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दुश्मनों के सीने में हलचल: ₹200000 करोड़ की डिफेंस डील में शामिल हुंकार भरे फाइटर जेट

नई दिल्ली दुनियाभर में सामरिक हालात तेजी से बदल रहे हैं. भारत के दो कट्टर दुश्‍मनों (चीन और पाकिस्‍तान) के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है. इसे देखते हुए राष्‍ट्रीय सुरक्षा को दुरुस्‍त और अपग्रेड करना समय की मांग है. सेना के तीनों अंगों (आर्मी, नेवी और एयरफोर्स) को मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस करने के लिए हजारों करोड़ का इन्‍वेस्‍टमेंट किया जा रहा है. इसी रणनीति के तहत ही इंडियन एयरफोर्स ने 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के प्रस्‍ताव को रफ्तार देना शुरू कर दिया है. सबकुछ ठीक रहा तो अगले साल इस मेगा डिफेंस डील को अंतिम रूप दे दिया जाएगा. तकरीबन 2 लाख करोड़ की इस डील के तहत राफेल जेट का एक स्‍क्‍वाड्रन फ्लाई-अवे कंडीशन में भारत को मिलेगा. यानी 18 राफेल जेट पूरी तरह से ऑपरेशनल फेज में इंडियन एयरफोर्स को मिलेगा. भारत और फ्रांस के बीच बड़ी डिफेंस डील का स्‍ट्रक्‍चर पहली बार सामने आया है. बता दें कि इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में पहले से ही 36 राफेल जेट शामिल हैं. ये फाइटर जेट विभिन्‍न एयरबेस पर तैनात हैं. दरअसल, भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी कॉम्‍बैट कैपेबिलिटी को मजबूती देने के लिए 114 राफेल विमानों की ऐतिहासिक खरीद प्रक्रिया को तेज कर रही है. अनुमानित 2 लाख करोड़ रुपये (23.8 अरब डॉलर) से अधिक के इस सौदे को अगले फाइनेंशियल ईयर तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य है. समझौते के तहत पहले चरण में 18 विमान सीधे फ्रांस से ऑफ-द-शेल्फ मिलेंगे, जबकि 90 से अधिक विमानों का असेंबली भारत में होगी, जिनमें कम से कम 60% स्वदेशी योगदान सुनिश्चित किया जाएगा. IAF की योजना है कि शुरुआती 18 राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस की प्रोडक्‍शन लाइन से सीधे उड़ान भरकर भारत आएंगे. इन्हें तेजी से वायुसेना की अग्रिम पंक्ति में तैनात किया जाएगा. यह रणनीति पारंपरिक रक्षा खरीद प्रक्रिया की देरी को टालकर वायुसेना को तत्काल शक्ति प्रदान करेगी. खासियत है बेमिसाल भारत सरकार ने फ्रांस के साथ सीधा करार करने का निर्णय लिया है. इससे MRFA टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया है. शुरुआती विमान डिलीवरी के साथ ही पायलटों और ग्राउंड स्टाफ को निर्माता कंपनी की ओर से प्रशिक्षण मिलेगा, ताकि जल्द से जल्द इन विमानों को ऑपरेशनल क्षमता में शामिल किया जा सके. पहले 18 राफेल अत्याधुनिक हथियारों से लैस होंगे. ‘इंडिया डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, नए राफेल फाइटर जेट में मीटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल और SCALP क्रूज़ मिसाइल शामिल हैं. इनमें भारतीय हार्डवेयर अपग्रेड और कुछ स्वदेशी उपकरणों को भी इंटीग्रेट किया जाएगा. एयरफोर्स की जरूरत वर्तमान में IAF के पास सिर्फ 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि दो मोर्चों (पाकिस्तान और चीन) पर एक साथ निपटने के लिए 42.5 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है. हाल ही में राफेल ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर चीन के PL-15 मिसाइल को मात दी थी और स्कैल्प मिसाइल से सफल वार किए थे. इससे इन विमानों की तात्कालिक ज़रूरत और भी स्पष्ट हो गई है. बता दें कि डसॉल्ट एविएशन भारतीय साझेदारों (खासकर टाटा) के साथ मिलकर भारत में असेंबली लाइन स्थापित करेगा. भविष्य में बनने वाले राफेल विमानों में मौजूदा F4 स्टैंडर्ड से भी उन्नत क्षमताएं होंगी. साथ ही हैदराबाद में M-88 इंजनों के लिए मरम्मत और मेंटेनेंस सुविधा (MRO) स्थापित की जाएगी. राफेल का देसीकरण नई डील के तहत पहले 18 विमान फ्रांस में निर्मित होंगे, लेकिन आगे आने वाले बैचों में लगभग 60% स्वदेशी सामग्री का लक्ष्य रखा गया है. भारत में बनने वाले विमानों में लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले हथियार और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल होंगे. इस सौदे से भारतीय वायुसेना के पास कुल 176 राफेल होंगे, जिनमें पहले से खरीदे गए 36 विमान और नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए 36 विमान भी शामिल हैं. इससे वायुसेना के अंबाला और हाशिमारा जैसे प्रमुख बेसों की ताकत बढ़ेगी. बता दें कि फ्रांस सरकार की ओर से सॉवरेन गारंटी दी जाएगी, जिससे डिलीवरी समय पर सुनिश्चित होगी और वाणिज्यिक जोखिमों से बचाव मिलेगा. कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर हस्ताक्षर अगले वित्त वर्ष में होने की उम्मीद है. 5 से 6 साल में बदलेगी तस्‍वीर राफेल सौदा न केवल वायुसेना की मौजूदा क्षमताओं को तुरंत मजबूत करेगा, बल्कि लंबे समय तक स्वदेशी रक्षा उत्पादन को गति देगा. स्थानीय असेंबली 2029-30 तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी. इस बीच, तेजस MK-1A और आने वाले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से भारत की आत्मनिर्भरता और सामरिक ताकत को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है.

भारत-यूरोपीय संघ FTA को लेकर ग्रीस ने दिया समर्थन, PM मोदी से हुई चर्चा

नई दिल्ली  ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यारीकोस मित्सोताकिस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान, उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के शीघ्र और पारस्परिक लाभकारी निष्कर्ष के लिए ग्रीस के समर्थन को दोहराया। साथ ही उन्होंने अगले वर्ष होने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट की सफलता की भी शुभकामनाएं दीं। मित्सोताकिस ने प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं, जिस पर पीएम मोदी ने उन्हें धन्यवाद दिया था। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, शिपिंग, रक्षा, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हो रही प्रगति का स्वागत किया और भारत-ग्रीस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया, “प्रधानमंत्री मित्सोताकिस ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र संपन्न होने और 2026 में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले एआई इम्पैक्ट समिट की सफलता के लिए ग्रीस का समर्थन व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने परस्पर हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए और संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई।” गौरतलब है कि अगस्त 2023 में प्रधानमंत्री मोदी की ग्रीस यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर पर ले जाया गया था। फरवरी 2024 में मित्सोताकिस ने भारत का राजकीय दौरा किया था, जो 15 साल बाद ग्रीस से भारत में किसी राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख का पहला दौरा था। इस दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत और गहरा किया था। दोनों नेताओं ने तब साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून (यूएनसीएलओएस सहित) के प्रति सम्मान, मानवाधिकारों, ऐतिहासिक संबंधों और लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों को भारत-ग्रीस रणनीतिक संबंधों की नींव बताया था। प्रधानमंत्री मोदी और मित्सोताकिस ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईईसी) पर भी चर्चा की थी, जिसका उद्देश्य भारत और यूरोप के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ाना है। इसके तहत व्यापार, वाणिज्य, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर बल दिया गया।

सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा कदम: आतंकियों के मददगारों का रिमांड बढ़ा, कई खुलासे तय

जम्मू-कश्मीर पहलगाम हमले के मामले में आतंकवादियों की मदद करने के आरोप में दो आरोपियों की रिमांड अदालत ने फिर बढ़ा दी है। जम्मू की एनआईए की विशेष अदालत ने पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े दो आरोपियों की हिरासत और जांच की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर अब 45 दिन और कर दी है। यह आदेश विशेष न्यायाधीश संदीप गंडोत्रा ने 18 सितंबर को दिया। आरोपी बशीर अहमद जोठट (बैसरन, पहलगाम) और परवेज़ अहमद (बटकूट, पहलगाम) पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तानी आतंकियों को छिपने की जगह उपलब्ध कराई। अदालत ने कहा कि जांच अभी अहम दौर में है, क्योंकि गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और डीएनए परीक्षण जैसी रिपोर्टें लंबित हैं। इसलिए हिरासत बढ़ाने की मांग उचित है। सरकारी वकील चंदन कुमार सिंह ने अदालत में बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन से पाकिस्तानी नंबर मिले हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। इसके अलावा, 28 जुलाई को मुठभेड़ में मारे गए तीन आतंकियों से बरामद हथियार और सामान की रिपोर्ट भी लंबित है। एनआईए ने कहा कि आरोपियों के बताए ठिकानों से मिले कंबल, शॉल और बिस्तर डीएनए परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, ताकि उन्हें आतंकियों से जोड़ा जा सके। यह मामला 22 अप्रैल 2025 को बैसरन, पहलगाम में हुए आतंकी हमले से जुड़ा है। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने लश्कर-ए-तैयबा के तीन पाकिस्तानी आतंकियों को हमले से पहले छिपने की जगह उपलब्ध कराई थी। दोनों आरोपी 22 जून से जम्मू की अंपल्ला जेल में बंद हैं।

अहमदाबाद क्रैश की जांच में बड़ा खुलासा, फ्यूल सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी पाई गई

नई दिल्ली अहमदाबाद हवाई दुर्घटना की जांच में एक चौंकाने वाला नया खुलासा सामने आया है, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। 260 लोगों की दर्दनाक मौत से जुड़ी इस हादसे के पीछे की वजहें अब तक जो समझी जा रही थीं, उनसे कहीं अधिक गहरे और गंभीर तथ्य उजागर हुए हैं। इस घटना की सच्चाई जानकर हर किसी के होश उड़ जाएंगे। क्या वजह थी इस भीषण दुर्घटना की? किस तरह की लापरवाही और चूक ने इतना बड़ा हादसा कर दिया? आइए जानते हैं इस मामले से जुड़ी अब तक की सबसे महत्वपूर्ण और हैरान करने वाली जानकारी। घटना के बारे में बात करें तो इस साल 12 जून 2025 को हुए अहमदाबाद विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान का यह हादसा तब हुआ था जब यह अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद मेडिकल हॉस्टल की बिल्डिंग से टकरा गया। इस त्रासदी में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई, साथ ही टक्कर से प्रभावित मेडिकल हॉस्टल के 19 लोगों की भी जान चली गई। कुल मिलाकर इस हादसे में 260 लोग अपनी जिंदगी गंवा बैठे। हादसे में केवल एक व्यक्ति ही गंभीर रूप से घायल होकर जिंदा बचा था। वहीं, अस्पताल के 67 लोग भी घायल हुए थे। अब इस दर्दनाक घटना को लेकर मारे गए चार यात्रियों के परिवारों ने अमेरिका में विमान निर्माता कंपनी बोइंग और उसके पार्ट्स बनाने वाली कंपनी हनीवेल के खिलाफ कानूनी कदम उठाया है। यह मुकदमा टेक्सास स्थित लैनियर लॉ फर्म के माध्यम से दायर किया गया है। हादसे की वजह बनी तकनीकी खामी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, विमान के फ्यूल स्विच में खराबी आ गई थी, जिसके कारण विमान 'रन' से 'कटऑफ' स्थिति में चला गया था। इस तकनीकी खराबी ने पायलट के नियंत्रण को प्रभावित किया और विमान अनियंत्रित होकर अस्पताल की इमारत से टकरा गया। मृतकों के परिवारों का आरोप है कि बोइंग और हनीवेल दोनों कंपनियां इस फ्यूल स्विच की समस्या को अच्छी तरह से जानती थीं, लेकिन जानबूझकर इस खतरे को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियों की लापरवाही और उचित सावधानी न बरतने के कारण यह हादसा हुआ है। जांच प्रक्रिया जारी, कंपनियों की चुप्पी हालांकि बोइंग और हनीवेल की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बोइंग ने केवल इतना कहा है कि भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) इस हादसे की विस्तृत जांच कर रहा है। इस जांच की अंतिम रिपोर्ट आने की उम्मीद 2026 में है। हादसे का असर और भविष्य की तैयारी यह हादसा भारतीय हवाई सेवा के इतिहास में एक काला दिन माना जा रहा है, जिसने देश के नागरिकों को विमान सुरक्षा के प्रति चिंता में डाल दिया है। विमान निर्माण और उसके पार्ट्स की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बीच यह मुकदमा एक नई चुनौतियों को सामने लाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में जांच पूरी होने पर विमानन सुरक्षा मानकों में कड़ा सुधार हो सकता है।  

भारत सरकार का रुख साफ, सऊदी अरब-पाकिस्तान समझौते पर जताई अपनी चिंता

नई दिल्ली  सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर शुक्रवार को भारत की प्रतिक्रिया आई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी है, जो लगातार गहरी हो रही है। भारत ने उम्मीद जताई है कि रणनीतिक साझेदारी में आपसी हितों का ध्यान रखा जाएगा। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए डील के तहत यदि दोनों देशों में किसी भी एक देश पर हमला होता है तो यह अटैक दोनों के खिलाफ आक्रमण माना जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए थे, जिसके बाद सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुआ यह समझौता अहम माना जा रहा है। सऊदी अरब-पाकिस्तान समझौते पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है जो पिछले कई वर्षों में काफी गहरी हुई है। हम उम्मीद करते हैं कि इस रणनीतिक साझेदारी में आपसी हितों और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा जाएगा।" इससे पहले, रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत इस कदम के अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेगा। जायसवाल ने कहा, "सरकार भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और सभी क्षेत्रों में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।" पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान-सऊदी संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, यह समझौता सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच लगभग आठ दशकों से चली आ रही ऐतिहासिक साझेदारी पर आधारित है और भाईचारे व इस्लामी एकजुटता के बंधनों के साथ-साथ दोनों देशों के बीच साझा रणनीतिक हितों और घनिष्ठ रक्षा सहयोग पर आधारित है। दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों और साझा हितों के कई विषयों की भी समीक्षा की। शरीफ ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी बातचीत में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, क्षेत्रीय चुनौतियों की समीक्षा की गई और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाया गया। शरीफ ने यह भी कहा कि वह सऊदी क्राउन प्रिंस के लगातार समर्थन और दोनों देशों के बीच सऊदी निवेश, व्यापार और व्यावसायिक संबंधों को बढ़ाने में उनकी गहरी रुचि की बहुत सराहना करते हैं।

बयान से सनसनी: किस पर भड़के इजरायली रक्षा मंत्री, धमकी में कही ये बात

गाजा  गाजा में इजरायल हमास पर कहर बरपा रहा है। स्थानीय लोग शहर छोड़कर अन्य स्थानों पर जा रहे हैं। इजरायल कई समूहों से एक साथ संघर्ष कर रहा है और किसी से भी टकराव से पीछे नहीं हट रहा। इस बीच, यमन और इजरायल के बीच तनाव भी बढ़ता जा रहा है। हूती विद्रोहियों के खिलाफ भी इजरायल कार्रवाई कर रहा है। हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब में अब इजरायल बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। इजरायली रक्षा मंत्री ने दी जान से मारने की धमकी इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती को जान से मारने की धमकी दी है। काट्ज ने कहा है कि जल्द ही तुम्हारा नंबर आएगा। इससे पहले 28 अगस्त को इजरायल ने यमन में हवाई हमला कर हूती सरकार के प्रधानमंत्री और कई महत्वपूर्ण सदस्यों को मार दिया था। अब इजरायल ने फिर से ऐसे हमले की धमकी दी है। दरअसल, गुरुवार को इजरायल के दक्षिणी शहर ऐलात के एक होटल पर हूती विस्फोटक ड्रोन से हमला हुआ था। इस दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल और दो अन्य ड्रोनों को भी रोका गया। इस हमले के बाद काट्ज ने एक्स पर लिखा कि अब्दुल-मलिक अल-हूती… तुम्हारा समय आ गया है। तुम्हें अपनी सरकार के अन्य लोगों के पास भेजा जाएगा। हूती झंडे पर लिखे नारे 'इजरायल की मौत, यहूदियों पर अभिशाप' की जगह इजरायली नीला-सफेद झंडा यमन की एकीकृत राजधानी पर लहराएगा। अब्दुल-मलिक कौन है? अब्दुल-मलिक हूती आंदोलन के संस्थापक हुसैन अल-हूती के भाई हैं। 2004 में हुसैन की मौत के बाद अब्दुल-मलिक ने संगठन की कमान संभाली। 2015 में हूतियों ने यमन की सरकार को उखाड़ फेंका और राजधानी सना सहित बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इस संघर्ष में मलिक ने एक मजबूत नेता और कमांडर के रूप में पहचान बनाई। अब्दुल-मलिक के बारे में कहा जाता है कि वह लंबे समय तक एक जगह नहीं ठहरता और बार-बार अपनी लोकेशन बदलता रहता है। वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लेता। यह भी कहा जाता है कि उसके अपने लोगों को भी उसकी सटीक जानकारी नहीं होती कि वह कहां है और क्या कर रहा है। हालांकि, वह समय-समय पर वीडियो संदेश जारी करता रहता है। बढ़ रही हूतियों की लगातार ताकत बताया जाता है कि अब्दुल-मलिक के नेतृत्व में हूतियों की ताकत लगातार बढ़ी है। खासकर लाल सागर में उसने इजरायल, अमेरिका और उनके सहयोगियों को कड़ी चुनौती दी है। हूती विद्रोही अक्सर इजरायल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हैं और लाल सागर में इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाते रहते हैं। वे आए दिन इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले करते रहते हैं।  

सड़क पर ही विरोध! 20 रुपये में 6 नहीं, सिर्फ 4 गोलगप्पे पर महिला ने किया हंगामा

वडोदरा  बीच सड़क बैठकर रोती हुई महिला, स्पीड कम करके महिला को बचाकर निकलते वाहन। सोशल मीडिया पर ऐसा एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वीडियो के वायरल होने की असली वजह वह कारण है जिसके लिए महिला इस तरह अपनी आवाज उठाने को मजबूर हुई। दावा किया जा रहा है कि 20 रुपये में 6 की जगह महज 4 गोलगप्पे दिए जाने से नाराज होकर महिला धरने पर बैठ गई। बताया जा रहा है कि वीडियो वडोदरा के सुरसागर झील इलाके का है। हाल ही में महिला सड़क किनारे एक गोलगप्पे वाले ठेले पर पहुंची थी। उसका आरोप था कि गोलगप्पे वाला 20 रुपये में 6 देता है लेकिन उसे केवल चार ही दिए। न्याय पाने के लिए महिला बीच सड़क धरने पर बैठ गई। महिला रोने लगी। महिला ने रोते हुए लोगों को अपना दुख बताया और कहा कि गोलगप्पे वाला दादागिरी करता है। महिला ने कहा कि वह उसका ठेला हटवाना चाहती है। ट्रैफिक बाधित होने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और किसी तरह उसे समझा-बुझाकर रास्ते से हटाया। वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। लोग तरह-तरह के कॉमेंट कर रहे है। कुछ लोगों ने महिला के साथ सहानुभूति जताई और एक उपभोक्ता के रूप में उसके प्रदर्शन को सही बताया।  

‘संगीत की दुनिया में याद रहेगा उनका योगदान’– जुबीन गर्ग की मौत पर PM मोदी का भावुक संदेश

मुंबई  बॉलीवुड के मशहूर गायक जुबीन गर्ग का शुक्रवार निधन हो गया। सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग दुर्घटना में 52 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई। जुबीन की मौत के संगीत जगत सहित देशभर में शोक छा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुबीन गर्ग के निधन पर शोक व्यक्त किया। गर्ग के अचानक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए, मोदी ने कहा कि गायक को संगीत में उनके योगदान के लिए याद किया जाएगा। PM मोदी ने जताया शोक पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग के आकस्मिक निधन से स्तब्ध हूं। उन्हें संगीत में उनके समृद्ध योगदान के लिए याद किया जाएगा। उनके गायन सभी क्षेत्रों के लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय थे। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। ओम शांति। अशोक सिंघल ने की ​गायक के निधन की पुष्टि इससे पहले, असम के कैबिनेट मंत्री अशोक सिंघल ने सोशल मीडिया पर गायक के निधन की पुष्टि की। मंत्री ने X पर पोस्ट किया, हमारे प्रिय ज़ुबीन गर्ग के असामयिक निधन से बहुत दुःख हुआ। असम ने न केवल एक आवाज, बल्कि एक धड़कन भी खो दी है। जुबीन दा एक गायक से कहीं बढ़कर थे; वे असम और राष्ट्र का गौरव थे, जिनके गीतों ने हमारी संस्कृति, हमारी भावनाओं और हमारी भावना को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाया। स्कूबा डाइविंग के दौरान हुआ हादसा नॉर्थ ईस्ट न्यूज़ ने बताया कि गायक सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग गतिविधि में भाग ले रहे थे, तभी वे समुद्र में गिर गए। उन्हें बचा लिया गया और आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहाँ बाद में उनकी मृत्यु हो गई। गायक शनिवार को सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में प्रस्तुति देने वाले थे। ज़ुबीन गर्ग के बारे में अधिक जानकारी 1972 में मेघालय में जन्मे जुबीन एक असमिया गायक थे, जिनका असली नाम जुबीन बोरठाकुर था। 1990 के दशक में उन्होंने अपने अंतिम नाम की जगह अपना गोत्र, गर्ग, रखकर अपना मंच नाम अपनाया। 2006 में उन्होंने फिल्म गैंगस्टर का गाना 'या अली' गाया। इस चार्टबस्टर की सफलता ने उन्हें देश भर में प्रसिद्धि दिलाई और आगे चलकर कई बॉलीवुड हिट गाने दिए, जिनमें सुबह सुबह और क्या राज है शामिल हैं। 40 से अधिक भाषाओं में गाए गाने जुबीन ने मुख्य रूप से असमिया, बंगाली और हिंदी फिल्म और संगीत उद्योगों में काम किया और गाया, लेकिन 40 से ज्यादा भाषाओं और बोलियों में भी गाया। कई सालों तक उन्हें असम का सबसे ज्यादा कमाई करने वाला गायक बताया जाता था।

डराने की कोशिश के बावजूद तालिबान ने ट्रंप को किया खारिज, क्या थी अमेरिकी राष्ट्रपति की मांग?

काबुल अफगानिस्तान में सत्ताधारी तालिबान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दो-टूक जवाब दिया है। असल में ट्रंप अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना भेजना चाहते थे। वह चाहते थे कि बगराम एयरबेस को फिर से अमेरिका को सौंप दिया जाए। लेकिन अफगानिस्तान ने इससे पूरी तरह से इनकार कर दिया है। अफगान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को इस बारे में सोशल मीडिया पर लिखा। उन्होंने लिखा है कि अफगानिस्तान अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखने का इच्छुक है। लेकिन अफगानिस्तान की धरती पर फिर से अमेरिकी सेना को आने की मंजूरी नहीं मिलेगी। इससे ट्रंप की खासी किरकिरी हो गई। इससे पहले ट्रंप ने गुरुवार को कहा था कि उनका प्रशासन बगराम एयरबेस वापस चाहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से ऐसा चाहते हैं। ट्रंप का तर्क है कि चीन के खतरे को देखते हुए यह एयरबेस रणनीतिक लिहाज से काफी अहम है। उनका कहना है कि हमने तालिबान को यह एयरबेस मुफ्त में दे रखा है। ट्रंप ने आगे कहा कि असल में बगराम एयरबेस उस जगह से मात्र एक घंटे की दूरी पर है, जहां चीन परमाणु मिसाइलें बनाता है। हालांकि तालिबान अधिकारियों ने उनके इस आइडिया को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय प्रवक्ता जाकिर जलाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अफगानिस्तान और अमेरिका को एक-दूसरे से मिल-जुलकर रहना है। लेकिन अफगानिस्तान के किसी हिस्से में अमेरिकी सेना नहीं रहेगी। हम अमेरिका के साथ राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को बनाए रखना चाहते हैं। यह आपसी सम्मान और बराबरी की भावना के साथ होगा। बगराम एयरबेस काबुल के ठीक उत्तर में है। यहां पर एक बेहद कुख्यात जेल भी है। यह जगह करीब दो दशक तक अमेरिकी सैन्य संचालन का केंद्र रही। अमेरिका ने इसी जगह पर हजारों लोगों को बिना किसी आरोप या मुकदमे के कैद रखा। तमाम लोगों को यहां पर यातनाएं दी गईं। साल 2021 में अमेरिका की वापसी के बाद तालिबान ने इस जगह पर फिर से अधिकार पा लिया।  

जानलेवा अमीबा ने केरल में ली 19 जानें, ऐसे करें अपनी सुरक्षा

केरल  पिछले कुछ समय से केरल राज्य एक जीवित सूक्ष्मजीव के कारण दहशत झेल रहा है। बता दें, इस सूक्ष्मजीव का नाम नेगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में 'दिमाग खाने वाला अमीबा' कहा जाता है। हाल ही में केरल में ब्रेन ईटिंग अमीबा के लगभग 67 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें 19 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। ब्रेन ईटिंग अमीबा के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल और राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि यह गंभीर संक्रमण नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करके मस्तिष्क के ऊतकों को नष्ट कर देता है। आइए जानते हैं आखिर क्या है दिमाग खाने वाला यह अमीबा, इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय। क्या है ब्रेन ईटिंग अमीबा ब्रेन ईटिंग अमीबा नेग्लेरिया फाउलेरी नामक एक सूक्ष्म अमीबा के संक्रमण से होता है। यह साइज में बहुत छोटा होने की वजह से नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करके सीधा दिमाग में पहुंच जाता है। दिमाग के टिशू जो पहले से ही काफी मुलायम होते हैं, यह अमीबा उन्हें धीरे-धीरे गलाना शुरू कर देता है, जिसकी वजह से 98 प्रतिशत संक्रमित लोग जिंदा नहीं बच पाते हैं। ब्रेन ईटिंग अमीबा के कारण डॉक्टरों की मानें तो बढ़ते तापमान के कारण अमीबिक मेनिन्जाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। गर्म परिस्थितियां इस रोगाणु के लिए आदर्श प्रजननस्थल बनाती हैं। ब्रेन ईटिंग अमीबा आमतौर पर गर्म, मीठे पानी वाले स्थानों जैसे झील, तालाब, गर्म पानी के स्विमिंग पूल, या टैंक में पाया जाता है। वॉटर एक्टिविटीज के दौरान इसके मनुष्यों के संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है। संक्रमित पानी के छींटे या स्नान के दौरान यह नाक के मार्ग से मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। ब्रेन ईटिंग अमीबा के लक्षण अमीबिक मेनिन्जोएन्सेफलाइटिस के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू के समान हो सकते हैं। जो आमतौर पर संक्रमण के लगभग 9 दिन बाद दिखाई देने लगते हैं। जैसे कि- -तेज बुखार -ठंड लगना -सिरदर्द -मतली और उल्टी -गर्दन में अकड़न – रोशनी से डर -दौरे – नींद में बदलाव और चक्कर ब्रेन ईटिंग अमीबा से बचाव यह संक्रमण तेजी से मस्तिष्क को प्रभावित करता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो 48 से 72 घंटे में मृत्यु तक हो सकती है। लेकिन समय रहते एमआरआई समेत बाकी जांच करवाकर इस बीमारी का इलाज करवाया जा सकता है। ब्रेन ईटिंग अमीबा के इलाज के दौरान डॉक्टर आमतौर पर एंटी-एमीबिक दवाओं और सहायक देखभाल का उपयोग करते हैं, लेकिन बहुत कम मामलों में ही मरीज पूरी तरह ठीक हो पाता है।