samacharsecretary.com

राज्यपाल ने नहीं पढ़ा केंद्र पर कटाक्ष, CM पिनाराई विजयन ने पूरा किया भाषण

तिरुवनंतपुरम केरल विधानसभा में मंगलवार को एक असाधारण घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के संबोधन समाप्त करने के तुरंत बाद आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण को पूरी तरह नहीं पढ़ा। इसके बाद सीएम ने खुद राज्यपाल द्वारा छोड़े गए भाषण के अंशों को पढ़कर सदन के पटल पर रख दिया। राज्यपाल द्वारा केंद्र सरकार की आलोचना से जुड़े कुछ हिस्से न पढ़े जाने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया और स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल द्वारा अप्रूव पूरा भाषण ही सरकार की नीति घोषणा है, जिसे बदला नहीं जा सकता।   मुख्यमंत्री के विरोध के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने भी स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो अंश राज्यपाल ने नहीं पढ़े, उन्हें पढ़ा हुआ ही माना जाए और मंत्रिमंडल से स्वीकृत पूरे भाषण को ही आधिकारिक रूप से सदन का हिस्सा माना जाए। उन्होंने कहा कि नीतिगत भाषण सरकार की घोषणा होता है और उसमें कोई भी काट-छांट या जोड़ संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने भी राज्य सरकार का समर्थन किया। उन्होंने कहा- संविधान के अनुसार राज्यपाल को वही भाषण पढ़ना चाहिए, जिसे मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी हो। यदि राज्यपाल जानबूझकर किसी हिस्से को छोड़ते हैं या उसमें कुछ जोड़ते हैं, तो यह गलत है। जानकारी के अनुसार, राज्यपाल ने मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण के अनुच्छेद 12, 15 और 16 नहीं पढ़े। इनमें केंद्र सरकार द्वारा केरल पर डाले जा रहे कथित वित्तीय दबाव और संघीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल थे। छोड़े गए हिस्सों में यह पंक्ति भी थी कि केरल लगातार गंभीर वित्तीय तनाव का सामना कर रहा है, जो केंद्र सरकार की उन कार्रवाइयों के कारण है, जो वित्तीय संघवाद के संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर करती हैं। इसके अलावा, राज्यपाल उस अंश को भी पढ़ने को तैयार नहीं थे, जिसमें केंद्र द्वारा शक्तियों के अत्यधिक केंद्रीकरण, राज्य सूची के विषयों में हस्तक्षेप और राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों के लंबे समय तक लंबित रहने पर चिंता जताई गई थी। उस हिस्से में यह भी उल्लेख था कि इन मुद्दों पर राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है और मामला संविधान पीठ को सौंपा गया है। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब राज्यपाल ने एक पंक्ति में 'मेरी सरकार मानती है' शब्द जोड़ दिए। यह मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत भाषण का हिस्सा नहीं थे। मुख्यमंत्री ने अध्यक्ष से इसे हटाने की मांग की और कहा कि मूल भाषण से अलग कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, अपने नीतिगत भाषण के अन्य हिस्सों में राज्यपाल ने केरल के विकास की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में राज्य ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और विकेंद्रीकरण के क्षेत्र में केरल देश के लिए एक मॉडल बनकर उभरा है। राज्य में शिशु मृत्यु दर में कमी, रोजगार गारंटी योजनाओं की सफलता और गरीबी उन्मूलन के प्रयासों का भी उन्होंने उल्लेख किया। राज्यपाल ने केंद्र सरकार के कुछ फैसलों की आलोचना करते हुए कहा कि केरल के वैध हिस्से में कटौती, जीएसटी हिस्सेदारी में कमी और ऋण सीमा घटाए जाने से राज्य के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केरल ने राजस्व बढ़ाने, खर्च नियंत्रित करने और वित्तीय स्थिति सुधारने की दिशा में कदम उठाए हैं। भाषण में राज्य की अर्थव्यवस्था को विकास पथ पर बताया गया और Vizhinjam Port परियोजना को आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन में सहायक बताया गया। राज्यपाल ने कहा कि इससे शिक्षित युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, उन्होंने कानून-व्यवस्था में सुधार, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जीवन स्तर को बेहतर बनाने के न्यू केरल लक्ष्य, वन्यजीवों के कारण फसल क्षति पर मुआवजा सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के लिए तैयार करने का भी उल्लेख किया।  

दावोस मंच से गूंजा विवादित सुर, अमेरिकी मंत्री बेसेंट ने ग्रीनलैंड पर जताया दावा

दावोस अमेरिका के वित्त मंत्री और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी स्कॉट बेसेंट ने दावोस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यहीं से ग्रीनलैंड का इतिहास याद दिलाते हुए अमेरिका के दावे को अहम बताया। उन्होंने यूरोपीय यूनियन को निशाने पर लिया और कहा कि डेनमार्क का ग्रीनलैंड पर दावा ठीक नहीं है। उन्होंने यूरोप के नियमों को दलदल समान बताया। ये प्रेस कॉन्फ्रेंस डब्ल्यूईएफ (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) सेंटर के ठीक बाहर यूएस हाउस में आयोजित की गई थी। बेसेंट ने कहा, "यूएस अपने सहयोगियों से यह समझने के लिए कह रहा है कि ग्रीनलैंड को यूनाइटेड स्टेट्स का हिस्सा बनना चाहिए।" इतिहास याद दिलाते हुए बोले, "अमेरिका ने पहले विश्व युद्ध में डेनमार्क से यूएस वर्जिन आइलैंड्स खरीदे थे। मैं सभी को याद दिलाऊंगा कि पहले वर्ल्ड वॉर के दौरान डेनमार्क न्यूट्रल (तटस्थ) रहा था। उन्होंने असल में जर्मनों को काफी जमीन बेची थी।" जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका को इस बात की चिंता है कि यूरोप में संस्थागत निवेशक (जैसे कि डेनमार्क का पेंशन फंड) अमेरिकी ट्रेजरी मार्केट से अपना पैसा निकाल सकते हैं, तो बेसेंट ने इस बात को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ट्रेजरी बॉन्ड में डेनमार्क के निवेश का आकार, डेनमार्क की तरह ही, कोई मायने नहीं रखता। यह 100 मिलियन डॉलर से भी कम है। एनर्जी के बारे में पूछे जाने पर, स्कॉट बेसेंट ने नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन बनाने और रूसी तेल खरीदने के लिए यूरोपीय देशों की आलोचना की। बेसेंट के अनुसार खरीदे गए तेल की रकम से मास्को को पैसे मिले जिससे उसने यूक्रेन के साथ युद्ध किया। ट्रेड डील के मुद्दे पर, बेसेंट ने कहा कि यूरोप को यूरोप के अंदर और बाहर की ट्रेड बाधाओं को खत्म करना होगा। यूरोप एक रेगुलेटरी दलदल है जो नौकरशाही और नियमों पर बना है जो आर्थिक गतिविधियों को रोकते हैं।

पुरुषों की मंशा पर हाईकोर्ट का ध्यान, लिव-इन पार्टनर को पत्नी का अधिकार देने की दिशा में विचार

तमिलनाडु लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक बेहद अहम टिप्पणी की है। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पत्नी का दर्जा दिया जाना चाहिए। इस दौरान हाईकोर्ट ने हिन्दू रीति रिवाजों के तहत गंधर्व विवाह का जिक्र भी किया। इस दौरान हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के मनाप्पराई ऑल वुमन पुलिस स्टेशन द्वारा गिरफ्तार किए गए एक शख्स की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। जानकारी के मुताबिक उस व्यक्ति पर शादी के झूठे वादे करके एक महिला के साथ यौन संबंध बनाने का आरोप था। सुनवाई के दौरान जस्टिस एस श्रीमति ने कहा कि आधुनिक सामाजिक ढांचे के तहत कमजोर महिलाओं की सुरक्षा करना अदालतों की जिम्मेदारी है, क्योंकि लिव-इन रिलेशनशिप में शादीशुदा महिलाओं को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा नहीं होती है। गंधर्व विवाह का जिक्र लाइवलॉ ने अपनी एक रिपोर्ट में मदुरै कोर्ट के हवाले से कहा, "लिव-इन रिलेशनशिप में, महिलाओं को गंधर्व विवाह या प्रेम विवाह की तरह 'पत्नी' का दर्जा देकर संरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को पत्नी के रूप में अधिकार मिल सकें भले ही रिश्ता मुश्किल दौर से गुजर रहा हो।" क्या था मामला? तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के मनाप्पराई ऑल वुमन पुलिस ने हाल ही में महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे इस शख्स को गिरफ्तार किया था। व्यक्ति पर आरोप हैं कि उसने शादी का वादा करके कई बार महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन बाद में अपना वादा तोड़ दिया। इसके बाद महिला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आधुनिकता का दावा करते हैं पुरुष हालांकि याचिका खारिज करते समय जस्टिस एस श्रीमति ने कहा कि आधुनिकता अपनाने के नाम पर, पुरुष अक्सर इस कानूनी अस्पष्टता का फायदा उठाते हैं लेकिन जब समय के साथ उनका रिश्ता खराब हो जाता है तो वे महिला के चरित्र पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि पुरुष रिश्ते में रहते हुए खुद को आधुनिक मान सकते हैं, लेकिन जब चीजें बिगड़ने लगती हैं तो वे महिलाओं को शर्मिंदा करने या दोष देने में देर नहीं लगाते। हालांकि भारत में लिव-इन रिलेशनशिप को अभी भी 'कल्चरल शॉक' माना जाता है, लेकिन यह भारतीय समाज में एक आम बात हो गई है।” जज ने आगे कहा कि कई युवा महिलाएं मॉडर्न लाइफस्टाइल अपनाने की चाहत में ऐसे रिलेशनशिप में आती हैं लेकिन बाद में निराश हो जाती हैं क्योंकि कानून लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को शादीशुदा महिलाओं की तरह सुरक्षा नहीं देता है। कोर्ट ने कहा कि जो पुरुष मॉडर्निटी के नाम पर इसका फायदा उठाते हैं और शादी के वादे से मुकर जाते हैं, वे कानूनी नतीजों से बच नहीं सकते।  

मालेगांव की सियासत में नया चेहरा: शेख आसिफ और ISLAM पार्टी ने बदल दी मुस्लिम राजनीति की तस्वीर

मुंबई पिछले हफ्ते महाराष्ट्र में हुए 29 स्थानीय निकाय चुनावों में सेअधिकांश शहरों में जहां भाजपा और उसके गठबंधन ने जीत दर्ज की है, वहीं मुस्लिम बहुल मालेगांव नगरपालिका में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। यहां के मुसलमानों ने मुस्लिम राजनीति के पैरोकार समझे जाने वाले असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी AIMIM को करारा झटका दिया है। 16 जनवरी, 2026 को घोषित चुनावी नतीजों में नवगठित पार्टी इस्लाम (ISLAM) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इस नतीजे ने सबको चौंका दिया है।   कुल 85 सदस्यीय सदन में ISLAM को सबसे ज्यादा 35 सीटें मिली हैं, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी 26 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही है। शिवसेना (शिंदे गुट) को 18 सीटों पर जीत मिली है, जबकि समाजवादी पार्टी ने 5 सीटों पर कब्जा जमाया है। सपा ने ISLAM के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। राष्ट्रीय पार्टियों कांग्रेस और भाजपा को क्रमश: तीन और दो सीटें मिली हैं। इस तरह किसी भी दल को बहुमत नहीं मिल सका है। हालांकि, ISLAM के पास 40 पार्षदों का संख्या बल है जो बहुमत के आंकड़े (43) से तीन कम है। वहां अपना मेयर बनाने के लिए इस्लाम पार्टी ने AIMIM से समर्थन मांगा है। कौन हैं शेख आशिफ? ISLAM ने कैसे हासिल किया मुकाम शेख आसिफ ISLAM यानी इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र के संस्थापक हैं। उनका पूरा नाम शेख आसिफ शेख रशीद है। वह 2014-2019 के बीच मालेगांव सेंट्रल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक (MLA) रहे हैं। वह दिवंगत कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक शेख रशीद के पुत्र हैं, जिन्होंने भी मालेगांव का दो बार प्रतिनिधित्व किया था। शेख आसिफ ने भी अपने पिता की तरह राजनीति में एंट्री कांग्रेस से ही ली। मालेगांव का विधायक बनने से पहले वह मालेगांव के मेयर के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। शरद पवार की NCP में भी रहे हालांकि, उन्होंने 2021-22 में कांग्रेस छोड़ दी और शरद पवार की NCP में शामिल हो गए। यहां भी वह ज्यादा दिन नहीं रहे। इसके बाद उन्होंने 2024 में महाराष्ट्र विधाम सभा चुनावों से पहले खुद की पार्टी 'इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र' (I.S.L.A.M.) बनाई। उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान मुस्लिम बहुल मालेगांव में एक नैरेटिव स्थापित करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। भाजपा के खिलाफ खड़ी की पार्टी उन्होंने दिए एक इंटरव्यू में खुद ही बताया कि जब से भाजपा की केंद्र में और राज्यों में सरकार बनी है, तब से देश में एक अलग किस्म का माहौल बना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्लाम धर्म को लगातार टारगेट किया जा रहा है और मुस्लिमों पर अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इसी का जवाब देने के लिए उन्होंने इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र यानी ISLAM पार्टी की स्थापना की। ओवैसी को करारा झटका 78 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले मालेगांव में असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी AIMIM अपना मेयर बनाने का सपना देख रही थी लेकिन ISLAM ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। दरअसल, देश के कई मुस्लिम बहुल इलाकों में भाजपा की काट के रूप में मुसलमान वोटर AIMIM का समर्थन करते रहे हैं। ओवैसी को उम्मीद थी कि मालेगांव में भी मुस्लमान उन्हें अपना वास्तविक संरक्षक मानेंगे लेकिन वहां के मुस्लिमों ने स्थानीय शेख आसिफ को ओवैसी से ज्यादा तवज्जो दी है। अब ओवैसी के सामने भी एक संकट है, अगर वो मेयर चुनाव में ISLAM के उम्मीदवार को समर्थन नहीं देंगे तो उन पर मुस्लिम विरोधी का टैग लग सकता है।  

सीमा पर तनाव बढ़ाने की कोशिश: LoC पर कैमरे इंस्टॉल करते समय पाक गोलीबारी, भारत का मुंहतोड़ पलटवार

जम्मू उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में 20-21 जनवरी की रात भारत और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच गोलीबारी हुई। रक्षा सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह झड़प तब हुई जब 6 राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिक केरन बाला इलाके में सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और लाइन ऑफ कंट्रोल के साथ ब्लाइंड स्पॉट को खत्म करने के लिए हाई-टेक सर्विलांस कैमरे लगा रहे थे। पाकिस्तानी सैनिकों की गोलीबारी का भारतीय जवानों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया।   पाकिस्तानी सैनिकों ने इंस्टॉलेशन को रोकने के लिए छोटे हथियारों से दो राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में भारतीय पक्ष से एक, सोच-समझकर जवाबी गोली चलाई गई। हालांकि दोनों तरफ से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन भारतीय सेना ने घने जंगल वाले इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया है, क्योंकि उन्हें शक है कि आग का इस्तेमाल घुसपैठ की कोशिश से ध्यान भटकाने के लिए किया गया हो सकता है। पूरे सेक्टर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, क्योंकि सेना सर्दियों के महीनों में पारंपरिक घुसपैठ के रास्तों पर नजर रखने के लिए टेक्निकल सर्विलांस को अपग्रेड कर रही है। इससे पहले, जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के ऊपरी इलाकों में आतंकवादियों का पता लगाने के लिए अभियान चलाया गया। इसके तीसरे दिन मंगलवार को सुरक्षा बलों ने कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। चतरू क्षेत्र के मन्द्राल-सिंहपुरा के पास सोनार गांव में रविवार को अभियान शुरू किया गया था और इस बीच हुई मुठभेड़ में एक ‘पैराट्रूपर’ शहीद हो गया तथा छिपे हुए आतंकवादियों द्वारा अचानक किए गए ग्रेनेड हमले से सात अन्य घायल हो गए। आतंकवादी घने जंगल में भाग गए, लेकिन खाने-पीने की चीजें, कंबल और बर्तनों सहित बड़ी मात्रा में सर्दियों के सामान से भरे उनके ठिकाने का भंडाफोड़ किया गया। जम्मू जोन के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन तुती और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जम्मू महानिरीक्षक आर. गोपाल कृष्ण राव सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मुठभेड़ स्थल पर पहुंच गए तथा वे अभियान की निगरानी के लिए वर्तमान में कई सेना अधिकारियों के साथ वहीं डेरा डाले हुए हैं।  

कानून की उड़ रही धज्जियां, सत्ता का दुरुपयोग; डोनाल्ड ट्रंप पर अपनों ने उठाए सवाल

वॉशिगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी देकर उस यूरोप को अपने खिलाफ एकजुट कर लिया है, जिसे अमेरिका का सहयोगी माना जाता है। यूरोपीय देशों के नेताओं ने खुलकर डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करना शुरू कर दिया है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी का अतिरिक्त इंपोर्ट टैक्स लगाने की धमकी दी है तो वहीं फ्रांस ने भी जवाबी ऐक्शन की धमकी दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का कहना है कि यदि अमेरिका ने ऐसा कोई कदम उठाया तो फिर हम भी ऐसी ही जवाबी कार्रवाई देंगे। इसके अलावा ट्रंप की आलोचना यूरोपीय नेता यह कहते हुए भी कर रहे हैं कि उन्होंने इंटरनेशनल कानूनों को प्रभावित किया है।   इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि आज दुनिया में दबंग राजनीति की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज ऐसी स्थिति हो गई है कि विवाद सामान्य हो चुके हैं। उन्होंने कहा, 'आज वैश्विक नीति इस स्थिति में चली गई है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों को पैरों तले रौंदा जा रहा है। ऐसा लगता है कि उसी की चल रही है, जो सबसे मजबूत है। बिना सामूहिक सहयोग के ऐसी स्थिति हो जाएगी, जिसमें अप्रत्याशित प्रतिस्पार्धा होगी।' उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि यूरोप को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि अंतहीन टैरिफ लादे जा रहे हैं, जिन्हें किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। मैक्रों ने ट्रंप से लेकर व्लादिमीर पुतिन तक की लगाई क्लास यही नहीं मैक्रों ने ट्रंप के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वह भी साम्राज्यवादी विस्तार चाहते हैं। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि 2024 में ही लगभग 60 जंग दुनिया भर में हुईं। इनमें से कुछ ही जंगें खत्म हो सकी हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप किसी के आगे झुकेगा नहीं। यदि कोई हमारे खिलाफ टैरिफ लगाता है तो फिर हम भी जवाबी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि खेल के नियमों का पालन दूसरी तरफ से नहीं हो रहा है तो फिर हम ही ऐसा क्यों करें। हम भी सख्त कदम उठाने से हिचकेंगे नहीं। ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए ट्रंप ने क्या दी है दलील डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क के अर्धस्वायत्त इलाके ग्रीनलैंड को अमेरिकी कब्जे में लेने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका इस इलाके पर कंट्रोल नहीं करता है तो फिर रूस और चीन ऐसा कर सकते हैं। उनका कहना है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। ग्रीनलैंड के पीएम जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने इसका जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल कानून कोई खेल नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप जैसा कर रहे हैं, वह दुनिया के सारे नियमों को तोड़ने वाला है। यदि ऐसा ही जारी रहा तो दुनिया में अलायंस टूट जाएंगे और यह बेहद खराब स्थिति होगी।  

सुखना झील पर सख्त टिप्पणी: ‘अब और कितना नुकसान?’ बीच सुनवाई में क्यों नाराज़ हुए CJI सूर्यकांत

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ आज (बुधवार, 21 जनवरी को) अरावली पहाड़ियों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दौरान पीठ ने अवैध निर्माण का मुद्दा उठाते हुए चंडीगढ़ की मशहूर सुखना झील के सूखने पर चिंता जताई। हरियाणा सरकार को पिछली गलतियों को न दोहराने की चेतावनी देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि अधिकारियों और बिल्डर माफिया की मिलीभगत के कारण सुखना झील "पूरी तरह से खराब" हो चुकी है। पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली भी शामिल हैं।   बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, "राज्य के अधिकारियों और राजनेताओं की मिलीभगत से बिल्डर माफिया काम कर रहा है… आप सुखना झील को कितना सुखाओगे? आपने झील को तो पूरी तरह से खराब कर दिया है।" दरअसल, बारिश के पानी पर निर्भर सुखना झील कभी चंडीगढ़ का प्रमुख पर्यटन केंद्र हुआ करती थी, लेकिन बीते वर्षों में लगातार गिरते जलस्तर ने इसकी सुंदरता और अस्तित्व दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अरावली पहाड़ियों से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान आई। नई परिभाषा को लेकर देशभर में विरोध के बाद, अदालत ने पिछले वर्ष अपने आदेश पर रोक लगाते हुए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था, ताकि इस मुद्दे की विस्तृत जांच की जा सके। इससे पहले केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिभाषा को अदालत ने स्वीकार कर लिया था, जिसमें कहा गया था कि 100 मीटर ऊंचाई वाली पहाड़ियों को ‘अरावली पहाड़ियां’ माना जाएगा और 500 मीटर के भीतर स्थित दो या अधिक ऐसी पहाड़ियां, उनके बीच की जमीन सहित पहाड़ियों को ‘अरावली रेंज’ माना जाएगा। बता दें कि अरावली पर्वतमाला हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और गुजरात तक फैली हुई है। ‘वन’ और ‘अरावली’ की परिभाषा अलग सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने अदालत की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर से कहा कि वे सभी पक्षों और हितधारकों के सुझावों को शामिल करते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत नोट दाखिल करें। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आगामी आदेश में ‘वन’ और ‘अरावली’ की परिभाषाओं को अलग-अलग रखा जाएगा। अदालत ने कहा, “वन की परिभाषा को अलग से और व्यापक दृष्टि से देखा जाएगा, जबकि अरावली का मुद्दा अपेक्षाकृत संकीर्ण रहेगा।” अवैध खनन पर सख्ती इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि राज्य में चल रहे अवैध खनन को तुरंत प्रभाव से रोका जाए। पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी एक बार फिर यह संकेत देती है कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और अवैध गतिविधियों पर अदालत किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।  

नुपुर शर्मा केस: बयान के बाद की गई हत्या अब आतंकवाद की श्रेणी में, बॉम्बे HC का बड़ा फैसला

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने अमरावती के फार्मासिस्ट उमेश कोल्हे की 2022 में हुई नृशंस हत्या के मामले में आरोपी पशु चिकित्सक युसूफ खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह केवल एक हत्या नहीं थी, बल्कि जनता के मन में दहशत पैदा करने के इरादे से बनाया गया एक आतंकी गिरोह का कृत्य था। जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस श्याम सी. चांडक की खंडपीठ ने यूएपीए के तहत खान की अपील को खारिज करते हुए कहा, "आरोपियों ने अपने धर्म के कथित अपमान का बदला लेने के लिए एक गिरोह बनाया। इनका उद्देश्य उमेश कोल्हे की बेरहमी से हत्या करना और आम जनता के मन में डर पैदा करना था, चाहे वे नुपुर शर्मा की टिप्पणियों का समर्थन करते हों या नहीं।"   अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह पूरा मामला मई 2022 में भाजपा की तत्कालीन प्रवक्ता नुपुर शर्मा द्वारा एक टीवी डिबेट के दौरान दी गई विवादित टिप्पणी से शुरू हुआ था। उमेश कोल्हे ने पशु चिकित्सकों के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में नुपुर शर्मा के समर्थन वाला एक संदेश साझा किया था। युसूफ खान उस ग्रुप का एकमात्र मुस्लिम सदस्य था। उसने उस मैसेज का स्क्रीनशॉट लिया। खान ने कथित तौर पर कोल्हे का मोबाइल नंबर थोड़ा बदलकर और एक उकसाने वाला कैप्शन लिखकर उसे व्यापक रूप से प्रसारित कर दिया। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर युसूफ खान की भूमिका को साजिश में महत्वपूर्ण माना। कोल्हे की दुकान के पते का जिक्र करना और संदेश को ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में भेजने का आह्वान यह दर्शाता है कि कोल्हे को जानबूझकर निशाना बनाया गया था। कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) के मुताबिक, हत्या से पहले और बाद में खान और अन्य आरोपियों के बीच 25 बार बातचीत हुई थी। अदालत ने गौर किया कि खान ने संदेश के जरिए गुस्सा भड़काने के बाद खुद को अन्य आरोपियों से दूर कर लिया था ताकि वह कानून की पकड़ से बच सके, लेकिन वह पृष्ठभूमि से लगातार सक्रिय था। अदालत ने कहा कि साजिशें गुप्त रूप से रची जाती हैं और उनके लिए प्रत्यक्ष साक्ष्य मिलना कठिन होता है, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्य खान की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं। बेंच ने निष्कर्ष निकाला कि इस कृत्य ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया है, इसलिए आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। आपको बता दें कि अमरावती के उमेश कोल्हे की जून 2022 में तब हत्या कर दी गई थी जब वे अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है।  

ट्रंप का ईरान को सख्त संदेश: ‘मेरी हत्या हुई तो अंजाम भुगतना पड़ेगा’

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अगर ईरान ने उनकी हत्या कराई तो अमेरिका ईरान का नामोनिशान मिटा देगा। इससे पहले ईरान ने ट्रंप को देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई करने पर चेतावनी दी थी। दरअसल ट्रंप ने खामेनेई के लगभग 40 वर्षों के शासन को समाप्त करने का आह्वान किया था जिसके कुछ दिनों बाद ईरान ने ट्रंप को यह चेतावनी दी।   ट्रंप ने ‘न्यूजनेशन’ के कार्यक्रम ‘केटी पॉवलिच टुनाइट’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, 'मेरे बहुत सख्त निर्देश हैं कि अगर कुछ होता है, तो वे उन्हें नक्शे से मिटा देंगे।’’ ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबुलफजल शेकारची ने कहा, 'ट्रंप जानते हैं कि अगर हमारे नेता की ओर हाथ भी बढ़ाया गया तो हम न केवल उस हाथ को काट देंगे बल्कि उनकी दुनिया में आग लगा देंगे।' ट्रंप ने पूर्व में कहा था कि उन्होंने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया है कि अगर ईरान उनकी हत्या कराता है तो ईरान को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। राष्ट्रपति ने भी दी थी चेतावनी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हाल ही में कहा था, 'अगर ईरान के लोगों को अपने जीवन में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, तो इसकी वजह अमेरिकी सरकार और उसके सहयोगियों की तरफ से लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और अमानवीय प्रतिबंध हैं। हमारे देश के सुप्रीम लीडर के खिलाफ कोई भी हमाल ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध के बराबर होगा।' अमेरिकी राष्ट्रपति ने शनिवार को ‘पॉलिटिको’ को दिए एक साक्षात्कार में खामेनेई को ‘एक बीमार व्यक्ति’ बताया था और कहा था कि ‘उन्हें अपने देश को ठीक से चलाना चाहिए और लोगों की हत्या करना बंद करना चाहिए’। ट्रंप ने कहा था कि ईरान में नए नेतृत्व की तलाश का समय आ गया है। ईरान की खराब अर्थव्यवस्था को लेकर 28 दिसंबर को शुरू हुए प्रदर्शनों पर अधिकारियों द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।

विदेशों में भारत का स्ट्रैटेजिक नेटवर्क! मिडिल ईस्ट से यूरोप तक दुश्मन की हर चाल होगी बेनकाब

नई दिल्ली भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणाली का बड़े पैमाने पर विस्तार करने जा रहा है। इस योजना के तहत 50 से अधिक नए जासूसी सैटेलाइट जल्द लॉन्च किए जाएंगे, जिनमें रात और बादलों के बीच भी साफ तस्वीरें लेने की क्षमता होगी। इस फैसले के पीछे पिछले साल पाकिस्तान के साथ संघर्ष के दौरान सामने आई निगरानी संबंधी कमियां प्रमुख वजह बताई जा रही हैं।   ब्लूमबर्ग ने मामले से परिचित लोगों के हवाले से लिखा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार विदेशों में ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने की भी योजना पर काम कर रही है। संभावित स्थानों में मध्य पूर्व, दक्षिण-पूर्व एशिया और स्कैंडिनेवियाई देश शामिल हैं। इन स्टेशनों से सैटेलाइट से मिलने वाली सूचनाओं को तेज और व्यापक तरीके से रिले किया जा सकेगा, हालांकि इसके लिए मेजबान देशों की मंजूरी जरूरी होगी। रात और खराब मौसम में भी निगरानी भारत अपने मौजूदा सैटेलाइटों में भी तकनीकी अपग्रेडेशन करने जा रहा है। इसके तहत इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम से आगे बढ़ते हुए सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) तकनीक अपनाई जाएगी, जो अंधेरे और बादलों जैसी परिस्थितियों में भी हाई-रिजॉल्यूशन इमेज कैप्चर करने में सक्षम है। इसके अलावा, सैटेलाइटों के बीच सीधे डेटा ट्रांसफर (इंटर-सैटेलाइट लिंक) की व्यवस्था विकसित की जा रही है, ताकि हर बार ग्राउंड स्टेशन पर निर्भर न रहना पड़े। स्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3 पर फोकस सूत्रों के मुताबिक, स्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3 (SBS-3) कार्यक्रम के तहत पहले चरण में 52 सैटेलाइट को तेजी से लॉन्च करने की तैयारी है। पहला बैच अप्रैल तक अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है। इस प्रणाली से भारत उन संवेदनशील क्षेत्रों पर कहीं ज्यादा बार नजर रख सकेगा, जहां मौजूदा तकनीक के चलते निगरानी अंतराल कई दिनों का होता है। यानी उस जगह की जानकारी जुटाने में कई दिन लग जाते हैं। इससे पहले मिंट ने अप्रैल में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन, यानी ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन के चेन्नई में एक इवेंट में दिए बयान का हवाला देते हुए बताया था कि भारत अपनी सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 150 नए सैटेलाइट तैनात करने की योजना बना रहा है। उन्होंने बताया कि 150 सैटेलाइट को लॉन्च करने की अनुमानित लागत लगभग 260 बिलियन रुपये (2.8 बिलियन डॉलर) है। हालिया संघर्ष से मिली सीख ये व्यापक कदम मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के सैन्य टकराव से मिले सबक को भी दर्शाते हैं। उस दौरान लक्ष्य पहचान और निगरानी में सैटेलाइट की अहम भूमिका रही। रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक रिसर्च समूह ने पिछले साल कहा था कि चीन ने पाकिस्तान को सैटेलाइट कवरेज देने में मदद की थी। स्पेसक्राफ्ट ट्रैकर N2YO.com के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के पास इस समय 100 से अधिक सैटेलाइट कक्षा में हैं, जबकि पाकिस्तान के पास महज आठ सैटेलाइट हैं। हालांकि अभी भारत के सैटेलाइट रात और बादलों में निगरानी करने में सीमित क्षमता रखते हैं। निगरानी अंतराल होगा कुछ घंटों का फिलहाल किसी क्षेत्र की दोबारा निगरानी में कई दिनों का अंतराल आ जाता है। इसी कारण भारत को पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ अभियानों की योजना बनाने के लिए अमेरिका की निजी कंपनियों से सैटेलाइट डेटा खरीदना पड़ा। नए जासूसी सैटेलाइट की तैनाती से यह अंतराल घटकर कुछ घंटों का रह सकता है। रॉकेट लॉन्च में चुनौतियां और निजी क्षेत्र की भूमिका इन सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए ISRO अपने मौजूदा रॉकेटों का इस्तेमाल करेगा। हालांकि, हाल के महीनों में एजेंसी को सफलता और असफलता दोनों का सामना करना पड़ा है। इस महीने एक रॉकेट लॉन्च विफल रहा- पिछले एक साल में यह दूसरी ऐसी घटना थी। इसके बावजूद, ISRO ने 24 दिसंबर को अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के BlueBird Block-2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया था। सरकार की इस व्यापक अंतरिक्ष निगरानी रणनीति में निजी स्टार्टअप्स भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। Skyroot Aerospace Pvt. जैसी कंपनियां भारत की स्पेस-बेस्ड मॉनिटरिंग क्षमताओं को मजबूत करने और सरकारी प्रयासों को समर्थन देने के लिए आगे आ रही हैं। कुल मिलाकर, भारत का यह आक्रामक अंतरिक्ष विस्तार न केवल सीमा सुरक्षा को नई धार देगा, बल्कि भविष्य के सैन्य और रणनीतिक परिदृश्य में उसकी स्थिति को भी कहीं अधिक मजबूत बनाएगा।