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SIR का बड़ा ऐलान: नवंबर से पूरे भारत में होगा लागू, बिहार समेत कई राज्यों में पहले चरण की तैयारी

नई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इलेक्शन कमिशन ने SIR यानी गहन मतदाता पुनरीक्षण का अभियान शुरू किया था। इस पर खूब राजनीति हुई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। अदालत की ओर से SIR को क्लीन चिट दी गई और कहा गया कि यह थोड़ा पहले किया जा सकता था। अब इसी बात से सबक लेते हुए चुनाव आयोग नवंबर की शुरुआत से ही देशव्यापी SIR शुरू करने जा रहा है। इसके तहत सबसे पहले उन राज्यों में SIR होगा, जहां 2026 में ही चुनाव होने वाले हैं। इसके अलावा भी कुछ अन्य राज्यों में भी SIR शुरुआती दौर में ही होगा। चुनाव आयोग की दो दिन की कॉन्फ्रेंस शुरू हुई है। इसमें यह आकलन भी किया गया कि देश में SIR की प्रक्रिया के लिए कितनी और कैसी तैयारी है। इसकी रिपोर्ट सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन आयुक्तों की ओर से पेश की गई। पूरा प्लान कॉन्फ्रेंस के समापन पर बताया जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार SIR की प्रक्रिया देशव्यापी होगी, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। पहले इसे असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में किया जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इन राज्यों में अगले साल ही चुनाव होने हैं। असम में तो NRC भी हो रही है। असम के निर्वाचन आयोग का कहना है कि एक बार NRC होने के बाद राज्य में SIR भी हो जाएगी। असम देश का इकलौता राज्य है, जहां NRC हुआ है। ऐसे में यह भी हो सकता है कि NRC पूरा होने का इंतजार हो और असम में SIR में थोड़ी देरी हो जाए। आगामी राष्ट्रव्यापी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग मतदाताओं को केवल उस राज्य की ही नहीं, बल्कि किसी भी राज्य की अंतिम गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची से अपने नामों के अंश प्रस्तुत करने की अनुमति दे सकता है, जहां वे वर्तमान में रहते हैं। बिहार एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता केवल बिहार की अंतिम गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची से ही अंश प्रस्तुत कर सकते थे। देश में कहीं भी वोटर लिस्ट में हो नाम तो मिलेगा मौका, बिहार से क्या अलग दूसरे शब्दों में मुंबई में मतदाता के रूप में पंजीकृत पश्चिम बंगाल का कोई प्रवासी श्रमिक महाराष्ट्र में नामांकित रह सकता है, बशर्ते वह अपना नाम दिखा सके। इसके अलावा वह किसी ऐसे मतदाता से संपर्क स्थापित कर सके, जिसका नाम 2002 की पश्चिम बंगाल मतदाता सूची में शामिल हो। पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची का अंतिम गहन पुनरीक्षण 2002 में हुआ था और उस मतदाता को उस राज्य की मतदाता सूची में बने रहने के योग्य माना जाएगा, जहां वह वर्तमान में रह रहा है।

रूस के मुख्य गैस प्लांट पर यूक्रेन का ड्रोन हमला, सप्लाई में बड़ा व्यवधान

मॉस्को  रूस-यूक्रेन युद्ध शांत होने की जगह भड़कता ही जा रहा है। दक्षिणी रूस में एक प्रमुख गैस प्रसंस्करण संयंत्र पर यूक्रेन ने ड्रोन से हमला कर दिया। इसके कारण कजाकिस्तान से गैस की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी गई। रूसी अधिकारियों ने रविवार को इसकी जानकारी दी है। ओरेनबर्ग स्थित यह संयंत्र विश्व के सबसे बड़े गैस उत्पादन और प्रसंस्करण संयंत्रों में से एक है। इसकी वार्षिक क्षमता 45 अरब क्यूबिक मीटर है और यह कजाकिस्तान के कराचगनाक क्षेत्र से गैस कंडेन्सेट को संसाधित करता है। इसे वहां की सरकारी कंपनी गैजप्रोम चलाती है। क्षेत्रीय गवर्नर येवगेनी सोलंतसेव के अनुसार, ड्रोन हमलों से संयंत्र की एक कार्यशाला में आग लग गई और संयंत्र का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। कजाक ऊर्जा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि गैजप्रोम की सूचना के अनुसार, ड्रोन हमले के कारण संयंत्र अस्थायी रूप से कजाकिस्तान की गैस को संसाधित करने में असमर्थ है। यूक्रेन की जनरल स्टाफ ने बयान में कहा कि ओरेनबर्ग संयंत्र में आग लगी और एक गैस प्रसंस्करण और शोधन इकाई क्षतिग्रस्त हुई। यूक्रेन ने हाल के महीनों में रूसी ऊर्जा सुविधाओं पर हमले तेज कर दिए हैं, जिन्हें वह मास्को के युद्ध प्रयास को वित्तपोषित करने वाला और सीधे समर्थन देने वाला मानता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन से यह संकेत दिया कि शांति स्थापित करने के लिए उसे रूस से खोई हुई भूमि छोड़नी पड़ सकती है। फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कुछ न कुछ ले ही लेंगे और अमेरिका ही ऐसा देश है जो युद्ध जीतकर छोड़ देता है। उन्होंने टॉमहॉक मिसाइलें यूक्रेन को देने के बारे में अनिर्णायक रुख अपनाया और अमेरिकी हथियारों के भंडार के संरक्षण की चिंता जताई। यूक्रेनी अभियोजक दावा कर रहे हैं कि रूस नागरिक इलाकों को निशाना बनाने के लिए अपने हवाई निर्देशित बमों को बदल रहा है। खार्किव क्षेत्र में रूस ने नए रॉकेट-संचालित बम UMPB-5R का इस्तेमाल किया, जो 130 किलोमीटर तक उड़ सकता है। डोनिप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र में रूसी ड्रोन हमले में कम से कम 11 लोग घायल हुए और कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं। रूस ने कोयला खदान पर भी हमला किया, जिसमें 192 खनिक सुरक्षित निकाले गए। यूक्रेनी जनरल स्टाफ ने रूस के समारा क्षेत्र में नोवोकुइबिशेव्स्क तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले का दावा भी किया। रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने रात भर 45 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए।

लव जिहाद और बहुविवाह पर हिमंत सरमा का कड़ा रुख, जल्द होगा नया कानून लागू

गुवाहाटी  असम की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार आगामी विधानसभा सत्र में लव जिहाद और बहुविवाह को लेकर कानून बनाने की तैयारी कर रही है। हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार अगले सत्र में इन दोनों पर विधेयक पेश करने जा रही है। सीएम ने बुधवार को बताया, "अगला विधानसभा सत्र ऐतिहासिक होगा क्योंकि कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। बहुविवाह और लव जिहाद पर प्रतिबंध के साथ-साथ हमारे सत्रों का संरक्षण, चाय बागानों के श्रमिकों को भूमि अधिकार देने सहित अन्य विधेयक शामिल हैं।" उन्होंने आगे कहा, "अगले विधानसभा सत्र में हम लव जिहाद, बहुविवाह और सत्र संरक्षण के खिलाफ कई नए विधेयक लाएंगे। चाय बागानों के श्रमिकों के भूमि अधिकारों पर चर्चा के साथ ही और भी कई विधेयक पेश किए जाएंगे।" असम कैबिनेट ने पहले ही असम सत्र संरक्षण और विकास बोर्ड विधेयक, 2025 को मंजूरी दी है। यह एक निकाय होगा, जिसका उद्देश्य सत्रों और उनके भूमि-संपत्ति का संरक्षण, प्रबंधन, रखरखाव और सतत विकास सुनिश्चित करना है। असम के सत्र वैष्णव मठ हैं, जो धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इनकी स्थापना 16वीं सदी में हुई थी। मुख्यमंत्री सरमा ने बताया, "इस विधेयक के तहत एक आयोग स्थापित किया जाएगा, जो सत्र भूमि को अतिक्रमण और विवादों से बचाएगा, पारदर्शी शासन के माध्यम से और विरासत पर्यटन व सत्र कला के माध्यम से सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।" विधेयक के अनुसार आयोग के तहत सत्रों की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल संग्रह के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा, जिसमें भूमि, कलाकृतियां और पांडुलिपियों का विवरण होगा, जिससे वैश्विक स्तर पर उनकी पहुंच और संरक्षण सुनिश्चित होगा। आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे। सदस्य सचिव भूमि अधिग्रहण और सुधार निदेशक, असम होंगे। इसके अलावा, दो सदस्य राज्य सरकार द्वारा नामांकित सत्र संस्थानों के प्रतिनिधि होंगे और एक सदस्य भूमि प्रशासन में अनुभवी सेवानिवृत्त सिविल सेवा अधिकारी (सचिव स्तर या उससे ऊपर) होगा।

ब्रहमोस मिसाइल और राफेल के साथ ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और बाद में जवाबी कार्रवाई के दौरान वहां के सैन्य प्रतिष्ठानों पर सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के जरिये ब्रह्मोस मिसाइलें दागी गई थीं। ये मिसाइलें अचूक साबित हुईं। इसने बहावलपुर में लश्कर-ए-तैयबा और मुरीदके में जैश-ए-मोहम्मद समेत नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। हाल में सामने आए एक सरकारी दस्तावेज से स्पष्ट तौर पर ऐसे संकेत मिलते हैं। इसके अनुसार वायुसेना और थल सेना द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों में राफेल और सुखोई की स्क्वाड्रन तैनात की गई थी। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के दिन ही कच्छ से लेकर कश्मीर तक सीमावर्ती क्षेत्र में बाकायदा वायुसेना ने अभ्यास का ऐलान भी किया था, जो छह मई की रात किए गए ऑपरेशन सिंदूर की तैयारी थी। हाल में ऑपरेशन सिंदूर के लिए वायुसेना के पायलटों को वीर चक्र से सम्मानित करने के उपलक्ष्य में एक विस्तृत गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसमें ऑपरेशन सिंदूर के नाम लिए बगैर पायलटों की बहादुरी का वर्णन किया गया है। यह विवरण दर्शाता है कि किस प्रकार एयरफोर्स की राफेल और सुखोई की स्क्वाड्रनों ने बहादुरी के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। वीर चक्र से सम्मानित पायलट राफेल और सुखोई दोनों स्क्वाड्रनों से हैं। राफेल ने कई पाकिस्तानी विमानों को गिराया विवरण से संकेत मिलते हैं कि सुखोई से ब्रह्मोस के जरिये जमीनी लक्ष्यों को निशाना बनाया गया, जबकि राफेल का इस्तेमाल उस क्षेत्र में एयर डिफेंस के लिए किया गया। राफेल ने पाकिस्तान के कई हमलों को नाकाम किया और उसके कई विमानों को मार गिराया। दोनों लड़ाकू विमानों के पायलटों ने अपने-अपने कार्य को बाखूबी अंजाम दिया, जिसके लिए उन्हें युद्धकाल का तीसरा बड़ा पुरस्कार वीर चक्र प्रदान किए गए।

मोदी नहीं जाएंगे आसियान समिट में! ट्रंप से संभावित मीटिंग की चर्चा तेज, जानें भारत की ओर से कौन जाएगा

नईदिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया में होने वाले आसियान शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे. आसियान समिट की शुरुआत रविवार यानी 26 अक्टूबर से हो रही है. पीएम मोदी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण आसियान शिखर सम्मेलन से संबंधित बैठकों में भाग लेने के लिए संभवत: मलेशिया नहीं जाएंगे. इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों की मानें तो भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस बैठक में हिस्सा लेंगे और भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. यहां बताना जरूरी है कि इस आसियान बैठक में डोनाल्ड ट्रंप भी आ रहे हैं. ऐसे में संभावना थी कि अगर मोदी जाते हैं तो ट्रंप संग उनकी मुलाकात हो सकती है. मगर अब मुलाकात का इंतजार बढ़ गया है. दरअसल, आसियान (दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन) शिखर सम्मेलन 26 से 28 अक्टूबर तक कुआलालंपुर में आयोजित किया जा रहा है. आसियान शिखर सम्मेलन से संबंधित विचार-विमर्श में भारत की भागीदारी के स्तर पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. सूत्रों ने बताया कि भारत ने मलेशिया को सूचित किया है कि एस जयशंकर आसियान बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल माध्यम से भाग लेने की संभावना है. ट्रंप हो रहे शामिल प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ वर्षों में आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया है. मलेशिया ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ-साथ आसियान के कई संवाद साझेदार देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है. डोनाल्ड ट्रंप 26 अक्टूबर को दो दिवसीय यात्रा पर कुआलालंपुर जाएंगे. सूत्रों ने बताया कि शुरुआती योजना के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया के साथ-साथ कंबोडिया की यात्रा पर भी विचार किया जा रहा था, चूंकि वह मलेशिया नहीं जा रहे हैं, इसलिए कंबोडिया की प्रस्तावित यात्रा स्थगित कर दी गई है. क्या है आसियान आसियान-भारत संवाद संबंध 1992 में एक क्षेत्रीय साझेदारी की स्थापना के साथ शुरू हुए. ये दिसंबर 1995 में पूर्ण संवाद साझेदारी और 2002 में शिखर सम्मेलन स्तर की साझेदारी में परिवर्तित हुए. इन संबंधों को 2012 में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया. आसियान के 10 सदस्य देश इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमा और कंबोडिया हैं.  

अमेरिका डील की उम्मीद से उछला बाजार, ये स्टॉक बने निवेशकों के रॉकेट

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार में आज शानदार तेजी आई है, क्‍योंकि कल अमेरिका से भारत के लिए एक गुड न्‍यू आई. निफ्टी 26000 के ऊपर खुला है, जबकि सेंसेक्‍स 85000 के ऊपर ओपेन हुआ. हालांकि अभी 720 चढ़कर 85,148 पर कारोबार कर रहा है. वहीं निफ्टी 200 अंक चढ़कर 26070 के ऊपर कारोबार करता हुआ दिख रहा है. आईटी सेक्‍टर ने शानदार प्रदर्शन किया है. यह करीब 2 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है.  BSE टॉप 30 शेयरों की बात करें तो 29 शेंयरों में शानदार तेजी आई है, जबकि 1 शेयर गिरावट पर हैं. इंफोसिस के शेयर में शानदार तेजी आई है. यह 3 फीसदी ऊपर चढ़कर कारोबार कर रहा है. सिर्फ जोमैटो के शेयर में ही मामूली गिरावट देखी जा रही है.  आईटी शेयरों में शानदार तेजी IT शेयरों में आज गजब की तेजी देखी जा रही है. इंफोसिस में 3 फीसदी की तेजी, HCL TEch के शेयर में 2.50 फीसदी की तेजी आई है. इसके अलावा, टीसीएस के शेयर में 1 फीसदी से ज्‍यादा का उछाल देखा जा रहा है.  इन शेयरों में शानदार तेजी Kitex Garments के शेयर 12 फीसदी चढ़कर 209 रुपये के ऊपर कारोबार कर रहा है. गारवेयर हाय टेक के शेयर 11 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहे हैं. Vardhaman Textiles के शेयर 11 फीसदी ऊपर चढ़कर कारोबार कर रहे हैं. रिलायंस पावर के शेयर में 3 प्रतिशत की तेजी आई है. एसबीआई कार्ड के शेयर में 3 प्रतिशत की तेजी देखी जा रही है. टेक महिंद्रा के शेयर में भी 3 प्रतिशत की तेजी आई है.  अमेरिका से गुड सिग्‍नल  खबर है कि अमेरिका से भारत की ट्रेड डील होने जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका भारत पर 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 15 फीसदी तक लगाने वाला है. अगर ऐसा होता है तो शेयर बाजार में और भी तेजी आ सकती है. खैर आज इसी सेंटीमेंट को लेकर बाजार में तेजी देखी जा रही है. इसके अलावा, खबर यह भी है कि रूस और यूक्रेन में युद्ध खत्‍म होने वाला है.  सेक्‍टर की बात करें तो आज IT सेक्‍टर में 2.32 फीसदी की तेजी है. वहीं प्राइवेट बैंक सेक्‍टर 1 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है. इसके अलावा, एफएमसीजी भी 1.50 फीसदी ऊपर चढ़कर कारोबार कर रहा है. सभी सेक्‍टर्स ग्रीन जोन में कारोबार कर रहे हैं.  96 शेयरों में अपर सर्किट बीएसई पर 3,606 शेयरों में से 1,975 शेयर तेजी पर हैं और 1,435 शेयर गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं. 196 शेयर अनचेंज हैं. 126 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई लेवल पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि 27 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर कारोबार कर रहे हैं. 96 शेयरों में अपर सर्किट और 58 शेयर लोअर सर्किट पर हैं. 

मौसम का कहर: 23 से 27 अक्टूबर तक इन राज्यों में बर्बादी ला सकती है बारिश

नई दिल्ली  इस साल मानसून देरी से आया लेकिन बाद में कसर पूरी कर दी। उत्‍तर भारत से लेकर मध्‍य भारत तक जोरदार बारिश का लंबा दौर चला, जिसके चलते सभी जिलों का बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इधर, दीपावली के पहले से ही हल्‍दी ठंड शुरू हो चुकी थी। अब तापमान में बदलाव नज़र आ रहा है। इस बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने ताजा बुलेटिन में अनुमान जताया है कि अगले तीन से चार दिनों में देश के अलग-अलग राज्‍यों में तेज बारिश होगी। कहीं-कहीं पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। आइये जानते हैं देश भर के मौसम का हाल। उत्तर भारत: अगले 2-3 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट। पश्चिम भारत:     23 अक्टूबर को कोंकण और गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश/गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।     अगले 5 दिनों के दौरान कोंकण और गोवा, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में बिजली कड़कने के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। पूर्व और मध्य भारत:     23-27 अक्टूबर के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश/गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।     अगले 7 दिनों के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में गरज के साथ छींटे पड़ने और तेज़ हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटे की गति) की संभावना है।     22-26 अक्टूबर के दौरान ओडिशा में और अगले 5 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में बिजली कड़कने की संभावना है।     22 और 23 अक्टूबर को ओडिशा में घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। आईएमडी ने मछुआरों को चेतावनी जारी की     आईएमडी ने लोगों को आंधी-तूफान के दौरान घर के अंदर रहने की सलाह दी है और कोंकण क्षेत्र के मछुआरों और तटीय निवासियों से तेज़ हवाओं के दौरान समुद्र में जाने से बचने का आग्रह किया है।     यात्रियों को भी सावधानी से यात्रा करने की सलाह दी गई है, क्योंकि अचानक बारिश और तेज़ हवाएँ दृश्यता कम कर सकती हैं और सड़क सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।     उत्तर-पूर्वी मानसून के ज़ोर पकड़ने के साथ ही दक्षिण भारत के कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है।     कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा जिलों में अलग-अलग स्थानों पर बिजली कड़कने के साथ तूफान, हल्की से मध्यम वर्षा, 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने की संभावना है।   दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत:     22 से 24 और 26 से 28 के दौरान तमिलनाडु में कई/कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा/गरज के साथ बौछारें; 22 से 24 तक दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल एवं माहे; 22 से 25 तक तटीय कर्नाटक और तेलंगाना; 24 को उत्तर आंतरिक कर्नाटक; 22 से 28 अक्टूबर के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश और यनम और रायलसीमा; 22 को केरल और माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में बहुत भारी वर्षा; 22 और 23 को तटीय कर्नाटक, 23 अक्टूबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा।

खबर: जैश-ए-मोहम्मद ने शुरू किया 500 रुपये में महिलाओं के लिए जिहाद प्रशिक्षण — सुरक्षा एजेंसियाँ चिंतित

इस्लामाबाद  पाकिस्तान से धंधा चलाने वाला जैश-ए-मोहम्मद जिहाद का नया चूरन लेकर आया है. जैश-ए-मोहम्मद अब 500 रुपये में लड़कियों, महिलाओं को जिहाद की ट्रेनिंग दे रहा है. इसके लिए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने नया कोर्स चलाया है. इस कोर्स को आतंकी मसूद अजहर की बहनें और उमर फारुक की बीवी लीड कर रही है. जिहाद के इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए हर लड़की से 500 पाकिस्तानी रुपये लिए जाएंगे.  जैश ए मोहम्मद अब अपने ब्रिगेड में ख्वातिनों यानी की महिलाओं की नियुक्ति बढ़ा दी है.  हाथ ऐसे एक्सक्लूसिव दस्तावेज लगे हैं जिससे पता चलता है कि ये आतंकी संगठन बड़े पैमाने पर महिलाओं को जिहाद की ऑनलाइन ट्रेनिंग देना शुरू कर रहा है. जैश ए मोहम्मद महिलाओं से फंड इकट्ठा कर रहा है. इस कोर्स को 'तुफत अल मुमिनात' नाम दिया गया है.  इससे पहले इस बात की जानकारी सामने आई थी कि संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद ने महिलाओं की नियुक्ति के लिए 'जमात-उल-मुमिनात' का गठन किया है.  महिलाओं को टेरर फैक्ट्री में लाया अजहर इस टेरर संगठन को मजबूत करने और इसकी महिला ब्रिगेड में और ज़्यादा महिलाओं की भर्ती के लिए आतंकियों ने अपने घर की औरतों को सामने लाया है. इसमें जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शामिल है. इसके अलावा इसमें जैश के टेरर कमांडरों की महिला सदस्य शामिल हैं. ये महिलाएं जिहाद और मजहब की ट्रेनिंग देंगी.  ऑनलाइन लाइव लेक्चर के ज़रिए भर्ती अभियान 8 नवंबर से शुरू होने वाला है. मसूद अज़हर की दो बहनें सादिया अज़हर और समायरा अजहर, रोज़ाना 40 मिनट के ऑनलाइन मीटिंग प्लेटफ़ॉर्म के जरिए महिलाओं को जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड जमात-उल-मुमिनात में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेंगी. मसूद अजहर की छोटी बहन को मिला चार्ज नए-नए जमात-उल-मुमीनत में मौलाना मसूद अजहर ने इस महिला ब्रिगेड की कमान अपनी छोटी बहन सादिया अजहर को सौंपी है. सादिया का पति आतंकी यूसुफ़ अजहर ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था. मसूद अजहर ने इस काम में अपनी छोटी बहन सफिया और उमर फ़ारूक़ की बीवी अफरीरा फ़ारूक़ को भी शामिल किया है, उमर फारूक ने पुलवामा आतंकी हमला किया था और बाद में भारतीय सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था.  मसूद अजहर की जिहाद की नई कोर्स. आतंकी मसूद अजहर पाकिस्तान में फंड इकट्ठा करने के लिए जकात का प्रोग्राम शुरू कर दिया है और तेजी से इसमें लगा है. 27 सितंबर को अपने ताजा संबोधन में बहावलपुर में उसने मरकज उस्मान अली में जनता से दान की अपील की थी. अब जैश-ए-मोहम्मद महिलाओं को ट्रेनिंग देने वाले इस प्रोग्राम से पैसा जमा कर रहा है. इसके लिए हर महिला से 500 पाकिस्तानी रुपये लिए जा रहे हैं और उनसे ऑनलाइन फॉर्म भरवाया जा रहा है.   इस महीने की शुरुआत में 8 अक्टूबर को मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड जमात उल-मुमीनत के गठन की घोषणा की थी और 19 अक्टूबर को पाक अधिकृत कश्मीर के रावलकोट में महिलाओं को ग्रुप में शामिल करने के लिए 'दुख्तरिन-ए-इस्लाम” नाम का एक कार्यक्रम आयोजित किया था.  ISIS, हमास, लिट्टे की तर्ज पर फिदायीन दस्ता बनाने की कोशिश सूत्रों के अनुसार चूंकि पाकिस्तान में कट्टरपंथी सामाजिक मानदंडों के अनुसार महिलाओं का अकेले बाहर जाना अनुचित माना जाता है, इसलिए जैश-ए-मोहम्मद अब महिलाओं की भर्ती के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहा है ताकि वह आईएसआईएस, हमास और एलटीटीई की तर्ज पर अपने पुरुष आतंकवादी ब्रिगेड के साथ-साथ महिला आतंकवादी ब्रिगेड का गठन कर सके और संभवतः उनका इस्तेमाल आत्मघाती/फिदायीन हमलों के लिए कर सके.  जैश की पूरी कार्यप्रणाली के तहत प्रत्येक महिला से 500 रुपये का चंदा लिया जा रहा है. ये पाकिस्तान के पाखंड को भी उजागर करता है जो FATF के नियमों का लागू करने का दावा करता है और कहता है कि वह आतंक से जुड़े किसी भी गतिविधि की फंडिंग नहीं कर रहा है. लेकिन पाकिस्तान मरकज की आड़ में पैसा लेता रहा है और अब खुलकर जिहाद की ऑनलाइन कक्षाओं के नाम पर पैसा ले रहा है. 

शिक्षा की चुनौती: 13 करोड़ से अधिक लड़कियां आज भी नहीं जा पातीं स्कूल, UNESCO की चेतावनी

नई दिल्ली दुनिया में आज भी लड़के और लड़कों बीच भेदभाव देखने को मिलता है. खासकर पढ़ाई के मामले में लड़कों को स्कूल भेजने पर तवज्जो दी जाती है. हालांकि, पिछले कुछ सालों में दुनिया में कहीं ना कहीं यह भेदभाव थोड़ा कम हुआ है, लेकिन अभी भी कई लड़कियां इसका सामना कर रही हैं. यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 30 सालों में दुनिया ने शिक्षा में लड़कियों और लड़कों के बीच बराबरी लाने में काफी प्रगति की है. यानी अब पहले की तुलना में ज़्यादा लड़कियाँ स्कूल जा रही हैं. लेकिन फिर भी समस्या खत्म नहीं हुई है. आज भी दुनिया में करीब 13.3 करोड़ लड़कियां स्कूल नहीं जाती हैं. 1995 में बीजिंग में एक घोषणा हुई थी, जिसमें कहा गया था कि महिलाओं को जीवन के हर क्षेत्र में, खासकर शिक्षा में, बराबर मौका मिलना चाहिए. अब 30 साल बाद, कुछ सुधार तो हुआ है, लेकिन यूनेस्को के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि लैंगिक समानता की यह यात्रा अभी अधूरी है. जीईएम टीम के एक सदस्य ने पीटीआई को बताया, "1995 के बाद से, दुनिया शिक्षा में लैंगिक समानता के करीब पहुंच गई है. अब लड़कियां प्राथमिक, निम्न और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में लड़कों के बराबर नामांकन करा रही हैं. वैश्विक स्तर पर, तीन दशक पहले की तुलना में 9.1 करोड़ अधिक लड़कियां प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और 13.6 करोड़ अधिक लड़कियां माध्यमिक शिक्षा प्राप्त कर रही हैं." 'उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन तीन गुना बढ़कर 4.1 करोड़ से 1.3 करोड़ 90 लाख हो गया है. ये आंकड़े मायने रखते हैं. ये बाधाएं दूर करने और अवसरों का विस्तार करने के दशकों के सामूहिक प्रयासों को दर्शाते हैं. फिर भी, तस्वीर पूरी तरह से अधूरी है. आज, 1.3 करोड़ लड़कियां स्कूल से बाहर हैं.' गरीब लड़कियों को स्कूल नहीं भेजा जाता यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में शिक्षा में लैंगिक समानता की दिशा में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी भेदभाव होता दिखता है. ओशिनिया में पहले लड़के और लड़कियों को एक समान मानते थे लेकिन अब वहां ऐसा नहीं है. वहीं लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों में माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों की तुलना में लड़कों की स्थिति कमजोर है. जब गरीबी और स्थान जैसी सामाजिक परिस्थितियां जेंडर के साथ जुड़ती हैं, तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है जैसे गिनी और माली जैसे देशों में लगभग कोई भी गरीब युवती स्कूल नहीं जाती. रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा में सुधार बहुत कम है. केवल दो-तिहाई देशों में प्राथमिक स्तर पर और लगभग तीन-चौथाई देशों में माध्यमिक स्तर पर ही यौन शिक्षा अनिवार्य है. कई जगहों पर स्कूल की किताबें ऐसी हैं, जिनमें अभी भी पुराने विचार हैं. हालांकि शिक्षकों में महिलाओं की संख्या अधिक है, लेकिन शिक्षा नेतृत्व में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है. उच्च शिक्षा में केवल 30 प्रतिशत महिलाएं ही नेतृत्व की भूमिकाओं में हैं. यह असमानता शिक्षा को समानता और सशक्तिकरण का वास्तविक साधन बनने से रोकती है.

भारत रूस के साथ कर रहा 10,000 करोड़ की बड़ी रक्षा डील, S-400 की कामयाबी के बाद

नई दिल्ली भारत और रूस के बीच S-400 को लेकर जारी डील को और मजबूती देने की तैयारी चल रही है। इसके लिए करीब 10,000 करोड़ मूल्य के एक बड़े शस्त्र पैकेज की खरीद को लेकर काम चल रहा है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह कदम वायु रक्षा क्षमता को और मजबूती देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। इस संबंध में रूस के साथ बातचीत चल रही है। सैन्य सूत्रों ने दावा किया है कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना के S-400 प्रणाली ने पाकिस्तान को परास्त करने में अहम भूमिका निभाई। उसी दौरान पाकिस्तान की 5-6 लड़ाकू विमान व एक जासूसी विमान को 300 किमी से अधिक दूरी पर ही मार गिराने में मदद मिली। अधिकारियों ने S-400 को भारत की वायु रक्षा रणनीति में गेम चेंजर बताया है। रक्षा मंत्रालय जल्द ही इस खरीद प्रस्ताव को मंजूरी के लिये डिफेंस अक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में पेश करने की संभावना रहेगी, जिसकी अगली बैठक 23 अक्तूबर को प्रस्तावित है। सूत्रों का कहना है कि जरूरतों के मद्देनजर मिसाइलों की खरीद बड़ी संख्या में की जाने की योजना है। 2018 में रूस के साथ हुए समझौते के तहत कुल 5 स्क्वाड्रन S-400 प्राप्त करने पर सहमति बनी थीस जिनमें से तीन स्क्वाड्रन अब डिलीवर कर संचालित किए जा चुके हैं। चौथे स्क्वाड्रन की डिलीवरी रूस-युक्रेन युद्ध के प्रभाव से धीमी पड़ी थी। दोनों पक्षों के बीच आगे और S-400 तथा उन्नत S-500 प्रणालियों को शामिल करने पर भी विचार-विमर्श जारी है। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना रूसी निर्मित बीयॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइलों की खरीद तथा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और उसके विविध वेरिएंटों को और मजबूत करने के विकल्पों को भी परख रही है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इन कदमों से भारत और मजबूत होगा। रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से अभी तक किसी खरीद अनुबंध की पुष्टि नहीं की है; हालांकि बातचीत और आवश्यक तकनीकी, वित्तीय पहलुओं पर दोनों पक्ष सक्रिय हैं। रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि सीमाओं पर बदलते खतरों और तकनीकी गतिशीलता को देखते हुए देश की वायु रक्षा प्रणालियों का विस्तार आवश्यक बना हुआ है।