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कैंसर अलर्ट: कौन से शहर हैं ‘कैंसर कैपिटल’ और कहाँ बढ़ रहा लंग्स कैंसर का खतरा?

नई दिल्ली हाल ही में एक रिसर्च स्टडी में यह दावा किया गया है कि देश के दक्षिणी राज्यों में कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। JAMA ओपन नेटवर्क में प्रकाशित राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद तो देश भर में स्तन कैंसर की राजधानी के रूप में उभरा है, जहाँ प्रति 100,000 महिलाओं में 54 इस असाध्य रोग के दंश से पीड़ित हैं जो देशभर में सर्वोच्च घटना दर है, जबकि बेंगलुरु का स्थान दूसरे नंबर पर आता है, जहां एक लाख महिलाओं में औसतन 46.7 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की मार झेल रही हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण भारत के महानगर न केवल ओवरऑल कैंसर संकट का सामना कर रहे हैं, बल्कि वहां विशिष्ट प्रकार का कैंसर महामारी के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट में इस पर कंट्रोल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया गया है। स्तन कैंसर के मामले में टॉप पर साउथ के शहर वर्ष 2015 से 2019 के दौरान देशभर में 43 जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों (PBCR) को कवर करने वाले इस स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक स्तन कैंसर दर वाले शीर्ष छह क्षेत्रों में से चार दक्षिण भारत के हैं। इनमें चेन्नई क्षेत्र में प्रति 100,000 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की दर 45.4 है, जबकि केरल के अलाप्पुझा और तिरुवनंतपुरम में यह क्रमशः 42.2 और 40.7 है। यह पैटर्न दक्षिण भारत, विशेषकर इसके शहरी केंद्रों को भारत में स्तन कैंसर महामारी का केंद्र बनाता है। 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर 238,085 महिलाओं के स्तन कैंसर से प्रभावित होने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन गया है। रिसर्च स्टडी के आंकड़ों से पता चलता है कि स्तन कैंसर दक्षिण भारतीय शहरों में तेजी से और व्यापक पैमाने पर पसरा है, जबकि देश के अन्य क्षेत्रों में दूसरे किस्म के कैंसर के मामले बढ़े हैं। रिपोर्ट में इन कैंसर मामलों के बढ़ने के पीछे विशिष्ट स्थानीय कारकों की ओर भी इशारा किया गया है। लंग्स कैंसर पर क्या रिपोर्ट? इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्तन कैंसर के मामले में जहां दक्षिण भारतीय शहर आगे हैं, वहीं फेफड़ों के कैंसर के मामले में पूर्वोत्तर के राज्य आगे हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि फेफड़ों के कैंसर के मामलों में मणिपुर की राजधानी आइज़ोल में प्रति 100,000 महिलाओं में 33.7 इससे ग्रसित हैं जबकि इस राज्य का औसत दर 24.8 दर्ज किया गया है। हालांकि, दक्षिण भारतीय शहरों में भी लंग्स कैंसर की स्थिति चिंताजनक दिखाई देती हैं, जहाँ हैदराबाद में प्रति 100,000 पर 6.8 और बेंगलुरु में प्रति 100,000 में 6.2 केस दर्ज किए गए हैं। ओरल कैंसर के मामले में कौन सा शहर आगे? पुरुष फेफड़ों के कैंसर के पैटर्न के मामले में दक्षिण भारत में केरल सबसे आगे है, जहाँ को कई जिलों में यह दर बेहद ऊँची हैं। धरती पर का स्वर्ग कहलाने वाले कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में भी लंग्स कैंसर के मामले में उच्चतम दर (39.5 प्रति 100,000) पर हैं, जबकि केरल के जिले उसके बाद के स्थान पर हैं। केरल के कन्नूर में यह दर 35.4, मालाबार में 32.5, कासरगोड में 26.6, अलप्पुझा में 25.3 और कोल्लम में प्रति 100,000 पर 24.2 है।ओरल कैंसर के मामलों में भी हैदराबाद, बेंगलुरु सबसे आगे है, जबकि अहमदाबाद इस मामले में सबसे ऊपर है।  

MEA ने अर्थशास्त्री को कहा पागल, X हैंडल सस्पेंड; भारत तोड़ने का सपना हुआ वायरल

नई दिल्ली  भारत सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए ऑस्ट्रियाई अर्थशास्त्री गुंथर फेहलिंगर याह्न का सोशल मीडिया अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया है। फेहलिंगर याह्न ने हाल ही में एक विवादित पोस्ट किया था। उन्होंने भारत को तोड़ने की अपील की थी। साथ ही खालिस्तान का नक्शा भी शेयर किया था। उन्होंने लिखा था, “मैं भारत को खत्म कर ‘ExIndia’ बनाने का आह्वान करता हूं। नरेंद्र मोदी रूस के आदमी हैं। हमें खालिस्तान की स्वतंत्रता के लिए मित्रों की जरूरत है।” गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस पोस्ट को गंभीर मानते हुए एक्स को निर्देश दिया कि संबंधित अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया जाए। इसके बाद भारत में यह अकाउंट डिसेबल कर दिया गया। गुंथर फेहलिंगर याह्न ऑस्ट्रियन कमेटी फॉर NATO मेंबरशिप ऑफ यूक्रेन, कोसोवो, बोस्निया और ऑस्ट्रिया के अध्यक्ष हैं। वे दक्षिण बाल्कन्स के रीजनल इकोनॉमिक इंटीग्रेशन एक्शन ग्रुप के बोर्ड सदस्य भी हैं। ऑस्ट्रियाई अर्थशास्त्री गुंथर फेहलिंगर याह्न का सोशल मीडिया अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। जब विदेश मंत्रालय से पूछा गया कि क्या इस मुद्दे को वियना स्थित ऑस्ट्रियाई सरकार के समक्ष उठाया जाएगा तो एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “उन्हें इतनी अहमियत क्यों दी जाए? वह एक पागल व्यक्ति है। कोई आधिकारिक पद पर नहीं हैं।” फेहलिंगर याह्न के पोस्ट के बाद भारतीय यूजर्स ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने इसे भारत की संप्रभुता और एकता पर हमला बताया। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2024 में ऑस्ट्रिया का ऐतिहासिक दौरा किया था। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 41 वर्षों बाद पहली यात्रा थी। भारत-ऑस्ट्रिया के 75 साल पुराने राजनयिक संबंधों की वर्षगांठ पर वह पहुंचे थे।  

पाकिस्तान नहीं, भारत पर फोकस जरूरी; ट्रंप को समझाया पूर्व US अधिकारियों ने

वाशिंगटन  भारत और अमेरिका के बीच संबंध इस समय अभूतपूर्व तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर भारी टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता ठप हो गई है। इस बीच बाइडेन प्रशासन के दौर के पूर्व शीर्ष अमेरिकी अधिकारी- पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन और पूर्व उप-विदेश सचिव कर्ट एम. कैंपबेल ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो वॉशिंगटन एक अहम रणनीतिक साझेदार खो सकता है और चीन को इनोवेशन के क्षेत्र में बढ़त मिल सकती है। उन्होंने ये भी चेतावनी दी कि भारत की तुलना पाकिस्तान के साथ नहीं की जानी चाहिए क्योंकि भारत कहीं ज्यादा जरूरी है। विदेश नीति पर लेख में जताई चिंता ‘फॉरेन अफेयर्स’ मैग्जीन में लिखे अपने संयुक्त संपादकीय में सुलिवन और कैंपबेल ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी को लंबे समय से द्विदलीय समर्थन मिला है और इस रिश्ते ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की “लापरवाह आक्रामकता” को हतोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अमेरिकी सहयोगियों से कहा कि वे भारत को समझाएं कि “राष्ट्रपति ट्रंप की नाटकीय बयानबाजी में अक्सर किसी सौदेबाजी की भूमिका होती है।” भारत को ‘प्रतिद्वंद्वियों की ओर धकेलने’ का खतरा दोनों पूर्व अधिकारियों ने लिखा कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों- 50% तक टैरिफ, रूस से तेल खरीद और पाकिस्तान पर बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के रिश्तों में तेज गिरावट ला दी है। हाल में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो अमेरिका, भारत को प्रतिद्वंद्वियों की ओर धकेल देगा। पाकिस्तान नीति को भारत से अलग रखने की सलाह सुलिवन और कैंपबेल ने अमेरिका को सलाह दी कि वह अपनी विदेश नीति में “भारत-पाकिस्तान” की एक साथ तुलना न करे। उनका कहना था कि पाकिस्तान के साथ आतंकवाद से निपटने और परमाणु हथियार प्रसार को रोकने जैसी अहम चिंताएं हैं, लेकिन ये भारत से जुड़े बहुआयामी और दीर्घकालिक हितों के मुकाबले कहीं कम महत्व रखती हैं। अमेरिका-पाकिस्तान में नजदीकी और भारत पर टैरिफ ट्रंप हाल ही में भारत-पाकिस्तान संघर्ष में संघर्षविराम का श्रेय लेते दिखे थे, जबकि भारत ने इसका खंडन किया था। इसके बाद पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर का वाइट हाउस में स्वागत किया गया और अमेरिका ने पाकिस्तान को व्यापार, आर्थिक विकास और क्रिप्टोकरेंसी सहयोग का आश्वासन दिया। कुछ दिनों बाद ही अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ तेल समझौते की घोषणा की और उसी समय भारत के सामान पर 25% तक का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया। नई रणनीतिक संधि का प्रस्ताव सुलिवन और कैंपबेल ने दावा किया कि भारत-अमेरिका के बीच नई रणनीतिक साझेदारी एक संधि के रूप में होनी चाहिए, जिसे अमेरिकी सीनेट की मंजूरी मिले। यह संधि पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी और इसका लक्ष्य दोनों देशों की सुरक्षा, समृद्धि और साझा मूल्यों को मजबूत करना होगा। तकनीकी साझेदारी पर जोर उन्होंने सुझाव दिया कि भारत और अमेरिका को 10 वर्षीय कार्ययोजना पर सहमत होना चाहिए, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में तकनीकी साझेदारी शामिल हो। इसका उद्देश्य साझा तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना होगा, ताकि अमेरिका और उसके लोकतांत्रिक सहयोगी चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों को नवाचार के क्षेत्र में बढ़त न लेने दें। संपादकीय में कहा गया है कि दोनों देशों को “प्रमोट” एजेंडा (साझा निवेश, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा साझेदारी) और “प्रोटेक्ट” एजेंडा (निर्यात नियंत्रण और साइबर सुरक्षा सहयोग) दोनों पर मिलकर काम करना होगा।   रणनीतिक साझेदारी का महत्व पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने याद दिलाया कि भारत पिछले एक पीढ़ी से अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार बनकर उभरा है। उन्होंने भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते (जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और मनमोहन सिंह के बीच) और बाइडेन-मोदी के बीच एआई, जैव प्रौद्योगिकी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने तर्क दिया कि भारत के साथ साझेदारी ने "इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के लापरवाह हरकतों को प्रभावी ढंग से हतोत्साहित किया है।"  

ट्रंप का टिम कुक से दो-टूक सवाल, मेहमानों से जानना चाहा इन्वेस्टमेंट प्लान

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलेनिया ने व्हाइट हाउस में टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों को खाने पर बुलाया. ट्रंप ने इस दावत को हाई आईक्यू लोगों का जमावड़ा कहा. इस दावत में खाने के साथ-साथ पॉलिटिक्स, इकोनॉमी, निवेश और नौकरियों पर चर्चा हुई.  डिनर के दौरान ट्रंप ने टेक कंपनियों के मालिकों और सीईओ से पूछा कि वे अमेरिका में कितना निवेश कर रहे हैं.  ट्रंप के दाहिनी ओर बैठे मेटा के मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि वे अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रहे हैं. इसके बाद ट्रंप ऐपल के सीईओ टिम कूक की ओर मुखातिब हुए. उन्होंने टिम कूक से पूछा, "और टिम… ऐपल अमेरिका में कितना पैसा लगाएगा? क्योंकि मुझे पता है कि यह बहुत ज़्यादा होने वाला है. और आप जानते ही हैं, आप कहीं और थे, और अब आप सचमुच बड़े पैमाने पर वापस लौट रहे हैं. आप कितना पैसा लगाएंगे?" ट्रंप ने टिम कुक से पूछा, “टिम, आप अमेरिका में कितने पैसे निवेश करने जा रहे हैं? मुझे पता है यह बहुत बड़ी रकम है। आप पहले कहीं और थे, अब आप बड़े पैमाने पर घर लौट रहे हैं। कितना निवेश होगा?” कुक ने जवाब दिया, “600 अरब डॉलर।” साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों की तारीफ करते हुए कहा, “मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने ऐसा माहौल बनाया जिससे हम अमेरिका में बड़ा निवेश कर सकें। यह आपकी नेतृत्व क्षमता और नवाचार पर ध्यान को दर्शाता है।” भारत पर ट्रंप की आपत्ति हाल ही में ट्रंप ने टिम कुक से नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्हें एप्पल का भारत में प्रोडक्शन बढ़ाना पसंद नहीं है। ट्रंप ने कहा, “मैंने टिम कुक से कहा, मेरे दोस्त, मैंने तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार किया है। अब तुम यहां 500 अरब डॉलर का निवेश करने आ रहे हो, लेकिन सुन रहा हूं कि तुम भारत में भी निर्माण कर रहे हो। मैं नहीं चाहता कि तुम भारत में बनाओ।” एप्पल ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाना शुरू किया है। कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में दुनिया भर में बिकने वाले 25 प्रतिशत iPhone भारत में बने। भारत में 6 करोड़ आईफोन बनाने की योजना टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल भारत में अपनी उत्पादन क्षमता को 4 करोड़ यूनिट्स से बढ़ाकर 6 करोड़ यूनिट्स करने के लिए करीब 2.5 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। ट्रंप ने Meta प्रमुख जुकरबर्ग से भी यही सवाल किया, जिस पर उन्होंने कहा, “600 अरब डॉलर।” Google के सुंदर पिचाई ने जवाब दिया, “हम 100 अरब डॉलर से ऊपर हैं। अगले दो वर्षों में यह 250 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।” Microsoft प्रमुख सत्या नडेला ने कहा, “इस साल अमेरिका में हम करीब 75 से 80 अरब डॉलर निवेश करेंगे।” ट्रंप ने सभी की सराहना करते हुए कहा, “बहुत बढ़िया, हम आप पर गर्व करते हैं। बहुत सारी नौकरियां आएंगी।” इस पर टिक कूक ने कहा कि वे अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रहे हैं.  ट्रंप ने आगे कहा- 600 अरब डॉलर, बढ़िया है, बहुत सारी नौकरियां आएंगी. हमें ऐसा करके बहुत गर्व महससू होगा. आपका बहुत धन्यवाद, मैं इसकी सराहना करता हूं.  इसके बाद ट्रंप गूगल के सुंदर पिचाई से बात की और उनसे पूछा कि वे कितना पैसा अमेरिका में लगा रहे हैं.  सुंदर पिचाई ने कहा, "हम 100 बिलियन डॉलर से काफी ऊपर हैं. अगले दो वर्षों में अमेरिका में यह 250 बिलियन डॉलर हो जाएगा." इस पर ट्रंप ने कहा, "यह बहुत बढ़िया है, यह बहुत बढ़िया है. हमें आप पर गर्व है. शुक्रिया, ढेर सारी नौकरियां." फिर अमेरिकी राष्ट्रपति ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला से पूछा कि उनकी कंपनी कितना पैसा अमेरिका में लगा रही है.  अमेरिका के लिए अपना निवेश प्लान बताते हुए सत्या ने कहा कि इस साल हम संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 75 से 80 अरब डॉलर के करीब निवेश करेंगे. ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को भी थैंक्यू कहा. व्हाइट हाइस के स्टेट डाइनिंग रूम में जमी टेक दिग्गजों की इस मीटिंग का सबसे हैरान करने वाला पहलू था- इस डिनर से दुनिया के सबसे अमीर और टेक दुनिया के टायकून एलॉन मस्क का गायब रहना. कभी ट्रंप के खास मित्रों में शामिल रहने वाले एलॉन मस्क और डोनाल्ड के संबंध अब बिगड़ गए हैं और दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते.  इस डिनर में ट्रंप ने मस्क के विरोधी और टेक दुनिया के दूसरे बड़े बिजनेसमैन ओपन एआई के सीईओ सैम अल्टमैन को बुलाया और उन्हें काफी तरजीह दी.  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्हाइट हाउस में आयोजित टेक डिनर में भारतीय मूल के सीईओ का जलवा रहा. इनमें माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ के सत्या नडेला, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोन टेक्नोलॉजीज के सीईओ संजय मेहरोत्रा, TIBCO के चेयरमैन और पैलंटिर के सीटीओ श्याम शंकर शामिल थे.   

26/11 से भी बड़े हमले की धमकी, मुंबई में 14 आतंकी और भारी मात्रा में RDX की इनपुट

मुंबई  मुंबई को एक बार फिर से बम से उड़ाने की धमकी मिली है. इस बार सुसाइड बॉम्बिंग यानी ह्यूमन बम ब्लास्ट की धमकी भेजी गई है. यह धमकी भरा मैसेज मुंबई पुलिस की ट्रैफिक पुलिस के व्हाट्सएप नंबर पर भेजा गया है. अनंत चतुर्दशी के मौके पर धमकी मिलने से पुलिस सतर्क हो गई है. मेसेज में दावा किया गया है कि 34 गाड़ियों में ह्यूमन बॉम्ब लगाए गए हैं और विस्फोट के बाद पूरा मुंबई शहर हिल जाएगा. धमकी में 'लश्कर-ए-जिहादी' नामक संगठन का उल्लेख है. साथ ही, इसमें यह भी दावा किया गया है कि 14 पाकिस्तानी आतंकवादी भारत में घुस चुके हैं.  400 किलो RDX ब्लास्ट की धमकी मैसेज में कहा गया है कि 400 किलो आरडीएक्स के विस्फोट से 1 करोड़ लोगों की जान जाएगी. मुंबई पुलिस इस धमकी को लेकर हाई अलर्ट पर है.  पहली बार नहीं मिली मुंबई को धमकी यह पहली बार नहीं है जब मुंबई को मास लेवल पर बम से उड़ाने की धमकी दी गई है. इससे पहले भी कई बार पुलिस कंट्रोल रूम में कॉल के जरिए या फिर पुलिस के नंबर पर मैसेज के जरिेए ऐसी धमकियां दी जा चुकी हैं. हालांकि, इस बार धमकी बेहद गंभीर है और इसमें लाखों लोगों को टारगेट बनाने की बात कही गई है.  आज से करीब दो हफ्ते पहले, वारली के फोर सीजन होटल में ब्लास्ट की वॉर्निंग दी गई थी. इससे पहले 14 अगस्त को पुलिस को फोन कर के कहा गया था कि एक ट्रेन में धमाका होने वाला है. यह कहते ही कॉलर ने फोन काट दिया था. न समय और न ही लोकेशन की जानकारी दी गई थी. हालांकि, पुलिस ने गंभीरता से जांच की थी और उन्हें कुछ संदिग्ध नहीं मिला था. छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को भी उड़ाने की मिल चुकी है धमकी मुंबई को दहला देने की एक और धमकी 26 जुलाई को आई थी, जिससे हड़कंप मच गया था. कहा गया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) को बम से उड़ा दिया जाएगा. धमकी देने वाले ने स्पष्ट रूप से कहा था कि स्टेशन पर बम रखा जाएगा, जिससे यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है. पुलिस ने इस दौरान भी जांच में कुछ संदिग्ध नहीं पाया था.  

मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक: नवरात्रि में GST रिलीफ, दिवाली से पहले मिला फायदा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 22 सितंबर से लागू होने वाले GST दरों में बड़े कटौती के फैसले को अर्थशास्त्री और राजनीतिक पर्यवेक्षक दोनों ही अहम मान रहे हैं. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की एक ऐसी पहल बताया जा रहा है जो न सिर्फ उपभोग और सार्वजनिक खर्च को बढ़ावा देगी, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी के लिए बड़ा तोहफा भी साबित होगी. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस बार त्योहारों के मौसम में उपभोक्ता खर्च रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है. जीएसटी कटौती नवरात्रि के पहले दिन यानी 22 सितंबर से लागू होगी, जो दिवाली (20 अक्टूबर) से लगभग एक महीने पहले है. इससे उपभोक्ता खरीदारी को टालने की बजाय बढ़ाएंगे. बजट में नए टैक्स सिस्टम के तहत दी गई इनकम टैक्स राहत के बाद यह सरकार की तरफ से आम जनता के लिए इस साल का दूसरा बड़ा तोहफा है. चार राज्‍यों में विधानसभा चुनाव बीजेपी आगामी बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु चुनावों में इस कदम को अपने प्रचार अभियान का अहम हिस्सा बनाने जा रही है. पार्टी इस बात पर जोर देगी कि मोदी सरकार ने आम जनता की जेब में ज्यादा पैसा छोड़ा है और उनकी क्रय शक्ति को बढ़ाया है. सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में जीएसटी दरों के सरलीकरण को दिवाली गिफ्ट बताया था, लेकिन सरकार जानती थी कि अगर ये कटौती दिवाली के ठीक पहले की जाती तो उपभोक्ता खरीदारी को टाल सकते थे. इसलिए इसे समय से पहले लागू करने का फैसला किया गया. आमलोगों को सीधा राहत नई दरों के तहत रोजमर्रा की जरूरत की ज्यादातर वस्तुओं पर जीएसटी को घटाकर या तो 5% कर दिया गया है या शून्य. मेडिकल और जीवन बीमा पॉलिसी पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा. साथ ही जीवन रक्षक दवाओं और अधिकांश दवाओं पर कर दरें कम कर दी गई हैं. इससे आम आदमी को सीधी राहत मिलेगी. UPA पर हमला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपीए सरकार जीएसटी लागू नहीं कर पाई थी क्योंकि राज्यों को केंद्र पर भरोसा नहीं था. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस को तय करना होगा कि उसे इस कटौती का समर्थन करना है या विरोध. अगर वे विरोध करते हैं, तो जनता के सामने उनकी असलियत सामने आ जाएगी.’ बीजेपी को उम्मीद है कि कांग्रेस की आलोचना उसे जनता की नजर में ‘एंटी-पब्लिक’ साबित करेगी, जबकि मोदी सरकार का यह कदम चुनावी मैदान में पार्टी के लिए सकारात्मक माहौल बनाएगा.

न्यायपालिका में नया इतिहास: 2027 में भारत को मिलेगी पहली महिला CJI, 8 साल में 8 बदलाव

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट को 2033 तक यानी अगले आठ साल में आठ चीफ जस्टिस मिलेंगे. इनके कार्यकाल 36 दिन से लेकर करीब सवा दो साल तक के होंगे.मौजूदा चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई के 23 नवंबर 2025 को रिटायर होने के बाद जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट का नेतृत्व 9 फरवरी 2027 तक करेंगे. इसके बाद 10 फरवरी से 23 सितंबर तक जस्टिस विक्रम नाथ और 24 सितंबर 2027 से लेकर 29 अक्तूबर 2027 तक की 36 दिनों की अवधि में जस्टिस बीवी नागरत्ना देश की पहली महिला चीफ जस्टिस के तौर पर कार्यभार संभालेंगी. वो पूर्व चीफ जस्टिस इंगलगुप्पे सीतारमैया वेंकटरमैया की बेटी हैं. इसके साथ ही पिता और बेटी के देश के चीफ जस्टिस की कुर्सी संभालने का कीर्तिमान भी बनेगा. अब तक सिर्फ पिता और बेटे के रूप में सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस बनने का रिकॉर्ड जस्टिस यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ और उनके बेटे जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ का है.  इसके बाद अगले सात महीने यानी 30 अक्टूबर 2027 से 2 मई 28 तक जस्टिस पामिदीघंटम श्री नरसिम्हा चीफ जस्टिस बनेंगे. वो जस्टिस एस एम सीकरी और जस्टिस उदय उमेश ललित के बाद वकालत के पेशे से सीधे सुप्रीम कोर्ट जज बनकर चीफ जस्टिस की कुर्सी संभालने वाले तीसरी हस्ती होंगे.  जस्टिस नरसिम्हा के बाद 2028 में 3 मई को चीफ जस्टिस पद की शपथ लेंगे जस्टिस जमशेद बुर्जोर पारदीवाला. जस्टिस पारदीवाला का कार्यकाल कई दशकों में सबसे बड़ा होगा. वो जस्टिस चंद्रचूड़ से भी अधिक समय तक यानी दो साल तीन महीने सात दिन देश के चीफ जस्टिस रहेंगे. जस्टिस पारदीवाला के 11 अगस्त 2030 को रिटायरमेंट के बाद 12 अगस्त 2030 को जस्टिस केवी विश्वनाथन चीफ जस्टिस बनेंगे. जस्टिस विश्वनाथन सवा नौ महीने यानी 25 मई 2031तक इस पद पर रहेंगे. जस्टिस विश्वनाथन वकालत के पेशे से सीधे सुप्रीम कोर्ट जज बनकर चीफ जस्टिस बनने वाले चौथे शख्स होंगे. इसके बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची 26 मई 2031 से दो अक्टूबर 2031 तक यानी चार महीने से कुछ अधिक देश के चीफ जस्टिस बनेंगे. इनके बाद तीन अक्टूबर 2031 को जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली देश की सर्वोच्च न्यायपालिका की कमान संभालेंगे. जस्टिस पंचोली 27 मई 2033 तक यानी करीब दो साल 19 महीने से अधिक इस पद पर रहेंगे.

देश को जल्द मिलेगा दमदार LCA Mk1A, HAL अक्टूबर में करने जा रहा पहली डिलीवरी

नई दिल्ली भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल हो गया है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अक्टूबर 2025 में पहले दो LCA Mk1A विमानों की डिलीवरी देने जा रहा है. अमेरिका से इंजन डिलीवरी में देरी के बावजूद HAL ने गति बनाए रखी है. यह विमान भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत बढ़ाएगा. LCA Mk1A क्या है? स्वदेशी लड़ाकू विमान का महत्व LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) Mk1A तेजस का उन्नत संस्करण है, जो 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल फाइटर जेट है. यह स्वदेशी तकनीक से बना है, जिसमें AESA रडार, बेहतर एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की क्षमता है.  तेजस Mk1A MiG-21 जैसे पुराने विमानों की जगह लेगा, जो IAF की स्क्वाड्रन ताकत को मजबूत करेगा. 2021 में 83 विमानों का 48000 करोड़ रुपये का सौदा हुआ, जिसमें 73 फाइटर और 10 ट्रेनर शामिल हैं. स्वदेशीकरण 50% से बढ़कर 60% हो जाएगा. यह विमान हाई-थ्रेट एयर एनवायरनमेंट में काम कर सकता है, स्पीड मैक 1.8 और रेंज 1500 किमी. इंजन देरी की समस्या: अमेरिका से F404 का इंतजार मुख्य देरी GE F404-IN20 इंजनों की थी, जो अमेरिका से आते हैं. HAL ने 2021 में GE के साथ 99 इंजनों का 5,375 करोड़ का सौदा किया था. पहला इंजन अप्रैल 2025 में आया, दूसरा जुलाई में, लेकिन सप्लाई चेन की समस्या से देरी हुई. इस महीने दो और इंजन आने हैं और साल के अंत तक 12. GE ने 2026 से 20 इंजन सालाना देने का वादा किया है. देरी के कारण पहली डिलीवरी मार्च 2024 से खिसक गई, लेकिन अब HAL ने बैकअप प्लान से यूज्ड इंजनों का इस्तेमाल किया. 10 F414 इंजन (Mk2 के लिए) पहले ही आ चुके हैं. पहली डिलीवरी की तैयारी: 10 विमान तैयार HAL के स्रोतों के अनुसार, 10 विमान पहले ही बनाए और टेस्ट हो चुके हैं. नासिक प्लांट से पहला विमान तैयार है, जो अक्टूबर में हैंडओवर होगा. HAL ने नासिक में तीसरी प्रोडक्शन लाइन शुरू की, जो सालाना 24 विमान बना सकती है. बेंगलुरु में दो लाइनें हैं. कुल 83 विमान अब 2029 तक मिलेंगे, चार तिमाही की देरी के बाद. HAL चीफ डीके सुनील ने कहा कि प्रोडक्शन फर्म फुटिंग पर है.  हथियार एकीकरण परीक्षण: सफलता की कहानी LCA Mk1A ने Astra और ASRAAM मिसाइलों का सफल परीक्षण किया. यह BVRAAM (बियॉन्ड विजुअल रेंज) मिसाइलों के साथ काम करेगा. विमान में Uttam AESA रडार, EW सिस्टम और BVR मिसाइलें हैं.   अतिरिक्त सौदा और भविष्य की योजनाएं 97 और Mk1A के लिए 62,000 करोड़ का सौदा CCS ने मंजूर किया है. कॉस्ट नेगोशिएशन पूरा हो चुका है. साइनिंग इस महीने होगी. कुल 180 विमान 2031-32 तक. Mk2 का रोलआउट 2027 में, पहली उड़ान 2026. HAL 15 अपग्रेडेड Su-30MKI पर काम कर रहा है. ALH फ्लीट की जांच इस महीने खत्म. LCA Mk1A की पहली डिलीवरी इंजन देरी के बावजूद अक्टूबर में होना 'आत्मनिर्भर भारत' की जीत है. HAL की क्षमता बढ़ रही है, जो IAF को मजबूत बनाएगी. लेकिन समय पर डिलीवरी जरूरी है.

नेपाल ने लगाया सोशल मीडिया प्रतिबंध, फेसबुक और एक्स समेत 26 प्लेटफॉर्म हुए बंद

नई दिल्ली नेपाल में फेसबुक, व्हाट्सएस और एक्स समेत 26 सोशल मीडिया साइट्स पर बैन लगाने का फैसला किया गया है। नेपाल की सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। खबर के मुताबिक, नेपाल ने सभी सोशल मीडिया कंपनियों को रजिस्टर करने के लिए अल्टीमेटम दिया था। इसके बावजूद कंपनियों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। डेडलाइन पूरी होने के बाद सरकार ने इन्हें बैन करने का फैसला किया है। टिकटॉक ने कर लिया था रजिस्टर गुरुवार को हुई बैठक में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, मंत्रालय के अधिकारियों, नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, दूरसंचार ऑपरेटरों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं ने भाग लिया। इस बैठक में यह निर्णय लिया कि सभी अपंजीकृत प्लेटफॉर्म्स पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। अभी नेपाल में वाइबर, टिकटॉक, वीटॉक और निंबज़ जैसे प्लेटफॉर्म पंजीकृत हैं, जबकि टेलीग्राम और ग्लोबल डायरी का मामला प्रोसेस में हैं। फेसबुक, ट्विटर (एक्स) और व्हाट्सएप जैसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले प्लेटफॉर्म ने अभी तक पंजीकरण शुरू नहीं किया है। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध पूरे देश में लागू होगा। ये प्लेटफॉर्म हो गए बैन दरअसल नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में घरेलू या विदेशी मूल के ऑनलाइन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अनिवार्य रूप से सूचीबद्ध करने और अवांछित सामग्री का मूल्यांकन और निगरानी करने को कहा था। इसके बाद कैबिनेट ने 7 दिन का अल्टीमेटम जारी किया था। फेसबुक, मैसेंजर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप, ट्विटर, लिंक्डइन, स्नैपचैट, रेडिट, डिस्कॉर्ड, पिंटरेस्ट, सिग्नल, थ्रेड्स, वीचैट, क्वोरा, टम्बलर सहित अन्य सभी प्रमुख सोशल मीडिया और संचार प्लेटफॉर्म क्लबहाउस, रंबल, एमआई वीडियो, एमआई वाइके, लाइन, इमो, जालो, सोल और हमरो पैट्रो जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लागू होगा।  

टावर चोरी का खुलासा: गिरोह ने रेडियो यूनिट चोरी कर भेजी हांगकांग

नई दिल्ली मोबाइल टावर उपकरणों की चोरी व अवैध निर्यात करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ कर क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार है। इनके कब्जे से 30 महंगी रिमोट रेडियो यूनिट बरामद की गई है। इनकी गिरफ्तारी से पुलिस ने दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दर्ज रिमोट रेडियो यूनिट चोरी के 16 मामले सुलझाने का दावा किया है। चोरी में राजस्थान के एक मोबाइल टावर इंस्टालेशन ठेकेदार की संलिप्तता का पता चला है। यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय कोरियर कंपनियों के जरिये हांगकांग और फिर चीन तक उपकरणों की तस्करी कर रहा है। वहां रिमोट रेडियो यूनिट ऊंचे दामों पर बिक जाता है। डीसीपी विक्रम सिंह के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम जाहिद (जाफराबाद), चंद्रकांत उर्फ अतुल (नांगल राय,दिल्ली) व समीर उर्फ मोहम्मद आफताब (मेटियाब्रुज, कोलकाता) है। रिमोट रेडियो यूनिट, जिसे रिमोट रेडियो हेड के नाम से भी जाना जाता है। यह मोबाइल टावर का एक महत्वपूर्ण उपकरण होता है। यह डिवाइस वायरलेस नेटवर्क और मोबाइल उपकरणों को जोड़ने का काम करता है। देश में रिमोट रेडियो यूनिट की चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं। चोरी के लिए चोर नए-नए तरीके अपना रहे हैं। क्राइम ब्रांच को सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर गुरमीत की टीम ने इस संगठित गिरोह का तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ में अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पता चला। जाहिद और चंद्रकांत की निशानदेही पर चोरी के 10 रिमोट रेडियो यूनिट बरामद हुए। इनमें दो रिमोट रेडियो यूनिट दिल्ली, आंध्र प्रदेश व तीन राजस्थान से चोरी के पाए गए। दोनों से पूछताछ के बाद समीर को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी निशानदेही पर शिपिंग लाइन प्राइवेट लिमिटेड, महिपालपुर से चोरी के 20 रिमोट रेडियो यूनिट बरामद किए गए। यह खेप हांगकांग भेजने की तैयारी में थी। पूछताछ में उसने बताया कि चोरी किए गए उपकरणों को कार्गो के माध्यम से हांगकांग भेजा जाता है, वहां से चीन में तस्करी की जाती है। वहां उपकरण ऊंचे दामों पर बिक जाता है। इससे पूछताछ में गिरोह में राजस्थान के एक मोबाइल टावर इंस्टालेशन ठेकेदार के शामिल होने का पता चला। जिसके बाद सीकर और जयपुर में भी छापेमारी की। मोबाइल टावर इंस्टालेशन ठेकेदार और उसके स्टाफ को इन उपकरणों की इंस्टालेशन और हटाने की तकनीकी जानकारी है। जिससे चोरी के बाद राजस्थान रोडवेज बस सेवाओं के जरिये उपकरणों को दिल्ली लाया जाता था। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें कार्गो एजेंट्स के माध्यम से हांगकांग भेजा जाता था, जहां दस्तावेजों में उन्हें "एम्प्लीफायर" के नाम से दर्ज किया जाता था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय कोरियर कंपनियों के जरिए हांगकांग और फिर चीन तक तस्करी की जाती थी।