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भारत-रूस तेल सौदा अमेरिका को नागवार: दी आर्थिक तबाही की धमकी

वाशिंगटन  नाटो चीफ के बाद अब  अमेरिका ने रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को अब खुली धमकी दी है। अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर  लिंडसे ग्राहम  ने कहा है कि अगर भारत, चीन और ब्राजील ने रूस से तेल लेना बंद नहीं किया, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार करेगा। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप  रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा देंगे। इससे पहले  NATO महासचिव मार्क रूट ने सीधे चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ये देश अब भी रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं तो उन पर 100% सेकेंडरी सैंक्शंस  (अमेरिकी टैरिफ) लगाए जाएंगे। उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में कहा था  “अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं तो तैयार रहिए। पुतिन पर दबाव डालिए कि वो शांति समझौता करें, नहीं तो भारी कीमत चुकानी होगी।”  ग्राहम की पुतिन को चेतावनी  मार्क रूट की तरह ही धमकाते हुए अमेरिका का कहना है कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूस से सस्ता तेल खरीदकर  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  को यूक्रेन पर हमला जारी रखने में मदद कर रहे हैं। ग्राहम के मुताबिक, रूस अपनी आधी से ज्यादा कमाई कच्चे तेल के निर्यात से ही करता है और इसमें से 80% से ज़्यादा तेल भारत, चीन और ब्राजील को ही जाता है। ग्राहम ने कहा कि पुतिन ने ट्रंप को कमजोर समझकर बहुत बड़ी गलती कर दी है। उन्होंने कहा- “हम यूक्रेन को और हथियार देंगे, ताकि पुतिन को पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। रूस की अर्थव्यवस्था पहले से ही बुरी हालत में है और अब इसे और नुकसान होगा।”     भारत-चीन-ब्राजील के लिए सख्त संदेश  ग्राहम ने साफ कहा कि इन तीनों देशों को अब तय करना होगा कि वे अमेरिका के साथ व्यापार चाहते हैं या रूस का सस्ता तेल। “अगर आप रूस से तेल खरीदते रहेंगे तो यह खून के पैसों जैसा है। आप पुतिन की जंग को जिंदा रख रहे हैं। हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे।” ग्राहम ने ट्रंप की तुलना एक बेहतरीन गोल्फ खिलाड़ी स्कॉटी शेफ़लर से करते हुए कहा- “डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राजनीति के स्कॉटी शेफ़लर हैं और अब वो अपने विरोधियों को सबक सिखाने वाले हैं।”*   यूक्रेन युद्ध से जुड़ा  विवाद 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए। लेकिन भारत, चीन और ब्राजील ने सस्ता तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करनी जारी रखी हैं। अब अमेरिका चाहता है कि रूस को और कमजोर किया जाए ताकि युद्ध जल्द रुके।

भारत-रूस तेल सौदा अमेरिका को नागवार: दी आर्थिक तबाही की धमकी

वाशिंगटन  नाटो चीफ के बाद अब  अमेरिका ने रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को अब खुली धमकी दी है। अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर  लिंडसे ग्राहम  ने कहा है कि अगर भारत, चीन और ब्राजील ने रूस से तेल लेना बंद नहीं किया, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था पर कड़ा प्रहार करेगा। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप  रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा देंगे। इससे पहले  NATO महासचिव मार्क रूट ने सीधे चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ये देश अब भी रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं तो उन पर 100% सेकेंडरी सैंक्शंस  (अमेरिकी टैरिफ) लगाए जाएंगे। उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में कहा था  “अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राज़ील के राष्ट्रपति हैं तो तैयार रहिए। पुतिन पर दबाव डालिए कि वो शांति समझौता करें, नहीं तो भारी कीमत चुकानी होगी।”  ग्राहम की पुतिन को चेतावनी  मार्क रूट की तरह ही धमकाते हुए अमेरिका का कहना है कि भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश रूस से सस्ता तेल खरीदकर  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  को यूक्रेन पर हमला जारी रखने में मदद कर रहे हैं। ग्राहम के मुताबिक, रूस अपनी आधी से ज्यादा कमाई कच्चे तेल के निर्यात से ही करता है और इसमें से 80% से ज़्यादा तेल भारत, चीन और ब्राजील को ही जाता है। ग्राहम ने कहा कि पुतिन ने ट्रंप को कमजोर समझकर बहुत बड़ी गलती कर दी है। उन्होंने कहा- “हम यूक्रेन को और हथियार देंगे, ताकि पुतिन को पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। रूस की अर्थव्यवस्था पहले से ही बुरी हालत में है और अब इसे और नुकसान होगा।”     भारत-चीन-ब्राजील के लिए सख्त संदेश  ग्राहम ने साफ कहा कि इन तीनों देशों को अब तय करना होगा कि वे अमेरिका के साथ व्यापार चाहते हैं या रूस का सस्ता तेल। “अगर आप रूस से तेल खरीदते रहेंगे तो यह खून के पैसों जैसा है। आप पुतिन की जंग को जिंदा रख रहे हैं। हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे।” ग्राहम ने ट्रंप की तुलना एक बेहतरीन गोल्फ खिलाड़ी स्कॉटी शेफ़लर से करते हुए कहा- “डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राजनीति के स्कॉटी शेफ़लर हैं और अब वो अपने विरोधियों को सबक सिखाने वाले हैं।”*   यूक्रेन युद्ध से जुड़ा  विवाद 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए। लेकिन भारत, चीन और ब्राजील ने सस्ता तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करनी जारी रखी हैं। अब अमेरिका चाहता है कि रूस को और कमजोर किया जाए ताकि युद्ध जल्द रुके।

शांति वार्ता का अगला दौर बुधवार को तुर्की में होगा, पुतिन बोले- जेलेंस्की सही नेता नहीं

तुर्की  यूक्रेन और रूस के बीच लंबे समय से चल रही जंग को खत्म करने के लिए नई कोशिशें फिर शुरू होने वाली हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति  वलोडिमिर ज़ेलेंस्की  ने बताया कि यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा परिषद के प्रमुख रुस्तम उमरोव के हवाले से पुष्टि हुई है कि शांति वार्ता का अगला दौर बुधवार को तुर्की में होगा। जेलेंस्की ने अपने वीडियो संदेश में कहा,  “आज मैंने अपने प्रमुख नेता रुस्तम उमरोव के साथ कैदियों की अदला-बदली की तैयारी और रूसी पक्ष के साथ तुर्की में बैठक पर चर्चा की। उमरोव ने बताया कि बैठक बुधवार को तय है, और बाकी जानकारी कल दी जाएगी।”  रुस्तम उमरोव हाल ही में यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा परिषद के सचिव नियुक्त किए गए हैं। इससे पहले वह देश के रक्षा मंत्री रह चुके हैं और रूस के साथ पहले दो दौर की शांति वार्ता का नेतृत्व भी कर चुके हैं। कीव में अपने राजनयिकों की बैठक में ज़ेलेंस्की ने साफ कहा था कि  “युद्ध खत्म करने के लिए हमें वार्ता में तेजी लानी होगी। हमारा एजेंडा बिलकुल साफ है  युद्धबंदियों की वापसी, रूस द्वारा अगवा किए गए बच्चों की घर वापसी और नेताओं की सीधी मुलाकात की तैयारी।” क्रेमलिन ने कहा है कि वह वार्ता की तारीख को लेकर सहमत होने का इंतजार कर रहा है, लेकिन दोनों पक्ष अब भी युद्ध खत्म करने के तरीके पर एक-दूसरे से काफी अलग हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले जेलेंस्की के आमने-सामने मिलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। पुतिन का कहना है कि ज़ेलेंस्की को वह सही नेता नहीं मानते क्योंकि यूक्रेन ने उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद नया चुनाव नहीं कराया। यूक्रेन और रूस ने इस साल 16 मई और 2 जून को इस्तांबुल में दो दौर की वार्ता की थी। इसके बाद हजारों युद्धबंदियों और मृत सैनिकों के शवों का आदान-प्रदान किया गया। हालांकि संघर्ष विराम या शांति समझौते को लेकर अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  ने चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं होता तो वह रूस और उसके तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 50 दिनों के भीतर नए कड़े प्रतिबंध लगा देंगे।

इजराइल को दुनिया का सख्त संदेश: अब युद्ध नहीं, गाजा में चाहिए अमन

गाजा  गाजा पट्टी में जारी खून-खराबे और मानवीय संकट को लेकर ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत 28 देशों  ने मिलकर इजराइल को कड़ा संदेश दिया है। इन देशों ने साफ कहा है कि **गाजा में युद्ध अब तुरंत खत्म होना चाहिए**, ताकि मासूम नागरिकों और बच्चों की जान बचाई जा सके। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने सोमवार को एक साझा बयान जारी किया। उन्होंने कहा- “गाजा में नागरिकों की पीड़ा अब नए स्तर तक पहुंच गई है। वहां बच्चों और आम लोगों को पीने का पानी और खाना तक नहीं मिल पा रहा। राहत सामग्री बहुत धीमी गति से पहुंच रही है और लोग बेवजह मारे जा रहे हैं।” बयान में कहा गया कि इजराइल सरकार का राहत सामग्री वितरण मॉडल न सिर्फ खतरनाक है, बल्कि इससे वहां की जनता को मानवीय सम्मान से जीने का हक  भी छिन जाता है। विदेश मंत्रियों ने आरोप लगाया कि इजराइल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन नहीं कर रहा है।इस बयान पर ब्रिटेन, जापान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया के अलावा कई यूरोपीय देश जैसे फ्रांस, स्पेन, आयरलैंड और नॉर्वे ने हस्ताक्षर किए हैं।हालांकि,  अमेरिका और जर्मनी  ने इस बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए।   इजराइल ने दिया सख्त जवाब इजराइल सरकार ने इस आलोचना को तुरंत खारिज कर दिया। इजराइल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बयान का ‘‘वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं’’  है और यह हमास जैसे आतंकी गुटों को गलत संदेश देता है।अमेरिका में इजराइल के राजदूत माइक हुकाबी ने तो इसे सोशल मीडिया ‘एक्स’ (पुराना ट्विटर) पर  ‘‘घृणित’’ तक कह दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया को इजराइल पर नहीं, बल्कि हमास पर दबाव डालना चाहिए जो ‘‘बर्बर और निर्दोष लोगों का हत्यारा’’ है। गाजा में हालात कितने गंभीर ?      गाजा पट्टी में इस समय 20 लाख से ज्यादा फिलीस्तीनी  एक भयानक मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं।     बड़ी संख्या में लोग  घर छोड़कर राहत शिविरों में रह रहे हैं।      पानी, भोजन और दवाइयों की भारी कमी है।     गाजा  स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक इजराइली हमलों में 59,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।      इनमें आधे से ज्यादा महिलाएं और बच्चे  हैं। कैसे शुरु हुई जंग ?  7 अक्टूबर 2023 को हमास ने दक्षिणी इजराइल में बड़ा हमला कर दिया था।  इस हमले में करीब 1,200 इजराइली नागरिक मारे गए।  251 लोगों को बंधक बना लिया गया जिनमें अब भी करीब 50 बंधक हमास के कब्जे में हैं लेकिन माना जाता है कि आधे से भी कम अब जीवित हैं। इसके जवाब में इजराइल ने गाजा में भीषण सैन्य अभियान शुरू किया, जो अब तक जारी है। इन देशों ने इजराइल और हमास दोनों से  तुरंत युद्धविराम  की अपील की है। उन्होंने कहा कि वे इस क्षेत्र में स्थायी शांति लाने के लिए  राजनीतिक समाधान को समर्थन देने के लिए तैयार हैं।

ऑपरेशन के बाद भी रिश्तों में तल्ख़ी, भारत-पाक सीमा पर तनाव की नई परतें

नई दिल्ली  भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुई सीमा पार झड़पों के बाद दोनों देश फिर से एक-दूसरे के खिलाफ रणनीतिक ‘शैडो बॉक्सिंग’ कर रहे हैं। इसके तहत दोनों देशों ने अपनी-अपनी सीमाओं के पास एयरस्पेस रिजर्व करने के लिए  नोटम्स  (Notice to Airmen) जारी किए हैं ताकि वायुसेना अभ्यास किए जा सकें। भारतीय वायुसेना की दक्षिण पश्चिमी एयर कमान 23 जुलाई से 25 जुलाई के बीच राजस्थान-गुजरात के इलाके में, जो कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास है,  एयर कॉम्बैट ड्रिल यानी हवाई युद्धाभ्यास करने जा रही है। इसके जवाब में पाकिस्तान ने अपने मध्य क्षेत्र के लिए 23 जुलाई तक और दक्षिणी क्षेत्र के लिए 22-23 जुलाई तक नोटम जारी किया है। गौरतलब है कि मई में दोनों देशों के बीच चार दिन तक तीव्र संघर्ष हुआ था। यह संघर्ष 7 मई को भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में  चार आतंकवादी ठिकानों और  पांच आतंकी अड्डों पर सटीक हमलों के बाद शुरू हुआ था। इस ऑपरेशन को भारत ने  ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया था। भारत ने साफ कहा था कि उसका मकसद केवल आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था, लेकिन पाकिस्तान ने इस पर पलटवार करते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए। पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के अड्डों, सैन्य ठिकानों और कुछ नागरिक इलाकों को भी निशाना बनाया।   इसके जवाब में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कम से कम नौ एयरबेस और  तीन रडार साइटों पर हमला किया। इनमें कुछ ठिकाने पाकिस्तान के परमाणु प्रतिष्ठानों और कमांड एंड कंट्रोल ढांचे के पास भी थे। भारतीय वायुसेना ने इसमें  Su-30MKI ,  राफेल और  मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमान इस्तेमाल किए। हमलों में  ब्रह्मोस,  क्रिस्टल मेज़-2,  रैम्पेज और  स्कैल्प जैसी सटीक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ। ये हमले बहुत ही सटीक तरीके से, तय निशानों पर किए गए थे। अब दोनों देश फिर से सीमाओं के पास एयरस्पेस ब्लॉक कर हवाई अभ्यास कर रहे हैं, जिससे साफ है कि हालिया तनाव के बाद भी दोनों देश एक-दूसरे पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं और अपनी रणनीतिक ताकत दिखा रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में मौसम का अलर्ट, बारिश के चलते स्कूलों पर ताला

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में पिछले 12 घंटों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जिला प्रशासन ने मंगलवार को सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया है। यह निर्णय छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सुबह 9:30 बजे जारी एक आधिकारिक निर्देश में रियासी के मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कहा, “खराब मौसम की स्थिति को देखते हुए जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूल 22 जुलाई को बंद रहेंगे।” राजौरी जिले में भी हालात ऐसे ही हैं। भारी बारिश से निचले इलाकों में पानी भर गया है। धरहाली और साकतोह नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। राजौरी के जिला मजिस्ट्रेट ने घोषणा की कि “खराब मौसम के कारण राजौरी जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूल मंगलवार को बंद रहेंगे।” प्रशासन स्थिति पर नजर रख रहा है, क्योंकि लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। सांबा जिले में भी भारी बारिश के कारण प्रशासन ने सुरक्षा के लिए एडवाइजरी जारी की है। सांबा के उपायुक्त ने लोगों से भूस्खलन और जलभराव की आशंका को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। एडवाइजरी में कहा गया है कि लोगों को उन क्षेत्रों में जाने से बचना चाहिए जहां भूस्खलन की आशंका ज्यादा है। यात्रा करने से बचना चाहिए और बहते हुए नालों, नदियों या जलमार्गों को पार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। स्कूलों से कहा गया है कि यदि कोई स्कूल भवन असुरक्षित पाया जाता है, तो कक्षाएं स्थगित कर दी जाएं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करें। भारी बारिश के कारण जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में सड़कें ब्लॉक हो गई हैं और निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ गई है।  

अचानक मौतें चौंकाती हैं, जीवन अनिश्चित है: रवि किशन की संवेदनात्मक अपील

नई दिल्ली  जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने को लेकर तमाम कयास लग रहे हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने अचानक उनके इस्तीफे पर सवाल उठाए हैं। वहीं भाजपा सांसद रवि किशन ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कब कौन बीमार पड़ जाए। किसे पता है। उन्होंने अपने इस्तीफे में स्वास्थ्य कारण बताया है तो उस पर भरोसा करना चाहिए। सांसद रवि किशन ने कहा कि आखिर कैसे किसी की हेल्थ को भी राजनीति का मसला बनाया जा सकता है। रवि किशन ने कहा, 'विपक्ष किसी की सेहत का मजाक बना रहा है और उस पर राजनीति कर रहा है। आप देख सकते हैं कि स्वस्थ लोग भी अचानक गिर पड़ते हैं मौत हो जाती है।' रवि किशन ने कहा किसे पता है कि कौन कब बीमार हो जाए। डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है। यदि किसी को आराम करने की जरूरत है तो ये लोग उस पर भी राजनीति कर रहे हैं। यह कितना सही है। वहीं भाजपा की सांसद कंगना रनौत ने कहा कि हम देश के लिए उनकी सेवाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने तो सीधे तौर पर किसी गड़बड़ी का आरोप लगा दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और उपराष्ट्रपति के बीच कभी ऐसे रिश्ते नहीं देखे गए। आखिर अचानक कैसे इस्तीफा हो सकता है। उन्होंने दिन में राज्यसभा की कार्यवाही में हिस्सा लिया और रात को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि सोमवार शाम को कार्य मंत्रणा समिति की मीटिंग थी। इसमें केंद्रीय मंत्री नहीं आए थे। शायद दोपहर में ऐसा कुछ हुआ था, जिससे चीजें खराब होती चली गईं। गोगोई ने धनखड़ के इस्तीफे को अप्रत्याशित बताते हुए कहा कि जो कुछ हो रहा है, वह चिंताजनक है। इसके अलावा शिवसेना उद्धव गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि सितंबर में कुछ बड़ा होने वाला है। उसके लिए ही यह तैयारी की जा रही है। बता दें कि कई नेताओं ने जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को बिहार चुनाव से जीता है। इन लोगों का कहना है कि बिहार से जुड़े किसी व्यक्ति को उपराष्ट्रपति बनाने की तैयारी है ताकि चुनाव में फायदा उठाया जा सके।  

ब्रिटिश रॉयल नेवी का F-35B तिरुवनंतपुरम से उड़ा, लंबा इंतजार खत्म, 14 जून को केरल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग की थी

तिरुवनंतपुरम  केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट से मंगलवार को ब्रिटिश रॉयल नेवी के लड़ाकू विमान ने स्वदेश वापसी की उड़ान भरी। यह लड़ाकू विमान तकनीकी खराबी के कारण के एक महीने तक एयरपोर्ट पर रहा। एयरपोर्ट के सूत्रों ने बताया कि ब्रिटिश लड़ाकू विमान F-35B विमान को सोमवार को पूरी तरह से ठीक लिया था। इसके बाद विमान ने स्वदेश वापसी के लिए क्लियरेंस ली। महीने भर पहले तिरुवनंतपुरम के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग हुई थी। दुनिया के उन्नत लड़ाकू विमानों में शामिल F-35B के खराब होने से यह घटना सुर्खियों में आ गई थी। विमान को 14 जून को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी।   ब्रिटेन ने भारत को बोला 'थैंक यू' लड़ाकू विमान के ठीक होकर स्वदेश वापसी की उड़ान भरने पर ब्रिटिश उच्चायोग का बयान सामने आया है। उच्चायोग के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटिश एफ-35बी विमान 14 जून को आपातकालीन मार्ग परिवर्तन के बाद उतरा था। मंगलवार को तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से रवाना हुआ। प्रवक्ता ने कहा कि 6 जुलाई से तैनात ब्रिटिश इंजीनियरिंग टीम ने मरम्मत और सुरक्षा जांच पूरी कर ली थी, जिससे विमान को फिर से सक्रिय सेवा प्रदान करने की अनुमति मिल गई। उच्चायोग ने कहा है कि विमान की मरम्मत और उसे उड़ान भरने में सक्षम बनाने में ब्रिटेन भारतीय अधिकारियों और हवाई अड्डे की टीमों के समर्थन और सहयोग के लिए बहुत आभारी है। हम भारत के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को और मज़बूत करने के लिए तत्पर हैं। वापसी से पहले कब क्या हुआ? ब्रिटिश लड़ाकू विमान ने सुबह 10 बजकर 50 मिनट पर एफ-35बी लाइटनिंग लड़ाकू विमान ने ऑस्ट्रेलिया के डार्विन के लिए उड़ान भरी। इससे पहले सोमवार को विमान को हैंगर से बाहर निकालकर एयरपोर्ट के बे में रखा गया था। तब यह माना गया था कि विमान अब जल्द ही उड़ान भरेगा। ब्रिटिश रॉयल नेवी का F-35B लाइटनिंग लड़ाकू विमान ब्रिटेन के सबसे उन्नत स्टील्थ बेड़े का हिस्सा है। दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में शामिल एफ 35B की कीमत काफी ज्यादा है। एक अनुमान के अनुसार इकी कीमत 110 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा है। एयरक्राफ्ट F-35B 14 जून की रात जॉइंट समुद्री अभ्यास के तहत अरब सागर के ऊपर नियमित उड़ान पर था। खराब मौसम और कम ईंधन की वजह से केरल के तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। लैंडिंग के बाद जेट में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण यह वापस नहीं जा सका। 918 करोड़ रुपए का यह विमान ब्रिटेन की रॉयल नेवी के HMS प्रिंस ऑफ वेल्स कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है। इसे दुनिया भर में सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट में से एक माना जाता है। ब्रिटिश हाई कमीशन ने भारत का आभार जताया ब्रिटिश हाई कमीशन के प्रवक्ता ने कहा, 'F-35B विमान आज रवाना हुआ। 6 जुलाई से तैनात ब्रिटिश इंजीनियरिंग टीम ने मरम्मत और सिक्योरिटी चेकिंग पूरी करके विमान को एक्टिव सर्विस की इजाजत दे दी। मरम्मत और रिकवरी प्रोसेस के दौरान भारतीय अधिकारियों के सहयोग के लिए ब्रिटेन बहुत आभारी है। हम भारत के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।' लाइटनिंग के नाम से मशहूर है F-35 जेट ब्रिटिश सेवा में लाइटनिंग के नाम से जाना जाने वाला F-35 मॉडल, फाइटर जेट का शॉर्ट टेक ऑफ/वर्टिकल लैंडिंग (STOVL) वैरिएंट है। इसे शॉर्ट-फील्ड बेस और एयर कैपेबल जहाजों से ऑपरेट करने के लिए डिजाइन किया गया है। F-35B पांचवीं पीढ़ी का एकमात्र लड़ाकू जेट है, जिसमें छोटी हवाई पट्‌टी से उड़ान और वर्टिकल लैंडिंग की कैपेसिटी है। जो इसे छोटे डेक, साधारण ठिकानों और जहाजों से संचालन के लिए आदर्श बनाती हैं। F-35B को लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने डेवलप किया है। इस प्लेन को 2006 से बनाना शुरू किया गया था। 2015 से यह अमेरिकी वायुसेना में शामिल है। ये पेंटागन के इतिहास का सबसे महंगा विमान है। अमेरिका एक F-35 फाइटर प्लेन पर औसतन 82.5 मिलियन डॉलर (करीब 715 करोड़ रुपए) खर्च करता है।

उपराष्ट्रपति धनखड़ के इस्तीफे पर नया सियासी तूफान, कांग्रेस ने लगाए सनसनीखेज आरोप

देहरादून उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने तमाम तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। भले ही खुद धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया लेकिन कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेता अलग-अलग तरह की आशंकाएं जाहिर कर रहे हैं। टाइमिंग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बीच उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने उनके इस्तीफे को बिहार चुनाव से जोड़ दिया है। उन्होंने यहां तक कहा कि एक नेता को स्थान देने के लिए धनखड़ को इस्तीफा देने के लिए कहा गया। बातचीत में कहा कि बिहार के एक नेता के लिए धनखड़ से इस्तीफा लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफे के तुरंत बाद कई नामों की चर्चा चल रही है और सभी नाम किसी ना किसी तरह से बिहार से जुड़े हैं। रावत ने कहा, ‘इस्तीफे की आकस्मिकता ने चौंका दिया है, बल्कि बहुत गहरी बात लगती है।’ बिहार के व्यक्ति विशेष को करना है अकोमडेट: रावत उन्होंने कहा, ‘कुछ सूत्रों से जो नाम चल रहे हैं, उनमें से अधिकांश नाम वो हैं जो किसी ना किसी रूप में बिहार चुनाव को प्रभावित करते हैं। कहा तो यह जा रहा है कि वहां जो उनका गठबंधन है भाजपा का वह असहज हो रहा है एक ’व्यक्ति विशेष' के कारण, उसको अकोमडेट करने के लिए संकेत दिया गया जगदीप धनखड़ जी को कि महाराज बहुत हो गया, अब आप उतर जाइए। क्योंकि उनके इस्तीफे की स्टाइल वही है, जिसमें संदेश आता है और भाजपा में इस्तीफा हो जाता है।' कहा- लगता है पूरा प्लेटफॉर्म सेट था रावत ने कहा कि इस्तीफे के पीछे कई कहानियां हैं। उन्होंने कहा, 'धनखड़ जी की त्यागपत्र की जो आकस्मिकता है और जो समय का चयन है वो दोनों कई कहानियां, कई बातें कहती हैं और क्या कारण है इस इस्तीफे के पीछे वो बहुत गहरा है और उस गहराई का स्पष्टीकरण केवल पीएम या जगदीप धनखड़ जी दे सकते हैं।' उन्होंने धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि यह पूरा सेट प्लेटफॉर्म जैसा लगता है। वह दिनभर सक्रिय रहे, उनके दो-तीन दिन के कार्यक्रम निश्चित थे। बिजनेस अडवाइजरी कमिटी की बैठक लेनी थी, उपराष्ट्रपति के तौर पर राजस्थान जाना था। सात-साढ़े सात बजे तक विपक्षी नेताओं से मुलाकात करते हैं और 9 बजे इस्तीफा आ जाता है।  

ट्रेन में सफर कर रहीं 56 लड़कियां, टिकट चेकिंग में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में 56 लड़कियों को रेलवे पुलिस ने बचाया है और दो लोगों को अरेस्ट किया गया है। इन लड़कियों को न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन से बचाया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन युवतियों को टिकट चेकिंग के दौरान पकड़ा गया तो पता चला कि इन्हें जानकारी भी नहीं है कि आखिर इन्हें कहां ले जाया जा रहा है। इनती सारी लड़कियों को एक साथ यात्रा करते देखकर संदेह हुआ। जांच पर पता चला कि इन लोगों को बेंगलुरु में नौकरी दिलाने का वादा किया गया था। ऐसे में सवाल है कि बेंगलुरु में नौकरी का वादा था तो फिर बिहार क्यों ले जाया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि इन युवतियों को सोमवार देर रात न्यू जलपाईगुड़ी-पटना कैपिटल एक्सप्रेस से बचाया गया। बचाई गई इन युवतियों की आयु 18 से 31 वर्ष के बीच है। अधिकारियों ने बताया कि ये महिलाएं पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलीपुरद्वार जिलों की रहने वाली हैं और उन्हें बेंगलुरु की एक कंपनी में नौकरी दिलाने का कथित तौर पर झूठा वादा करके बहकाया गया था। उन्होंने बताया कि उन्हें ट्रेन से बिहार भेजा जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी महिला के पास वैध टिकट नहीं था और उनके हाथों पर केवल कोच एवं बर्थ संख्या की मुहर लगी हुई थी। एक महिला और एक पुरुष को किया गया गिरफ्तार उन्होंने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कर्मियों को ट्रेन की नियमित जांच के दौरान इतनी सारी युवतियों को एक साथ यात्रा करते देखकर संदेह हुआ। इसके बाद में पूछताछ हुई तो गंभीर विसंगतियां सामने आईं। अधिकारियों ने बताया कि एक पुरुष और एक महिला को विरोधाभासी बयान देने पर मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि जब महिलाओं को बेंगलुरु में नौकरी दिलाने का वादा किया गया था तो उन्हें बिहार क्यों भेजा जा रहा था। मानव तस्करी का संदेह, जांच में जुटा रेलवे प्रशासन अधिकारियों ने बताया कि वे नौकरी की पेशकश या यात्रा के वैध कारणों की पुष्टि करने वाले कोई भी दस्तावेज पेश करने में विफल रहे। उन्होंने बताया कि जीआरपी और राजकीय रेलवे पुलिस (आरपीएफ) खासकर मानव तस्करी के पहलू से मामले की संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं। आरपीएफ ने बताया कि लड़कियों को उनके परिवारों को सौंप दिया गया है।