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त्योहारी सीज़न में यात्रियों को राहत, रेलवे ने आसान किया टिकट बुकिंग सिस्टम

नई दिल्ली त्योहारी सीजन में अपने घर परिवार से दूर रहने वाले लाखों लाख लोग घर लौटते हैं. इस दौरान ट्रेनों में टिकट की मारामारी रहती है. हर कोई ट्रेन की बुकिंग कराना चाहते हैं. इस बार छठ 2025 (25 से 28 अक्टूबर) और दिवाली 2025 (21 अक्टूबर) को देखते हुए यात्रियों के लिए यह समय सबसे महत्वपूर्ण है. यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने IRCTC पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग आसान कर दी है. ये है नया नियम बता दें कि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के पटना, गया, भागलपुर, बक्सर, वाराणसी, मऊ, लखनऊ और मोतिहारी जैसे मुख्य शहरों के लिए विशेष ट्रेनें चल रही हैं. इसके अलावा 1 अक्टूबर से IRCTC ने नया नियम लागू किया है. नए नियम के तहत बुकिंग विंडो के पहले 15 मिनट में सिर्फ वही यात्री टिकट बुक कर पाएंगे जिनका आधार IRCTC अकाउंट से लिंक होगा. यात्री आज 3 अक्टूबर 2025, से 2 दिसंबर 2025 तक की यात्रा के लिए टिकट की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं. यानी अब आप त्योहार में जाने और वापसी की टिकट दोनों पहले से सुरक्षित कर सकते हैं. 1 अक्टूबर से लागू नया नियम 1 अक्टूबर 2025 से IRCTC ने ऑनलाइन जनरल रिजर्वेशन टिकटों के लिए आधार लिंकिंग अनिवार्य किया है. इस नियम के अनुसार:     बुकिंग विंडो खुलने के पहले 15 मिनट में केवल वही यात्री टिकट बुक कर पाएंगे जिनका आधार IRCTC अकाउंट से लिंक रहेगा.     एसी क्लास के लिए सुबह 10:00 से 10:15 बजे, नॉन-एसी क्लास के लिए सुबह 11:00 से 11:15 बजे यह नियम लागू रहेगा.     अगर आधार लिंक नहीं है, तो 15 मिनट के बाद सामान्य बुकिंग हो सकेगी.     यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने आधार को पहले से लिंक कर लें, ताकि त्योहार में यात्रा आसान हो सके. IRCTC वेबसाइट या मोबाइल ऐप से यात्री     यात्रा की तारीख निर्धारित तक टिकट बुक कर सकते हैं.     वापसी की टिकट भी यात्री पहले से बुक कर सकते हैं.     बिहार और पूर्वी यूपी के मुख्य शहरों के लिए यात्री स्पेशल ट्रेन की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.     इस नए नियम और सुविधा से छठ और दिवाली के सीजन में घर वापसी की यात्रा अब और भी आसान हो जाएगी.  

रूस ने दिया भरोसा: ट्रंप के टैरिफ से भारत को कोई नुकसान नहीं होगा

नई दिल्ली अमेरिका ने भारत को झुकाने के लिए 50 फीसदी टैरिफ लगाया. डोनाल्ड ट्रंप ने सोचा इससे भारत-रूस की दोस्ती टूट जाएगी. भारत टैरिफ के दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा. इससे रूस कमजोर पड़ जाएगा. रूस-यूक्रेन खत्म हो जाएगा. मगर ट्रंप की सोच से भी आगे निकली भारत-रूस की दोस्ती. जी हां, ट्रंप के टैरिफ का असर अब उल्टा हो रहा है. भारत और रूस की दोस्ती और मजबूत हो रही है. यही कारण है कि रूस अब अपने दोस्त भारत को टैरिफ से अधिक नुकसान नहीं होने देगा. ट्रंप टैरिफ से भारत को हो रहे नुकसान की भरपाई खुद रूस करेगा. इसका आदेश भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दे दिया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को अपनी सरकार को आदेश दिया है कि वह नई दिल्ली की ओर से कच्चे तेल के भारी आयात के कारण भारत के साथ व्यापार असंतुलन को कम करने के उपाय करे. साउथ रूस के काला सागर रिसॉर्ट में गुरुवार शाम भारत सहित 140 देशों के सुरक्षा और भू-राजनीतिक विशेषज्ञों के अंतर्राष्ट्रीय वल्दाई चर्चा मंच से बोलते हुए पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि रूस और भारत के बीच कभी कोई समस्या या तनाव नहीं रहा है और उन्होंने हमेशा अपनी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए हैं. पुतिन ने की मोदी की तारीफ पुतिन ने कहा कि भारत के साथ रूस का कभी कोई समस्या या अंतर्राज्यीय तनाव नहीं रहा. कभी नहीं. व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र बताया और कहा कि वे उनके भरोसेमंद संबंधों में सहज महसूस करते हैं. पुतिन ने मोदी के नेतृत्व वाली भारत की राष्ट्रवादी सरकार की सराहना की और उन्हें एक संतुलित, बुद्धिमान और राष्ट्र हितैषी नेता बताया. भारत के नुकसान की भरपाई करेगा रूस पुतिन ने कहा कि भारत में हर कोई यह बात अच्छी तरह जानता है. खासकर रूस से तेल आयात रोकने के अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज करने के भारत के फैसले के बारे में. उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के टैरिफ के कारण भारत को होने वाले नुकसान की भरपाई रूस से कच्चे तेल के आयात से हो जाएगी. साथ ही इससे भारत को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठा भी मिलेगी.’ क्या है रूस का प्लान पुतिन ने कहा कि व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए रूस भारत से और अधिक कृषि उत्पाद और दवाइयां खरीद सकता है. पुतिन ने कहा, ‘भारत से और अधिक कृषि उत्पाद खरीदे जा सकते हैं. औषधीय उत्पादों और दवाइयों के लिए हमारी ओर से कुछ कदम उठाए जा सकते हैं.’ उन्होंने रूस और भारत के बीच आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाओं का जिक्र किया, मगर इन अवसरों को पूरी तरह से खोलने के लिए विशिष्ट मुद्दों को सुलझाने की जरूरत को भी स्वीकार किया. पुतिन ने वित्तपोषण, रसद और भुगतान संबंधी बाधाओं को प्रमुख चिंताओं के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि हमें अपने अवसरों और संभावित लाभों को खोलने के लिए सभी तरह के कार्यों को हल करने की ज़रूरत है. भारत के लोग कभी अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे रूस और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर पश्चिमी देशों को चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा कि यदि यूरोप ने रूस को उकसाने की कोशिश की तो उसका जवाब तुरंत और बेहद घातक होगा. साथ ही उन्होंने रूस-यूक्रेन जंग खत्‍म कराने की कोश‍िश करने के ल‍िए भारत की तारीफ की. पीएम मोदी की तारीफ करते हुए पुत‍िन ने कहा, मैं पीएम मोदी को जानता हूं. भारत के लोग अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे. रूस भारत और चीन जैसे देशों का आभारी है, जिन्होंने ब्रिक्स की स्थापना की. ये ऐसे देश हैं जो किसी का पक्ष लेने से इनकार करते हैं और वास्तव में एक न्यायपूर्ण विश्व बनाने की आकांक्षा रखते हैं दक्षिण रूस में आयोजित एक समारोह में पुतिन ने कहा, हम यूरोप के बढ़ते सैन्यीकरण पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. रूस की ओर से जवाबी कदम उठाने में वक़्त नहीं लगेगा. और यह प्रतिक्रिया बहुत गंभीर होगी. पुतिन ने साफ किया कि रूस कमजोरी या अनिर्णय का परिचय कभी नहीं देगा. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस का नाटो गठबंधन पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर किसी को अभी भी हमारे साथ सैन्य प्रतियोगिता करने का मन है, तो उन्हें कोशिश कर लेने दें. रूस ने सदियों से यह साबित किया है कि उकसावे का जवाब तुरंत और सख्ती से दिया जाता है. शांति से सोइए, आराम कीजिए राष्ट्रपति पुतिन ने विशेष रूप से जर्मनी का नाम लेते हुए कहा कि वह यूरोप में सबसे शक्तिशाली सेना बनाने का सपना देख रहा है. उन्होंने यूरोपीय नेताओं पर हिस्टेरिया फैलाने का आरोप लगाया. यूरोप की एकजुट अभिजात्य जमात लगातार युद्ध की आशंका का माहौल बना रही है. वे बार-बार कहते हैं कि रूस से जंग दरवाज़े पर खड़ी है. यह एक तरह की बकवास है, जिसे वे मंत्र की तरह दोहराते रहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह मानना असंभव है कि रूस कभी नाटो के किसी सदस्य देश पर हमला करेगा. सचमुच, मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूं: शांति से सोइए, आराम कीजिए और अपने घर की समस्याओं पर ध्यान दीजिए. जरा देखिए कि यूरोपीय शहरों की सड़कों पर क्या हो रहा है. रूस-यूरोप टकराव: शीत युद्ध से आगे रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने पश्चिमी मीडिया की शीत युद्ध जैसी तुलना को खारिज किया. उन्होंने कहा, यह शीत युद्ध नहीं है. यहां काफी पहले से ठंड नहीं, बल्कि आग लगी हुई है. हम पहले से ही एक नए तरह के संघर्ष में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय संघ और नाटो, रूस पर झूठे आरोप लगाकर अपने विशाल रक्षा बजट को सही ठहराना चाहते हैं. “उनके बयान दो चीज़ें बताते हैं. पहला, वे उकसावे की एक श्रृंखला तैयार कर रहे हैं. दूसरा, उन्हें अपने सैन्य बजट को जायज़ ठहराने का बहाना चाहिए. ड्रोन घटनाएं और बढ़ती चिंताएं पिछले दिनों डेनमार्क में ड्रोन घटनाओं और एस्टोनिया व पोलैंड में कथित रूसी हवाई उल्लंघनों ने इस डर को गहरा कर दिया है कि यूक्रेन युद्ध की आग … Read more

तमिलनाडु में सनसनी: स्टालिन आवास और BJP कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी

 चेन्नई तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में गुरुवार को एक के बाद एक बम धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया। राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के अलवरपेट स्थित निजी आवास को निशाना बनाते हुए एक अज्ञात ईमेल से बम विस्फोट की धमकी भेजी गई, जिसके बाद पुलिस और बम-निरोधक दस्ते ने पूरे इलाके की तलाशी ली। इसी तरह, राज्य बीजेपी मुख्यालय (टी नगर) और दक्षिण भारतीय अभिनेत्री तृशा के तेयनम्पेट स्थित घर को भी धमकी मिली। धमकी में चेन्नई राज भवन को भी निशाना बनाया गया। पुलिस ने सभी स्थलों पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब बीते एक महीने में मुख्यमंत्री स्टालिन को लगातार कई बार धमकी मिल चुकी है। 15 अगस्त को ध्वजारोहण समारोह से पहले भी उन्हें बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। उस मामले में एक व्यक्ति गणेश को गिरफ्तार किया गया था। जुलाई में भी चेन्नई पुलिस नियंत्रण कक्ष को एक कॉल मिली थी, जिसमें फोन करने वाले विनोथकुमार ने दावा किया था कि सीएम आवास पर बम लगाया गया है। हालांकि, वह धमकी भी झूठी निकली। 2024 में भी स्टालिन को लेकर बड़ा हड़कंप मचा था, जब उनके अमेरिका जाने वाले विमान पर बम की ईमेल धमकी आई थी। चेन्नई एयरपोर्ट पर कड़ी जांच के बाद उस मामले को भी फर्जी घोषित किया गया। अगस्त 2023 में एक युवक को सीएम आवास पर बम लगाने की झूठी धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस बीच, TVK प्रमुख और अभिनेता-राजनीतिज्ञ विजय के घर पर भी बीते सप्ताह बम धमकी का मामला सामने आया। यह धमकी उस वक्त आई जब करूर में विजय की राजनीतिक रैली में भगदड़ मचने से 41 लोगों की जान चली गई थी। शनिवार रात विजय जब चेन्नई स्थित अपने नीलांकरई आवास लौटे तो उनके घर की सुरक्षा और बढ़ा दी गई। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ जवान भी तैनात किए गए हैं। लगातार मिल रही इन धमकियों ने पुलिस विभाग को अलर्ट मोड पर ला दिया है। फिलहाल सभी धमकियों की जांच की जा रही है और पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी स्पेंडिंग में कटौती पर जनता का गुस्सा: पूरे फ्रांस में हड़ताल, एफिल टावर पर भी ताला

पेरिस  फ्रांस में  बड़े पैमाने पर हड़ताल और विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने खर्चों में कटौती का विरोध करते हुए अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाने की मांग की. इस दौरान राजधानी पेरिस का मशहूर आइफल टॉवर भी बंद रहा. 200 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन फ्रांस के 200 से अधिक शहरों और कस्बों में हजारों कामगार, रिटायर्ड लोग और छात्र सड़कों पर उतरे. पेरिस में प्रदर्शनकारियों ने प्लेस द’इटली (Place d’Italie) से मार्च की शुरुआत की. आइफल टॉवर प्रशासन ने बयान जारी कर बताया कि हड़ताल की वजह से स्मारक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है. यूनियनों की अगुवाई में विरोध यह देशव्यापी हड़ताल फ्रांस की प्रमुख यूनियनों ने बुलाई है. पिछले महीने से बजट को लेकर चल रही राजनीतिक उथल-पुथल और बहस के बीच यह विरोध प्रदर्शनों की नई कड़ी है. यूनियनों का कहना है कि सरकार को पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री के बजट प्रस्तावों को छोड़ देना चाहिए, जिनमें सामाजिक कल्याण योजनाओं पर रोक और खर्चों में कटौती जैसी बातें शामिल हैं. यूनियनों ने चेतावनी दी है कि ऐसे कदम कम और मध्यम आय वर्ग के लोगों की क्रयशक्ति को और कमजोर करेंगे. वे अमीरों पर टैक्स बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. नई सरकार पर दबाव पिछले महीने ही प्रधानमंत्री बने सेबास्टियन लेकोर्नू ने अभी तक अपने बजट की विस्तृत जानकारी नहीं दी है और न ही अपनी मंत्रिमंडल टीम की घोषणा की है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सरकार का गठन होगा और साल के अंत तक संसद में बजट बिल पर बहस की जाएगी.

इस्लामाबाद में प्रेस क्लब पर पुलिस छापा, PoK के बगावत की खबरें दबाने की कोशिश

इस्लामाबाद  पाकिस्तान ऑक्यूपाइड जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी असंतोष की लहर अब इस्लामाबाद तक पहुंच गई है. नेशनल प्रेस क्लब में पुलिस के बर्बर हमले और लाठीचार्ज की खबर है. यह कार्रवाई कश्मीर एक्शन कमेटी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई. मानवाधिकार समूहों और मीडिया संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है. इस्लामाबाद पुलिस ने गुरुवार को नेशनल प्रेस क्लब (NPC) पर छापा मारा है. पुलिस ने परिसर में जबरन प्रवेश कर पत्रकारों के साथ-साथ PoJK (पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर) के प्रदर्शनकारियों पर हमला किया.  यह घटना PoJK में कथित अत्याचारों और इंटरनेट ब्लैकआउट के विरोध में किए जा रहे एक प्रदर्शन के दौरान हुई. पुलिस ने लाठीचार्ज किया और मीडिया उपकरणों को नष्ट कर दिया. इस कार्रवाई से देश भर में आक्रोश फैल गया है. प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का कड़ा प्रहार पुलिस की यह कार्रवाई कश्मीर एक्शन कमेटी द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान हुई. यह प्रदर्शन कथित अत्याचारों और अधिकृत कश्मीर में चल रहे इंटरनेट ब्लैकआउट के खिलाफ किया जा रहा था. पीओके में शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, सेना के दमन के खिलाफ आवाज़ – pok mass protests against shehbaz sharif government army repression demands for … रिपोर्ट्स के मुताबिक, PoJK के एडवोकेट समुदाय के सदस्य NPC के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान, पुलिस ने हमला किया और उन्हें निशाना बनाया. चश्मदीदों ने पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और मीडिया उपकरणों को नष्ट करने की जानकारी दी. मानवाधिकार संगठनों और पत्रकारों ने की निंदा इस हमले की ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) ने कड़ी निंदा की. HRCP ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हम नेशनल प्रेस क्लब पर छापे और पत्रकारों पर हमले की कड़ी निंदा करते हैं. उन्होंने तत्काल जांच की मांग की और कहा कि जिम्मेदार लोगों को कटघरे में लाया जाना चाहिए. इस घटना ने देशव्यापी आक्रोश और मानवाधिकार समूहों से निंदा को जन्म दिया है. राजनीतिक नेताओं ने मांगी जवाबदेही पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार ज़ाईद गिशकोरी ने भी अधिकारियों को फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद प्रेस क्लब पर पुलिस का बर्बर हमला गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने सवाल किया कि पत्रकारों का घर उन लोगों के लिए असुरक्षित कैसे हो गया, जिनके पास विरोध करने की कोई जगह नहीं है. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व दूत मलीहा लोधी ने भी इस छापे को "निंदनीय" बताया और जवाबदेही की मांग की. अवाम बोली- PAK को हमें मारने का कोई हक नहीं पाक अधिकृत कश्मीर में स्थानीय लोगों के प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सेना का अत्याचार अब संयुक्त राष्ट्र तक तक पहुंच गया है. पीओके के राजनीति दलों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से मांग की है कि UN तुरंत यहां दखल दे और यहां की जनता को पाकिस्तानी सेना के अत्याचार से बचाए. यहां 29 सितंबर से चल रहे नागरिकों के प्रदर्शन में अब तक 12 लोग मारे जा चुके हैं. स्विटजरलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद 60वें सेशन के दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की पार्टी (UKPNP-यूनाइटेड कश्मीर पीपुल नेशनल पार्टी) ने इस मुद्दे को उठाया. UKPNP ने कहा कि पाकिस्तान को कश्मीरियों को मारने, हमारी जमीन और हमारे संसाधनों पर कब्जा करने, हमारे लोगों पर अत्याचार करने और उन्हें खत्म करने का कोई हक नहीं है. UKPNP के प्रवक्ता सरदार नासिर अजीज खान ने जिनेवा में कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर में कई लोग गायब हो गए हैं, लेकिन हाल ही में तथाकथित 'आज़ाद कश्मीर' में जो हो रहा है, उससे लोग अपनी जान को लेकर चिंतित हैं क्योंकि 29 सितंबर से अब तक 12 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. नासिर अजीज खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान यहां के लोगों पर क्रूर बल प्रयोग कर रहा है और प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चला रहा है जिससे लोग मारे जा रहे हैं. सैकड़ों लोग जेल में हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है.  उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में इस अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के जमावड़े के माध्यम से हम आग्रह करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र उन कश्मीरियों की जान बचाने के लिए हस्तक्षेप करे जो पाकिस्तानी कब्जे में रह रहे हैं. कश्मीरियों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जा रहा है. इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद प्रेस क्लब में इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस के एक्शन की निंदा की.  सरदार नासिर अजीज खान ने कहा कि हमारी पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरदार तानिया, पूर्व उपाध्यक्ष सरदार आफ़ताब ख़ान और कई अन्य लोगों को आज मुज़फ़्फ़राबाद में गिरफ़्तार कर लिया गया. वे पाकिस्तान द्वारा की गई इन हत्याओं और गिरफ़्तारियों के खिलाफ इस्लामाबाद प्रेस क्लब के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. और पाकिस्तान का कश्मीर में कोई अधिकार नहीं है. उन्हें कश्मीरियों को मारने, हमारी जमीन और हमारे संसाधनों पर कब्जा करने हमारे लोगों पर अत्याचार करने और उन्हें खत्म करने का कोई हक नहीं है. इस्लामाबाद प्रेस क्लब में क्या हुआ? 2 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के नेशनल प्रेस क्लब में एक गंभीर घटना घटी. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JKJAC) के सदस्य इस्लामाबाद प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान इस्लामाबाद पुलिस प्रेस क्लब में घुस गई. पुलिस ने प्रदर्शन को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया. पुलिस ने क्लब के अंदर घुसकर पत्रकारों और स्टाफ पर लाठीचार्ज किया, कैफेटेरिया को तोड़ा-फोड़ा, कैमरे और मोबाइल फोन तोड़े और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया.  वीडियो फुटेज में पुलिस को पत्रकारों को घसीटते और पीटते हुए दिखाया गया है. यह घटना PoK में चल रहे पांचवें दिन के विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई, जहां बाजार बंद हैं और इंटरनेट कटा हुआ है. 

शीतकालीन बंदी: बदरी-केदारनाथ धाम के कपाट इस दिन होंगे बंद, पढ़ें पूरा तरीका

रुद्रप्रयाग/चमोली विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए कब बंद होंगे, तिथि की घोषणा हो गई है। मंगलवार 25 नवंबर को अपराह्न 2 बजकर 56 मिनट पर बदरी विशाल के कपाट बंद हो जायेंगे । कपाट बंद होने की प्रक्रिया के अंतर्गत 21 नवंबर से पंच पूजाएं शुरू होंगी। कुछ दिन पहले गंगोत्री, यमुनोत्री धाम के कपाट को लेकर घोषणाए हुईं थी। इस अवसर बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने 2026 के लिए हक हकूकधारी धारियों को पगड़ी भेंट की। सभी थोंकों के पदाधिकारियों को भी सम्मानित किया। भंडारी थोक से मनीष भंडारी, मेहता थोक से महेंद्र सिंह मेहता एवं दिनेश भट्ट, कमदी थोक से कुलभूषण पंवार को पगड़ी भेंट की गयी। केदारनाथ-गंगोत्री और यमुनोत्री धाम केदारनाथ धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट 23 अक्टूबर को बंद होंगे जबकि गंगोत्री के कपाट दीवाली के अगले दिन बंद होंगे। गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूट गोवर्धन पूजा के अवसर पर 22 अक्टूबर अभिजीत मुहूर्त में शीतकाल के लिए बंद हो रहे है। इसी तरह द्वितीय केदार मद्महेश्वर जी के कपाट 18 नवंबर तथा तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट 6 नवंबर को शीतकाल हेतु बंद हो रहे है। सर्दियों में भारी बर्फवारी और भीषण ठंड की चपेट में रहने के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित चार धामों के कपाटों को हर साल अक्टूबर—नवंबर में श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया जाता है जो अगले साल अप्रैल—मई में दोबारा खोल दिए जाते हैं । यात्रियों में उत्साह बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कपाट बंद होने की तिथि तय होने के अवसर पर बदरीनाथ मंदिर परिसर में तीर्थयात्रियों, हक-हकूकधारियों और समानता धर्म के सभी अनुयायियों को शुभकामनाएं दी। कहा कि आपदा के बाद दूसरे चरण की यात्रा हेतु अभी एक माह का समय शेष है। भगवान के दर्शन के लिए लगातार यात्रियों का आने का सिलसिला जारी है। कहा मानसून की आपदा के बावजूद अभी तक 14 लाख 20 हजार 357 से अधिक तीर्थयात्रियों ने बदरीनाथ धाम के दर्शन कर लिए हैं। 1602420 से अधिक ने केदारनाथ धाम के दर्शन किये हैं। बदरी-केदार में अब तक 30 लाख से ज्यादा ने किए दर्शन इस तरह दोनों धामों में 30 लाख 22 हजार 777 से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन कर लिए हैं। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि राष्ट्र निर्माण को समर्पित राष्ट्रीय सेवक संघ के भी आज सौ वर्ष पूरे हुए है। कपाट बंद होने की प्रक्रिया बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के अंतर्गत पंचपूजाओं के पहले दिन 21 नवंबर को भगवान गणेश की पूजा होगी। शाम को इसी दिन भगवान गणेश के कपाट बंद होंगे। दूसरे दिन 22 नवंबर को आदि केदारेश्वर मंदिर तथा शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे। तीसरे दिन 23 नवंबर को खडग – पुस्तक पूजन तथा वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो जायेगा। चौथे दिन 24 नवंबर मां लक्ष्मी जी को कढाई भोग चढाया जायेगा और 25 नवंबर को 2 बजकर 56 मिनट पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद हो जायेंगे। 26 नवंबर को श्री कुबेर जी एवं उद्धव जी सहित रावल जी सहित आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी शीतकालीन प्रवास पांडुकेश्वर तथा श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ को प्रस्थान करेगी। पूजाओं को रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल वेदपाठी रविंद्र भट्ट संपन्न करेंगे।  

कबाड़ बन गया खजाना: ई-कचरे की बिक्री से सरकार की कमाई ₹3296 Cr, ऑफिस स्पेस हुआ स्वच्छ

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने ई-कचरे और कबाड़ की बिक्री से 3,296.71 करोड़ रुपए कमाए हैं, जबकि पिछले चार वर्षों में 696.27 लाख वर्ग फुट से अधिक ऑफिस स्पेस को साफ किया गया है और उपयोग में लाया गया है। राष्ट्रीय राजधानी के नेहरू पार्क में विशेष स्वच्छता अभियान 5.0 के शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि इस अभियान से शासन और सार्वजनिक सेवाओं में स्पष्ट बदलाव आए हैं। 12 लाख से अधिक जगहों की हुई सफाई डॉ सिंह ने बताया कि अभियान के पिछले चरणों के दौरान 137.86 लाख से ज्यादा पुरानी फाइलों को हटाया गया है और देश भर में 12.04 लाख से अधिक जगहों की सफाई की गई है। केंद्रीय मंत्री ने इन परिणामों को प्राप्त करने में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) और अन्य विभागों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने इस कार्यक्रम में श्रमदान गतिविधियों, एक पेड़ मां के नाम पहल के तहत वृक्षारोपण अभियान और पुरानी फाइलों की सफाई में भी भाग लिया। 'स्वतंत्र भारत में शासन की एक अनूठी सफलता' विशेष स्वच्छता अभियान को स्वतंत्र भारत में शासन की एक अनूठी सफलता की कहानी बताते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि 2 अक्टूबर से शुरू होने वाला कार्यान्वयन चरण स्वच्छता अभियानों को संस्थागत बनाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और सरकारी कार्यालयों में दक्षता में सुधार लाने पर केंद्रित होगा। उन्होंने स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि लाल किले से प्रधानमंत्री के आह्वान ने स्वच्छता को एक व्यवहारिक परिवर्तन में बदल दिया है जिसे देश भर के घरों और समुदायों ने अपनाया है। बांटी गयी सुरक्षा किट और मिठाइयां डॉ. सिंह ने अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाए रखने में सफाई कर्मियों की केंद्रीय भूमिका को स्वीकार करते हुए, सुरक्षा किट और मिठाइयां वितरित करके सफाई मित्रों को सम्मानित भी किया। मंत्री ने आगे कहा कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों ने कार्यान्वयन चरण के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य पहले ही अपलोड कर दिए हैं, जिनमें समीक्षा के लिए लगभग 6.9 लाख जन शिकायतें, 26.9 लाख से अधिक फिजिकल फाइलें और समीक्षा के लिए पहचानी गई 5.2 लाख से अधिक ई-फाइलें शामिल हैं।   एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार 10 अक्टूबर को सुशासन और अभिलेख नामक एक प्रदर्शनी भी लगाएगा, जिसमें पूर्व विशेष अभियानों के दौरान प्राप्त ऐतिहासिक रूप से मूल्यवान अभिलेखों को प्रदर्शित किया जाएगा। विशेष अभियान 5.0 के अगले चरण में प्रवेश करते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि यह स्वच्छता, पारदर्शिता, दक्षता और जनभागीदारी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, साथ ही महात्मा गांधी की नागरिक जिम्मेदारी और सामूहिक कार्रवाई की विरासत को आगे बढ़ाता है।

संघ का 100वां समारोह: CM पिनाराई ने RSS और इजरायल के संबंधों पर जताई नाराज़गी

तिरुवनंतपुरम  केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है और संघ की इजरायल के जायोनीवादियों से तुलना करते हुए दोनों को 'जुड़वाँ भाई' करार दिया है। उन्होंने कहा कि ये दोनों कई बातों पर एकमत हो सकते हैं। मुख्यमंत्री विजयन ने यह टिप्पणी कन्नूर में पूर्व माकपा राज्य सचिव कोडियेरी बालकृष्णन की स्मृति सभा में की। RSS के शताब्दी समारोह मनाने के केंद्र सरकार के कदम की आलोचना करते हुए पी विजयन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि RSS पर डाक टिकट और 100 रुपये का सिक्का जारी करना "हमारे संविधान का घोर अपमान" है। उन्होंने आगे कहा कि ये सम्मान एक ऐसे संगठन को प्रभावी रूप से वैधता प्रदान करते हैं जिसने आजादी की लड़ाई से दूरी बनाए रखी और एक विभाजनकारी विचारधारा को बढ़ावा दिया। उन्होंने अपने पोस्ट में संघ के सम्मान को सच्चे स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति और उनके द्वारा देखे गए धर्मनिरपेक्ष, एकीकृत भारत पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल एक सिक्का या डाक टिकट जारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास को फिर से लिखने और हमारे सच्चे स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति का अपमान करना है। अनगिनत देशभक्तों के बलिदान के साथ विश्वासघात उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई संविधान में निहित मूल्यों को कमज़ोर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला राष्ट्र की सामूहिक स्मृति पर हमला है, और कहा कि आरएसएस जैसे संगठनों ने स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहने का विकल्प चुना था। उन्होंने कहा कि उन्हें राष्ट्रीय सम्मान देना अनगिनत देशभक्तों के बलिदान के साथ विश्वासघात है। गौरतलब है कि विपक्ष दल इस बात को लेकर सरकार की आलोचना कर रहे हैं कि केंद्र सरकार ने आरएसएस को उसकी विवादास्पद ऐतिहासिक भूमिका के बावजूद, मुख्यधारा के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के कड़े शब्द बहुलवाद और समावेशिता में निहित आंदोलनों को दरकिनार करके भारत की स्वतंत्रता की कहानी को नया रूप देने की कोशिशों के खिलाफ एक व्यापक चेतावनी है। कांग्रेस पर भी उठाए सवाल बता दें कि संघ पर जारी डाक टिकट पर 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस स्वयंसेवकों की भागीदारी को दर्शाया गया है। माकपा ने इसे इतिहास से छेड़छाड़ करार दिया है। विजयन ने कांग्रेस पर भी सवाल उठाया है और पूछा कि क्या पार्टी ने भारत भर के प्रमुख केंद्रों में फिलिस्तीन एकजुटता के लिए कोई कार्यक्रम आयोजित किया है।  

सस्पेंडेड हॉस्पिटल स्टाफ: महिला प्रसूता को भर्ती न करने से फर्श पर हुआ प्रसव

हरिद्वार/देहरादूुन हरिद्वार के एक अस्पताल में मानवता शर्मसार हो गई। जिले के महिला अस्पताल में एक गर्भवती महिला को स्टाफ ने भर्ती करने से इनकार कर दिया। जिसके चलते प्रसूता को अस्पताल के फर्श पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। जिसमें महिला फर्श पर दर्द से कराहते हुए नजर आ रही है। महिला द्वारा फर्श पर बच्ची को जन्म देने के मामले का महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। क्या है मामला जानकारी के अनुसार, महिला आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से है। ब्रह्मपुरी निवासी गर्भवती महिला जिला महिला अस्पताल मंगलवार रात साढ़े नौ बजे अस्पताल आयी थी। आरोपों के अनुसार महिला चिकित्सक की लापरवाही एवं अमानवीय व्यवहार के चलते महिला को समय से लैबर रूम में नहीं ले जाया गया। इसके चलते गर्भवती महिला ने बेड पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। परिजनों और साथ आई आशा कार्यकर्ता का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर डॉ. सोनाली, जो कि संविदा पर नियुक्त थीं, ने महिला को भर्ती करने से साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि अस्पताल में प्रसव नहीं होता। महिला आयोग ने संज्ञान लिया मामला हरिद्वार में महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल का कहना है कि गर्भवती महिला के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने सीएमओ आरके सिंह और कमल जोशी को जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच के बाद उस दौरान ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ताकि भविष्य में ऐसी घटना से बचा जा सके। अमानवीय व्यवहार पर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला महिला अस्पताल में डॉक्टर की ओर से गर्भवती महिला के साथ अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाकर बुधवार को पीएमएस के कार्यालय में धरना दिया। उन्होंने इस घटना को लेकर पीएमएस को माला पहनाकर विरोध जताया। आरोप है कि महिला डॉक्टर के अमानवीय व्यवहार के चलते गर्भवती महिला ने बेड में ही बच्चे को जन्म दे दिया।  

RSS का उद्देश्य क्या है? पीएम मोदी ने समझाया सेवा, अनुशासन और राष्ट्र भावना का महत्व

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100वें स्थापना दिवस के मौके पर संघ की ऐतिहासिक यात्रा और राष्ट्रनिर्माण में इसके योगदान पर अपने विचार साझा किेए। पीएम मोदी ने 'एक्स', पर पोस्ट करते हुए लिखा, "आज से 100 साल पहले विजयादशमी के दिन ही समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। लंबे कालखंड के दौरान असंख्य स्वयंसेवकों ने इस संकल्प को साकार करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसे लेकर मैंने अपने विचारों को शब्दों में ढालने का प्रयास किया है।" इस युग में संघ अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है- पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लॉग पोस्ट करते हुए लिखा, 100 वर्ष पूर्व विजयदशमी के महापर्व पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना हुई थी। ये हजारों वर्षों से चली आ रही उस परंपरा का पुनर्स्थापन था,जिसमें राष्ट्र चेतना समय-समय पर उस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए,नए-नए अवतारों में प्रकट होती है। इस युग में संघ उसी अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार है। ये हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि हमें संघ के शताब्दी वर्ष जैसा महान अवसर देखने मिल रहा है। मैं इस अवसर पर राष्ट्रसेवा के संकल्प को समर्पित कोटि-कोटि स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देता हूं। मैं संघ के संस्थापक, हम सभी के आदर्श, परम पूज्य डॉक्टर हेडगेवार जी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। संघ की 100 वर्षों की इस गौरवमयी यात्रा की स्मृति में भारत सरकार ने विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्के भी जारी किए हैं। संघ के किनारे सैकड़ों जीवन पुष्पित-पल्लवित हुए- पीएम मोदी पीएम ने लिखा, जिस तरह विशाल नदियों के किनारे मानव सभ्यताएं पनपती हैं, उसी तरह संघ के किनारे भी सैकड़ों जीवन पुष्पित-पल्लवित हुए हैं। जैसे एक नदी जिन रास्तों से बहती हैं, उन क्षेत्रों को अपने जल से समृद्ध करती हैं, वैसे ही संघ ने इस देश के हर क्षेत्र, समाज के हर आयाम को स्पर्श किया है। जिस तरह एक नदी कई धाराओं में खुद को प्रकट करती है, संघ की यात्रा भी ऐसी ही है। संघ के अलग-अलग संगठन भी जीवन के हर पक्ष से जुड़कर राष्ट्र की सेवा करते हैं। शिक्षा, कृषि, समाज कल्याण, आदिवासी कल्याण,महिला सशक्तिकरण, समाज जीवन के ऐसे कई क्षेत्रों में संघ निरंतर कार्य करता रहा है। विविध क्षेत्र में काम करने वाले हर संगठन का उद्देश्य एक ही है, भाव एक ही है….राष्ट्र प्रथम संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चला- पीएम मोदी अपने गठन के बाद से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र निर्माण का विराट उद्देश्य लेकर चला। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण रास्ता चुना और इस चलने के लिए जो कार्यपद्धति चुनी वो थी नित्य-नियमित चलने वाली शाखाएं। संघ शाखा का मैदान, एक ऐसी प्रेरणा भूमि है, जहां से स्वयंसेवक की अहम् से वयं की यात्रा शुरू होती है। संघ की शाखाएं…व्यक्ति निर्माण की यज्ञवेदी हैं। राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य, व्यक्ति निर्माण का स्पष्ट पथ और शाखा जैसी सरल, जीवंत कार्यपद्धति यही संघ की सौ वर्षों की यात्रा का आधार बने। इन्हीं स्तंभों पर खड़े होकर संघ ने लाखों स्वयंसेवकों को गढ़ा, जो विभिन्न क्षेत्रों में देश को आगे बढ़ा रहे हैं। संघ ने समाज के अलग-अलग वर्गों में आत्मबोध जगाया- पीएम मोदी अपनी 100 वर्षों की इस यात्रा में, संघ ने समाज के अलग-अलग वर्गों में आत्मबोध जगाया, स्वाभिमान जगाया। संघ देश के उन क्षेत्रों में भी कार्य करता रहा है, जो दुर्गम हैं, जहां पहुंचना सबसे कठिन है। संघ दशकों से आदिवासी परंपराओं, आदिवासी रीति-रिवाज, आदिवासी मूल्यों को सहेजने-संवारने में अपना सहयोग देता रहा है, अपना कर्तव्य निभा रहा है। आज सेवा भारती, विद्या भारती, एकल विद्यालय, वनवासी कल्याण आश्रम, आदिवासी समाज के सशक्तिकरण का स्तंभ बनकर उभरे हैं।