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मोदी शासन की नीतियों से बढ़ी GDP, मंत्रियों ने बताया सुधारों का नतीजा

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्रियों ने शनिवार को वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में जीडीपी की 7.4 प्रतिशत शानदार वृद्धि दर को पीएम नरेंद्र मोदी के सुधार-संचालित शासन का प्रमाण बताया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियों के कारण जीडीपी वृद्धि दर लगातार दूसरी तिमाही में उम्मीदों से बेहतर रही और अप्रैल-जून 2025 के लिए यह पांच तिमाहियों के उच्चतम स्तर 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह जनवरी-मार्च 2025 की 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर और 2024-25 की पहली तिमाही की 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर से कहीं अधिक है।" केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत के साथ दूसरे बड़े देशों के वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में रियल जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों का एक इंफोग्राफिक शेयर किया। इस इंफोग्राफिक में दी गई जानकारी के अनुसार, जून तिमाही में चीन ने 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की, उसके बाद इंडोनेशिया ने 5.1 प्रतिशत, अमेरिका ने 2.1 प्रतिशत, जापान और ब्रिटेन ने 1.2-1.2 प्रतिशत और फ्रांस ने 0.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की। इन सबसे अलग भारत ने जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की शानदार जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की। उन्होंने लिखा, "7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि – पीएम नरेंद्र मोदी के सुधार-संचालित शासन का प्रमाण है।" केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लिखा, "निरंतर कम मुद्रास्फीति के कारण, भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि हासिल की। यह पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। साथ ही, पिछली तिमाही की 7.4 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में, वर्तमान विकास दर भारतीय अर्थव्यवस्था के निरंतर बढ़ते रुझान को दर्शाती है।" केंद्रीय मंत्री ने 20वें इंडिया-अफ्रिका बिजनेस कॉन्क्लेव में कहा, "जब हम भारत की विकास गाथा पढ़ते हैं तो पाते हैं कि इस तिमाही आनी अप्रैल से जून तक देश की विकास दर 7.8 प्रतिशत रही है और हमने सभी क्षेत्रों में प्रगति की है।"

मेडिकल साइंस का चमत्कार: इंसान के शरीर में लगाया गया सूअर का फेफड़ा, सफल प्रयोग ने खोली नई उम्मीदें

बेजिंग  मेडिकल साइंस ने बड़ी छलांग लगाई है। चीन के वैज्ञानिकों ने पहली बार एक ब्रेन डेड मरीज के शरीर में जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर का फेफड़ा ट्रांसप्लांट  किया। यह ऐतिहासिक प्रयोग ग्वांगझोउ मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने किया।39 साल के ब्रेन डेड व्यक्ति पर यह ट्रांसप्लांट किया गया। ऑपरेशन के बाद फेफड़ा कुछ समय तक काम करता रहा, लेकिन 24 घंटे के भीतर इसमें नुकसान दिखने लगा। 3वें और 6वें दिन शरीर में एंटीबॉडी बनने लगीं, जिसने फेफड़े को नुकसान पहुंचाया। 9वें दिन  सूअर का फेफड़ा शरीर से हटा दिया गया।   वैज्ञानिकों के अनुसार, फेफड़े का ट्रांसप्लांट हार्ट और किडनी की तुलना में कहीं ज्यादा जटिल है।हर सांस के साथ फेफड़े का सीधा संपर्क बाहरी वातावरण, वायरस, एलर्जन और प्रदूषण से होता है। इसी कारण  इम्यून रिएक्शन और अंग अस्वीकृति (rejection)  का खतरा ज्यादा रहता है।भले ही यह फेफड़ा पूरी तरह सफल न रहा हो, लेकिन यह प्रयोग जेनेटिक साइंस और अंग प्रत्यारोपण की दुनिया में नई राह खोल सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में सूअर जैसे जानवरों से इंसानों के लिए अंग तैयार करना संभव हो सकेगा।

रेलवे का बड़ा ऐलान: यात्रियों के लिए बदला लोकल ट्रेनों का टाइमटेबल

मुंबई  गणेशोत्सव को देखते हुए, मुंबई के लाखों लोगों को रेलवे ने बड़ी खुशखबरी दी है। मुंबई मेट्रो के बाद अब मध्य रेलवे ने भी रात में अतिरिक्त लोकल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इस कदम से गणपति विसर्जन के दौरान देर रात तक सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। सेंट्रल लाइन पर चलेंगी ये ट्रेनें मध्य रेलवे 4, 5 और 6 सितंबर की रात को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) और कल्याण-ठाणे के बीच विशेष ट्रेनें चलाएगा। ये ट्रेनें मुख्य मार्ग पर सभी स्टेशनों पर रुकेंगी। CSMT से कल्याण: 6 सितंबर को एक स्पेशल ट्रेन रात 01:40 बजे CSMT से चलेगी और 03:10 बजे कल्याण पहुँचेगी। CSMT से ठाणे: एक अन्य स्पेशल सेवा CSMT से रात 02:30 बजे रवाना होकर 03:30 बजे ठाणे पहुँचेगी। अप मेन लाइन पर: 4, 5 और 6 सितंबर को कल्याण से CSMT के लिए स्पेशल ट्रेनें रात 00:05 बजे से चलेंगी, जो 01:30 बजे CSMT पहुँचेगी। हार्बर लाइन पर भी चलेंगी स्पेशल ट्रेनें गणपति विसर्जन के दिन यानी 6 और 7 सितंबर को हार्बर लाइन पर भी यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। CSMT से पनवेल: 01:30 बजे और 02:45 बजे दो विशेष ट्रेनें CSMT से पनवेल के लिए चलेंगी। पनवेल से CSMT: पनवेल से CSMT के लिए पहली स्पेशल ट्रेन रात 01:00 बजे और दूसरी 01:45 बजे चलेगी।  

सरकार का फोकस: आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से मजबूत बनेगी खेती

शिमला कृषि एवं पशुपालन मंत्री मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि कृषि को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रही है। कृषि रोड मैप एवं रबी एक्शन प्लान से किसानों को लाभकारी खेती की नई दिशा मिलेगी। उन्होंने बताया कि देश कृषि प्रधान है और इसका 14 प्रतिशत योगदान जीडीपी में है। कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों के खुलने से वैज्ञानिकों के शोध ने कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रो. चंद्र कुमार आज यहां विकसित कृषि संकल्प अभियान (विकेएसए) के तहत भारतीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला में “राज्य कृषि रोड मैप एवं रबी एक्शन प्लान” विषय पर आयोजित एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में अपने विचार साझा कर रहे थे।  इस क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य सरकार के विभागों और आईसीएआर संस्थानों से "राज्य कृषि प्राथमिकताएँ एवं कार्यान्वित की जाने वाली रणनीतियाँ" विषय पर संस्थागत दृष्टिकोण प्राप्त करने के लिए किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के लिए आगामी पांच वर्षों (2025-2030) का कृषि रोडमैप तैयार करना और विकसित कृषि संकल्प अभियान-2025 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। यह रोडमैप प्राकृतिक खेती में प्रदेश की अग्रणी भूमिका, कृषि-जलवायु विविधता का लाभ और राष्ट्रीय अभियानों से सामंजस्य स्थापित करने पर केंद्रित होगा, जिससे अगले पांच वर्षों में कृषि क्षेत्र का व्यापक रूपांतरण संभव हो सके। प्राकृतिक खेती के लिए मवेशियों की महत्ता अहम कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर है, परंतु इसके लिए मवेशियों की महत्ता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्राकृतिक खेती मवेशियों पर आधारित है। उन्होंने जोर दिया कि आज के दौर में कृषि क्षेत्र को रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से अधिकारियों को देहरादून में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है।   कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों की आर्थिकी को सुदृढ़ बनाने के लिए दूध की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। साथ ही, ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जिसका संचालन डेयरी डेवलपमेंट अथॉरिटी करेगी। इस प्लांट में बने उत्पादों पर ट्रेडमार्क हिमाचल का होगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई प्रबंधन और विपणन संबंधों को मजबूत करना भी कृषि विकास की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में कृषि-जलवायु की पहचान कर विविधता लाने की आवश्यकता है। साथ ही, कीटनाशकों का न्यूनतम प्रयोग किया जाना चाहिए ताकि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहें। कृषि मंत्री ने सभी विभागीय अधिकारियों से आग्रह किया कि वह आपसी समन्वय से कार्य करें ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया जा सके। सचिव, कृषि एवं बागवानी सी. पाल रासु ने विभागीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए इस योजना में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। निदेशक नौणी अनुसंधान केंद्र डॉ. एस.के. चौहान, निदेशक प्रसार शिक्षा सीएसके एचपीकेवी पालमपुर डॉ. विनोद शर्मा और विभागाध्यक्ष सामाजिक विज्ञान विभाग, सीपीआरआई शिमला एवं कार्यक्रम सचिव डॉ. आलोक कुमार ने भी विचार व्यक्त किए। निदेशक आईसीएआर-सीपीआरआई शिमला डॉ. बृजेश सिंह ने स्वागत संबोधन दिया। तकनीकी सत्रों की रूपरेखा पहला सत्र में विश्वविद्यालयों के दृष्टिकोण से कृषि रोड मैप, कृषि प्राथमिकताओं एवं कार्य नीतियों पर चर्चा हुई। पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय एवं नौणी बागवानी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने राज्य की कृषि चुनौतियों और अवसरों पर प्रस्तुतिकरण दिया। दूसरे सत्र में आईसीएआर से जुड़े विभिन्न अनुसंधान संस्थानों जैसे डीएमआर सोलन, आईआईडब्ल्यूबीआर शिमला, आईएआरआई और एनबीपीजीआर के वैज्ञानिकों ने कृषि रोड मैप के क्रियान्वयन और अनुसंधान-आधारित रणनीतियों पर अपने विचार रखे। तीसरे सत्र में राज्य सरकार के दृष्टिकोण से कृषि रोड मैप एवं कार्य नीतियों पर चर्चा हुई। इसमें कृषि विभाग, बागवानी विभाग, प्राकृतिक खेती, पशुपालन विभाग, राज्य बीज एवं ऑर्गेनिक उत्पाद प्रमाणन एजेंसी और मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच) के निदेशकों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए ठोस सुझाव दिए।  इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालयों, विभिन्न विभागों और आईसीएआर संस्थानों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।  

यूक्रेन पर रूस का कहर बरपा, 537 ड्रोन-45 मिसाइलों से अटैक, भारी तबाही

रूस  रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया। इसमें 537 ड्रोन और 45 मिसाइलें दागी गईं। यूक्रेनी वायुसेना ने दावा किया कि उसने 510 ड्रोन और 38 मिसाइलें मार गिराईं लेकिन फिर भी कई जगह तबाही हुई। इस हमले में  1 व्यक्ति की मौत और 24 लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।  किन जगहों पर हमला हुआ?      ज़ापोरिज़्झिया : निजी मकान, कैफ़े और औद्योगिक केंद्र तबाह।      ड्नीप्रो और पावलोहराद (Dnipropetrovsk क्षेत्र) : लगातार धमाके, लोगों को शरणस्थलों में जाने का अलर्ट।      राजधानी कीव : दो दिन पहले ही हुए हमले में 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें चार बच्चे भी थे। यूक्रेनी सेना ने रूस के क्रास्नोदर और सिज़रान तेल रिफाइनरियों  पर हमला किया। वहाँ जोरदार धमाके और आग लगने की पुष्टि हुई।राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की आड़ में बड़े हमलों की तैयारी की। उन्होंने पश्चिमी देशों से बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र में कड़े प्रतिबंध लगाने और रूस को मिलने वाली फंडिंग रोकने की अपील की।   अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया  यूरोपीय संघ ने साफ किया कि जब तक रूस युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई (reparations) नहीं करता, तब तक उसके जमे हुए संपत्ति  (frozen assets) वापस नहीं दी जाएंगी। डेनमार्क में यूरोपीय रक्षा मंत्रियों की बैठक में यूक्रेनी सैनिकों को ट्रेनिंग देने पर सहमति बनी। ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह जल्द ही यूरोपीय नेताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सुरक्षा गारंटी पर चर्चा करेंगे। ल्वीव शहर में यूक्रेन के पूर्व संसदीय स्पीकर  आंद्रिय परुबीय  की हत्या कर दी गई। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने इसकी पुष्टि की और कहा कि आरोपियों की तलाश जारी है।   

मुख्यमंत्री का बड़ा बयान: इस बार 2023 की तुलना में भारी नुकसान

शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शनिवार को जिला चम्बा के भरमौर, मणिमहेश और अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों के साथ-साथ कांगड़ा जिले में पौंग बांध से छोड़े गए पानी के कारण बाढ़ प्रभावित फतेहपुर और इंदौरा के मंड क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। मुख्यमंत्री पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन से भरमौर के लिए रवाना हुए, लेकिन खराब मौसम के कारण उनका हेलीकॉप्टर वहां उतर नहीं सका। चम्बा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार द्वारा समय पर उठाए गए एहतियाती कदमों के कारण जन जीवन की हानि वर्ष 2023 की तुलना में कम हुई है, लेकिन इस बार विनाश का पैमाना कहीं अधिक है। सड़क, बिजली, पानी आपूर्ति और संचार सेवाएं 2023 की तुलना में अधिक प्रभावित हुई हैं। राज्य सरकार के समक्ष लोगों के पुनर्वास की एक बड़ी चुनौती है, जिसे हम प्रदेशवासियों के सहयोग से पार करेंगे। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित प्रत्येक परिवार के पुनर्वास के लिए प्रदेश सरकार विशेष राहत पैकेज प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह लगातार जमीनी स्तर पर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। सरकार आपदा प्रभावितों को हर संभव राहत पहुंचाने और चंबा भरमौर मार्ग में संपर्क सुविधा बाधित होने के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे लोगों को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी चम्बा से पैदल ही भरमौर के लिए रवाना हुए हैं। यह दर्शाता है कि राज्य सरकार मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संवेदनशीलता के साथ इस संकट का सामना कर रही है। सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार सड़क संपर्क बहाल करने के लिए तेजी से काम कर रही है। इसके लिए पोकलेन, जेसीबी और अन्य भारी मशीनरी तैनात की गई है। जिला प्रशासन को यथाशीघ्र सड़क संपर्क बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं, हालांकि खराब मौसम राहत और पुनर्स्थापन कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहा है। भरमौर क्षेत्र में फंसे लोगों की सकुशल वापसी के लिए प्रदेश सरकार ने हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं जो मौसम की अनुकूल परिस्थिति होने पर लोगों को एयरलिफ्ट करेंगे। भाजपा नेताओं की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे प्रभावित लोगों की मदद करने के बजाय अफवाहें फैला रहे हैं। भाजपा विधानसभा का मानसून सत्र स्थगित करने की मांग कर रही है, जबकि 2023 में यही पार्टी विधानसभा सत्र बढ़ाने की मांग कर रही थी। मणिमहेश यात्रा स्थगित करने का निर्णय मौजूदा मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है, लेकिन कुछ लोग इस पर भी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है। हमें अपनी देव यात्राओं और मणिमहेश यात्रा पर पूर्ण आस्था है, लेकिन भाजपा नेताओं का इस पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और राहत एवं बचाव कार्यों को गति दे रही है। उन्होंने राज्य में बार-बार हो रही बादल फटने की घटनाओं के कारणों का अध्ययन करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री के साथ हुई बैठक में उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का आग्रह किया है। वैश्विक ऊष्मीकरण और जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती बन रहे हैं और व्यापक तबाही मचा रहे हैं, इसलिए इस समस्या का गहन समाधान तलाशना जरूरी है ताकि अनमोल जीवन को बचाया जा सके। सुक्खू ने चम्बा के करियां स्थित एनएचपीसी भवन में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने फंसे हुए लोगों के लिए भोजन, पानी, आश्रय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए कहा। साथ ही जिला प्रशासन को क्षतिग्रस्त सड़कों को प्राथमिकता पर खोलने, विशेषकर चम्बादृभरमौर एनएच-154ए को बहाल करने और बिजली व पेयजल आपूर्ति योजनाओं को अस्थायी तौर पर बहाल करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कलसुंई क्षेत्र का दौरा भी किया और श्रद्धालुओं से बातचीत की। कलसुंई से श्रद्धालुओं को नूरपुर और पठानकोट भेजने के लिए बसों की व्यवस्था की गई हैं। शुक्रवार को लगभग 5000 श्रद्धालुओं को कलसुंई से नूरपुर और पठानकोट पहुंचाया गया। जम्मूदृकश्मीर की ओर से आए श्रद्धालुओं को सलूणी से आगे छोड़ने के लिए छोटे वाहनों की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने सलूणी-खुंडिमरल सड़क को शीघ्र बहाल करने के भी निर्देश दिए ताकि किश्तवाड़ और डोडा जिलों से आए श्रद्धालु अपने घर सुरक्षित लौट सकें। उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए एचआरटीसी और निजी संचालकों की अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गई है।  

यूक्रेन संकट में भारत बना सहारा, डीजल सप्लाई में सबसे आगे

कीव  भारत जुलाई 2025 में यूक्रेन का सबसे बड़ा डीजल आपूर्तिकर्ता बन गया है, जो देश के कुल डीजल आयात का 15.5% हिस्सा प्रदान कर रहा है। यह उपलब्धि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है, विशेष रूप से उस समय जब भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिका से 50% के भारी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। यूक्रेन के तेल बाजार विश्लेषण फर्म नाफ्टोरिनोक के हालिया आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में भारत से यूक्रेन को प्रतिदिन औसतन 2,700 टन डीजल की सप्लाई की गई, जो इस साल भारत के सबसे अधिक मासिक निर्यात आंकड़ों में से एक है। यह आंकड़ा जुलाई 2024 की तुलना में काफी अधिक है, जब भारत का यूक्रेन के डीजल आयात में हिस्सा केवल 1.9% था। जनवरी से जुलाई 2025 तक, भारत का यूक्रेन के डीजल आपूर्ति में हिस्सा 10.2% तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में पांच गुना अधिक है। आपूर्ति के रास्ते और भू-राजनीतिक चुनौतियां भारतीय डीजल मुख्य रूप से रोमानिया से डेन्यूब नदी के माध्यम से टैंकरों द्वारा और तुर्की के मारमारा एरेग्लिसी बंदरगाह में ओपेट टर्मिनल के जरिए यूक्रेन पहुंच रहा है। हालांकि इस चैनल पर आंशिक प्रतिबंधों का प्रभाव पड़ रहा है। इसके बावजूद, भारत ने अन्य यूरोपीय आपूर्तिकर्ताओं जैसे स्लोवाकिया (15%), ग्रीस (13.5%), तुर्की (12.4%), और लिथुआनिया (11.4%) को पीछे छोड़ते हुए जुलाई में शीर्ष स्थान हासिल किया। हालांकि, भारत का निर्यात वॉल्यूम अभी भी ग्रीस और तुर्की से पीछे है, लेकिन अनुपात के मामले में भारत ने सभी प्रतिस्पर्धियों को मात दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय डीजल का एक हिस्सा रूसी कच्चे तेल से परिष्कृत हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब अमेरिका ने भारत के रूसी तेल खरीदने को लेकर 50% टैरिफ लगाया है। अमेरिका का दावा है कि रूसी तेल खरीदकर भारत उसकी यूक्रेन युद्ध में मदद कर रहा है। लेकिन हालात यह हैं कि खुद भारत द्वारा सप्लाई किया गया डीजल यूक्रेन की युद्धकालीन अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान कर रहा है। जुलाई में यूक्रेन के डीजल आयात में अन्य देशों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्लोवाकिया ने ग्रीस और तुर्की की तुलना में अधिक मात्रा में डीजल की आपूर्ति की, जबकि पोलैंड और लिथुआनिया के ओरलेन ग्रुप ने मिलकर लगभग 20% आयात में योगदान दिया। स्वीडन के प्रीम सुविधाओं से डीजल निर्यात ने भी रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से रिकॉर्ड स्तर हासिल किया, जो जुलाई में कुल आयात का 4% था। वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की स्थिति यह उपलब्धि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को भी दर्शाती है। हाल के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8% की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 6.5% थी। कृषि क्षेत्र में 3.7% की वृद्धि हुई, जो पिछले साल की 1.5% की तुलना में उल्लेखनीय सुधार है।  

‘दहेज प्रताड़ना के आरोप बेबुनियाद’, सुप्रीम कोर्ट ने बहू की सास को दी राहत

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर दहेज के लिए बहू के साथ क्रूरता करने के 24 साल पुराने केस में ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार दी गई एक सास को बरी कर दिया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ससुराल वालों द्वारा बहू को दहेज के लिए प्रताड़ित की बातें हवा से भी अधिक तेज फैलती हैं। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ शुक्रवार को एक याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें महिला की दोषसिद्धि और तीन साल की सजा बरकरार रखी गई थी। आरोपी सास को आईपीसी की धारा 498ए के तहत इस आधार पर दोषी ठहराया गया था कि उसकी मृत बहू ने अपने मायके वालों को दहेज उत्पीड़न होने की बातें बताई थीं।आईपीसी की धारा 498-ए, विवाहित महिला के प्रति उसके पति या उसके ससुरालवालों द्वारा की गई क्रूरता के अपराध से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने पड़ोसन की गवाही को माना अहम सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि ने इस बात पर गौर किया कि केस में गवाह के तौर पर पेश हुई आरोपी महिला की पड़ोसी ने दावा किया कि बहू से कभी दहेज की मांग नहीं की गई थी। बेंच ने कहा, ‘‘सास के साक्ष्य को निचली अदालत और हाईकोर्ट द्वारा इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वह दहेज की मांग के संबंध में कोई तथ्य पेश नहीं कर सकी थी, क्योंकि यह चारदीवारी के भीतर होता है, जो एक गलत निष्कर्ष है, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जब सास-ससुर द्वारा दहेज के लिए बहू को परेशान किए जाने की बातें हवा से भी तेज फैलती हैं।" जून 2001 में दर्ज कराई गई थी शिकायत मृतक बहू के पिता ने जून 2001 में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बताया था कि उनकी बेटी ससुराल में मृत पाई गई थी। पिता ने आरोप लगाया था कि मौत के समय उनकी बेटी गर्भवती थी और वह अक्सर मायकेवालों को बताती थी कि उसकी सास दहेज के लिए उसे ताने ताने मारती है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि घटना के वक्त उसका दामाद शहर में नहीं था। मृतका के सास-ससुर और देवर को इस मामले में आरोपी बनाया गया था। हालांकि, निचली अदालत ने ससुर और देवर को बरी कर दिया, लेकिन यह माना कि सास के उत्पीड़न के कारण बहू ने जान दी थी। दोषी करार दी गई सास ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया, जिसने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी रूप में दहेज की मांग अपने आप में आईपीसी की धारा 498ए के तहत केस दर्ज करने के लिए काफी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "इसी प्रकार, किसी विवाहित महिला को या उसके रिश्तेदार को किसी अवैध मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से परेशान करना भी 'क्रूरता' की श्रेणी में आएगा।'' बेंच ने आरोपी महिला की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और उसे बरी कर दिया।  

बैंक मैनेजर के आदेश के खिलाफ कर्मचारियों का अनोखा विरोध, कैंटीन में खाया बीफ

तिरुवनंतपुरम केरल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कोच्चि के एक बैंक में मैनेजर ने कैंटीन में बीफ पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके विरोध में बैंक कर्मचारियों ने बीफ पार्टी का आयोजन कर डाला। जानकारी के मुताबिक बैंक के रीजनल मैनेजर मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। उनकी हाल ही में केरल के कोच्चि स्थित बैंक की शाखा में नियुक्ति हुई है। बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) के सदस्यों ने अधिकारियों के कथित मानसिक उत्पीड़न को लेकर मैनेजर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। लेकिन बीफ पर प्रतिबंध लगने के बाद विरोध को नई दिशा मिल गई। नहीं चलने देंगे संघ का एजेंडा प्रदर्शनकारियों ने ऑफिस के बाहर बीफ और परोटा (एक तरह की ब्रेड) परोसी। इस प्रदर्शन को केरल के कुछ नेताओं ने भी समर्थन दिया। लेफ्ट समर्थित निर्दलीय विधायक केटी जलील इस प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि केरल में संघ परिवार के किसी भी एजेंडा को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ‘क्या पहना जाए, क्या खाया जाए, क्या सोचा जाए इसे वरिष्ठ लोग तय नहीं करेंगे। हमारी जमीन लाल है। इस जमीन का दिल लाल है। जहां तक लाल झंडा फहरा रहा है, आप बिना किसी डर के फासीवाद के खिलाफ बोल सकते हैं। कोई भी आपको नुकसान नहीं पहुंचाएगा।’ पसंदीदा खाना सबका अधिकार बैंक फेडरेशन के एक नेता एसएस अनिल ने कहा कि यहां पर एक छोटी कैंटीन चलती है। चुनिंदा दिनों पर बीफ परोसा जाता है। मैनेजर ने कैंटीन स्टाफ से कहा कि अब बीफ नहीं परोसा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बैंक संविधान के अनुसार चलता है। खाना निजी पसंद का विषय है। भारत में हर व्यक्ति को अधिकार है कि वह क्या खाएगा। हम किसी को बीफ खाने पर बाध्य नहीं कर रहे हैं। यह हमारा विरोध का तरीका है।  

ट्रंप टैरिफ पर बोले राजनाथ सिंह- रिश्तों में स्थायित्व नहीं, हालात तय करते हैं रुख

नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि डिफेंस सेक्टर में भारत के लिए आत्मनिर्भर होना बेहद आवश्यक है और इसके लिए देश किसी विदेशी आपूर्ति पर निर्भर नहीं रह सकता। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं है। उन्होंने कहा, 'कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, केवल हित स्थायी होते हैं। वैश्विक स्तर पर अभी व्यापार के लिए युद्ध जैसी स्थिति है।' उन्होंने कहा कि विकसित देश तेजी से संरक्षणवादी हो रहे हैं, लेकिन भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार हवाई सुरक्षा प्रणाली सुदर्शन चक्र के तहत अगले 10 वर्षों में देशभर के सभी अहम स्थलों को पूरी तरह हवाई सुरक्षा मुहैया कराने की योजना बना रही है। एनडीटीवी डिफेंस समिट में अपने संबोधन में सिंह ने कहा कि एक ऐसी सुरक्षा प्रणाली तैयार की जा रही है, जो दुश्मन के किसी भी हमले से बचाव करने और उसका जवाब देने में सक्षम होगी। उन्होंने कहा, 'जैसा कि हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा आज की लड़ाइयों में हवाई सुरक्षा की अहमियत बहुत बढ़ गई है। ऐसे में सुदर्शन चक्र मिशन एक बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा।' एयर डिफेंस प्रोजेक्ट की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में इस एयर डिफेंस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। यह ऐलान पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ओर से भविष्य में दोनों देशों के बीच किसी भी सैन्य टकराव की स्थिति में सीमा पर भारतीय संपत्तियों को निशाना बनाने के संकेतों के कुछ दिन बाद हुई थी। राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात ने यह साफ कर दिया है कि अब रक्षा क्षेत्र में बाहरी देशों पर निर्भर रहना कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, 'आज की स्थिति में आत्मनिर्भरता हमारी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए आवश्यक है।' आर्थिक ढांचे की सुरक्षा पर भी बयान रक्षा मंत्री ने कहा, 'आज रक्षा क्षेत्र केवल राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव नहीं है, बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और उसके भविष्य को सुरक्षित करने का एक प्रमुख आधार भी बन गया है।' उन्होंने कहा कि यह केवल लोगों की सुरक्षा, जमीन की हिफाजत या सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे आर्थिक ढांचे की सुरक्षा और स्थिरता की जिम्मेदारी भी निभा रहा है। रक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण को संरक्षणवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का संबंध संरक्षणवाद से नहीं है, बल्कि यह हमारी संप्रभुता, राष्ट्रीय स्वायत्तता और आत्मविश्वास का मुद्दा है।'