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खैबर पख्तूनख्वा में आसिम मुनीर को लेकर घमासान, विपक्ष की तीखी चेतावनी सेना को

पेशावर  पाकिस्तान में आसिम मुनीर को भारत के ऑपरेशन सिंदूर में मात खाने के बाद फील्ड मार्शल बनाया गया है। इसके अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का दर्जा भी संविधान संशोधन करके मिला है। जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान ने ऐसा इसलिए किया है ताकि भारत से मिली हार को छिपाया जा सके और जनता में गलत जानकारी देकर ही सही, सेना और सरकार का भरोसा कायम रहे। फिर भी इमरान खान के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टी पीटीआई से सेना की अदावत जारी है। यहां तक कि गुरुवार को तो खैबर पख्तूनख्वा की विधानसभा में आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए जाने पर विवाद छिड़ गया।   इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता की ओर से इमरान खान और खैबर के सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ बयान देने पर भी विवाद मचा है। सदन में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की महिला विधायक सोबिया शाहिद ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए। इस पर स्पीकर सुरैया बीबी ने मार्शलों को आदेश दिया कि वे आसिम मुनीर के पोस्टरों को हटाएं। इसके अलावा उन्होंने पीएमएल-एन की विधायक से भी कहा कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सेना का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका आपकी पार्टी से कोई ताल्लुक नहीं है। उन्होंने कहा कि आप अपनी परफॉर्मेंस के बारे में बात करें। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की तस्वीरें लहराने का क्या मतलब है। वहीं पीटीआई के विधायकों ने कहा कि इस देश में गंभीर समस्याएं हैं। गरीबी, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता है। इसके बाद भी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी पीटीआई नेतृत्व के खिलाफ बयान देते हैं। विशेष तौर पर इमरान खान और सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ उन्होंने जो बोला है, उससे खैबर पख्तूनख्वा के लोगों में गुस्सा है। पीटीआई के विधायक हुमायूं खान ने कहा कि आखिर सेना के लोगों को राजनीतिक मसले में बोलने की क्या जरूरत है। खान ने कहा कि कुछ लोग यहां राष्ट्रपति शासन लगवाने की बात भी कर रहे हैं, लेकिन खैबर पख्तूनख्वा में इससे संकट ही पैदा होगा और लोग ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे।  

अरुणाचल में खाई में गिरा मजदूरों से भरा ट्रक, 17 की मौत की संभावना

अंजाव अरुणाचल प्रदेश में गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। इसकी खबर आज सामने आई है। वहां एक ट्रक खाई में गिर गया। हादसे में 17  लोगों की मौत की खबर है। ये सारे असम के मजदूर थे। बताया जा रहा है कि इस हादसे में सिर्फ एक मजदूर की जान बची है। उसी की सूचना के आधार पर खबर सामने आई है।हादसा भारत-चीन बॉर्डर के पास हयुलियांग–चगलागम रोड पर हुआ। अंजाव जिले के डिप्टी कमिश्नर मिलो कोजिन ने हादसे की पुष्टि की है। अभी तक 13 बॉडीज रिकवर की जा चुकी है।  डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि हादसा बेहद खतरनाक पहाड़ी मोड़ पर हुआ। सड़क बहुत संकरी है और कई हिस्सों में ढलान काफी तेज है। मजदूर इस इलाके में चल रहे बॉर्डर रोड निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे। कैसे हुआ हादसा ? अंजाव जिले के डिप्टी कमिश्नर मिलो कोजिन ने पुष्टि की कि हादसा बेहद खतरनाक पहाड़ी मोड़ पर हुआ. उन्होंने बताया कि सड़क बहुत संकरी है और कई हिस्सों में ढलान काफी तेज है. मजदूर इस इलाके में चल रहे बॉर्डर रोड निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे. हादसे के बाद आसपास के ग्रामीणों ने सबसे पहले मौके पर पहुंचकर मदद शुरू की. बाद में पुलिस, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन और सेना की टीमों ने रेस्क्यू शुरू किया. खाई बहुत गहरी होने के कारण बचाव मुश्किल हो रहा है. कई मजदूरों को खाई में नीचे फंसे देखा गया है जिन तक पहुंचने में समय लग रहा है. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और कई मजदूरों के शरीर खाई में अलग-अलग हिस्सों में मिले हैं. इंडो-चीन बॉर्डर से जुड़े सड़क पर हुआ हादसा यह इलाका अपनी मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है. इंडो-चीन बॉर्डर से जुड़े सड़क प्रोजेक्ट पर काम करने वाले मजदूरों को रोजाना बेहद खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है. कई बार खराब मौसम, भूस्खलन और संकरी सड़कें हादसों की वजह बनती हैं. अधिकारियों ने कहा कि घटना की जांच की जाएगी ताकि यह पता चले कि ट्रक तेज रफ्तार में था या सड़क की हालत वजह बनी. प्रशासन ने परिवारों से संपर्क भी शुरू कर दिया है और उन्हें पूरी मदद देने का भरोसा दिया है. पहाड़ी इलाके में हादसा यह हादसा समुद्र तल से करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में हुआ। यहां सड़क बहुत संकरी और खतरनाक बताई जा रही है। मजदूर अरुणाचल से असम के तिनसुकिया जिले के छाट (पोरा घर) की ओर जा रहे थे, तभी वाहन फिसलकर ढलान से नीचे जा गिरा। शवों को निकालने में दिक्कत आ रही NDRF की टीम अभी भी मौके पर तैनात है, लेकिन खाई बहुत गहरी होने और सीमित संसाधनों की वजह से शवों को निकालने में मशक्कत करनी पड़ रही है। खराब मौसम और अत्यधिक ऊंचाई की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन काफी धीमी गति से चल रहा है। अरुणाचल और असम पुलिस की जॉइंट टीम हादसे की जांच और रेस्क्यू में लगी है। 

प्रधानमंत्री ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती को उनकी जयंती पर दी श्रद्धांजलि

नईदिल्ली   मोदी ने कहा कि उनकी कविताओं ने साहस का संचार किया और उनके विचारों में अनगिनत लोगों के मन पर अमिट छाप छोड़ने की शक्ति थी, जिसने भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना जागृत की।  प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि  भारती ने एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में कार्य किया और तमिल साहित्य को समृद्ध बनाने में उनका योगदान अतुलनीय है।  मोदी ने ‘एक्स’ पर अलग-अलग पोस्ट में लिखा: “महाकवि सुब्रमण्यम भारती को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उनके काव्यों ने साहस का संचार किया और उनके विचारों में अनगिनत लोगों के मन पर अमिट छाप छोड़ने की शक्ति थी। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया। उन्होंने एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में कार्य किया। तमिल साहित्य को समृद्ध बनाने में भी उनका योगदान अतुलनीय है।”

फरार लूथरा ब्रदर्स को थाईलैंड में हिरासत में लिया गया, गोवा अग्निकांड में 25 मौतों के बाद शुरू हुआ प्रत्यर्पण प्रक्रिया

पणजी  भारत के अनुरोध पर थाईलैंड पुलिस ने फुकेट में लूथरा भाइयों को हिरासत में ले लिया है. पिछले दिनों गोवा में नाइटक्लब में अग्निकांड में 25 लोगों की जान चली गई थी. लूथरा ब्रदर्स इस नाइटक्लब के फाउंडर हैं और हादसे के बाद फरार थे. पिछले हफ्ते 6 दिसंबर को गोवा के अरपोरा में स्थित बिर्च बाय रोमियो नाइटक्लब में आग लगने से बड़ा हादसा हो गया था. इस घटना में 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और कई लोग घायल भी हुए थे. घटना के बाद क्लब के फाउंडर ब्रदर्स फुकेट भाग गए थे. मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया है. पुलिस ने एक्शन लेते हुए नाइटक्लब अग्निकांड के मुख्य आरोपियों गौरव और सौरभ लूथरा के पासपोर्ट सस्पेंड कर दिए हैं. पासपोर्ट इसलिए सस्पेंड किया गया कि वे फुकेट से आगे कहीं और नहीं जा सकें. अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे इंटरपोल और कूटनीतिक चैनलों के जरिए भारत के लिए उनका प्रत्यर्पण आसान हो सकता है. हालांकि, अब उन्हें हिरासत में ले लिया गया, जो एक बड़ा एक्शन है. सूत्रों ने  बताया, "विदेश मंत्रालय को लूथरा ब्रदर्स के पासपोर्ट कैंसिल करने का औपचारिक अनुरोध गोवा सरकार की तरफ से मिला था." इंटरपोल ने मंगलवार को दोनों भाइयों के खिलाफ ‘ब्लू कॉर्नर नोटिस’ जारी किया था. कोर्ट से राहत नहीं… मामले के बाद लूथरा ब्रदर्श ने कोर्ट में अंतरिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी. अग्निकांड मामले में बुधवार को अदालत ने लूथरा ब्रदर्स को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिका पर सुनवाई गुरुवार को तय की गई है. सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा और तनवीर अहमद मीर अदालत में भाइयों की तरफ से पेश हुए. उनके वकील ने कहा, 'मैं कह रहा हूं कि मैं भारत वापस आना चाहता हूं, और वे मुझे गिरफ्तार करना चाहते हैं. मुझे ‘witch-hunting’ का डर है.'  

मैक्सिको का 50% टैरिफ अटैक, भारत और अन्य देशों पर नया दबाव, अमेरिका से टक्कर

 नई दिल्ली दुनिया में एक बार फिर टैरिफ वॉर (Tariff War) होती नजर आ रही है. अमेरिका ने जहां तमाम देशों पर टैरिफ में इजाफा कर उन्हें झटका दिया था, तो अब बार मैक्सिको की है. मैक्सिको ने बड़ा कदम उठाते हुए चीन समेत कई एशियाई देशों से आने वाले सामानों पर हाई टैरिफ (Maxico 50% Tariff) लगाने का फैसला किया है, जो अमेरिका की तरह ही 50% तक होगा. सीनेट ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है और ये नए टैरिफ अगले साल यानी 2026 से लागू होने वाले हैं. इससे खासतौर पर उन देशों को बड़ा झटका लगने वाला है जिनका मैक्सिको के साथ को ट्रेड समझौता नहीं है. 2026 से लागू होगा हाई टैरिफ रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्सिको द्वारा बढ़ाया गया ये टैरिफ अगले साल 2026 से लागू होगा. उसके इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में चीन, भारत, साउथ कोरिया, थाइलैंड और इंडोनेशिया सबसे ऊपर हैं. इन सभी देशों से आने वाले ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल, स्टील समेत अन्य सामानों पर अगले साल से मैक्सिको 50% तक टैरिफ वसूलेगा. सीनेट में पास किए गए प्रस्ताव के मुकाबिक, इसके अलावा कई सामानों पर टैरिफ को बढ़ाकर 35 फीसदी तक किया गया है. 35% तक किया जा रहा है. इस टैरिफ बढ़ाने वाले विधेयक के पक्ष में मैक्सिको की सीनेट ने 76 वोट पड़े, जबकि विरोध में 5 वोट रहे. इसके अलावा 35 अनुपस्थित वोटों के साथ इसे पारित कर दिया गया.  मैक्सिको ने क्यों उठाया ये कदम?  दरअसल, अमेरिका की रह ही मैक्सिको ने भी टैरिफ बढ़ाने का यह कदम अपने स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है. हालांकि, इसका असर कितना होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा. हालांकि, व्यापार समूहों ने  इस टैरिफ हाइक का जमकर विरोध भी किया है. रिपोर्ट के अनुसार, Maxico Tariff Hike के इस कदम को लेकर विश्लेषकों और प्राइवेट सेक्टर ने तर्क दिया है कि यह फैसला दरअसल संयुक्त राज्य अमेरिका को खुश करने और अगले वर्ष 3.76 अरब डॉलर का अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करने के लिए लिया गया है, क्योंकि मेक्सिको अपने राजकोषीय घाटे को दूर करने का प्रयास कर रहा है. 1400 सामानों पर लगेगा टैरिफ मैक्सिको सीनेट द्वारा मंजूर किया गया ये संशोधित विधेयक में पहले प्रस्ताव की तुलना में कम उत्पाद श्रेणियां शामिल हैं. लगभग 1,400 आयतित सामानों पर शुल्क लगाने वाले विधेयक को पहले के रुके हुए संस्करण से नरम किया गया है, क्योंकि इनमें से कई सामानों पर टैरिफ की दर को कम 50% से कम रखा गया है. हालांकि, मैक्सिको ने पहले भी चीनी सामानों पर टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया था और अमेरिका को खुश करने की कोशिश की थी, लेकिन इसका कुछ ज्यादा असर देखने को नहीं मिला था.

भारत ने 5th जेन फाइटर जेट से किया अमेरिका को चौंका, DRDO ने तोड़ा अहम कारनामा

बेंगलुरु  यह बात सभी को पता है कि भारत लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहा है. उसके पास मौजूदा समय में स्क्वाड्रन की संख्या 42 से घटकर 30 पर आ गई है. लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती नए फाइटर जेट्स हासिल करने की है. दरअसल, फाइटर जेट्स कोई वाशिंग मशीन या रेफ्रिजरेटर नहीं होते हैं कि कोई व्यक्ति मार्केट गया और उसे खरीदकर लेते आया. बल्कि, ये बेहद जटिल तकनीक वाले विमान हैं और भारत की कोशिश है कि वह अब भविष्य में स्वदेशी फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करे. इस दिशा में भारत अपने तेजस प्रोग्राम के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA यानी एम्का प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. अब इस एम्का प्रोजेक्ट में देसी वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है. दरअसल, डीआरडीओ ने मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण किया है. यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो दुनिया के कुछ चुनिंदा कंपनियों जैसे एयरबस और नासा के पास है. एक तरह से इस तकनीक पर अमेरिका और यूरोप का कब्जा है. चीन और रूस जैसे देश भी पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट्स बना चुके हैं लेकिन, उनके पास भी ऐसी सटीक तकनीक होने को लेकर सवाल किए जाते हैं. पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के लिए क्यों जरूरी है ये तकनीक? फिफ्थ जेन फाइटर जेट के लिए यह एक बहुत बड़ी टेक्नोलॉजी है. इस टेक्नोलॉजी में फाइटर जेट अपने फंख पक्षियों की तरह समेट सकते है. उसको छोटा-बड़ा कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर उसे छिपा सकते हैं. वह आसमान में संतुलित स्थित पाने लेने के बाद अपने फंख को पूरी तरह छिपा सकते हैं. यह सब कुछ सेकेंडों के भीतर होता है. ऐसे में ये विमान आसानी से दुश्मन के राडार से बच जाएंगे. पंख समेटने के कारण उनका आकार भी काफी सिमट जाएगा. पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए यह एक बहुत बड़ी तकनीकी जरूरत है. दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों की चुनिंदा कंपनियों के पास ही यह तकनीक उपलब्ध है. डीआरडी ने बनाया अपना तकनीक इस तकनीक को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है. इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है. आने वाले वक्त में इसे फाइटर जेट्स के साथ जोड़ा जाएगा. जानकारों का कहना है कि इस तकनीक का सीधा फायदा एम्का प्रोजेक्ट के साथ-साथ मानव रहित विमानों के विकास में मिलेगा. क्या है यह तकनीक दरअसल, यह एक बेहद खास तकनीक है. इसमें फंख एक खास धातु से बने होते है. जो एक विशेष तापमान पर गर्म होने के बाद फैल जाते हैं और ठंडा होने पर सिकुड़ जाते हैं. लेकिन, गर्म या ठंडा होने की यह पूरी प्रक्रिया सेकेंडों में पूरी होती है. यानी ये फंस फैलने के कुछ ही सेकेंड के भी अपने मूल आकार में आ जाते हैं. फाइटर जेट को जब उड़ान भरना होते हैं या उसको हवा के दबाव को मैनेज करना होता है तो वह हीट बढ़ाकर इन फंखों की साइज बढ़ा देते हैं. इस तकनीक को शेप मेमोरी अलॉय कहा जाता है. इस तकनीक की एक और बड़ी खासियत है कि इसमें पारंपरिक पंखों की तहत कोई कट या जोड़ नहीं होते. इस कारण इनके राडार की नजर में आना और मुश्किल हो जाता है. इस तकनीक में फंखे प्रति सेकेंड 35 डिग्री की रफ्तार से अपना आकार बदलते हैं. ये मात्र 0.17 सेकेंड में पूरे शेप चेंज कर लेते है. इसका मतलब यह है कि एक ही मिशन में विमान टेकऑफ पर ज्यादा वजन लिफ्ट करने के लिए कैंबर बढ़ा सकेगा. क्रूज में ड्रैग कम करने लिए रेंज बढ़ा सकेगा. डॉगफाइट यानी फाइटर जेट्स के बीच सीधी भिड़ंत के वक्त तेजी से अपना आकार बदलकर दुश्मन को चमका दे सकेगा. क्या थी सबसे बड़ी चिंता? इस तकनीक को लेकर सबसे बड़ी बात यह कही जाती है कि इसमें बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती है. ये ऊर्जा पंखों को गर्म या ठंडा करने में इस्तेमाल होती है. ऐसे में विमान पर बोझ बढ़ जाता था. इस समस्या के समाधान के लिए एक एडाप्टिव पावर अलोकेशन एल्गोरिदम तैयार किया गया है जो जरूरत के हिसाब से बिजली को इंटेलिजेंटली बांटता है. इसका नतीजा यह हुआ कि विमान के एक्टिव सेगमेंट को ही पावर मिलती है. बाकी सेगमेंट्स पर भार नहीं पड़ता है. इस तरह इस पूरे टेस्ट में महज 5.6 फीसदी अतिरिक्त ऊर्जा की खपत हुई.

जम्मू में ‘बर्मा कॉलोनी’ की स्थापना और रोहिंग्याओं का असर, CJI की चेतावनी हुई सच

श्रीनगर  सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कड़ी टिप्‍पणी करते हुए कहा था कि भारत में घुसपैठियों के लिए किसी तरह का ‘रेड कार्पेट वेलकम’ नहीं होना चाहिए.” यह टिप्पणी भारत की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के प्रति उसके सख्त रुख को दर्शाती है. लेकिन, जम्मू की जमीन पर तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है. म्यांमार से आए रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के लोग न सिर्फ यहा आकर बसे हैं बल्कि अब कई इलाकों में उनकी स्थायी बसावट, कारोबार और यहां तक कि समानांतर ढांचे तक बनते दिखाई दे रहे हैं. यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट के संदेश और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ी खाई पैदा करती है.  कासिम नगर बना बर्मा बस्ती पहले रोहिंग्या समुदाय के लोग जम्मू शहर और आसपास के इलाकों में अस्थायी कैम्पों तक सीमित थे. लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. कई क्षेत्रों में इनकी परमानेंट बस्तियां बस गई हैं. झुग्गियों का विस्तार हुआ है और यहां तक कि छोटी-छोटी दुकानें व बाजार भी खड़े हो चुके हैं. ये अब सिर्फ अस्थायी रूप से रहने के मकसद से नहीं आए हैं बल्कि उनका इरादा यहीं बस जाने का लगता है. सरकारी और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, जम्मू के नरवाल, सुंजवां, भठिंडी और अन्य इलाकों में रोहिंग्या परिवारों ने ढांचों का स्थायी रूप लेती बस्तियां खड़ी कर ली हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1994 में दो बच्चों समेत एक रोहिंग्या परिवार जम्मू पहुंचा था. इसके बाद 2009 के बाद इनकी उपस्थिति में तेज उछाल आया. 2007 से 2015 के बीच बड़ी संख्या में रोहिंग्या भारत आए और जम्मू में बसने लगे. पहले इस जगह का नाम कासिम नगर हुआ करता था. 2007 में इसे रोहिंग्या बस्ती के नाम से जाना जाने लगा. 2020 के बाद रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय ने अपने संगठन को इतना मजबूत कर लिया कि स्थायी रूप से बसने की चाह में इस जगह को ‘बर्मा बस्ती’ का नाम भी दे दिया गया है. यह नामकरण अपने आप में उनकी बढ़ती पकड़ और स्थायी पहचान की तलाश को दर्शाता है. टीचर तक बन गए रोहिंग्या घुसपैठी रोहिंग्या समुदाय अब सिर्फ़ रहने तक सीमित नहीं है. आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, रोहिंग्या परिवारों के बच्चे स्थानीय स्कूलों में दाख़िल हैं. कुछ संस्थानों में रोहिंग्या मूल का शिक्षक सादिक बच्चों को पढ़ाने तक पहुंचाहुआ है. यही नहीं, रोहिंग्या बच्चों के लिए अलग से मदरसे भी चल रहे हैं. इन मदरसों के संचालन पर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर निगरानी बढ़ाती रही हैं. यह उनके समुदाय के भीतर एक समानांतर ढाँचा विकसित होने का संकेत है. आर्थिक मोर्चे पर भी ये सक्रिय हो रहे हैं. कुछ लोग कबाड़ इकट्ठा करने, मजदूरी और रेहड़ी-फड़ी का काम करते हैं. वहीं, कुछ छोटी-बड़ी कपड़ों की दुकानों से कमाई करते नज़र आ रहे हैं. यह सब उनकी अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी रूप से यहीं बसने की मंशा को दर्शाता है. जनसांख्यिकीय बदलाव की चिंता पिछले कुछ सालों में इनकी आबादी में लगातार वृद्धि देखी गई है. इसने क्षेत्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलावों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार पहचान सत्यापन अभियान चलाए हैं. इन अभियानों में दस्तावेजों की कमी, संदेहास्पद पहचान और अवैध बसावट के मामले सामने आए. 2021 में महिलाएं और बच्चे सहित कई रोहिंग्या हिरासत में लिए गए थे. जम्मू में रोहिंग्या की बढ़ती और अब लगभग स्थायी होती मौजूदगी, सुरक्षा, कानून और स्थानीय प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुकी है. संवेदनशील बॉर्डर जोन में ऐसी बिना अनुमति और बिना दस्तावेज वाली बसावट को जारी रहने दिया जा सकता है या नहीं, यह सबसे बड़ा सवाल है. सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश और जमीनी हालात के बीच का यह विरोधाभास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता का विषय है.

एशिया में तनाव चरम पर: रूस-चीन की संयुक्त उड़ानें, जापान ने दिखाई अमेरिकी समर्थन की ढाल

टोक्यो/बीजिंग जापान और चीन के बीच तल्खी 7 नवंबर से सुर्खियां बटोर रही है। जमीन पर बिगड़े संबंध अब आसमान तक पहुंच गए हैं। हाल ही में जापान ने चीन पर अपने एयरक्राफ्ट को लॉक करने का आरोप लगाया। बीजिंग ने इससे साफ इनकार भी किया। अब खबर है कि रूसी बॉम्बर चीनी एयर पेट्रोलिंग का हिस्सा बन गए हैं तो वहीं अमेरिका ने भी जापान के कदम को सही करार दिया है। जापानी रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार देर रात कहा कि जापान ने देश भर में जॉइंट पेट्रोलिंग कर रही रूसी और चीनी एयर फोर्स पर नजर रखने के लिए जेट भेजे हैं। दो रूसी टीयू-95 न्यूक्लियर-कैपेबल स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स ने जापान सागर से पूर्वी चीन सागर की ओर उड़ान भरी ताकि दो चीनी एच-6 बॉम्बर्स से मिल सकें और एक "लंबी दूरी की जॉइंट फ्लाइट" कर सकें। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने बुधवार को एक्स पोस्ट में कहा कि रूस और चीन का संयुक्त अभ्यास “साफ तौर पर हमारे देश के खिलाफ ताकत दिखाने के इरादे से किया गया था, जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता की बात है।” वहीं पहली बार अमेरिका ने भी जापानी फाइटर जेट्स पर चीनी सेना के रडार इस्तेमाल की आलोचना की। जापानी मीडिया हाउस ने इसकी पुष्टि की है। उसके मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बुधवार को ईमेल के जरिए 'द जापान टाइम्स' को बताया, "चीन की हरकतें इलाके की शांति और स्थिरता के लिए सही नहीं हैं।" "अमेरिका-जापान अलायंस पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और एकजुट है। हम अपने साथी जापान के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हैं, और हम इस और दूसरे मुद्दों पर करीबी संपर्क में हैं।" जापान के चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मिनोरू किहारा ने टिप्पणियों का स्वागत करते हुए कहा कि ये "यूएस-जापान के मजबूत गठबंधन को दिखाते हैं"। चीनी विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। शनिवार की घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की यह आलोचना पहली टिप्पणी थी। 6 दिसंबर को लियाओनिंग एयरक्राफ्ट कैरियर से भेजे गए चीनी फाइटर जेट्स ने एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के जेट्स को दो बार रडार लॉक किया था; टोक्यो ने इस हरकत को "खतरनाक" बताया था। रडार की यह घटना ऐसे समय में हुई जब टोक्यो और बीजिंग प्रधानमंत्री साने ताकाइची के 7 नवंबर के बयान के बाद दोनों देश आपस में उलझे हुए हैं। ताकाइची ने डाइट में कहा था कि सेल्फ-डिफेंस फोर्स को कुछ “सबसे विपरीत स्थितियों” में तैनात किया जा सकता है, जैसे कि ताइवान पर चीनी नौसेना की नाकाबंदी, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह जापान के “अस्तित्व के लिए खतरे” वाली स्थिति होगी।

इस्लामाबाद में PTI प्रदर्शन बेकाबू, पुलिस ने इमरान खान की बहन पर चलाया वाटर कैनन; पार्टी ने कहा— लोकतंत्र का गला घोंटा गया

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की सियासत गरमाई हुई है। इन दिनों पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का गतिरोध देखने को मिल रहा है। पीटीआई के चीफ इमरान खान को लेकर बीते कुछ दिनों से अलग-अलग खबरें सामने आ रही हैं। दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान से मुलाकात पर बैन जारी रखने का ऐलान किया। इस पर पीटीआई चीफ की बहन आलीमा खान भारी संख्या में समर्थकों के साथ विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गईं। जेल के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहीं आलीमा खान और अन्य प्रदर्शनकारियों पर ठंड की रात में पानी की बौछार कर दी गई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने पीटीआई की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा बयान के हवाले से बताया कि पार्टी ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इमरान खान की बहन और पीटीआई कार्यकर्ताओं की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अदियाला जेल के बाहर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि कोर्ट ने इमरान खान से मिलने की इजाजत दी थी। इसमें कहा गया, "शांतिपूर्ण धरने पर यह बेरहमी से की गई कार्रवाई बुनियादी मानवाधिकारों और ठंड के मौसम में इकट्ठा होने की आजादी का उल्लंघन है।" इसके अलावा, पार्टी ने एक्स पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें लोगों को मौके से भागते और वॉटर कैनन का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया। पीटीआई ने कहा, "पंजाब पुलिस की फासीवादी हरकतें एक बार फिर शुरू हो गई हैं। बहुत ज्यादा ठंड में अदियाला जेल के बाहर शांतिपूर्वक धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं पर वॉटर कैनन से हमला किया गया। ये कायरतापूर्ण हरकतें न तो हमारी आवाज दबा पाएंगी और न ही हमारा हौसला कम कर पाएंगी।" एक और पोस्ट में, इमरान खान की पार्टी ने कहा, "उनके परिवार को उनसे मिलने की इजाजत नहीं मिलने की वजह से धरना दिया गया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना न सिर्फ इमरान खान के कैदी अधिकारों का बेशर्मी से उल्लंघन है, बल्कि सरकार के अत्याचारों का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर भी सीधा हमला है।" पीटीआई ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान की बहन अलीमा खान और पीटीआई के सदस्यों ने मंगलवार को रावलपिंडी की अदियाला जेल के बाहर धरना देना शुरू कर दिया। अलीमा खान ने बताया कि इमरान खान को पिछले 14 महीनों से अपने पर्सनल डॉक्टर से मिलने की इजाजत नहीं दी गई है।

1952 में नेहरू ने कराया था देश का पहला SIR, अमित शाह का बड़ा बयान

नई दिल्ली  लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सदन में इस चर्चा के लिए न बोलने का सबसे बड़ा कारण यह है कि वे (विपक्ष) विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर चर्चा मांग रहे थे। एसआईआर पर इस सदन में चर्चा नहीं हो सकती, क्योंकि एसआईआर की जिम्मेदारी भारत के चुनाव आयोग की है। भारत का चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त, ये सरकार के तहत काम नहीं करते हैं। अगर चर्चा होती, और कुछ सवाल किए जाते तो इसका जवाब कौन देगा? अमित शाह ने कहा कि सबसे पहला एसआईआर 1952 में हुआ। उस समय कांग्रेस पार्टी से देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे।  दूसरा एसआईआर 1957 में हुआ। उस समय भी कांग्रेस पार्टी से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। तीसरा एसआईआर 1961 में हुआ। उस समय भी कांग्रेस पार्टी से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे। 1965-66 में एसआईआर हुआ, उस समय भी कांग्रेस से लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे। 1983-84 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं। 1987-89 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। 1992-95 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव थे। 2002-03 में एसआईआर हुआ, उस समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। 2004 में एसआईआर समाप्त हुआ, उस समय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह थे। अमित शाह ने चुनाव आयोग की शक्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग का गठन, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, इन सभी चुनावों का संपूर्ण नियंत्रण चुनाव आयोग को दिया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 में मतदाता की पात्रता, योग्यता, और मतदाता होने की शर्तें तय की गई हैं। सबसे पहली शर्त है, मतदाता भारत का नागरिक होना चाहिए, विदेशी नहीं होना चाहिए। ये (विपक्ष) कह रहे हैं कि चुनाव आयोग एसआईआर क्यों कर रहा है? अरे, उसका (चुनाव आयोग) दायित्व है, इसलिए करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के संविधान के अनुच्छेद 324 से चुनाव आयोग की रचना हुई। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। संविधान में चुनाव आयोग का गठन, उसकी शक्तियां, चुनावी प्रक्रिया, मतदाता की परिभाषा और मतदाता सूची को तैयार करने तथा उसे सुधारने का प्रावधान किया गया, और प्रावधान जब किया गया तब हमारी पार्टी बनी ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 327 के तहत, मतदाता सूची तैयार करने, परिसीमन करने और चुनाव कराने की जिम्मेदारियां, जिसमें संबंधित कानून की सिफारिश करने का अधिकार भी शामिल है, चुनाव आयोग को सौंपी गई हैं। गृह मंत्री ने कहा कि हाल ही में, एक कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि, अनुच्छेद 327 की व्याख्या के अनुसार, चुनाव आयोग को इस उद्देश्य के लिए मतदाता सूची तैयार करने का पूरा अधिकार है।