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जिनपिंग का बड़ा प्लान? ताइवान की सीमा में घुसे दर्जनों चीनी लड़ाकू विमान

ताइपे  ताइवान को लेकर चीनी राष्ट्रपति का क्या योजना है? इस मुद्दे पर अक्सर चर्चा होती रहती है। चर्चा की वजह भी स्पष्ट है। बार-बार चीनी विमान और जहाज ताइवान की सीमा में घुसपैठ करते हैं। एक बार फिर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के विमान और जहाज दिखाई दिए हैं। ताइवान के रक्षा मंत्रालय (MND) ने गुरुवार सुबह 6 बजे तक अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र के आसपास 41 चीनी सैन्य विमानों, सात नौसैनिक जहाजों और एक आधिकारिक जहाज की मौजूदगी का पता लगाया। मंत्रालय के अनुसार, 41 विमानों में से 21 ने मध्य रेखा को पार किया और ताइवान के उत्तरी, मध्य और दक्षिण-पश्चिमी ADIZ (एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन) में प्रवेश किया। ADIZ वह क्षेत्र है जहां प्रवेश करने वाले विमानों की पहचान की जाती है ताकि देश अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके। सुबह 6 बजे दिखे विमान और जहाज रक्षा मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में कहा कि आज सुबह 6 बजे तक ताइवान के आसपास 41 PLA (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) विमान, 7 PLA नौसेना जहाज और 1 आधिकारिक जहाज देखे गए। इनमें से 24 विमानों ने मध्य रेखा को पार किया और ताइवान के उत्तरी, मध्य और दक्षिण-पश्चिमी ADIZ में प्रवेश किया। हमने स्थिति पर नजर रखी और उचित जवाब दिया। गौरतलब है कि बुधवार को भी ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने PLA के 23 विमानों, 7 PLA नौसेना जहाजों और एक आधिकारिक जहाज को अपने क्षेत्र के आसपास देखे थे। मंत्रालय ने कहा कि 23 विमानों में से 16 ने मध्य रेखा को पार किया और ताइवान के उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी ADIZ में प्रवेश किया। चीन 'क्षेत्रीय उपद्रवी' ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लंग ने चीन को 'क्षेत्रीय उपद्रवी' करार दिया था। उन्होंने यह बयान तब दिया जब सोलोमन द्वीप ने ताइवान और अमेरिका सहित अन्य वार्ता भागीदारों को आगामी प्रशांत द्वीप समूह फोरम (PIF) नेताओं की बैठक से रोक दिया था। ताइपे टाइम्स के अनुसार, लिन ने 'प्रशांत तरीके' की बात करते हुए कहा कि सभी को शामिल करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि वार्ता भागीदारों को बाहर करने से फोरम की आम चुनौतियों का सामना करने की क्षमता कमजोर होगी। झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं हो जाता वहीं, ताइवान पर चीन के दावों को खारिज करते हुए लिन ने कहा कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने एक दिन भी ताइवान पर शासन नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रस्ताव 2758 में ताइवान का कोई जिक्र नहीं है। लिन ने चीन के दावे को 'सम्राट के नए कपड़े' बताते हुए कहा कि एक झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं हो जाता। लिन ने आगे कहा कि ताइवान गहरे अंतरराष्ट्रीय सहयोग, व्यावहारिक योगदान और निरंतर राजनयिक पहुंच के माध्यम से चीन के दबाव का मुकाबला कर रहा है। ताइवान दुनिया के अन्य देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि चीन के प्रभाव को कम किया जा सके।  

सिर्फ 30 दिन में हाई कोर्ट जज का तबादला, उठ रहे सवाल और चर्चाओं का दौर

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उच्च न्यायालयों के कई जजों के स्थानांतरण की सिफारिश की है। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा की है। उन्हें राजस्थान हाई कोर्ट भेजा गया है, जहां से एक महीने पहले ही वह दिल्ली आए थे और 21 जुलाई को शपथ ली थी। ऐसे में इस बात को लेकर चर्चा है कि आखिर एक महीने के अंदर ही ऐसा क्या हो गया कि उच्च न्यायालय के जज को राजस्थान वापस भेज दिया गया। कुल 14 जजों का बुधवार को ट्रांसफर करने की सिफारिश कॉलेजियम की ओर से की गई। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली कॉलेजियम की मीटिंग 25 और 26 अगस्त को हुई थी। दिल्ली हाई कोर्ट के एक और जज टीवी गंजू का कर्नाटक हाई कोर्ट में हुआ है। इसके अलाला राजस्थान हाई कोर्ट से जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अवनीश झिंगन का ट्रांसफर भी दिल्ली उच्च न्यायालय हुआ है। केरल से जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा को भेजा गया है। कॉलेजियम की सिफारिशों पर मुहर लगने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय में जजों की संख्या 45 हो जाएगी। इस उच्च न्यायालय में मंजूर जज के पदों की संख्या 60 है। आमतौर पर पूरा कोरम किसी भी उच्च न्यायालय में कम ही रहता है। खासतौर पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में ऐसा मुश्किल होता है, जहां जज के पदों की मंजूर संख्या 160 है। फिलहाल यहां 84 जज ही हैं। बता दें कि जस्टिस अवनीश झिंगन का ट्रांसफर पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से गुजरात हुआ था। फिर वह राजस्थान लाए गए और अब दिल्ली की तैयारी है। बता दें कि जस्टिस अरुण मोंगा तो मूलत: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के ही जज हैं। उन्हें राजस्थान भेजा गया था और फिर दिल्ली आए तो 21 जुलाई को शपथ ली थी। लेकिन अब एक महीने के अंतराल पर ही वापस राजस्थान हाई कोर्ट भेजने की तैयारी है। अरुण मोंगा ने वकालत की प्रैक्टिस 1991 में शुरू की थी। दिल्ली में करीब 20 साल तक वकालत करने के बाद 2018 में वह हाई कोर्ट के जज बने थे।  

कुरान जलाने वाले ट्रंप उम्मीदवार का विवादित बयान, इस्लाम के खत्म न होने पर हिंसा की धमकी

टेक्सास अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की एक उम्मीदवार ने इस्लामोफोबिया में आकर कुछ ऐसी हरकतें की हैं और ऐसे बयान दिए हैं कि अब उनकी चहुंओर निंदा हो रही है। दरअसल, टेक्सास में 2026 में होने वाले चुनावों में रिपब्लिकन उम्मीदवार वैलेंटिना गोमेज़ ने कहा है कि अगर इस्लाम खत्म नहीं हुआ तो बेटियों से बलात्कार होता रहेगा और बेटों का सिर कलम होता रहेगा। गोमेज ने इस बारे में एक वीडियो बयान जारी किया है। हालांकि, चहुंओर आलोचना झेलने के बाद गोमेज़ ने वह वीडियो डिलीट कर दिया है। मीडिया के अनुसार, गोमेज ने कथित तौर पर पवित्र कुरान की एक प्रति में आग लगाते हुए "इस्लाम को खत्म करने" की कसम खाते हुए एक चुनावी वीडियो सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया था। 2026 में टेक्सास के 31वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट सीट के लिए चुनाव लड़ रही वैलेंटिना गोमेज़ ने अब वह वीडियो हटा दिया है लेकिन उनके द्वारा साझा की गई वीडियो क्लिप की व्यापक निंदा हो रही है। अमेरिका समेत अन्य देशों में भी रिपबल्किन उम्मीदवार के प्रति आक्रोश पैदा हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टेक्सास की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी सिर्फ एक फीसदी है। बावजूद इसके गोमेज़ ने अपने चुनाव अभियान को बार-बार इस्लामोफोबिक बयानबाजी के इर्द-गिर्द केंद्रित रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में, गोमेज़ एक विवादास्पद संदेश देते हुए कहती हैं, "अगर हम इस्लाम को हमेशा के लिए खत्म नहीं करेंगे तो आपकी बेटियों का बलात्कार होता रहेगा और आपके बेटों का सिर कलम कर दिया जाएगा।" इसके बाद वह कैमरे के सामने कुरान जलाती हैं। 7 अक्टूबर के हमास के हमले का भी जिक्र गोमेज़ ने आगे कहा, "अमेरिका एक ईसाई राष्ट्र है, इसलिए ये आतंकवादी मुसलमान 57 मुस्लिम देशों में से किसी में भी जा सकते हैं।" वीडियो के अंत में गोमेज़ कहती हैं कि वह "ईसा मसीह द्वारा संचालित" हैं, जिससे इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि धर्म उनके चुनावी संदेश के मूल में है। आलोचनाओं के बावजूद, गोमेज़ ने अपने अभियान को और भी ज़ोरदार बना दिया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “मैं अपने कार्यों पर कायम हूं और मैं उस पुस्तक के सामने कभी घुटने नहीं टेकूंगी जो 7 अक्टूबर के नरसंहार के लिए जिम्मेदार है, जिसने एबी गेट पर 13 अमेरिकी सैन्यकर्मियों की जान ले ली और हमारी हत्या का आह्वान किया।” पहले भी विवादों में रहीं गोमेज़ ऐसा पहली बार नहीं हआ है, जब गोमेज़ भड़काऊ कार्रवाइयों के लिए सुर्खियों में आई हैं। मई 2025 में, उन्होंने टेक्सास स्टेट कैपिटल में एक मुस्लिम नागरिक सहभागिता कार्यक्रम में धावा बोल दिया था और इस्लाम विरोधी भाषण देने से पहले माइक्रोफ़ोन छीन लिया था। उस कार्यक्रम के वीडियो फुटेज में उन्हें यह कहते हुए दिखाया गया था, "टेक्सास में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है। कांग्रेस में मेरी मदद करें ताकि हम अमेरिका के इस्लामीकरण को रोक सकें। मैं सिर्फ़ ईश्वर से डरती हूँ।"  

डॉलर पर असर? बाबा रामदेव ने ट्रंप के टैरिफ बम पर साझा किया समाधान

 नई दिल्ली  अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाए जाने के फैसले को लेकर भारत में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कड़ा विरोध सामने आ रहा है। योग गुरु बाबा रामदेव ने अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर टैरिफ लगाए जाने के विरोध में देशवासियों से अमेरिकी कंपनियों और ब्रांड्स के बहिष्कार की अपील की है। बाबा रामदेव ने ट्रंप के इस कदम को राजनीतिक दबंगई, गुंडागर्दी और तानाशाही करार दिया। कहा कि भारतवासियों की प्रतिभा का अमेरिका को अंदाजा नहीं है। इस तरह के संकट ही नए अवसर पैदा करते हैं। अगर भारत , रूस, चीन और कुछ देश मिलकर आ जाएं तो डॉलर आधी कीमत का रह जाएगा। बाबा रामदेव ने कहा, “भारतीय नागरिकों को अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ का कड़ा विरोध करना चाहिए। अमेरिकी कंपनियों और ब्रांड्स का पूरी तरह से बहिष्कार होना चाहिए। कोई भी भारतीय पेप्सी, कोका-कोला, सबवे, KFC या मैकडॉनल्ड्स के काउंटर पर नजर नहीं आना चाहिए। इतना बड़ा बहिष्कार होना चाहिए कि अमेरिका में हड़कंप मच जाए, वहां महंगाई इतनी बढ़े कि ट्रंप को खुद अपने फैसले वापस लेने पड़ें। ट्रंप ने भारत के खिलाफ जाकर बड़ी गलती की है।” भारत और चीन मिल जाएं तो डॉलर आधा बाबा रामदेव ने आगे कहा कि चुनौतियां तो नए अवसर देती है। यहां अगर किसी की नौकरी जाने की संभावना बनती है तो नए रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए। भारत के उद्यमियों को टैक्स, जीएसटी और तमाम तरह के रियायतें देकर मजबूती देनी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि देश इस चुनौती से निसंदेह निपटेगा और सशक्त बनकर उभरेगा। अगर भारत, रूस, चीन और कुछ देश मिल जाएं तो डॉलर आधी कीमत का रह जाएगा। अमेरिका में ही घिरे ट्रंप गौरतलब है कि अमेरिका ने अगस्त की शुरुआत में भारत पर 25% टैरिफ लगाया था। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 अगस्त से लागू होने वाले अतिरिक्त 25% टैरिफ की घोषणा की। यह कदम भारत द्वारा रूस से तेल खरीद जारी रखने के कारण उठाया गया। इधर, अमेरिकी कांग्रेस की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने भी राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी नागरिकों को नुकसान हो रहा है और अमेरिका-भारत संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। कमेटी ने सवाल उठाया कि “यदि ट्रंप प्रशासन ने किसी भी देश पर रूस से तेल खरीदने को लेकर सेकेंडरी सैंक्शन्स का फैसला किया होता तो बात अलग थी, लेकिन केवल भारत को ही निशाना बनाना सबसे उलझन भरा कदम है। चीन, जो रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीद रहा है, वह अब भी रियायती कीमतों पर तेल ले रहा है और उस पर किसी तरह की सजा नहीं दी गई।”  

भारत करेगा कमाल: ट्रंप टैरिफ के बावजूद 2038 तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

 नई दिल्ली        भारत पर भले ही अमेरिका ने 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया है, लेकिन इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार पर ऐसी किसी भी बाधाओं का असर नहीं होगा. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि ईवाई इंडिया की रिपोर्ट में ऐसा अनुमान जताया गया है. इसमें कहा गया है कि भारत 2038 तक 34.2 ट्रिलियन डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद (पीपीपी) के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. EY इकोनॉमी वॉट अगस्त 2025 में कहा गया है कि भारत टैरिफ दबाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद ये कमाल करेगा.   टैरिफ टेंशन के बावजूद इकोनॉमी में दम  ईवाई इंडिया की ओर से कहा गया है कि तमाम चुनौतियों से उबरते हुए भारत दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना है. मजबूत आर्थिक बुनियाद के साथ देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. टैरिफ दबाव और धीमे व्यापार जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं के बाद भी इंडियन इकोनॉमी घरेलू डिमांड पर उसकी निर्भरता और आधुनिक तकनीकों में बढ़ती क्षमताओं से मजबूत बनी हुई है. रिपोर्ट में अनुमान जाहिर करते हुए कहा गया कि आने वाले पांच साल में यानी 2030 तक भारत की इकोनॉमी 20.7 ट्रिलियन डॉलर (पीपीपी) तक पहुंच सकती है प्रोफेशनल सर्विसेज कंपनी ईवाई ने बुधवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि भारत इस समय चीन और अमेरिका के बाद पीपीपी के आधार पर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पीपीपी के संदर्भ में 14.2 लाख करोड़ डॉलर रहा जो बाजार विनिमय दरों पर आंकी गई अर्थव्यवस्था से लगभग 3.6 गुना अधिक है। भारत छोड़ेगा अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पीछे रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर 2030 के बाद, भारत और अमेरिका 2028-2030 के दौरान (IMF के पूर्वानुमानों के मुताबिक) क्रमशः 6.5% और 2.1% की औसत वृद्धि दर बनाए रखते हैं, तो भारत 2038 तक PPP के मामले में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ सकता है। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा, “भारत की तुलनात्मक क्षमता, युवा और कुशल कार्यबल, मज़बूत बचत और निवेश दरें और अपेक्षाकृत टिकाऊ लोन प्रोफाइल, अस्थिर ग्लोबल परिवेश में भी उच्च विकास को बनाए रखने में मदद करेंगे।” उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में लचीलापन और उन्नत क्षमताओं का निर्माण करके 2047 तक भारत अपनी विकसित भारत आकांक्षाओं के करीब पहुंचने की अच्छी स्थिति में है। चीन के 2030 तक 42.2 ट्रिलियन डॉलर के GDP तक पहुंचने का अनुमान चीन के 2030 तक 42.2 ट्रिलियन डॉलर के GDP तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन उसे बढ़ती उम्र की आबादी और बढ़ते लोन से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका मजबूत बना हुआ है, लेकिन उसे GDP के 120% से अधिक लोग और धीमी ग्रोथ का सामना करना पड़ रहा है। जर्मनी और जापान, हालांकि उन्नत अर्थव्यवस्थाएं हैं, फिर भी वृद्ध आबादी और ग्लोबल व्यापार पर भारी निर्भरता के कारण सीमित हैं। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत, भारत में एक डॉलर में अमेरिका के एक डॉलर की तुलना में अधिक वस्तुएं और सेवाएं खरीदी जा सकती हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था मार्केट विनिमय दरों की तुलना में बड़ी दिखाई देती है। भारत के 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की भी उम्मीद भारत के 2028 तक बाजार विनिमय दर के संदर्भ में जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की भी उम्मीद है। यहां तक कि GDP के 0.9% को प्रभावित करने वाले अमेरिकी टैरिफ जैसी संभावित चुनौतियों का भी न्यूनतम प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि मजबूत घरेलू मांग और निर्यात विविधीकरण किसी भी मंदी को केवल 0.1% अंक तक सीमित रखने में सक्षम हैं। भारत की ताकत ईवाई का आकलन है कि भारत एवं अमेरिका के क्रमशः 6.5% एवं 2.1% की औसत वृद्धि दर बनाए रखने की स्थिति में भारत 2038 तक पीपीपी के संदर्भ में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ सकता है। उस समय भारत की जीडीपी 34.2 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी। इस दौरान वर्ष 2028 तक भारत बाजार विनिमय दरों पर जर्मनी को पछाड़ते हुए तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन सकता है। ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी के श्रीवास्तव ने कहा, 'युवा एवं कुशल कार्यबल, मजबूत बचत एवं निवेश दर और टिकाऊ ऋण प्रोफाइल जैसी भारत की तुलनात्मक मजबूती, वैश्विक अस्थिरता के बावजूद उच्च वृद्धि दर को बनाए रखने में मददगार होंगी। भारत जरूरी प्रौद्योगिकियों में क्षमताएं विकसित कर ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।' अमेरिका को एक्सपोर्ट हालांकि यह रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ लगा देने से भारत की जीडीपी को 0.9% तक का झटका लग सकता है। हालांकि यदि एक-तिहाई प्रभाव मांग में कमी के रूप में आता है, तो कुल प्रभाव जीडीपी के 0.3% तक सीमित रह सकता है। ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, उचित नीतिगत उपायों के सहारे इस प्रभाव को जीडीपी के केवल 0.1% तक भी सीमित रखा जा सकता है। ऐसा होने पर चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.5% से घटकर 6.4% तक रह सकती है। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका के हाई टैरिफ का प्रभाव भारतीय निर्यात के 48 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाले उत्पादों पर पड़ेगा। इनमें वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, झींगा, चमड़ा, जूते-चप्पल, रसायन, पशुउत्पाद और यांत्रिक व विद्युत मशीनरी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि दवा, ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर यह शुल्क लागू नहीं है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। लेकिन हाई टैरिफ के कारण भारतीय उत्पाद वहां काफी महंगे हो जाएंगे।

तीन दिनों का ट्रैफिक जाम, हिमाचल में सप्लाई संकट पैदा

कुल्लू  हिमाचल प्रदेश में बारिश का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा। भारी बारिश के चलते बानला में हुए भूस्खलन ने चंडीगढ़-मनाली हाईवे को पूरी तरह ठप कर दिया है। यहां कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। हिमाचल में कई सड़कें टूट गई हैं और नदियां उफान पर हैं। ऐसे में यात्रियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। भूस्खलन ने रोकी रफ्तार कुल्लू जिले के बानला में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिसने चंडीगढ़-मनाली हाईवे को अवरुद्ध कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि सड़क की मरम्मत का काम जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन प्रकृति के इस प्रकोप के आगे अभी राहत की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। ब्यास नदी के उफान ने हाईवे का एक हिस्सा बहा दिया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। मौसम विभाग की चेतावनी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने हिमाचल के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। चंबा, कांगड़ा और मंडी में आज और कल भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। अगले दो-तीन दिन तक हिमाचल में बारिश का सिलसिला ऐसे ही जारी रहेगा। यात्रियों की मुश्किलें पिछले तीन दिनों से मंडी जिले के पंडोह से ऑट तक हाईवे बंद है। सैकड़ों ट्रक और कारें सड़क पर फंसी हैं और ड्राइवरों का सब्र जवाब दे रहा है। सब्जियां और सामान खराब हो रहे हैं, जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। अमृतसर से कुल्लू-मनाली जा रहे ड्राइवर गुरविंदर सिंह ने बताया, "चार दिन हो गए, हम यहीं फंसे हैं। सड़क की हालत खराब है और टोल टैक्स के 260 रुपये भी वसूल रहे हैं। प्रशासन से कोई जवाब नहीं मिल रहा।" वहीं, ड्राइवर बबलू ठाकुर ने कहा, "घर पहुंचना मुश्किल हो गया है। सड़कें टूटी हैं, नदियां उफान पर हैं। प्रशासन ने खाने-पीने या ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं की। कुछ ढाबे वाले और लंगर वालों की मदद से जैसे-तैसे गुजारा हो रहा है।" प्रशासन का एक्शन कुल्लू की उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने बताया कि जिले के कई हिस्सों को खाली कराया जा रहा है। लगातार बारिश से नेशनल हाईवे कई जगह क्षतिग्रस्त है। ब्यास नदी का जलस्तर बहुत ऊंचा है। लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील है। उन्होंने बताया कि बिंदु ढांक में हाईवे को भारी नुकसान पहुंचा है और बहंग में कुछ दुकानें और रेस्तरां पानी की चपेट में हैं।

ट्रंप के दबाव के बावजूद PM मोदी ने ठोकी मुट्ठी, आत्मनिर्भर भारत की ताकत दिखाई

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत के भारी टैरिफ के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि बताते हुए चट्टान की तरह दृढ़ रुख अपनाया है. 27 अगस्त से प्रभावी इन टैरिफ में 25 प्रतिशत पहले से लागू था, जबकि अतिरिक्त 25 प्रतिशत रूस से तेल आयात के लिए दंड के रूप में लगाया गया है. भारत ने इसे ‘अनुचित, अनुचित और अनुचित’ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है. विशेषज्ञों के अनुसार 2024-25 में भारत का अमेरिका को निर्यात 86.5 अरब डॉलर था जो जीडीपी का मात्र दो प्रतिशत है लेकिन टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, चमड़ा और सीफूड जैसे श्रम आधारित क्षेत्रों पर इसका गहरा असर पड़ेगा. बावजूद इसके पीएम मोदी की सरकार इसे अवसर में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है, जहां स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को दीर्घकालिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है. मोदी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था- कठिनाइयों के समय राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दें. दुनिया में आर्थिक स्वार्थ बढ़ रहा है. हर कोई अपने एजेंडे में व्यस्त है. उन्होंने किसानों और कृषि क्षेत्र की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकाने की भी बात कही. देश के जीडीपी में किसानों और कृषि क्षेत्र का योगदान 18 प्रतिशत है. विदेश मंत्रालय का रुख विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत की ऊर्जा खरीद बाजार की उपलब्धता और वैश्विक स्थिति से निर्देशित है जो 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करती है. 2024-25 में भारत का रूस से तेल आयात 8.8 करोड़ मीट्रिक टन रहा, जो कुल आयात का 36 प्रतिशत है. टैरिफ से भारत का अमेरिकी निर्यात 40-55 प्रतिशत गिर सकता है, जिससे जीडीपी वृद्धि छह प्रतिशत से नीचे आ सकती है. लेकिन सरकार का मानना है कि मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स और 7-8 प्रतिशत की विकास दर के साथ भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर बढ़ता रहेगा. क्या पीएम मोदी है नाराज? इस बीच, एक जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर ऑलगेमाइन जितुंग (FAZ) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप ने हाल के हफ्तों में मोदी को चार बार फोन किया, लेकिन प्रधानमंत्री ने कॉल नहीं उठाया. रिपोर्ट के अनुसार यह मोदी की नाराजगी और सावधानी को दर्शाता है. ट्रंप ने भारत को मृत अर्थव्यवस्था कहा था, जो मोदी को अपमानजनक लगा. FAZ ने कहा कि ट्रंप की सामान्य रणनीति- शिकायत, धमकी और दबाव रही है. लेकिन पीएम मोदी के सामने यह इस बार विफल हो रही है. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की दिल्ली यात्रा भी रद्द हो गई है. रिपोर्ट में विशेषज्ञ मार्क फ्रेजियर ने कहा कि अमेरिका का इंडो-पैसिफिक गठबंधन ढह रहा है. इस गठबंधन में भारत अहम भूमिका निभाता था. भारत अब चीन के साथ संबंध सुधार रहा है. पीएम मोदी चीन के तियानजिन में होने जा रहे SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं. उनकी यह चीन यात्रा सात साल बाद हो रही है. वहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेताओं से मिलेंगे. यह ट्रिपल एक्सिस अमेरिका को चेकमेट करने की क्षमता रखता है. संघ का मिला साथ इधर, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी मोदी के स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के विचार का समर्थन किया है. बुधवार को RSS के शताब्दी समारोह के दौरान भागवत ने कहा- आत्मनिर्भरता सभी समस्याओं का समाधान है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से होना चाहिए. उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पाद खरीदने और दबाव में झुकने से बचने का आह्वान किया. भागवत का यह बयान डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के ठीक बाद आया, जो मोदी और RSS के एकमत होने का संकेत देता है. RSS ने हमेशा से स्वदेशी को बढ़ावा दिया है और अब यह रणनीति अमेरिकी दबाव के खिलाफ हथियार बन रही है.भारत अमेरिका के साथ संवाद के द्वार खुले रखे हुए है, लेकिन रिश्तों को डायवर्सिफाई करने पर जोर दे रहा है. यूके के साथ सफल ट्रेड डील के बाद पीएम मोदी की टीम यूरोपीय संघ के साथ समझौते पर काम कर रही है. भारत ने इलेक्ट्रिक वेहिकल निर्यात 100 देशों में शुरू किया है, जो उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता दर्शाता है. सरकार निर्यातकों के लिए ब्याज सब्सिडी और ऋण गारंटी जैसे राहत पैकेज पर विचार कर रही है. अमेरिकी नीति के लिए सेल्फ गोल विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी नीति के लिए सेल्फ गोल है, क्योंकि भारत, चीन के खिलाफ महत्वपूर्ण साझेदार है. लेकिन ट्रंप प्रशासन रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत को निशाना बना रहा है. डोनाल्ड ट्रंप की दोहरी नीति पर भारत ने पर्दाफाश किया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, यूरोपीय संघ रूस से एलएनजी खरीदता है, फिर भी उन्हें सजा नहीं मिली. जयशंकर ने खुलासा किया कि अमेरिका ने खुद भारत को रूसी तेल खरीदने को कहा था ताकि वैश्विक तेज बाजार को स्थिर रखा जा सके. यह विवाद अमेरिका-भारत संबंधों को नुकसान पहुंचा रहा है. द्विपक्षीय व्यापार 131.8 अरब डॉलर था, लेकिन 50 प्रतिशत टैरिफ से लाखों नौकरियां खतरे में हैं. भारत ने रूसी तेल आयात बंद करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इससे ईंधन कीमतें 9-12 अरब प्रति डॉलर तक बढ़ सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.  

अमेरिकियों की राय: रूस की वजह से कई देशों पर प्रतिबंध जरूरी, सर्वे में खुलासा

नई दिल्ली भारत के साथ जारी अमेरिका के टैरिफ वॉर के बीच एक अहम सर्वे सामने आया है। इस सर्वे में आधे से ज्यादा अमेरिकी चाहते हैं कि यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए रूस से व्यापार कर रहे देशों पर प्रतिबंध लगने चाहिए। खास बात है कि यह सर्वे ऐसे समय पर सामने आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूसी तेल की खरीद का हवाला देकर भारत को निशाना बना रहे हैं। नए रॉयटर्स/Ipsos पोल में बताया गया है कि अधिकांश अमेरिकी चाहते हैं कि रूस से व्यापार करने वालों पर प्रतिबंध लगे, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध रोकने के लिए उसे मजबूर किया जा सके। सर्वे में शामिल 62 प्रतिशत लोग रूस के ट्रेडिंग पार्टनर के खिलाफ प्रतिबंधों के पक्ष में हैं। साल 2022 में रूस ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। भारत को बना रहे निशाना भारत पहले ही साफ कर चुका है कि रूसी तेल खरीद के कारण उसे अमेरिकी और यूरोपीय संघ की तरफ से निशाना बनाया जा रहा है। खास बात है कि भारत ने यह भी बताया था कि अमेरिका और ईयू दोनों ही रूस के साथ व्यापार करते हैं। इधर, ट्रंप ने पहले 25 फीसदी टैरिफ के ऐलान के समय भी भारत पर रूसी तेल के चलते जुर्माना लगाया था। इसके बाद दूसरी बार 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने से पहले भी वह भारत पर वॉर मशीन की मदद करने के आरोप लगा चुके हैं। साथ ही उन्होंने भारत और रूस की अर्थव्यवस्था को मरी हुई बता दिया था। खास बात है कि चीन भी रूसी सामान का खरीदार है, लेकिन ट्रंप ने वहां 30 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जो भारत से 20 फीसदी कम है। ट्रंप के दावे खास बात है कि ट्रंप लगातार यूक्रेन और रूस में शांति समझौता कराने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई खास सफलता नहीं मिली है। उनके विशेष दूत कीथ केलॉग ने सोमवार को कहा कि अधिकारी रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से जारी युद्ध को समाप्त कराने के लिए 'बहुत कड़ी मेहनत' कर रहे हैं। हाल ही में ट्रंप नेकहा था कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच सीधी शांति वार्ता की व्यवस्था शुरू कर दी है। लेकिन रूसी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ऐसी कोई शिखर वार्ता जल्द नहीं होगी। ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि यदि सीधी वार्ता निर्धारित नहीं होती है तो वे अगले कदम पर दो सप्ताह में निर्णय लेंगे। भारत का युद्ध पर क्या है रुख फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत की। पीएमओे के बयान के अनुसार स्टब ने यूक्रेन में संघर्ष के समाधान पर वाशिंगटन में यूरोप, अमेरिका और यूक्रेन के नेताओं के बीच हुई हालिया बैठकों पर अपना आकलन मोदी के साथ साझा किया। बयान में कहा गया है कि पीएम मोदी ने संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान और शांति एवं स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया।

बर्थडे केक से ठीक पहले खुशियाँ, 5 मिनट बाद बिल्डिंग गिरने से 15 लोगों की मौत

मुंबई  विरार में अपार्टमेंट ढहने से हुआ भीषण हादसा अब तक 15 लोगों की जान ले चुका है. इस दर्दनाक हादसे को 30 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन अभी-भी जारी है. NDRF की 5वीं बटालियन की दो टीमें, वसई-विरार महानगरपालिका की टीम और स्थानीय पुलिस दिन-रात राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. दरअसल, ये हादसा उस वक्त हुआ जब विरार (पूर्व) के विजय नगर में जॉयल परिवार अपनी मासूम बेटी उत्कर्षा का पहला बर्थडे मना रहा था. परिवार ने घर को सजाया, केक काटा और खुशी के पल तस्वीरों में कैद किए और तस्वीरों को अपने रिश्तेदारों को भी भेजा. लेकिन केक काटने के महज पांच मिनट बाद ही रामाबाई अपार्टमेंट का पिछला हिस्सा एक पास की चॉल पर ढह गया, जिससे पूरा माहौल मातम में बदल गया. इस हादसे में मासूम उत्कर्षा और उनकी मां आरोही जॉयल की मौत हो गई, जबकि पिता ओंकार जॉयल का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल सका है. स्थानीय लोगों ने बचाई लोगों की जान वहीं, हादसे के तुरंत बाद, एनडीआरएफ की टीम के पहुंचने से पहले स्थानीय नागरिकों ने साहस दिखाते हुए सात लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला. इनमें से कुछ को मामूली चोटें आईं, जिन्हें विरार और नालासोपारा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. वसई-विरार शहर में अवैध और अनधिकृत इमारतों का जाल लगातार लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है. ये कोई पहला हादसा नहीं है. 15 दिन पहले भी एक अवैध निर्माण में कांच की स्लैब गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गई थी. इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और सुस्त कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. बिल्डर और जमीन मालिक पर FIR दर्ज विरार पुलिस ने इस हादसे के लिए जिम्मेदार बिल्डर नितल गोपीनाथ साने और ज़मीन मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया है. ये केस महाराष्ट्र प्रादेशिक नगररचना अधिनियम की धारा 52, 53 और 54 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत दर्ज किया गया है. हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

सुरक्षा बलों की कार्रवाई: बांदीपोरा में एनकाउंटर, 2 आतंकी मारे गए

बांदीपोरा  जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के गुरेज सेक्टर में सुरक्षाबलों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया है। सेना ने गुरुवार को बताया कि इस दौरान दो आतंकवादियों को मार गिराया गया है। सेना के श्रीनगर स्थित चिनार कॉर्प्स ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा दी गई खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गुरेज सेक्टर में एक संयुक्त अभियान शुरू किया था।" सेना ने बताया कि घुसपैठ की कोशिश को भांपते हुए सतर्क जवानों ने घुसपैठियों को ललकारा। इसके जवाब में आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सेना ने आगे कहा, "जवानों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए प्रभावी ढंग से गोलीबारी की और दो आतंकवादियों को मार गिराया।" अधिकारी ने बताया कि इलाके में अभी भी तलाशी अभियान जारी है।