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दशकों बाद युद्ध में टॉरपीडो की वापसी, दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार चर्चा में

विदेश  ईरान-अमेरिका के युद्ध में मिसाइलों के बाद अब टॉरपीडो की एंट्री भी हो गई है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि हिंद महासागर में ईरान का एक युद्धपोत अमेरिका ने टॉरपीडो से हमला करके डुबो दिया है.अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा है कि हिंद महासागर में अमेरिका ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसे लगा कि वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित है. कई सालों बाद टॉरपीडो का इस्तेमाल होने से इसकी काफी चर्चा हो रही है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये होता क्या है और कैसे इससे नुकसान पहुंचाया जाता है… साथ ही जानते हैं कि क्या भारत के पास भी ये हथियार हैं… वर्ल्ड वॉर में हुआ था इस्तेमाल क्या आप जानते हैं दूसरे वर्ल्ड वॉर के बाद टॉरपीडो से किसी जहाज को डुबोए जाने की यह चौथी घटना है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका ने किसी दुश्मन जहाज को टॉरपीडो से निशाना बनाया है.  है क्या टॉरपीडो? टॉरपीडो एक ऑटोमैटिक हथियार है, जिसे पानी की सतह के ऊपर या नीचे से दागा जा सकता है और ये पानी के अंदर टारगेट को हिट करता है. ज्यादातर इसका इस्तेमाल पनडुब्बियों और जहाजों को टारगेट करने के लिए किया जाता है. इसमें एक विस्फोटक सामग्री होती है, जो टारगेट से टकराने पर या उसके पास पहुंचने पर फट जाती है. हालांकि, टॉरपीडो का इस्तेमाल खासकर पनडुब्बियों में किया जाता है, लेकिन इन्हें सतह पर मौजूद युद्धपोतों से भी दागा जा सकता है या विमानों द्वारा गिराया जा सकता है. आधुनिक टॉरपीडो को आमतौर हल्के या भारी टॉरपीडो में बांट दिया गया है, जिससे कई  तरह के टारगेट को हिट करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. इसे 1960 के दशक में दुश्मन की पनडुब्बियों और सतह के हथियारों दोनों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया था.  इसे सबसे पहली बार 19वीं शताब्दी में ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य में बनाया गया था, जिसके बाद धीरे-धीरे इनका उपयोग विश्वभर की नेवी में फैल गया. शुरुआत में इन्हें छोटे, तीव्र गति वाले जहाजों पर लगाया जाता था, जिनका उद्देश्य उस समय के बड़े, भारी कवच ​​वाले, लेकिन धीमी गति वाले युद्धपोतों और ड्रेडनॉट्स को चुनौती देना था.  पहले और दूसरे विश्व युद्ध में हुआ था इस्तेमाल टॉरपीडो का पहला बड़े पैमाने पर उपयोग प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुआ, जब जर्मन पनडुब्बियों (जिन्हें यू-बोट के नाम से जाना जाता था) ने ब्रिटिश द्वीपों की ओर जाने वाले अटलांटिक महासागर में व्यापारिक जहाजों पर हमला करने के लिए इनका इस्तेमाल किया. हालांकि, टॉरपीडो युद्ध अपने चरम पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पहुंचा, जब सभी प्रमुख शक्तियों ने अपने सतही जहाजों, पनडुब्बियों और विमानों को टॉरपीडो से लैस कर दिया. उस वक्त कई टॉरपीडो का इस्तेमाल किया गया था. क्या भारत के पास भी है.. अमेरिका के मार्क 48, चीन के यू-6, इटली के ब्लैक शार्क, रूस के टाइप 53 टॉरपीडो को दुनिया भर की नेवी में सबसे अहम हथियार माना जाता है. इसमें भारत का वरुणस्त्र आदि भी शामिल हैं. वरुणस्त्र को डीआरडीओ की ओर से एंटी-एयरक्राफ्ट गन (एएसडब्ल्यू) के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो एक स्वदेशी हथियार है. वरुणस्त्र का उपयोग भारतीय नौसेना के कई जहाजों में किया जाता है. भारतीय नेवी की पनडुब्बियां सोवियत-युग के टाइप 53 टॉरपीडो का उपयोग करती हैं, जबकि स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां फ्रांसीसी F21 और इतालवी ब्लैक शार्क हैवीवेट टॉरपीडो के मिश्रण का उपयोग करती हैं. वहीं, नौसेना के P-8 पोसाइडन और MH-60R सीहॉक एएसडब्ल्यू विमान, अमेरिका से प्राप्त एयर-ड्रॉप किए जाने वाले मार्क 54 लाइटवेट टॉरपीडो का उपयोग करते हैं. भारतीय नौसेना की ओर से इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे शक्तिशाली टॉरपीडो सुपरसोनिक मिसाइल-असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो या स्मार्ट सिस्टम है. ये 643 किलोमीटर दूर तक के लक्ष्यों को भेद सकता है. 

ईरान का अमेरिका पर तीखा वार: ‘भारत के मेहमान’ पर अटैक की कीमत चुकानी होगी

वाशिंगटन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिका का हमला और उसमें ईरानी पोत को तबाही जारी युद्ध को और विध्वंसक बना सकती है। ईरान की तरफ से इस हमले को अत्याचार करार दिया गया है। साथ ही कहा कि 'भारतीय नौसेना के मेहमान' पर हमला करने की अमेरिका भारी कीमत चुकाएगा। जहाज पर करीब 180 लोग सवार होने की खबरें हैं, जिनमें से 32 को बचा लिया गया था। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा, 'लगभग 130 नाविकों को ले जा रहे और भारत की नौसेना के अतिथि पोत 'फ्रिगेट देना' पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। मेरी बात याद रखना- अमेरिका ने जो उदाहरण पेश किया है, उसे उस पर अत्यधिक पछतावा होगा।' ईरानी पोत हाल में भारत की तरफ से आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास में शामिल हुआ था। पनडुब्बी से बनाया निशाना अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वॉशिंगटन में कहा था कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह किसी दुश्मन युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोने की पहली घटना है। हेगसेथ ने पत्रकारों से कहा, 'एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था। लेकिन उसे टॉरपीडो से डुबो दिया गया।' उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने उस ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसका नाम 'सुलेमानी' के नाम पर रखा गया था। सुलेमानी, पूर्व ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी थे, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी सेना ने मार गिराया था। क्या है IRIS Dena ईरान के सबसे नए युद्धपोतों में से एक, आईरिस देना, मौदगे श्रेणी का एक फ्रिगेट है जो ईरानी नौसेना के लिए समुद्र में गश्त करता है। यह भारी तोपों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, पोत-रोधी मिसाइलों और टॉरपीडो से लैस था। पोत पर एक हेलीकॉप्टर भी था। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि मौजूदा युद्ध के दौरान कम से कम 17 ईरानी नौसैनिक पोतों को डुबो दिया गया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, 'हम ईरानी नौसेना को भी डुबो रहे हैं – पूरी नौसेना को।' श्रीलंका ने किया रेस्क्यू विदेश मंत्री विजिथा हेराथ ने संसद को बताया कि श्रीलंकाई नौसेना और तटरक्षक बल को तड़के पांच बजकर आठ मिनट पर दक्षिणी बंदरगाह जिले गॉल से लगभग 40 समुद्री मील की दूरी पर स्थित 'आईरिस देना' नामक पोत के डूबने की सूचना मिली थी। हेराथ ने कहा कि श्रीलंकाई नौसेना और वायु सेना ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया। उन्होंने कहा, 'उनमें से 30 को बचा लिया गया जबकि जहाज पर लगभग 180 लोगों के सवार होने की खबर है।' मंत्री ने कहा कि जहाज के डूबने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। ईरानी पोत ने हाल ही में भारत द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लिया था।  

भारत समर्थक आवाज बनीं निशाना? कनाडा में नैन्सी ग्रेवाल के कत्ल पर खालिस्तानियों पर शक

नई दिल्ली कनाडा में पंजाबी मूल की मशहूर यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल का कत्ल हो गया है। नैन्सी को कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिस ट्रूडो और खालिस्तानियों के आलोचक के तौर पर देखा जाता था। उनकी कनाडा की लासेल में चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई। पुलिस का कहना है कि कनाडा के विंडसर में रहने वाली नैन्सी का कत्ल मंगलवार की रात को किया गया। पुलिस ने बताया कि नैन्सी को रात 9:30 बजे के करीब घायल अवस्था में पाया गया। वह खून से लथपथ मिली थीं। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी अत्यधिक खून बहने के कारण मौत हो गई। वह सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणियों के लिए जानी जाती थीं। इस हत्याकांड में खालिस्तानियों को भी संदेह से देखा जा रहा है। भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव पैदा होने के दौरान उन्होंने खुलकर तीखी टिप्पणियां की थीं। अकसर वह कनाडा के पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो और खालिस्तानियों की निंदा करती थीं। उन्होंने कई बार पंजाब के कुछ धार्मिक और राजनीतिक नेताओं की आलोचना की थी। उनकी हत्या को इससे भी जोड़कर देखा जा रहा है। अब तक पुलिस ने इस मामले में किसी को हिरासत में नहीं लिया है और ना ही किसी पर संदेह जाहिर किया है। इस मामले की जांच तेज करते हुए पुलिस ने नैन्सी के घर और उसके आसपास के इलाके की घेराबंदी की है। सबूतों को सुरक्षित करके रखा गया है। फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इसी इलाके में दो सप्ताह पहले भी एक शख्स की हत्या हुई थी। इस घटना ने एक बार फिर से कनाडा की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। बता दें कि कनाडा में लंबे समय से खालिस्तानी तत्व ऐक्टिव रहे हैं। इन्हीं को लेकर भारत और कनाडा के रिश्तों में भी तनाव आ गया था। हालांकि जब जस्टिन ट्रूडो की सत्ता से विदाई हुई और नया नेतृ्त्व आया तो चीजें बदल गई हैं। फिलहाल पुलिस आसपास के घरों की फुटेज तलाश रही है। पुलिस को लगता है कि नैन्सी के घर कौन-कौन गया था। उनके बारे में पता चल जाए तो आगे जांच में काफी मदद मिल जाएगी। खालिस्तानी सरगना गुरपतवंत सिंह पर भी खुलकर बोलती थीं हमला खालिस्तानी सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू पर भी तीखा हमला वह अकसर बोलती थीं। ग्रेवाल की परवरिश हरियाणा के सिरसा में हुई थी और वह लंबे समय से कनाडा में बसी हुई थीं। सिरसा के ही सतलुज पब्लिक स्कूल से पढ़ीं और फिर कॉलेज का रुख करने वालीं ग्रेवाल अपनी मुखरता के लिए जानी जाती थीं। कनाडा में खालिस्तान का विरोध करने वाले लोगों की वह आवाज बन गई थीं। नैन्सी ग्रेवाल अकसर महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर राय रखती थीं और कभी भी खालिस्तानी तत्वों की धमकियों के आगे झुकीं नहीं।  

IRIS Dena पर सस्पेंस: भारत से जुड़ाव की चर्चा के बीच अमेरिका की कार्रवाई से मचा हड़कंप

वाशिंगटन अमेरिकी हमले का शिकार हुई ईरानी IRIS Dena को ईरान ने भारत का मेहमान बताया था। हालांकि, भारतीय नौसेना के साथ अभ्यास करने और विदा होने की तारीख अलग इशारा कर रही हैं। ईरान ने आरोप लगाए हैं कि अमेरिका ने भारत के मेहमान पर बगैर चेतावनी हमला कर दिया था। हाल ही में अमेरिकी स्ट्राइक में IRIS Dena डूब गई थी, जिसमें करीब 80 लोगों की मौत हो गई थी। कब आया भारत और कब निकला सूत्रों ने बताया है कि 28 फरवरी को युद्ध छिड़ने के बाद जहाज ने भारत से मदद नहीं मांगी थी। IRIS Dena 16 फरवरी से 25 फरवरी तक चले वाइजैग में IFR यानी इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का हिस्सा बनी थी। खास बात है कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की शुरुात 28 फरवरी को की थी। भारतीय मेहमान थी या नहीं इस लिहाज से ईरानी जहाज 25 फरवरी के बाद भारतीय क्षेत्र के बाहर था और विदा होने के बाद अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था। अखबार को सूत्रों ने बताया कि जहाज और उसमें शामिल लोग 16 फरवरी से 25 फरवरी के बीच भारतीय मेहमान थे। इसके बाद जहाज ने भारत किसी भी तरह की कोई मदद की मांग नहीं की थी। खास बात है कि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी पोत पर हमले की पुष्टि कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह किसी दुश्मन युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोने की पहली घटना है। ईरान ने बताया था भारतीय मेहमान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा, 'लगभग 130 नाविकों को ले जा रहे और भारत की नौसेना के अतिथि पोत 'फ्रिगेट देना' पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। मेरी बात याद रखना- अमेरिका ने जो उदाहरण पेश किया है, उसे उस पर अत्यधिक पछतावा होगा।' ईरान के सबसे नए युद्धपोतों में से एक, आईरिस देना, मौदगे श्रेणी का एक फ्रिगेट है जो ईरानी नौसेना के लिए समुद्र में गश्त करता है। यह भारी तोपों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, पोत-रोधी मिसाइलों और टॉरपीडो से लैस था। पोत पर एक हेलीकॉप्टर भी था। श्रीलंका ने बचाया बुधवार को विदेश मंत्री विजिथा हेराथ ने संसद को बताया कि श्रीलंका की नौसेना को सूचना मिली थी कि 180 लोगों को ले जा रहा पोत 'इरिस देना' संकट में है, जिसके बाद श्रीलंका ने बचाव अभियान के लिए अपने पोतों और वायुसेना के विमानों को भेजा।  

DA हाइक अपडेट: केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 4% इजाफा, मिलेगी आर्थिक राहत

नई दिल्ली  बढ़ती महंगाई के बीच केंद्र सरकार ने आखिरकार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत दे दी है। सरकार ने महंगाई भत्ता यानी DA और महंगाई राहत यानी DR में 4% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस फैसले से करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों को सीधा फायदा मिलेगा। ऐसे समय में जब रोजमर्रा की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, यह बढ़ोतरी लाखों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने यह फैसला उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI-IW के ताजा आंकड़ों के आधार पर लिया है। महंगाई के कारण कर्मचारियों की जेब पर जो असर पड़ रहा था, उसे संतुलित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। आसान शब्दों में कहें तो यह बढ़ोतरी कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने में मदद करेगी। DA और DR का महत्व: आपकी सैलरी पर सीधा असर महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों के बेसिक वेतन का एक तय प्रतिशत होता है। वहीं पेंशनभोगियों को इसी तरह की सहायता महंगाई राहत (DR) के रूप में दी जाती है। जब महंगाई बढ़ती है तो सरकार समय-समय पर DA और DR में संशोधन करती है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय का वास्तविक मूल्य बना रहे। मान लीजिए किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन 30,000 रुपये है। अगर पहले 50% DA मिल रहा था, तो उसे 15,000 रुपये महंगाई भत्ता मिलता था। अब 4% की बढ़ोतरी के बाद DA 54% हो जाएगा, यानी 16,200 रुपये। इस तरह हर महीने 1,200 रुपये की अतिरिक्त रकम सीधे सैलरी में जुड़ जाएगी। हालांकि यह सिर्फ एक उदाहरण है। असल बढ़ोतरी आपके पे-मैट्रिक्स और बेसिक पे पर निर्भर करेगी। एरियर और भुगतान की तारीख सरकार ने साफ किया है कि यह बढ़ोतरी पिछली तारीख से लागू मानी जाएगी, जो आमतौर पर 1 जनवरी से प्रभावी होती है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को पिछले महीनों का बकाया यानी एरियर भी मिलेगा। यह एरियर एकमुश्त उनके बैंक खाते में जमा किया जाएगा। त्योहारों या घरेलू खर्चों के समय यह अतिरिक्त राशि काफी काम आएगी। पेंशनभोगियों को भी एरियर का लाभ मिलेगा, जिससे उन्हें मेडिकल खर्च और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत होगी। आमतौर पर बढ़ोतरी की घोषणा के बाद 1-2 महीनों के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है। अर्थव्यवस्था और समाज पर असर DA में बढ़ोतरी का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे बाजार पर पड़ता है। जब लाखों लोगों की आय बढ़ती है, तो उनकी खर्च करने की क्षमता भी बढ़ती है। इससे बाजार में मांग बढ़ती है और स्थानीय व्यापार को फायदा होता है। पेंशनभोगियों के लिए यह बढ़ोतरी खास मायने रखती है। कई बुजुर्ग पूरी तरह पेंशन पर निर्भर होते हैं। दवाइयों, इलाज और रोजमर्रा के खर्चों के बीच यह अतिरिक्त रकम उन्हें आर्थिक सहारा देती है। इसी वजह से DA और DR में संशोधन को सामाजिक सुरक्षा का अहम हिस्सा माना जाता है। क्या आगे और बढ़ सकता है DA? कर्मचारी संगठनों की मांग है कि भविष्य में DA को और बढ़ाया जाए और 8वें वेतन आयोग के गठन पर भी जल्द फैसला लिया जाए। हालांकि फिलहाल 4% की बढ़ोतरी को तात्कालिक राहत के रूप में देखा जा रहा है। महंगाई के आंकड़ों के आधार पर साल में दो बार DA की समीक्षा की जाती है, इसलिए आगे भी बदलाव संभव है। सरकार का कहना है कि वह आर्थिक संतुलन बनाए रखते हुए कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखेगी। फिलहाल यह बढ़ोतरी लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत है और इससे उनकी मासिक आय में साफ फर्क दिखाई देगा। कुल मिलाकर 4% DA बढ़ोतरी का फैसला केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी लेकर आया है। बढ़ती महंगाई के दौर में यह अतिरिक्त रकम घर के बजट को संभालने में मदद करेगी। एरियर के साथ मिलने वाली राशि त्योहारों और जरूरी खर्चों में सहारा बनेगी। आने वाले समय में अगर महंगाई के आंकड़े इसी तरह बढ़ते रहे, तो DA में और संशोधन की संभावना भी बनी रहेगी। फिलहाल यह घोषणा लाखों परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी है।

दुनिया में बढ़ा तनाव! ईरान जंग के बीच अमेरिका का Doomsday मिसाइल परीक्षण, धमकी के बाद स्पेन आया लाइन पर

न्यूयॉर्क/ तेहरान मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच मंगलवार रात अमेरिका ने कैलिफोर्निया तट पर एक डूम्सडे बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से रात 11 बजे 'मिनटमैन III बैलिस्टिक मिसाइल' लॉन्च की गई, जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज्यादा ताकतवर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।  यूएस स्पेस फोर्स के मुताबिक, जीटी 254 के रूप में जाना जाने वाला निहत्था रॉकेट, पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप के पास अपने टार्गेट पर जाकर गिरा. फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के मुताबिक, मिसाइल को 'प्रभावशीलता, तत्परता और सटीकता को सत्यापित करने' के लिए दागा गया था।  576वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने एक प्रेस रिलीज में कहा, "इससे हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग घटकों के प्रदर्शन का आकलन करने की अनुमति मिली।  जंग की ज़द में पूरा मिडिल ईस्ट पिछले दिनों अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तेहरान में मौत हो गई. इसके बाद पूरा मिडिल ईस्ट जंग की चपेट में आ गया है।   खामेनेई की मौत के बाद ईरान की तरफ से लगातार इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी हैं. उधर हिज्बुल्लाह के एक्टिव होने के बाद इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरुत में हमलों की झड़ी लगा दी है।  राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में ईरान पर हमले तेज करने की कसम खाई और चेतावनी देते हुए कहा कि बड़ा हमला होने वाला है.  धमकी और स्पेन आ गया लाइन पर! मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है. इस बार मामला केवल ईरान, इज़राइल और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप का प्रमुख देश स्पेन भी इसमें खिंच आया. महज दो दिनों के भीतर स्पेन की सरकार के बयान और रुख में जो बदलाव दिखाई दिया, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आर्थिक दबाव की ताकत को फिर से सामने ला दिया।  पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ता युद्ध दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सांचेज़ के अनुसार, इस तरह की लड़ाई लाखों लोगों की ज़िंदगी को खतरे में डाल सकती है. उन्होंने टेलीविजन पर अपने संबोधन में कहा कि स्पेन ऐसी किसी कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा जो दुनिया के लिए नुकसानदेह हो और उसके अपने मूल्यों के खिलाफ जाती हो. उनका कहना था कि केवल किसी देश के दबाव या डर से स्पेन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा. लेकिन स्पेन का यह रुख ज्यादा देर तक बिना प्रतिक्रिया के नहीं रहा।  ट्रंप की कड़ी चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत सख्त प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्पेन अपने यहां मौजूद संयुक्त सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए अमेरिका को नहीं करने देता, तो अमेरिका स्पेन के साथ व्यापारिक संबंध खत्म कर सकता है. ट्रंप के इस बयान को यूरोप में गंभीरता से लिया गया. वजह यह है कि ट्रंप पहले भी कई बार टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों की धमकी देकर दूसरे देशों पर दबाव बनाते रहे हैं. स्पेन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था. यही फैसला ट्रंप को नागवार गुजरा।  सैन्य अड्डों पर शुरू हुआ विवाद स्पेन के दक्षिण में दो अहम सैन्य अड्डे हैं रोता नौसैनिक अड्डा और मोरॉन वायुसेना अड्डा.इनका इस्तेमाल अमेरिका और स्पेन दोनों करते हैं, लेकिन इन पर नियंत्रण स्पेन का ही है. ट्रंप ने इन अड्डों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो उनका इस्तेमाल कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि हम वहां जाकर उनका उपयोग कर सकते हैं, कोई हमें रोक नहीं सकता।  स्पेन का साफ संदेश: युद्ध नहीं ट्रंप की धमकी के बावजूद सांचेज़ ने शुरुआत में अपना रुख बरकरार रखा. उन्होंने कहा कि स्पेन की नीति बहुत स्पष्ट है युद्ध नहीं.उनका कहना था कि अगर ईरान पर हमले बढ़ते हैं तो मध्य पूर्व एक बार फिर लंबे और महंगे युद्ध में फंस सकता है, जैसा पहले इराक और अफगानिस्तान में हुआ था.इन युद्धों ने कई सालों तक क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया था और भारी मानवीय व आर्थिक नुकसान हुआ था।  यूरोपीय संघ के नियमों के मुताबिक व्यापार से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से किए जाते हैं. इसलिए अगर अमेरिका स्पेन पर व्यापारिक कार्रवाई करता है तो उसका असर पूरे यूरोप पर पड़ सकता है. यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ओलोफ गिल ने कहा कि यूरोपीय संघ अपने सदस्य देशों के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ने पर अपने आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।  ऐसे होता है दोनों के बीच व्यापार  आंकड़ों के अनुसार अमेरिका और स्पेन के बीच व्यापार काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इतना बड़ा भी नहीं कि तुरंत आर्थिक संकट पैदा हो जाए. स्पेन के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ स्पेन के मुताबिक अमेरिका के साथ स्पेन का कुल व्यापार उसके सकल घरेलू उत्पाद का करीब 4.4 प्रतिशत है.स्पेन से अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब 16 अरब यूरो का है.इस हिसाब से अमेरिका स्पेन का छठा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की चेतावनी का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी होता है।  ट्रंप के बयान के बाद स्पेन के उद्योग और व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई. वहां के प्रमुख कारोबारी संगठन सीईओई, सीईपीवाईएमई और एटीए ने कहा कि अमेरिका स्पेन का एक अहम आर्थिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रभावित नहीं होना चाहिए. व्यापारिक संगठनों ने उम्मीद जताई कि दोनों देश बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझा लेंगे।  सरकार की तरफ से संयम बरतने का संदेश स्पेन के मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियों के अलावा अमेरिका की तरफ से कोई नया कदम नहीं उठाया गया है. उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय शांत रहने की अपील की।  स्पेन और ट्रंप प्रशासन के बीच यह पहला विवाद नहीं है. पिछले साल स्पेन ने नाटो के उस प्रस्ताव … Read more

छोटे बच्चों के साथ अप्राकृतिक यौन व्यवहार के आरोप में 10वीं के छात्रों पर POCSO कार्रवाई

 नाशिक महाराष्ट्र के नाशिक से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां कक्षा 10 में पढ़ने वाले कई छात्रों के खिलाफ POCSO के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोप हैं कि ये छात्र अपने से भी कम उम्र के छात्रों के साथ अप्राकृतिक सेक्स करते थे। साथ ही इस अपराध को रैगिंग का नाम दिया जाता था। पुलिस ने अभिभावकों की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है।  रिपोर्ट के अनुसार, घटना नाशिक जिले के एक सरकारी हॉस्टल की है। आरोप हैं कि यहां कक्षा 10 के छात्रों ने कक्षा 5 और 6 के बच्चों के साथ अप्राकृतिक सेक्स किया है। मंगलवार को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद एसपी बालासाहेब पाटिल मौके पर पहुंचे और जांच की। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, 'कक्षा 10 के कई छात्र कम उम्र के छात्रों के साथ रैगिंग के नाम पर अप्राकृतिक सेक्स करते थे। पीड़ितों के बयान के आधार पर बीते 6 से 7 महीनों से उनके साथ ऐसा काम किया जा रहा था। 22 फरवरी को उन्होंने इस मामले को हॉस्टल सुप्रीटेंडेंट सामने उठाया था।' उन्होंने कहा, 'इसके बाद सुप्रीटेंडेंट ने कक्षा 10 के लड़कों के माता पिता से संपर्क किया और उन्हें घर लेकर जाने के लिए कहा। उन्होंने पीड़ितों के पैरेंट्स को भी बुलाया। एक पीड़ित के माता पिता ने मंगलवार को कक्षा 10 के लड़कों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।' कार्रवाई शुरू पुलिस ने सीनियर स्टूडेंट्स को हिरासत में लेने की शुरुआत कर दी है। इसके बाद उन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा। इसके अलावा हॉस्टल के सुप्रीटेंडेंट समेत तीन कर्मचारियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। उनपर आरोप हैं कि घटना की जानकारी लगने के बाद भी उन्होंने पुलिस को सूचित नहीं किया था। हॉस्टल में 60 छात्रों के रहने की क्षमता है, लेकिन फिलहाल 48 रह रहे थे।

मिडिल ईस्ट तनाव से एयर ट्रैवल प्रभावित, 180 उड़ानें कैंसिल; सरकार ने जारी की सलाह

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही लड़ाई का असर फ्लाइट पर भी दिख रहा है. दोनों तरफ से लगातार हमले हो रहे हैं, जिससे साफ है कि यह संकट अभी जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा. हालात सुधरने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे हैं. इस टकराव का असर कई देशों पर पड़ रहा है, खासकर अरब के मुस्लिम देशों के नागरिकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. लगातार हो रहे हमलों में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।  रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में मरने वालों की संख्या 1,000 से ज्यादा हो गई है. लेबनान में करीब 60 और इजरायल में लगभग एक दर्जन लोगों की मौत हुई है. इस संघर्ष में अमेरिका के 6 सैनिकों के मारे जाने की भी खबर है. बढ़ते तनाव का असर हवाई यात्रा पर भी पड़ा है. सुरक्षा कारणों से कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जबकि कई फ्लाइट्स का रूट बदला गया है. कुछ एयरपोर्ट्स पर सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हुई हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है और हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा है. कतर की राजधानी दोहा में भारतीय दूतावास ने अहम सूचना जारी की है. दूतावास के मुताबिक, कतर के एयरस्पेस बंद होने की वजह से हमाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानें फिलहाल अस्थायी रूप से निलंबित हैं. कतर एयरवेज समेत अन्य एयरलाइंस की फ्लाइट्स भी कैंसिल है. यात्रियों से कहा गया है कि वे अपनी यात्रा को दोबारा तय करने के लिए संबंधित एयरलाइन से संपर्क में रहें. दूतावास ने यह भी बताया कि वह कतर प्रशासन और भारतीय समुदाय के नेताओं के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है. वहीं, स्काई न्यूज के अनुसार मिडिल ईस्ट संकट के बीच ब्रिटेन सरकार की पहली चार्टर्ड फ्लाइट उड़ान नहीं भर पाई।  एयर इंडिया की कई फ्लाइट कैंसिल एयर इंडिया ने जानकारी दी है कि मिडिल ईस्ट के लिए उसकी ज्यादातर उड़ानें 5 मार्च 2026 की रात 11:59 बजे (IST) तक निलंबित रहेंगी. हालांकि जेद्दा के लिए कुछ तय उड़ानें 5 मार्च से दोबारा शुरू की जाएगी. इनमें दिल्ली-जेद्दा-दिल्ली और मुंबई-जेद्दा-मुंबई रूट शामिल हैं. इसके अलावा एयर इंडिया 5 मार्च की सुबह मुंबई-दुबई-दिल्ली रूट पर एक अतिरिक्त फ्लाइट (AI909D/996D) चलाने की योजना बना रही है, ताकि फंसे हुए यात्रियों को वापस लाया जा सके. यह उड़ान बड़े B777 विमान से संचालित होगी, जिसमें ज्यादा यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है।  भारत के कई शहरों से करीब 180 उड़ानें रद्द सूत्रों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण 4 मार्च को मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के एयरपोर्ट से लगभग 180 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. मुंबई एयरपोर्ट पर 48 प्रस्थान और 45 आगमन समेत कुल 93 उड़ानें रद्द हुईं. दिल्ली एयरपोर्ट पर 25 प्रस्थान और 27 आगमन मिलाकर 52 उड़ानें रद्द हुईं. बेंगलुरु एयरपोर्ट पर अलग-अलग एयरलाइनों की 34 उड़ानें रद्द की गईं, जिनमें 18 आगमन उड़ानें थीं।  फंसे यात्रियों को लाने के लिए चलाई गई विशेष फ्लाइट मुंबई एयरपोर्ट से 4 मार्च को कुछ विशेष फ्लाइट भी चलाई गईं. स्पाइसजेट ने फुजैराह से मुंबई के लिए दो विशेष उड़ानें संचालित की, जबकि एयर इंडिया ने दुबई से मुंबई के लिए एक फ्लाइट चलाई. इसके अलावा अमीरात ने दुबई से मुंबई के लिए तीन फ्लाइट संचालित की. गल्फ एयर और रॉयल जॉर्डन ने भी अम्मान (जॉर्डन) और दम्माम (सऊदी अरब) से मुंबई के लिए एक-एक फ्लाइट चलाई।  कोलकाता एयरपोर्ट पर भी कई फ्लाइट कैंसिल कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी पश्चिम एशिया के लिए कई उड़ानें प्रभावित हुईं. दोहा, दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों के लिए कम से कम पांच फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गईं. इनमें कतर एयरवेज और अमीरात की उड़ानें भी शामिल थीं. देश की बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने बताया कि एयरस्पेस प्रतिबंधों के कारण 28 फरवरी से 3 मार्च के बीच पश्चिम एशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उसकी 500 से ज्यादा फ्लाइट कैंसिल करनी पड़ीं।  कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बढ़ाई गईं हालांकि यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए कुछ एयरलाइनों ने अन्य अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर अतिरिक्त उड़ानें शुरू की हैं. एयर इंडिया ने दिल्ली से टोरंटो, फ्रैंकफर्ट और पेरिस के लिए अतिरिक्त फ्लाइट जोड़ने का फैसला किया है. वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मस्कट, दिल्ली और मुंबई के बीच अतिरिक्त सेवाएं शुरू करने की घोषणा की है।  विदेशी नागरिकों को निकालने की तैयारी अमेरिका के विदेश विभाग ने भी बताया कि मिडिल ईस्ट में फंसे अमेरिकी नागरिकों को निकालने के लिए विशेष चार्टर्ड फ्लाइट चलाई गई है और आगे भी ऐसी उड़ानें भेजी जाएंगी।  यूएई में ओवरस्टे जुर्माना माफ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी बड़ा फैसला लेते हुए उन यात्रियों का ओवरस्टे जुर्माना माफ कर दिया है जो फ्लाइट रद्द होने या एयरस्पेस बंद होने की वजह से समय पर देश नहीं छोड़ पाए. कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब पूरी दुनिया की हवाई यात्रा पर पड़ रहा है. एयरलाइंस लगातार अपनी उड़ानें कैंसिल या बदल रही हैं और यात्रियों को अपनी यात्रा से पहले एयरलाइन से जानकारी लेने की सलाह दी जा रही है।  लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर एतिहाद एयरवेज का चेक-इन काउंटर बंद है और वहां उड़ानों में देरी और रद्द होने की सूचना लगाई गई है. अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद कई फ्लाइट्स प्रभावित हो गई हैं। 

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बहस तेज, खामेनेई के फतवे के बावजूद अमेरिका की बेचैनी क्यों?

तेहरान  ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियन ने कहा कि सुप्रीम लीडर अली खामनेई के परमाणु हथियारों पर जारी फतवे के चलते ईरान कभी न्यूक्लियर हथियार विकसित नहीं करेगा. ईरान की ओर से आया ये बयान साफ करता है कि वो अमेरिका के साथ किसी भी तरह की लड़ाई में पड़ने के मूड में नहीं है. हालांकि अमेरिका की तैयारी को देखते हुए ईरान ने भी अपनी पूरी तैयारी रखी हुई है लेकिन उसने साफ किया है कि उस पर बनाया जा रहा दबाव फालतू है. अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता से पहले ईरानी राष्ट्रपति ने दोहराया कि खामेनेई का स्पष्ट ऐलान है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने गुरुवार को कहा कि उनका देश परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा, क्योंकि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पहले ही इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं. राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा -‘जब हमारे सर्वोच्च नेता घोषणा करते हैं कि हम परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे, तो इसका मतलब है कि हम उन्हें नहीं बनाएंगे.’ उन्होंने यह भी कहा कि किसी समाज का धार्मिक नेता राजनीतिक नेताओं की तरह झूठ नहीं बोल सकता. परमाणु वार्ता से ठीक पहले आया बयान यह बयान अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर तीसरे दौर की वार्ता से पहले आया है. अमेरिका लगातार ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है, जबकि तेहरान इन आरोपों से इनकार करता है. गौरतलब है कि अयातुल्ला अली खामेनेई ने 2000 के दशक की शुरुआत में एक फतवा जारी कर परमाणु हथियारों के विकास पर रोक लगा दी थी. ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. ईरान ने पहले भी दी थी परमाणु कार्यक्रम घटाने की डील ईरान और अमेरिका के बीच जेनेवा में तीसरे दौर की वार्ता से पहले ईरान के राष्ट्रपति ने ये बयान दिया है. इससे पहले दूसरी वार्ता के दौरान विदेश मंत्री ने अमेरिका के सामने प्रस्ताव रखा था कि अगर वो अपने सारे प्रतिबंध ईरान पर से हटा लेता है, तो वो अपने यूरेनियम संवर्धन को 60 फीसदी तक घटाने के लिए तैयार है. ताजा खबरें आईं कि ईरान इसे 3-4 फीसदी तक भी सीमित रखने को तैयार हो सकता है, जैसा साल 2015 की डील में हुआ था. हालांकि अमेरिका चाहता है कि वो इसे खत्म कर दे, जिसे लेकर दोनों में विवाद बना हुआ है.

नई स्टडी से खुलासा: मौत के बाद इंसान क्या-क्या सुन सकता है? जानिए हैरान कर देने वाले तथ्य

न्यूयॉर्क    सोचिए… आपका दिल धड़कना बंद कर देता है. डॉक्टर CPR रोक देते हैं. आपको ‘डेथ’ घोषित कर दिया जाता है,लेकिन आपका दिमाग अब भी जिंदा है,और आपको सब कुछ सुनाई दे रहा है.यहां तक कि डॉक्टर आपकी मौत का समय भी बोल रहे हों! मौत आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य बनी हुई है. इंसान के साथ मौत के बाद क्या होता है और आखिरी क्षणों में उसका अनुभव कैसा होता है.इस पर बहुत कुछ कहा जा चुका है. इन विषयों पर कई रिसर्च भी हो चुके हैं, लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने सभी को चौंका दिया. इसमें दावा किया गया है कि इंसान की मौत के बाद भी उसका दिमाग कुछ समय तक एक्टिव रहता है और वह अपने आसपास की आवाजें सुन सकता है. न्यूयॉर्क में एक डॉक्टर ने ऐसा खुलासा किया है जिसने मौत की परिभाषा को ही बदलकर रख दिया है. दिल की धड़कन रुक जाने के बाद भी इंसानी दिमाग सक्रिय रहता है, और कई बार मरीज डॉक्टरों द्वारा अपनी मौत की घोषणा तक सुन लेते हैं. यह दावा एक भयावह लेकिन महत्वपूर्ण स्टडी में किया गया है, जो Resuscitation में पब्लिश हुई है. मौत के बाद भी सबकुछ सुनाई देता है इस स्टडी का नेतृत्व न्यूयॉर्क के एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर (NYU Langone Medical Center) के डॉक्टर सैम पारनिया ने किया. उन्होंने उन मरीजों से बात की जिन्हें क्लिनिकली मृत घोषित कर दिया गया था-यानी जिनका दिल धड़कना बंद हो चुका था,लेकिन बाद में वे दोबारा जिंदा हो गए. चौंकाने वाली बात यह थी कि कई मरीजों ने अपने कमरे में हो रही घटनाओं को सटीक रूप से याद किया. डॉ. पारनिया के अनुसार, इन मरीजों की याददाश्त इतनी स्पष्ट इसलिए थी क्योंकि दिल रुकने के बाद भी लगभग एक घंटे तक दिमाग में सामान्य और लगभग सामान्य ब्रेन ऐक्टिविटी पाई गई. उन्होंने बताया कि ये अनुभव न तो सपने जैसे होते हैं और न ही भ्रम या मतिभ्रम.ये एक्सपियरेंस खास होते हैं. इस शोध में अमेरिका और ब्रिटेन के 25 अस्पतालों में कार्डियक अरेस्ट से बचे 53 मरीजों की दिमागी गतिविधि और जागरूकता का अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि 40 फीसदी मरीजों ने यादें या सचेत विचार होने की बात कही. डॉ. पारनिया के अनुसार, मौत के दौरान कई लोगों को लगता है कि वे अपने शरीर से अलग हो चुके हैं और कमरे में घूमकर चीजें देख-पहचान रहे हैं. जैसे कंप्यूटर अचानक रीबूट हो गया इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) से पता चला कि मरीजों में दिल रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक gamma, delta, theta, alpha और beta जैसी ब्रेन वेव्स मौजूद थीं, जो सोचने और जागरूकता से जुड़ी होती हैं. यह बताता है कि दिमाग दिल रुकने के बाद भी पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि कभी-कभी उच्च स्तरीय गतिविधि दिखाता है-मानो कोई बंद कंप्यूटर अचानक रीबूट हो रहा हो. पूरी लाइफ का फ्लेशबैक एकसाथ डॉ. पारनिया का कहना है कि पहले यह माना जाता था कि दिल रुकने के 10 मिनट बाद दिमाग स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है, लेकिन यह शोध दिखाता है कि दिमाग CPR जारी रहने पर देर तक सक्रिय रह सकता है. यही ऊर्जा का उभार लोगों को अपने पूरे जीवन की यादें एक साथ देखने जैसा अनुभव भी दे सकता है.