 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. अगले एक हफ्ते में बादलों की आवाजाही या बारिश की संभावना नहीं है. हिमालय में राहत की बूंदों के आसार मौसम विभाग के मुताबिक, दो कमजोर पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbances) के असर से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 3-4 मार्च 2026 को हल्की बारिश या बर्फबारी होने की उम्मीद है. जम्मू-कश्मीर में भी हल्की बर्फबारी या बारिश की संभावना है.    

बंगाल में वोटर लिस्ट पर संकट, मुस्लिम बहुल जिलों में नाम कटने का खतरा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। राज्य में शनिवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने वाली है, लेकिन करीब 60,06,675 मतदाताओं के नाम पर अभी भी असमंजस के बादल छाए हुए हैं। ये कुल मतदाताओं का लगभग 8.5% हिस्सा हैं, जिनकी पात्रता की समीक्षा अब निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के बजाय सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग के वैधानिक अधिकारियों (EROs और AEROs) ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि उन्होंने पूरी सावधानी से दस्तावेजों की जांच कर लाखों नामों को मंजूरी दे दी थी। हालांकि आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर्स द्वारा विसंगतियां बताए जाने के बाद इन स्वीकृत नामों को सिस्टम से रिवर्स कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि सुनवाई की अंतिम तिथि 14 फरवरी तक यह संख्या अचानक कुछ लाख से बढ़कर 60 लाख के पार पहुंच गई। एक अधिकारी ने बताया कि 11 फरवरी के बाद से माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने उन मामलों को भी वापस भेजना शुरू कर दिया जिन्हें पहले हरी झंडी मिल चुकी थी। इसमें एक सेवारत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। मुस्लिम बहुल जिलों में सबसे ज्यादा मामले लंबित आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मतदाता सूची से नाम कटने या समीक्षा के दायरे में आने का सबसे ज्यादा असर अल्पसंख्यक बहुल जिलों में दिख रहा है। मुर्शिदाबाद में 11 लाख, मालदा में 8.28 लाख, दक्षिण 24 परगना में 5.22 लाख, उत्तर 24 परगना में 5 लाख, झारग्राम में 6,682 और कालिम्पोंग में 6,790 मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के 530 न्यायिक अधिकारी इस सप्ताह से इन 60 लाख मतदाताओं के भाग्य का फैसला कर रहे हैं। जब तक ये अधिकारी नामों को मंजूरी नहीं देते, ये मतदाता आगामी विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे। अंतिम सूची में इनके नाम के आगे निर्णय के अधीन लिखा होगा, जिसे न्यायिक मंजूरी मिलने के बाद ही हटाया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में करीब 8,100 सूक्ष्म-प्रेक्षकों की नियुक्ति की थी, जो देश के किसी अन्य राज्य में नहीं किया गया। तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि इन प्रेक्षकों ने वैधानिक अधिकारियों (EROs) के अधिकारों का अतिक्रमण किया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के अधिकारियों का तर्क है कि दस्तावेजों में भारी अनियमितताएं पाई गईं। आरोप है कि कई मामलों में AI-जनरेटेड वोटर आईडी और अवैध दस्तावेज अपलोड किए गए थे। एक रोल ऑब्जर्वर ने बताया कि पुरुषों के आवासीय प्रमाण के रूप में ICDS प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज दिए गए थे। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्थिति को अत्यंत अनिश्चित बताया है। उन्होंने कहा कि अदालती हस्तक्षेप और बार-बार की अपीलों के कारण न्यायिक अधिकारियों द्वारा संशोधन की यह अनूठी मिसाल बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की पात्रता पर सवाल उठना न केवल प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है, बल्कि यह चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है। यदि इन 60 लाख लोगों में से एक बड़ा हिस्सा वोट देने से वंचित रह जाता है तो इसके चुनावी परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।

गांव में दलितों के बाल काटने की प्रथा अब हुई खत्म, सरकार ने दिलाया बराबरी का हक

बेंगलुरु कर्नाटक के गडग जिले के शिंगातलूर गांव में दलित समुदाय को बाल कटवाने की सेवा से सालों तक वंचित किया गया. सामाजिक कल्याण विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस गांव में एक खास समय पर दलितों को टोंसुर या बाल कटवाने की सेवा नहीं दी जाती थी. इस अंधविश्वास के कारण दलितों को बाल कटवाने के लिए पड़ोसी गांवों का रुख करना पड़ता था, जिससे उन्हें अनेक असुविधाओं का सामना करना पड़ता था. प्रभावित ग्रामीणों की शिकायतों और ज्ञापनों के बाद प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया. अब शिंगातलूर गांव में एक नया सैलून बनाया गया है, जो सोशल वेलन विभाग, तालुक प्रशासन, तालुक पंचायत, दलित संगठनों और शिवशरणा हडपदा अप्पन्ना समुदाय की संयुक्त पहल का परिणाम है. तिप्पापुर गांव के बसवराज हडपदा को इस सैलून का संचालन सौंपा गया है, ताकि सभी समुदाय के लोगों को समान और उचित नाई सेवा मिल सके. गांव में मान्यता थी कि महानवमी के दौरान वीरभद्रेश्वर स्वामी हडपदा समुदाय के घर आते हैं और उस समय दलितों के बाल कटवाने से दुर्भाग्य आता है. इस अंधविश्वास के चलते कुछ लोगों ने दलितों को बाल कटवाने की सेवा देना बंद कर दिया था, जिससे सामाजिक विभाजन और भेदभाव बढ़ा. सामाजिक कल्याण विभाग ने बताया कि यह पहल अस्पृश्यता उन्मूलन जागरूकता (छुआछूत) और सामंजस्यपूर्ण जीवन (वर्क लाइफ हार्मनी) कार्यक्रम के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य सामाजिक सद्भाव बढ़ाना और बुनियादी सेवाओं तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करना है. सैलून का उदघाटन स्थानीय अधिकारियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में किया गया, जो सामाजिक समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

RSS का बड़ा बयान: ‘हम 5 साल नहीं, शताब्दियों तक की सोच रखते हैं’

नई दिल्ली  राइजिंग भारत समिट 2026 में ‘स्ट्रेंथ विदइन’ थीम के साथ देश की बदलती तस्वीर पर चर्चा हुई. इस दौरान आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेडकर ने युवाओं और संघ के तालमेल पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि आज का युवा एस्पिरेशनल है और संघ उसके लिए सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह काम करता है. रुबिका लियाकत के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने साफ किया कि ‘भारत माता की जय’ किसी पर थोपी नहीं जाती, बल्कि ये आज के युवाओं के दिल से आती है. इस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज हस्तियां शामिल होंगी. पूरा मंच भारत की आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास को दुनिया के सामने रखने के लिए तैयार है. यह आयोजन भारत के भविष्य के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है, जहां देश की प्रगति का सटीक खाका तैयार किया जा रहा है. क्या आरएसएस युवाओं की पसंद बन गया है? सुनील आंबेडकर का मानना है कि संघ आज के एस्पिरेशनल भारत की असली आवाज है. उन्होंने कहा कि देश के हर कोने में मौजूद लोग आज संघ से इसलिए जुड़ रहे हैं, क्योंकि उनकी आकांक्षाएं राष्ट्र निर्माण से गहराई से जुड़ी हैं. आज का युवा खुद को और अपने देश को तेजी से आगे देखना चाहता है. उनके लिए वंदे मातरम का नारा गर्व का विषय है, न कि किसी विवाद का मुद्दा. क्या भारत माता का जयकारा जबरदस्ती है? जब रुबिका लियाकत ने सवाल किया कि क्या ये नारे थोपे जा रहे हैं, तो आंबेडकर ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो संघ को 100 साल का लंबा सफर तय करने में बड़ी दिक्कत आती. संघ सालों और सदियों के हिसाब से काम करता है. यह निरंतर संवाद की एक ऑर्गेनिक प्रक्रिया है, जो जमीन पर लोगों के बीच से निकलकर सामने आती है.

100 रुपये घंटा, 10 मिनट में कामवाली: क्या टिक पाएगा यह नया बिजनेस मॉडल?

नई दिल्ली शनिवार की सुबह थी. नोएडा की हाई-राइज सोसायटी में रहने वाली 43 साल शिवानी माथुर दिन की तैयारी में लगी थीं, तभी उनका फोन व्हाट्सऐप नोटिफिकेशन से बजा-दीदी, आज मैं नहीं आऊंगी. यह मैसेज उनके लिए नया नहीं था, लेकिन इस बार समस्या यह थी कि घर में मेहमान आने वाले थे. उन्होंने जल्दी से सोसायटी के ग्रुप पर मैसेज किया-किसी की हाउस हेल्प आज आ सकती है क्या? जवाब आया-अर्बन क्लैप (Urban Clap) का इंस्टाहेल्प (InstaHelp) ट्राय करो, 10–15 मिनट में कोई आ जाएगा. कुछ देर बाद बैंगनी यूनिफॉर्म में एक वर्कर उनके दरवाजे पर थी. उसने घर साफ किया, बर्तन धोए और किचन में मदद की-आटा गूंथा, सब्जियां काटीं और चटनी के लिए पुदीना–धनिया तैयार किया. दो घंटे में सारा काम पूरा हो गया और खर्च 200 रुपये से भी कम आया. तभी से यह उनकी फिक्स्ड बैकअप बन चुकी है. शहरों में नया ट्रेंड: इंस्टेंट हाउस हेल्प  शिवानी अकेली नहीं हैं. अब पूरे अर्बन इंडिया में लोग इस सुविधा को अपना रहे हैं. पहले पड़ोसियों और जान-पहचान में मदद ढूंढी जाती थी, अब बस ऐप खोलते ही 10 मिनट में मदद घर पर मिल जाती है. ओला–उबर ने जैसे ट्रैवल बदला, स्विगी–जोमैटो ने फूड डिलीवरी, ब्लिंकिट–बिगबास्केट ने ग्रॉसरी उसी तरह अब स्नैबिट, प्रोंटो, अर्बन क्लैप इंस्टाहेल्प और ब्रूमीज घर के कामों के लिए तैयार हैं. स्नैबिट ने अगस्त में 1 लाख ऑर्डर से अक्टूबर में 3 लाख और अब फरवरी में लगभग 8.5 लाख ऑर्डर पूरे कर लिए हैं. अर्बन कंपनी का इंस्टाहेल्प भी फरवरी 2026 में 50,000 डेली बुकिंग तक पहुंच गया है. 100 रुपये में एक घंटा! कैसे? अर्बन कंपनी  पर एक घंटे की सर्विस 100 रुपये की पड़ती है.स्नैबिट पर तीन एक-घंटे वाली विजिट का पैक 149 रुपये में मिलता है, यानी लगभग 50 रुपये प्रति घंटा.वर्कर्स के नेटवर्क पर यह मॉडल चलता है. बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और ट्रेनिंग के बाद वे ऐप पर जॉब रिक्वेस्ट लेते हैं, बिल्कुल ओला/उबर की तरह है.  बेहतर सैलरी और सम्मान ज्यादातर महिला वर्कर्स के लिए यह बड़ा बदलाव है.नोएडा सेक्टर 121 में काम करने वाली सुनीता कहती हैं कि अर्बन कंपनी (Urban Company) से मुझे 30,000 रुपये मिलते हैं. 8 घंटे पूरे करना है, लेकिन एक साथ करना जरूरी नहीं. अब 6 बजे से भागमभाग नहीं करनी पड़ती. बच्चों को स्कूल भेजकर 8 बजे के स्लॉट के बाद काम शुरू कर लेती हूं. कम डिमांड वाले इलाकों में भी उनकी फिक्स्ड सैलरी सुरक्षित रहती है.2 घंटे वाले मॉडल में 10,000 रुपये फिक्स के साथ बोनस भी मिलता है.SOS फीचर, शिकायत का विकल्प और हेल्थ इंश्योरेंस भी दिया जाता है. कई महिलाएं कहती हैं कि यूनिफॉर्म पहनने से सम्मान महसूस होता है. इतनी सैलरी, इतनी सस्ती कीमत-चल कैसे रहा है यह मॉडल? असल में कंपनियां अभी स्केल पर फोकस कर रही हैं, मुनाफे पर नहीं.अर्बन कंपनी के इंस्टाहेल्प ने Q3 FY 2026 में 61 करोड़ रुपये का EBITDA लॉस दिखाया.स्नैबि और प्रोंटो  भारी वीसी फंडिंग पर चल रहे हैं.स्नैबिट को 56 मिलियन डॉलर और प्रोंटो (Pronto) को 13 मिलियन डॉलर मिल चुके हैं. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मॉडल वही रास्ता पकड़ेगा, जो कैब और फूड डिलीवरी में देखा गया.शुरुआत में ज्यादा इंसेंटिव, बाद में कटौती होगी.वर्कर्स की आज की कमाई धीरे-धीरे कम हो सकती है.कस्टमर्स के लिए दाम बढ़ना भी तय माना जा रहा है.अर्बन कंपनी अभी 60 फीसदी डिस्काउंट के बाद 99 रुपये में सर्विस दे रही है. आगे चलकर कीमतें बढ़ेंगी. क्या लोग फिर भी पैसे देंगे? यही बड़ा सवाल है. हो सकता है 'बहुत सस्ता, बहुत अच्छा' वाला फेज खत्म हो जाए, लेकिन एक बात साफ दिख रही है-कंज्यूमर बर्ताव बदल रहा है.लोग ऐप-आधारित सुविधाओं के इतने आदी हो चुके हैं कि शायद आगे चलकर ज्यादा पैसे देकर भी यह सुविधा नहीं छोड़ेंगे.भारत का इंस्टेंट हाउस-हेल्प सेक्टर इसी बदलाव की दहलीज़ पर खड़ा है.तेज, आसान और अब हर घर की जरूरत बनता हुआ.

WhatsApp 1 मार्च से भारत में करोड़ों यूजर्स के लिए बंद, चेक करें अपने अकाउंट की स्थिति

नई दिल्ली, SIM-Binding नियम को लेकर अब तस्वीर और साफ होती दिख रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि मैसेजिंग ऐप्स के लिए SIM से अकाउंट जोड़ना अनिवार्य रहेगा और इसमें किसी तरह की ढील देने का फिलहाल इरादा नहीं है. 1 मार्च की तय समय सीमा को लेकर भी सरकार सख्त रुख में दिखाई दे रही है.  दूरसंचार विभाग यानी DoT ने OTT मैसेजिंग ऐप्स को साफ निर्देश दिए हैं कि यूजर का अकाउंट एक्टिव SIM से जुड़ा होना चाहिए. WhatsApp पर क्या पड़ेगा असर? इसका मतलब यह है कि अगर फोन में वह SIM मौजूद नहीं है, जिससे WhatsApp या Telegram रजिस्टर है, तो ऐप का इस्तेमाल सीमित हो सकता है या बंद भी हो सकता है. भारत में WhatsApp के सबसे ज्यादा यूजर्स हैं जो अलग अलग डिवाइस पर एक ही नंबर का WhatsApp यूज करते हैं. ऐसे में करोड़ों यूजर्स के लिए WhatsApp काम नहीं करेगा जिन्होंने एक अकाउंट को अलग अलग डिवाइसेज पर ऐक्टिव कर रखा है.  रिपोर्ट्स में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान का जिक्र किया जा रहा है, जिसमें कहा गया कि सुरक्षा पहले है और SIM-Binding नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा. सरकार का मानना है कि डिजिटल फ्रॉड और फर्जी नंबर के जरिए हो रहे अपराधों को रोकने के लिए यह कदम जरूरी है. Sim Binding से प्रभावित कौन होगा?     जो यूजर एक सिम से अलग अलग डिवाइस पर व्हाट्सऐप चलाते हैं. साथ ही जो बार बार सिम कार्ड बदलते रहते हैं.      WhatsApp Web खुद से हर छह घंटे में लॉगआउट हो जाएगा. जारी रखने के लिए QR कोड स्कैन करना होगा.      60-80% तक छोटे बिजनेस ऑपरेशनल डिसरप्शन का शिकार हो सकते हैं. SIM Binding के बाद WhatsApp का Linked Device काम करेगा? WhatsApp का एक बड़ा फीचर इसका लिंक्ड डिवाइस है. इसके तहत ही एक नंबर से अलग अलग डिवाइस पर व्हाट्सऐप काम करता है. लेकिन इस नियम के बाद इसमें बड़ी रेस्ट्रिक्शन लगेगी.  गौरतलब है कि Sim Binding Rule के बाद Linked Device पूरी तरह से काम करना बंद नहीं करेगा, लेकिन लिमिटेशन आएंगी. WhatsApp सिर्फ उसी फोन में चलेगा जिसमें वो सिम होगा जिससे WhatsApp अकाउंट बनाया है. अगर डिवाइस से सिम निकलेगा तो वॉट्सऐप बंद हो सकता है.  मौजूदा समय में 14 दिन तक वॉट्सऐप लिंक्ड रहता है. लेकिन नियम आ जाने के बाद ये ऐसा नहीं हो पाएगा. बार बार वेरिफिकेशन होगा जिससे वॉट्सऐप  काम करना बंद हो सकता है. सिम बाइंडिंग से डिजिटल फ्रॉड कम होंगे? पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल सेंटर, और नकली प्रोफाइल के जरिए बड़े स्तर पर धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं. सरकार का तर्क है कि अगर हर मैसेजिंग अकाउंट एक्टिव और असली SIM से जुड़ा रहेगा, तो जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा. यही वजह है कि इस नियम को साइबर सुरक्षा के नजरिए से अहम बताया जा रहा है. SIM Binding पर टेक कंपनियों का विरोध हालांकि दूसरी तरफ कुछ अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों और इंडस्ट्री ग्रुप्स ने चिंता भी जताई है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ग्लोबल मैसेजिंग कंपनियों ने DoT के नियमों पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह नियम कानूनी दायरे से बाहर हो सकता है. कुछ कंपनियों ने इसे प्राइवेसी से भी जोड़ा है. लेकिन सरकार का रुख फिलहाल साफ दिख रहा है कि नियम वापस लेने या टालने का कोई संकेत नहीं है. WhatsApp यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा? खबरों के मुताबिक 1 मार्च की डेडलाइन इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इसके बाद नियम पूरी तरह लागू माने जाएंगे. पहले कहा जा रहा था कि कंपनियों को समय दिया गया है ताकि वे अपने सिस्टम में जरूरी तकनीकी बदलाव कर सकें. अब माना जा रहा है कि यह समय सीमा खत्म होने के करीब है. अगर ये नियम 1 मार्च से लागू हो गया तो WhatsApp Web या दूसरे डिवाइस पर लॉगिन के नियम सख्त हो सकते हैं. एक्टिव SIM के बिना ऐप चलाना मुश्किल हो सकता है. हालांकि अभी तक आम यूजर के लिए कोई अलग से आधिकारिक पब्लिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, इसलिए कई लोग इंतजार कर रहे हैं कि अंतिम रूप से क्या व्यवस्था लागू होगी.   WhatsApp ही नहीं, दूसरे ऐप्स पर भी असर यह पूरा मामला सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं है. Telegram, Signal और दूसरे मैसेजिंग ऐप्स भी इसके दायरे में बताए जा रहे हैं. यानी यह एक व्यापक नीति बदलाव हो सकता है, जो पूरे डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम को प्रभावित करेगा. फिलहाल साफ संकेत यही है कि SIM-Binding नियम पर सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है. 1 मार्च को लेकर काउंटडाउन जारी है और टेक कंपनियों के साथ-साथ करोड़ों यूजर्स की नजर भी इसी पर टिकी है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि नियम किस रूप में लागू होता है और आम यूजर के अनुभव में कितना बदलाव आता है.

वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ीं: कॉर्डेलिया क्रूज केस में हाई कोर्ट से कार्रवाई को मंजूरी

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले में तत्कालीन आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की मंजूरी दे दी है। अदालत ने केंद्र सरकार की उस याचिका को स्वीकार कर लियाए जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के पुराने फैसले को चुनौती दी गई थी। वानखेड़े पर आरोप है कि उन्होंने एनसीबी में रहते हुए अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को फंसाने की धमकी दी और उनके परिवार से रुपये की मांग की। उन पर जांच को गलत दिशा में मोड़ने का भी आरोप है। अनुशासनात्मक कार्रवाई को मंजूरी जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल एवं जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने साल 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ मामले के संबंध में आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ शुक्रवार को अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की अनुमति प्रदान कर दी। केंद्र सरकार ने कैट के आदेश को दी थी चुनौती जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल एवं जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस आदेश के खिलाफ केन्द्र की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें इस मामले में वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया गया था। केन्द्र सरकार ने कैट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा 18 अगस्त, 2025 को वानखेड़े को जारी किए गए आरोपपत्र को रद्द कर दिया गया था। क्या हैं समीर वानखेड़े पर आरोप? साल 2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी समीर वानखेड़े उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने 2021 में मुंबई के नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) में अपने कार्यकाल के दौरान अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ कांड में फंसाने की धमकी देकर उनके परिवार से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। शुरू की गई थी अनुशासनात्मक जांच कैट के समक्ष वानखेड़े ने केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक जांच को चुनौती देते हुए एक मूल आवेदन दायर किया। एनसीबी से कार्यमुक्त होने के बाद भी कथित रूप से उसके कानूनी विभाग से गोपनीय जानकारी मांगने के लिए अनुशासनात्मक जांच शुरू की गई थी। सिंगल बेंच ने दखल से किया था इनकार यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने एनसीबी के विधिक अधिकारी से जांच की दिशा मोड़ने का आश्वासन भी मांगा था। उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने 12 जनवरी को वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने वाले कैट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद यह मामला उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष पहुंचा। खंडपीठ ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की मंजूरी दे दी है।

अफगान हमले से दहला पाकिस्तान, PMO के नजदीक एयरस्ट्राइक की खबर से सुरक्षा अलर्ट

इस्लामाबाद भारत के दो पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शुरु हुई जंग विध्वसंक रूप लेते जी रही है। ताजा हमले में अफगानिस्तान की तालिबान सेना ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री दफ्तर के करीब ड्रोन से एयरस्ट्राइक की है। ये हमला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय से 5 किलोमीटर की दूरी पर किया गया। इस हमले के जरिए एक तरफ अफगानिस्तान ने अपनी ताकत का इजहार किया है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के सत्ता गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। माना जा रहा है कि अफगानिस्तान ने कंधार में पाकिस्तान के एयरस्ट्राइक का बदला इस्लामाबाद में ड्रोन अटैक से लिया है। अफगानिस्तान गृह मंत्रालय की बॉर्डर पुलिस के प्रवक्ता के हवाले से आज तक की रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पीएम ऑफिस से 5 किलोमीटर दूर तक हमला करने में कामयाबी हासिल की है। अफगानिस्तान बॉर्डर पुलिस के प्रवक्ता अब्दुल्ला फारूकी ने दावा किया है कि काबुल ने इस्लामाबाद में एयर स्ट्राइक की है। इसके अलावा नौशेरा, एबटाबाद, जमरूद में भी अटैक किए गए हैं। फारूकी कहा, "इस्लामाबाद के पीएम ऑफिस से 5 किलोमीटर दूर उनकी आर्मी का कैंप है, वहां हमने हमला किया है।" कई अहम सैन्य ठिकानों पर भी हमले का दावा अफगान सुरक्षा बलों ने यह दावा भी किया है कि उसके हमले में पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों और सुविधा केंद्रों को निशाना बनाया गया है। सुरक्षा बलों ने यह दावा भी किया कि ये हमले पाकिस्तान की तरफ से कंधार, काबुल और पक्तिका में किए गए एयरस्ट्राइक का जवाब है। हालांकि, पाकिस्तान की तरफ से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। चीन ने की दोनों पक्षों से युद्धविराम की अपील इस बीच, चीन ने दोनों पक्षों से युद्धविराम की अपील की है। चीन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंसक झड़पों को लेकर बहुत चिंतित है और उसने दोनों पक्षों से युद्धविराम के लिए बातचीत की है। गौरतलब है कि इन झड़पों में 133 अफगान तालिबान लड़ाके और पाकिस्तान के दो जवान मारे गये हैं। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा राजधानी काबुल सहित अफगानिस्तान के बड़े शहरों पर बमबारी के बाद चीन संघर्ष के बढ़ने पर बहुत चिंतित है। चीन ने दोनों पक्षों से शांत रहने और संयम बरतने की अपील करते हुए कहा है कि जितनी जल्दी हो सके युद्धविराम और खून-खराबा से बचा जाना चाहिए। 133 अफगान तालिबान लड़ाके मारने का पाक का दावा उन्होंने कहा, "चीन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष में लगातार मध्यस्थता की है और आगे भी तनाव कम करने में एक रचनात्मक भूमिका निभाना जारी रखने को वह तैयार है।" उन्होंने कहा कि मंत्रालय और पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान में चीन के दूतावास इस मामले पर दोनों देशों में संबंधित पार्टियों के साथ काम कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार का कहना है कि 133 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए। जबकि पाकिस्तान का कहना है कि चल रही झड़पों में उसके दो जवान मारे गए हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि हालिया हमलों के बाद अब अफगानिस्तान के साथ 'खुली जंग शुरु हो गई है।  

इजरायल के साथ भारत की बड़ी डील पर पाकिस्तान परेशान, सऊदी अरब कनेक्शन से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे पर दुनिया भर में सुर्खियां बनी हैं। वह भारत के ऐसे पहले पीएम थे, जो 2017 में इजरायल की धरती पर पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने एक और रिकॉर्ड बनाया और दूसरी बार इजरायल पहुंचे। यही नहीं इस दौरान उन्होंने इजरायल की संसद को भी संबोधित किया। इजरायल के नेता बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनकी गर्मजोशी वाली मुलाकात की तस्वीरें खूब वायरल हुई हैं। इस बीच पाकिस्तान को लेकर भी कयास लगने लगे हैं और कतर के मीडिया संस्थान अलजजीरा ने इसे उसकी सुरक्षा से जोड़ा है। अलजजीरा लिखता है कि पीएम मोदी का यह इजरायल दौरा ऐसा था, जिसमें उन्होंने खूब दिखाने की कोशिश की कि इजरायल के भारत कितना करीब है। बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी के दौरे से पहले ही कैबिनेट मीटिंग की थी और उसमें बताया था कि उसके 'हेक्सागन ऑफ अलायंस' में भारत सबसे अहम कड़ी है। इस फ्रेमवर्क में इजरायल की ओर से भारत के अलावा अफ्रीकी देशों, साइप्रस, ग्रीस और कुछ अन्य अरब मुल्कों को रखा गया है। पीएम मोदी का यह इजरायल दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब तुर्की के पीएम रेचेप तैयप अर्दोआग इजरायल के सबसे बड़े आलोचक बने हुए हैं। इसके अलावा पाकिस्तान और सऊदी अरब ने डिफेंस पैक्ट किया है। इसके तहत दोनों ने तय किया है किसी एक मुल्क पर भी हमला हुआ तो वह दोनों का माना जाएगा। ऐसी स्थिति में भारत और इजरायल दोनों के लिए यह जरूरी था कि वे एक गठबंधन का हिस्सा बनें। इजरायल और भारत के संबंधों में मोदी के सत्ता में आने के बाद से ही तेजी आई है। 2017 में पीएम मोदी पहली बार इजरायल गए थे। इसके बाद अब इजरायल तो भारत का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है। इसके अलावा अब डिफेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी के मामले में भी दोनों का सहयोग बढ़ सकता है। भारत की ओर से इजरायल के आयरन बीम के लिए भी डील करने की कोशिश है। इसे इजरायली सेना ने 2025 के दिसंबर में ही शामिल किया है। इसके अलावा आयरन डोम मिसाइल की तकनीक ट्रांसफर किए जाने को लेकर भी बातचीत चल रही है। इजरायल और भारत की डील में सऊदी अरब का क्यों आ रहा नाम अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत मसूद खान का कहना है कि पीएम मोदी और नेतन्याहू की यह मीटिंग अहम है। उन्होंने कहा कि इजरायल और भारत ने यह समझौता पाकिस्तान और सऊदी अरब के अग्रीमेंट की तर्ज पर किया है। इजरायल के ऐसे ही समझौते पहले ही अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों के साथ हो चुके हैं। चीन में पाक के राजदूत रहे मसूद खालिद का कहना है कि हमने देखा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पिछले साल इजरायली ड्रोन्स का भारत ने इस्तेमाल किया था। नेतन्याहू का हेक्सागन प्रस्ताव स्पष्ट नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि वह जल्दी ही प्रजेंटेशन देंगे। अब पाकिस्तान की बात करें तो वह बीते कुछ सालों में सुन्नी मुस्लिम देशों के गुट का नेतृत्व करने की कोशिश में रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान इकलौता ऐसा मुस्लिम देश है, जो परमाणु हथियारों से लैस है। इसी का वह फायदा उठाता रहा है। यही कारण था कि एक तरफ सऊदी अरब ने उसके तरफ रक्षा सौदा किया है तो वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर कर्ज भी दिया है।