samacharsecretary.com

कड़ाके की सर्दी का प्रहार! कई राज्यों में शीतलहर का IMD अलर्ट, तापमान में भारी गिरावट

नई दिल्ली  देशभर में सर्दी का असर लगातार बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में उत्तर और मध्य भारत में ठंड का प्रकोप (Weather Update) और तेज़ होगा। पश्चिमी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 16 नवंबर तक शीतलहर (Cold Waves) की स्थिति बनी रहेगी। वहीं, दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में अगले दो दिनों तक भारी बारिश की संभावना है।   उत्तर भारत में सर्दी और कोहरे की चपेट हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में तापमान 0°C से नीचे चला गया है। लाहौल-स्पीति, मनाली, नैनीताल, चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। शीतलहर के कारण जनजीवन प्रभावित है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में 16 नवंबर को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादल छाने और हल्की बारिश व बर्फबारी की संभावना जताई गई है।   MP और CG में शीतलहर MP में वर्तमान में किसी प्रभावी मौसम प्रणाली के सक्रिय नहीं रहने और लगातार सर्द हवाएं चलने से ठिठुरन बरकरार है। भोपाल, इंदौर सहित कई शहरों में लगातार पांच दिन तक तीव्र शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, मौसम का इस तरह का मिजाज अभी तीन-चार दिन तक और बना रह सकता है। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर ठंड ने दस्तक दे दी है। IMD ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 16 नवंबर तक छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में शीत लहर चलने की संभावना है।   मौसम विभाग ने ओडिशा, हरियाणा, हिमाचल, असम, दिल्ली और चंडीगढ़ में हल्के से घने कोहरे की चेतावनी दी है। दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में रात और सुबह के समय घना कोहरा छाने की संभावना है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, बुधवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 418 दर्ज किया गया, जो “गंभीर श्रेणी” में आता है। प्रदूषण के साथ अब कोहरे की परत ने भी शहर को ढक लिया है, जिससे दृश्यता में भारी गिरावट आई है। दक्षिण भारत में भारी बारिश का अलर्ट दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण दक्षिण भारत में बारिश का दौर जारी है। 13 नवंबर 2025 को केरल, तमिलनाडु, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और लक्ष्यद्वीप में आंधी-तूफान, गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। UP में तापमान में गिरावट उत्तर प्रदेश में दिन का तापमान सामान्य है, लेकिन पछुआ हवाओं ने न्यूनतम तापमान में गिरावट ला दी है। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि लखनऊ और पूर्वी यूपी के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस तक की कमी होगी। बिहार में ठंड और धुंध का असर बिहार में सुबह-शाम धुंध और ठंड का असर बना हुआ है, जबकि दिन में हल्की गर्मी महसूस की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, दिसंबर से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण राज्य में ठंड और बढ़ सकती है।  

प्रदूषण से लड़ाई तेज: सभी राज्यों में चेस्ट क्लीनिक खोलने और डॉक्टरों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के निर्देश

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने देश भर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। इसका उद्देश्य वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटना है। केंद्र ने निर्देश दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में 'चेस्ट क्लीनिक' (Chest Clinics) का संचालन सुनिश्चित किया जाए।   'राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम' के तहत पहल यह पहल राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम (NPCC H H) के तहत की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई का निर्देश देते हुए कहा है कि प्रदूषण बढ़ने के कारण श्वसन (Respiratory) और हृदय (Cardiovascular) संबंधी बीमारियों के मामलों में तेज़ी आती है इसलिए अस्पतालों को विशेष तैयारी रखनी होगी। क्लीनिकों के संचालन पर मुख्य निर्देश: सक्रियता की अवधि: आमतौर पर जिन महीनों में वायु प्रदूषण सबसे अधिक होता है (यानी सितंबर से मार्च) उन महीनों के दौरान इन क्लीनिकों से प्रतिदिन कम-से-कम दो घंटे तक काम करने की अपेक्षा की जाती है। स्थापना स्थल: ये चेस्ट क्लीनिक शहरी क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्थापित किए जा सकते हैं। कवरेज: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत ऐसे सभी क्लीनिकों को कवर किया जाएगा।   रोगियों की जांच, उपचार और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य परामर्श में स्पष्ट किया गया है कि इन चेस्ट क्लीनिकों का मुख्य कार्य प्रदूषण के कारण बढ़े श्वसन और हृदय रोगों से पीड़ित रोगियों की जांच करना और उनका उपचार करना होगा। डिजिटल रिकॉर्ड: राज्य या राष्ट्रीय स्तर के डिजिटल उपकरणों जैसे कि एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) के माध्यम से इन रोगियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड बनाए रखा जाए। उच्च जोखिम वाले रोगियों की पहचान: प्रदूषण से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले उच्च जोखिम वाले रोगियों (High-risk patients) की पहचान की जाए और उनका एक रजिस्टर बनाया जाए। सामुदायिक समन्वय: ऐसे उच्च जोखिम वाले लोगों का विवरण संबंधित ब्लॉक की आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम (ANMs) और सीएचओ (CHOs) के साथ भी साझा किया जाए ताकि सामुदायिक स्तर पर भी देखभाल हो सके।   स्टाफ को प्रशिक्षण और तैयारियों पर ज़ोर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में कहा कि सर्दियों के दौरान देश के कई हिस्सों में हवा की गुणवत्ता अक्सर 'खराब' (Poor) से लेकर 'गंभीर' (Severe) स्तर तक पहुंच जाती है जो एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती पैदा करती है। परामर्श में डॉक्टरों और कर्मचारियों को श्वसन और हृदय संबंधी मामलों में बेहतर उपचार और देखभाल प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण (Training) देने पर भी विशेष ज़ोर दिया गया है। स्वास्थ्य सचिव ने अपने पत्र का समापन इस बात पर ज़ोर देते हुए किया कि मिलकर काम करने से हम एक स्वस्थ, स्वच्छ और अधिक लचीले इकोसिस्टम की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।  

पाकिस्तानी मंत्री के उकसाऊ बोल: कहा– भारत से दो तरफा जंग होगी, अल्लाह देगा मदद

इस्लामाबाद  अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से टकराव के बाद पाकिस्तान अब दोनों दिशाओं से घिरता जा रहा है। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पाक हुकूमत और उसके मंत्री लगातार भड़काऊ बयान दे रहे हैं। इसी क्रम में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर विवादित बयान देते हुए कहा है कि “पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार है।” एक मीडिया   रिपोर्ट के अनुसार, आसिफ ने पाकिस्तान में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा-“हम दोनों मोर्चों पर युद्ध के लिए तैयार हैं। हम पूर्वी सीमा (भारत) और पश्चिमी सीमा (अफगानिस्तान) दोनों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अल्लाह ने पहले दौर में हमारी मदद की थी और वह दूसरे दौर में भी हमारी मदद करेगा।” पाकिस्तान सरकार पर जबरदस्त दबाव अफगानिस्तान में तालिबान के साथ बढ़ते तनाव और देश में आतंकी घटनाओं के चलते पाकिस्तान सरकार पर जबरदस्त दबाव है। ऐसे में ख्वाजा आसिफ और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जैसे नेता अब भारत पर आरोप लगाकर अपनी जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।हाल ही में इस्लामाबाद में हुए आत्मघाती विस्फोट के बाद भी पाकिस्तान ने बिना किसी सबूत के भारत को दोषी ठहराया था, जबकि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने उस हमले की जिम्मेदारी खुद ली थी। हम युद्ध की स्थिति में   इस्लामाबाद विस्फोट के बाद ख्वाजा आसिफ ने कहा था-“हम युद्ध की स्थिति में हैं। जो कोई सोचता है कि पाकिस्तानी सेना केवल सीमा पर लड़ रही है, उसे इस्लामाबाद अदालतों में हुए आत्मघाती हमले को चेतावनी समझनी चाहिए। यह पूरे पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध है।” भारत का करारा जवाब पाकिस्तान की झूठी बयानबाजी पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान अपने आंतरिक अराजकता और संविधान की हत्या को छिपाने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है। भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान की आदत है कि वह हर असफलता का ठीकरा दूसरों पर फोड़ता है, जबकि आतंकवाद की जड़ें उसी की अपनी जमीन में हैं।

विमान दुर्घटना में पायलट निर्दोष: जांच रिपोर्ट पर केंद्र की सफाई

नई दिल्ली  केंद्र ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि 12 जून को हुए विमान हादसे के संबंध में एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट में एअर इंडिया के पायलट को दोषी नहीं ठहराया गया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को बताया कि विमान दुर्घटना की जांच के लिए विमान दुर्घटना जांच बोर्ड की जांच टीम का गठन अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के तहत किया गया था और इसके लिए वैधानिक प्रावधान है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा, ‘‘एएआईबी जाँच किसी पर दोष मढ़ने के लिए नहीं है। यह केवल कारण स्पष्ट करने के लिए है ताकि ऐसा दोबारा न हो।'' मामले में एक गैर सरकारी संगठन की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि इतने बड़े पैमाने की दुर्घटना की ‘कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' की तरह समानांतर जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पायलट फेडरेशन ने कहा है कि इन विमानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता और इनमें उड़ान भरने वाले लोगों के लिए बहुत बड़ा खतरा है। न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि यह कार्यवाही एक एअरलाइन बनाम दूसरी एअरलाइन के बीच लड़ाई नहीं बननी चाहिए। उन्होंने मेहता से मृतक के पिता द्वारा दायर याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी। इस साल 12 जून को, एअर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 171 वाला बोइंग 787-8 विमान लंदन के गैटविक हवाई अड्डे के लिए अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एक मेडिकल हॉस्टल परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिससे इसमें सवार 241 लोगों सहित कुल 265 लोगों की मौत हो गई थी। विमान में सवार मरने वाले लोगों में से 169 भारतीय, 52 ब्रिटिश, सात पुर्तगाली और एक कनाडाई नागरिक तथा चालक दल के 12 सदस्य शामिल थे। दुर्घटना में जीवित बचे एकमात्र व्यक्ति ब्रिटिश नागरिक विश्वाशकुमार रमेश थे।   

अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो का दावा: दिल्ली विस्फोट आतंकियों की साजिश

न्यूयॉर्क  अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ( Marco Rubio) ने कहा कि दिल्ली में लाल किला कार विस्फोट (Red Fort car blast) की जांच में भारत ने ‘‘बहुत संयमित, सतर्क और अत्यंत पेशेवर'' तरीके से काम किया है। रूबियो ने यह भी कहा कि ‘‘यह स्पष्ट रूप से एक आतंकी हमला था।'' उन्होंने बताया कि अमेरिका ने जांच में ‘‘मदद की पेशकश'' की है लेकिन भारत इस तरह की जांच करने में ‘‘बेहद सक्षम है।'' रुबियो ने बुधवार को कनाडा के हैमिल्टन शहर में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हां, हम इस घटना की गंभीरता और उसके संभावित प्रभाव से अवगत हैं। लेकिन मेरा मानना है कि भारतीय अधिकारियों की सराहना की जानी चाहिए, उन्होंने बहुत संयमित, सतर्क और पेशेवर तरीके से जांच की है।'' उन्होंने कहा, ‘‘जांच जारी है। यह स्पष्ट रूप से एक आतंकी हमला था। एक कार में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भरी हुई थी, जो फट गई और कई लोगों की जान चली गई। लेकिन भारत बहुत अच्छी तरह से जांच कर रहा है और मेरा विश्वास है कि जब उनके पास सभी तथ्य होंगे, तो वे उन्हें सार्वजनिक करेंगे।'' रुबियो ने जी7 के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की थी। उनसे पूछा गया कि वह लाल किला विस्फोट और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर कितने चिंतित हैं खासकर उस पृष्ठभूमि में जब इस साल मई में दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों के बीच झड़पें हुई थीं और भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान में आतंकी ढांचे पर कार्रवाई की थी, जो 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी। इस पर रुबियो ने कहा, ‘‘हम इस घटना के संभावित परिणामों से वाकिफ हैं। हमने आज इस पर थोड़ी चर्चा भी की है कि इसका दायरा कितना बढ़ सकता है। लेकिन हम इंतजार करेंगे और देखेंगे कि भारत की जांच क्या सामने लाती है।'' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने मदद की पेशकश की है ‘‘लेकिन मुझे लगता है कि वे (भारतीय एजेंसियां) इस तरह की जांच में बहुत सक्षम हैं। उन्हें हमारी मदद की आवश्यकता नहीं है। वे बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और मैंने पाया कि वे हमेशा की तरह इस बार भी बहुत संयमित और पेशेवर तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।'' भारत ने लाल किले के बाहर कार विस्फोट को बुधवार को ‘‘घृणित आतंकी घटना'' करार दिया और जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे इस मामले की जांच ‘‘अत्यंत तत्परता और पेशेवर तरीके'' से करें ताकि अपराधियों और उनके प्रायोजकों को बिना किसी देरी के न्याय के शिकंजे में लाया जा सके। रुबियो से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज जी7 एफएमएम सत्र में विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात हुई। दिल्ली में विस्फोट में जनहानि पर उनकी संवेदनाओं के लिए आभार व्यक्त करता हूं। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की विशेष रूप से व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर। साथ ही यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भी विचार साझा किए।''   

ट्रंप का विवादित संदेश: इजराइल में नेतन्याहू पर ‘माफी’ की राजनीति गरमाई

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को इजराइल के राष्ट्रपति को एक पत्र भेजकर उनसे देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे में क्षमा करने का अनुरोध किया है। इस घटनाक्रम को लेकर देश में अमेरिकी प्रभाव के बारे में चिंता जताई जा रही है। नेतन्याहू की ओर से इस मामले में हस्तक्षेप करने का ट्रंप का यह नवीनतम प्रयास था, जिससे इजराइल के आंतरिक मामलों में अमेरिका के अनुचित प्रभाव पर अब सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप ने पिछले महीने इजराइल की संसद में अपने भाषण के दौरान भी नेतन्याहू को क्षमा करने का अनुरोध किया था। वह गाजा में युद्ध के लिए अपनी युद्धविराम योजना के सिलसिले में इजराइल की संक्षिप्त यात्रा पर गये थे । इजराइल के राष्ट्रपति आइजैक हरजोग को बुधवार को लिखे पत्र में ट्रंप ने भ्रष्टाचार के मामले को ‘‘राजनीतिक एवं अनुचित अभियोजन'' करार दिया । ट्रंप ने पत्र में लिखा है, ‘‘जैसा कि महान इजराइल देश और अद्भुत यहूदी लोग पिछले तीन वर्षों के बेहद कठिन समय से आगे बढ़ रहे हैं, मैं आपसे (प्रधानमंत्री) बेंजामिन नेतन्याहू को पूरी तरह से क्षमा करने का आह्वान करता हूं, जो युद्ध के समय एक दुर्जेय और निर्णायक प्रधानमंत्री रहे हैं, और अब इजराइल को शांति के समय में ले कर जा रहे हैं।'' इजराइल के इतिहास में नेतन्याहू एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है। उनके विरुद्ध तीन अलग-अलग मामलों में धोखाधड़ी, विश्वासघात और रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। उनके खिलाफ अमीर राजनीतिक समर्थकों के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाया गया है। नेतन्याहू ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और ट्रंप जैसी भाषा में इसकी निंदा करते हुए इसे मीडिया, पुलिस और न्यायपालिका द्वारा रची गई एक मनगढ़ंत साजिश करार दिया। नेतन्याहू ने ‘एक्स' पर बृहस्पतिवार की देर रात पोस्ट में ट्रंप के प्रति आभार जताया, हालांकि, यह स्पष्ट रूप से माफी के अनुरोध से संबंधित नहीं था। उन्होंने लिखा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप, आपके अद्भुत समर्थन के लिए धन्यवाद। हमेशा की तरह, आप सीधे मुद्दे पर आते हैं और जैसा है, वैसा ही कहते हैं। मैं सुरक्षा को मज़बूत करने और शांति का विस्तार करने के लिए हमारी साझेदारी को जारी रखने को उत्सुक हूं।'' नेतन्याहू कई बार गवाही दे चुके हैं, लेकिन अक्टूबर 2023 में हमास के आतंकवादी हमलों के बाद शुरू हुये युद्ध और अशांति से निपटने के कारण मामले में बार-बार देरी हुई है। इज़राइल का राष्ट्रपति पद काफी हद तक एक औपचारिक है, लेकिन राष्ट्रपति के पास क्षमादान देने का अधिकार है। राष्ट्रपति हरजोग ने पत्र मिलने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि क्षमादान मांगने वाले किसी भी व्यक्ति को औपचारिक अनुरोध प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि वह नेतन्याहू के अनुरोध पर क्या प्रतिक्रिया देंगे । इजराइल के राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से केवल इतना कहा कि उनका मानना ​​है कि यह मुकदमा देश के लिए एक विकर्षण और विभाजन का स्रोत रहा है और वह चाहते हैं कि नेतन्याहू और अभियोजन पक्ष किसी समझौते पर पहुंचें।

सिर्फ एक की नहीं जिम्मेदारी! CJI गवई ने विदाई से पहले दिया देश को खास संदेश

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने आह्वान किया है कि लैंगिक समानता (Gender justice) की दिशा में हमारी यात्रा तभी सफल होगी, जब महिलाएँ और पुरुष दोनों मिलकर सहयोग करेंगे और किसी भी चुनौती को पार पाने में समान रूप से योगदान देंगे। इसके साथ ही CJI गवई ने इस बात पर भी जोर दिया कि लैंगिक न्याय हासिल करना सिर्फ महिलाओं की इकलौती जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए पुरुषों को यह स्वीकार करना होगा कि उनके पास मौजूद असमान शक्ति को साझा करना नुकसान की बात नहीं है, बल्कि समग्र रूप से समाज की मुक्ति की दिशा में एक कदम है।   CJI ने बुधवार को ये बातें 30वें जस्टिस सुनंदा भंडारे स्मृति व्याख्यान में "सभी के लिए न्याय: लैंगिक समानता और समावेशी भारत का निर्माण" विषय पर देते हुए कहीं। उन्होंने कहा, "लैंगिक न्याय प्राप्त करना सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए पुरुषों द्वारा, विशेष रूप से हमारे संस्थानों, कार्यस्थलों और राजनीतिक व्यवस्थाओं में सत्ता के पदों पर आसीन पुरुषों द्वारा, सत्ता की सक्रिय पुनर्कल्पना की जरूरत है।" उन्होंने कहा, “वास्तविक प्रगति तभी होगी जब पुरुष यह समझेंगे कि सत्ता साझा करना नुकसान नहीं, बल्कि समाज की मुक्ति का कार्य है। इसलिए, लैंगिक समानता वाले भारत का मार्ग टकराव में नहीं, बल्कि सहयोग में निहित है, जहाँ पुरुष और महिलाएँ मिलकर हमारे संविधान द्वारा परिकल्पित समानता के नैतिक और संस्थागत ढाँचे का पुनर्निर्माण करते हैं।” 75 वर्षों की प्रगति का भी किया उल्लेख बार एंड बेंच के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश गवई ने अपने व्याख्यान में 1950 में भारत के संविधान के लागू होने से लेकर 25-25 वर्षों के तीन चरणों में इस क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "1975 के बाद, लैंगिक समानता पर राष्ट्रीय विमर्श औपचारिक अधिकारों के प्रश्नों से आगे बढ़कर, समानता के एक अभिन्न अंग के रूप में गरिमा के गहन विचार की ओर मुड़ने लगा। बातचीत केवल कानूनी समानता से आगे बढ़कर महिलाओं की स्वायत्तता, शारीरिक अखंडता और उनके जीवन के अनुभवों को आकार देने वाली सामाजिक वास्तविकताओं की मान्यता की ओर मुड़ गई।" मानव गरिमा की संरक्षक रहीं अदालतें: CJI उन्होंने कहा कि नागरिक समाज की सतर्कता, महिला आंदोलनों की दृढ़ता और आम नागरिकों के साहस ने मिलकर न्यायपालिका को समानता के संवैधानिक वादे के प्रति जवाबदेह बनाये रखा है। उन्होंने कहा कि मान्यता और समानता के लिए प्रारंभिक संघर्षों से लेकर अंतर्संबंधी और सहभागी न्याय के वर्तमान युग तक, अदालतें अक्सर समानता और मानव गरिमा के संरक्षक के रूप में खड़ी रही हैं। चुनौतियों से भरा रहा है इतिहास जस्टिस गवई ने कहा, ‘‘यह विकासक्रम चुनौतियों से रहित नहीं रहा है। ऐसे कई अवसर आए जब न्यायिक व्याख्याएं महिलाओं के वास्तविक जीवन के अनुभवों को सही तरह नहीं समझ सकीं या संविधान की परिवर्तनकारी भावना पर खरी नहीं उतरीं।” उन्होंने कहा कि नागरिक समाज की सतर्कता, महिला आंदोलनों की निरंतरता और साधारण नागरिकों के साहस ने मिलकर न्यायपालिका को समानता के संवैधानिक वादे के प्रति जवाबदेह बनाए रखा है। यात्रा अभी भी अधूरी इस कार्यक्रम में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी के उपाध्याय और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एम बी लोकुर भी शामिल हुए। प्रधान न्यायाधीश गवई ने कहा, ‘‘अदालतों और लोगों के बीच संवाद भारत की लोकतांत्रिक ताकत के सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है, जो हमें याद दिलाता है कि लैंगिक समानता की ओर बढ़ना कोई मंजिल नहीं है, बल्कि यह एक प्रतिबद्धता है जिसे लगातार नवीनीकृत किया जाता है।’’ हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रगति के बावजूद, वास्तविक लैंगिक समानता की दिशा में यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। बता दें कि जस्टिस गवई इसी महीने 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

अब बिना FASTag वालों की बढ़ेगी जेब ढील: 15 नवंबर से दोगुना टोल देना होगा

नई दिल्ली अगर आप अक्सर हाइवे पर सफर करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार ने टोल प्लाज़ा के नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जो 15 नवंबर 2025 से लागू होगा। इस बदलाव के बाद अब टोल का भुगतान करने के तरीके के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा यानी नकद भुगतान करने पर ज्यादा टोल, जबकि डिजिटल भुगतान करने पर राहत मिलेगी। नया नियम क्या कहता है? केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में संशोधन किया है। इसके तहत अब अगर कोई वाहन चालक बिना वैध FASTag के टोल प्लाज़ा में प्रवेश करता है, तो उससे दोगुना शुल्क वसूला जाएगा। लेकिन अगर FASTag फेल हो जाने पर चालक UPI या किसी डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है, तो उसे केवल 1.25 गुना टोल शुल्क ही देना होगा। आसान उदाहरण से समझिए मान लीजिए किसी वाहन का सामान्य टोल 100 रुपये है — ➤ अगर FASTag सही काम कर रहा है, तो ड्राइवर को सिर्फ 100 रुपये देने होंगे। ➤ अगर FASTag फेल हो गया और ड्राइवर नकद भुगतान करता है, तो उसे 200 रुपये चुकाने होंगे। ➤ लेकिन अगर डिजिटल माध्यम (जैसे UPI, कार्ड या नेटबैंकिंग) से भुगतान किया जाता है, तो केवल 125 रुपये देने होंगे। ➤ यानी अब डिजिटल भुगतान करने वालों को सीधी छूट मिलेगी, जबकि नकद लेनदेन पर भारी जुर्माना लगेगा। सरकार का मकसद क्या है? मंत्रालय का कहना है कि यह बदलाव टोल प्लाज़ा पर पारदर्शिता बढ़ाने, नकद लेनदेन कम करने और डिजिटल इंडिया मिशन को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। इससे टोल प्लाज़ा पर लगने वाली लंबी कतारों में भी कमी आएगी और यात्रियों को तेज़ और सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा। टोल प्रणाली को और आधुनिक बनाने की तैयारी सरकार आने वाले समय में टोल सिस्टम को पूरी तरह ऑटोमैटिक और GPS आधारित बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत भविष्य में गाड़ी के सफर की दूरी के हिसाब से टोल काटा जा सकेगा।  

राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध: 8 आतंकियों की योजना, 4 शहर और 4 कारें देश भर में आतंक फैलाने के लिए

नई दिल्ली दिल्ली के लाल किला के पास हुए धमाके ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। सरकार ने इसे आतंकी साजिश करार दिया है। इस धमाके को लेकर जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। आतंकी सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग शहरों में सीरियल ब्लास्ट करने की फिराक में थे। जांच में सामने आया है कि आठ आतंकवादियों ने चार बड़े शहरों को अपना टारगेट बनाया था। इनका प्लान था कि दो-दो के ग्रुप में चार शहरों में घुसकर आईईडी से तबाही मचाई जाए। पैसों को लेकर डॉक्टरों में झगड़ा टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, उमर और शाहीन ने मिलकर करीब 20 लाख रुपये कैश जुटाए, जो दिल्ली ब्लास्ट से पहले उमर को सौंप दिए गए। लेकिन यहीं से ट्विस्ट आया। उमर और डॉ. मुजम्मिल के बीच पैसे को लेकर झगड़ा हो गया। उमर ने सिग्नल ऐप पर 2-4 मेंबर्स का सीक्रेट ग्रुप बना लिया। इतना ही नहीं, इन आतंकियों ने गुरुग्राम, नूह और आसपास के इलाकों से 20 क्विंटल से ज्यादा एनपीके फर्टिलाइजर खरीदा जिसकी कीमत करीब 3 लाख रुपये थी। गाड़ियों में छिपी तबाही की योजना जांच में पता चला कि दिल्ली की i20 और इकोस्पोर्ट जैसी पुरानी गाड़ियों के बाद, ये आतंकी दो और ऐसी ही गाड़ियां तैयार कर रहे थे। ताकी इन गाड़ियों के अंदर विस्फोटक भरकर बड़ा ब्लास्ट कर सकें। एजेंसियां अब ये पता लगा रही हैं कि क्या अलग-अलग वाहन ब्लास्ट के लिए स्पेशल तौर पर बनाए जा रहे थे। दिल्ली ब्लास्ट का कनेक्शन और एनआईए की टीम ये सब कुछ दिल्ली के लाल किले में हुए धमाके के ठीक बाद सामने आया, जहां कम से कम 10 लोग मारे गए और कई घायल हो गए। जांचकर्ताओं का मानना है कि ये जैश-ए-मोहम्मद के नए मॉड्यूल का काम था। अब एनआईए ने एसपी रैंक के सीनियर ऑफिसर्स की स्पेशल टीम गठित की है, जो पूरे मामले की गहराई से तहकीकात करेगी।

छह हफ्तों बाद अमेरिका में राहत — सीनेट वोट के बाद ट्रंप के दस्तखत से समाप्त हुआ शटडाउन

वाशिंगटन      डोनाल्ड ट्रंप झुक गए हैं और इसके साथ ही अमेरिकी इतिहास का सबसे लंबा सरकारी शटडाउन (US Shutdown) करीब 43 दिन बाद खत्म हो रहा है. बुधवार रात को सीनेट में शटडाउन खत्म करने से जुड़ा बिल पास हुआ. इसे 222-209 मतों से पारित किया गया. व्हाइट हाउस की ओर से भी पुष्टि कर दी गई है कि Donald Trump इस विधेयक पर साइन कर दिया है. अब सरकारी कामकाज औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा. ये न सिर्फ America GDP के लिए गुड न्यूज है, बल्कि अमेरिका के करीब 4 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है. आइए जानते हैं कैसे?  शटडाउन क्यों लगाया गया था?  सबसे पहले बताते हैं कि आखिर अमेरिका में इस लंबे शटडाउन की स्थिति बनी कैसे? तो, जान लीजिए अमेरिकी सीनेट में सरकारी खर्चों से जुड़े बिल पर सहमति न बन पाना इसका कारण रहा. सीनेट मेंबर्स ने इसे 14 बार खारिज किया था और US Shutdown की नौबत आ गई. रिपोर्ट के मुताबिक, अब शटडाउन स्वास्थ्य सेवा सब्सिडी (Health Service Subsidy) पर बिना किसी समाधान के साथ खत्म हो रहा है, जो डेमोक्रेट्स की सबसे बड़ी मांग थी. राष्ट्रपति ट्रंप को इसे लेकर समझौता करना पड़ा.  उड़ानें बाधित, आर्थिक डेटा ठप्प अमेरिका में शटडाउन को लेकर बीते 6 सप्ताह से गतिरोध चल रहा था, जिस पर अब ब्रेक लगा है, लेकिन इसकी वजह से जो परेशानियां पैदा हुईं उनसे निजात पाने में अभी भी समय लगेगा. बता दें कि US Shutdown से एयरलाइंस बाधित हुई थीं, तो खाद्य सहायता में देरी का सामना करना पड़ा. इसके साथ ही अमेरिका के आर्थिक आंकड़े भी ठप्प नजर आए.  रिपोर्ट्स में परिवहन सचिव सीन डफी के हवाले से कहा गया है कि उड़ानों से प्रतिबंध हटाने और हवाई अड्डे का संचालन पूरी तरह से बहाल करने में करीब एक हफ्ते तक का समय लग सकता है. वहीं Delta Airlines CEO एड बास्टियन ने चेतावनी दी है कि शटडाउन के कारण रद्द होने वाली उड़ानों से एयरलाइन की कमाई पर बेहद खराब असर पड़ा है. हालांकि, उन्होंने थैंक्सगिविंग (US ThanksGiving) तक संचालन सामान्य होने की उम्मीद जताई है. GDP से करोड़ों अमेरिकियों तक नुकसान अमेरिका में शटडाउन का आर्थिक नुकसान बहुत ज्यादा देखने को मिला. कांग्रेस के बजट कार्यालय ने भी ये अनुमान जाहिर किया था कि इससे चौथी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर में 1.5% की कमी (US GDP Growth Slowdown)  आएगी, हालांकि अब संघीय कार्यक्रमों के फिर से शुरू होने और बकाया वेतन जारी होने पर इसमें कुछ सुधार देखने को मिल सकता है.  भले ही अब ट्रंप के झुकने और जिद छोड़ने के बाद सदन में पास हुए Funding Bill पर साइन करने से शटडाउन का The End हो गया है, लेकिन हकीकत में नुकसान तो हो ही चुका है. खासकर 4.2 करोड़ अमेरिकियों का, जो सीधे तौर पर फ़ूड स्टैम्प पर निर्भर हैं. इनमें से ज्यादातर नवंबर के लाभ से वंचित रह गए. तमाम राज्यों का कहना है कि  सहायता राशि को फिर से बढ़ाने में समय लग सकता है और इन लोगों को मदद के लिए एक और हफ्ते का इंतजार करना पड़ सकता है. 'ये मूर्खतापूर्ण और निरर्थक था'  7 सीनेट डेमोक्रेट और एक इंडिपेंडेंट मेंबर ने रिपब्लिकन के साथ मिलकर दिसंबर के मध्य तक सब्सिडी पर सीनेट में मतदान के बदले में वित्त पोषण विधेयक पारित किया. सदन के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने इसे निचले सदन में लाने की कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है. हालांकि, जॉनसन ने सख्त लहजे में बोला कि, 'जैसा कि हम शुरू से ही कहते आए हैं, यह शटडाउन अंततः पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण और निरर्थक था.'