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राजौरी में मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, जलभराव के चलते स्कूलों में छुट्टी

जम्मू जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जहां एक ओर बारिश से जगह-जगह भूस्खलन (Jammu Kashmir Flood) हो रहा है तो वहीं, राजौरी में लगातार बारिश के बाद धरहाली और सकतोह नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। राजौरी जिला प्रशासन ने आज जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद करने की घोषणा की है। अगले 72 घंटे मुश्किल भरे होंगे आईएमडी ने अगले 72 घंटों में जम्मू संभाग और उधमपुर जिले में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया है। प्रशासन ने लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। जिसमें जनता को बाढ़/भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी गई। सहायता के लिए प्रशासन ने कुछ नंबर भी जारी किए हैं। डीईओसी: 01992-272727, 01992-272728। पीसीआर: 01992-276915 | ईआरएसएस: 112 पर संपर्क कर सकते हैं। जम्मू में भूस्खलन में पुलिस अधिकारी घायल अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को एक पुलिस अधिकारी अपनी निजी कार के जम्मू के पास बारिश के कारण हुए भूस्खलन की चपेट में आने से घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि प्रोबेशनरी डीएसपी सांबा में अपनी तैनाती स्थल जा रहे थे, तभी जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नगरोटा इलाके में बान टोल प्लाजा के पास एक सुरंग के बाहर भूस्खलन से उनकी कार क्षतिग्रस्त हो गई। उन्होंने बताया कि अधिकारी को बचा लिया गया और अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई गई है।  सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त अधिकारी स्थिति पर कड़ी नज़र रख रहे हैं क्योंकि लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया है और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अभी तक किसी के हताहत होने या किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया है और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नालियां जाम रहने से जलभराव की समस्या इस बीच, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) राजौरी के पीर पंजाल क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण कार्य कर रहा है ताकि संपर्क में सुधार हो और कोटरंका, समोट और बुधल जैसे बाजार क्षेत्रों में जलभराव को कम किया जा सके। बीआरओ के एक इंजीनियर संजय शर्मा ने कहा, “जहाँ भी जलभराव की समस्या है, खासकर बाज़ार वाले इलाकों में, हम कंक्रीट के फुटपाथ बना रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “बाज़ार में नालियाँ अक्सर जाम रहती थीं, जिससे सड़कों पर पानी भर जाता था। अब हमने उन इलाकों को कंक्रीट के फुटपाथों से ढक दिया है और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत भी कर रहे हैं।” भूस्खलन में दो लोगों की मौत शर्मा ने आगे कहा कि इस पहल का उद्देश्य सुगम यात्रा सुनिश्चित करना और नियमित रखरखाव के साथ सड़क सुरक्षा बनाए रखना है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में, सोमवार को चंबा ज़िले में बारिश के कारण हुए भूस्खलन में दो लोगों की मौत हो गई। भारी बारिश के दौरान एक घर पर एक पत्थर गिर गया। पटवारी अश्वनी ने एएनआई से बात करते हुए कहा, “बारिश के कारण कल रात भूस्खलन हुआ। परिणामस्वरूप, एक घर पर एक बड़ा पत्थर गिर गया और इस घटना में दो लोगों की दुखद मौत हो गई। पुलिस की मदद से उनके शव मलबे से निकाले गए और चंबा अस्पताल ले जाया गया। सरकार ने पीड़ितों को तत्काल राहत भी प्रदान की। वर्तमान में, हम क्षेत्र में खतरे का आकलन कर रहे हैं और नुकसान पर एक रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।”  

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की शिकायत, इशाक डार ने फिलेमोन के सामने सिंधु संधि पर जताई चिंता

इस्लामाबाद पाकिस्तान की ओर से सिंधु जल संधि विवाद का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाने की तैयारी हो रही है। पाक के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने इस मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष फिलेमोन यांग से मुलाकात की है। डार ने सोमवार को न्यूयॉर्क में यांग से मिलकर सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत का सिंधु जल संधि से हटने जैसे फैसले क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। डार ने यांग से कहा कि भारत की ओर से इस संधि का उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और दुनिया की संस्थाओं को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और भारत पर दबाव डाला जाना चाहिए। पाक मीडिया के मुताबिक, इशाक डार ने फिलेमोन यांग से अपनी बैठक में खासतौर से भारत को चर्चा का केंद्र रखा। डार ने भारत के आक्रामक रुख, ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि से पाकिस्तान को हो रही परेशानी से यांग को अवगत बताया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है पाक पाकिस्तान फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है। उसे रोटेशन के आधार पर ये पद मिला है। ऐसे में उसकी कोशिश इसका फायदा भारत विरोधी रुख को बढ़ाने के लिए करने की है। पाक चाहता है कि कश्मीर और सिंधु जल संधि को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर उठाया जाए। इसके लिए पाकिस्तान की कोशिश जारी है। इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष के सामने एक बार फिर कश्मीर कैा मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पाकिस्तान की पुरानी बयानबाजी को दोहराते हुए कहा कि कश्मीर में भारत की ओर से लगातार मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। शांति से हो जाए समाधान इशाक डार ने अंतर्राष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के माध्यम से बातचीत के माध्यम से पाकिस्तान और भारत के बीच सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। पहलगाम के बाद शुरू हुआ विवाद भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव की शुरुआत 22 अप्रैल के बाद हुई। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की बर्बरता से हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई स्तरों पर संबंध तोड़ने का फैसला लिया। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय भी लिया है। ये संधि भारत-पाक में नदियों का पानी बांटती है। भारत ने इस समझौते से हटते हुए पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकने की बात कही है। इससे पाकिस्तान में चिंता बढ़ी हुई है।

धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब आगे क्या, कब और कैसे …कांग्रेस हमलावर; टाइमिंग पर उठाए सवाल

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए अपने इस्तीफे में धनखड़ ने लिखा कि वे "स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने" के लिए यह फैसला ले रहे हैं। उनके इस अचानक फैसले से राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है। धनखड़ का इस्तीफा संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन आ गया। फिलहाल उनके उत्तराधिकारी की दौड़ शुरू हो गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को निर्वाचक मंडल में बहुमत प्राप्त है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं। आगामी दिनों में संभावित नामों पर विचार किए जाने की संभावना है। धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए चुनाव ‘‘जल्द से जल्द’’ कराना होगा। संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड दो के अनुसार, उपराष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या उन्हें पद से हटाए जाने या अन्य किसी कारण से होने वाली रिक्ति को भरने के लिए चुनाव, रिक्ति होने के बाद "यथाशीघ्र" आयोजित किया जाएगा। रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति "अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक" पद धारण करने का हकदार होगा। भाजपा के पास कई बड़े नेता कतार में भाजपा के पास इस पद पर चुनने के लिए नेताओं का एक बड़ा समूह है। राज्यपालों में से या संगठन के अनुभवी नेताओं अथवा केंद्रीय मंत्रियों में से किसी का चुनाव किया जा सकता है। धनखड़ भी उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। धनखड़ के पूर्ववर्ती एम वेंकैया नायडू थे। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में थे। पार्टी ने 2017 में उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना था। नायडू भाजपा के अध्यक्ष भी रहे। जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं और उन्हें सरकार का विश्वास प्राप्त है। मानसून सत्र के पहले दिन एक्टिव दिखे इंडिया टुडे की सीनियर रिपोर्टर मौसमी सिंह बताती हैं कि मानसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ पूरी सक्रियता से संसद में दिखे. संसद में उन्होंने कई मीटिंग भी ली. 21 जुलाई की शाम 6 बजे उन्होंने विपक्ष के सांसदों से मुलाकात भी की. इस दौरान उन्होंने खराब स्वास्थ्य का कोई जिक्र नहीं किया था. लेकिन 3 घंटे बाद ही उनका इस्तीफा हो गया. 23 जुलाई को जयपुर दौरा तय था जगदीप धनखड़ का ये फैसला इसलिए भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि उनके आगे के कार्यक्रम भी प्रस्तावित थे. 23 जुलाई को उनको जयपुर जाना था. वहां उपराष्ट्रपति रियल एस्टेट डेवलपर्स संघ के साथ संवाद करने वाले थे. उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से इस कार्यक्रम को लेकर प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई थी. विपक्ष टाइमिंग पर सवाल उठा रहा है जगदीप धनखड़ के खिलाफ महाभियोग लाने वाला विपक्ष भी उनके अचानक इस्तीफे से हैरान हैं. विपक्षी नेताओं ने इसको लेकर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति के इस कदम को रहस्यमयी बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,  कार्यकाल और विवादों से भरा रहा सफर जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 2027 तक था। अपने कार्यकाल के दौरान उनका विपक्ष से कई बार टकराव हुआ और उनके खिलाफ पहली बार महाभियोग प्रस्ताव लाया गया जिसे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया था। मार्च 2025 में AIIMS दिल्ली में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी और वे कुछ दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे थे। हालांकि वे कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहे, पर उनकी तबीयत को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही। एक सियासी तूफान आकार ले रहा था ऊपर से सामान्य दिखने वाले राजनीतिक गतिविधियों के ठीक पीछे एक सियासी तूफान आकार ले रहा था. सोमवार को सभापति जगदीप धनखड़ ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के विपक्षी सदस्यों के नोटिस को स्वीकार कर लिया. यह लगभग उसी समय (दोपहर 2 बजे) हुआ जब यह खबर आई कि निचले सदन में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के 100 से ज़्यादा सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. लगभग 4:07 बजे राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने महाभियोग प्रस्ताव पर 63 विपक्षी सांसदों से नोटिस मिलने की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने उस प्रक्रिया की याद दिलाई जब किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर दोनों सदनों में नोटिस दिए जाते हैं.  धनखड़ ने प्रक्रिया का विवरण दिया और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से यह पुष्टि करने के लिए भी कहा कि क्या निचले सदन में नोटिस दिया गया है. फिर उन्होंने एक संयुक्त समिति के गठन और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की बात कही. इस तरह पता चलता है कि उन्होंने अपने अंतिम संबोधन और उपस्थिति में भी उन्होंने अपने स्वास्थ्य या इस्तीफा देने के किसी अन्य इरादे की ओर कोई इशारा नहीं किया.  राजनाथ सिंह के घर क्या हो रहा था? शाम को संसद में राजनाथ सिंह के कार्यालय के बाहर भी काफी हलचल रही और बैठकें भी खूब हुईं. सूत्रों का कहना है कि भाजपा सांसद राजनाथ के कार्यालय में घुसे और बिना कुछ बोले ही बाहर निकल गए. एक भाजपा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनसे कोरे कागज पर दस्तखत करवाए जा रहे थे. हालांकि विपक्षी सांसद इस बात को लेकर उत्साहित थे और उन्हें विश्वास था कि महाभियोग प्रस्ताव सबसे पहले राज्यसभा में लाया जाएगा क्योंकि राज्यसभा के सभापति भारत के उपराष्ट्रपति भी होते हैं और प्रोटोकॉल के अनुसार सरकार में स्पीकर से पद में बड़े होते हैं. धनखड़ के इस्तीफे के बाद असमंजस में कांग्रेस राज्यसभा के पिछले कुछ सत्र धनखड़ के लिए एक कठिन परीक्षा थी, क्योंकि उन्होंने सहयोग किया और दोनों पक्षों की नाराज़गी झेली. विपक्षी सदस्यों ने धनखड़ पर पक्षपात करने का आरोप लगाया, उन्होंने चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. इस मामले में उपसभापति ने फैसला सुनाया और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया. अब जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस असमंजस में दिख रही है. इंडिया ब्लॉक के सदस्यों … Read more

अब मोबाइल से घर बैठे बनाएं रेंट एग्रीमेंट और एफिडेविट, एक क्लिक में मिलेगा E-स्टाम्प पेपर

नई दिल्ली डिजिटल इंडिया में कई ऐसे काम अब बेहद आसान हो गए हैं जिनके लिए पहले सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। ऐसे ही कामों में से एक अब एफिडेविट, एग्रीमेंट या सेल्फ डिक्लेरेशन बनवाने के लिए कोर्ट या नोटरी के चक्कर काटने की जरूरत नहीं! यह काम अब आप घर बैठे सिर्फ अपने फोन से कुछ मिनटों में कर सकते हैं और सरकारी मान्यता प्राप्त e-Stamp Paper पा सकते हैं। आसान और डिजिटल प्रोसेस से न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि डॉक्यूमेंट्स भी पूरी तरह वैध और सुरक्षित रहेंगे। चलिए अब देर न करते हुए पूरे प्रोसेस का एक-एक स्टेप समझते हैं। क्या है ई स्टांप पेपर? ई-स्टांप पेपर एक डिजिटल स्टांप पेपर होता है, जो किसी भी कानूनी या वित्तीय डॉक्यूमेंट को वैध बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे सरकार द्वारा अधिकृत वेबसाइट जैसे कि shcilestamp.com से ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। ऐसा समझ लें कि यह पारंपरिक स्टांप पेपर का डिजिटल वर्जन है। ई स्टांप पेपर कहां काम आते हैं? ई-स्टांप पेपर का इस्तेमाल एफिडेविट, रेंट एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी, सेल डीड और कोर्ट कचहरी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स जैसे कई कामों में होता है। इससे नकली स्टांप पेपर की समस्या नहीं होती और दस्तावेजों की वैधता कानूनी रूप से सुरक्षित रहती है। ऐसे बनवाएं एग्रीमेंट और एफिडेविट?     इसके लिए सबसे पहले आपको shcilestamp.com या राज्य सरकार की अधिकृत वेबसाइट पर जाना होगा, जो डिजिटल स्टांप पेपर जारी करने की सर्विस देती हैं।     वेबसाइट पर पहुंचने के बाद अपने राज्य को चुनें। ऐसा इसलिए क्योंकि स्टांप ड्यूटी हर राज्य में अलग-अलग होती है। फिर भाषा में हिंदी या अंग्रेजी को चुनें।     अब "e-Stamping Services" या “Generate e-Stamp Certificate” वाले विकल्प पर क्लिक करें, ताकि आप ऑनलाइन स्टांप पेपर के लिए फॉर्म भर सकें।     फॉर्म में इस्तेमाल करने वाले का नाम, पता, डॉक्यूमेंट का प्रकार जैसे कि एफिडेविट या एग्रीमेंट, स्टांप पेपर की वैल्यू, पिन कोड आदि सही-सही भरें।     इसके बाद डॉक्यूमेंट के प्रकार के अनुसार स्टांप पेपर की राशि चुनें, जैसे 10, 50 या 100 रुपये। यह राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि आप किस तरह का डॉक्यूमेंट बनवा रहे हैं।     अब आप नेट बैंकिंग, UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं।     पेमेंट पूरी होने के बाद वेबसाइट आपको स्टांप पेपर का PDF देगी जिसे आप तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं या ईमेल पर मंगवा सकते हैं।     अब आप वर्ड या पीडीएफ में अपना एफिडेविट/एग्रीमेंट बनाकर उसे डाउनलोड किए गए स्टांप पेपर पर चिपका सकते हैं या प्रिंट करवाकर साथ जोड़ सकते हैं।     अगर डॉक्यूमेंट को कानूनी तौर पर वैध बनाना जरूरी है, तो उसे किसी अधिकृत नोटरी से हस्ताक्षर और मोहर के साथ प्रमाणित करवाया जा सकता है।     बस अब आपका डॉक्युमेंट तैयार है। आप इसे कोर्ट, बैंक, मकान मालिक या अन्य किसी संस्थान को वैध रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। इस तरह से आप बेहद आसानी से घर बैठे ही एग्रीमेंट्स या एफिडेविट के लिए ई-स्टाम्प पेपर ले सकते हैं। ध्यान रखने वाली बातें ई-स्टांप पेपर या ऑनलाइन एफिडेविट बनवाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। सबसे पहले, हमेशा सिर्फ सरकारी या अधिकृत वेबसाइट जैसे shcilestamp.com का ही इस्तेमाल करें। स्टांप पेपर का राज्य चुनते समय उस राज्य की स्टांप ड्यूटी की जानकारी जरूर पढ़ें, क्योंकि हर राज्य के नियम अलग होते हैं। फॉर्म भरते समय नाम, पता, उद्देश्य जैसी सभी जानकारियां बिल्कुल सही भरें। पेमेंट करते समय सुरक्षित गेटवे का ही इस्तेमाल करें। ई-स्टांप पेपर डाउनलोड करके अपने पास सुरक्षित रखें। अगर दस्तावेज में नोटरी की जरूरत हो, तो अधिकृत नोटरी से प्रमाणित करवाएं। गलत जानकारी या प्रक्रिया से डॉक्युमेंट अवैध हो सकता है।

जन्मतिथि और बायोमेट्रिक अपडेट की लिमिट तय, UIDAI CEO ने दी जानकारी

नई दिल्ली आधार कार्ड से संबंधित कई बादलाव हो रहे हैं। हाल ही में सरकार ने आधार कार्ड के लिए एक नया ऐप पेश किया है। फिलहाल ऐप का अर्ली एक्सेस आया है, लेकिन इसे फोन में डाउनलोड करके यूज किया जा सकता है। लोग आधार कार्ड में कई बदलाव कराते हैं। नाम से लेकर पता तक, कई बदलाव कराए जा सकते हैं। इतना ही नहीं, आप अपनी जन्म तिथि को भी बदल सकते हैं। हालांकि, अब ऐसा करना आसान नहीं होगा। बार-बार जन्म तिथि में बदलाव को रोकने के लिए सरकार ने नया नियम लागू किया है। आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था UIDAI अब आधार और नकली UID नंबरों से होने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, UIDAI के CEO भुवनेश कुमार ने बताया कि जन्मतिथि और बायोमेट्रिक्स में बार-बार बदलाव को रोका जाएगा। जन्मतिथि में बदलाव के लिए देना होगा यह सर्टिफिकेशट भुवनेश कुमार ने बताया है कि गलत फोटो और बायोमेट्रिक्स के इस्तेमाल को रोकने के लिए UIDIA द्नारा कई उपाय किए जाएंगे। UIDAI अन्य सरकारी डेटाबेस से जानकारी वेरिफाई करेगा। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी नई टेक्नोलॉजी का यूज किया जाएगा। आधार एप्लीकेशन फॉर्म को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया जाएगा। साथ ही, लोगों को ऐसे डॉ्कयूमेंट्स यूज करने होंगे, जो कि राज्यों से ऑनलाइन वेरिफाई हो सकें। आधार की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए ये कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग गलत तरीके से आधार का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए इसे रोकना जरूरी है। UIDAI अब जन्मतिथि में बदलाव करने पर सख्ती करेगा। अगर किसी को जन्मतिथि बदलनी है, तो उसे पहले ओरिजिनल बर्थ सर्टिफिकेट में जन्मतिथि बदलवानी होगी। UIDAI द्नारा दूसरे बर्थ सर्टिफिकेट को मान्यता नहीं दी जाएगी। लोग ऐसे करते हैं गलत इस्तेमाल UIDAI 35 राज्यों के ओरिजिनल डेटाबेस से सीधा कॉन्टैक्ट कर रहा है। पैन कार्ड, CBSE मार्कशीट और MGNREGA रिकॉर्ड जैसे डॉक्यूमेंट्स को भी इंटीग्रेट किया जा रहा है। कुमार का कहना है कि अगर लोग क्रिकेट टीम में खेलना चाहते हैं, तो वे अपनी उम्र दो साल कम करने की कोशिश करते हैं। अगर वे नौकरी पाना चाहते हैं, तो वे अपनी उम्र दो साल बढ़ाने की कोशिश करते हैं। यह बहुत बड़ा फ्रॉड है। इसका मतलब है कि लोग अलग-अलग फायदे के लिए अपनी उम्र बदलने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आगे बताया है कि लोग कई जन्म प्रमाण पत्रों से ऐसा करने की कोशिश करते हैं। UIDAI अब इस तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रहा है। UIDAI यह सुनिश्चित करेगा कि आधार कार्ड बनवाने या अपडेट कराने के लिए दिए गए डॉक्यूमेंट्स सही हैं या नहीं। इसके लिए UIDAI सीधे सोर्स से डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करेगा। UIDAI सिस्टम को और भी बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। UIDAI ने फिंगरप्रिंट फ्रॉड को रोकने के लिए AI/ML एल्गोरिदम बनाया है। यह एल्गोरिदम यह सुनिश्चित करेगा कि फिंगरप्रिंट असली हैं। आयु की ऐसे होगी जांच इसी तरह, AI बेस्ड सॉफ्टवेयर कैमरों में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सॉफ्टवेयर उम्र की जांच करेगा। बच्चे के आधार के लिए बायोमेट्रिक्स की जरूरत नहीं होती है। AI का इस्तेमाल ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन डेटाबेस में मौजूद फोटो से किसी व्यक्ति की फोटो को मिलाने के लिए भी किया जा रहा है। इससे फ्रॉड को रोका जा सकेगा। UIDAI फिंगरप्रिंट अपडेट करने की संख्या को सीमित करने पर भी विचार कर रहा है। कुमार ने कहा कि बुजुर्ग लोगों के लिए फिंगरप्रिंट अपडेट करना ठीक है, क्योंकि उनकी उंगलियों के निशान बदल सकते हैं। हालांकि, युवाओं के लिए बार-बार फिंगरप्रिंट अपडेट करने का कोई मतलब नहीं है। बार-बार फिंगरप्रिंट भी नहीं करा पाएंगे अपडेट UIDAI फिंगरप्रिंट अपडेट करने की संख्या को सीमित करने पर भी विचार कर रहा है। कुमार ने कहा कि बुजुर्ग लोगों के लिए फिंगरप्रिंट अपडेट करना ठीक है, क्योंकि उनकी उंगलियों के निशान बदल सकते हैं। हालांकि, युवाओं के लिए बार-बार फिंगरप्रिंट अपडेट करने का कोई मतलब नहीं है। UIDAI के इन कदमों से आम लोगों को काफी फायदा होगा। UIDAI ने यह भी कहा है कि वह जल्द ही आधार कार्ड को और भी ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए कुछ और नए कदम उठाएगा।

शादीशुदा ज़िंदगी बनी नर्क – पूर्व सांसद ने पति पर लगाए यौन शोषण और हिंसा के गंभीर आरोप

बर्टन  ब्रिटेन के बर्टन के पूर्व सांसद एंड्रयु ग्रिफिथ्स की पूर्व पत्नी केट नीवेटन ने पति को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पहली बार उन्होंने बलात्कार से लेकर घरेलू हिंसा तक पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया है कि किस तरह से ग्रिफिथ्स सोते समय उनका बलात्कार और हिंसा करता था। साथ ही आरोप हैं कि उसने महज रोने के चलते नवजात पर बुरी तरह बर्ताव किया था। खास बात है कि निवेटन खुद भी साल 2019 से 2024 तक बर्टन सांसद रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीवेटन के आरोप हैं कि जब उनकी नवजात बेटी भूख की वजह से रो रही थी, तो ग्रिफिथ्स उसपर बुरी तरह से चिल्लाया था। उन्होंने कहा, 'लोगों को यह नहीं लगता कि यह प्रोफेशनल मिडिल क्लास लोगों के साथ हो सकता है, लेकिन घरेलू हिंसा की कोई सीमा नहीं होती। यह किसी की भी प्रभावित कर सकता है। जब मैं चुनी गई थी, तो मैंने वादा किया था कि घरेलू हिंसा के पीड़ितों के लिए काम करूंगी।' उन्होंने कहा, 'मैं सिर्फ 10 सालों तक झेली हिंसा के कारण सदमे में नहीं हूं, बल्कि इसके बाद के 5 साल की वजह से हूं, जिस दौरान कानूनी व्यवस्था का इस्तेमाल उसने मुझे परेशान करने में किया।' उन्होंने बताया कि ग्रिफिथ्स के साथ उनकी शादी साल 2013 में हुई थी और 2018 में दोनों अलग हो गए। जब वह ग्रिफिथ्स से मिली थीं, तो उन्हें बेहद आकर्षक और मिलनसार मानती थीं। उन्होंने कहा, 'बाहर से देखने वाले अधिकांश लोगों को हमारा रिश्ता एकदम ठीक लगता था, लेकिन हिंसा सालों तक चलती रही थी। हर बार जब मैं कहती थी कि मैं पुलिस से शिकायत करूंगी, तो वह कहता था कि कोई भी तुम्हारी बात पर भरोसा नहीं करेगा केट। मैं यहां सांसद हूं। पुलिस के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं। वो सभी मुझे अच्छा समझते हैं।' उन्होंने कहा, 'यह सब तब शुरू होता था, जब मैं सो रही होती थी। मैं जागती थी और वो मेरे साथ सेक्स करने लगता था…। कभी कभी मुझे लगता था कि जाने दो, लेकिन कई बार मैं रोती थी। ऐसा होने पर कई बार वह रुक जाता था, लेकिन उसका मूड खराब हो जाता था। मुझे याद है कि उसने मुझे बिस्तर से बाहर लात मार दी थी। मैं दूसरे कमरे में जाती थी और खुद को रातभर के लिए बंद कर लेती थी या घर से बाहर चली जाती थी।' नीवेटन ने बताया कि जब उन्हें लगने लगा कि नवजात को भी खतरा है, तो उन्होंने सुरक्षा के लिए कदम उठाए। खास बात है कि ग्रिफिथ्स साल 2006 में उन्हें महज 3 सप्ताह में क्षेत्र की 2 महिलाओं को 2 हजार अश्लील संदेश भेजने के चलते बाहर कर दिया था। दिसंबर 2021 में फैमिली कोर्ट के जज ने आदेश दिए थे कि वह पत्नी के साथ हिंसा और बलात्कार किया।

राशन कार्ड बनवाना हुआ आसान, UMANG ऐप से घर बैठे करें अप्लाई

नई दिल्ली.  भारत सरकार द्वारा लॉन्च किया गया एक मल्टी-सर्विस मोबाइल ऐप है, जहां एक ही प्लेटफॉर्म पर आप कई सरकारी सेवाओं का लाभ ले सकते हैं – जैसे EPFO, जन्म प्रमाण पत्र, और अब राशन कार्ड का आवेदन भी। एंड्रॉयड यूजर इसे Google Play Store और iPhone यूजर Apple App Store से आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। राशन कार्ड क्यों है जरूरी? राशन कार्ड (Ration Card) न सिर्फ पहचान पत्र का काम करता है, बल्कि यह कई सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जरूरी दस्तावेज है। इसके जरिए आपका परिवार सरकारी राशन प्रणाली से अनाज प्राप्त कर सकता है, और आपकी पारिवारिक जानकारी सरकार के रिकॉर्ड में दर्ज हो जाती है। मोबाइल से ऐसे करें राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन UMANG ऐप डाउनलोड करें – अपने मोबाइल में ऐप (Ration Card) स्टोर पर जाकर “UMANG” सर्च करें और ऐप इंस्टॉल करें।     मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करें – ऐप खोलने के बाद मोबाइल नंबर डालकर OTP वेरिफाई करें।     होम पेज से “Services” पर जाएं – सबसे नीचे बाईं ओर मौजूद इस विकल्प को चुनें।     “Utility Services” सेक्शन में जाएं – स्क्रॉल करें और राशन कार्ड से जुड़े विकल्पों को ढूंढें।     “Apply Ration Card” पर क्लिक करें – अब अपना राज्य चुनें।     व्यक्तिगत जानकारी भरें – जैसे नाम, जन्मतिथि, पिता का नाम, पता आदि।     दस्तावेज अपलोड करें – आधार कार्ड, एड्रेस प्रूफ आदि अपलोड करें।     सबमिट पर क्लिक करें – सारी जानकारी भरने और डॉक्युमेंट अपलोड करने के बाद फॉर्म सबमिट करें। ध्यान रखें – अभी सिर्फ कुछ राज्यों के लिए उपलब्ध फिलहाल यह सेवा (Ration Card) चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ही उपलब्ध है। इनमें चंडीगढ़, लद्दाख, सक्कर, दादरा और नगर हवेली शामिल हैं। हालाँकि, सरकार जल्द ही अन्य राज्यों में भी यह सुविधा शुरू करने वाली है।

विमान हादसा: अहमदाबाद प्लेन क्रैश में इन 5 बातों से खुलेगी अमेरिका की पोल

नई दिल्ली अहमदाबाद प्लेन क्रैश मामले में अभी अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं आई है। मगर, अमेरिका समेत कई देशों के मीडिया ने यह खबर चलाई थी कि अहमदाबाद-लंदन एयर इंडिया ड्रीमलाइनर विमान हादसे का कारण पायलटों में से किसी एक ने जानबूझकर ईंधन की आपूर्ति बंद कर दी थी। उन्होंने इंजन के स्विच को रन' से 'कटऑफ' पर कर दिया था। इससे इंजन को ईंधन मिलना बंद हो गया और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अब इस मामले में एक एविएशन एक्सपर्ट ने अपनी राय दी है और कहा है कि मैथेमैटिकली ये संभव ही नहीं है। भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट रहे अहसान खालिद ने कहा कि मीडिया को बिना किसी सबूत के अटकलें नहीं लगानी चाहिए। माना जा रहा है कि अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार और मीडिया एयर इंडिया के उस विमान को बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग को बचाने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, यह भी जानेंगे कि इस मामले में जांच अब किन बिंदुओं पर केंद्रित हो गई है। जान-बूझकर फ्यूल स्विच बंद करने की बात गलत विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) 12 जून को हुए इस हादसे की जांच कर रहा है। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों सहित कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। AAIB ने हाल ही में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। वह यह है कि ईंधन स्विच एक सेकंड के भीतर बदले गए थे। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह बात कही गई है कि यह जानबूझकर किया गया था। हालांकि, पायलट रह चुके कैप्टन एहसान खालिद इससे सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना बहुत दुखद है। हमें उन सभी लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए जिन्होंने इस हादसे में अपनी जान गंवाई। हमें AAIB की जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए ताकि दुर्घटना का असली कारण पता चल सके। विमान में दो तरह के स्विच होते हैं, यह जान लीजिए एयर इंडिया ड्रीमलाइनर 787-8 टेक-ऑफ के 32 सेकंड बाद एक मेडिकल कॉलेज के परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में दो तरह के स्विच होते हैं। इसमें एक रन स्विच होता है, जो इंजन को चालू रखता है। वहीं, दूसरा कटऑफ स्विच होता है, जिसके दबाते ही इंजन बंद हो जाता है। विमान ने हासिल कर ली थी 100 नॉटिकल मील की स्पीड AAIB की रिपोर्ट के अनुसार, विमान ने 08:08:42 UTC पर अपनी अधिकतम गति 180 समुद्री मील (knots) यानी करीब 185 किलोमीटर प्रति घंटे हासिल कर ली थी।। इसके बाद, इंजन 1 और 2 के लिए ईंधन कटऑफ स्विच एक सेकंड के अंतराल में रन से कटऑफ स्थिति में चले गए। इंजन 1 का ईंधन स्विच 08:08:52 UTC पर कटऑफ से रन पर वापस लाया गया। वहीं, इंजन 2 का स्विच 08:08:56 पर वापस लाया गया। रन से कट ऑफ में दोनों स्विच बदले, यह संभव नहीं रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि एक पायलट ने दूसरे पायलट से पूछा कि उसने इंजन क्यों बंद कर दिया। इसके जवाब में दूसरे पायलट ने कहा कि उसने ऐसा नहीं किया। एक न्यूज चैनल एनडीटीवी से बात करते हुए एक्सपर्ट खालिद ने कहा-मैं एक नया गणितीय आकलन पेश करना चाहता हूं जो उन कहानियों को गलत साबित करता है जो चल रही हैं। 42 सेकंड के टाइमस्टैम्प पर ईंधन स्विच एक सेकंड के भीतर 'रन' से 'कट-ऑफ' में बदल गए। इसका मतलब है कि एक सेकंड के भीतर दोनों स्विच को बंद कर दिए गए। यह असंभव है। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट की कहानी झूठी निकली एक्सपर्ट खालिद ने कहा-फिर कहानी यह है कि दूसरे पायलट ने यह देखा और पूछा-आपने इंजन क्यों बंद कर दिया?' अगर यह सच है, तो मुझे लगता है कि इस कहानी को बताने वाले को अब यह बताना होगा कि उस व्यक्ति ने इस स्विच को वापस चालू करने के लिए 10 सेकंड तक इंतजार क्यों किया। पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों में भी यह नहीं कहा गया है कि दोनों पायलट खुद को मारना चाहते थे। अटकलों की बात छोड़ें, तकनीकी खामी से बंद हुए इंजन खालिद ने बताया कि मुझे लगता है कि एक इलेक्ट्रिकल सिग्नल ने विमान के फ्यूल को बंद कर दिया था। स्विच को उस समय नहीं बदला गया था। शायद उन्हें बाद में तब बदला गया जब पायलट इंजन को फिर से चालू करने की कोशिश कर रहे थे ताकि दुर्घटना से बचा जा सके। मगर, उसे वे रोक नहीं पाए। कैप्टन खालिद का मानना है कि पायलटों ने जानबूझकर इंजन बंद नहीं किए थे। किसी तकनीकी खराबी के कारण इंजन बंद हो गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया को बिना किसी सबूत के अटकलें नहीं लगानी चाहिए। हादसे की असली वजह के लिए ये 5 ब्लाइंड स्पॉट्स फ्यूल स्विच के कटऑफ की कमांड: फ्यूल रन या कटऑफ के लिए थ्रॉटल कंट्रोल बॉक्स यूनिट का डुप्लीकेट टेस्ट कराया जा सकता है, ताकि पता चले कि कटऑफ कमांड इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी का नतीजा थी या इसमें पायलटों का कोई दोष था। पायलटों की आखिरी बातचीत की टाइमलाइन: एक पायलट ने पूछा था कि आपने फ्यूल क्यों बंद किया? दूसरे ने कहा-मैंने नहीं किया। इसे समझने के लिए CVR (कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर), FDR (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) की टाइमलाइन समान होना जरूरी है। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में स्विच की आवाज है या नहीं: फ्यूल कंट्रोल स्विच घुमाने पर एक क्लिकिंग की आवाज आती है, जो CVR के एरिया माइक में दर्ज हो जाती है। अगर आवाज रिकॉर्ड नहीं हुई, तो इससे पता चलता है कि यह मैनुअली नहीं किया गया है। FAA की एडवाइजरी का पालन हुआ था या नहीं: फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने 2018 में फ्यूल स्विच लॉकिंग मैकेनिज्म पर एडवाइजरी दी थी। जांच एजेंसी ने मेंटेनेंस रिकॉर्ड्स, सर्विस बुलेटिन लॉग्स, डीजीसीए से क्लीयरेंस कॉपी मांगी है। इसे नजरअंदाज करना गंभीर संचालन लापरवाही में आएगा। इंजन के वॉल्व खुलने-बंद करने की जांच: किस सेंसर ने क्या संकेत दिया। प्रारंभिक रिपोर्ट में इसका कोई जिक्र नहीं है। बतया जा रहा है कि एएआईबी ने जीई व बोइंग से इन चैनलों का रॉ डेटा मांगा है। यह भी जांचा जाएगा कि 32 सेकेंड में किसी इंजन को फिर से स्टार्ट किया … Read more

भारत की रणनीतिक तैयारी: दौलत बेग ओल्डी तक पहुंचने वाला गुप्त मार्ग लगभग तैयार

दौलत बेग ओल्डी 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुए तनाव के बाद से भारत अपनी सीमा पर बुनियादी ढांचे को तेजी से मजबूत कर रहा है. खासकर लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (DBO) जैसे रणनीतिक इलाकों तक पहुंच को और सुरक्षित करने के लिए भारत एक नई 130 किलोमीटर लंबी सड़क बना रहा है. ये सड़क ससोमा–सासेर ला–सासेर ब्रांग्सा–गपशान–डीबीओ के रास्ते से होकर गुजरती है. इसे बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) बना रहा है. ये नई सड़क न सिर्फ तेज और सुरक्षित है, बल्कि ये चीनी सेना की नजरों से भी बची रहेगी. आइए, समझते हैं कि ये सड़क क्यों इतनी खास है?   क्या है दौलत बेग ओल्डी (DBO) और क्यों है ये इतना जरूरी? दौलत बेग ओल्डी (DBO) भारत का सबसे उत्तरी सैन्य ठिकाना है, जो लद्दाख में कराकोरम पास के पास और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) से सिर्फ 8 किलोमीटर दूर है. ये इलाका सब-सेक्टर नॉर्थ (SSN) का हिस्सा है, जिसमें डेपसांग मैदान और सियाचिन ग्लेशियर जैसे रणनीतिक क्षेत्र आते हैं. DBO में दुनिया का सबसे ऊंचा हवाई पट्टी (एयरस्ट्रिप) है, जो 16614 फीट की ऊंचाई पर है. इसकी मदद से भारतीय सेना को हथियार, रसद और सैनिकों को हवाई रास्ते से पहुंचाने में आसानी होती है.  लेकिन DBO तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता अभी तक दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DSDBO) सड़क था, जो 255 किलोमीटर लंबी है. ये सड़क LAC के बहुत करीब से गुजरती है, जिसकी वजह से ये चीनी सेना (PLA) की निगरानी में रहती है. गलवान घाटी में 2020 के तनाव का एक बड़ा कारण यही DSDBO सड़क थी, क्योंकि चीन को भारत की इस सड़क से अपनी स्थिति पर खतरा महसूस हुआ. इसीलिए भारत ने एक नई वैकल्पिक सड़क बनाने का फैसला किया, जो न सिर्फ सुरक्षित हो, बल्कि तेज भी हो. नई सड़क: ससोमा से DBO तक का रास्ता ये नई 130 किलोमीटर लंबी सड़क ससोमा से शुरू होती है, जो नुब्रा घाटी में सियाचिन बेस कैंप के पास है. ये सड़क सासेर ला (17,660 फीट), सासेर ब्रांग्सा, गपशान और फिर DBO तक जाती है. इसकी खास बातें हैं…     दूरी और समय में कमी: अभी DBO तक पहुंचने में लेह से 322 KM का रास्ता तय करना पड़ता है, जिसमें लगभग 2 दिन लगते हैं. नई सड़क दूरी को 79 KM कम करके 243 KM कर देगी और यात्रा का समय 11-12 घंटे तक सिमट जाएगा.     चीन की नजरों से बचाव: DSDBO सड़क LAC के बहुत करीब है. चीनी सेना इसे आसानी से देख सकती है. नई सड़क का रास्ता ऐसा है कि ये ज्यादातर हिस्सों में चीनी निगरानी से बचा रहेगा, जिससे सैनिकों और हथियारों की आवाजाही सुरक्षित होगी.     भारी हथियारों की ढुलाई: BRO ने इस सड़क पर 9 पुल बनाए हैं, जिन्हें पहले 40 टन वजन सहने के लिए बनाया गया था. अब इन्हें 70 टन की क्षमता तक अपग्रेड किया जा रहा है. इसका मतलब है कि भारी तोपें, जैसे बोफोर्स और टैंक आसानी से DBO तक पहुंच सकेंगे. बोफोर्स तोपों का इस सड़क पर सफल परीक्षण भी हो चुका है.     सियाचिन से सीधी पहुंच: ये सड़क ससोमा से शुरू होती है, जो सियाचिन बेस कैंप के पास है. इससे सियाचिन से DBO तक सीधे सैनिक और हथियार भेजे जा सकेंगे, बिना लेह जाए. कैसे बन रही है ये सड़क? इस सड़क को बनाना कोई आसान काम नहीं है. 17,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर, जहां ऑक्सीजन की कमी और भारी बर्फबारी आम बात है. BRO के 2000 मजदूर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. इस प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांटा गया है…     प्रोजेक्ट विजयक: ससोमा से सासेर ब्रांग्सा तक का हिस्सा, जिसका बजट 300 करोड़ रुपये है. ये हिस्सा पूरी तरह बन चुका है.     प्रोजेक्ट हिमांक: सासेर ब्रांग्सा से DBO तक का हिस्सा, जिसका बजट 200 करोड़ रुपये है. इस हिस्से का 70% काम पूरा हो चुका है. बाकी नवंबर 2026 तक खत्म हो जाएगा. सबसे मुश्किल हिस्सा है सासेर ला पास और श्योक नदी के पास का इलाका. यहां ग्लेशियरों और खड़ी चट्टानों के बीच सड़क बनाना एक बड़ा चैलेंज है. इसके लिए BRO जियोसेल जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है, जो सड़क को मौसम और भारी वजन के लिए मजबूत बनाती हैं. श्योक नदी पर 345 मीटर लंबा एक पुल भी बन रहा है, जिसमें सात खंभों का इस्तेमाल हो रहा है. ऑक्सीजन कैफे और अन्य चुनौतियां इतनी ऊंचाई पर काम करना आसान नहीं. सासेर ला जैसे इलाकों में ऑक्सीजन की कमी से मजदूरों को सांस लेने में दिक्कत होती है. बर्फबारी की वजह से साल में सिर्फ 5-6 महीने ही काम हो सकता है. BRO ने मजदूरों की सुरक्षा और काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए ऑक्सीजन कैफे बनाए हैं. ये छोटे-छोटे स्टेशन हैं, जहां मजदूरों को ऑक्सीजन दी जाती है ताकि वो एल्टीट्यूड सिकनेस से बच सकें. इसके अलावा, सासेर ला में एक 8 किलोमीटर लंबा टनल बनाने की योजना भी है. इसका डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुका है. इस साल काम शुरू हो सकता है. ये टनल 2028 तक बनकर तैयार हो सकता है, जिससे सर्दियों में भी DBO तक पहुंच आसान हो जाएगी. क्यों जरूरी है ये सड़क? 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें दोनों तरफ के सैनिक मारे गए थे. इस तनाव का एक बड़ा कारण था DSDBO सड़क, जो LAC के इतने करीब है कि चीनी सेना इसे आसानी से निशाना बना सकती है. गलवान घाटी और डेपसांग जैसे इलाकों में चीन की PLA ने सड़कें और ठिकाने बनाए हैं, जो भारत के लिए खतरा हैं. नई सड़क के बनने से कई फायदे होंगे…     सुरक्षा: ये सड़क चीनी सेना की नजरों से दूर है, जिससे सैनिकों और हथियारों की आवाजाही गुप्त रहेगी.     तेजी: लेह से DBO तक का समय आधा हो जाएगा, जिससे सैनिक और रसद तेजी से पहुंच सकेंगे.     भारी हथियार: 70 टन की क्षमता वाले पुलों की वजह से टैंक और बोफोर्स जैसे भारी हथियार आसानी से DBO तक पहुंच सकेंगे.     सियाचिन और डेपसांग की सुरक्षा: … Read more

ओबामा की ‘गिरफ्तारी’ का एआई वीडियो वायरल, ट्रंप की पोस्ट से मचा बवाल

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक AI-जनरेटेड वीडियो शेयर किया, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को FBI एजेंट्स द्वारा ओवल ऑफिस में गिरफ्तार करते हुए दिखाया गया है. वीडियो में ओबामा के हाथ को बांधकर उन्हें ट्रंप के कदमों में झुका हुआ दिखाया गया है. AI-जेनरेटेड वीडियो में देखा गया कि ओवल ऑफिस में एक सीट पर राष्ट्रपति ट्रंप बैठे हैं, और दूसरी सीट पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा हैं. वीडियो में ट्रंप को मुस्कुराते दिखाया गया है, और इतने में ही कुछ एफबीआई एजेंट्स आते हैं और ओबामा का हाथ पीछे करके बांध देते हैं. उन्हें ट्रंप के कदमों में झुका दिया जाता है, और इसके बाद उन्हें जेल में डाल दिया जाता है. ट्रंप ने इस वीडियो को "कोई भी कानून के ऊपर नहीं है" कैप्शन के साथ शेयर किया है. जेल में ऑरेंज यूनिफॉर्म में ओबामा, सोशल मीडिया पर विरोध वीडियो के आखिर में ओबामा को जेल की ऑरेंज यूनिफॉर्म में दिखाया गया है, जैसे वे किसी कैदी की तरह जेल में खड़े हों. इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली. कुछ लोगों ने इसे "उकसाने वाला" बताया, जबकि कुछ ने आरोप लगाया कि यह वीडियो लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है, खासकर Epstein फाइल्स से, जिसमें ट्रंप पर Jeffrey Epstein के साथ संबंधों के आरोप हैं. 2016 के चुनाव में ओबामा पर धोखाधड़ी के आरोप कुछ दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने 2016 के चुनाव में ओबामा पर चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाया था. अब इस वीडियो के जरिए ट्रंप ने एक बार फिर ओबामा पर सीधा हमला बोला है. ट्रंप ने इनके अलावा एक क्रिएटिव इमेज शेयर किया है जिसमें पूर्व ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन के नेताओं को दिखाया गया है, जिसमें उन्हों पूछा, "सामन्था पावर ने इतना सारा पैसा कैसे कमाया???" अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गैबार्ड ने आरोप लगाया था कि, "राष्ट्रपति ओबामा और उनकी लीडरशिप टीम में ऐसे लोग थे, जो 2016 में अमेरिकी जनता के फैसले को स्वीकार नहीं कर पाए जब उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को चुना – और इसलिए उन्होंने देशद्रोही साजिश को रची… ताकि एक लंबे समय तक चलने वाला तख्तापलट उस बैठे राष्ट्रपति के खिलाफ शुरू किया जा सके."