samacharsecretary.com

यूएई में रह रहे भारतीयों के लिए अहम सूचना, दूतावास ने जारी किए सुरक्षा दिशा-निर्देश

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में लगातार छठे दिन भारी तनावपूर्ण माहौल बरकरार है। तनाव के बीच तमाम देशों की सरकार और दूतावास की तरफ से लगातार एडवाइजरी जारी की जा रही है। अबू धाबी में भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी की है। दूसरी तरफ ओमान की सरकार ने लोगों को आश्वासन दिया है कि वह लगातार सभी देशों की सरकार के साथ संपर्क में हैं। इसके अलावा ईरान के अराक यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस में फंसे भारतीय छात्रों ने भारत सरकार से उन्हें निकालने की अपील की है। ओमान के वर्तमान विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "गल्फ से घर वापस आने की उम्मीद कर रहे सभी लोगों के लिए, ओमान सरकार आपकी सरकारों और इंटरनेशनल एयरलाइंस के साथ मिलकर आपको घर वापस लाने के लिए विमान की व्यवस्था की जा रही है। हमारा मतलब है हर कोई, चाहे आपके पास कोई भी पासपोर्ट हो, सभी देशों के नागरिकों को सुरक्षा का मानवाधिकार है। लोग मायने रखते हैं, चलो अब जंग रोकते हैं। वहीं, अबू धाबी में भारतीय दूतावास ने लिखा, "संयुक्त अरब अमीरात और क्षेत्र में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, यूएई में वर्तमान में सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क रहें। यूएई अधिकारियों के सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें और समय-समय पर जारी आधिकारिक सलाह का भी पालन करें। असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए, हवाई क्षेत्र और नियमित निर्धारित उड़ान संचालन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।" भारतीय दूतावास ने आगे कहा कि हालांकि, भारतीय और यूएई एयरलाइंस ने यूएई अधिकारियों के साथ समन्वय में, संबंधित अधिकारियों के संचालन और सुरक्षा अनुमोदन के अधीन, भारत में कई गंतव्यों के लिए सीमित गैर-निर्धारित उड़ान संचालन शुरू किया है। फंसे हुए भारतीय नागरिक अपनी संबंधित एयरलाइनों से संपर्क करके इन उड़ानों का लाभ उठा सकते हैं। जिन लोगों की वीजा अवधि समाप्ति हो चुकी है, उनके लिए दूतावास ने कहा, "28 फरवरी के बाद फंसे हुए लोगों और जिनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई है, उनके लिए यूएई संघीय पहचान, नागरिकता, सीमा शुल्क और बंदरगाह प्राधिकरण (आईसीपी) ने आगंतुकों (पर्यटक/विजिट वीजा) और अन्य लोगों के लिए ओवरस्टे जुर्माना में छूट की घोषणा की है, जो इन असाधारण परिस्थितियों के कारण प्रस्थान करने में असमर्थ हैं। अबूधाबी में भारतीय दूतावास और दुबई में कॉन्सुलेट और उनकी आउटसोर्स पासपोर्ट, कॉन्सुलर और वीजा सर्विस नॉर्मल तरीके से काम कर रही हैं।"

मिडिल ईस्ट तनाव गहराया: कतर ने रोकी LNG सप्लाई, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल

नई दिल्ली इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की गैस सप्लाई पर भी दिखने लगा है। सरकारी गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड ने बताया है कि कतर से मिलने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की सप्लाई फिलहाल पूरी तरह बंद हो गई है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो डाउनस्ट्रीम ग्राहकों को गैस आपूर्ति में कटौती करनी पड़ सकती है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसके दीर्घकालिक सप्लायर पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड (पीएलएल) ने 3 मार्च को फोर्स मेजर नोटिस जारी किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि कतर और भारत के बीच एलएनजी जहाजों के आवागमन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री नेविगेशन प्रतिबंधों के कारण बाधाएं आ रही हैं। इसके अलावा कतर के रास लाफान में स्थित एलएनजी लिक्विफिकेशन प्लांट भी बंद कर दिया गया है। फाइलिंग के मुताबिक, पेट्रोनेट के अपस्ट्रीम सप्लायर कतर एनर्जी ने भी क्षेत्र में हालिया सैन्य टकराव के कारण संभावित फोर्स मेजर की स्थिति की जानकारी दी है। इसी वजह से पेट्रोनेट द्वारा गेल को दिए जाने वाले एलएनजी कोटे को 4 मार्च 2026 से शून्य कर दिया गया है। गेल ने कहा है कि वह इस स्थिति का आकलन कर रही है और जरूरत पड़ने पर अपने ग्राहकों को गैस सप्लाई में कटौती करने का फैसला ले सकती है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य स्रोतों से मिलने वाली एलएनजी सप्लाई फिलहाल प्रभावित नहीं हुई है। कंपनी लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और किसी भी बड़े अपडेट की जानकारी शेयर बाजार को देती रहेगी। भारत में गेल करीब 11,400 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन करती है और देश में गैस ट्रांसमिशन के क्षेत्र में लगभग 75 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखती है। यह नेटवर्क कई गैस स्रोतों को बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं और अन्य ग्राहकों से जोड़ता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमतें तीन साल के उच्च स्तर के करीब पहुंचने के बाद गुरुवार को थोड़ी नरम हुईं। ट्रेडर्स के अनुसार, एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमत लगभग 23.80 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट कर गिर गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में अभी भी दोगुनी से ज्यादा है। ऊर्जा बाजार में यह उछाल उस समय आया जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसके बाद क्षेत्र में तेल और गैस सप्लाई को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। बाजार को सबसे ज्यादा चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री मार्ग है। इसी रास्ते से मिडिल ईस्ट से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई दुनिया भर में होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर के रास लाफान एलएनजी प्लांट (दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात प्लांट) पर भी परिचालन रोक दिया गया है। इसके अलावा, कुछ एलएनजी टैंकरों ने यूरोप की बजाय एशिया की ओर अपना रास्ता बदल लिया है, जिससे सप्लाई के लिए प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और भी अस्थिर हो सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ सकता है।

सीमा पर बढ़ी सियासी गर्मी, ड्रोन अटैक के बाद अजरबैजान का सख्त कदम

बाकू अजरबैजान ने एयरपोर्ट और एक स्कूल के पास ड्रोन हमले में दो लोगों के घायल होने के बाद ईरानी दूत को तलब किया है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “एक ड्रोन ने नखचिवन स्वायत्त गणराज्य में हवाई अड्डे की टर्मिनल बिल्डिंग पर हमला किया, जबकि दूसरा ड्रोन शकराबाद गांव में एक स्कूल बिल्डिंग के पास गिरा।” इसके साथ ही ईरान से अपील करते हुए कहा, “हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के इलाके से किए गए इन ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा करते हैं, जिससे एयरपोर्ट की बिल्डिंग को नुकसान हुआ और दो आम लोग घायल हो गए।” मंत्रालय के अनुसार इस हमले से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ है। अजरबैजान ने ईरान से जल्द इस मामले को स्पष्ट करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं न होने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। बाकू ने यह भी कहा कि अजरबैजान इस मामले में जवाबी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। साथ ही ईरान के राजदूत को बुलाकर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है। ईरानी ड्रोन ने दोनों देशों की साझी सीमा के पास एक अजरबैजानी एयरपोर्ट पर हमला किया। यह पहली बार है जब तेहरान के खिलाफ यूएस-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने काकेशस के किसी राज्य को निशाना बनाया है। अजरबैजान, ने मिडिल ईस्ट संघर्ष में न्यूट्रल रुख अपनाया है। इसने हाल ही में इजरायल और ट्रंप प्रशासन के साथ करीबी संबंध बनाए, जबकि धीरे-धीरे काकेशस में पारंपरिक सहयोगी रहे मास्को से दूरी बनाई। देश में कोई अमेरिकी मिलिट्री बेस नहीं है, जिससे पता चलता है कि ईरान सीधे अमेरिकी सेना से जुड़े टारगेट से आगे अपने हमलों को बढ़ा सकता है। इजरायल के साथ बाकू के बढ़ते सैन्य सहयोग ने तेहरान के साथ टकराव पैदा किया है, हालांकि दोनों पड़ोसियों ने काफी हद तक प्रैक्टिकल संबंध बनाए रखे हैं। दोनों देशों में बहुसंख्यक शिया मुस्लिम हैं, और ईरान लाखों अजेरी लोगों का घर है – अनुमान है कि यह संख्या लगभग डेढ़ से 2 करोड़ से भी अधिक है – जिनमें से कई अजरबैजान की सीमा से लगे उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में रहते हैं।

‘इजरायल के लिए ईरान पर हमला मत करो’—पूर्व सैनिक की अपील पर भड़के अमेरिकी सांसद, की मारपीट

ईरान ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले का विरोध अमेरिका में भी हो रहा है। इस बीच, यूनाइटेड स्टेट्स सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति  की सुनवाई के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के विरोध में एक पूर्व मरीन ने प्रदर्शन किया। इस दौरान झड़प में एक अमेरिकी सांसद ने उसका हाथ तोड़ दिया। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घायल प्रदर्शनकारी की पहचान ब्रायन मैकगिनेस के रूप में हुई है, जो 2000 से 2004 तक यूनाइटेड स्टेट्स मरीन कॉर्प्स में सार्जेंट रह चुके हैं। मैकगिनेस सुनवाई के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। जब यूएस कैपिटल पुलिस ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, तो उन्होंने दरवाजे के फ्रेम को पकड़ लिया। इसी दौरान हाथ फंसने से उनका हाथ टूट गया। सीनेटर भी हटाने में शामिल वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस अधिकारियों के साथ अमेरिकी सांसद टिम शीही भी प्रदर्शनकारी पूर्व सैनिक को बाहर निकालने में मदद करते नजर आ रहे हैं। जब झड़प चल रही थी, तब कमरे में मौजूद लोगों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। लोग कह रहे हैं, "उसका हाथ… उसका हाथ… ओह माय गॉड!” दूसरी तरफ, पुलिस अधिकारी बार-बार प्रदर्शनकारी से दरवाजा छोड़ने के लिए कहते हुए सुनाई देते हैं। इसी दौरान पूर्व मरीन मैकगिनेस का हाथ टूट जाता है। “कोई इजरायल के लिए लड़ना नहीं चाहता” बाहर ले जाए जाने के दौरान मैकगिनेस चिल्लाते हुए कहते सुने गए, “कोई भी सैनिक इजरायल के लिए लड़ना नहीं चाहता।” यह बयान पश्चिम एशिया में जारी अमेरिकी सैन्य अभियानों को लेकर उनके विरोध को दर्शाता है। दूसरी तरफ इस घटना के बाद सीनेटर शीही ने सफाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने लिखा कि कैपिटल पुलिस एक असंतुलित प्रदर्शनकारी को हटाने की कोशिश कर रही थी और वह स्थिति को शांत करने में मदद कर रहे थे। उन्होंने कहा, “यह व्यक्ति टकराव के इरादे से कैपिटल आया था और उसे वही मिला। उम्मीद है कि उसे मदद मिलेगी और आगे कोई हिंसा नहीं होगी।” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है और अमेरिका में ईरान नीति तथा युद्ध विरोधी भावनाओं को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना अमेरिकी राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर गहरी असहमति को भी दर्शाती है।

नई टेक्नोलॉजी पर साथ आए भारत और फिनलैंड, एआई और 6जी में साझेदारी होगी मजबूत: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और फिनलैंड डिजिटाइजेशन और स्थिरता में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं, इससे दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6जी, क्लीन एनर्जी और क्वांटम कंप्यूटिंग में सहयोग बढ़ेगा। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ द्विपक्षीय बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देश के बीच हाई-टेक सेक्टर्स में बढ़ रहे सहयोग का जिक्र किया और कहा कि इससे दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा मिली है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस साल की शुरुआत में भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से भारत एंव फिनलैंड के बीच व्यापार निवेश और टेक्नोलॉजी में साझेदारी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "फिनलैंड के राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर आए राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब का स्वागत करता हूं। आप जैसे अनुभवी नेता का इस वर्ष के रायसीना डायलॉग का मुख्य अतिथि बनना सम्मान और खुशी की बात है। यूक्रेन से लेकर वेस्ट एशिया तक दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में भारत और यूरोप अपने संबंधों के सुनहरे दौर में प्रवेश कर रहे हैं।" दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हैदराबाद हाउस में हुई, जहां भारत एवं फिनलैंड के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से कई मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के बाद राष्ट्रपति स्टब के सम्मान में लंच का आयोजन भी किया। इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिनलैंड के राष्ट्रपति से मुलाकात की और प्रधानमंत्री के साथ उच्च स्तरीय बैठक से पहले द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की।विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वे रायसीना डायलॉग में राष्ट्रपति स्टब के संबोधन का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जहां अतिथि नेता मुख्य भाषण देने वाले हैं।

‘पहले अपना हाल देखे रूस’ – ईरान मुद्दे पर जेलेंस्की का बड़ा बयान

यूक्रेन ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच जारी जंग दिन-ब-दिन विकराल रूप लेती जा रही है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि मौजूदा समय में रूस खुलकर ईरान का सहयोगी की तरह व्यवहार नहीं कर रहा है। उन्होंने इसके पीछे की वजह बताते हुए तंज कसा है कि रूस तो खुद ही खल्लास हो चुका है तो वह दोस्त ईरान की क्या खाक मदद करेगा। जेलेंस्की का दावा है कि रूस की सैन्य क्षमता कमजोर पड़ चुकी है क्योंकि चार साल से यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध में उसके सैनिक न सिर्फ उलझे हुए हैं बल्कि हताश हैं। जेलेंस्की के मुताबिक इसी कारण रूस चाहकर भी ईरान की मदद करने की स्थिति में नहीं है। रूस की सैन्य क्षमता पर सवाल एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा, "मेरा मानना ​​है कि उनके पास इसकी काबिलियत ही नहीं है। उनकी सारी सेनाएँ या तो यूक्रेन की जमीन में दबी हुई हैं या यूक्रेन के खिलाफ जंग में लगी हुई हैं। यानी, रूस की अधिकांश सैन्य ताकत या तो यूक्रेन की जमीन पर भारी नुकसान झेल रही है या फिर उसी युद्ध में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसा ही परिदृश्य सीरिया में देखने को मिला था और अब ईरान के मामले में भी रूस सीमित भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है। रूस द्वारा ईरान को हथियार देने का आरोप इसके साथ ही यूक्रेनी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि रूस ईरान को हथियार और तकनीकी सहायता दे रहा है। उनका कहना है कि ईरानी ड्रोन “शाहेद” (Shahed) के मलबे में रूसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सबूत मिलते हैं। ज़ेलेंस्की ने कहा कि यह भी संभव है कि रूस ईरान को वायु रक्षा प्रणालियाँ (Air Defence Systems) उपलब्ध करा सकता है, क्योंकि रूस के पास ऐसे हथियारों का पर्याप्त भंडार है। जेलेंस्की ने कहा, "मुझे पूरा यकीन है कि रूस ईरानी सरकार को हथियार सप्लाई कर रहा है। हम समझते हैं कि वे “शाहेद” के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स दे रहे होंगे। मुझे लगता है कि यह सब आज मिडिल ईस्ट पर हमला करने वाले “शाहेद” के टुकड़ों में मिला है। अगर हमारे पार्टनर की इंटेलिजेंस सर्विस अपनी जानकारी शेयर करती हैं, तो इसकी पुष्टि हो जाएगी क्योंकि ईरानी “शाहेद” में रूस में बने पार्ट्स होते हैं। यह कुछ ऐसा है जो हम पक्के तौर पर जानते हैं। ईरान-रूस सैन्य सहयोग ज़ेलेंस्की ने यह भी कहा कि पहले ईरान ने रूस को हथियार उपलब्ध कराए थे जिनका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ किया गया। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में ईरान के लिए रूस को हथियार भेजना कठिन हो सकता है, लेकिन रूस अब ईरान से मिली तकनीकी लाइसेंस के आधार पर मिसाइल और ड्रोन का उत्पादन खुद कर रहा है। ज़ेलेंस्की ने यह चिंता भी जताई कि यदि पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा चलता है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका अपने और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए अधिक संसाधन लगाएगा। इस स्थिति में अमेरिकी पैट्रियट (Patriot) वायु रक्षा प्रणाली के इंटरसेप्टर मिसाइलों—PAC-2 और PAC-3—के उत्पादन और उपयोग को प्राथमिकता दी जा सकती है, जिससे यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य सहायता कम हो सकती है। तेल और ऊर्जा संकट का असर उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। ज़ेलेंस्की के अनुसार, तेल उत्पादों के आयात में कमी और युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि यूरोप सहित पूरी दुनिया इस ऊर्जा संकट का सामना कर रही है और सभी देशों को मिलकर इसका समाधान तलाशना होगा। यूक्रेन का मानना है कि पश्चिम एशिया का युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संतुलन पर भी पड़ सकता है।  

सुप्रीम कोर्ट की जज का संदेश: पद नहीं, न्याय को प्राथमिकता दें

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट जज बीवी नागरत्ना ने न्यायाधीशों को अपने फैसले पर अड़े रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि किसी भी दबाव में सही फैसला लेने से संकोच नहीं करना चाहिए। वह केरल उच्च न्यायालय में आयोजित दूसरे टीएस कृष्णमूर्ति अय्यर मेमोरियल लेक्चर में बोल रहीं थीं। इससे पहले उन्होंने मीडिया को लेकर भी ऐसी ही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि किसी भी तरह की बाधा, भय या प्रभाव में मीडिया अपनी भूमिका नहीं निभा सकता है। मंगलवार को जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'जजों को सही फैसला लेने से संकोच नहीं करना चाहिए। फिर चाहे इसकी वजह से उनकी उन्नति ही क्यों न रुक जाए या सत्ता में बैठे लोग नाराज हो जाएं।' उन्होंने कहा, 'एक जज को राजनीतिक दबाव, संस्थागत धमकी या पॉपुलर डिमांड से मुक्त ही रहना चाहिए।' मीडिया को लेकर क्या बोलीं शुक्रवार को जस्टिस नागरत्ना आईपीआई इंडिया अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म 2025 के सम्मान समारोह में पहुंचीं थीं। उन्होंने कहा था कि प्रेस पर कब्जा करने के हालिया प्रयासों के पीछे न केवल आर्थिक आधार हैं बल्कि राजनीतिक पहलू भी शामिल हैं। खास बात है कि जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश बनेंगी। जस्टिस नागरत्ना ने शुक्रवार को साफ तौर पर कहा कि मीडिया अपना काम ठीक से तभी कर सकता है जब वह किसी भी तरह के डर या दबाव से मुक्त हो। उन्होंने कहा कि आज के दौर में प्रेस की आादी को सबसे बड़ा खतरा सीधे तौर पर लगने वाली पाबंदियों (सेंसरशिप) से नहीं है। बल्कि, असली खतरा आर्थिक नीतियों, लाइसेंस देने के कड़े नियमों और मीडिया कंपनियों के मालिकाना हक से जुड़ा है। उन्होंने कहा, 'एक मीडिया प्रतिष्ठान कानूनी रूप से सरकार की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हो सकता है, फिर भी आर्थिक रूप से इस तरह से मजबूर हो सकता है कि ऐसी आलोचना महंगी पड़ जाए।' सर्वोच्च न्यायालय में इस समय एकमात्र महिला न्यायाधीश ने कहा कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की दिलचस्प संवैधानिक स्थिति है। उन्होंने कहा कि यह अधिकार अनुच्छेद 19(1)(ए) – भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(जी) – किसी भी पेशे से जुड़ने या किसी भी व्यवसाय, व्यापार या कारोबार को चलाने की स्वतंत्रता के बीच परस्पर क्रिया से उभरता है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति नागरत्ना ने बताया कि भारत में प्रेस की आज़ादी को संविधान दो अलग-अलग तरीकों से सुरक्षा देता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र मीडिया कितना जरूरी है।  

‘प्रगति’–‘विकास’ का अनावरण: Amit Shah बोले– टेक्नोलॉजी से पारदर्शी और तेज होगी जनगणना 2027

नई दिल्ली केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में जनगणना-2027 के लिए विकसित डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च किया। इस दौरान उन्होंने जनगणना के आधिकारिक शुभंकर “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) का भी औपचारिक अनावरण किया। सरकार की ओर से 16 जून 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही भारत की जनगणना 2027 की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। दो चरणों में होने वाली यह जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना अभियान मानी जा रही है। इस बार पहली बार पूरी जनगणना डिजिटल माध्यम से की जाएगी और नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प भी दिया जाएगा। स्व-गणना के लिए एक सुरक्षित वेब-आधारित पोर्टल तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पहले अपनी जानकारी 16 भाषाओं में ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। सफल पंजीकरण के बाद उन्हें एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी मिलेगी, जिसे प्रगणक के साथ साझा करने पर दर्ज जानकारी की पुष्टि की जा सकेगी। इस अवसर पर चार प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किए गए, जिन्हें सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने विकसित किया है। इनमें हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर (एनएलबीसी) वेब एप्लिकेशन, एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन, स्व-गणना पोर्टल और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल शामिल हैं। ये प्लेटफॉर्म जनगणना कार्यों की योजना, डेटा संग्रह और निगरानी को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाएंगे। जनगणना-2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” को मित्रवत और सहज प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये दोनों पात्र वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का संदेश भी देते हैं। इन शुभंकरों के माध्यम से जनगणना से जुड़ी जानकारी समाज के विभिन्न वर्गों तक सरल तरीके से पहुंचाई जाएगी। जनगणना-2027 का पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच गृह-सूचीकरण और आवास संबंधी जानकारी एकत्र करने के लिए चलाया जाएगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 में देशभर में जनसंख्या गणना के रूप में आयोजित होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय विवरण दर्ज किए जाएंगे। पूरे अभियान में देशभर के लगभग 30 लाख प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी शामिल होंगे, जो सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे। सरकार का उद्देश्य तकनीक के उपयोग से इस विशाल जनगणना को अधिक सटीक, सुरक्षित और व्यापक बनाना है। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

युद्धपोत डूबने का बदला? ईरान ने साधा अमेरिकी टैंकर पर निशाना, इलाके में बढ़ा तनाव

तेहरान युद्धपोत को डुबोए जाने का ईरान ने बदला ले लिया है।  ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने सरकारी टेलीविजन पर दिए गए एक बयान में कहा कि अमेरिकी जहाज फारस की खाड़ी के उत्तर में एक मिसाइल से टकराया और अभी उसमें आग लगी हुई है। श्रीलंकाई तट के पास युद्धपोत डुबोए जाने से ईरान अमेरिका पर भड़का हुआ है। भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत को अमेरिका ने बुधवार को हमला करके हिंद महासागर में डुबो दिया था। इस हमले में कई ईरानी नागरिकों की मौत हो गई। इससे भड़के ईरान ने गुरुवार को बड़ा बदला लिया है। ईरान के सरकारी टीवी ने दावा किया है कि ईरान ने खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर पर मिसाइल से बड़ा हमला किया है। यह इस इलाके में एनर्जी इंडस्ट्री पर ईरान का सबसे नया हमला है। इस हमले के बाद तेल टैंकर पर आग लग गई। खबर के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने सरकारी टेलीविजन पर दिए गए एक बयान में कहा कि जहाज फारस की खाड़ी के उत्तर में एक मिसाइल से टकराया था और अभी उसमें आग लगी हुई है। हालांकि, इस घटना की अभी अमेरिका की ओर से पुष्टि नहीं हुई है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरी तरह से कब्जा किया हुआ है और चीनी जहाज के अलावा किसी को भी वहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी हुई है। इससे पहले भी ईरान ने कई अन्य तेल टैंकरों पर भी हमला किया था। इससे पहले, ईरान ने गुरुवार सुबह इजरायली और अमेरिकी बेस पर हमलों की एक नई लहर शुरू की और धमकी दी कि अमेरिका को हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत पर टॉरपीडो से हमला करने का बहुत पछतावा होगा। एक धार्मिक नेता ने ट्रंप का खून मांगा, जबकि इजरायल ने कहा कि उसने तेहरान पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू कर दिया है। इजरायल ने कई आने वाले मिसाइल हमलों की घोषणा की और तेल अवीव और यरुशलम में हवाई सायरन बजाए गए। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने कहा कि और हमलों में अमेरिकी बेस को भी निशाना बनाया गया। इजरायली सेना ने कहा कि उसने लेबनान में ईरान के समर्थन वाले हिज्बुल्लाह मिलिटेंट ग्रुप पर टारगेटेड हमले किए, जो ईरान की राजधानी में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की एक बड़ी लहर है, लेकिन उसने ज्यादा जानकारी नहीं दी। थोड़ी देर बाद तेहरान में कई जगहों पर धमाके सुने गए। बता दें कि अमेरिकी नेवी ने मंगलवार रात हिंद महासागर में ईरानी फ्रिगेट IRIS डेना को डुबो दिया, जिसमें कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए, जिसे ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को समुद्र में ज़ुल्म बताया। अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को युद्ध शुरू किया है, जिसमें ईरान की लीडरशिप को टारगेट किया गया और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मार डाला गया। अधिकारियों के अनुसार, इस युद्ध में अब तक ईरान में 1,000 से ज्यादा लोग, लेबनान में 70 से ज्यादा और इजरायल में लगभग एक दर्जन लोग मारे गए हैं। इसने दुनिया के तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट डाली है, इंटरनेशनल शिपिंग में रुकावट डाली है और मिडिल ईस्ट में लाखों यात्री फंस गए हैं।  

पश्चिम बंगाल के गवर्नर सीवी आनंद बोस ने दिया इस्तीफा, ममता बनर्जी ने जताया हैरानी

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के गवर्नर सीवी आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे की वजहों का पता नहीं चल पाया है. इस्तीफा देने के बाद वे दिल्ली रवाना हो गए हैं. सीवी आनंद बोस 3.5 वर्षों से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे. इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पीटीआई से बात करते हुए कहा है कि 'मैंने राजभवन में पर्याप्त समय गुजार लिया है.' बता दें कि पश्चिम बंगाल में इसी वर्ष अप्रैल-मई में चुनाव होने को हैं. इस बीच ये घटनाक्रम सामने आया है. सीवी आनंद बोस केरल के कोट्टायम के रहने वाले हैं. उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी पी.के. वासुदेवन नायर थे. वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनुयायी थे. इसलिए उनके नाम में 'बोस' जोड़ा गया. वह 1977-बैच के रिटायर्ड भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं. उन्हें 23 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया. वह भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं. आनंद बोस ने सरकार के सचिव के पद पर कार्य किया है. भारत के मुख्य सचिव और विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे हैं. वह संयुक्त राष्ट्र के साथ परामर्शदात्री स्थिति में पर्यावास गठबंधन के अध्यक्ष हैं और संयुक्त राष्ट्र पर्यावास शासी परिषद के सदस्य थे. राज्यपाल बोस ने शिक्षा, वन और पर्यावरण, श्रम और सामान्य प्रशासन जैसे कई मंत्रालयों में जिला कलेक्टर और प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में काम किया है. ममता ने जताई हैरानी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीवी आनंद बोस के इस्तीफ़ की अचानक आई खबर पर हैरानी जताई है. उन्होंने कहा कि मैं हैरान और बहुत परेशान हूं. उनके इस्तीफ़े के पीछे की वजहें मुझे अभी पता नहीं हैं. हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए मुझे हैरानी नहीं होगी अगर आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गवर्नर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कुछ राजनीतिक फायदे के लिए दबाव डाला हो. केंद्रीय गृह मंत्री ने अभी मुझे बताया कि आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का गवर्नर बनाया जा रहा है. उन्होंने इस बारे में तय रिवाज के मुताबिक मुझसे कभी सलाह नहीं ली.