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Middle East में बढ़ा तनाव: सऊदी अरब ने ईरान के 5 अधिकारियों को देश से निकाला

सऊदी अरब सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी सरकार ने ईरान पर “खुलेआम हवाई हमलों” का आरोप लगाते हुए कड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में ईरान की कार्रवाई को “स्पष्ट आक्रामकता” बताया। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले न केवल सऊदी अरब बल्कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के अन्य देशों और कई अरब-इस्लामिक राष्ट्रों को भी निशाना बना रहे हैं। सऊदी अरब का कहना है कि ईरान ने उसकी संप्रभुता, नागरिकों, आर्थिक हितों और राजनयिक परिसरों को निशाना बनाया, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। इस बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के सैन्य अटैची, सहायक सैन्य अटैची और तीन अन्य अधिकारियों को निष्कासित करते हुए 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। सऊदी सरकार ने यह भी कहा कि ईरान की गतिविधियां बीजिंग समझौता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के खिलाफ हैं। रियाद ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए साफ कहा कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।इस घटनाक्रम से मिडिल ईस्ट में पहले से जारी संकट और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

अमेरिका-इजराइल आक्रामक, ईरान रक्षात्मक– पूर्व राजनयिक का बड़ा बयान

ईरान मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पूर्व भारतीय राजनयिक के.पी. फैबियन ने बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इजराइल ने की, जबकि ईरान केवल जवाबी कार्रवाई कर रहा है। फैबियन के अनुसार, ईरान बेहद रणनीतिक तरीके से कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का रुख संतुलित है वह अन्य देशों के जहाजों के लिए रास्ता खुला रखना चाहता है, लेकिन अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाए हुए है। उन्होंने हाल ही में जापान के प्रधानमंत्री सनाए  ताकाइची की अमेरिका यात्रा और डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात का भी जिक्र किया। फैबियन के मुताबिक, इन कूटनीतिक वार्ताओं के बीच ईरान ने दो जापानी नागरिकों को रिहा करने जैसे कदम उठाए, जो उसकी रणनीति का हिस्सा है। परमाणु हमलों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार किसी भी बड़े रेडिएशन रिसाव के संकेत नहीं मिले हैं, जिससे तत्काल परमाणु खतरे की पुष्टि नहीं होती।   इतिहास का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्वेज नहर संकट का जिक्र किया और कहा कि पहले भी इस क्षेत्र में बड़ी शक्तियों के टकराव ने हालात बिगाड़े हैं। ऊर्जा संकट पर चिंता जताते हुए फैबियन ने कहा कि कतर की गैस उत्पादन क्षमता लगभग 17% घट गई है, जिससे भारत सहित कई देशों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि कतर को हर साल करीब 20 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। फैबियन ने यह भी कहा कि ईरान ने पहले परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए कई शर्तें मान ली थीं, लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू के प्रभाव में अमेरिका ने इसे आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने इस पूरे संघर्ष को “खतरनाक वैश्विक स्थिति” बताते हुए कहा कि त्योहार जैसे ईद के दौरान हमले होना बेहद दुखद है और यह दिखाता है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं।

तेल मार्ग पर बड़ा खतरा: होर्मुज में जहाज पर प्रोजेक्टाइल अटैक से दुनिया में हड़कंप

होर्मुज होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक बड़ा समुद्री सुरक्षा खतरा सामने आया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE ) के तट के करीब एक वाणिज्यिक जहाज के पास “अज्ञात प्रोजेक्टाइल” से विस्फोट हुआ, जिससे वैश्विक चिंता बढ़ गई है।ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, यह घटना शारजाह से लगभग 15 नॉटिकल मील उत्तर में हुई। जहाज के कप्तान ने बताया कि विस्फोट जहाज के बेहद करीब हुआ, जिससे स्थिति बेहद खतरनाक बन गई।हालांकि राहत की बात यह है कि जहाज के सभी चालक दल सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है और आसपास के सभी जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते ईरान पर संदेह जताया जा रहा है। हाल के दिनों में ईरान पर अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने के आरोप लगे हैं।होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20% वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। इस घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलमार्ग सुरक्षित नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के प्रमुख बुनियादी ढांचे पर हमला कर सकता है। वहीं G7 देशों के विदेश मंत्रियों ने भी बयान जारी कर क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए हस्तक्षेप करने की तैयारी जताई है। इस घटना ने साफ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।  

ईद की रात खून से लाल हुआ ईरान: चौथे सप्ताह में जंग ने मचाई भारी तबाही

ईरान पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान में मरने वालों की संख्या 1,500 से अधिक हो गई है। यह जानकारी सरकारी मीडिया ने स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से दी है।अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी से शुरू किए गए हमलों के बाद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। राजधानी तेहरान में रमजान खत्म होने के दौरान भीषण हवाई हमले हुए, जिससे लोगों में डर और अफरा-तफरी फैल गई। युद्ध के चौथे सप्ताह में भी संघर्ष जारी है और अब इसका दायरा और बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। यह हमला करीब 4,000 किलोमीटर दूर से किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान के पास लंबी दूरी की ताकतवर मिसाइलें मौजूद हैं। इसके साथ ही ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकाने नतांज परमाणु संवर्धन केंद्र पर फिर से हमला किया गया है, जिससे परमाणु सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है। इस युद्ध का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे वैश्विक आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों में ईरान को कुल कितना नुकसान हुआ है और देश की कमान किसके हाथ में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई को इस भूमिका के लिए नामित किया गया है, लेकिन वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: पीएम मोदी ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक, ऊर्जा मुद्दों पर फोकस

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उन्होंने मिडिल ईस्ट में बदलती स्थिति के मद्देनजर पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की समीक्षा की और बरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों से चर्चा की। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में तेल, गैस, खाद समेत सभी जरूरी चीजों की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है और सरकार इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है। उपभोक्ताओं और उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए वैश्विक घटनाक्रमों की निरंतर निगरानी करना सरकार का मुख्य केंद्र बिंदु है। दुनिया भर में ऊर्जा संकट 12 मार्च को पीएम मोदी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। यह राष्ट्रीय चरित्र की एक कठिन परीक्षा है और इससे निपटने के लिए शांति, धैर्य और जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने कहा, "आपूर्ति श्रंखलाओं में आई बाधाओं को हम कैसे दूर कर सकते हैं, यह पता लगाने के लिए भी लगातार प्रयास जारी हैं।" खाड़ी देशों के नेताओं से पीएम मोदी कर रहे बात 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री ने कई वैश्विक नेताओं से बात की है। संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजरायल और ईरान के नेताओं के साथ फोन पर बातचीत की है। होर्मुज से बहुत कम जहाजों को गुजरने की अनुमति ईरान ने इजरायल और कई खाड़ी पड़ोसी देशों पर हमला करके जवाबी कार्रवाई की है। ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित करता है, जो एक प्रमुख शिपिंग मार्ग है और जिसके जरिए दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा का परिवहन होता है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने बहुत कम जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है।  

मौत के मुंह से बची बच्ची: दूसरी मंजिल से गिरते ही 17 साल के लड़के ने थामा, वीडियो वायरल

इस्तांबुल इस्तांबुल के फातिह जिला में एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 2 साल की बच्ची की जान बाल-बाल बच गई। जानकारी के अनुसार, छोटी बच्ची दोहा मुहम्मद अपने घर की दूसरी मंजिल की खिड़की के पास खेल रही थी। उसी दौरान वह संतुलन खोकर नीचे गिरने लगी। लेकिन ठीक उसी समय पास में मौजूद 17 वर्षीय युवक  ने स्थिति को भांप लिया। वह तुरंत खिड़की के नीचे आकर खड़ा हो गया और जैसे ही बच्ची गिरी, उसने उसे हवा में ही पकड़ लिया। हालांकि घटना काफी पुरानी है लेकिन इसका वीडियो वर्तमान में फिर से तेजी से वायरल हो रहा है।   पास लगे एक सिक्योरिटी कैमरे के वीडियो में दिखता है कि एक छोटी बच्ची नीचे गिर रही है और लड़का ज़बात उसे हवा में ही लपक लेता है। इसके बाद, जब वह बच्ची को अपनी बाहों में थामे होता है, तो आस-पास खड़े लोग उसे घेर लेते हैं। फ़्यूज़ी ज़बात ने बताया कि "मैं सड़क के ऊपरी हिस्से से नीचे की ओर जा रहा था। मैंने देखा कि एक आदमी ऊपर की ओर देख रहा है; इस बात ने मेरा ध्यान खींचा," चश्मदीद इज़्ज़त बायर ने DHA को बताया। "और मैंने देखा कि वह छोटी बच्ची बस गिरने ही वाली थी। और इस 'शेर' जैसे इंसान ने उस बच्ची को हवा में ही लपक लिया और उसे उसके परिवार से मिला दिया।" इस साहसिक कदम के कारण बच्ची को एक भी चोट नहीं आई और वह पूरी तरह सुरक्षित बच गई। यह पूरी घटना पास लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि उस समय बच्ची की मां रसोई में खाना बना रही थीं और बच्ची खेलते-खेलते खिड़की तक पहुंच गई थी।बच्ची के परिवार ने युवक को “हीरो” बताते हुए उसका धन्यवाद किया और आभार स्वरूप 200 तुर्की लीरा का इनाम भी दिया। वहीं, युवक ने बेहद सादगी से कहा कि उसने सिर्फ इंसानियत के नाते और “अल्लाह के लिए” यह काम किया। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सही समय पर उठाया गया एक छोटा कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।

मिडिल ईस्ट संकट गहराया: नेतन्याहू बोले—ईरान के खिलाफ एकजुट हों सभी देश

नई दिल्ली इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को दुनिया के नेताओं से अपील की कि वे ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के युद्ध प्रयासों में शामिल हों। बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायल की धरती पर हाल ही में हुए हमलों का हवाला देते हुए ईरान को एक बढ़ता हुआ वैश्विक खतरा बताया। नेतन्याहू की वर्ल्ड लीडर्स से अपील ईरान ने इजरायल के अराद में मिसाइल अटैक किया था। इस हमले की जगह से ही नेतन्याहू ने 48 घंटों में ईरान के किए गए हमलों के बारे में दुनिया को बताया। इजरायली पीएम ने कहा, 'ईरान ने यरुशलम में आम नागरिकों वाले इलाकों और अहम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया है, जिनमें वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद शामिल हैं।' नेतन्याहू ने कहा कि ईरान न केवल इजरायल के लिए, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी खतरा बन गया है। इजरायल में हुए हमले नेतन्याहू ने कहा, 'अगर आपको इस बात का सबूत चाहिए कि ईरान पूरी दुनिया को खतरे में डाल रहा है, तो पिछले 48 घंटों की घटनाओं ने यह सबूत दे दिया है। पिछले 48 घंटों में, ईरान ने एक आम नागरिक वाले इलाके को निशाना बनाया।' नेतन्याहू ने आगे कहा, 'वे इसे बड़े पैमाने पर लोगों को मारने वाले हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। खुशकिस्मती से, कोई मारा नहीं गया, लेकिन यह सिर्फ किस्मत की वजह से हुआ, न कि उनके इरादे की वजह से। उनका इरादा तो आम नागरिकों की हत्या करना ही है।' इजरायली पीएम ने कहा, 'दूसरी बात, उन्होंने यरुशलम में तीन एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों—वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद के ठीक बगल में हमला किया। नेतन्याहू ने बताया, 'एक चमत्कार की बदौलत, फिर से, उनमें से किसी को कोई चोट नहीं आई, लेकिन वे तीन प्रमुख एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों को ही निशाना बना रहे थे।' इजरायल-अमेरिका कर रहे दुनिया के लिए काम इजरायली पीएम ने कहा, 'वे हर किसी को अपने निशाने पर ले रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और ऊर्जा मार्गों को रोक रहे हैं और पूरी दुनिया को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहे हैं।' नेतन्याहू ने कहा, 'आपको और क्या सबूत चाहिए कि इस शासन को, जो पूरी दुनिया के लिए खतरा है, रोकना ही होगा? इजरायल और अमेरिका पूरी दुनिया के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और अब समय आ गया है कि बाकी देशों के नेता भी इसमें शामिल हों।' इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा, 'मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मैं देख सकता हूं कि उनमें से कुछ लोग उस दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर रहे हैं, लेकिन अभी और ज्यादा के आने की जरूरत है।' नेतान्याहू ने ईरान के खिलाफ व्यापक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की अपीलों का भी स्वागत किया और इसे न केवल इजरायल और अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी जरूरी बताया।

‘फिट रहो या हटो’ नियम लागू: वजन बढ़ा तो उड़ान भी रुकेगी, तनख्वाह पर भी पड़ेगी मार

नई दिल्ली एयर इंडिया ने अपने केबिन क्रू (फ्लाइट अटेंडेंट्स) के लिए फिटनेस के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। अब केवल अनुभव ही नहीं बल्कि शरीर का वजन और फिटनेस भी यह तय करेगी कि कौन आसमान में उड़ान भरेगा और कौन जमीन पर रहेगा। टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने अपने केबिन क्रू के लिए 'कैबिन क्रू हेल्थ एंड फिटनेस कंप्लायंस पॉलिसी' लागू करने का फैसला किया है। 1 मई से प्रभावी होने वाले इन नए नियमों के तहत अब स्टाफ का BMI (बॉडी मास इंडेक्स) उनकी नौकरी और सैलरी तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा। एयर इंडिया ने फिटनेस को मापने के लिए क्रू मेंबर्स को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है:     नॉर्मल (18 से 24.9): इसे पूरी तरह फिट माना गया है। ऐसे क्रू मेंबर्स बिना किसी रोक-टोक के उड़ान भर सकेंगे।     अंडरवेट (18 से कम): इस श्रेणी के स्टाफ को 'अनफिट' माना जाएगा और उन्हें ड्यूटी से हटाकर मेडिकल चेकअप के लिए भेजा जाएगा।     ओवरवेट (25 से 29.9): इन्हें भी एक्टिव फ्लाइंग से हटा दिया जाएगा। मेडिकल क्लियरेंस मिलने के बाद ही इन्हें दोबारा काम पर लौटने की अनुमति मिलेगी।     मोटापा (30 या उससे ज्यादा): इस कैटेगरी को 'ओबीस' (Obese) माना गया है। ऐसे कर्मचारियों को किसी भी हाल में उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नियमों की अनदेखी पड़ी महंगी: सैलरी और नौकरी पर खतरा नए नियमों के अनुसार अगर कोई क्रू मेंबर फिटनेस मानकों को पूरा नहीं करता है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है:     ग्राउंडिंग और नो-पे: अनफिट पाए जाने पर कर्मचारी को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया जाएगा और जब तक वह फिट घोषित नहीं होता, उसे बिना वेतन (Leave without pay) के छुट्टी पर रहना होगा।     कड़ी निगरानी: अब फ्लाइट से पहले और फ्लाइट के बाद भी क्रू मेंबर्स का रैंडम BMI चेक किया जाएगा।     वार्निंग लेटर: अनफिट पाए जाने पर सुधार के लिए 30 दिन का समय मिलेगा। अगर 30 दिन में वजन कम नहीं हुआ तो औपचारिक 'कॉशन लेटर' दिया जाएगा। अगले 30 दिन तक सुधार न होने पर 'फाइनल वार्निंग' और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल टेस्ट अनिवार्य जिन क्रू मेंबर्स का BMI 30 या उससे ज्यादा है उन्हें 7 दिनों के भीतर ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल जैसे जरूरी टेस्ट करवाने होंगे। कंपनी यह देखना चाहती है कि वजन बढ़ने के पीछे कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है। क्यों जरूरी है यह कदम? एयरलाइन का मानना है कि केबिन क्रू का फिट होना न केवल विमान की सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि यात्रियों की सेवा और आपातकालीन स्थितियों (Emergency) से निपटने के लिए भी अनिवार्य है।

जजों की वफादारी पर सवाल! सुप्रीम कोर्ट के जज ने कही चौंकाने वाली बात

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां ने रविवार को अहम टिप्प्णी की है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है कि कुछ जज राजा से भी ज्यादा वफादार वाले सिंड्रोम से पीड़ित हैं। यहां तक कि सही मामलों तक में जमानत नहीं देते। इसकी वजह से लोगों को काफी समय तक जेल में रहना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत में, असहमति और बहस के लिए ज्यादा जगह होनी चाहिए। असहमति को अपराध नहीं बनाया जा सकता। अलग-अलग विचारों के प्रति ज्यादा सहनशीलता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ''विकसित भारत में, ऐसा नहीं हो सकता कि माता-पिता यह कहें कि उनके बच्चे दलितों द्वारा बनाया गया खाना नहीं खाएंगे। विकसित भारत में, ऐसा नहीं हो सकता कि दलित पुरुषों को गलियारों में बिठाया जाए और लोग उन पर पेशाब करें। हर व्यक्ति के सम्मान की रक्षा जरूर होनी चाहिए।'' लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस भुइयां ने कहा कि अब छोटी-छोटी बातों-जैसे प्रदर्शन, सोशल मीडिया मीम्स या पोस्ट पर ही एफआईआर हो जा जाती है। यह मामले बाद में सुप्रीम कोर्ट तक आते हैं और फिर इसमें एसआईटी बनाने की बात कही जाती है। इन सबसे कोर्ट का समय काफी बर्बाद हो जाता है। जस्टिस भुइयां सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन नेशनल कॉन्फ्रेंस 2026 में अपनी बात कह रहे थे। इसमें विकसित भारत में न्यायपालिका की भूमिका विषय रखा गया था। उन्होंने कोर्ट में बड़ी संख्या में मामलों के पेंडिंग रहने के पीछे बेतुकी अपील और बेबुनियाद एफआईआर को भी वजह बताया। जस्टिस भुइयां ने कहा, ''यह देखा है कि हाल के समय में आपराधिक केसों और एफआईआर बहुत लापरवाही से की जा रही हैं। छोटी-मोटी बातों जैसे सार्वजनिक जगह पर हुए प्रदर्शन, आंदोलन चाहे वह छात्र ही क्यों न कर रहे हों और यहां तक कि कभी कभी तो मीम्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स डालने के लिए भी एफआईआर दर्ज कर ली जाती हैं। फिर पुलिस जांच चलती रहती है। बाद में जब ये केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं तो जांच के लिए एसआईटी का गठन करना पड़ता है, जहां पर न्यायपालिका का काफी समय बर्बाद हो जाता है।'' UAPA को बताया कठोर कानून जस्टिस भुइयां ने अपने भाषण में यूएपीए पर भी बात की और उसे एक कठोर कानून बताया। उन्होंने लोकसभा में दिए गए गृह मंत्रालय के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि 2019 में इसके तहत 1984 अरेस्ट किए गए, लेकिन सिर्फ 34 को ही दोषी ठहराया जा सका। दोषसिद्धि दर 1.74 फीसदी थी। इसके बाद, 2020 में 1321 लोगों को अरेस्ट किया गया, जिसमें सिर्फ 80 को ही दोषी ठहराया जा सका। दोषसिद्धि की दर यहां भी तीन फीसदी ही रही। इसी तरह उन्होंने कई आगे के साल के भी आंकड़े रखे, जिसमें दोषसिद्धि दर काफी कम थी। जस्टिस भुइयां ने कहा कि इन आंकड़ों से मालूम चलता है कि दर लगातार चार फीसदी से भी कम रही है। इससे क्या पता चलता है। इससे कोर्ट पर काफी बोझ पड़ता है। पता चलता है कि गिरफ्तारियां बिना ठोस सबूत के जल्दबाजी में की गई थीं। इससे लंबित मामले और बढ़ते हैं।

ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच कांग्रेस सांसद बोले—‘प्यार और जंग में सब जायज’, केंद्र से की ये मांग

नई दिल्ली   ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर पूरी दुनिया में असमंजस की स्थिति है। झारखंड से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा हालात ऐसे लगते हैं मानो “प्यार और जंग में सब जायज” वाली स्थिति हो, लेकिन हकीकत यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध के भी नियम और मानक होते हैं, जिनका पालन जरूरी है। उन्होंने एएनआई से बातचीत में मोदी सरकार से एक अपील भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा संघर्ष में अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी की जा रही है और ऐसे ठिकानों पर हमले हो रहे हैं, जिनका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। खास तौर पर ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमलों से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हस्तक्षेप की मांग कांग्रेस सांसद ने कहा कि यूएनओ समेत सभी बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकसित देशों को इस स्थिति में आगे आकर पहल करनी चाहिए, ताकि तनाव को कम किया जा सके और हालात नियंत्रण में आएं। सुखदेव ने स्पष्ट कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता। उन्होंने भारत की भूमिका को “शांति के दूत” के रूप में बताते हुए कहा कि ऐसे समय में भारत को शांति स्थापित करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। सरकार से अपील उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी संकट गहरा है और सरकार भी यह स्वीकार कर चुकी है। यह मांग की कि मौजूदा संसद सत्र के दौरान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति सामने रखनी चाहिए। संसद में इस पर चर्चा होनी चाहिए ताकि देश में किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे। खाड़ी देशों पर जो भी दुष्प्रभाव पड़ेगा, उसका सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ेगा। भारत को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि वह आज कहां खड़ा है। क्या वह ईरान के साथ है या इजरायल के साथ? आमजन इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा संकट से महंगाई बढ़ेगी। राहुल गांधी कई बार इस मुद्दे को उठा चुके हैं। सरकार कहती है कि पैनिक स्थिति नहीं है। अगर नहीं है तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए क्या आपने इस संकट के समाधान का कोई रास्ता निकाला है? गैस के लिए लोग अभी भी लगातार लाइन में खड़े हैं। अगर नॉर्मल स्थिति आ गई है तो बुकिंग के बाद भी लोगों को लाइन पर क्यों खड़ा होना पड़ रहा है। लेकिन बीच में जो हालात हुए थे, वैसी स्थिति न हो। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि हमारी तैयारी कितनी पूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को आर्थिक और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।