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विदेशी धरती पर भारतीय ताकत का प्रदर्शन: फ्रांस में गरुड़ की ऐतिहासिक उड़ान

फ्रांस  फ्रांस के Mont-de-Marsan एयरबेस पर चल रहा Exercise Garuda 2025 तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है। भारतीय वायुसेना (IAF) और फ्रेंच एयर एंड स्पेस फोर्स (FASF) लगातार संयुक्त मिशन उड़ानें भर रही हैं। दोनों एयरफोर्सेज़ अपनी सटीकता, तालमेल और संयुक्त ऑपरेशन क्षमता का शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।IAF ने X पर पोस्ट करते हुए बताया कि “दोनों टीमें उच्च operational tempo बनाए रखते हुए जटिल मिशन प्रोफाइल्स को पूरा कर रही हैं।” पोस्ट के साथ शेयर की गई हवाई तस्वीरों में उड़ते फाइटर जेट्स, refuelling और formation flying की अद्भुत झलक दिखाई दी।     Su-30MKI फाइटर जेट्स (IAF)     French Multirole Fighter Jets     C-17 Globemaster III – एयरलिफ्ट और लॉजिस्टिक सपोर्ट     IL-78 Tankers- mid-air refuelling के लिए इन विमानों ने मिलकर air-to-air combat, air defence, और coordinated strike missions जैसे वास्तविक युद्ध जैसी सिचुएशन में उड़ानें भरीं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह अभ्यास पायलटों को वास्तविक ऑपरेशनल माहौल में रणनीति, सामरिक प्रशिक्षण और teamwork को निखारने का मौका देता है। यह अभ्यास भारत–फ्रांस की 1998 में शुरू हुई Strategic Partnership को और मजबूत बनाता है। रक्षा, सुरक्षा, स्पेस और Indo-Pacific क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। Exercise Garuda 2025 पेशेवर अनुभव साझा करने और बेहतरीन tactical practices को सीखने का एक बड़ा मंच बन गया है।

CJI सूर्यकांत ने दिया सुझाव: 18+ कंटेंट देखने से पहले आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य हो

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नेटफ्लिक्स और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद ‘अश्लील’ कंटेंट को लेकर सख्ती दिखाई. जजों ने सुझाव दिया है कि अश्लील सामग्री देखने के लिए आधार कार्ड जरूरी होना चाहिए. कोर्ट का मानना है कि इससे बच्चों को गलत कंटेंट से बचाया जा सकेगा. यह सुझाव चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की बेंच ने दिया है. सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि सिर्फ चेतावनी देना काफी नहीं है. जब तक दर्शक चेतावनी पढ़ते हैं तब तक शो शुरू हो जाता है. इसलिए उम्र की पुष्टि के लिए आधार का इस्तेमाल एक बेहतर विकल्प हो सकता है. यह सुनवाई कॉमेडियन और पॉडकास्टर के खिलाफ दायर याचिकाओं पर हो रही थी. इसमें समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया जैसे नाम शामिल हैं. कोर्ट ने दिव्यांगों के अपमान पर भी गहरी नाराजगी जताई है. जजों ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब मनमानी नहीं है. इसके लिए एक स्वायत्त रेगुलेटरी बॉडी की जरूरत है. अश्लीलता रोकने के लिए आधार वेरिफिकेशन का सुझाव सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन अश्लीलता पर चिंता जताई है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस मुद्दे पर अहम बात कही. उन्होंने कहा कि किताबों या पेंटिंग में अश्लीलता अलग बात है. वहां नीलामी होती है और प्रतिबंध भी लग सकते हैं. लेकिन फोन पर स्थिति अलग है. जैसे ही आप फोन ऑन करते हैं तो कंटेंट सामने आ जाता है. कई बार न चाहते हुए भी गलत चीजें दिख जाती हैं. ऐसे में क्या किया जाए. इसी पर सीजेआई सूर्यकांत ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि चेतावनी देने के बावजूद शो शुरू हो जाता है. चेतावनी सिर्फ कुछ सेकंड के लिए आती है. इसके बाद शो चल पड़ता है. इसलिए आधार कार्ड मांगना सही हो सकता है. इससे दर्शक की उम्र का पता चल जाएगा. यह सब एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा सकता है. बार एंड बेंच की लाइव रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह सिर्फ सुझाव है.     कंटेंट को कंट्रोल करने के लिए स्वायत्त संस्था की जरूरत कोर्ट ने रेगुलेशन के लिए एक स्वतंत्र संस्था की वकालत की है. सीजेआई ने कहा कि सेल्फ स्टाइल संस्थाएं काफी नहीं हैं. स्थिति को संभालने के लिए बाहरी प्रभाव से मुक्त संस्था चाहिए. कोर्ट ने सवाल किया कि अगर सब कुछ की अनुमति दे दी जाए तो क्या होगा. समाज में संतुलन बनाना बहुत जरूरी है. हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वह किसी का मुंह बंद नहीं करना चाहता. मौलिक अधिकारों का संतुलन बना रहना चाहिए. जजों ने कहा कि हम रेगुलेशन का सुझाव देने वाले आखिरी लोग होंगे. लेकिन जब इंडस्ट्री खुद कुछ नहीं कर रही तो दिक्कतें आ रही हैं. कोर्ट ने पूछा कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं.   दिव्यांगों का मजाक उड़ाने पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी     सुनवाई के दौरान समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया का मामला भी उठा. रणवीर ने एक शो में कथित तौर पर अश्लील टिप्पणी की थी. वहीं समय रैना पर दिव्यांगों का मजाक उड़ाने का आरोप है. क्योंर एसएमए इंडिया फाउंडेशन ने रैना के खिलाफ याचिका दी है. आरोप है कि उन्होंने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के इलाज पर असंवेदनशील बात कही. कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की.     सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सवाल किया. उन्होंने पूछा कि दिव्यांगों के अपमान पर सख्त कानून क्यों नहीं है. यह कानून एससी-एसटी एक्ट की तर्ज पर होना चाहिए. मेहता ने भी माना कि मजाक गरिमा की कीमत पर नहीं हो सकता.     जस्टिस बागची ने देश विरोधी कंटेंट का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने पूछा कि क्या सेल्फ रेगुलेशन ऐसे कंटेंट को रोक पाएगा. कई बार कंटेंट समाज के ढांचे को बिगाड़ने वाला होता है. जब तक सरकार जवाब देती है तब तक देर हो जाती है. वीडियो वायरल हो जाते हैं और करोड़ों लोग देख लेते हैं. वकील प्रशांत भूषण ने इस पर तर्क दिया. उन्होंने कहा कि ‘एंटी नेशनल’ शब्द बहुत अस्पष्ट है. क्या सीमा विवाद के इतिहास पर लिखना भी देश विरोधी होगा.     इस पर जस्टिस बागची ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि हम रेगुलेटेड अधिकार की बात कर रहे हैं. कोई सरकारी अधिकारी यह तय नहीं कर सकता. लेकिन अगर कंटेंट देश की एकता और अखंडता को चोट पहुंचाता है तो सोचना होगा. यूजर जेनरेटेड कंटेंट पर सरकार की चिंता सॉलिसिटर जनरल मेहता ने यूजर जेनरेटेड कंटेंट का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि फ्री स्पीच की आड़ में कोई कुछ भी नहीं कर सकता. सीजेआई ने इस बात पर सहमति जताई. उन्होंने कहा कि यह अजीब है कि कोई अपना चैनल बना ले. और फिर बिना किसी जवाबदेही के कुछ भी करता रहे. फ्री स्पीच की सुरक्षा जरूरी है लेकिन सीमाएं भी हैं. अगर किसी शो में एडल्ट कंटेंट है तो एडवांस चेतावनी होनी चाहिए. साथ ही पेरेंटल कंट्रोल भी जरूरी है. अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि मंत्रालय इस पर मीटिंग करने वाला है. अगर किसी कानून में बदलाव की जरूरत होगी तो किया जाएगा.     सरकार और स्टेकहोल्डर्स के बीच होगी चर्चा कोर्ट ने सुझाव दिया कि जल्दबाजी में कुछ नहीं होना चाहिए. एक विचार-विमर्श की प्रक्रिया होनी चाहिए. प्रस्ताव को पब्लिक डोमेन में रखा जाना चाहिए. वेंकटरमणी ने कहा कि हम सबसे बात करेंगे. किसी को भी ऐसे ही चर्चा में नहीं आने दिया जाएगा. मेहता ने कहा कि सरकार इस पर विचार कर रही है. वे एक हफ्ते बाद जानकारी देंगे. कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रभाव कभी-कभी फायदों से ज्यादा हो जाते हैं. इसलिए एक जिम्मेदार समाज का निर्माण जरूरी है. जब समाज जिम्मेदार होगा तो समस्याएं खुद सुलझ जाएंगी.     कॉमेडियन को दी फंड जुटाने की सलाह दिव्यांगों के मामले में कोर्ट ने कॉमेडियन को एक सलाह दी है. कोर्ट ने कहा कि वे दिव्यांगों के इलाज के लिए फंड जुटाएं. इसके लिए उन्हें कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए. समय रैना के वकील ने कहा कि उन्होंने पैसे दान किए हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए. हमें उनके आत्मसम्मान का आदर करना चाहिए. कोर्ट ने सुझाव दिया कि एक डेडिकेटेड फंड बनाया जाए. कॉमेडियन … Read more

मोदी–पुतिन वार्ता अहम मोड़ पर: S-400 की अतिरिक्त स्क्वाड्रन और Su-57 डील पर सभी की निगाहें

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 5 दिसंबर बेहद अहम द्विपक्षीय सम्मेलन होने वाला है। इसमें भारत अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए पांच अतिरिक्त एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम स्क्वाड्रन की मांग कर सकता है। यह कदम हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान सिस्टम के शानदार प्रदर्शन के बाद उठाया जा रहा है, जहां इसने पाकिस्तानी मिसाइलों, ड्रोनों और विमानों को सफलतापूर्वक नष्ट किया था। S-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस स्क्वाड्रनों के अलावा, पहले से शामिल स्क्वाड्रनों के लिए बड़ी संख्या में मिसाइलों की खरीद भी इस बातचीत का मुख्य हिस्सा होगी। रूस भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Sukhoi-57 की दो से तीन स्क्वाड्रन बेचने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका F-35 लाइटनिंग-II को एक विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि, भारत ने अभी तक किसी भी विमान पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि IAF के लिए दो-तीन स्क्वाड्रन पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का अधिग्रहण एक उपयोगी अंतरिम समाधान हो सकता है, जब तक कि स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट 2035 के आसपास तैयार नहीं हो जाता। लेकिन Su-57, F-35 या किसी अन्य विकल्प पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। 84 Sukhoi-30MKI विमानों का होगा बड़ा अपग्रेड कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) जल्द ही 63000 करोड़ रुपये की लागत से पहले बैच के 84 Sukhoi-30MKI विमानों के अपग्रेड को मंजूरी देगी। यह भारतीय वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाले रूसी मूल के विमानों को अगले 30 वर्षों तक एयर कॉम्बैट के लिए सक्षम बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम है। अपग्रेड में शामिल होंगे-     आधुनिक AESA रडार     एडवांस एवियोनिक्स     लंबी दूरी के हथियार     मल्टी-सेंसर फ्यूजन तकनीक सूत्रों के अनुसार, अपग्रेड स्थानीय स्तर पर किया जाएगा, पर रूस की भी इसमें सीमित भूमिका होगी। अमेरिका के साथ बढ़ते रक्षा सौदे अमेरिका के साथ भारत ने पिछले 15 वर्षों में 26 अरब डॉलर से अधिक के रक्षा सौदे किए हैं। हाल ही में भारत ने 113 GE-F404 इंजन (तेजस MK-1A) के लिए 8,900 करोड़ रुपये का समझौता किया। नौसेना के MH-60R Seahawk हेलिकॉप्टरों के लिए 7,000 करोड़ रुपये का फॉलो-ऑन सपोर्ट पैकेज मंजूर किया। ट्रंप प्रशासन के अधिक लेन-देन आधारित रुख के बावजूद भारत रूस और अमेरिका के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। S-400 डिलीवरी में तेजी की उम्मीद रूस ने भरोसा दिलाया है कि 2018 में हुए 5.4 अरब डॉलर के S-400 सौदे के अंतिम दो स्क्वाड्रन नवंबर 2026 तक भारत को सौंप दिए जाएंगे। यूक्रेन युद्ध के चलते इसमें देरी हुई थी। साथ ही, रक्षा मंत्रालय ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये की लागत से S-400 मिसाइलों की बड़ी खरीद को भी मंजूरी दी है, ताकि पाकिस्तान के साथ हालिया तनाव में उपयोग की गई मिसाइलें पुनः भरी जा सकें और भविष्य के लिए रणनीतिक भंडार तैयार किए जा सकें। IAF ने पांच और S-400 स्क्वाड्रनों की मांग भी रखी है। इसके अलावा, रूस भारत में S-400 के लिए MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) सुविधा स्थापित करेगा। ऑपरेशन सिंदूर में S-400 का प्रदर्शन रहा ‘गेमचेंजर’ IAF प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने हाल ही में कहा कि S-400 सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 314 किमी की दूरी पर यानी अब तक की सबसे लंबी हवाई मार करते हुए कम से कम पांच पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को मार गिराया था जिनमें F-16 और JF-17 श्रेणी के विमान शामिल थे। उन्होंने S-400 को ऑपरेशन का गेमचेंजर बताया।

CM की दौड़ में उठा नया सवाल: क्या DK को चुनने पर कांग्रेस में छिड़ेगा बवाल? सिद्धारमैया गुट की नब्ज तेज

बेंगलुरु  कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद को लेकर संघर्ष और बढ़ने के आसार हैं। खबर है कि अगर पार्टी आलाकमान डीके शिवकुमार को सीएम पद के लिए चुनता है, तो मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का खेमा बड़े ऐक्शन की तैयारी कर रहा है। हालांकि, इसे लेकर दोनों ही नेताओं और पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। संभावनाएं हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद राहुल गांधी और सोनिया गांधी से जल्द इस मुद्दे पर मुलाकात कर सकते हैं। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सुत्रों ने बताया है कि सिद्धारमैया विधायक अलर्ट मोड पर है और जरूरत पड़ने पर दिल्ली जाकर दबाव डाल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल सीएम आलाकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अगर इस बात के थोड़े भी संकेत मिले कि शिवकुमार का प्रमोशन होने वाला है, तो सिद्धारमैया के समर्थक हरकत में आ जाएंगे। हालांकि, आगे की रणनीति क्या होगी, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। शिवकुमार के नाम पर भारी विवाद? रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि अगर पार्टी मुख्यमंत्री बदलने पर जोर देता है, तो उनके सामने नामों की एक लिस्ट पेश की जाएगी। कहा जा रहा है कि एक विकल्प गृहमंत्री जी परमेश्वर हो सकते हैं। वह खुलकर अपनी दावेदारी पेश करते रहे हैं। इससे संकेत मिलते हैं कि सिद्धारमैया और शिवकुमार में दरार बरकरार है। हालांकि, दोनों ही नेताओं ने इससे इनकार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक सरकार में मंत्री सतीश जरकिहोली की अगुवाई में एक बैठक हुई थी। जरकिहोली को सिद्धारमैया समर्थक माना जाता है। कहा जा रहा है कि उस बैठक में ही ताजा रणनीति तैयार की गई है। इसके अलावा जरकिहोली डिप्टी सीएम से भी मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अब तक साफ नहीं हो सका है कि दोनों नेताओं में क्या बात हुई। कांग्रेस आलाकमान पर बढ़ा दबाव बुधवार को जरकिहोली ने कांग्रेस आलाकमान से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि वह जल्द ही खरगे से मुलाकात के लिए समय मांगेंगे। उनके अनुसार, उपमुख्यमंत्री शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं और उन्होंने पहले दिन से ही यह बात सबको बता दी थी, लेकिन पार्टी आलाकमान ने सिद्धरमैया को मौका दिया। जारकीहोली ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन पर पार्टी आलाकमान को फैसला लेना है। उन्होंने कहा कि सिद्धरमैया ने भी कहा है कि आलाकमान को इस पर जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए। मंत्री ने कहा, 'जब मुख्यमंत्री ऐसा कहते हैं, तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इस पर ध्यान देना चाहिए।'  

बंगाल मिशन: अमित शाह बोले—हर जगह ड्यूटी मोड में रहें कार्यकर्ता

नई दिल्ली  बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद उत्साहित भाजपा अब मिशन बंगाल पर जुटने वाली है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के दिल्ली स्थित आवास पर हुई डिनर मीटिंग में भाजपा नेताओं का होम मिनिस्टर अमित शाह ने मार्गदर्शन किया। एक तरफ उन्होंने बिहार में मिली जीत से अहंकार में ना आने की सीख दी तो वहीं यह भी कहा कि अब बंगाल के लिए जुटना होगा। उन्होंने कहा कि अब आगे हम लोगों को बंगाल की लड़ाई के लिए तैयार रहना है। उनकी स्पष्ट नसीहत थी कि सभी लोग जहां कम, वहां हम वाले भाव से काम करें और कार्यकर्ता मोड में रहें।   गृह मंत्री ने कहा कि जहां भी संगठन कमजोर पड़े, वहां जाकर ताकत बनना है। अमित शाह ने कहा कि नेताओं की भूमिका सिर्फ चुनाव लड़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि जहां कम, वहां हम के भाव से सक्रिय रहने की है। इसके अलावा बिहार के नेताओं के लिए भी अमित शाह ने साफ संकेत दिया कि कोई भी यह ना माने की उसके चलते जीत मिली है। ऐसा सोचना अहंकार का भाव पैदा करता है। उन्होंने कहा, 'सभी नेताओं ने परिश्रम की पराकाष्ठा की है। चुनाव में 1 प्रतिशत का योगदान भी बहुत बड़ा होता है, लेकिन कोई नेता यह न सोचे कि जीत उसकी वजह से मिली है।ऐसा सोचना घमंड पैदा करता है।' अगले साल अप्रैल-मई में बंगाल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। बिहार के बाद बंगाल की ओर भाजपा रुख करना चाहती है। अमित शाह ने कहा कि किसी भी नेता की कहीं भी ड्यूटी लगाई जा सकती है। उनकी इस बात से साफ है कि दूसरे इलाकों के नेताओं को भी बंगाल में भेजा जा सकता है। इसके अलावा विधानसभा से लेकर बूथ लेवल तक कहीं भी तैनाती की जा सकती है। गौरतलब है कि बिहार में यूपी, दिल्ली समेत कई राज्यों से भाजपा नेताओं को बुलाया था। यूपी सरकार के मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तो बिहार की गली-गली में प्रचार करते और लोगों के पैर छूते नजर आए थे। इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।  

CM पद पर बड़ी हलचल: DK शिवकुमार को लेकर सिद्धारमैया खेमे का बड़ा बयान

बेंगलुरु  कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों का दौर जारी है। इसी बीच सीएम सिद्धारमैया कैम्प से उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन के सुर उठने लगे हैं। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से सत्ता संघर्ष को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान दोनों नेताओं को आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली तलब कर सकता है। सिद्धारमैया के करीबी माने कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने कहा है कि वह खुद भी सीएम रेस में हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'जब कोई मुझसे मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षा के बारे में पूछता है, तो मैं बता देता हूं कि मैं भी सीएम की रेस में हूं। लेकिन अगर सत्ता में बदलाव होता है और डीके मुख्यमंत्री बनते हैं, तो हम उसे स्वीकार करेंगे।' परमेश्वर ने खुद को लेकर कहा कि कांग्रेस आलाकमान उनके 'योगदान' के बारे में अच्छे से जानती है। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया है कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व का ही होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी मुख्यमंत्री पद के लिए योग्य उम्मीदवार होते। उन्होंने सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच किसी समझौते की जानकारी से इनकार किया है। 1 दिसंबर से पहले हो सकता है फैसला एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान 1 दिसंबर से पहले कर्नाटक पर बड़ा फैसला ले सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुलाकात आने वाले एक या दो दिनों में हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। 1 दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है और पार्टी इससे पहले इस मुद्दे को सुलझाना चाहेगी। सीक्रेट डील कांग्रेस सरकार के 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल के आधे पड़ाव पर पहुंचने के बाद सत्तारूढ़ दल के भीतर सत्ता को लेकर खींचतान तेज हो गई है। राज्य में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर शक्ति संघर्ष तेज हो गया है। 20 नवंबर को कांग्रेस सरकार के अपने पांच वर्षीय कार्यकाल के ढाई साल पूरा होने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है, क्योंकि 2023 में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच कथित 'सत्ता साझेदारी' समझौते का दावा किया जा रहा है। सिद्धरमैया ने हाल ही में कहा था कि वह पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहेंगे और भविष्य में राज्य का बजट पेश करना जारी रखेंगे। शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि वह मुख्यमंत्री बदलने के मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर बात नहीं करना चाहते, क्योंकि यह पार्टी में चार-पांच लोगों के बीच एक 'गुप्त समझौता' है, और उन्हें अपनी अंतरात्मा पर भरोसा है।  

3 फीट ऊंचे गणेश बने डॉक्टर: हौसले की मिसाल, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची संघर्ष गाथा

अहमदाबाद कहते हैं ना कि कद नहीं किरदार बड़ा होना चाहिए। गुजरात के गणेश बरैया ने इसे साबित भी किया है। महज 3 फीट की लंबाई और 20 किलो वजन के गणेश अब डॉक्टर बन गए हैं। योग्यता के बावजूद कद कम होने की वजह से गणेश को सुप्रीम कोर्ट तक जंग लड़नी पड़ी। लेकिन ऊंची से ऊंची बाधा को पार करते हुए गणेश अपने मंजिल तक पहुंच गए हैं। अब उन्हें मेडिकल ऑफिसर के रूप में तैनाती मिल गई है। 25 साल के बरैया जन्म से ही बैनेपन के शिकार हैं। जिसके कारण उन्हें चलने-फिरने से संबंधित 72% विकलांगता है। चुनौती सिर्फ शरीर की कमजोरी नहीं आर्थिक किल्लत भी थी। भावनगर के गोरखी गांव में जन्मे गणेश 8 भाई बहन हैं। शारीरिक रूप से गणेश जितने कमजोर थे, मानसिक रूप से उतने ही मजबूत और तेज। बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी गणेश ने 12वीं में 87 फीसदी अंक लाकर सबको चौंका दिया था। लेकिन यह शुरुआत भर थी। इसके बाद उन्होंने नीट की परीक्षा भी पास कर ली। लेकिन विकलांगताओं की वजह से 2018 में गुजरात सरकार ने उन्हें एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन देने से इनकार कर दिया था। कद की वजह से आई रुकावट से गणेश ने हार नहीं मानी। स्कूल के प्रिंसिपल की मदद से गणेश ने जिला कलेक्टर और शिक्षा मंत्री तक गुहार लगाई। इसके बाद वह अपनी समस्य लेकर गुजरात हाई कोर्ट पहुंचे। हाई कोर्ट से निराशा मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। देश की सर्वोच्च अदालत ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए एमबीबीएस में दाखिले का आदेश दिया। इसके बाद 2019 में उन्हें एमबीबीएस में दाखिला मिला। डॉ. बरैया ने पिछले साल न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ अपनी कहानी साझा करते हुए कहा था, '12वीं पास करने और एमबीबीएस में दाखिले के लिए नीट परीक्षा क्वालिफाई करने के बाद जब मैंने फॉर्म भरा तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की समिति ने मेरी लंबाई के आधार पर मुझे खारिज कर दिया। उनका कहना था कि मेरी कम लंबाई के कारण मैं आपातकालीन मामलों को संभाल नहीं पाऊंगा। फिर मैंने नीलकंठ विद्यापीठ के प्रिंसिपल डॉ. दलपत भाई कटारिया और रेवसीश सर्वैया से इस बारे में बात की और पूछा कि हम इसके लिए क्या कर सकते हैं।' गणेश ने आगे कहा, 'उन्होंने मुझे भावनगर कलेक्टर और गुजरात के शिक्षा मंत्री से मिलने को कहा। भावनगर कलेक्टर के निर्देश पर हमने यह केस गुजरात हाई कोर्ट ले जाने का फैसला किया। हमारे साथ दो अन्य उम्मीदवार भी थे जो दिव्यांग थे… हम हाई कोर्ट में केस हार गए, लेकिन फिर हमने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देने का निश्चय किया।'

व्हाइट हाउस फायरिंग: रहमानुल्लाह लकनवाल का खतरनाक हमला, ट्रंप ने अमेरिका में अफगानों की एंट्री पर रोक लगाई

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास वाइट हाउस के सामने बुधवार को हुई गोलीबारी ने पूरे अमेरिका में सनसनी फैला दी है। शूटर ने वहां पर तैनात दो नेशनल गार्ड के सदस्यों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। वाइट हाउस के मुताबिक दोनों सदस्यों को जानलेवा चोटें आई हैं, दोनों ही अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। वहीं,तैनात दूसरे नेशनल गार्ड्स की तरफ से की गई फायरिंग में आरोपी को भी गोली लगी है, हालांकि वह खतरे से बाहर है। उसे कस्टडी में रखा गया है। घटना के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस पर अपना गुस्सा निकालते हुए आरोपी को जानवर कहा। वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस से कुछ ही दूरी पर बुधवार दोपहर नेशनल गार्ड के दो जवानों को गोली मार दी गई. यह हमला दोपहर फरागट मेट्रो स्टेशन के पास 17वीं और आई स्ट्रीट के कोने पर हुआ. दोनों जवानों की हालत गंभीर बनी हुई है. हमलावर भी मुठभेड़ में घायल हुआ और उसे भारी सुरक्षा के बीच स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है. रहमानुल्लाह लाकनवाल ने चलाई गोली कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुसार संदिग्ध की पहचान रहमानुल्लाह लाकनवाल के रूप में हुई है, जो 29 वर्षीय अफगान नागरिक है. वह साल 2021 में अमेरिका में दाखिल हुआ था. शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि उसने अकेले ही इस हमले को अंजाम दिया. हालांकि उसके पहचान संबंधी कुछ पहलुओं की अभी भी पुष्टि की जा रही है. दो नेशनल गार्ड्स सदस्यों के साथ वाइट हाउस के बाहर हुई इस घटना ने पूरे अमेरिका में रोष है। सीबीएस न्यूज के अनुसार शूटर की पहचान अफगान मूल के 29 बर्षीय रहमानुल्लाह लकनवाल के रूप में हुई है। आरोपी 2021 में बाइडन प्रशासन की नीति के तहत अमेरिका आया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफबीआई इस मामले की जांच आतंकी हमले के रूप में कर रही है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर की वायरल हो रही है, जिसे कथित तौर पर वाइट हाउस शूटिंग के आरोपी की बताई जा रही है। 'ऑपरेशन एलाइज वेलकम' के तहत ली अमेरिका में एंट्री इस मामले को अब FBI संभावित आतंकी हमले के रूप में जांच रही है. वहीं Department of Homeland Security का कहना है कि संदिग्ध 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिका आया था और उसने 'ऑपरेशन एलाइज वेलकम' के तहत एंट्री ली थी, जिसके जरिए अफगान नागरिकों को शरण दी गई थी. ट्रंप ने बताया 'आतंकी हमला' घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'आतंकी हमला' करार दिया है. उन्होंने वॉशिंगटन डीसी की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त 500 सैनिकों को तैनात करने का निर्देश दिया है. साथ ही ट्रंप ने कहा है कि 2021 में अफगानिस्तान से जिन लोगों को अमेरिका में प्रवेश दिया गया था, उनकी दोबारा गहन जांच की जानी चाहिए. White House ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर नेशनल गार्ड और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रति समर्थन जताया और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की है. फिलहाल हमले के पीछे की साजिश, मकसद और आतंकी संबंधों की जांच जारी है. 'अफगानिस्तान धरती पर बना एक नरक' देर रात दिए गए अपने संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती जो बाइडेन पर जमकर हमला बोला. ट्रंप ने दावा किया कि संदिग्ध को सितंबर 2021 में बाइडेन सरकार 'नरक जैसे अफगानिस्तान' से अमेरिका लेकर आई थी. ट्रंप ने कहा, 'डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को पूरा भरोसा है कि हिरासत में लिया गया संदिग्ध एक विदेशी नागरिक है, जो अफगानिस्तान से अमेरिका आया था. अफगानिस्तान धरती पर बना एक नरक है.' इससे पहले दिन में अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने संदिग्ध हमलावर को 'जानवर' बताया और कहा कि उसे इसकी 'बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी'. उन्होंने हमलावर को काबू में करने वाले नेशनल गार्ड के जवानों की सराहना भी की. राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि बाइडेन सरकार के कार्यकाल में अमेरिका में आए सभी अफगान नागरिकों की दोबारा जांच होनी चाहिए. उन्होंने शरणार्थियों को 'हमारे अस्तित्व के लिए जोखिम' बताया. 'अकेले और अचानक किया हमला' मेट्रोपॉलिटन पुलिस डिपार्टमेंट में कार्यकारी सहायक प्रमुख जेफरी कैरोल ने कहा कि यह हमला 'अचानक और पूरी तरह से जानबूझकर किया गया' प्रतीत होता है. उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि यह एक अकेला हमलावर था, जिसने अचानक हथियार उठाकर नेशनल गार्ड के जवानों पर घात लगाकर हमला किया.' कैरोल ने बताया कि हमलावर ने पहले गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस और गार्ड के जवान हरकत में आए. हमलावर को नेशनल गार्ड, मेट्रोपॉलिटन पुलिस डिपार्टमेंट, सीक्रेट सर्विस और मेट्रो ट्रांजिट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जल्दी ही हिरासत में ले लिया गया. इन एजेंसियों के कई जवान घटना के समय पहले से ही मौके के आसपास मौजूद थे, जब गोलियों की आवाज सुनाई दी. अफगान नागरिकों से जुड़े सभी इमिग्रेशन आवेदन सस्पेंड U.S. Citizenship and Immigration Services (USCIS) ने घोषणा की है कि वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड के जवानों पर अफगान नागरिक की ओर से किए गए हमले के बाद, अफगान नागरिकों से जुड़े सभी इमिग्रेशन आवेदनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जा रहा है. यह फैसला वॉशिंगटन डीसी में हुई आज की घटना के बाद लिया गया है. क्या था मकसद? राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास के सामने हुई इस गोलीबारी को लेकर डीसी के मेयर म्यूरिल बाउजर ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी ने यह टार्गेटेड अटैक किया था। घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक आरोपी वहां ऐसे ही टहलते हुए आकर एक मोड़ पर रुका और उसने हैंडगन निकालर फायरिंग करनी शुरू कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फायरिंग का शिकार दोनों नेशनल गार्ड्स सदस्यों के सिर में गोली लगी है, जिससे उनकी हालत गंभीर है। इस गोलीबारी के बाद आसपास मौजूद अन्य सदस्यों ने तुरंत ही वहां आकर हालात को काबू में किया। एफबीआई प्रमुख काश पटेल ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर जानकारी ली। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आरोपी को हिरासत में लिया गया है। मामले की जांच जारी है। उसका क्या मकसद था इसके बारे में फिलहाल जांच के बाद ही पता चलेगा। अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों संग किया काम एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने … Read more

ताई पो जिले में बड़ा हादसा: आवासीय इमारतों में आग, कई अपार्टमेंट जलकर खाक—44 मृत, 300 के करीब लापता

हांगकांग  हॉन्ग कॉन्ग के ताई पो जिले में दोपहर गगनचुंबी इमारतों में अचानक भीषण आग लग गई. आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है. खबर है कि आग पर काबू पा लिया गया. हालांकि आग पूरी तरह से बुझी नहीं है. इस हादसे में 44 लोगों की मौत होने की खबर है. वहीं बताया जा रहा है कि सैकड़ों लोग अभी भी लापता है. बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया गया है. इस बीच पुलिस प्रशासन ने तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया है. हांगकांग के एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के कई ऊंचे अपार्टमेंट ब्लॉक में भयानक आग लग गई. इस हादसे में कम से कम 44 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग लापता हैं. आग भड़कने की वजह से दमकलकर्मियों को ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों तक पहुंचने में मुश्किलें हुई. अधिकारियों ने गुरुवार सुबह बताया कि इस घटना के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के दो डायरेक्टर और एक कंसल्टेंट शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक जांच करने वालों को अपार्टमेंट में कुछ खिड़कियों को जाम करने वाले ज्वलनशील बोर्ड लगे मिले जिसपर कंपनी का नाम लिखा था. पुलिस ने उन पर बड़ी लापरवाही का आरोप लगाया. अधिकारियों को यह भी शक है कि साइट पर मौजूद दूसरा कंस्ट्रक्शन मटीरियल जैसे सुरक्षात्मक जाल, कैनवस शीट और प्लास्टिक कवरिंग जरूरी सेफ्टी स्टैंडर्ड को पूरा नहीं करते थे. कॉम्प्लेक्स के आठ टावरों में से सात जहाँ कई बुजुर्ग लोग रहते थे. आग लगने के कई घंटों बाद भी जल रहे थे. माना जा रहा है कि यह आग हांगकांग में लगभग 30 सालों में सबसे खतरनाक आग है. इसने 1996 की बदनाम गार्ले बिल्डिंग आग को भी पीछे छोड़ दिया जिसमें 41 लोग मारे गए थे. 700 से ज्यादा फायरफाइटर्स मौके पर मौजूद घटना स्थल पर 700 से अधिक फायरफाइटर्स लगातार आग बुझाने और लोगों को बाहर निकालने में जुटे हैं. कई जगहों पर हाइड्रॉलिक सीढ़ियों के ज़रिये ऊंची मंजिलों पर पानी की बौछारें डाली जा रही हैं. लाइव फुटेज में दिखाई दिया कि तेज आग और घने धुएं के बावजूद राहतकर्मी जान जोखिम में डालकर अंदर प्रवेश कर रहे हैं. ताइ पो जिले में लगी आग लगभग 16 घंटे तक रही. आग पर काबू पाने वाले कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित तीन टावरों पर फोकस रखा. उनका कहना था कि चार दूसरी इमारतों में लगी आग पर काबू पा लिया गया है, हालांकि आग पूरी तरह बुझी नहीं हैं. इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि आग इतनी तेजी से कैसे फैली. रिपोर्ट के मुताबिक, फायर सर्विसेज के डायरेक्टर एंडी येउंग ने कहा कि क्रू ने देखा कि कई यूनिट्स में पॉलीस्टाइनिन बोर्ड खिड़कियों को ब्लॉक कर रहे थे. इस देखकर वे अचंभे में रहे. उन्होंने कहा, 'ये पॉलीस्टाइनिन बोर्ड बहुत ज्यादा आग पकड़ने वाले होते हैं और आग बहुत तेजी से फैली.' येउंग ने कहा, 'उनकी मौजूदगी अजीब थी, इसलिए हमने आगे की जांच के लिए घटना को पुलिस को भेज दिया है.' हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन ली ने कहा कि शहर की हाउसिंग अथॉरिटी यह भी जांच करेगी कि रिनोवेशन के दौरान इमारतों पर लगी प्रोटेक्टिव लेयर आग से बचाने के लिए काफी थीं या नहीं. उन्होंने कहा, 'हम कानून और नियमों के हिसाब से उन्हें जिम्मेदार ठहराएंगे.' अधिकारी बांस के मचान की भूमिका पर भी गौर कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर हांगकांग की इमारतों को कंस्ट्रक्शन या मरम्मत के काम के दौरान इस्तेमाल किया जाता है, इसे पहले भी आग फैलने का एक कारण बताया गया है.

सरकार को नीति आयोग की चेतावनी—अधिकारियों का लाइसेंस मांगना और इंस्पेक्शन राज रोकें

नई दिल्ली देश में व्यापार शुरू करना और चलाना अक्सर कागज़ी झंझट, परमिट, लाइसेंस और अचानक आने वाले निरीक्षणों (Inspection) की वजह से लोगों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है. इसी परेशानी को खत्म करने के लिए नीति आयोग (NITI Aayog) की एक उच्च स्तरीय कमिटी ने बड़ा कदम सुझाया है, जो इंस्पेक्शन राज का खात्मा कर देगा. नीति आयोग की प्लानिंग कहती है कि लोगों और कारोबारियों पर भरोसा दिखाते हुए नियमों को आसान बनाया जाए, ताकि व्यापार बढ़े, सरकारी दखल कम हो और देश की अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत बन सके. अब जानते हैं कि असल में इस प्रस्ताव में क्या है और लोगों को इससे क्या फायदा होगा? नीति आयोग की एक उच्च स्तरीय समिति ने देश के नियम-कानूनों में बड़ा सुधार लाने की सलाह दी है. इस कमेटी का नेतृत्व सदस्य और पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा (Rajiv Gauba) कर रहे हैं. समिति का मानना है कि देश में वर्षों से चली आ रही लाइसेंस, परमिट और NOC की भारी-भरकम व्यवस्था अब लोगों के लिए बोझ बन चुकी है. इसलिए रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इन अनावश्यक मंज़ूरियों को काफी हद तक खत्म किया जाए और इंस्पेक्टर राज का अंत हो. उनका कहना है कि जहां कानून स्पष्ट रूप से मना नहीं करता, वहां अनुमति की ज़रूरत भी नहीं होनी चाहिए. छोटे-मोटे काम बिना अनुमति लिए हों हमारी सहयोगी वेबसाइट मनीकंट्रोल ने इस पर एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट छापी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने यह भी साफ किया कि लाइसेंस तभी मांगा जाए जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, जन स्वास्थ्य, पर्यावरण या बहुत बड़े सार्वजनिक हित से जुड़ा हो. छोटे-मोटे कामों के लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. इससे आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर पड़ने वाला समय और पैसों का बोझ काफी कम होगा. रिपोर्ट में बताया गया कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी बिल्कुल आसान होनी चाहिए. यह केवल रिकॉर्ड रखने या डेटा मैनेजमेंट के लिए हो, न कि लोगों को रोके रखने के लिए. खुद से रजिस्ट्रेशन (Self-registration) करने का विकल्प सामान्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए, और लाइसेंस की वैधता सामान्य तौर पर हमेशा के लिए (perpetual) हो. केवल खास परिस्थितियों, जैसे सुरक्षा या पर्यावरण, में ही 5 से 10 साल की वैधता रखी जा सकती है. अधिकारी अचानक फैक्ट्री में पहुंचकर जांच न करें इंस्पेक्शन को लेकर समिति का सुझाव सबसे अलग और आधुनिक है. उनका कहना है कि अब अधिकारी अचानक दुकान या फैक्ट्री में पहुंचकर जांच नहीं करें. इसके बजाय कंप्यूटर आधारित सिस्टम से रैंडम सिलेक्शन की मदद ली जाए, और जांच का काम एक्रेडिटेड थर्ड पार्टी को दिया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे. रिपोर्ट ने यह भी आग्रह किया कि सरकार साल में एक तय तारीख रखे, जिस दिन नियमों में बदलाव लागू हों. इससे कारोबारियों को अचानक नियम बदलने से बचाया जा सके. नई नीतियों को लागू करने से पहले सभी हितधारकों से बातचीत करना और उन्हें तैयारी का समय देना भी जरूरी बताया गया है. एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अब सरकार सभी नियमों का रेगुलेटरी इम्पैक्ट असेसमेंट करेगी. इसका सीधा मतलब है कि किसी नए नियम को लागू करने से पहले यह देखा जाएगा कि उसे मानने में कारोबारियों पर कितना खर्च आएगा और सरकार को उसे लागू कराने में कितनी मेहनत और लागत लगेगी. इससे अनावश्यक और महंगे नियम बनने से बचा जा सकेगा. सजा को लेकर भी बदलावों का सुझाव सजा को लेकर भी बड़े बदलाव सुझाए गए हैं. समिति का स्पष्ट कहना है कि “छोटी तकनीकी गलतियों पर जेल या आपराधिक सजा नहीं होनी चाहिए.” जेल या भारी जुर्माना केवल उन्हीं मामलों में हो जहां मानव स्वास्थ्य, राष्ट्रीय सुरक्षा या पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है. इसके अलावा सभी पुराने कानूनों में मौजूद सजा संबंधी धाराओं की आधुनिक जरूरतों के अनुसार समीक्षा की जानी चाहिए. सबसे अहम बदलाव है कि पूरी व्यवस्था का डिजिटल रूप से सक्षम होना. यानी सभी दस्तावेज़ ऑनलाइन जमा हों, विभागों के बीच डेटा साझा किया जा सके, और एक बार दिया गया डेटा दोबारा न मांगा जाए. इसके लिए मंत्रालयों को API जारी करनी होंगी, ताकि सरकारी डेटाबेस आसानी से एक-दूसरे से जुड़ सकें. रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी सुझावों का मकसद सरकार और नागरिकों के बीच विश्वास बढ़ाना है. समिति का दावा है कि अगर इन सुधारों को अपनाया गया तो देश में कारोबार करना पहले से कहीं आसान हो जाएगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और आधुनिक नियामक ढांचा तैयार होगा जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार देगा.