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ट्रंप के दावे पर भारत का पलटवार! कहा—मोदी से कोई बातचीत नहीं हुई

नई दिल्ली  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई एक फोन कॉल का जिक्र कर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि उन्हें पीएम मोदी की तरफ से यह कहा गया है कि भारत अब रूस से कच्चे तेल का व्यापार नहीं करेगा। अब डोनाल्ड ट्रंप के इन दावों पर भारत का जवाब सामने आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्रंप के दावों पर एक सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है। गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पत्रकारों को बताया कि उन्हें ट्रंप के दावों में जिक्र किए गए किसी भी फोन कॉल की जानकारी नहीं है। जायसवाल ने बताया, "अमेरिका से ऊर्जा को लेकर जो टिप्पणी आई है उसे पर भारत ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। जहां तक टेलीफोन की बात है, तो मैं यह कह सकता हूं कि मेरी जानकारी के हिसाब से प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कल कोई बातचीत नहीं हुई है।” भारत का दो टूक जबाव वहीं इससे पहले विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर ट्रंप के दावों पर अमेरिका को दो टूक जवाब दिया था। रूस से तेल आयात बंद करने के अमेरिकी दबावोंं के बीच भारत ने अपने रूख को एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा है कि अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारत अपने लोगों के हितों की रक्षा करेगा और देश की आयात नीति इसी उद्देश्य को पूरा करने पर आधारित हैं। विदेश मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा, “भारत तेल और गैस का एक महत्वपूर्ण आयातक है। अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना हमारी निरंतर प्राथमिकता रही है। हमारी आयात नीतियां पूरी तरह इसी उद्देश्य से निर्देशित होती हैं।" बयान में आगे कहा गया कि स्थिर ऊर्जा मूल्य और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत की ऊर्जा नीति के लक्ष्य रहे हैं। इसमें ऊर्जा स्रोतों का व्यापक आधार बनाना और बाजार की स्थितियों के अनुरूप विविधता लाना भी शामिल है। वहीं अमेरिका से तेल आयात के संबंध में बयान में कहा गया," जहां तक अमेरिका का संबंध है, हम कई वर्षों से अपनी ऊर्जा खरीद का विस्तार करने का प्रयास कर रहे हैं। पिछले दशक में इसमें लगातार प्रगति हुई है। मौजूदा अमेरिकी सरकार ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को गहरा करने में रुचि दिखाई है। इस पर चर्चा जारी है।" ट्रंप का अजब-गजब दावा गौरतलब है कि गुरुवार सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार अजब गजब दावा किया। ट्रंप ने कहा उनके मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। ट्रंप ने बुधवार को अपने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि अमेरिका इस बात से खुश नहीं है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। उन्होंने कहा कि इससे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध के लिए पैसा मिलता है। ट्रंप ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘मोदी मेरे मित्र हैं, हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। हम उनके द्वारा रूस से तेल खरीदे जाने से खुश नहीं थे क्योंकि इससे रूस को यह बेतुका युद्ध जारी रखने का मौका मिला। इस युद्ध में उन्होंने लाखों लोगों को खो दिया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस बात से खुश नहीं था कि भारत तेल खरीद रहा है और मोदी ने आज मुझे आश्वासन दिया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे। यह एक बड़ा कदम है। अब हमें चीन से भी यही करवाना होगा।’’ ट्रंप ने आगे कहा, ‘‘उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि रूस से कोई तेल नहीं खरीदा जाएगा। मुझे नहीं पता, शायद यह बड़ी खबर हो। क्या मैं ऐसा कह सकता हूं?… वह रूस से तेल नहीं खरीद रहे हैं। यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वह इसे तुरंत नहीं कर सकते…लेकिन यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी।’’  

RSS पर शिकंजा कसने की तैयारी, कर्नाटक कैबिनेट ने शैक्षणिक संस्थानों में गतिविधियों पर लगाया प्रतिबंध

बेंगलुरु  कर्नाटक मंत्रिमंडल ने सरकारी स्कूलों और कॉलेज परिसरों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों को रोकने के लिए नियम लाने का फैसला किया है। राज्य के मंत्री प्रियांक खरगे ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि गुरुवार को कर्नाटक कैबिनेट ने राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के परिसरों में RSS की गतिविधियों को रोकने के लिए नियम लाने का फैसला किया है। खरगे की यह टिप्पणी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें उन्होंने एक दिन पहले ही कहा था कि उनकी सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि कैसे सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी संगठन लोगों को परेशान न करे। खरगे ने सीएम सिद्धारमैया को लिखी थी चिट्ठी कर्नाटक कैबिनेट के इस फैसले से राज्यभर के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और कॉलेजों के परिसरों में अब आरएसएस की बैठकों और अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लगने की संभावना है। RSS केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा की मातृ संस्था कही जाती है। बता दें कि प्रियांक खरगे ने ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी मंदिरों में आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने का आग्रह किया था, और इस संगठन पर युवाओं का ब्रेनवॉश करने और संविधान के विरुद्ध काम करने का आरोप लगाया था। खरगे के इस अनुरोध के बाद उन्हें धमकी भरे फोन कॉल आ रहे थे। धमकी देने पर एक व्यक्ति गिरफ्तार इस बीच, बेंगलुरु पुलिस ने महाराष्ट्र के एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर प्रियांक खरगे को फोन किया था और सार्वजनिक स्थानों पर आरएसएस की गतिविधियों को बैन करने के लिए मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को पत्र लिखने को लेकर उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणियां कीं। इस आरोपी ने जब खरगे को फोन किया था तब मंत्री ने इस बातचीत का वीडियो बना लिया था। उसके बाद सदाशिवनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद ‘बेंगलुरु सेंट्रल डिवीजन’ और कलबुर्गी पुलिस के संयुक्त अभियान में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। खरगे को धमकी देने वाला शख्स कौन? पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी की पहचान धनेश नरोने उर्फ ​​दानप्पा नरोने के रूप में हुई है, जो महाराष्ट्र के सोलापुर का रहने वाला है। सोलापुर कर्नाटक की सीमा से लगा हुआ एक जिला है। खरगे को फोन पर गालियां देने के बाद आरोपी अपने शहर से भागकर लातूर में छिप गया था। लेकिन बेंगलुरु और कलबुर्गी की पुलिस टीम ने उसका पता लगाया, उसे गिरफ्तार किया और बेंगलुरु ले आई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि धनेश बिस्कुट और कन्फेक्शनरी बनाने वाली कंपनियों के लिए मार्केटिंग एजेंट के तौर पर काम करता है। उसने एक सर्च इंजन की मदद से खरगे का फ़ोन नंबर हासिल किया था। खरगे ने बुधवार को एक वीडियो पोस्ट किया था बेंगलुरु पुलिस धनेश के पिछले रिकॉर्ड और ऐसे अपराधों में उसकी संलिप्तता की जांच के लिए पूछताछ कर रही है। खरगे ने बुधवार को एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें कथित तौर पर धनेश द्वारा की गई कॉल शामिल है। आरोपी ने मंत्री को उनके उस पत्र के लिए गाली दी जिसमें उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की थी। भाजपा ने बैन लगाने की दी चुनौती मंत्री ने ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा किया था जिसमें एक अज्ञात व्यक्ति फोन कॉल पर उन्हें गालियां और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा है। सिद्धरमैया ने कहा कि उनकी सुरक्षा बढ़ा दी जाएगी, जबकि राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। दूसरी तरफ, भाजपा ने खरगे के इस रुख की कड़ी आलोचना की और उन्हें राज्य में आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की चुनौती भी दी।  

बड़ी चुनौतियों के बीच नेतन्याहू ने जताई उम्मीद, शांति के अवसर कम नहीं

तेल अवीव इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने 'दुश्मनों की बड़ी चुनौतियों' के बीच भी 'शांति के बड़े अवसर' की बात की है। माउंट हर्जल में आयोजित एक राजकीय कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने ये विचार रखे। युद्ध में मिली सफलता की सराहना करते हुए, नेतन्याहू ने कहा, "हमारे दुश्मन अभी भी एक बड़ी चुनौती हैं। वे फिर से हथियार उठाने की फिराक में हैं।" उन्होंने स्पष्ट तौर पर ईरान का नाम नहीं लिया, लेकिन द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार इशारा उन्हीं की ओर था। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए नेतन्याहू ने कहा, "बड़ी चुनौतियां—और उनके साथ-साथ, शांति के दायरे को व्यापक बनाने के और बड़े अवसर हैं। हम अपने इस दावे को दोहराते हैं कि युद्ध के बाद इजरायल पड़ोसी अरब देशों के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने और शांति समझौतों का विस्तार करने के लिए तैयार है।" नेतन्याहू ने माना कि राष्ट्रीय एकता जरूरी है। वे बोले, "हम एक साथ दोनों स्तरों पर काम कर रहे हैं, और दोनों ही स्तरों पर एकता जरूरी है, युद्ध में भी और शांति में भी। हम अपने सभी लक्ष्य हासिल करेंगे, सिर्फ आंतरिक एकजुटता, आपसी जिम्मेदारी और उन बंधनों को मजबूत करके जो तोड़ते नहीं बल्कि जोड़ते हैं।" इससे पहले उन्होंने हर बंधक (शव) को वापस लाने की बात कही। बोले, "हम हर एक बंधक को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा, "संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। लेकिन आज एक बात स्पष्ट है: जो कोई भी हमारे खिलाफ हाथ उठाएगा, वह पहले से ही जानता है कि उसे अपनी आक्रामकता की बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हम उस जीत को हासिल करने के लिए दृढ़ हैं जो आने वाले कई वर्षों तक हमारे जीवन की दिशा तय करेगी।" उन्होंने शहीद सैनिकों के परिवारों से कहा, "मैं आपके दुख की गंभीरता को समझता हूं। मैं युद्ध में लड़ने वाले सभी सैनिकों—यहूदियों, ड्रूज, ईसाइयों, मुसलमानों, बेडोइन, सर्कसियन, और अन्य समूहों के सदस्य जो कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे—का राष्ट्र की ओर से आभार व्यक्त करता हूं।"

सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई: जम्मू-कश्मीर में आतंकी मोहम्मद शरीफ की संपत्ति जब्त

जम्मू-कश्मीर  जम्मू-कश्मीर में पुलिस ने आतंकी नेटवर्क पर बड़ा एक्शन लिया है. जिला पुलिस रियासी ने एसएसपी रियासीपरमवीर सिंह (जेकेपीएस) की देखरेख में पाकिस्तान-आधारित आतंकी मोहम्मद शरीफ मीरासी पुत्र गुलाम मोहम्मद संपत्ति को कुर्क किया है. आतंकी मोहम्मद शरीफ सिलधर महोर का रहने वाला है. पुलिस के मुताबिक, मोहम्मद शरीफ मीरासी ने वर्ष 2000 में आतंकी संगठनों का रुख किया था. इसके बाद वर्ष 2010 में पाकिस्तान भाग गया, जहां उसने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के उद्देश्य से हथियार, गोला-बारूद प्राप्त करने और आतंकी प्रशिक्षण लेने का कार्य किया. शुरुआत में वह हिजबुल मुजाहिदीन संगठन से जुड़ा रहा, बाद में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़कर सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाने लगा. UAPA और IMCO के तहत हुई कार्रवाई पुलिस ने बताया कि कार्रवाई के तहत सिलधर महोर स्थित खसरा नंबर 138 और 150 में दर्ज कुल 3 कनाल और 6 मरला भूमि को गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम [UAPA] की धारा 25 के तहत कुर्क किया गया है. यह कार्रवाई पुलिस थाना महोर में दर्ज एफआईआर संख्या 70/2024 से जुड़ी है, जिसमें धारा 61(2), 148, 149 बीएनएस और धारा 13, 18, 20, 38 UAPA के साथ-साथ IMCO अधिनियम की धारा 2/3 के प्रावधान शामिल हैं. राष्ट्र-विरोधियों के सशक्त संदेश इस संबंध में एसएसपी रियासी परमवीर सिंह ने कहा, “यह निर्णायक कदम आतंकवादी संगठनों और उनके सीमा पार संचालकों के लॉजिस्टिक, आर्थिक और संचालन तंत्र को ध्वस्त करने की हमारी व्यापक रणनीति का हिस्सा है. संपत्ति की कुर्की उन सभी के लिए एक सशक्त संदेश है जो देश के भीतर या बाहर से राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं या उनका समर्थन करते हैं.” आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अभियान रहेगा जारी वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बार फिर दोहराया है कि वह क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के अपने संकल्प पर अडिग है. वह आतंकवादी संगठनों के बुनियादी ढांचे और सहयोगी नेटवर्क को समाप्त करने के लिए निरंतर अभियान जारी रखेगी.  

श्रीशैलम की पवित्रता पर पीएम मोदी का बयान, कहा- हर हिस्से में महसूस की दिव्यता

श्रीशैलम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित श्री शिवाजी ध्यान मंदिर और श्री शिवाजी दरबार हॉल का दौरा किया। उन्होंने भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी और देवी भ्रामरांबिका के दर्शन किए। पीएम मोदी ने कहा कि श्रीशैलम में होना अत्यंत आनंद की बात है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महान छत्रपति शिवाजी महाराज वर्ष 1677 में श्रीशैलम आए थे और यहां श्री मल्लिकार्जुन मंदिर में प्रार्थना की थी। उन्होंने कहा कि "ध्यान मंदिर वह स्थान है, जहां शिवाजी महाराज ने ध्यान किया था और भ्रामराम्बा देवी से आशीर्वाद प्राप्त किया था।" बता दें कि ध्यान मंदिर के चारों कोनों पर चार प्रतिष्ठित किलों (प्रतापगढ़, राजगढ़, रायगढ़ और शिवनेरी) के मॉडल स्थापित हैं। इसके केंद्र में छत्रपति शिवाजी महाराज की गहन ध्यान मुद्रा में एक प्रतिमा है। यह केंद्र श्री शिवाजी स्मारक समिति की ओर से संचालित है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "श्रीशैलम में होना आनंद की बात है। इस पवित्र स्थान के हर कण में दिव्यता व्याप्त है। मैं यहां के लोगों के गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए उनका आभारी हूं। श्री भ्रामराम्बिका देवी और मल्लिकार्जुन स्वामी सदैव हमारे राष्ट्र पर कृपा बनाए रखें।" श्री भ्रामराम्बा और मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और 52 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर की अनूठी विशेषता एक ही मंदिर परिसर में एक ज्योतिर्लिंग और एक शक्तिपीठ का सह-अस्तित्व है, जो इसे पूरे देश में अपनी तरह का एक अनूठा मंदिर बनाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल में आयोजित कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि 2047 में आजादी के जब 100 साल होंगे, तब 'विकसित भारत' होकर रहेगा। मैं विश्वास से कहता हूं कि 21वीं सदी हिंदुस्तान की होने वाली है। 21वीं सदी 140 करोड़ हिंदुस्तानियों की सदी होने वाली है। उन्होंने कहा, "आज दुनिया भारत को 21वीं सदी के नए मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में देख रही है। इस सफलता का सबसे बड़ा आधार आत्मनिर्भर भारत का विजन है। हमारा आंध्र प्रदेश आत्मनिर्भर भारत का प्रमुख केंद्र बन रहा है। हमारी सरकार का विजन नागरिक-केंद्रित विकास है। हम लगातार नए रिफॉर्म के जरिए नागरिकों के जीवन को आसान बना रहे हैं।"

चीन ने अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव पर तोड़ी चुप्पी, कहा– ‘पड़ोसी बदले नहीं जा सकते’

बीजिंग  अफगानिस्तान और तालिबान के बीच हफ्तेभर के संघर्ष के बाद 48 घंटे का सीजफायर लागू है. लेकिन दोनों ओर से हल्की-फुल्की झड़प की रह-रहकर खबरें आ रही हैं. इस बीच चीन ने भी इस सीजफायर पर प्रतिक्रिया दी है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अस्थाई सीजफायर लागू करने और बातचीत के जरिए समाधान खोजने के पाकिस्तान और अफगानिस्तान के फैसले पर गौर किया है. यह दोनों पक्षों के साझा हितों को पूरा करता है और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के अनुकूल है. चीन इस कदम का स्वागत और समर्थन करता है. लिन जियान ने कहा कि चीन ने बार-बार इस मुद्दे पर अपनी रुख साफ किया है. चीन का रूस सहित दुनियाभर के देशों के साथ व्यापार और ऊर्जा सहयोग सामान्य है और यह पूरी तरह से वैध है. उन्होंने कहा कि अमेरिका का रुख एकतरफा और धौंस जमाने का रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों पर असर पड़ा है और दुनियाभर के उद्योगों की स्थिरता और सप्लाई चेन बाधित हुई है.  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों चीन के मित्रवत पड़ोसी हैं. ऐसे पड़ोसी हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता. चीन दोनों देशों का समर्थन करता है कि वे शांत और संयमित रहें, एक व्यापक और स्थायी युद्धविराम हासिल करें. संवाद और बातचीत के जरिए आपसी मतभेदों को सुलझाएं, राजनीतिक समाधान के रास्ते पर लौटें और दोनों देशों के बीच और क्षेत्र में शांति और स्थिरता को संयुक्त रूप से बनाए रखें. लिन ने कहा कि हम पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों को बेहतर बनाने और विकसित करने में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है. बता दें कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 48 घंटे के लिए अस्थायी युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनी है. सीमा पर ताजा झड़पों के बाद यह कदम उठाया गया है. पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच आठ अक्टूबर को संघर्ष शुरू हुआ था. यह संघर्ष पिछले हफ्ते शुरू हुआ जब पाकिस्तान ने काबुल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के ठिकानों पर हमला किया. पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग (ISPR) ने कहा था कि सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान बॉर्डर पर अफगान तालिबान के हमले को नाकाम कर दिया. इसके बाद पाकिस्तान सुरक्षा बलों और अफगान तालिबान के बीच मंगलवार रात को झड़पें हुई थीं. अफगानिस्तान के तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया था कि पाकिस्तानी सेना ने कंधार के स्पिन बोल्डक इलाके में हमला किया. इसके बाद बुधवार को पाकिस्तानी हवाई हमलों में काबुल और कंधार में 15 अफगान नागरिक मारे गए और 100 से ज्यादा घायल हो गए थे. इस घटना के बाद ही अफगानिस्तान ने बॉर्डर पर टैंक भेजे थे. इस तरह हफ्तेभर की जंग के बाद बुधवार शाम को 48 घंटे के लिए सीजफायर का ऐलान किया गया.

जब पूरा गांव पुलिस नियंत्रण में: माहौल हुआ तनावपूर्ण

जालंधर जालंधर सैंट्रल विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 5 के अंतर्गत आते चोहक कलां गांव में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब निहंग सिंह संगठनों ने गांव के एक सार्वजनिक स्थल, लंगर हॉल के अंदर एक निशान साहिब स्थापित कर दिया और हॉल के अंदर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज जी का प्रकाश करने के बाद, श्री अखंड पाठ साहिब जी का पाठ शुरू कर दिया। एस.सी. समुदाय द्वारा विरोध जताए जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसकी सूचना मिलने पर जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए तुरंत कार्रवाई की और डी.सी.पी. सुरक्षा नरेश डोगरा, ए.डी.सी.पी. सिटी-1 आकर्षि जैन, ए.डी.सी.पी. इन्वैस्टिगेशन जयंत पुरी, ए.डी.सी.पी. हैडक्वार्टर सुखविंदर सिंह, ए.सी.पी. सैंट्रल अमनदीप सिंह, ए.सी.पी. सुरक्षा गगनदीप सिंह घुमन, एस.एच.ओ. डिवीजन-5 साहिल चौधरी, एस.एच.ओ. रामा-मंडी मनजिंदर सिंह, एस.एच.ओ. थाना-2 जसविंदर सिंह और एस.एच.ओ. थाना नई बारांदरी रविंदर कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं और तुरंत चोहक कलां गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।   प्रमुख दलित नेता, इस गांव के पूर्व सरपंच, सामाजिक न्याय परिषद के संयोजक और पंजाब दलित महासभा के चेयरमैन रमेश कुमार चोहकां ने कहा कि उक्त स्थान गांव का एक साझा स्थान है और इसका इस्तेमाल जंज घर के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस स्थान पर धार्मिक, सामाजिक और शादी समारोह आयोजित किए जाते हैं, लेकिन आज कुछ निहंग सिंह संगठनों ने हॉल के अंदर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश करके श्री अखंड पाठ साहिब जी का जाप शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि चौहकां कलां वैल्फेयर सोसायटी द्वारा हाल को साफ कर जंज घर के रूप में प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि कुछ गांवों के लोगों के अनुरोध पर कुछ निहंग संगठनों ने इस स्थान पर कब्जा कर लिया है और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश किया गया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन का शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए धन्यवाद किया और कहा कि गांव का सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखा जाना चाहिए।   इस संबंध में नंबरदार जरनैल सिंह ने कहा कि यह स्थान गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा का लंगर हॉल है। गुरुद्वारा सिंह सभा हाल मात्र पांच मरले में बना हुआ है और गुरुद्वारा साहिब में न तो शौचालय है और न ही लंगर बनाने और परोसने की सुविधा के लिए जगह है, जिसके लिए यह लंगर हॉल स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह लंगर हॉल गुरुद्वारा साहिब जी के संकल्पों के अनुसार 2014 में बनाया था। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने एस.सी. समुदाय के लोगों को इस स्थान को समागमों के लिए प्रयोग करने की सहमति दी थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से गुरु घर के इस स्थान पर शादी समारोह आयोजित किए गए और गुरु घर के लंगर हॉल में डीजे बजाए गए तथा मांस-मदिरा का सेवन किया गया, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।   उन्होंने कहा कि प्रबंधक कमेटी पिछले तीन महीनों से प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रही पर कोई सुनवाई नहीं की गई, जिसके बाद गुरु घर की प्रबंधक कमेटी ने शहीद तरना दल के जत्थेदार बाबा हरि सिंह जी ग्रंथियां बटाला वाले और जत्थेदार बाबा लखबीर सिंह जी चौलांग वाले से संपर्क किया और इस स्थान पर मर्यादा रखने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि निहंग सिंह संगठन गुरु घर की मर्यादा के लिए एकत्रित हुए थे। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने हमारी कोई भी बात नहीं सुनी, इसलिए हमें गुरु घर की मर्यादा बनाए रखने के लिए निहंग सिंह संगठनों के समक्ष यह मुद्दा रखना पड़ा, जिसके बाद निहंग संगठन ने मर्यादा अनुसार निशान साहिब स्थापित कर और धन धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज जी का प्रकाश कर श्री अखंड पाठ साहिब जी की शृंखला शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस मामले पर ध्यान देकर दोनों पक्षों का पक्ष जानना चाहिए।

बलूच विद्रोहियों का हमला: अफगानिस्तान तनाव के बीच बलूचिस्तान में गैस पाइपलाइन बुरी तरह क्षतिग्रस्त

बलूचिस्तान  पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 48 घंटे का युद्धविराम लागू है। दूसरी तरफ बलूचिस्तान में अशांति थमने का नाम नहीं ले रही। बलूच लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) ने धादर इलाके में एक पुलिस गश्ती दल को बंधक बनाने की जिम्मेदारी स्वीकार की है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। बीएलएफ ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने धादर में पुलिस अधिकारियों को बंधक बना लिया, जबकि बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (बीआरजी) ने एक धमाके की जिम्मेदारी ली, जिसमें सुई और काशमोर के बीच स्थित महत्वपूर्ण गैस पाइपलाइन को भारी क्षति पहुंची। द बलूचिस्तान पोस्ट (टीबीपी) के मुताबिक, बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वाराम बलूच के बयान से पता चलता है कि लड़ाकों ने शाम करीब 5 बजे धादर के अल्लाह यार शाह इलाके में पुलिस गश्ती दल का सामना किया। बयान में कहा गया कि गश्ती दल को घेर लिया गया, अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया, उनके हथियार छीन लिए गए और कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए वाहन को आग के हवाले कर दिया गया। बीएलएफ प्रवक्ता ने आगे बताया कि शुरुआती पूछताछ से यह सामने आया कि बंधक अधिकारी बलूच समुदाय या राष्ट्रीय आंदोलन के खिलाफ कोई कार्रवाई में शामिल नहीं थे, इसलिए उन्हें बिना किसी हानि के रिहा कर दिया गया। टीबीपी की रिपोर्ट के अनुसार, बीएलएफ ने इस ऑपरेशन की पूरी जिम्मेदारी ली है। वहीं, बीआरजी के प्रवक्ता दोस्तैन बलूच ने बताया कि संगठन ने डेरा बुगती के सुई इलाके से कराची तक जाने वाली 36 इंच व्यास वाली गैस पाइपलाइन पर सुई और काशमोर के बीच रातभर विस्फोटक लगाए, जिससे भारी तबाही हुई। बीआरजी के बयान में स्पष्ट किया गया कि यह हमला उनके सतत अभियान का हिस्सा है, जो तब तक चलेगा जब तक राजनीतिक मांगें पूरी न हो जाएं।  

भारत को सस्ता तेल और फायदा भी, रूस ने अमेरिका को सुनाई खरी-खरी

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके ‘‘मित्र’’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। ट्रंप ने साथ ही कहा कि यह कदम यूक्रेन पर आक्रमण रोकने के लिए रूस पर दबाव बढ़ाने की दिशा में एक ‘‘बड़ा कदम’’ होगा। अब इस पर रूस की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। रूस ने साफ कहा है कि उसका तेल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक है और वह अमेरिका और भारत के आपसी मामलों में दखल नहीं देगा। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने गुरुवार को कहा, “भारत और अमेरिका दोनों अपने फैसलों में स्वतंत्र हैं, और हम इन मुद्दों में हस्तक्षेप नहीं करते। हमारा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय जनता के कल्याण के लिए अत्यंत लाभदायक है।” जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या ट्रंप की टिप्पणियों के मद्देनजर भारत रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा, तो राजदूत ने कहा, "यह सवाल भारत सरकार के लिए (जवाब देने का) है।" उन्होंने कहा कि भारत सरकार सबसे पहले अपने देश के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर इस मामले से निपट रही है। उन्होंने कहा, "ऊर्जा क्षेत्र में हमारा सहयोग इन हितों के अनुरूप है।" रूसी दूत ने कहा, "हमारा सहयोग दोनों देशों के हितों के साथ पूरी तरह से तालमेल में है।" मुख्य रूप से अमेरिका की ओर इशारा करते हुए उन्होंने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ और प्रतिबंधों की आलोचना की। उन्होंने कहा, "ये टैरिफ और प्रतिबंध केवल बहुध्रुवीय विश्व को स्वीकार करने की अनिच्छा को दर्शाते हैं। ये वैश्विक शासन संरचना में लंबे समय से लंबित सुधारों में देरी करते हैं।" अलीपोव ने ब्रिक्स के बढ़ते प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई देश इस समूह में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने ब्रिक्स को वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरते हुए बताया, जो वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संतुलन में योगदान दे रहा है। ट्रंप का दावा पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत द्वारा रूस से पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद जारी रखना एक बड़ा मुद्दा बन गया है। इसका भारत और अमेरिका के संबंधों पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ा है। ट्रंप ने बुधवार को अपने ‘ओवल’ कार्यालय में पत्रकारों से कहा कि अमेरिका इस बात से ‘‘खुश नहीं’’ है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी खरीद से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध के लिए वित्तपोषण में मदद मिलती है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘वह (मोदी) मेरे मित्र हैं, हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं… हम उनके द्वारा रूस से तेल खरीदे जाने से खुश नहीं थे क्योंकि इससे रूस को यह बेतुका युद्ध जारी रखने का मौका मिला। इस युद्ध में उन्होंने लाखों लोगों को खो दिया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस बात से खुश नहीं था कि भारत तेल खरीद रहा है और (मोदी) ने आज मुझे आश्वासन दिया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे। यह एक बड़ा कदम है। अब हमें चीन से भी यही करवाना होगा।’’ ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) के अनुसार, चीन के बाद भारत रूस से कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत खरीद में संभवत: तुरंत कटौती नहीं कर पाएगा, लेकिन प्रक्रिया शुरू हो गई है। ट्रंप ने कहा, ‘‘उन्होंने (मोदी ने) मुझे आश्वासन दिया है कि रूस से कोई तेल नहीं खरीदा जाएगा। मुझे नहीं पता, शायद यह बड़ी खबर हो। क्या मैं ऐसा कह सकता हूं?… वह रूस से तेल नहीं खरीद रहे हैं। यह शुरू हो चुका है। वह इसे तुरंत नहीं कर सकते…लेकिन यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी।’’ भारत का जवाब भारत ने इस दावे पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अपने पुराने रुख को दोहराया- कि देश की ऊर्जा नीति पूरी तरह से भारतीय उपभोक्ता के हितों से प्रेरित है, और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की अस्थिरता के बीच यही भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, “भारत तेल और गैस का एक महत्वपूर्ण आयातक देश है। अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ता के हितों की रक्षा हमारी सतत प्राथमिकता रही है। हमारे आयात से जुड़े सभी निर्णय इसी उद्देश्य से लिए जाते हैं।”

नारायण मूर्ति-सुधा मूर्ति ने कास्ट सर्वे में नहीं दिया डेटा, सरकार ने तोड़ी चुप्पी

बेंगलुरु  राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति और उनके टेक्नोक्रेट पति नारायण मूर्ति ने जातिगत सर्वे में शामिल होने से ही इनकार कर दिया है। दंपति की ओर से इस संबंध में कर्नाटक सरकार को पत्र भी लिखा गया है कि हम इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। कपल ने लिखा है कि यह सर्वे किसी के भी हितों को पूरा नहीं करता है और अहम बात यह कि हम पिछड़े समुदाय से ताल्लुक नहीं रखते हैं और हम इस सर्वे का हिस्सा नहीं होंगे। मूर्ति की ओर से सेल्फ अटेस्टेड लेटर राज्य के पिछड़ा वर्ग आयोगको भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि हमारा परिवार इस सर्वे का हिस्सा नहीं रहेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि हमें नहीं लगता कि यह किसी के हितों की पूर्ति करता है। उन्होंने कहा कि हम अपनी पर्सनल डिटेल्स नहीं देंगे। वहीं इस मामले में कर्नाटक सरकार से भी जवाब आया है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में थे। इस आयोजन से इतर जब उनसे मूर्ति परिवार के फैसले पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम किसी को जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। यह तो उनका फैसला है और वे जैसा चाहें करें। बता दें कि कर्नाटक में सामाजिक-आर्थिक सर्वे चल रहा है। इस सर्वे के माध्यम से यह पता लगाने की बात कही जा रही है कि किस वर्ग के कितने लोगों के पास कितनी सुविधाएं हैं। उनकी आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति क्या है। इसके लिए राज्य में सभी सरकारी एवं सहायता प्राप्त स्कूलों को 8 से 18 अक्तूबर तक बंद रखा गया है। इसकी वजह यह है कि स्कूलो के अध्यापकों को ही इस सर्वे में लगाया गया है। कर्नाटक में यह सर्वे 22 सितंबर से शुरू हुआ था और यह 12 अक्तूबर को समाप्त हो जाना था, लेकिन इसकी तारीख बढ़ा दी गई है। बेंगलुरु में यह 24 अक्तूबर तक चलना है। इस सर्वे में राज्य के सभी 7 करोड़ लोगों को शामिल किया जाएगा और उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति जानी जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि हम यह जानना चाहते हैं कि किस वर्ग के पास क्या संसाधन हैं। पूरी जानकारी मिलने के बाद सामाजिक योजनाओं को गति देने में मदद मिलेगी।