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ट्रंप की धमकी के बीच चीन-ईरान गठजोड़ मजबूत, बढ़ी वैश्विक चिंता

वाशिंगटन अमेरिका से लगातार बढ़ते तनाव और युद्ध की धमकी के बीच चीन ने ईरान की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। दोनों देशों के बीच एक अहम डील लगभग पूरी होने वाली है। इसके तहत ईरान को चीन में बनी सीएम-302 मिसाइल मिलने वाली है। यह एक सुपरसोनिक मिसाइल है जो दुश्मन की वॉरशिप को तबाह करने की क्षमता रखती है। इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है। यह काफी तेजी से और नीचे रहते हुए उड़ान भरती है और सटीक निशाना लगाती है। ऐसे समय में जब अमेरिका, ईरान के तटीय इलाकों में अपनी वॉरशिप्स को तैनात कर रहा है, यह डील ईरान के लिए काफी अहम होगी। इन मिसाइलों की तैनाती ईरान की हमला करने की क्षमता में निर्णायक बढ़ोत्तरी करेगी। गेमचेंजर बनेंगी चीनी मिसाइलें ईरान ने चीन से यह मिसाइलें खरीदने के लिए दो साल पहले बातचीत शुरू की थी। लेकिन जानकारों के मुताबिक जब पिछले साल जून महीने में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिन तक युद्ध चला तो दोनों देशों के बीच बातचीत ने रफ्तार पकड़ी। पिछली गर्मियों में बातचीत फाइनल स्टेज में पहुंची थी। तब ईरानी सेना और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी चीन की यात्रा पर गए थे। इन लोगों में ईरान के डिप्टी डिफेंस मिनिस्टरी मसूद ओरेई भी शामिल थी। इजरायल के पूर्व इंटेलीजेंस ऑफिसर डैनी सिट्रीनोविच ने कहाकि अगर ईरान जहाजों पर हमला करने की सुपरसोनिक क्षमता हासिल कर लेता है तो यह पूरी तरह से गेमचेंजर होगा। उन्होंने कहाकि इन मिसाइलों को इंटरसेप्ट करना बहुत मुश्किल है। डिलीवरी की तारीख कब? हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस डील के तहत ईरान को कितनी मिसाइलें मिलेंगी और डिलीवरी डेट क्या होगी। इसके अलावा यह भी जानकारी नहीं है कि ईरान इन सुपरसोनिक मिसाइलों के लिए कितनी कीमत चुका रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहाकि ईरान अपने सहयोगी देशों के साथ सैन्य और सुरक्षा समझौता है। फिलहाल यह सबसे उपयुक्त समय है कि इन समझौतों का पूरी तरह से इस्तेमाल किया जाए। अमेरिका ने क्या कहा इन समझौतों पर चीन या अमेरिका की तरफ से फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं आई है। अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा हालात को लेकर डोनाल्ड ट्रंप काफी सख्त हैं। वाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहाकि ट्रंप का कहना है कि या तो ईरान समझौता करेगा नहीं तो पिछली बार की तरह उसके खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा। बता दें कि चीन द्वारा ईरान को दी जा रही यह मिसाइलें सबसे उन्नत हथियारों में से एक हैं। हालांकि यह संयुक्त राष्ट्र के उस हथियार प्रतिबंध का उल्लंघन है, जिसे 2006 में पहली बार लगाया गया था। हालांकि 2015 में प्रतिबंधों को 2015 में अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ एक परमाणु समझौते के हिस्से के रूप में निलंबित कर दिया गया था। लेकिन फिर सितंबर में इसे लागू कर दिया गया था। क्या हैं मौजूदा हालात बता दें कि चीन और ईरान की यह डील ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिका ईरान की पहुंच के भीतर एक नौसेना बेड़े को इकट्ठा कर रहा है। इसमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसका स्ट्राइक ग्रुप शामिल है। यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और उसके एस्कॉर्ट भी इस क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। ये दोनों जहाज मिलकर 5,000 से अधिक कर्मियों और 150 विमानों को ले जा सकते हैं। अमेरिका अब इस तैयारी में जुटा है कि अगर ट्रंप हमले का आदेश देते हैं कि वह ईरान के खिलाफ हफ्तों तक अभियान जारी रख सके। इजरायली विशेषज्ञ सिट्रीनोविच ने कहाकि चीन ईरान में एक पश्चिम समर्थक शासन को नहीं देखना चाहता। यह उनके हितों के लिए खतरा होगा। वे उम्मीद कर रहे हैं कि खामेनेई सत्ता में बने रहेंगे। ट्रंप ने 19 फरवरी को कहाकि वह ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए 10 दिन दे रहे हैं। ऐसा न होने पर सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।  

मिडिल ईस्ट की नई रणनीति: नेतन्याहू का ‘हेक्सागन एलायंस’ क्या बदल देगा समीकरण?

नई दिल्ली   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से दो दिनों के आधिकारिक दौरे पर इजरायल जा रहे हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले सप्ताह इस खबर पर मुहर लगाई थी, जिसके बाद भारत ने भी इसकी पुष्टि की है। यहां पीएम मोदी नेतन्याहू और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से मुलाकात करेंगे। वहीं इस दौरान उनका 'नेसेट' (इजरायली संसद) को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है। दौरे से पहले नेतन्याहू ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत रिश्तों पर जोर देते हुए कहा है कि पीएम की यह यात्रा कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ एक नया गठबंधन बनाने में मदद करेगी। नेतन्याहू ने एक नए वैश्विक संगठन ‘हेक्सागन एलायंस’ का जिक्र किया है। क्या बोले बेंजामिन नेतन्याहू? नेतन्याहू ने रविवार को कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत में इजरायल की संसद का जिक्र करते हुए कहा, "बुधवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां पहुंचेंगे। वह नेसेट में भाषण देंगे।" नेतन्याहू ने दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी की तारीफ की। उन्होंने कहा, "रिश्तों का ताना-बाना और मजबूत हुआ है, और मोदी यहां इसलिए आ रहे हैं ताकि हम इसे और भी मजबूत कर सकें।" नेतन्याहू ने आगे कहा कि इजरायल-भारत धुरी एक बड़े क्षेत्रीय गठबंधन का हिस्सा होगी, जिसे उन्होंने ‘हेक्सागन’ नाम दिया है। क्या है हेक्सागन एलायंस? ‘हेक्सागन ऑफ एलायंस’ छह देशों की एक रणनीतिक समूह होगी, जिसकी पहल नेतन्याहू ने की है। इसका मकसद पश्चिम एशिया और भूमध्यसागर क्षेत्र में आर्थिक, कूटनीतिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाना है। इसे ईरान के प्रभाव और क्षेत्रीय खतरों का जवाब माना जा रहा है। इस प्रस्तावित समूह में इजरायल, भारत, ग्रीस और साइप्रस का नाम लिया गया है। वहीं कुछ अरब और अफ्रीकी देशों का जिक्र किया गया है, लेकिन उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। नेतन्याहू ने कहा कि वे मध्य पूर्व के आसपास या भीतर एक पूरा हेक्सागन गठबंधन बनाना चाहते हैं, जिसमें भारत, अरब देश, अफ्रीकी देश, भूमध्यसागर के देश जैसे ग्रीस और साइप्रस तथा एशिया के कुछ अन्य देश शामिल होंगे, जिनका विवरण वे बाद में देंगे। क्या मकसद? नेतन्याहू के मुताबिक इस गठबंधन का मकसद कट्टर धुरियों के खिलाफ समान सोच रखने वाले देशों को एक साथ लाना है। उन्होंने कट्टर ‘शिया धुरी’ के जिक्र के साथ ही उभरती ‘कट्टर सुन्नी धुरी’ का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक नेतन्याहू का यह दांव ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ को सीधी चुनौती है। हालांकि अब तक किसी भी देश ने इस प्रस्ताव को आधिकारिक समर्थन नहीं दिया है। इतना ही नहीं ग्रीस और साइप्रस उसी इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के सदस्य हैं, जिस आईसीसी ने गाजा में युद्ध अपराधों के आरोप में नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अगर वे इन देशों में जाते हैं तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नेतन्याहू का सपना अभी दूर है।

कर्मचारियों की सुरक्षा पर सख्त पुष्कर सिंह धामी, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

हरिद्वार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी कार्यालयों और कार्यस्थलों पर अधिकारी- कर्मचारी और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए मुख्य सचिव को SOP बनाने के निर्देश दिए हैं।  उत्तराखण्ड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी से भेंट की। पदाधिकारियों ने 21 फरवरी को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुई घटना के साथ ही हाल के समय में अन्य स्थानों पर सरकारी अधिकारी- कर्मचारियों के साथ हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए, ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार कार्मिकों के मान – सम्मान और सुरक्षा को लेकर हमेशा गंभीर रही है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को फोन कर अधिकारी,  कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए SOP तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने DGP को भी निर्देश दिए हैं कि सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, साथ ही इस तरह की घटनाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए, उन्होंने SSP देहरादून को भी शिक्षा निदेशालय में हुई घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। इस मौके पर राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री प्रताप सिंह पंवार, उत्तराखण्ड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष  राम सिंह चौहान, महामंत्री  मुकेश बहुगुणा एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।  

सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, CJI की अगुवाई वाली पीठ भाजपा नेता पर भड़की

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो टूक कहा है कि वह आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल या धोखाधड़ी से जारी होने के दावों की जांच नहीं कर सकता, और ऐसे मामलों को केंद्र सरकार को देखना चाहिए। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह बात कही। पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या शरणार्थियों को कथित रूप से फर्जी आधार कार्ड जारी किए जाने के आरोपों पर सुनवाई करते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों की जांच अदालत के दायरे में नहीं आती और इस विषय पर केंद्र सरकार से संपर्क किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा हो सकता है, लेकिन इसके लिए विस्तृत जांच और नीतिगत निर्णय की आवश्यकता है, जो न्यायालय के बजाय सरकार के स्तर पर ही संभव है। भाजपा नेता ने क्या मुद्दा उठाया था? भाजपा नेता और एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने SIR प्रक्रिया में आधार कार्ड की स्वीकृति और इस्तेमाल के बारे में कोर्ट द्वारा जारी एक क्लैरिफिकेशन के संबंध में यह मुद्दा उठाया गया था। इस मामले में कोर्ट से और स्पष्टीकरण की मांग करते हुए उपाध्याय ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में, खासकर रोहिंग्याओं को, आधार कार्ड धोखाधड़ी से जारी किए जा रहे हैं। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि उपाध्याय रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट सहित कानून में बदलाव के लिए भारत संघ को रिप्रेजेंटेशन दे सकते हैं। आधार को हमें मानना होगा: SC बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक,जस्टिस बागची ने आगे कहा, “अगर आधार को इंडस्ट्रियल लेवल पर धोखे से खरीदा जाता है, तो इसे कानूनी तौर पर रेगुलेट किया जाना चाहिए। आधार को पहचान के सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए एक डॉक्यूमेंट के तौर पर लाया गया था और हमें यह मानना ​​होगा। आधार पर नागरिकता का पता लगाने का कोई सवाल ही नहीं है।” CJI सूर्यकांत ने क्या कहा? CJI सूर्यकांत ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा, "इसकी गहरी जांच की जरूरत है और कोर्ट इसके लिए कोई फोरम नहीं है।" मुख्य न्यायाधीश ने भी कहा कि इस तरह के आरोपों की गहराई से जांच की जरूरत है और अदालत इस तरह के मामलों के लिए उपयुक्त मंच नहीं है। अदालत का यह रुख साफ संकेत देता है कि आधार कार्ड के दुरुपयोग जैसे संवेदनशील मामलों में नीति निर्माण और कार्रवाई का दायित्व कार्यपालिका पर ही है। मामला क्या है? सितंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) और उसकी अथॉरिटीज को बिहार राज्य की रिवाइज़्ड वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने या हटाने के मकसद से पहचान के सबूत के तौर पर आधार कार्ड को स्वीकार करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट, 1950 के सेक्शन 23(4) के मुताबिक, आधार कार्ड किसी व्यक्ति की पहचान साबित करने के मकसद से बताए गए डॉक्यूमेंट्स में से एक है। कोर्ट ने तब आदेश दिया था, "इस मकसद के लिए, अथॉरिटीज़ आधार कार्ड को 12वां डॉक्यूमेंट मानेंगी। हालांकि, यह साफ़ किया जाता है कि अथॉरिटीज़ को दूसरे बताए गए डॉक्यूमेंट्स की तरह, आधार कार्ड के असली होने और असली होने को वेरिफ़ाई करने का अधिकार होगा, और इसके लिए वे और सबूत/डॉक्यूमेंट्स मांगेंगे।"  

‘फिर होगा 26/11 जैसा हमला’—पहलगाम के मास्टरमाइंड का जहरीला बयान, बढ़ी चिंता

नई दिल्ली बीते साल मई महीने में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर जिस तरह आतंकियों को करारा सबक सिखाया था, उससे आतंकी सरगना अब तक बौखलाए हुए हैं। है। हाल ही में इसके सबूत देखने को मिले हैं। पहलगाम हमले के कथित मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के नंबर दो के कमांडर सैफुल्लाह कसूरी ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। इस दौरान उसने भारत में 26/11 जैसे हमले की धमकी भी दी है। बता दें कि पिछले साल 22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम में स्थित खूबसूरत बैसरन की घाटी में 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। आतंकियों ने इस दौरान लोगों को धर्म पूछकर उनपर गोलियां बरसाईं थीं। इस हमले का मास्टरमाइंड कसूरी को ही माना जाता है। कसूरी अक्सर अपनी भारत विरोधी बयानबाजियों के लिए जाना जाता है। रिपोर्ट में बताया है कि हाल ही में सैफुल्लाह कसूरी ने 2008 के मुंबई हमले की याद दिलाते हुए एक चेतावनी दी है। इसमें उसने समुद्री रास्ते से भारत में फिर से 26/11 जैसा हमला करने की धमकी दी है। वीडियो में, कसूरी कहता है कि पाकिस्तान ने 2025 में हवा पर कब्जा कर लिया था और अब 2026 में वे समुद्र पर कब्जा कर लेंगे। कथित तौर पर कसूरी ने कहा कि जमीन, हवा या समुद्र, दुश्मन के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। वीडियो में कसूरी मुरीदके और बहावलपुर पर भारत के किए हमलों से बहुत बौखलाया लग रहा है। कसूरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए भारत पर वॉटर टेररिज्म का आरोप लगाया, और धमकी दी कि कश्मीर पर दबाव का जवाब बलूचिस्तान समेत दूसरी जगहों पर अशांति से दिया जाएगा।  

होली पर सूखा जाम: जानें मार्च में कितने दिन नहीं मिलेगी शराब

नई दिल्ली मार्च त्योहारों का महीना है, यह महिना होली से राम नवमी और ईद-उल-फितर के साथ पूरा होगा। लेकिन, शराब प्रेमीयों के लिए यह महीना थोड़ा सख्त होने वाला है। अगर आप त्योहारों पर शराब के साथ जश्न मनाने का प्लान बना रहे हैं, तो तैयार रहिए इस बार ऐसे मौके काफी सीमित हैं। ड्राई डे क्या है? 'ड्राई डे' का मतलब सिर्फ शराब की बिक्री पर रोक है। रेस्टोरेंट, लग्जरी बार, होटल या कोई भी लाइसेंस्ड दुकान ग्राहकों को शराब नहीं परोस सकती। हालांकि, घर पर पहले से रखी शराब पीना पूरी तरह वैध रहता है। देशभर में होली, दिवाली, गांधी जयंती, अंबेडकर जयंती जैसे बड़े त्योहारों और चुनावी दिनों को ड्राई डे घोषित किया जाता है। इस साल मार्च में कुल पांच दिन शराब नहीं बिकेगी। इनमें प्रमुख त्योहार शामिल हैं: 4 मार्च (बुधवार): होली 21 मार्च (शुक्रवार): ईद-उल-फितर 23 मार्च (सोमवार): शहीद दिवस (केवल महाराष्ट्र में) 26 मार्च (शुक्रवार): राम नवमी 31 मार्च (मंगलवार): महावीर जयंती 2026 के बाकी 'ड्राई डे' मार्च के बाद सालभर में और कई मौके हैं जहां शराब प्रेमियों को इंतजार करना पड़ेगा। 2026 में ड्राई डे की सूची अप्रैल: गुड फ्राइडे (3 अप्रैल) अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) मई: बुद्ध पूर्णिमा व महाराष्ट्र दिवस (1 मई) बकरीद (27 मई) जुलाई: आषाढ़ी एकादशी (25 जुलाई) गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) अगस्त: स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) ईद-ए-मिलाद सितंबर: जन्माष्टमी गणेश चतुर्थी अनंत चतुर्दशी अक्टूबर: गांधी जयंती दशहरा नवंबर: दिवाली (दिल्ली-एनसीआर में) दिसंबर: क्रिसमस (25 दिसंबर) महाराष्ट्र सरकार की सफाई हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि महाराष्ट्र सरकार ने होली, मुहर्रम और गांधी जयंती पर शराब दुकानें खोलने की अनुमति दे दी है। लेकिन राज्य सरकार ने तुरंत सफाई जारी कर इन खबरों को खारिज कर दिया। महाराष्ट्र एक्साइज डिपार्टमेंट ने साफ कहा कि किसी भी त्योहार पर शराब बिक्री की रोक में कोई ढील नहीं दी गई है।  

तानाशाह के बाद कौन? किम जोंग उन की बहन के बढ़ते कद से नए पावर गेम के संकेत

उत्तर कोरिया उत्तर कोरिया में किम परिवार की सत्ता और मजबूत हो रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तानाशाह किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग को सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया में बड़ी पदोन्नति मिली है। यूं कहें तो उनका कद और पावर बढ़ गया है। अब उन्हें उप-विभाग निदेशक से पूर्ण विभाग निदेशक (Department Director) बनाया गया है, जो मिनिस्टीरियल स्तर का पद माना जाता है। यह फैसला हाल ही में हुई पार्टी की नौवीं कांग्रेस के दौरान लिया गया, जहां किम जोंग उन को एक बार फिर पार्टी महासचिव चुना गया। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने मंगलवार को रिपोर्ट किया कि किम यो जोंग, जो पहले सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की केंद्रीय समिति में डिप्टी डिपार्टमेंट डायरेक्टर थीं, अब एक विभाग की डिपार्टमेंट डायरेक्टर नियुक्त कर दी गई हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें किस विभाग का नेतृत्व सौंपा गया है। उत्तर कोरिया में पांच वर्षों बाद हो रही इस पार्टी कांग्रेस के दौरान यह पदोन्नति हुई है। प्योंगयांग में चल रहे इस बहुचर्चित सम्मेलन में लगभग 5000 प्रतिनिधि शामिल हैं। यह सम्मेलन गुरुवार को शुरू हुआ था और इसमें किम जोंग उन को पार्टी के महासचिव के रूप में दोबारा चुना गया। माना जा रहा है कि यह किम राजवंश के शासन के निरंतर बने रहने का एक और संकेत है। वहीं, दक्षिण कोरिया की जासूसी एजेंसी के इस महीने के आकलन के अनुसार, उत्तर कोरिया पर 1940 के दशक से किम परिवार का ही शासन है। साथ ही, नेता किम की नाबालिग बेटी किम जू ऐ को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। किम यो जोंग शासन की प्रमुख आवाज बन चुकी हैं और दक्षिण कोरिया के खिलाफ धमकियों व उकसावे वाली बयानबाजी की एक श्रृंखला का नेतृत्व कर रही हैं। हालांकि, हाल ही में सीमा पार ड्रोन हमलों पर सियोल द्वारा खेद व्यक्त करने के संदर्भ में उनकी टिप्पणी में दुर्लभ सकारात्मकता दिखी थी। वह किम परिवार के उन चुनिंदा सदस्यों में से हैं जिन्होंने प्रमुख स्थान बनाए रखा है। राज्य मीडिया में उनका जिक्र होता रहता है, जबकि उत्तर कोरिया जैसे देश में नेता के भाई-बहनों का प्रदर्शन अक्सर अच्छा नहीं रहा है। गौरतलब है कि किम जोंग उन पर 2017 में अपने सौतेले बड़े भाई किम जोंग नाम की हत्या का आदेश देने का आरोप लगा था, जो उनका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता था। पूर्व नेता किम जोंग इल के एक भाई की बचपन में डूबने से मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य सौतेले भाई को दशकों तक निर्वासित रखा गया।  

अंडमान में बड़ा हादसा टला: पवन हंस का हेलिकॉप्टर समंदर में क्रैश, सभी 7 यात्रियों को बचाया गया

नई दिल्ली अंडमान में पवन हंस हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया। जानकारी के मुताबिक उड़ान भरत ही यह समंदर में गिर गया। हेलिकॉप्टर में कम से कम सात लोग सवार थे जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया है। जानकारी के मुताबिक हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी की वजह से समंदर में इसकी क्रैश लैंडिंग करवानी पड़ी। घटना अंडमान सागर में हुई जहां पायलट ने सूझबूझ दिखाई और समंदर में इसकी क्रैश लैंडिंग करवा दी। हेलिकॉप्टर में दो क्रू मेंबर्स समेत कुल सात लोग थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद तुरंत बचाव दल मौके पर पहुंचा और क्रू मेंबर्स व पैसेंजर्स को बाहर निकाला गया। जानकारी के मतुाबिक यह हेलिकॉप्टर पोर्ट ब्लेयर से मायाबंदर जा रहा था। उड़ान के बाद ही पायलट को तकनीकी खामी के बारे में पता चला। ऐसे में उसके पास समंदर में क्रैश लैंडिंग कराने का अच्छा विकल्प भी था। पवन हंस के प्रवक्ता ने बताया कि घटना सुबह 9.30 बजे करीब की है। यह हेलिकॉप्टर शॉर्ट लैंडिंग का शिकार हुआ है। घटना में यात्रियों और क्रू मेंबर्स को छोटी-मोटी चोटें आई हैं। कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है। बता दें कि पवन हंस देश की सबसे बड़ी सरकारी हेलिकॉप्टर कंपनी है। दुर्गम इलाकों में जाने के लिए इसके बनाए हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल किया जाता है। बड़े नेता भी पवन हंस की सेवा का इस्तेमाल करते हैं। 1985 में इस कंपनी की स्थापना की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश के दुर्गम स्थानों को जोड़ना है। चतरा में एक दिन पहले ही विमान हादसा झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना के खसियातु करम टांड जंगल में रांची से दिल्ली जा रहा एक एयर एंबुलेंस सोमवार को क्रैश हो गया था। इस विमान में कुल 7 लोग मारे गए। इनमें दो पायलट,एक डॉक्टर, एक नर्स और एक मरीज के साथ उनके दो सहयोगी शामिल थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बीचक्राफ्ट (बीई9एल) विमान वीटीएजेवी ने रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन उड़ान के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। बारामती विमान हादसे में चली गई थी अजित पवार की जान बीते महीने 28 तारीख को बारामती में एक विमान हादसा हुआ था जिसमें महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और पायलट्स की जान चली गई थी। इस हादसे को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। एनसीपी नेताओं का कहना है कि घटना की जांच गहराई से होनी चाहिए क्योंकि इस घटना के बीछे साजिश की बू आ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी घटना की सीबीआई जांच की मांग की है।  

हाईकोर्ट की तल्ख नसीहत: आस्था पर आपत्ति है तो धर्म छोड़ने की बात क्यों नहीं?

मद्रास यदि कोई व्यक्ति 'जाति और पंथ' का उल्लेख किसी प्रमाण पत्र में नहीं चाहता है तो फिर उसे अपना धर्म त्यागना होगा। इसके बाद ही उसे 'नो कास्ट, नो रिलीजन' वाला प्रमाण पत्र मिल पाएगा। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने एक केस की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। जस्टिस कृष्णन रामस्वामी ने कहा कि हिंदू परंपरा के अनुसार जब तक कोई धर्म त्याग नहीं करता है, तब तक जाति और पंथ के उल्लेख के बिना प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता। ऐसी मांग को भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। यही नहीं जस्टिस रामस्वामी ने यह भी कहा कि जब कोई इस प्रकार धर्म का त्याग कर देगा तो फिर ऐसे किसी प्रमाण पत्र की जरूरत ही नहीं रहेगी। इस मामले में एक शख्स ने अर्जी दाखिल की थी। उसका कहना था कि तमिलनाडु के तिरुपत्तूर तालुक के तहसीलदार ने ऐसा प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार कर दिया है, जिसमें धर्म और जाति का उल्लेखन न हो। तहसीलदार के आदेश को उसने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याची का कहना था कि भले ही मेरे माता-पिता हिंदू धर्म से ताल्लुक रखते थे। लेकिन मुझे ऐसा प्रमाण पत्र चाहिए, जिसमें जाति और धर्म का उल्लेख न हो। उसकी इस मांग को तहसीलदार ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऐसे प्रमाण पत्र बनाने के संबंध में कोई सरकारी आदेश नहीं है। याचिका की सुनवाई करते हुए बेंच ने शख्स से पूछा था कि क्या आपने अपना वह धर्म त्याग दिया, जिसमें आपका जन्म हुआ था। इस पर याची ने कहा कि उसने अपना धर्मत्याग नहीं किया है। जस्टिस रामस्वामी ने कहा कि याची जब तक हिंदू धर्म के अनुसार अपना पंथ नहीं त्यागता है, तब तक उसकी अर्जी पर विचार नहीं किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि शख्स ने अपना धर्म त्यागने के संबंध में कोई प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किया है। ऐसी स्थिति में अदालत की ओर से तहसीलदार के आदेश को बरकरार रखा जाता है। बेंच ने अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत बोली- धर्म छोड़ने का सबूत लाओ, फिर मिलेगा प्रमाण पत्र इसके साथ ही अदालत ने शख्स को यह राहत भी दी कि वह अपना धर्म छोड़ सकता है और उसका सबूत अथॉरिटी को सौंप सकता है। यदि ऐसे सबूत देते हुए आवेदन किया गया तो फिर विचार किया जा सकता है कि इस संबंध में प्रमाण पत्र जारी किया जाए। यह अपने आप में दिलचस्प मामला था, जिसके तहत शख्स सर्टिफिकेट में जाति और धर्म का उल्लेख नहीं चाहता था।  

ISRO रॉकेट फेल होने पर बड़ा एक्शन, डोभाल के निर्देश के बाद अब साजिश की पड़ताल

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के हालिया मिशनों में आई तकनीकी बाधाओं और विफलता की खबरों ने देश के सुरक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के हालिया इसरो दौरे के बाद अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। इसकी जांच के लिए एक कमेटी बनाई है। पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ को शामिल करते हुए इस विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी PSLV की लगातार विफलताओं के पीछे के 'प्रणालीगत मुद्दों' और संगठनात्मक समस्याओं की जांच करेगी। हालिया विफलताएं जिनका होगा विश्लेषण     PSLV-C62 (12 जनवरी, 2026): यह मिशन 16 सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा। रॉकेट का तीसरा चरण प्रज्वलित नहीं हो सका, जिसके कारण यह समुद्र में जा गिरा।     PSLV-C61 (18 मई, 2025): ठीक इसी तरह की समस्या इस मिशन में भी देखी गई थी। इसमें भी तीसरा चरण काम नहीं कर पाया था, जिसके परिणामस्वरूप सरकार की रणनीतिक जरूरतों के लिए बनाया गया EOS-09 सैटेलाइट नष्ट हो गया था। जांच का दायरा और समिति का उद्देश्य रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर तकनीकी समितियां यह पता लगाती हैं कि कौन सा पुर्जा खराब हुआ, लेकिन यह नई समिति मैन्युफैक्चरिंग, खरीद और रॉकेट के विभिन्न घटकों को असेंबल करने की प्रक्रियाओं की भी गहराई से जांच करेगी। भारत के अंतरिक्ष इकोसिस्टम में अब कई निजी कंपनियां भी शामिल हैं। इसलिए, समिति इस बात की भी समीक्षा करेगी कि क्या जवाबदेही तय करने के लिए कोई उचित प्रक्रिया मौजूद है और इसमें कैसे सुधार किया जा सकता है। समिति के सदस्य (जो इसरो के बाहर के विशेषज्ञ हैं) अप्रैल से पहले वर्तमान इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन को अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अंतरिक्ष आयोग के सदस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 3 फरवरी को विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र का दौरा किया था, जो संभवतः PSLV-C62 मिशन की विफलता से ही जुड़ा था। पुरानी जांच प्रक्रियाओं में बदलाव रिपोर्ट का सार्वजनिक न होना: ऐतिहासिक रूप से, इसरो रॉकेट विफलताओं के कारणों की जांच के लिए एक 'विफलता विश्लेषण समिति' (FAC) बनाता है और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करता है। हालांकि, PSLV-C61 और PSLV-C62 दोनों मामलों में यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। PMO को रिपोर्ट: 18 मई (PSLV-C61) की दुर्घटना की FAC रिपोर्ट PSLV-C62 के प्रक्षेपण से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन इसके विवरण गुप्त रखे गए हैं। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि इसरो के भीतर विश्लेषण करने की पूरी विशेषज्ञता है, लेकिन इस बार जनता और स्टेकहोल्डर्स का विश्वास बनाए रखने के लिए तीसरे पक्ष का मूल्यांकन किया जा रहा है। अगला लक्ष्य: इसरो समस्या को पूरी तरह से ठीक करने के बाद जून में अपने अगले प्रक्षेपण की महत्वाकांक्षी योजना बना रहा है। आगामी मिशन: इस वर्ष 18 प्रक्षेपण निर्धारित हैं, जिनमें से 6 में निजी क्षेत्र के सैटेलाइट शामिल हैं। विदेशी लॉन्च: अगले साल जापान, अमेरिका और फ्रांस के 3 बड़े विदेशी सैटेलाइट भी लॉन्च होने हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी देश या कंपनी ने अपने प्रक्षेपण अनुरोध को वापस नहीं लिया है, जो दर्शाता है कि दुनिया भर में इसरो की विश्वसनीयता और उस पर भरोसा अभी भी पूरी तरह से बरकरार है। गौरतलब है कि 1993 से PSLV की सफलता दर 90% से अधिक रही है और इसने लगभग 350 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक उनकी कक्षाओं में स्थापित किया है।