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पीएम मोदी बोले- कांग्रेस ने बढ़ाया बजट, हमने घटाया; दिवाली से पहले खुशियों की खबर

नई दिल्ली जीएसटी में हुए सुधार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (04 सितंबर, 2025) को कहा कि अगर भारत को वैश्विक स्थिति में उचित स्थान दिलाना है तो समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है। जीएसटी रिफॉर्म्स पर पीएम मोदी ने कहा, "समय पर बदलाव के बिना, हम अपने देश को आज की वैश्विक स्थिति में उसका उचित स्थान नहीं दिला सकते। मैंने इस बार 15 अगस्त को लाल किले से कहा था कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अगली पीढ़ी के सुधार करना बेहद जरूरी है। मैंने देशवासियों से यह वादा भी किया था कि इस दिवाली और छठ पूजा से पहले खुशियों की दोहरी बौछार होगी।" 'जीएसटी हो गया और भी सरल' पीएम मोदी ने कहा, "अब जीएसटी और भी सरल हो गया है। 22 सितंबर को, जो कि नवरात्रि का पहला दिन है, अगली पीढ़ी का सुधार लागू हो जाएगा क्योंकि ये सभी चीजें निश्चित रूप से 'मातृशक्ति' से संबंधित हैं।"

भारत ने ब्रह्मोस से किया था नूर खान एयरबेस पर हमला, अब मरम्मत का काम शुरू

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान स्थिति से उबरने की कोशिश कर रहा है। उसने नूर खान एअरबेस की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इस बात का खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए हुआ। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि नूर खान एअरबेस पर मरम्मत का काम चल रहा है। इस्लामाबाद से 25 किमी. से भी कम दूरी पर स्थित नूर खान एअरबेस पाकिस्तान वायुसेना की प्रमुख सुविधाओं और रणनीतिक उपकरणों का प्रमुख अड्डा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नूर खान एअरबेस को पहुंचा था काफी नुकसान 10 मई, 2025 को भारत ने मिसाइल से हमला किया था और इसे पाकिस्तान का डिफेंस सिस्टम रोकने में नाकाम साबित हुआ। इस हमले में एअरबेस को काफी नुकसान पहुंचा था और एक ड्रोन कमांड सेंटर तो पूरी तरह से तबाह हो गया। भारत ने किया था ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल हालाँकि भारत ने कभी पुष्टि नहीं की है कि उसने हमले में कौन सी मिसाइलों का इस्तेमाल किया, लेकिन इस बात की प्रबल संभावना है कि नूर खान स्थित प्रतिष्ठान को ब्रह्मोस या SCALP एअर-लॉन्च्ड लैंड अटैक मिसाइलों या दोनों से नष्ट किया गया हो। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, ब्रह्मोस को भारतीय वायु सेना के सुखोई-30 लड़ाकू विमानों से, जबकि SCALP को राफेल से लॉन्च किया गया था। नई और पुरानी तस्वीरों के मिलान करने से पता चलता है कि जिस प्रतिष्ठान पर हमला किया गया था, वहां हमलों से पहले दोनों ओर शामियाने लगे दो ट्रैक्टर-ट्रेलर ट्रक खड़े थे। 10 मई 2025 की एक तस्वीर से पता चलता है कि हमलों में दोनों ट्रक नष्ट हो गए और पास की इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा था। 17 मई तक जगह साफ कर दी गई थी। 3 सितंबर (इस हफ्ते की शुरुआत में) की एक तस्वीर में उस जगह पर नए निर्माण कार्य होते दिखाई दे रहा है। इसमें नई दीवारें भी शामिल हैं।

भूकंप से अफगानिस्तान में सैकड़ों की मौत, राहत-बचाव कार्य जोर पकड़ रहा

काबुल अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में आए भीषण भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,457 हो गई है, जबकि 3,394 से अधिक लोग घायल हुए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 6,700 से ज्यादा घर पूरी तरह ढह गए हैं और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां अब भी दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए जूझ रही हैं। तालिबान के उप प्रवक्ता हामदुल्लाह फिटरत ने बताया कि कुनार और नंगरहार प्रांतों में 3,994 से अधिक लोग घायल हुए हैं और 6,782 से ज्यादा घर नष्ट हो चुके हैं। राहतकर्मी मलबे से शव निकालने में जुटे हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि बचाव कार्य अभी अधूरा है। भूकंप पीड़ित पानी, भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। तालिबान प्रशासन ने दावा किया है कि कई परिवारों को मानवीय सहायता पहुंचाई गई है और दूरदराज के इलाकों की सड़कें खोल दी गई हैं। साथ ही कई देशों की विशेष बचाव टीमें राहत कार्यों में शामिल हुई हैं। हालांकि, स्थानीय लोग और सहायता एजेंसियां कह रही हैं कि बचाव कार्य अभी भी धीमा और असमान रूप से चल रहा है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और भारी तबाही के कारण सबसे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना बेहद कठिन साबित हो रहा है। रेड क्रॉस और विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत अंतरराष्ट्रीय संगठन राहत कार्यों में लगे हैं। भारत, जापान, ईरान और तुर्की से भी सहायता सामग्री भेजी गई है। राहत एजेंसियों का कहना है कि पहुंच की दिक्कतों के चलते जरूरी सामग्री और चिकित्सा सेवाओं में देरी हो रही है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के अनुसार, यह 6.0 तीव्रता का भूकंप 31 अगस्त की रात 11:47 बजे स्थानीय समय पर, आठ किलोमीटर की गहराई पर आया था। भूकंप प्रभावित क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है क्योंकि यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स मिलती हैं। पहाड़ी भूभाग भूस्खलन की आशंका को और बढ़ा देता है, जिससे बचाव कार्य मुश्किल हो जाता है। भारत ने भी अफगानिस्तान को तुरंत सहायता भेजी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी से फोन पर संवेदना जताते हुए कहा कि भारत कठिन समय में अफगानिस्तान के साथ खड़ा है। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “आज काबुल में 1,000 परिवारों के लिए टेंट पहुंचा दिए गए हैं। इसके अलावा 15 टन खाद्य सामग्री भी तुरंत काबुल से कुनार भेजी जा रही है। भारत से और भी राहत सामग्री भेजी जाएगी।”

GST दरों में कटौती, पीयूष गोयल ने कहा- उद्योग जगत उपभोक्ताओं तक पूरा फायदा पहुंचाए

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को भारतीय उद्योग जगत से विभिन्न वस्तुओं की श्रेणियों में घोषित जीएसटी दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की अपील की, जिससे मांग को बढ़ाया जा सके और अर्थव्यवस्था में विकास को गति मिले। राष्ट्रीय राजधानी में भारत न्यूट्रावर्स एक्सपो 2025 को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जीएसटी दरों में कटौती से उपभोग मांग को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। उद्योग अब अधिक बिक्री की आकांक्षा रख सकते हैं, जिससे सभी के लिए मुनाफे वाली स्थिति बनेगी। गोयल ने आगे कहा कि हालांकि, यह तभी संभव हो सकता है जब जीएसटी का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने देश को दिए गए "फेस्टिव गिफ्ट" के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को घोषणा की थी कि जीएसटी के मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव और अच्छी खबर आने वाली है। उन्होंने कहा कि किसी ने भी यह उम्मीद नहीं की थी कि बुधवार को घोषित परिवर्तनकारी सुधारों से उत्पादों, वस्तुओं और सेवाओं की इतनी विस्तृत श्रृंखला को लाभ मिलेगा। गोयल ने उद्योग जगत से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि जीएसटी में कटौती से बचाई गई हर एक रुपए की राशि उपभोक्ताओं तक पहुंचे। नए ढांचे के तहत, कई श्रेणियों पर जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में पर्याप्त बचत हुई है। यह मांग को मजबूत बढ़ावा देगा, क्योंकि कम कीमतें स्वाभाविक रूप से खपत को बढ़ावा देती हैं और उद्योग के विकास को गति प्रदान करती हैं। केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत से प्रधानमंत्री के प्रति दो मजबूत प्रतिबद्धताएं रखने का आग्रह किया, जिसमें पहली, जीएसटी में कटौती से हुई बचत का हर एक रुपया उपभोक्ताओं तक पहुंचाना और दूसरी, भारतीय उत्पादों को सक्रिय रूप से बढ़ावा देना। उन्होंने मेहनती भारतीयों के पसीने और परिश्रम से बने उत्पादों, भारत की मिट्टी में पोषित उत्पादों को समर्थन देने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि जब ऐसे उत्पाद देश के कोने-कोने तक पहुंचते हैं, तो वे न केवल आर्थिक मूल्य, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक होते हैं। गोयल ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि स्वामित्व किसी भारतीय उद्यमी के पास है या किसी विदेशी निवेशक के पास, जरूरत इस बात की है कि उत्पाद भारत में निर्मित हों, भारतीय युवाओं के लिए रोजगार पैदा करें, स्थानीय समुदायों के लिए अवसर पैदा करें और देश की विकास गाथा में योगदान दें। उन्होंने आगे कहा कि भारत में निर्मित प्रत्येक उत्पाद 1.4 अरब लोगों की आकांक्षाओं को अपने साथ लेकर चलता है और विकसित भारत 2047 की ओर देश की यात्रा का प्रतीक है। भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन का जिक्र करते हुए, उन्होंने बताया कि पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वैश्विक उथल-पुथल और अनिश्चितता के बावजूद, भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में अगले दो दशकों तक अग्रणी बना रहेगा। उन्होंने 2047 तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद को 4 ट्रिलियन डॉलर से 30 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने के सरकार के दृष्टिकोण को दोहराया और इस बात पर जोर दिया कि भारत एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र के रूप में उभरेगा।

एआई से न्यूक्लियर तक: भारत और जापान के बीच नई टेक्नोलॉजी साझेदारी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन भारत और सिंगापुर के बीच साझेदारी के मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने एआई, क्वांटम और अन्य डिजिटल टेक्नीक में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर सिंगापुर के पीएम लॉरेंस वोंग भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आए हैं। दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीआई और पे नाउ को डिजिटल कनेक्टिविटी का 'सफल उदाहरण' बताया। उन्होंने कहा कि भारत और सिंगापुर ने आसियान के साथ द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते और मुक्त व्यापार समझौते की समयबद्ध तरीके से समीक्षा करने का निर्णय लिया है। पीएम ने कहा, "प्रौद्योगिकी और नवाचार हमारी साझेदारी के मजबूत स्तंभ हैं। हमने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम और अन्य डिजिटल तकनीकों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। आज अंतरिक्ष क्षेत्र में हुआ समझौता अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग का एक नया अध्याय जोड़ रहा है। हमने अपने युवाओं को उनकी प्रतिभा से जोड़ने के लिए इस वर्ष के अंत में भारत-सिंगापुर हैकाथॉन का अगला राउंड आयोजित करने का निर्णय लिया है। यूपीआई और पे नाउ हमारी डिजिटल कनेक्टिविटी के सफल उदाहरण हैं और यह खुशी की बात है कि आज 13 नए भारतीय बैंक उनसे जुड़ गए हैं।" प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगापुर के नेता का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा, "मैं पदभार ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री वोंग की पहली भारत यात्रा पर उनका हार्दिक स्वागत करता हूं। यह यात्रा इसलिए और भी खास है, क्योंकि इस वर्ष हम अपने संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।" प्रधानमंत्री मोदी ने 2024 में अपनी सिंगापुर यात्रा को याद किया, जिसके तहत दोनों देशों ने अपने संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाया था, और उन क्षेत्रों को सूचीबद्ध किया जो दोनों देशों के बीच सहयोग का केंद्र बिंदु भी बनेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "पिछले साल सिंगापुर की मेरी यात्रा के दौरान हमने अपने संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया। इस एक साल में हमारे संवाद और सहयोग में गति आई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज सिंगापुर दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत में सिंगापुर से बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है। हमारे रक्षा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। लोगों के बीच संबंध गहरे और जीवंत हैं। आज, हमने अपनी साझेदारी के भविष्य के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। हमारा सहयोग केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहेगा। बदलते समय के साथ उन्नत विनिर्माण, ग्रीन शिपिंग कौशल विकास, परमाणु और शहरी जल प्रबंधन जैसे क्षेत्र भी हमारे सहयोग का केंद्र बिंदु बनेंगे।" उन्होंने सिंगापुर को भारत की एक्ट ईस्ट नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के अपने संयुक्त दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए आसियान के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और सिंगापुर के बीच संबंध कूटनीति से आगे हैं। यह साझा मूल्यों पर आधारित एक उद्देश्यपूर्ण साझेदारी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "हमने निर्णय लिया है कि द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते और आसियान के साथ हमारे मुक्त व्यापार समझौते की समयबद्ध समीक्षा की जाएगी, ताकि पारस्परिक व्यापार में तेजी आए।

100 करोड़ इंटरनेट यूजर्स का भारत, अप्रैल-जून में रिकॉर्ड इजाफा

नई दिल्ली ब्रॉडबैंड ग्रोथ के कारण भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर्स की संख्या 30 जून, 2025 तक 1 अरब को पार कर 1,002.85 मिलियन हो गई, जो मार्च की तुलना में 3.48 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन 100 करोड़ से अधिक ग्राहकों में से 4.47 करोड़ के पास वायर्ड इंटरनेट कनेक्शन थे, जबकि 95.81 करोड़ के पास वायरलेस कनेक्शन थे। ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या 3.77 प्रतिशत बढ़कर 979.71 मिलियन हो गई, जबकि नैरोबैंड यूजर्स की संख्या घटकर 23.14 मिलियन रह गई। जून तिमाही में कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या 1,218.36 मिलियन तक पहुंच गई, जो पिछली तिमाही की तुलना में 1.46 प्रतिशत अधिक है। आधिकारिक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि इससे कुल दूरसंचार घनत्व बढ़कर 86.09 प्रतिशत हो गया, जो पिछली तिमाही में 85.04 प्रतिशत था। जनसांख्यिकी के संदर्भ में, शहरी इंटरनेट ग्राहकों की संख्या लगभग 57.94 करोड़ है, जबकि ग्रामीण इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 42.33 करोड़ है। आंकड़ों के अनुसार, वायरलेस सेवाओं के लिए मासिक औसत राजस्व प्रति उपयोगकर्ता (एआरपीयू) 186.62 रुपए है, जबकि प्रति वायरलेस ग्राहक औसत उपयोग मिनट (एमओयू) हर महीने 16.76 घंटे है। दूरसंचार क्षेत्र का सकल राजस्व 96,646 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछली तिमाही से 1.63 प्रतिशत कम है, लेकिन सालाना आधार पर 12.34 प्रतिशत अधिक है। समायोजित सकल राजस्व 81,325 करोड़ रुपए रहा, जो पिछली तिमाही से 2.65 प्रतिशत अधिक है। एक्सेस सेवाओं का समायोजित सकल राजस्व में 83.62 प्रतिशत का योगदान रहा है। प्रेस रिलीज में आगे कहा गया है कि लाइसेंस शुल्क 2.63 प्रतिशत बढ़कर 6,506 करोड़ रुपए हो गया और पास-थ्रू शुल्क 19.45 प्रतिशत घटकर 10,457 करोड़ रुपए हो गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने लगभग 912 निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को अपलिंकिंग या डाउनलिंकिंग या दोनों के लिए अनुमति दी है। भारत में डाउनलिंकिंग के लिए उपलब्ध 902 सैटेलाइट टीवी चैनलों में से, 30 जून, 2025 तक 333 सैटेलाइट पे टीवी चैनल हैं।

केंद्र सरकार को घेरा ममता ने, बोली- अमेरिका और चीन के सामने रही कमजोर

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा को बेच दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘‘कभी अमेरिका के सामने तो कभी चीन के सामने भीख मांग रही है''। अन्य राज्यों में बंगाली प्रवासियों पर हमलों से संबंधित सरकारी संकल्प पर राज्य विधानसभा में चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ‘‘तानाशाही मानसिकता'' है। भाजपा ‘‘पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना'' चाहती है। बनर्जी ने जैसे ही इस संकल्प पर बोलना शुरू किया तो हंगामा होने लगा। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा बेच दी है। केंद्र सरकार कभी चीन के सामने गिड़गिड़ा रही है, तो कभी अमेरिका के सामने। वे देश नहीं चला सकते, राष्ट्र के हितों की रक्षा नहीं कर सकते, फिर भी हमें उपदेश देने की हिम्मत रखते हैं।'' मुख्यमंत्री ने भाजपा पर भाजपा शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी श्रमिकों पर कथित हमलों पर चर्चा को रोकने का भी आरोप लगाया। बनर्जी ने दावा किया, ‘‘भाजपा बंगाली प्रवासियों पर हमलों को लेकर चर्चा के खिलाफ क्यों है? ऐसा इसलिए है… क्योंकि ये घटनाएं पार्टी शासित राज्यों में हो रही हैं। वे सच्चाई को दबाना चाहते हैं।'' 'भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है…' सदन में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी पार्टी की नारेबाजी के बीच अपनी बात कहने की कोशिश करते हुए बनर्जी ने पूछा, ‘‘भाजपा मुझे इस सदन में बोलने क्यों नहीं दे रही है?'' उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंदी या किसी अन्य भाषा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है। उनका रवैया औपनिवेशिक और तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। वे पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं।'' भाजपा तानाशाहों की पार्टी है- ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा के ‘‘वैचारिक पूर्वजों'' ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के साथ विश्वासघात किया था। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा तानाशाहों की पार्टी है। उनके पूर्वजों ने भारत की आजादी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, उन्होंने देश के साथ विश्वासघात किया।'' नोकझोंक बढ़ने पर, सत्ता पक्ष के कुछ विधायक विपक्षी दलों की ओर दौड़ पड़े, जिससे मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। हंगामे की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री को अपना भाषण कुछ देर के लिए रोकना पड़ा।  

भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक अमित क्षत्रिय को नासा में नई जिम्मेदारी, अंतरिक्ष मिशन की अगुवाई

वाशिंगटन  अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारतीय-अमेरिकी अमित क्षत्रिय को  ‘अन्वेषण-केंद्रित' नया सह-प्रशासक नियुक्त किया है। नासा में 20 साल सेवा दे चुके क्षत्रिय हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अन्वेषण प्रणाली विकास मिशन निदेशालय (ईएसडीएमडी) में चंद्रमा और मंगल से जुड़े अभियान कार्यक्रमों के उप-प्रभारी थे। नासा के एक बयान में कहा कि कार्यवाहक नासा प्रशासक सीन पी डफी ने बुधवार को अमित क्षत्रिय को नासा का अन्वेषण केंद्रित नया सह-प्रशासक नियुक्त किया। विस्कॉन्सिन में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर जन्मे एवं कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) तथा ऑस्टिन स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त क्षत्रिय इतिहास में मिशन नियंत्रण उड़ान निदेशक के रूप में सेवा करने वाले लगभग 100 लोगों में से एक हैं। नासा की वेबसाइट पर उनके प्रोफाइल के अनुसार, वह 2003 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़े थे। क्षत्रिय को अंतरिक्ष स्टेशन के 50वें अभियान के वास्ते प्रमुख उड़ान निदेशक के रूप में उनके कार्यों के लिए नासा उत्कृष्ट नेतृत्व पदक से सम्मानित किया गया था।   नासा ने कहा कि अपनी नयी भूमिका में वह एजेंसी में सर्वोच्च रैंक वाले सिविल सेवक के रूप में तथा डफी के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में काम करेंगे। कैलटेक के पूर्व छात्र के ब्लॉग के अनुसार, क्षत्रिय के पिता इंजीनियर थे और उनकी मां केमिस्ट थीं – दोनों ही भारतीय प्रवासी थे – जिन्होंने गणित और विज्ञान में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। क्षत्रिय और उनकी पत्नी के तीन बच्चे हैं।     

किम जोंग का जूठा गिलास गायब, बॉडीगार्ड्स ने फिंगरप्रिंट भी मिटाए, वीडियो चौंकाने वाला

बीजिंग उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बीजिंग में हाल ही में हुई मुलाकात चर्चा का विषय तो बनी ही, लेकिन उसके बाद सामने आए एक वीडियो ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। इस वीडियो में किम जोंग की टीम बैठक के बाद जिस तरीके से कुर्सी, टेबल, और यहां तक कि गिलास तक को साफ करती नजर आई, उसने सुरक्षा और जासूसी को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हुआ बीजिंग में? किम जोंग उन और पुतिन की मुलाकात बीजिंग की एक हाई-प्रोफाइल विक्ट्री डे परेड के बाद हुई थी। यह किम का कोविड-19 महामारी के बाद पहला चीन दौरा था। पुतिन से बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने दोस्ती की गर्मजोशी दिखाई और उत्तर कोरिया की ओर से रूस को यूक्रेन युद्ध में दिए गए समर्थन पर चर्चा भी हुई। लेकिन जब यह बैठक खत्म हुई, तभी किम के स्टाफ ने बेहद सावधानी से वह गिलास उठाया जिससे उन्होंने पीया था, कुर्सी के हैंडल और बैकरेस्ट को चमकाया गया, टेबल तक को ऐसे साफ किया गया जैसे वहां कोई फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन हो रही हो।   जैसे क्राइम सीन हो! वीडियो में एक स्टाफ मेंबर किम की कुर्सी को कपड़े से पोछता नजर आता है, जबकि दूसरा उनका गिलास संभाल कर ट्रे में रख देता है। यह सब इतनी बारीकी से किया गया कि जैसे कोई सबूत मिटा रहा हो। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे एक 'फॉरेंसिक क्लीनअप' कहा जा रहा है, यानी किम के डीएनए या बॉयोलॉजिकल ट्रेस (जैसे बाल, त्वचा, थूक आदि) कहीं पीछे न छूट जाएं।   DNA से डर क्यों? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति के डीएनए या बॉडी फ्लूइड्स से उसकी हेल्थ, जेनेटिक स्थिति और यहां तक कि गंभीर बीमारियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। जब बात किसी राष्ट्राध्यक्ष की हो, तो यह डेटा दुश्मन देशों के लिए "सोने की खान" हो सकता है। इसलिए उनके बॉयोलॉजिकल ट्रेसेज़ को मिटा देना या वापस ले जाना एक सुरक्षा रणनीति बन चुकी है।   पुतिन भी पीछे नहीं किम जोंग उन ही नहीं, बल्कि व्लादिमीर पुतिन भी अपनी सेहत से जुड़ी जानकारी छुपाने को लेकर उतने ही सख्त हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब भी पुतिन विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो उनके साथ एक 'पूप सूटकेस' (Poo Suitcase) जाता है – जिसमें उनके मल-मूत्र को एकत्र कर सील कर मॉस्को भेजा जाता है। फ्रांसीसी मैगजीन 'Paris Match' के मुताबिक, 2017 से ही यह प्रोटोकॉल जारी है। इसका मकसद यही है कि कोई विदेशी खुफिया एजेंसी उनके मल या यूरिन से हेल्थ रिपोर्ट न निकाल ले। इससे यह भी साफ होता है कि सिर्फ गुप्त दस्तावेज़ ही नहीं, अब बॉडी फ्लूइड्स भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा हैं। सिर्फ सुरक्षा या कुछ और? कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि किम और पुतिन का यह व्यवहार केवल सेहत की जानकारी छिपाने तक सीमित नहीं है। यह एक कूटनीतिक संकेत भी हो सकता है – यह दिखाने के लिए कि वे किसी पर भरोसा नहीं करते, चाहे वह चीन हो या रूस। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भरोसे की जगह सतर्कता ने ले ली है, खासकर तब जब वैश्विक राजनीति में टेंशन बढ़ रही है। किम की बेटी भी आईं साथ इस मीटिंग में एक और खास बात थी – किम जोंग उन की बेटी किम जू ऐ पहली बार किसी विदेशी दौरे पर उनके साथ दिखीं। इससे उत्तर कोरिया की अगली पीढ़ी के लीडरशिप को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।  बढ़ती दोस्ती या रणनीतिक चाल? किम और पुतिन की बातचीत में गर्मजोशी जरूर नजर आई – दोनों ने एक-दूसरे के लिए सम्मान जताया और किम ने तो यह तक कहा कि "अगर मैं रूस के लिए कुछ कर सकता हूं, तो यह मेरा फर्ज होगा।" लेकिन जब एक नेता की टीम उसके छूए हर सामान को मिटा दे, तो यह साफ है कि दोस्ती के दिखावे के पीछे रणनीति और शंका दोनों छिपी होती है।  

PM नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले मणिपुर में हुई अहम बैठक, तय हुई बड़ी सहमति

मणिपुर  मणिपुर के लिए नई दिल्ली से बड़ी खबर है। पीएम मोदी के मणिपुर दौरे की चर्चा के बीच 'कुकी-जो' परिषद ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को यात्रियों और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही के लिए खोलने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि उनके ( PM Modi ) पहुंचने से पहले कई फैसले गुडविल के तौर पर लिए जा रहे हैं। फिलहाल केंद्र सरकार की पूरी कोशिश है कि मणिपुर में हालात सामान्य और स्थिर रहें। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के अनुसार, यह फैसला नई दिल्ली में गृह मंत्रालय के अधिकारियों और केजेडसी के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई कई बैठकों के बाद लिया गया। केजेडसी ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर शांति बनाए रखने के लिए भारत सरकार द्वारा तैनात सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने का वचन दिया है। गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि कुकी-जो परिषद ने एनएच-2 पर शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है। मणिपुर को नागालैंड और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण जीवनरेखा एनएच-2, मई 2023 में राज्य में भड़के जातीय तनाव के कारण अवरुद्ध हो गई थी। मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच संघर्ष के कारण व्यापक हिंसा, जान-माल की हानि, हजारों लोगों का विस्थापन और गहराता मानवीय संकट उत्पन्न हुआ है। राजमार्ग को फिर से खोलना विश्वास बहाली और हिंसा प्रभावित राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इंफाल और नई दिल्ली के अधिकारियों का मानना है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति आसान होने से विस्थापित परिवारों और राहत शिविरों में रह रहे लोगों की कठिनाइयां कम होंगी। गृह मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय, मणिपुर सरकार, केएनओ और यूपीएफ के प्रतिनिधियों के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक का समापन त्रिपक्षीय परिचालन निलंबन (एसओओ) समझौते पर हस्ताक्षर के साथ हुआ, जिसमें फिर से बातचीत की गई शर्तों और नियमों (आधारभूत नियमों) को हस्ताक्षर की तिथि से एक वर्ष के लिए प्रभावी माना जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि संशोधित आधारभूत नियमों में दो प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया गया है। मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता और मणिपुर में स्थायी शांति व स्थिरता के लिए बातचीत के माध्यम से समाधान की आवश्यकता। साथ ही, गृह मंत्रालय ने बताया कि केएनओ और यूपीएफ ने संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों से सात निर्दिष्ट शिविरों में स्थानांतरण, शिविरों की संख्या कम करने, हथियारों को निकटतम सीआरपीएफ और बीएसएफ शिविरों में स्थानांतरित करने, और सुरक्षा बलों द्वारा कैडरों का कठोर भौतिक सत्यापन करने पर सहमति जताई है, ताकि विदेशी नागरिकों (यदि कोई हों) को सूची से हटाया जा सके।