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भारत में ऐसा नहीं होता… — ब्राजीलियन एक्ट्रेस के बोलते ही छिड़ी बहस, वीडियो वायरल

नई दिल्ली एक्ट्रेस और ट्रैवल इन्फ्लुएंसर शेनाज ट्रेजरी ने महिलाओं की शारीरिक आजादी और सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने अपनी हालिया ब्राजील यात्रा का एक वीडियो शेयर किया जिसमें वो एक कैजुअल बिकिनी टॉप, बैकपैक और चौड़ी धारी वाली टोपी पहने हुए सड़कों पर बेफिक्री से साथ घूमती नजर आ रही हैं। शेनाज ने वीडियो के साथ एक कैप्शन भी लिखा, जिसमें कहा, "ब्राजील में बिना किसी की नजर या आलोचना का सामना किए आजादी से घूमना कितना अलग लगता है। ब्राजील में, शरीर बस शरीर ही होता है। भारतीय महिलाओं को यह अनुभव करना चाहिए कि लोगों की आलोचनाओं या घूरने से आजादी का एहसास कैसा होता है। यहां एक महिला होना सुरक्षित और आजाद लगता है। हो सकता है कि मेरा फोन सुरक्षित न हों, लेकिन मेरा शरीर सुरक्षित है।" 'सोचिए अगर मैं दिल्ली या मुंबई में ऐसे…' अपने वीडियो में उन्होंने भारत में अपने अनुभवों से इसकी तुलना करते हुए कहा, "सोचिए अगर मैं दिल्ली या मुंबई में ऐसे चलती हूं, तो वाह। उन्होंने ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे भारत में महिलाओं को अक्सर उनके पहनावे के आधार पर जांच और अनचाहा ध्यान का सामना करना पड़ता है।" शेनाज के वीडियो पर इंटरनेट पर छिड़ी बहस शेनाज का यह वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर वायरल हुआ, तुरंत ही यूजर्स के रिएक्शन की बाढ़ आ गई। किसी ने उनका समर्थन किया तो किसी ने आजादी की उनकी व्याख्या पर सवाल उठाए। एक यूजर ने अपनी निजी राय साझा करते हुए लिखा, "गोवा में बिना कपड़ों के घूमने, पानी में आजादी से कूदने और ठंडे पानी को अपनी त्वचा पर छूने देने, समुद्र तटों पर दौड़ने और ताजी हवा को अपने शरीर पर महसूस करने के बाद, मैं सोचने लगा कि क्या मेरी पत्नी भी गोवा में उतना ही आनंद लेती है जितना मैं लेता था। नहीं। वह हमेशा टी-शर्ट पहने रहती है, यहां तक कि जब वह समुद्र में भी जाती है। हमारी त्वचा आजादी की हकदार है।" 'आजादी' शब्द को किस स्तर तक गिरा दिया- यूजर एक अन्य यूजर ने आलोचनात्मक रुख अपनाते हुए टिप्पणी की, "हमने 'आजादी' शब्द को किस स्तर तक गिरा दिया है!" समर्थकों ने शेनज का बचाव करते हुए कहा कि उनकी पोस्ट कपड़ों के चुनाव से ज्यादा सुरक्षा और सम्मान के बारे में थी। एक यूजर ने लिखा , "कमेंट में सभी नाराज पुरुष और यहां तक कि महिलाएं भी उनकी बात को साबित कर रही हैं। उनका मतलब यह नहीं है कि नग्नता आजादी है। उनका मतलब है कि वह जो चाहें पहन सकती हैं और कोई भी उन्हें कभी छेड़ेगा या परेशान नहीं करेगा। लड़की को जीने दो, भगवान।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "लोग इतने भड़के हुए क्यों हैं? यहां वह बता रही हैं कि कैसे वे अपने काम से काम रख रहे हैं, यह भी नहीं देख रहे कि वह क्या पहन रही हैं, और हां, यही आजादी है!" दूसरी ओर, कुछ लोग इससे सहमत नहीं थे। एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा, "आजकल लोग यह विचारधारा क्यों फैला रहे हैं कि जितना कम पहनोगे, उतनी ही आजादी होगी? यह आजादी नहीं है।"

क्या दुनिया परमाणु संघर्ष की कगार पर? रूस ने बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास किया

रूस  वैश्विक तनाव के बीच रूस ने बुधवार को अपनी परमाणु क्षमताओं का व्यापक परीक्षण किया, जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर संकेत माना जा रहा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में रूसी सेना ने ज़मीन, समुद्र और वायु से अपने रणनीतिक परमाणु बलों की ताकत आजमाई। इस अभ्यास में ‘यार्स’ नामक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल को प्लेसात्स्क स्टेट टेस्ट कॉस्मोड्रोम से कमचटका के कूरा रेंज की ओर सफलतापूर्वक दागा गया। इसके अलावा, बारेंट्स सागर में तैनात परमाणु-संचालित पनडुब्बी ब्रायंस्क से ‘सिनेवा’ बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया गया। लंबी दूरी के बमवर्षक Tu-95MS विमानों ने भी इस अभ्यास में हिस्सा लिया और हवा से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलें लॉन्च कीं। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने बताया कि इस ड्रिल का उद्देश्य कमांड और कंट्रोल सिस्टम की तत्परता का परीक्षण और रणनीतिक बलों की परिचालन क्षमता का आकलन करना था। सभी निर्धारित लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त किए गए, जिससे रूस की परमाणु हमले की तत्परता को बल मिला है। यह अभ्यास ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन में जारी संघर्ष और अमेरिका के साथ कूटनीतिक तनाव के कारण रूस और अमेरिका के बीच वार्ता ठप पड़ी है। खासकर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीच की बैठक रद्द हो जाने के बाद, इस तरह के परमाणु परीक्षण से वैश्विक मंच पर नये तनाव पैदा होने की संभावना बढ़ गई है।   विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम रूस की तरफ से शक्ति प्रदर्शन है, जो उसके रणनीतिक सुरक्षा हितों को लेकर गंभीरता दर्शाता है। वहीं, कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इस स्थिति को चिंताजनक मान रहे हैं क्योंकि इससे वैश्विक परमाणु शस्त्रागार का पुनः सक्रिय होना और एक परमाणु दौड़ की संभावना बढ़ सकती है। यूक्रेन युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक मतभेदों के बीच इस अभ्यास ने एक बार फिर से दुनिया के लिए चेतावनी भरा संदेश भेजा है – कि परमाणु हथियारों का खतरा आज भी खत्म नहीं हुआ है, और इसके दुष्परिणाम बेहद विनाशकारी हो सकते हैं। क्या यह सिर्फ एक प्रदर्शन है या कहीं विश्व युद्ध का खौफनाक दौर फिर से शुरू होने वाला है? समय ही बताएगा।

पंजाब में टमाटर का बोझ बढ़ा, आम घरों के लिए बन गया महंगा फल

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में टमाटर अब आम सब्जी से हटकर महंगे और दुर्लभ सामान में तब्दील हो गया है। कराची, इस्लामाबाद और लाहौर जैसे बड़े शहरों में टमाटर की कीमतों में अचानक भारी उछाल आया है, जहां एक किलो टमाटर 700 रुपए तक बिक रहा है। कुछ ही हफ्ते पहले तक टमाटर की कीमतें मात्र 100 रुपए प्रति किलो थीं। इस तेजी से बढ़ती कीमत ने न सिर्फ रसोईयों का बजट बिगाड़ दिया है बल्कि रोज़ाना के खाने के स्वाद पर भी गहरा असर डाला है। आपूर्ति प्रणाली में गड़बड़ी ने बढ़ाई कीमतें टमाटर की बढ़ती कीमतों के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण स्थानीय सप्लाई चेन का टूट जाना बताया जा रहा है। हाल ही में आई बाढ़ से फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे बाजार में टमाटर की कमी हो गई है। साथ ही, अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक संबंधों में आई रुकावट ने सप्लाई को और प्रभावित किया है। पाकिस्तान अफगानिस्तान से टमाटर के इम्पोर्ट पर निर्भर था, लेकिन हाल ही में सैन्य झड़पों के चलते बॉर्डर पर ट्रकों का आना बंद हो गया है, जिससे बाजार में सामान की कमी और बढ़ गई है। इसके अलावा भारत के साथ भी व्यापार बंद होने के कारण कई वस्तुओं की कीमतें पहले से बढ़ी हुई हैं। सब्जियों की कीमतों में वर्षों से जारी तेजी पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, सब्जियों की कीमतों में कई वर्षों से बढ़ोतरी हो रही है और टमाटर तो अब चिकन से भी ज्यादा महंगा हो गया है। कीमतों में अंतर शहरों के हिसाब से भी देखा जा रहा है। उदाहरण के लिए, पंजाब के झेलम में टमाटर 700 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, वहीं गुजरांवाला में 575 रुपए, फैसलाबाद में हाल ही में 160 से बढ़कर 500 रुपए और मुल्तान में लगभग 450 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। जबकि आधिकारिक रेट केवल 170 रुपए है। लाहौर में होलसेल रेट करीब 400 रुपए प्रति किलो दर्ज किया गया है। अफगान बॉर्डर बंद होने का असर क्वेटा-पेशावर तक पहुंचा अफगानिस्तान बॉर्डर बंद होने की वजह से क्वेटा और पेशावर जैसे प्रमुख बाजारों में भी दिक्कतें बढ़ गई हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सैन्य टकराव के बाद अफगान ट्रक पूरी तरह सप्लाई के लिए नहीं आ रहे हैं। ईरान से कुछ हद तक सप्लाई जारी है, लेकिन अफगान बॉर्डर बंद रहने के कारण बाजारों में लगातार दाम बढ़ रहे हैं और स्थिति गंभीर होती जा रही है।

तूफान अलर्ट: 23 से 26 अक्टूबर तक इन 4 राज्यों में भारी बारिश, बच्चों की सुरक्षा के लिए सभी स्कूल बंद

नई दिल्ली  23 से 26 अक्टूबर तक कई राज्यों में भारी बारिश का खतरा बना हुआ है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। पूर्वोत्तर मानसून की सक्रियता के चलते तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश समेत कई दक्षिणी राज्यों में बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर स्कूलों में छुट्टियां घोषित की गई हैं और प्रशासन सतर्कता बरत रहा है। आइए जानें इस मौसमी स्थिति के बारे में विस्तार से।  दक्षिणी भारत में पूर्वोत्तर मानसून ने अपनी पूरी ताकत दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी में भारी बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है और धान की फसलें जलमग्न हो गई हैं। मौसम विभाग (IMD) ने तमाम प्रभावित इलाकों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए हाई अलर्ट मोड में सभी विभागों को सतर्क रहने को कहा है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में बारिश का कहर जारी है, जहां सुरक्षा को देखते हुए सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया है। चेन्नई के अलावा तंजावुर, तिरुवारुर, नागपट्टिनम, कडलूर, विलुपुरम, तिरुवल्लूर, कांचीपुरम और कारैकल जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। बुधवार को इन इलाकों में भारी वर्षा दर्ज की गई। केमबरमबक्कम, पुझल (रेड हिल्स) और पूंडी बांध से अतिरिक्त जल निकासी की जा रही है ताकि शहर में बाढ़ की स्थिति न बन सके। चेन्नई नगर निगम ने राहत कार्यों को मजबूत करते हुए 106 राहत रसोईयों की व्यवस्था की है। ओडिशा भी भारी बारिश की मार झेल रहा है, जहां अगले चार दिनों तक गरज-चमक के साथ तेज आंधी-तूफान के आसार जताए गए हैं। मौसम विभाग ने बताया कि यह अचानक मौसम में बदलाव दो लगातार बन रहे निम्न दबाव क्षेत्रों की वजह से हो रहा है। पुरी, खोरधा, नयागढ़, गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट, मलकानगिरी, कंधमाल, कालाहांडी और नबरंगपुर जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना है। वहीं, आंध्र प्रदेश के तिरुपति में बुधवार को हुई जोरदार बारिश से कई सड़कों पर दो से तीन फुट तक पानी जमा हो गया। प्रकाशम, नेल्लोर, कडप्पा, अन्नमय्या, तिरुपति और चित्तूर जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है और राज्य आपदा प्रबंधन बल (SDRF) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वहीं, दूसरी ओर पहाड़ी इलाकों में ठंड का असर बढ़ता जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और मनाली में बर्फबारी हुई है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। लाहौल-स्पीति के टैबो में न्यूनतम तापमान माइनस 0.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो राज्य में सबसे ठंडा स्थान है। हिमाचल के विभिन्न इलाकों में हल्की बारिश भी हुई है। मनाली में 12 मिमी, भरमौर में 11.5 मिमी, कीलॉन्ग में 6 मिमी, भुंतर में 3.6 मिमी, सेओबाग में 4 मिमी, पलमपुर में 2 मिमी और कुकुमसेरी में 1.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।

सिख सैनिकों की दाढ़ी-मूंछ पर टिप्पणी से मचा बवाल, अमेरिकी मंत्री पर राजनीतिक दबाव

वाशिंगटन  अमेरिका में सिख समुदाय के सैनिकों की चिंताओं को उजागर करते हुए एक प्रमुख सांसद ने रक्षा मुख्यालय पेंटागन से अपील की है कि वह सभी सैन्य कर्मियों के दाढ़ी-मूंछ मुंडवाने की अनिवार्यता संबंधी नीति पर पुनर्विचार करे। उन्होंने कहा कि बाल और दाढ़ी न कटवाना सिख धर्म का मूल सिद्धांत है। अमेरिकी कांग्रेस सदस्य थॉमस आर. सुवोजी ने हाल ही में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को लिखे पत्र में कहा कि सिखों ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध सहित पीढ़ियों से अमेरिकी सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा, ‘‘सिखों के लिए देश की सेवा करना एक पवित्र कर्तव्य है, जो ‘संत-सिपाही' आदर्श का प्रतीक है। सिख धर्म में केश न काटना और दाढ़ी रखना ईश्वर के प्रति भक्ति का प्रतीक है।'' सुवोजी ने कहा कि सैन्य अनुशासन और वर्दी मानकों का महत्व है लेकिन धार्मिक या चिकित्सीय आधार पर छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिख, मुस्लिम और अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के कुछ सदस्य चिंतित हैं कि यदि ‘‘दाढ़ी प्रतिबंध'' बिना किसी अपवाद के लागू हुआ, तो वे सेना में सेवा नहीं कर पाएंगे।   पिछले महीने अमेरिकी जनरल और अधिकारियों को संबोधित करते हुए हेगसेथ ने कहा था, ‘‘हम अपने बाल कटवाने जा रहे हैं, दाढ़ी मुंडवाने जा रहे हैं और मानकों का पालन करने जा रहे हैं… गैर-पेशेवर दिखने का युग खत्म हो गया है। अब दाढ़ी वाले लोग नहीं रहेंगे।'' यह अपील ऐसे समय में की गयी है जब सुवोजी और रिपब्लिकन सांसद यंग किम ने पिछले सप्ताह द्विदलीय भारतीय-अमेरिकी विरासत प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव दिवाली के उपलक्ष्य में पेश किया गया। यह प्रस्ताव भारतीय-अमेरिकियों के योगदान की प्रशंसा करता है और विविध धार्मिक समुदायों के खिलाफ नफरत व हिंसा की घटनाओं की निंदा करता है।    

हादसे की दिल दहला देने वाली घटना: तेल इकट्ठा करते समय विस्फोट, 42 लोगों की दर्दनाक मौत

अबुजा मध्य नाइजीरिया में एक तेल टैंकर में हुए विस्फोट में कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई है। एक सहायताकर्मी ने यह जानकारी दी। नाइजर राज्य आपातकालीन सेवा के प्रमुख अब्दुल्लाही बाबा आरा ने बताया कि हादसे में 52 अन्य लोग को चोटें आई हैं, जिनका एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण पलटे हुए टैंकर से तेल इकट्ठा करने के लिए दौड़े, जिसमें अचानक विस्फोट हो गया और भीषण आग लग गई। भीषण आग में कई लोग बुरी तरह जल गए और उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया और घायलों को इलाज के लिए पास के एक अस्पताल ले जाया गया। यह दुर्घटना नाइजर राज्य के कच्चा स्थानीय सरकारी क्षेत्र में बीडा-अगाई सड़क के किनारे एस्सान और बादेगी समुदायों के पास हुई। नाइजर के गर्वनर मोहम्मद उमरु बागो ने पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए इस घटना को ‘चिंताजनक, दुर्भाग्यपूर्ण और दयनीय’ बताया। गर्वनर के मुख्य प्रेस सचिव बोलोगी इब्राहिम ने एक बयान में कहा, “ यह बेहद निराशाजनक है कि कई जागरूकता अभियानों के बावजूद लोग गिरे हुए टैंकर के पास जाकर उसका सामान उठा रहे हैं। ” यह तेल टैंकर दक्षिणी नाइजीरिया के लागोस से उत्तर की ओर जा रहा था। देश में सड़क दुर्घटनाओं के लिए सड़कों की खराब स्थिति एक प्रमुख कारण है। इस साल जनवरी में नाइजर राज्य के ही सुलेजा के पास लगभग 60,000 लीटर पेट्रोल ले जा रहा एक ट्रक पलट गया, जिसमें कम से कम 86 लोगों की मौत हो गई और लगभग 70 अन्य घायल हो गए।

भारतीय मूल ड्राइवर के कारण अमेरिका में सड़क त्रासदी, 3 लोगों की मौत

वॉशिंगटन  अमेरिका में एक ट्रक ड्राइवर ने कई वाहनों को उड़ा डाला। तेजी रफ्तार ट्रक एक के बाद कई वाहनों को टक्कर मारता गया, जिनमें कइयों के परखच्चे उड़ गए। इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई है। इसका पूरा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो उस ट्रक में लगे डैशकैम से ही रिकॉर्ड हुआ था, जिसे आरोपी चला रहा था। इस मामले में आरोपी जशनप्रीत सिंह है। अमेरिका में आरोप लग रहे हैं कि जशनप्रीत सिंह अवैध प्रवासी था और 2022 में अमेरिका में घुस आया था। इस तरह अमेरिका में अवैध प्रवासियों का मामला फिर से तूल पकड़ सकता है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसके लिए जो बाइडेन की पॉलिसी को जिम्मेदार ठहराया है। फिलहाल 21 साल के जशनप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर नशे में गाड़ी चलाते हुए कत्ल के इरादे से लोगों को कुचलने का आरोप है। वीडियो में दिखता है कि सड़क पर ट्रैफिक काफी स्लो है। इसके बाद भी जशनप्रीत सिंह तेजी से ट्रक को आगे बढ़ाते हुए कई वाहनों को टक्कर मारता है। अमेरिकी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि 2022 में जशनप्रीत सिंह अवैध रूप से अमेरिकी सीमा में घुसा था। उसे बॉर्डर पैट्रोल एजेंट्स ने हिरासत में भी लिया था। कहा जा रहा है कि जो बाइडेन प्रशासन के नियमों के चलते उसे छोड़ना पड़ा था। तब प्रशासन ने नियम बनाया था कि डिटेंशन पॉलिसी के अलावा भी लोगों को विकल्प होंगे और उनकी सुनवाई की जाएगी। जशनप्रीत सिंह ने जिस ट्रक से यह हादसा किया है, उसके ही डैशकैम का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें दिखता है कि वह एक एसयूवी में जोरदार टक्कर मारता है, जिसमें सवार तीन लोगों की मौत हो जाती है। इसके अलावा कई लोग घायल भी हुए हैं। फिलहाल मृतकों की पहचान सामने नहीं आई है। इस हादसे में जशनप्रीत सिंह भी घायल है। इसके अलावा उसके साथ टायर चेंज करने में सहायता के लिए बैठा एक मैकेनिक भी घायल हुआ है। पुलिस का कहना है कि जशनप्रीत सिंह ने ट्रैफिक में कोई ब्रेक नहीं लगाया और स्पीड भी जस की तस बनी रही। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वह नशे के प्रभाव में था और उसे होश ही नहीं था कि आखिर हो क्या रहा है। उसके नशे में होने की पुष्टि मेडिकल टेस्ट में हो चुकी है।  

सोनम वांगचुक की पत्नी ने SC में पूछा: क्या अब हमारे अधिकार खत्म हो गए हैं?

नई दिल्ली राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत ऐहतियातन हिरासत में रखे गए ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने राज्य और केंद्र की एजेंसियों पर मौलिक अधिकार हनन करने का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट में की गई शिकायत में गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि जब वह जोधपुर जेल में बंद अपने पति से मिलने जा रही थीं, तब खुफिया ब्यूरो और राजस्थान पुलिस के लोगों ने उनका पीछा किया और पति से मिलने के दौरान उन पर कड़ी निगरानी रखी। दायर शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य और उसकी एजेंसियां ​​उनके हर कदम पर नजर रखती हैं, हस्तक्षेप करती हैं और यहाँ तक कि उन्हें खिड़कियों पर पर्दे लगाकर गाड़ियों में ले जाती हैं। उन्होंने अदालत से सवाल किया कि क्या NSA के तहत प्रतिबंधित व्यक्ति के परिवार के सदस्य की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कहीं भी आने-जाने की आजादी का अधिकार समाप्त हो जाता है। हवाई अड्डे पर उतरते ही रोक लिया गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट को विस्तार से बताया है कि कैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों और राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने 7 अक्टूबर और 11 अक्टूबर को जोधपुर सेंट्रल जेल में अपने पति से मिलने जाने के दौरान उन्हें हवाई अड्डे पर उतरते ही रोक लिया था। उन्होंने एक हलफनामा दायर कर शिकायत की है कि दोनों यात्राओं के दौरान एजेंसियों के आचरण से भारत के एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। पति से मुलाकात के दौरान मेरे साथ रहे उन्होंने अदालत को बताया, "जैसे ही मैं प्लेन से उतरी और जोधपुर हवाई अड्डे से बाहर आई, वैसे ही आईबी और राजस्थान पुलिस के अधिकारी मेरे पास आ गए और मुझे अपनी कार में बैठने को कहा, जिसकी खिड़कियों पर सफेद पर्दे लगे थे। इससे सबकुछ ओझल हो गया। फिर वे मुझे मुलाकात के लिए जेल ले गए। ये अधिकारी मुझे जेल अधीक्षक के कार्यालय ले गए और पूरी मुलाकात के दौरान मेरे साथ रहे। हर मुलाकात से पहले, वे मुझसे मेरी यात्रा का विवरण और जोधपुर में मेरे ठहरने का समय पूछते थे।" जोधपुर में किसी और से मिलने नहीं दिया मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि जब वह पति सोनम वांगचुक से मिल रही थीं, तब पूरी मुलाकात के दौरान दो अधिकारी नजदीक में बैठे रहे और उनकी पूरी बात सुनते रहे। इतना ही नहीं अधिकारियों ने कानूनी सहायता के लिए पति के निर्देशों वाले नोट्स की तस्वीरें भी खींचीं। गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि उन्हें जोधपुर में किसी और से मिलने नहीं दिया गया और जेल से निकलते ही उन्हें रेलवे स्टेशन तक ले जाया गया, जबकि ट्रेन खुलने में काफी समय था। उन्होंने कहा कि उनके एस्कॉर्ट भी उनके साथ ट्रेन में चढ़े और जोधपुर से आगे दो घंटे तक यात्रा करते रहे। बाद मेड़ता रोड जंक्शन पर उतर गए। पिछले महीने हुई थी वांगचुक की गिरफ्तारी बता दें कि सोनम वांगचुक को पिछले सितंबर में लेह में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 के तहत 26 सितंबर को हिरासत में ले लिया गया था। इसके बाद उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर रखी है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।  

धर्म में कोई जाति-सीमा नहीं, हाईकोर्ट ने मंदिर में पुजारी नियुक्ति पर जताई स्पष्ट राय

तिरुअनंतपुरम मंदिर का पुजारी किसी खास जाति या फिर वंश से जुड़ा व्यक्ति होगा, यह धर्म सम्मत नहीं है। केरल हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह बात कही है। अदालत ने कहा कि यह हिंदू धर्म के ग्रंथों में कहीं भी वर्णित नहीं है कि किसी विशेष जाति का शख्स ही मंदिर का पुजारी हो सकता है या फिर किसी वंश का व्यक्ति ही बन सकता है। यदि कोई ऐसा चाहता है कि किसी खास जाति के लोग ही मंदिर के पुजारी हों तो उसे संविधान से भी कोई संरक्षण नहीं मिल सकता। जस्टिस राजा विजयराघवन और जस्टिस केवी जयकुमार ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड और केरल देवस्वम रिक्रूटमेंट बोर्ड की ओर से सिर्फ तंत्र विद्यालयों की ओर से अनुभव प्रमाण पत्र रखने वालों की भर्ती पर यह बात कही। केरल में अखिल केरल तंत्री समाजम नाम की एक सोसायटी है। इस सोसायटी से जुड़े करीब 300 परंपरागत तंत्री परिवार जुड़े हैं। यह स्कूल सिखाता है कि कैसे मंदिरों में पुजारियों को परंपराओं का निर्वाह करना चाहिए और पूजा करानी चाहिए। इसी को लेकर अर्जी दाखिल हुई थी कि आखिर किसी एक खास स्कूल या वंश परंपरा से निकले लोगों को ही पुजारी के रूप में कैसे भर्ती किया जा सकता है। अर्जी में सवाल उठाया गया कि आखिर यह मांग कैसे की जा सकती है कि किसी खास स्कूल से आपकी डिग्री होगी, तभी आपको पुजारी के रूप में भर्ती किया जाएगा। इस पर अदालत ने कहा है कि हिंदू धर्म में ऐसी कोई परंपरा या विधान नहीं है कि किसी जाति या वंश से जुड़े लोगों को ही मंदिर के पुजारी के रूप में भर्ती किया जाएगा। बेंच ने इस दौरान 1972 के सुप्रीम कोर्ट के सेशम्मल बनाम तमिलनाडु केस के फैसले का भी उदाहरण दिया। बेंच ने कहा कि तब अदालत ने कहा था कि अर्चक यानी मंदिर के पुजारियों की भर्ती एक सेकुलर निर्णय होता है। इसमें धर्म का कोई मसला नहीं होता और यह काम ट्रस्टी की ओर से किया जाता है। दरअसल सवाल यह भी उठा था कि जिस सोसायटी की डिग्रियों की बात की जा रही है, उसमें पढ़ने वाले तो सिर्फ ब्राह्मण हैं। इसलिए सभी को मौका देने के यह नियम खिलाफ है।  

दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर बैन, कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई

उत्तराखंड उत्तराखंड में दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर बड़ी पाबंदी लगने वाली है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने इस संदर्भ में केंद्र सरकार को सख्त सिफारिश भेजी है, जिसके बाद जल्द ही इस दिशा में कानूनी बदलाव हो सकते हैं। पिछले दिनों देश के विभिन्न हिस्सों में कफ सिरप के कारण बच्चों की मौतों के बाद केंद्र ने दवा निर्माण और बिक्री के नियमों को सख्त करने का फैसला किया है, जिसमें ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और होम डिलीवरी पर नियंत्रण शामिल है। उत्तराखंड में 20 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर हैं, जिनमें से कई ऑनलाइन दवाओं की बिक्री में लगे हुए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान इस कारोबार ने जबरदस्त गति पकड़ी थी और तब से ऑनलाइन दवाओं का व्यापार करोड़ों रुपये का हो गया है। हालांकि, यह कारोबार नियंत्रण से बाहर हो चुका है और रिकॉर्ड रखना भी मुश्किल हो गया है। एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी का कहना है कि ऑनलाइन दवाओं की खरीद-फरोख्त के रिकॉर्ड छिपाने और गड़बड़ी की संभावना बहुत अधिक रहती है। किसने कौन-सी दवा कब और कहां से मंगाई, इस बात का सही ब्यौरा रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है। इसी कारण कई राज्यों ने भी ऑनलाइन दवाओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस बदलाव के साथ ही ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में संशोधन किया जाएगा, जिससे ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और वितरण पर कड़े नियम लागू होंगे। सरकार की यह पहल मरीजों की सुरक्षा और दवाओं के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम माना जा रहा है। जल्द ही इस मामले में आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है।