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ड्रग तस्करी पर करारा प्रहार: मुंबई एयरपोर्ट से 33.42 किलो हाइड्रोपोनिक वीड बरामद

मुंबई  मुंबई एयरपोर्ट कस्टम्स ने 11 से 15 दिसंबर के दरमियानी बैंकॉक से आए 11 यात्रियों से 33.42 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड जब्त किया। पहले से मिली सूचना के आधार पर कस्टम्स ने इस सभी यात्रियों को गिरफ्तार किया है। एयरपोर्ट कमिश्नरेट, मुंबई कस्टम्स जोन-3 के अधिकारियों ने रूपरेखा के आधार पर यह कार्रवाई की और इस मामले में कुल 8 गिरफ्तारियां की हैं। जानकारी के अनुसार, इनमें से चार मामलों में 5 यात्रियों के पास से कुल 16.482 किलोग्राम संदिग्ध नशीले पदार्थ (हाइड्रोपोनिक वीड) बरामद किया गया। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 16.482 करोड़ रुपए बताई जा रही है। यात्रियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, दूसरे मामले में बैंकॉक से अलग-अलग फ्लाइट्स से आए 6 यात्रियों को 16.940 किलोग्राम संदिग्ध हाइड्रोपोनिक वीड के साथ गिरफ्तार किया गया, जिसकी अवैध बाजार में कीमत लगभग 16.940 करोड़ रुपए है। कस्टम्स अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई सूचना पर की गई, जिससे इन नशीले पदार्थों की तस्करी की कोशिश को समय रहते नाकाम किया जा सका। यह कार्रवाई कस्टम्स और नारकोटिक्स विभाग की संयुक्त सख्ती का परिणाम है, जो अवैध नशीले पदार्थों के प्रवेश को रोकने के लिए लगातार सतर्क रहते हैं। वहीं, इससे पहले मुंबई एयरपोर्ट कस्टम्स ने 10 और 11 दिसंबर की दरमियानी रात एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बैंकॉक से आए पांच यात्रियों से कुल 42.898 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड जब्त किया था। मुंबई कस्टम्स जोन-3 के एयरपोर्ट कमीश्नरेट की टीम ने गुप्त सूचना और प्रोफाइलिंग के आधार पर चार अलग-अलग मामलों में यह कार्रवाई की थी। बरामद किए गए प्रतिबंधित मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत करोड़ों रुपए आंकी गई थी। कस्टम्स के अधिकारियों के अनुसार, प्रोफाइलिंग के आधार पर तीन अलग-अलग मामलों में तीन यात्रियों से कुल 33.888 किलोग्राम संदिग्ध एनडीपीएस पदार्थ, यानी हाइड्रोपोनिक वीड, जब्त किया गया था। इसकी कीमत लगभग 33.888 करोड़ रुपए थी। तीनों यात्री बैंकॉक से विभिन्न उड़ानों के जरिए मुंबई पहुंचे थे। पूछताछ और सबूत के आधार पर उन्हें नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था।

डिप्लोमेसी में अपनापन: इथियोपिया पहुंचे पीएम मोदी, PM अली ने एयरपोर्ट से होटल तक खुद कार चलाकर किया स्वागत

इथियोपिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की चार दिवसीय यात्रा के दूसरे चरण के तहत मंगलवार को इथियोपिया पहुंचे। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने अदीस अबाबा हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गले लगाकर स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को होटल तक अपनी गाड़ी से पहुंचाया। रास्ते में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को विज्ञान संग्रहालय और मैत्री पार्क भी दिखाया। गौरतलब है कि पीएम मोदी का यह पहला इथियोपिया दौरा है।   बता दें कि इथियोपिया की अपनी पहली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह 'लोकतंत्र की जननी' के रूप में भारत की यात्रा और 'ग्लोबल साउथ' के लिए भारत-इथियोपिया साझेदारी क्या मायने रखती है विषय पर अपने विचार साझा करेंगे। पीएम मोदी इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली के साथ द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर व्यापक चर्चा भी करेंगे। प्रधानमंत्री की इथियोपिया यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, यह यात्रा ‘ग्लोबल साउथ’ में साझेदार के रूप में भारत और इथियोपिया के बीच गहरी दोस्ती और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने की दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि होगी। गौरतलब है कि मोदी इथियोपिया की दो दिवसीय यात्रा के दौरान प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे।

कश्मीर में बर्फीली ठंड का कहर, पारा शून्य से नीचे, आम जनजीवन प्रभावित

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर कड़ाके की ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कश्मीर घाटी के अधिकांश इलाकों में रात का तापमान फ्रीजिंग प्वाइंट से नीचे चला गया है, जबकि ऊँचाई वाले क्षेत्रों में सर्दी का असर और भी तेज़ बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस 1.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। काज़ीगुंड में पारा माइनस 2.2 डिग्री रहा, जबकि पर्यटन स्थल पहलगाम में न्यूनतम तापमान माइनस 2.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। कुपवाड़ा में माइनस 1.8 डिग्री, कोकेरनाग में माइनस 0.6 डिग्री, जबकि गुलमर्ग में तापमान फ्रीजिंग प्वाइंट से थोड़ा ऊपर 0.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। घाटी में सबसे अधिक ठंड पंपोर और पुलवामा में दर्ज की गई, जहाँ न्यूनतम तापमान माइनस 4.0 डिग्री सेल्सियस रहा। शोपियां में माइनस 3.8 डिग्री, अनंतनाग में माइनस 3.3 डिग्री, बारामूला में माइनस 2.9 डिग्री, बडगाम में माइनस 2.8 डिग्री, बांदीपोरा में माइनस 2.2 डिग्री और अवंतीपोरा में माइनस 2.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। श्रीनगर एयरपोर्ट पर भी रात का तापमान माइनस 2.0 डिग्री सेल्सियस रहा। उधर, ज़ोजिला दर्रे पर भीषण ठंड का दौर जारी है, जहाँ न्यूनतम तापमान माइनस 17.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, ज़ेथन राफ़ियाबाद में मौसम केंद्र के काम न करने के कारण तापमान का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सका। इस बीच, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राहत की उम्मीद कम जताई है। विभाग के अनुसार, 20 दिसंबर तक पूरे जम्मू-कश्मीर में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा।

2025 बना सत्ता परिवर्तन का साल, तख्ता पलट और सरकारों के पतन से हिली दुनिया

नेपाल साल 2025 वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद अस्थिर और उथल-पुथल भरा रहा। दुनिया के कई देशों में सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं। कहीं जन आंदोलन, कहीं संसद में बहुमत की हार, तो कहीं सीधे सैन्य तख्तापलट ने सत्ता की तस्वीर बदल दी। नेपाल नेपाल में 2025 राजनीतिक संकट का सबसे बड़ा उदाहरण बना। भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ युवा पीढ़ी (Gen-Z) के आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। आगजनी और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दबाव में केपी शर्मा ओली की सरकार को झुकना पड़ा। नेपाल में बीते करीब 17 वर्षों में कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई है।   पुर्तगाल पुर्तगाल में प्रधानमंत्री लुईस मोंटेनग्रो की दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार मार्च 2025 में संसद में विश्वास मत हार गई। विपक्ष के समर्थन न मिलने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद राष्ट्रपति ने संसद भंग कर दी और 18 मई 2025 को दोबारा चुनाव कराए गए। बेनिन पश्चिम अफ्रीकी देश बेनिन में 7 दिसंबर 2025 को सैन्य तख्तापलट हुआ। खुद को मिलिट्री कमेटी फॉर रिफाउंडेशन (CMR) बताने वाले सैनिक समूह ने राष्ट्रपति पैट्रिस टैलोन को हटाने का ऐलान किया। यह तख्तापलट ऐसे समय हुआ जब देश राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी कर रहा था। जर्मनी  जर्मनी में ओलाफ शोल्ज की गठबंधन सरकार संसद में बहुमत खो बैठी। सोशल डेमोक्रेट्स, ग्रीन्स और फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आए। विश्वास प्रस्ताव हारने के बाद सरकार कई अहम विधेयक पास नहीं कर सकी, जिससे राजनीतिक संकट गहराया। जापान जापान में जुलाई 2025 में हुए निचले सदन के चुनाव में सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) को हार का सामना करना पड़ा। इसकी जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री शिगेरु इशीबा ने इस्तीफा दिया। बाद में एलडीपी के ही साने ताकाइची को नया प्रधानमंत्री चुना गया।  

बड़ा हादसा टला: तेज झटके से रुकी केबल कार, 15 पर्यटक घायल, मौके पर अफरा-तफरी

सैन फ्रांसिस्को  सैन फ्रांसिस्को में केबल कार अचानक रुकी, 15 लोग घायल सैन फ्रांसिस्को, 16 दिसंबर (एपी) अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में सोमवार को एक केबल कार के अचानक रुक जाने से उसमें सवार कम से कम 15 लोग घायल हो गए। सैन फ्रांसिस्को के अग्निशमन विभाग ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि घायलों में से दो को ज्यादा चोटें आईं, जिसके चलते उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, जबकि 11 अन्य को “मामूली दर्द और खिंचाव” की शिकायत थी, जिसके मद्देनजर उन्हें मौके पर ही जरूरी उपचार प्रदान किया गया। केबल कार का संचालन करने वाली सैन फ्रांसिस्को नगर परिवहन एजेंसी (एसएफएमटीए) ने कहा कि वह घटना की सक्रिय रूप से जांच कर रही है। हालांकि, एजेंसी ने केबल कार के अचानक रुक जाने के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की। एसएफएमटीए ने एक बयान में कहा, “केबल कार से यात्रा करने वाले सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हम घटना की गहन जांच करेंगे।” 

यूएस प्रेसिडेंट ट्रंप ने BBC के खिलाफ मानहानि का केस दायर किया, 10 बिलियन डॉलर का दावा

वॉशिंगटन .यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने BBC से $10 बिलियन के हर्जाने के लिए केस किया. इसमें ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर पर मानहानि के साथ-साथ गुमराह करने वाले और गलत ट्रेड प्रैक्टिस का आरोप लगाया गया. 33 पेज के मुकदमे में BBC पर प्रेसिडेंट ट्रंप की "झूठी, बदनाम करने वाली, गुमराह करने वाली, बेइज्जत करने वाली, भड़काऊ और गलत इरादे से की गई तस्वीर" दिखाने का आरोप है. इसके साथ ही इसे 2024 के अमेरिकी प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में "दखल देने और उसे प्रभावित करने की खुली कोशिश" बताया गया है.     इसमें BBC पर "प्रेसिडेंट ट्रंप के 6 जनवरी, 2021 के भाषण के दो बिल्कुल अलग हिस्सों को एक साथ जोड़ने" का आरोप लगाया गया है, ताकि "जानबूझकर प्रेसिडेंट ट्रंप ने जो कहा उसका मतलब गलत तरीके से पेश किया जा सके."BBC ने पिछले महीने 6 जनवरी के भाषण में बदलाव को लेकर ट्रंप से माफी मांगी थी. लेकिन ट्रंप के कानूनी कार्रवाई की धमकी देने के बाद, पब्लिक फंडेड ब्रॉडकास्टर ने उन दावों को खारिज कर दिया कि उसने ट्रंप की बदनामी की है.इसको लेकर BBC के चेयरमैन समीर शाह ने इसे "फैसले की गलती" कहा था. इसके कारण BBC के टॉप एग्जीक्यूटिव और उसके न्यूज हेड ने इस्तीफा दे दिया था. यह भाषण ट्रंप के कुछ सपोर्टर्स के U.S. कैपिटल पर धावा बोलने से पहले हुआ था, जब कांग्रेस 2020 के चुनाव में प्रेसिडेंट-इलेक्ट जो बाइडन की जीत को सर्टिफाई करने वाली थी, जिसके बारे में ट्रंप ने झूठा आरोप लगाया था कि वह उनसे चुराई गई थी. BBC ने 2024 के U.S. प्रेसिडेंशियल चुनाव से कुछ दिन पहले एक घंटे की डॉक्यूमेंट्री, जिसका टाइटल "ट्रंप: ए सेकंड चांस?" था, ब्रॉडकास्ट की थी. इसमें 2021 के भाषण के दो हिस्सों से तीन कोट्स को एक साथ जोड़ा गया था, जो लगभग एक घंटे के अंतर पर दिए गए थे, जो एक ऐसा कोट लग रहा था, जिसमें ट्रंप ने सपोर्टर्स से उनके साथ मार्च करने और "पूरी ताकत से लड़ने" की अपील की थी. काटे गए हिस्सों में एक हिस्सा ऐसा भी था, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि वह चाहते हैं कि सपोर्टर्स शांति से प्रदर्शन करें. ट्रंप ने मुकदमें में क्या-क्या लगाए आरोप? मांफी मांगने लेकिन मानहानि की बात खारिज करने को लेकर ट्रंप बीबीसी पर भड़क गए और उन्होंने कंपनी पर मानहानि का मुकदमा कर दिया है। बीबीसी पर 33 पन्नों के इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने ट्रंप का झूठा, मानहानिकारक, भ्रामक, अपमानजनक, भड़काऊ और दुर्भावनापूर्ण चित्रण किया। इसके अलावा मुकदमें यह भी आरोप लगाया गया है कि 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कंपनी ने हस्तक्षेप करने तथा उसे प्रभावित करने की निर्लज्ज कोशिश की थी। मुकदमें मे बीबीसी पर राष्ट्रपति ट्रंप के छह जनवरी, 2021 के भाषण के दो पूरी तरह से अलग-अलग अंशों को एक साथ जोड़कर प्रसारित करने का आरोप भी लगाया गया। बातों का अर्थ गलत तरीके से पेश करने की कोशिश मानहानि के इस केस में दावा किया गया कि ट्रंप के भाषण की एडिटिंग इसलिए की गई, जिससे उनके बातों का अर्थ गलत तरीके से पेश किया जा सके और उनकी छवि का नुकसान पहुंचाया जा सके। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि ट्रंप ने सोमवार से पहले ही यह कह दिया था कि वे बीबीसी पर उनके मुंह में अपने शब्द डालने की वजह से उसके खिलाफ मुकदमा कर रहे हैं। कौन से भाषण को लेकर है सबसे ज्यादा विवाद? बीबीसी पर ट्रंप के जिस भाषण को एडिट करके छवि खराब करने का आरोप है, ट्रंप ने वह भाषण उस समय दिया था, जब राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद उनके समर्थकों ने यूएस कैपिटल पर हमला बोल दिया था। यह वह समय था, जब अमेरिकी कांग्रेस राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को घोषित करते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी जो बाइडन को आधिकारिक विजेता बताने वाली थी। दूसरी ओर ट्रंप ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे और गलत तरीके से चुनाव के चोरी हो जाने की बात भी कही थी। 2024 के चुनाव से पहले रिलीज हुई थी डॉक्यूमेंट्री खास बात यह है कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले बीबीसी ने एक डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की थी। इसका टाइटल ‘ट्रंप: ए सेकेंड चांस?’ रखा गया था। इसमें ट्रंप के 2021 के तीन अलग-अलग भाषणों के हिस्सों को एक साथ जोड़कर पेश किया गया था। ये सभी भाषण के हिस्से कैपिटल हिल की हिंसा से संबंधित थे। इस एडिटिंग में बीबीसी द्वारा वो हिस्सा हटा दिया गया, जिसमें वे कैपिटल हिंसा को लेकर अपने समर्थकों से शांति की अपील कर रहे थे। कैपिटल हिल हिंसा का मामला क्या है? कैपिटल हिल हिंसा की बात करें तो ये मामला 6 जनवरी, 2021 का है। इस दिन रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की भीड़ ने अमेरिका की राजधानी में तोड़फोड़ कर दी थी। इसके चलते अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को बाधित कर दिया, जिसे चुनाव परिणामों को प्रमाणित करने के लिए बुलाया गया था। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन से हार गए थे। इस हमले का उद्देश्य एक वैध निर्वाचित राष्ट्रपति को पदभार ग्रहण करने से रोकना था, इसलिए इसे व्यापक रूप से विद्रोह या तख्तापलट का प्रयास माना गया था।  

भारत की 8% विकास दर, पीएम मोदी ने इनोवेशन संचालित नीतियों को श्रेय दिया

अम्मान   भारत-जॉर्डन बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तरफ बढ़ रहा है और देश की वृद्धि दर 8 प्रतिशत से अधिक है। यह उत्पादकता संचालित शासन और इनोवेशन संचालित नीतियों का नतीजा है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा समय में भारत में जॉर्डन के निवेशकों के लिए अवसर के नए दरवाजे खुले रहे हैं और यहां के निवेशक भारत में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जॉर्डन के बीच फार्मा और मेडिकल उपकरण क्षेत्र में अपार संभावनाएं है। आज हेल्थकेयर केवल एक सेक्टर नहीं रह गया है, बल्कि एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है। अगर भारतीय कंपनियां जॉर्डन में दवाएं और मेडिकल उपकरण बनाती हैं, तो इससे जॉर्डन के लोगों को तो फायदा होगी, बल्कि जॉर्डन अफ्रीका और पश्चिम एशिया के भी एक भरोसेमंद हब बन सकता है। निवेशक भारत में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा सकते हैं उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा समय में भारत में जॉर्डन के निवेशकों के लिए अवसर के नए दरवाजे खुले रहे हैं और यहां के निवेशक भारत में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा सकते हैं। भारत और जॉर्डन के बीच फार्मा और मेडिकल उपकरण क्षेत्र में अपार संभावनाएं पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जॉर्डन के बीच फार्मा और मेडिकल उपकरण क्षेत्र में अपार संभावनाएं है। आज हेल्थकेयर केवल एक सेक्टर नहीं रह गया है, बल्कि एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है। अगर भारतीय कंपनियां जॉर्डन में दवाएं और मेडिकल उपकरण बनाती हैं, तो इससे जॉर्डन के लोगों को तो फायदा होगी, बल्कि जॉर्डन अफ्रीका और पश्चिम एशिया के भी एक भरोसेमंद हब बन सकता है। आज की दुनिया ग्रीन ग्रोथ के बिना आगे नहीं बढ़ सकती रिन्यूएबल एनर्जी में देश में हुए विकास पर पीएम मोदी ने कहा कि आज की दुनिया ग्रीन ग्रोथ के बिना आगे नहीं बढ़ सकती है, क्योंकि क्लीन एनर्जी अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत सोलर, विंड, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज में भारत एक बड़े निवेशक के रूप में काम रहा है। जॉर्डन के पास भी इस सेक्टर में काफी संभावनाएं हैं, जिसे हम अनलॉक कर सकते हैं। साथ ही कहा कि इस प्रकार ऑटोमोबाइल और ईवी में भी कई संभावनाएं हैं और भारत किफायती ईवी और दोपहिया एवं सीएनजी मोबिलिटी में शीर्ष देशों में एक है और हमें ज्यादा से ज्यादा काम मिलकर करना चाहिए। रिन्यूएबल एनर्जी में देश में हुए विकास पर पीएम मोदी ने कहा कि आज की दुनिया ग्रीन ग्रोथ के बिना आगे नहीं बढ़ सकती है, क्योंकि क्लीन एनर्जी अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत सोलर, विंड, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज में भारत एक बड़े निवेशक के रूप में काम रहा है। जॉर्डन के पास भी इस सेक्टर में काफी संभावनाएं हैं, जिसे हम अनलॉक कर सकते हैं। साथ ही कहा कि इस प्रकार ऑटोमोबाइल और ईवी में भी कई संभावनाएं हैं और भारत किफायती ईवी और दोपहिया एवं सीएनजी मोबिलिटी में शीर्ष देशों में एक है और हमें ज्यादा से ज्यादा काम मिलकर करना चाहिए। दोनों देश की मजबूत विरासत पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जॉर्डन दोनों देश अपने कल्चर, अपनी हेरिटेज पर बहुत गर्व करते हैं। कल्चर और हेरिटेज टूरिज्म के लिए दोनों देशों में बहुत स्कोप है। दोनों देशों के इन्वेस्टर्स को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भारत में इतनी सारी फिल्में बनती हैं, उन फिल्मों की शूटिंग जॉर्डन में हो सकती है। ज्वाइंट फिल्म फेस्टिवल हों, इसके लिए भी जरूरी प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं। दोनों देश की मजबूत विरासत पर पीएम मोदी ने कही यह बात दोनों देश की मजबूत विरासत पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जॉर्डन दोनों देश अपने कल्चर, अपनी हेरिटेज पर बहुत गर्व करते हैं। कल्चर और हेरिटेज टूरिज्म के लिए दोनों देशों में बहुत स्कोप है। दोनों देशों के इन्वेस्टर्स को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भारत में इतनी सारी फिल्में बनती हैं, उन फिल्मों की शूटिंग जॉर्डन में हो सकती है। ज्वाइंट फिल्म फेस्टिवल हों, इसके लिए भी जरूरी प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं। (इनपुट-एजेंसी) 

SC में कैश कांड की एंट्री: जस्टिस यशवंत वर्मा ने जांच को दी चुनौती, याचिका पर सुनवाई होगी

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दे दी, जिसमें उन्होंने लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित जांच समिति की वैधता को चुनौती दी है। यह समिति जज पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने लोकसभा स्पीकर के कार्यालय तथा लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को नोटिस जारी किया और उनसे जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है। जांच समिति का गठन और पूरा मामला यह जांच समिति लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा 12 अगस्त 2025 को जजेस (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 की धारा 3(2) के तहत गठित की गई थी। समिति में शामिल सदस्य हैं:     सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार (अध्यक्ष),     मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव, -कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य। यह समिति 14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगने की घटना के बाद मिले जले हुए नकदी के बंडलों से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। आग बुझाने पहुंची दिल्ली फायर सर्विस और पुलिस कर्मियों ने जलें हुए नोटों के ढेर पाए थे, जिसके बाद भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। इस घटना के बाद जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल हाईकोर्ट इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया गया और उनकी न्यायिक जिम्मेदारियां छीन ली गईं। पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना द्वारा गठित एक इन-हाउस जांच समिति ने भी आरोपों में दम पाया और हटाने की सिफारिश की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज नहीं किया। इसके बाद 146 सांसदों (सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों से) द्वारा हस्ताक्षरित हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में स्वीकार किया गया, जिसके आधार पर जांच समिति बनी। हाल ही में, दिसंबर 2025 में समिति ने जस्टिस वर्मा को आरोपों का मेमो सौंपा और जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया। जस्टिस वर्मा की याचिका में मुख्य दलीलें जस्टिस वर्मा की याचिका में लोकसभा स्पीकर के 12 अगस्त 2025 के उस निर्णय को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है, जिसमें केवल लोकसभा स्पीकर ने एकतरफा समिति गठित की। याचिका में कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 का उल्लंघन है तथा जजेस (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 की निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत है। याचिका के अनुसार, जब दोनों सदनों में जज के हटाने का प्रस्ताव पेश किया जाता है या स्वीकार किया जाता है, तो जांच समिति का गठन लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन द्वारा संयुक्त रूप से किया जाना चाहिए, न कि केवल लोकसभा स्पीकर द्वारा एकतरफा। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि प्रस्ताव दोनों सदनों में पेश होने की स्थिति में समिति का गठन संयुक्त रूप से अनिवार्य है। कानूनी प्रावधान जजेस (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के अनुसार, जज के हटाने (इंपिचमेंट) का प्रस्ताव किसी एक सदन में स्वीकार होने पर स्पीकर या चेयरमैन (जैसा लागू हो) जांच समिति गठित करते हैं। यदि दोनों सदनों में एक ही दिन प्रस्ताव पेश होता है और दोनों में स्वीकार होता है, तो समिति संयुक्त रूप से गठित की जाती है। वर्तमान मामले में प्रस्ताव केवल लोकसभा में स्वीकार हुआ, इसलिए स्पीकर द्वारा एकतरफा गठन कानूनी रूप से सही प्रतीत होता है, लेकिन याचिका इसी बिंदु पर चुनौती दे रही है।

मेसी विवाद में गई कुर्सी, बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने दिया इस्तीफा

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप विश्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह कदम 13 दिसंबर को युवा भारती क्रीड़ांगन में लियोनेल मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुए हंगामे के बाद उठाया गया है। इस घटना ने देश और दुनिया में कोलकाता की बदनामी कराई। अरूप विश्वास ने हाथ से लिखा पत्र लिखकर पद से मुक्त करने का अनुरोध किया है। यह पत्र सोशल मीडिया पर सामने आया है। हालांकि अरूप विश्वास या तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। दरअसल पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने खेल मंत्री से कहा था कि वह मैसी के कार्यक्रम में हुए हंगामे की जिम्मेदारी लें या इस्तीफा दें। इसके बाद खेल मंत्री ने यह कदम उठाया है। अरूप विश्वास ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा यह घटना 13 दिसंबर को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (जिसे सॉल्ट लेक स्टेडियम के नाम से भी जाना जाता है) में हुई थी। लियोनेल मेसी के कार्यक्रम में काफी अव्यवस्था फैल गई थी। इस हंगामे के कारण कोलकाता की काफी किरकिरी हुई। इसी घटना से आहत होकर खेल मंत्री अरूप विश्वास ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ लेटर अरूप विश्वास का यह हाथ से लिखा हुआ पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने मंगलवार को यह जानकारी दी। घोष ने एक फेसबुक पोस्ट में बिस्वास की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखे गए इस्तीफे की प्रति शेयर की। इसमें उन्होंने राज्य के खेल मंत्री के रूप में अपने दायित्वों से मुक्त करने का अनुरोध किया है। घोष की पोस्ट में क्या? कुणाल घोष ने अपनी पोस्ट में कहा कि खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर खेल विभाग की जिम्मेदारी से मुक्त करने का अनुरोध किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस कदम का कारण मेस्सी के कार्यक्रम में उत्पन्न हुई आराजकता से उपजे विवाद को बताया गया है। हालांकि, तृणमूल नेता द्वारा साझा किया गया पत्र बिस्वास के आधिकारिक लेटरहेड पर नहीं था। इससे राजनीतिक हलकों में इसकी औपचारिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि ममता बनर्जी सरकार 13 दिसंबर को मशहूर फुटबॉलर मेसी के कार्यक्रम दौरान हुई अव्यवस्था, भीड़ के कुप्रबंधन और सुरक्षा में चूक की घटनाओं से हुई आलोचनाओं को कितनी गंभीरता से ले रही है. सरकार के सूत्रों ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिस्वास का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और प्रवक्ता कुणाल घोष ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की. बिस्वास के हाथ से लिखे इस्तीफे के पत्र में, जिसकी तारीख 15 दिसंबर है और जिसमें मुख्यमंत्री को "आदरणीय दीदी" कहकर संबोधित किया गया है, कहा गया है कि वह "निष्पक्ष जांच" के हित में पद छोड़ना चाहते हैं. उन्होंने लिखा कि वह नहीं चाहते कि उनके पद पर बने रहने से जांच पर कोई असर पड़े. 13 दिसंबर को सॉल्ट लेक स्टेडियम में अव्यवस्था के बाद से ही खेल विभाग पर दबाव बढ़ रहा था, जनता और पूरे राजनीतिक गलियारों से आलोचना हो रही थी, क्योंकि इस घटना को दुनिया के सबसे मशहूर खिलाड़ियों में से एक के इवेंट के लिए प्लानिंग और कोऑर्डिनेशन की नाकामी के तौर पर देखा जा रहा था. उधर, खेल मंत्री के इस्तीफे से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है. मुख्य सचिव के दफ्तर से जारी एक प्रेस रिलीज में, राज्य सरकार ने कहा कि DGP राजीव कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसमें 24 घंटे के अंदर यह बताने को कहा गया है कि इतने बड़े पैमाने पर कुप्रबंधन कैसे होने दिया गया और निजी आयोजकों और दूसरे हितधारकों के साथ प्रभावी तालमेल की कमी क्यों थी. बिधाननगर पुलिस कमिश्नर मुकेश कुमार से भी उनके कमिश्नरेट की भूमिका के बारे में इसी तरह का स्पष्टीकरण देने को कहा गया है. राज्य के प्रशासनिक इतिहास में इस तरह से पुलिस के आला अधिकारियों को सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराना बहुत कम होता है. सॉल्ट लेक स्टेडियम के यूथ सर्विसेज एंड स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के सीईओ देब कुमार नंदन को इवेंट मैनेजमेंट में लापरवाही के लिए तुरंत उनके पद से हटा दिया गया है. डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) अनीश सरकार, जो इवेंट के दिन मौके पर इंचार्ज थे, उन्हें कथित लापरवाही के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है, और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. खेल विभाग के प्रधान सचिव राजेश कुमार सिन्हा को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए, राज्य सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस असीम कुमार रे की सलाह पर चार सदस्यों वाली SIT बनाई है, जिन्होंने एक स्वतंत्र जांच की जरूरत पर जोर दिया था. SIT में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पीयूष पांडे, जावेद शमीम, सुप्रतिम सरकार और मुरलीधर शामिल हैं. बिस्वास का नहीं आया सार्वजनिक बयान नहीं बिस्वास ने बार-बार इस मामले पर संपर्क करने की कोशिश की और फोन कॉल एवं संदेश भेजे गए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मुख्यमंत्री कार्यालय से भी इस बात की तत्काल कोई पुष्टि नहीं हुई कि इस्तीफे का अनुरोध स्वीकार किया गया है या नहीं। तृणमूल के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी बिस्वास ने इस मामले पर अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। बीजेपी का मैसी के मुंबई टूर का वीडियो पोस्ट कर तंज उधर, कोलकाता में फुलबॉलर के कार्यक्रम में हंगामे पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। बाद में बीजेपी ने मैसी के मुंबई टूर का वीडियो पोस्ट कर तंज कसा था। दरअसल मुंबई वाले कार्यक्रम में मैसी के प्रशंसक काफी खुश थे। सोशल मीडिया पर कहा गया कि बंगाल पुलिस को मुंबई पुलिस से सीखना चाहिए।  

जी राम जी योजना पर सियासी घमासान, विपक्ष के विरोध पर शिवराज चौहान ने पूछा– राम से दिक्कत क्या है?

नई दिल्ली  मनरेगा का नाम बदलने वाले बिल को लेकर विपक्ष की आपत्ति के बाद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राम का नाम जुड़ते ही इन लोगों को पता नहीं क्या परेशानी हो जाती है। मंगलवार को लोकसभा में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन -ग्रामीण (VB- G RAM G) विधेयक 2025 पेश किया गया। इस मौके पर चौहान ने कहा, ‘महात्मा गांधी खुद राम राज की बात करते थे और उनके अंतिम शब्द भी हे राम करते थे। हर गरीब को बेरोजगार मिले और उसकी गरिमा का सम्मान हो। गरीब, जनजाति और पिछड़ा को रोजगार मिले और उसके लिए यह बिल आया है। 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इससे कृषि और मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित होगा। यह पूरा बिल महात्मा गांधी के अनुरूप है और राम राज्य की स्थापना के लिए लाया जा रहा है। मुझे समझ नहीं आता कि राम नाम जुड़ते ही इन लोगों को बिल से क्या आपत्ति हो गई है, जबकि भगवान राम तो खुद ही राम राज्य की बात करते थे।’   ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच यह विधेयक पेश करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना उनका अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक को वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति के पास भेजा जाए। चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं।’’ उनका कहना था कि मोदी सरकार महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। कांग्रेस ने भी बदला था जवाहर रोजगार योजना का नाम शिवराज चौहान ने सवाल किया, ‘‘कांग्रेस की सरकार ने भी जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान था?’’ चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने बताया, ‘‘हम इस विधेयक में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दे रहे हैं। यह कोई कोरी गारंटी नहीं है, बल्कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि इस विधेयक से गांवों का संपूर्ण विकास होगा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक में केंद्र के अनुदान को 90 से 60 प्रतिशत किया गया है और राज्यों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘विधेयक वापस लिया जाना चाहिए या कम से कम स्थायी समिति के पास भेजा जाए।’’ प्रियंका गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि किसी की ‘‘निजी महत्वाकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रह’’ के आधार पर कोई विधेयक पेश नहीं होना चाहिए। कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले और कई अन्य सदस्यों ने भी विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इसे संसदीय समिति के पास भेजा जाए।