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यूरोप ने भारत का किया बचाव, कहा डेड इकॉनमी नहीं है भारत; ट्रंप को करारा जवाब दिया

नई दिल्ली  भारत में डेनमार्क (यूरोप का एक देश) के राजदूत, रासमस एबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने टैरिफ विवाद पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करारा जवाब दिया है। उन्होंने हिन्दुस्तान का सपोर्ट करते हुए दो टूक कहा है कि वह भारत को डेड इकॉनमी की तरह नहीं देखते हैं, बल्कि यह सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। न्यूज एजेंसी 'एएनआई' के साथ एक इंटरव्यू में क्रिस्टेंसन ने पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौतों तक पहुंचने के लिए देशों के बीच सद्भावनापूर्ण बातचीत और संवाद की आवश्यकता पर जोर डाला। उन्होंने कहा, "नहीं, मैं निश्चित रूप से भारत को एक मृत अर्थव्यवस्था नहीं मानता। इसके विपरीत, यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। और मुझे लगता है कि इस तथ्य का प्रमाण यह है कि यूरोपीय संघ और भारत एक मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा।" अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक चौंकाने वाला बयान दिया था और रूसी तेल आयात करने पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि मुझे इसकी परवाह नहीं है कि भारत रूस के साथ क्या करता है। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ कैसे गिरा सकते हैं। हमने भारत के साथ बहुत कम व्यापार किया है, उनके टैरिफ बहुत ज्यादा हैं, दुनिया में सबसे ज्यादा में से एक।" ट्रंप ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। डेनमार्क के राजदूत ने जोर देकर कहा कि डेनमार्क और यूरोप भारत को निवेश और व्यापार के लिए एक आशाजनक जगह मानते हैं। उन्होंने आगे कहा, "इसलिए निश्चित रूप से एक डेनिश, यूरोपीय दृष्टिकोण से, हम भारत को निवेश और व्यापार के लिए एक बहुत ही आशाजनक जगह मानते हैं और अगर यह एक मृत अर्थव्यवस्था होती तो ऐसा नहीं होता।" यूरोपीय संघ और भारत दोनों को प्रभावित करने वाले टैरिफ के मुद्दे के बारे में बोलते हुए, राजदूत ने कहा, "मैं व्यक्तिगत रूप से सोचता हूं, और यह डेनमार्क का भी दृष्टिकोण है, कि आप जानते हैं, हम एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के पक्ष में हैं, जहां यह केवल बड़े खिलाड़ियों का प्रश्न नहीं है, आप जानते हैं, कि छोटे खिलाड़ियों को क्या करना चाहिए, यह निर्देश देना है।" अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर हाल ही में लगाए गए शुल्कों के संबंध में, क्रिस्टेंसन ने कहा कि व्यापार वार्ताओं के प्रति यूरोपीय दृष्टिकोण सद्भावना और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौतों पर केंद्रित है। क्रिस्टेंसन ने कहा, "इसलिए, जब हम बातचीत करते हैं, तो सिद्धांततः, यह सद्भावना से होती है। उदाहरण के लिए, हम भारत के साथ एक ऐसे समझौते पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं जो पारस्परिक रूप से लाभकारी हो, न कि हमारी आर्थिक शक्ति के आधार पर आपको ऐसा कुछ करने के लिए मजबूर करना जो आप नहीं करना चाहेंगे।"  

रक्षा मंत्रालय का खुलासा: क्या भारत ने अमेरिका के साथ हथियारों की डील पर प्रतिबंध लगाया?

नई दिल्ली भारत सरकार ने अमेरिका के साथ डिफेंस डील को रोकने के दावों को खारिज कर दिया है। ये जानकारी न्यूज एजेंसी ANI ने डिफेंस मिनिस्ट्री के सूत्रों के हवाले से दी है। इसमें बताया गया कि ये रिपोर्ट्स गलत और झूठी हैं। डिफेंस मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, "भारत की ओर से अमेरिका के साथ रक्षा खरीद संबंधी बातचीत रोकने की खबरें झूठी और मनगढ़ंत हैं। यह स्पष्ट किया जाता है कि खरीद के विभिन्न मामलों में मौजूदा प्रक्रियाओं के अनुसार प्रगति हो रही है।" रिपोर्ट में 3 भारतीय अफसरों के हवाले से दावा किया था कि भारत ने अमेरिका से नए हथियार और विमान खरीद की योजना रोक दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रक्षा मंत्री आने वाले हफ्तों में डिफेंस डील के लिए अमेरिका जाने वाले थे, लेकिन टैरिफ विवाद की आंच इस दौरे पर आ गई और दौरा टल गया।   रॉयटर्स की रिपोर्ट में क्या था दावा? रॉयटर्स ने 'ट्रम्प के टैरिफ के बाद भारत ने अमेरिकी हथियार खरीदने की योजना रोक दी' हेडलाइन से एक रिपोर्ट छापी है। इस रिपोर्ट में कहा गया अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत में असंतोष देखने को मिल रहा है। इसलिए भारत सरकार ने नए अमेरिकी हथियार और विमान खरीदने की अपनी योजना को स्थगित कर दिया है।  

भारत की संप्रभुता पर कभी समझौता नहीं, अमेरिकी टैरिफ पर पीयूष गोयल का तगड़ा जवाब

नई दिल्ली भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि "आज तक ऐसा कोई नहीं आया हैजो भारत को झुका सके। असंभव है। कोई लाख कोशिश कर ले, भारत को कोई नहीं झुका सकता।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल की खरीद जारी रखने को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। समिट में बोलते हुए गोयल ने कहा कि आज का भारत पहले से कहीं ज्यादा सशक्त और आत्मविश्वासी है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था सालाना 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और आने वाले समय में यह गति और तेज होगी। "डिग्लोबलाइजेशन नहीं, व्यापार पुनर्गठन हो रहा है" जब वैश्विक व्यापार संगठनों के साथ भारत के भविष्य के संबंधों को लेकर सवाल पूछा गया, तो गोयल ने कहा कि दुनिया में "डिग्लोबलाइजेशन" नहीं हो रहा, बल्कि देश अपने व्यापारिक साझेदारों और रास्तों का पुनर्गठन कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस साल भारत पिछले साल से ज्यादा निर्यात करेगा। उन्होंने कहा, “हमने पहले से ही व्यापार बाधाओं का मुकाबला करने के लिए कई कदम उठा लिए हैं।” ट्रंप की ‘मृत अर्थव्यवस्था’ पर तीखी प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को “मृत अर्थव्यवस्था” कहा था। इस पर पीयूष गोयल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेता द्वारा इस नकारात्मक बयान को दोहराना शर्म की बात है। मैं इसकी निंदा करता हूं। देश राहुल गांधी को कभी माफ नहीं करेगा जो भारत की महान गाथा को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।” मजबूत आर्थिक नींव का दावा गोयल ने कहा कि भारत की मुद्रा, विदेशी मुद्रा भंडार, शेयर बाजार और आर्थिक बुनियादी ढांचा पूरी तरह मजबूत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में महंगाई की दर अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। उन्होंने कहा, “दुनिया आज भारत को सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देख रही है, जो वैश्विक विकास में 16 प्रतिशत योगदान दे रही है।” उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब युवा, कुशल और आकांक्षी जनसंख्या वैश्विक साझेदारों के लिए एक बड़ी ताकत है। कोविड संकट को अवसर में बदला गोयल ने भारत के आईटी उद्योग को हजारों नौकरियां देने और देश के कायाकल्प में योगदान देने का श्रेय दिया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत ने कोविड संकट को अवसर में बदला। उन्होंने कहा, "भारत हमेशा कठिन समय में विजयी होकर उभरेगा।" मंत्री ने बताया कि भारत इस समय यूएई, मॉरिशस, ऑस्ट्रेलिया, EFTA (चार देशों का यूरोपीय समूह), यूके, यूरोपीय संघ, चिली, पेरू, न्यूजीलैंड और अमेरिका समेत कई देशों के साथ व्यापार समझौते कर रहा है या उन्हें अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। अंत में उन्होंने कहा, “भारत आज ज्यादा मजबूत है, अधिक सम्मानित है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ऊंचे कद के नेता के नेतृत्व में है।” इससे पहले पीयूष गोयल ने एक पोस्ट में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक रिपोर्ट शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि देश की अर्थव्यवस्था फल-फूल रही है। आईएमएफ ने हाल ही में विश्व आर्थिक परिदृश्य 2025 का जुलाई अपडेट जारी किया था। इसमें उसने मौजूदा और अगले वित्त वर्ष के लिए भारत का विकास अनुमान बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है।  

राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग की पड़ताल, बेंगलुरु परिवार ने साबित किया अपना वोटर होना

बेंगलुरु कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों के बाद बेंगलुरु का एक परिवार सामने आया है, जिसने अपने वैध वोटर आईडी कार्ड भी सार्वजनिक किए हैं। राहुल गांधी ने मतदाता सूची में सही से फोटो नहीं देख पाने के कारण कई वोटर्स को फर्जी मतदाता करार दिया था, जिसमें यह परिवार भी शामिल है। सूत्रों ने बताया कि चुनाव आयोग ने पुष्टि की है कि संबंधित व्यक्ति असली मतदाता हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि तीन लोगों का एक परिवार, जिसमें एक पुरुष और दो महिलाएं हैं, यह फर्जी मतदाता हैं, क्योंकि वह उनकी तस्वीरें नहीं देख पा रहे थे। हालांकि, तीनों व्यक्तियों की तस्वीरें, उनके जीपीएस-टैग वाले पते के साथ सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। तस्वीर में परिवार के सदस्य अपने आवास पर मतदाता पहचान पत्र दिखाते हुए नजर आ रहे हैं। चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि परिवार के तीन सदस्य ओम प्रकाश बागड़ी, सरस्वती देवी बागड़ी और माला बागड़ी हैं। सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) ने राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने के लिए इसलिए कहा क्योंकि वह पहले भी चुनाव आयोग (ईसीआई) पर लगाए गए आरोपों से मुकरते रहे हैं। सूत्रों ने बताया, "इस बार घोषणापत्र मांगने का कारण यह है कि इससे पहले उन्होंने कभी कोई स्व-हस्ताक्षरित पत्र जमा नहीं किया है।" चुनाव आयोग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि राहुल गांधी ने 24 दिसंबर 2024 को महाराष्ट्र मुद्दे का जिक्र किया था। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा, "अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के एक वकील ने हमें पत्र लिखा था, और हमने 24 दिसंबर, 2024 को एक विस्तृत जवाब जारी किया। वह जवाब हमारी वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। फिर भी, राहुल गांधी का दावा है कि हमने कभी जवाब नहीं दिया। गुरुवार को भी उन्होंने यही आरोप दोहराया।" चुनाव आयोग के सूत्रों ने आगे बताया कि गुरुवार (7 अगस्त) को कर्नाटक सरकार ने जाति सर्वेक्षण के लिए मतदाता सूची को आधार बनाने का फैसला किया। विडंबना यह है कि उसी दिन राहुल गांधी ने मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर तीखा हमला बोला। सूत्रों ने अधिकारियों के हवाले से कहा, "कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने अपनी सबसे महत्वपूर्ण नीति (जाति जनगणना) को मतदाता सूची के आधार पर बनाकर उसकी प्रामाणिकता की गारंटी दी, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी ने उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाया।" इससे पहले, राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया था। शुक्रवार को कांग्रेस नेता ने बेंगलुरु में विशाल विरोध प्रदर्शन भी किया, जहां उन्होंने मतदाताओं से जुड़े 10 साल के आंकड़े और वीडियो की मांग करते हुए अपने आरोप दोहराए।

मिथिलांचल की संस्कृति भारतीय विरासत का अनन्य गहना, गृह मंत्री अमित शाह का बयान

सीतामढ़ी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज सीतामढ़ी में मां जानकी की जन्मस्थली पुनौरा धाम मंदिर के भूमि पूजन के बाद इस कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करते हुए मिथिलांचल की संस्कृति की तारीफ करते हुए कहा कि सही अर्थों में मिथिलांचल की संस्कृति पूरे भारतीय संस्कृति का अनन्य गहना है। इस दौरान उन्होंने विपक्ष को निशाने पर लिया और एनडीए सरकार के किए गए विकास कार्यों की तारीफ की। उन्होंने आज के दिन को देश और दुनिया के लिए शुभ बताते हुए कहा कि माता सीता ने एक ही जीवन में आदर्श पत्नी, आदर्श बेटी, आदर्श मां और आदर्श राजमाता के स्वरूपों को चरितार्थ किया है। आज माता जानकी का जहां जन्म हुआ, उस पुनौरा धाम मंदिर के परिसर का समग्र विकास होने की नींव डालने का काम हुआ है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मां जानकी की जन्मस्थली पर जो यह भव्य मंदिर बनने जा रहा है, यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मिथिलांचल के भाग्योदय की शुरुआत है। उन्होंने मिथिलांचल की संस्कृति के साथ यहां की कला की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर मिथिला की कला को हमेशा आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति को मधुबनी पेंटिंग भेंट की और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति को भी मिथिलांचल की कला का नमूना देकर विदेश में मिथिला की कला का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि मिथिला, वाल्मीकि रामायण से लेकर महाभारत और बौद्ध तथा जैन साहित्य तक, हमारी संस्कृति का केंद्र रहा है। धर्मशास्त्र, साहित्य, संगीत, भाषा और तंत्रज्ञान का यह एक बहुत बड़ा केंद्र रहा है। मिथिलांचल, जहां राजा जनक हुए, जहां याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी हुए, जहां शंकराचार्य और मंडन मिश्र ने शास्त्रार्थ को चरम सीमा पर पहुंचाया, जहां मुनि अष्टावक्र ने अष्टावक्र गीता का ज्ञान दिया, उसे फिर से विद्या का धाम और संस्कृति का केंद्र बनाने की शुरुआत आज यहां से होगी। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी जोरदार हमला बोला। उन्होंने राजद नेता तेजस्वी यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि आपके माता-पिता की सरकार ने गुंडई करने के अलावा, गैंग चलाने के अलावा, अपहरण-फिरौती के अलावा मिथिलांचल के विकास के लिए क्या किया? आप इसका हिसाब दीजिए। उन्होंने एनडीए सरकार में किए गए कार्यों की गिनती कराते हुए कहा कि हमने पीएम मोदी की तरफ से विकास का सारा हिसाब दे दिया। मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर भी उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव दोनों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव बिहार में एसआईआर का विरोध कर क्या जताना चाहते हैं? इनको बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी हार का अहसास हो गया है, इसलिए ये तमाम बहाने कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग घुसपैठियों को वोट बैंक समझते हैं। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि इस साल बिहार में होने वाले चुनाव में भी एनडीए विजयी होगी। 

एससीओ शिखर सम्मेलन में चीन ने पीएम मोदी कोशामिल होने का किया स्वागत, जताई मजबूत एकता और सहयोग की भावना

बीजिंग चीन ने शुक्रवार को कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन आने का स्वागत करता है, जो इस महीने के अंत में तिआनजिन शहर में आयोजित किया जाएगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, "चीन प्रधानमंत्री मोदी का तिआनजिन एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन आने का स्वागत करता है। हमें विश्वास है कि सभी पक्षों के संयुक्त प्रयासों से तिआनजिन शिखर सम्मेलन एकजुटता, मित्रता और सार्थक परिणामों का आयोजन होगा और एससीओ एक नए उच्च-गुणवत्ता वाले विकास के चरण में प्रवेश करेगा, जिसमें अधिक एकता, समन्वय, गतिशीलता और उत्पादकता होगी।" उन्होंने बताया कि "चीन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तिआनजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस आयोजन में एससीओ के सभी सदस्य देशों सहित 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भाग लेंगे। यह एससीओ के गठन के बाद से अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन होगा।" रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच तिआनजिन में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने चीन यात्रा करेंगे। यह 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी, जिसने भारत-चीन संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले 2019 में चीन गए थे। इसके अलावा उन्होंने 2024 में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। भारत और चीन के बीच चार साल से चले आ रहे सीमा गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति उस समय हुई जब दोनों देशों ने लगभग 3500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त के लिए समझौता किया। जुलाई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तिआनजिन में आयोजित एससीओ विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक में हिस्सा लेने के लिए चीन का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से भी मुलाकात की और साथ ही सभी विदेश मंत्रियों के साथ राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी भेंट की। जून में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन का दौरा किया था। भारत ने उस बैठक की संयुक्त घोषणा का समर्थन करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उसमें आतंकवाद से संबंधित चिंताओं को शामिल नहीं किया गया था। भारत का कहना था कि दस्तावेज में आतंकवाद के मुद्दे को शामिल किया जाना चाहिए, जो एक विशेष देश को स्वीकार नहीं था, इसलिए संयुक्त वक्तव्य को अपनाया नहीं गया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने भी बीजिंग में आयोजित एससीओ सदस्य देशों के सुरक्षा परिषद सचिवों की 20वीं बैठक में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड को समाप्त करने और यूएन द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके नेटवर्क को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। गौरतलब है कि एससीओ एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई में की गई थी। इसके सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस शामिल हैं।

आम आदमी के लिए बड़ी परेशानी: हर OTP के साथ देना होगा अतिरिक्त पैसा

नई दिल्ली  ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम लगाने और डिजिटल पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल नंबर वैलिडेशन (MNV) से जुड़ा एक नया मसौदा नियम तैयार किया है। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, अब मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन के लिए सभी संस्थाओं को DoT के प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करना होगा और हर वेरिफिकेशन पर शुल्क भी देना होगा।    डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन का यह प्रस्ताव कहता है कि बैंक, फिनटेक और अन्य डिजिटल सेवाएं अब यूजर के मोबाइल नंबर को वेरिफाई करने के लिए केवल DoT के प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगी। बैंकों को प्रति वेरिफिकेशन ₹1.50 और अन्य संस्थाओं को ₹3 खर्च करना होगा। फर्जी या संदिग्ध नंबर को 90 दिनों के लिए बंद भी किया जा सकता है।   विशेषज्ञों के अनुसार, देश के करोड़ों परिवारों के पास एक ही मोबाइल होता है, जिसका उपयोग पूरा परिवार करता है — पेंशन देखने से लेकर डिजिटल शिक्षा और बैंकिंग तक। ऐसे में अगर हर खाते के लिए अलग मोबाइल नंबर की अनिवार्यता होती है, तो ग्रामीण और निम्नवर्ग डिजिटल सेवाओं से कट जाएंगे। 

दुपट्टा फाड़कर राखी बांधने वाली गुजरात की महिला ने धामी को कर दिया भावुक

धराली, उत्तराखंड उत्तराखंड के धराली में तीन दिन पहले हुई बादल फटने की घटना के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राहत एवं बचाव कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे। इसी दौरान उस वक्त एक अत्यंत भावुक कर देने वाला पल देखने को मिला, जब वहां रेस्क्यू कर लाई गई एक महिला ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए उन्हें अपना दुपट्टा फाड़कर बनी राखी उनकी कलाई पर बांधी। रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले हुई इस घटना से सीएम भी भावुक हो गए और उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ये कोई सामान्य राखी नहीं थी, ये थी भरोसे की, अपनत्व की, और उस रिश्ते की जो खून से नहीं, दिल से जुड़ता है। जिस महिला ने यह प्रतीकात्मक राखी बांधी वह गुजरात की रहने वाली है। सीएम ने कहा- आपकी राखी बहुत स्पेशल इस घटना के दौरान मुख्यमंत्री के साथ महिला का संवाद भी हुआ। राखी बंधवाने के बाद सीएम ने महिला से कहा- 'आपकी ये राखी तो बहुत स्पेशल है'। इसके बाद जब उस महिला ने झुकते हुए सीएम के पैर छूने की कोशिश की तो धामी ने उसे रोकते हुए अपने सीने से लगा लिया। इसके बाद महिला ने फिर आभार जताते हुए सीएम से बहुत-बहुत शुक्रिया कहा। जिसके बाद धामी ने पूछा कि 'सुरक्षित पहुंच गए ना', तो महिला ने कहा- 'हां पहुंच गए'। इसके बाद सीएम ने 'राधे-राधे' और 'जय गंगा मैया कहा'। धामी बोले- मैं आ गया ना आपको लेने महिला ने आगे कहा- 'बहुत बड़ी सुरक्षा मिली हमें मिलिट्री से, कुछ परेशानी नहीं हुई, लेकिन तीन दिन हम गंगोत्री में फंसे रह गए'। तब धामी ने कहा कि 'आ गया ना मैं आप लोगों को लेने के लिए'। इसके बाद महिला ने आगे कहा, 'बस मेरी यही प्रार्थना है कि रक्षाबंधन पर हमको याद करना। हमारा भैया सुखी रहे। यही प्रार्थना है।' सीएम बोले- केवल एक कपड़े का टुकड़ा इस घटना के वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने लिखा, ‘धराली (उत्तरकाशी) में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान एक बहन ने साड़ी का किनारा फाड़ कर मेरी कलाई पर राखी के प्रतीक के रूप में बांधा तो मन अत्यंत भावुक हो उठा। ना थाली, ना चंदन, केवल एक कपड़े का टुकड़ा, लेकिन उसमें रिश्ते का सच्चा एहसास, सुरक्षा का वचन, और मानवता का सबसे सुंदर रूप समाया था। उस राखी में एक बहन की प्रार्थना थी और एक भाई के कंधों पर आया एक नया दायित्व। ये कोई सामान्य राखी नहीं थी, ये थी भरोसे की, अपनत्व की, और उस रिश्ते की जो खून से नहीं, दिल से जुड़ता है।’ बता दें कि जिस महिला ने सीएम को राखी बांधी उसका नाम धनगौरी बरौलिया है, जो कि गुजरात में अहमदाबाद के ईशनपुर इलाके की रहने वाली हैं। वह अपने परिवार के साथ गंगोत्री दर्शन के लिए उत्तराखंड आई थीं, लेकिन 5 अगस्त को आई भीषण आपदा के कारण वे धराली में अपने परिवार सहित फंस गई थीं। रेस्क्यू टीमों ने अपने अथक प्रयासों से महिला और उसेके परिवार को शुक्रवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।  

गडकरी बोले: E20 पेट्रोल से माइलेज कम होने के दावे गलत, जानिए पूरी बात

नई दिल्‍ली हाल के समय में पेट्रोल में एथेनॉल मिले होने की वजह से गाड़ी के कम माइलेज मिलने को लेकर तरह-तरह की बातें चल रही है। इसपर सरकार की तरफ से पहले ही सफाई दी जा चुकी है। अब इस मामले पर भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी खुलकर बात की। उन्होंने तो उन लोगों को खुली चुनौती दे दी है, जो इसको लेकर दावा कर रहे हैं कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की वजह से गाड़ी कम माइलेज देगी। आइए विस्तार में जानते हैं कि इस मामले में नितिन गडकरी ने क्या कहा? गडकरी की खुली चुनौती     सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को बिजनेस टुडे के जरिए आयोजित एक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। यहां पर उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (जिसे E20 कहा जाता है) से वाहनों का माइलेज कम होता है, इस तर्क में कोई सच्चाई नहीं है। इसके साथ ही कहा कि इस पर तो कोई चर्चा भी नहीं है। मुझे नहीं पता कि मुझे यह राजनीतिक रूप से कहना चाहिए या नहीं, लेकिन ऐसा लगता है कि पेट्रोलियम लॉबी इसे हेरफेर कर रही है। आप मुझे दुनिया में एक भी ऐसा वाहन दिखाओ जिसे E20 पेट्रोल के कारण समस्या हुई हो! मैं एक खुली चुनौती देता हूँ। E20 से बिल्कुल कोई समस्या नहीं है।     गडकरी ने आगे कहा कि स्थानीय रूप से उत्पादित एथेनॉल का इस्तेमाल भारत के आयात बिल को कम करने में मदद करता है और प्रदूषण को भी कम करता है। मक्के की कीमत 1,200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,600 रुपये हो गई हैं, यह सब इसलिए है क्योंकि इससे एथेनॉल का उत्पादन हो रहा है। इससे बिहार और उत्तर प्रदेश में मक्का के तहत आने वाले क्षेत्र में तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है। इससे किसानों की आय बढ़ रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय कह चुका है ये बात     नितिन गडकरी के इस खुली चुनौती से पहले पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से पेट्रोल में एथेनॉल की वजह से माइलेज पर पड़ने वाले असर के बारे में बता चुका है। पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से कह गया है कि इस फ्यूल के कारण इंजन को कोई बड़ा नुकसान या परफॉर्मेंस में कोई कमी नहीं आती है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि नई कारों में माइलेज 2 प्रतिशत तक और पुरानी कारों में 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है, जिन्हें अपडेटेड पार्ट्स की जरूरत हो सकती है। इसको लेकर मंत्रालय की तरफ से सोमवार को एक सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया गया था, जिसमें बताया गया था कि इसे नियमित रखरखाव के साथ संभाला जा सकता है।     इस पोस्ट में पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल पर पुराने वाहनों में 20,000 से 30,000 किमी के बाद रबर के पुर्जे या गैसकेट जैसे छोटे-मोटे अपडेट की जरूरत हो सकती है, जो सस्ते होते हैं और आमतौर पर नियमित सर्विसिंग के दौरान किए जाते हैं।  

संसद में खुलासा: भारत के ‘चिकन नेक’ के पास चीन को एयरबेस सौंपने की अफवाहों का सच क्या है?

नई दिल्ली पिछले दिनों बांग्लादेश के लालमोनिरहाट जिले में एक पुराने एयरबेस को फिर से सक्रिय करने की खबरें सामने आई थीं। कहा जा रहा है कि बांग्लादेश ने चीन के साथ मिलकर इस संवेदनशील इलाके में एयरबेस शुरू करने की योजना बनाई है। अब इस मसले पर भारत सरकार का रिएक्शन सामने आया है। भारत ने बांग्लादेश सरकार के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा है कि लालमोनिरहाट हवाई अड्डे को वर्तमान में सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की कोई योजना नहीं है। एक लिखित सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में ये जानकारी दी। प्रश्न में सांसद कौशलेंद्र कुमार ने पूछा था कि क्या बांग्लादेश ने चीन को लालमोनिरहाट हवाई अड्डे पर संचालन फिर से शुरू करने की अनुमति दी है, और यदि हां, तो क्या इससे भारत की सुरक्षा को कोई खतरा हो सकता है। साथ ही, यह भी पूछा गया कि क्या भारत सरकार ने इस संबंध में बांग्लादेश के साथ कोई आपत्ति जताई है या नहीं। मंत्री ने जवाब में कहा कि भारत सरकार ने बांग्लादेश के लालमोनिरहाट हवाई अड्डे को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स और 26 मई 2025 को बांग्लादेश सेना के सैन्य संचालन निदेशक द्वारा दिए गए प्रेस ब्रीफिंग पर ध्यान दिया है। ब्रीफिंग में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में लालमोनिरहाट हवाई अड्डे को सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित सभी घटनाक्रम पर नजर रख रही है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हुआ कि भारत ने बांग्लादेश के साथ इस मुद्दे पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की है या नहीं। भारत के लिए बहुत संवेदनशील है यह जगह यह एयरबेस भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे 'चिकन नेक' के नाम से जाना जाता है, के बेहद करीब है। इस घटनाक्रम ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला एकमात्र संकरा गलियारा है। लालमोनिरहाट एयरबेस और उसका रणनीतिक महत्व लालमोनिरहाट एयरबेस बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में स्थित है और यह भारत-बांग्लादेश सीमा से मात्र 12-20 किलोमीटर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से लगभग 135 किलोमीटर दूर है। यह एयरबेस 1931 में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों की सेनाओं के लिए महत्वपूर्ण रहा। वर्तमान में यह बांग्लादेश वायुसेना के नियंत्रण में है, लेकिन कई दशकों से निष्क्रिय पड़ा है। हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इस एयरबेस को फिर से चालू करने के लिए चीन से सहायता मांगी है। मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा और विवाद मार्च में मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा के दौरान इस एयरबेस को फिर से शुरू करने पर चर्चा हुई थी। सूत्रों के अनुसार, यूनुस ने चीन को लालमोनिरहाट में एयरबेस के निर्माण के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता का प्रस्ताव दिया। इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की एक कंपनी इस प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्टर के रूप में शामिल हो सकती है, जिससे भारत की चिंताएं और गहरी हो गई हैं। यूनुस ने अपनी यात्रा के दौरान भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को 'लैंड-लॉक्ड' बताते हुए बांग्लादेश को इस क्षेत्र के समुद्री व्यापार का 'एकमात्र संरक्षक' करार दिया था, जिसे भारत ने आपत्तिजनक माना। भारत के लिए क्यों है खतरा? सिलीगुड़ी कॉरिडोर की चौड़ाई मात्र 22 किलोमीटर है। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पूर्वोत्तर के सात राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ता है। लालमोनिरहाट में चीन की मौजूदगी से इस क्षेत्र में सैन्य संतुलन बिगड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरबेस भविष्य में न केवल सैन्य ठिकाने के रूप में, बल्कि एक खुफिया केंद्र या कूटनीतिक दबाव बिंदु के रूप में भी इस्तेमाल हो सकता है। चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत बांग्लादेश में बढ़ती गतिविधियां, जैसे मोंगला पोर्ट का विकास और चटगांव में आर्थिक पार्क की स्थापना, भारत के लिए अतिरिक्त चिंता का कारण हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश द्वारा तुर्की से Bayraktar TB2 ड्रोन और चीन-पाकिस्तान निर्मित JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना ने भी क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाया है। भारत की रणनीति पुख्ता भारत ने इस स्थिति पर कड़ी नजर रखते हुए सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को और मजबूत किया है। भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर इस क्षेत्र की रक्षा के लिए राफेल जेट, ब्रह्मोस मिसाइल, और S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस है। हाल ही में भारत ने त्रिपुरा के कैलाशहर में 1971 के युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए एयरबेस को फिर से सक्रिय करने की योजना शुरू की है, जिसे यूनुस के 'चीनी प्लान' की काट के रूप में देखा जा रहा है।