samacharsecretary.com

रूस का संकेत: भारत को अतिरिक्त S-400 डिफेंस सिस्टम की सप्लाई होगी तेज

नई दिल्ली भारत और रूस के रिश्ते लगातार मजबूत होते जा रहे हैं. दोनों देशों के संबंधों में मजबूती का एक और प्रमाण है हथियारों की डील. ऐसे में रूस और भारत S-400 मिसाइल सिस्टम की सप्लाई बढ़ाने पर बातचीत कर रहे हैं.रूस के डिफेंस एक्सपोर्ट अधिकारी के मुताबिक, भारत और रूस के बीच सतह से हवा में मार करने वाली S-400 मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त सप्लाई के लिए बातचीत जारी है. रूस के मिलिट्री विभाग के एक बड़े अधिकारी दिमित्री शुगायेव का कहना है कि भारत के पास पहले से ही S-400 मिसाइल सिस्टम है और इसकी नई खेप के लिए बातचीत जारी है. दरअसल भारत ने पांच S-400 Triumf सिस्टम के लिए 2018 में रूस के साथ 5.5 अरब डॉलर के एग्रीमेंट पर साइन किया था. चीन की लगातार बढ़ती जा रही सैन्य शक्ति का मुकाबला करने के लिए भारत ने रूस के साथ यह एग्रीमेंट किया था. हालांकि, हथियारों की इस सप्लाई में देरी हुई. इस डील के तहत आखिरी दो यूनिट 2026 और 2027 तक मिलेगी.  बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के हर हमले को भारत के S-400 डिफेंस सिस्टम ने बखूबी ध्वस्त किया था. एयर डिफेंस में मजबूत साझेदारी S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम रूस की सबसे उन्नत तकनीक है. इसकी रेंज 400 किलोमीटर है जो 36 लक्ष्यों को एक साथ नष्ट कर सकती है. साथ ही विमान, मिसाइल और ड्रोन से बचाव करती है.  S-400 मिसाइल सिस्टम भारत की हवाई सुरक्षा के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है. यह मिसाइल सिस्टम 80 लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक और निशाना बना सकता है, जो इसे दुश्मन के लिए खतरनाक बनाता है. ऑपरेशन सिंदूर में इसकी सफलता ने भारत को क्षेत्र में हवाई वर्चस्व बनाए रखने में मदद की है.  भारत ने 2021 से पंजाब, राजस्थान और पूर्वोत्तर में S-400 को तैनात किया है. यह डील अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी को दिखाती है.

पुतिन से मिले किम जोंग उन, रूस आने का न्योता हुआ स्वीकार?

सियोल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को एक बार फिर रूस आने का निमंत्रण दिया। दोनों नेताओं की मुलाकात बीजिंग में द्वितीय विश्व युद्ध की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड के दौरान हुई। सूत्रों के अनुसार, पुतिन और किम की बैठक बीजिंग स्थित दियाओयुताई स्टेट गेस्ट हाउस में हुई। बैठक के बाद जब पुतिन किम को उनकी गाड़ी तक छोड़ने आए, तो किम ने कहा, “जल्द मिलेंगे।” इस पर पुतिन ने जवाब दिया, “मैं इंतजार करूंगा, कृपया आइए।” किम अब तक दो बार रूस का दौरा कर चुके हैं- 2019 और 2023 में। बातचीत के दौरान किम ने यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहे उत्तर कोरियाई सैनिकों की सराहना करने के लिए पुतिन का आभार जताया। पुतिन ने कहा कि वह कभी नहीं भूलेंगे कि कैसे उत्तर कोरियाई सैनिकों ने रूस के कुर्स्क मोर्चे पर “बहादुरी और वीरता” से लड़ाई लड़ी। इस पर किम ने इसे रूस की मदद करना उत्तर कोरिया का “भाईचारे का कर्तव्य” बताया। किम ने कहा कि पिछले वर्ष जून में रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर के बाद से दोनों देशों के संबंध हर क्षेत्र में मजबूत हुए हैं। इस संधि में आपसी रक्षा समझौता भी शामिल है, जिसके तहत किसी भी पक्ष पर सशस्त्र हमले की स्थिति में तुरंत सैन्य सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने यह भी वादा किया कि उत्तर कोरिया रूस की मदद के लिए “हर संभव प्रयास” करेगा। गौरतलब है कि अक्टूबर 2024 से उत्तर कोरिया रूस को लगभग 13,000 सैनिक और हथियार भेज चुका है।

यूक्रेन मुद्दे पर जर्मनी ने सराहा मोदी का शांति प्रयास

नई दिल्ली जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडफुल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ चीन के तियानजिन में हुई बैठक के दौरान यूक्रेन में शीघ्र शांति समझौते की अपील का स्वागत किया। उन्होंने इसे यूरोप के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करार दिया। वेडफुल ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा, “हमारे लिए जर्मनी और यूरोप में, रूस का आक्रमणकारी युद्ध अभी सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात में यूक्रेन में शीघ्र शांति समझौते की आवश्यकता पर जोर देना हमारे लिए अहम है। हम यूरोपीय देश, अमेरिका और यूक्रेन के साथ मिलकर इस युद्ध को जल्द समाप्त करने और यूक्रेन को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में शांति दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।” वेडफुल ने कहा कि उन्होंने भारत से आग्रह किया है कि वह रूस के साथ अपने संबंधों का उपयोग कर शांति बहाली की दिशा में संदेश दें। उन्होंने कहा, “मैं इस खुले संवाद के लिए आभारी हूं। शांति ही सुरक्षा, स्वतंत्रता और समृद्धि की आधारशिला है। सुरक्षा भविष्य में भी चुनौती बनी रहेगी, लेकिन हमें खुशी है कि भारत के पड़ोस में भी युद्धविराम लागू हुआ है।” वेडफुल ने यह भी आश्वासन दिया कि जर्मनी आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी का साझा उद्देश्य नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को संरक्षित करना है, जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री व्यापार मार्गों की स्वतंत्रता भी शामिल है। उन्होंने कहा, “चीन का आक्रामक व्यवहार हमारे लिए चिंता का विषय है। हमने रक्षा, सुरक्षा और आयुध क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इसमें हमारी सेनाओं के संयुक्त अभ्यास और इंडो-पैसिफिक में जुड़ाव के लिए निर्यात लाइसेंस प्रक्रिया को तेज करना शामिल है। पिछले वर्ष जर्मन युद्धपोत भारत आया था और हम इस सहयोग को और मजबूत करने के लिए तैयार हैं।” वेडफुल ने उम्मीद जताई कि जर्मनी के चांसलर जल्द ही भारत का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि साझा चुनौतियों से निपटने और द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता है। उन्होंने भारत को उभरती हुई आर्थिक शक्ति, विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश और सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए कहा कि वैश्विक व्यवस्था में भारत की रणनीतिक भूमिका बेहद अहम है।

भारत-अमेरिका टकराव: ट्रंप की पॉलिसी पर उठे सवाल, टैरिफ हटाने की बढ़ी मांग

वाशिंगटन  रूस से तेल आयात करने पर भारत पर नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50 फीसदी टैरिफ लगाया है, जिसका उनके देश में ही विरोध हो रहा है। तमाम एक्सपर्ट्स ट्रंप द्वारा भारत पर भयंकर टैरिफ लगाए जाने के खिलाफ हैं। एक एक्सपर्ट ने तो ट्रंप को भारत से माफी मांगने और जीरो टैरिफ करने की सलाह दी है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर एडवर्ड प्राइस ने कहा है कि 21वीं सदी को आकार देने में भारत का निर्णायक वोट है। ट्रंप के फैसले पर और अधिक आश्चर्य व्यक्त करते हुए भारत के साथ अमेरिका के संबंधों को महत्वपूर्ण बताया। प्राइस ने 'एएनआई' से कहा, “मैं भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी मानता हूं। यह साझेदारी तय करेगी कि चीन और रूस के बीच क्या होता है। 21वीं सदी में भारत के पास निर्णायक वोट है…भारत 21वीं सदी में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है और आगे और भी शक्तिशाली बनने की ओर अग्रसर है। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि चीन के साथ टकराव और रूस के साथ युद्ध में, अगर आप इस पर गौर करें, तो अमेरिका के राष्ट्रपति भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ क्यों लगा रहे हैं। हमें भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ हटाकर इसे कहीं अधिक उचित स्तर पर लाना होगा, मैं शून्य प्रतिशत टैरिफ लगाने का सुझाव देता हूं और माफी मांगने के लिए कहना चाहता हूं।” एडवर्ड प्राइस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और अमेरिका को याद दिलाया कि भारत के पास रूस-चीन गठबंधन को पूरी तरह से अपनाने के अलावा और भी विकल्प हैं, और बीजिंग की सैन्य परेड में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी काफी स्मार्ट तरीके से काम ले रहे हैं। वह अमेरिकियों को, मेरे जैसे लोगों को याद दिला रहे हैं कि उनके पास विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने चीन और रूस को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया है और न ही सैन्य परेड में शामिल हो रहे हैं।''प्राइस ने यह भी तर्क दिया कि भारत अपनी स्वतंत्र संप्रभुता के कारण कभी भी चीनी प्रभाव में नहीं आएगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत अपने फैसले खुद लेता है और किसी एक दिशा में कदम नहीं रखेगा।  

जंग का नया दौर… रूस ने यूक्रेन पर बरसाए सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें

कीव  रूस और यूक्रेन के बीच 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ युद्ध 42 महीने से अधिक समय से चल रहा है और अभी भी इसके रुकने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इस युद्ध के कारण हर दिन जान-माल का नुकसान हो रहा है। यूक्रेन में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और कई शहर तबाह हो चुके हैं। रूस के भी कई सैनिक इस युद्ध में मारे गए हैं। इतने नुकसान के बावजूद, रूस के यूक्रेन पर हमले जारी हैं। बीती रात रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। रूस ने यूक्रेन पर दागे 500 ड्रोन-मिसाइलें रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला करते हुए देर रात 526 ड्रोन-मिसाइलें दागीं, जिनमें 502 ड्रोन और 24 मिसाइलें शामिल थीं। यूक्रेन की वायुसेना ने इस रूसी हमले की जानकारी दी। इस हमले में मुख्य रूप से यूक्रेन का पश्चिमी हिस्सा निशाना बना। यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार, रूस द्वारा दागे गए 69 ड्रोन और 3 मिसाइलें 14 अलग-अलग स्थानों पर गिरीं। बाकी ड्रोन और मिसाइलों को यूक्रेनी वायुसेना ने नष्ट कर दिया, लेकिन उनका मलबा भी कई जगहों पर गिरा। इस हमले में कई लोग घायल हुए, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस हमले से कई घरों, इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। हाल के दिनों में हमले तेज हाल के दिनों में दोनों पक्षों की ओर से हवाई हमले तेज हो गए हैं। रूस, यूक्रेन की बिजली और परिवहन व्यवस्था को निशाना बना रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द से जल्द युद्ध समाप्त करना चाहते हैं। अगस्त में ट्रंप ने रूसी और यूक्रेनी राष्ट्रपतियों से अलग-अलग मुलाकात की थी। जेलेंस्की ने ट्रंप के युद्धविराम और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ आमने-सामने शांति वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, लेकिन क्रेमलिन ने इस पर आपत्ति जताई है। हाल ही में कूटनीतिक गतिविधियों के बीच, पुतिन ने चीन में चीनी नेता शी जिनपिंग, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। वाशिंगटन का दावा है कि ये देश रूस के युद्ध प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। चीन और भारत ने रूसी तेल खरीदा है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को मदद मिल रही है। वहीं, यूक्रेन पर लगातार हो रहे हमलों के बीच जेलेंस्की ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग की है। मंगलवार शाम को अपने संबोधन में जेलेंस्की ने कहा कि रूसी ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ रही है, जिसमें दिन के उजाले में भी हमले शामिल हैं। उन्होंने सहयोगी देशों से और समर्थन मांगा है, ताकि रूस के हमलों का जवाब दिया जा सके।  

क्या है DF-5C सिस्टम? US-चीन तनातनी के बीच भारत के लिए क्यों बना खतरे की घंटी

बीजिंग दुनिया की दो आर्थिक महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच तनातनी और व्यापार प्रतिस्पर्धा से लेकर सामरिक प्रतिस्पर्धा तक की होड़ किसी से छिपी हुई नहीं है। दो दिन पहले चीनी शहर तियनाजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक-दूसरे का हाथ थामे और हंसते-मुस्कुराते सम्मेलन हॉल में प्रवेश किया तो इस तिकड़ी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत पूरी दुनिया को एक नया संदेश दिया था। यह संदेश ऐसे वक्त में आया, जब दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाकर वैश्विक आलोचनाएं झेल रहा है। अब चीन ने द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ को मौके पर आयोजित वि क्ट्री परेड में न केवल राजधानी बीजिंग में अमेरिका के कट्टर दुश्मनों को एक मंच पर लाने की कोशिश की बल्कि कुल 26 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को इसमें शामिल कर ट्रंप को नई टेंशन दी है। इसी विक्ट्री परेड के जरिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को तीसरी टेंशन भी दे दी। अमूमन अपने हथियारों का प्रदर्शन नहीं करने वाले चीनी सैनिकों ने इस बार न सिर्फ भव्य परेड किया बल्कि अपने अत्याधुनिक हथियारों का भी प्रदर्शन किया। अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन चीन ने बुधवार को अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए जेट लड़ाकू विमान, मिसाइल और नवीनतम इलेक्ट्रॉनिक युद्ध हार्डवेयर सहित अपने कुछ आधुनिक हथियारों को पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाया है। चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने पहली बार हवाई-प्रक्षेपित परमाणु मिसाइल, जेएल-1, का एक सैन्य ट्रक पर प्रदर्शन किया है। यह मॉडल, मौजूद JL-3 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल से काफ़ी छोटा है, जो पनडुब्बी से ही प्रक्षेपित हो सकता है। सैन्य विश्लेषकों ने बताया है कि चीन ने इन दो मिसाइलों के अलावा DF-61 और DF-31 मिसाइलों का भी प्रदर्शन किया है, जो चीनी सेना को जल,थल और नभ -तीनों जगहों से दुश्मनों के ठिकानों पर न्यूक्लियर हमला करने में सक्षम बनाता है और चीन को पूरी सुरक्षा कवच उपलब्ध कराता है। इसी परेड में चीनी सेना ने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल DF-5C का भी प्रदर्शन किया है। इस मिसाइल के प्रदर्शन ने दुनिया को संदेश दिया है कि चीन की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता विश्वसनीय, भरोसेमंद और पर्याप्त है। क्या है DF-5C मिसाइल सिस्टम? यह डोंग फेंग-5 सीरीज का अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक न्यूक्लियर मिसाइल सिस्टम है। DF-5C लिक्विड-ईंधन से संचालित मिसाइल है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिसाइल की मारक क्षमता 20,000 किलोमीटर से ज्यादा है और यह टारगेट पर निशाना साधने के मामले में सर्वश्रेष्ठ है। इसका सीधा सा मतलब है कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया में कहीं भी यह मिसाइल सर्वनाश कर सकता है। एक ही समय में 10 अलग-अलग ठिकानों पर निशाना DF-5C कथित तौर पर 10 स्वतंत्र ठिकानों पर एक साथ हमले कर सकता है। इसका सीधा सा मतलब ये हुआ कि एक ही मिसाइल एक ही समय में 10 अलग-अलग स्थानों को निशाना बना सकती है। यह मिसाइल दुश्मन के सैन्य ठिकानों और अन्य अहम ठिकानों को एक बार में ही निशाना बना सकती है, और हमलों के क्रम को एडजस्ट कर सकता है। यह दुनिया के किसी भी हिस्से में परमाणु बम गिरा सकता है लेकिन इसे कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम इंटरस्पेट नहीं कर सकता है। भारत की भी बढ़ी चिंता इसका ट्रांसपोर्टेशन तीन अलग-अलग सेक्शन में होता है। इस वजह से इसकी तैनाती गुप्त हो जाकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि DF-5C की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्पीड है। यह आवाज से भी कई गुणा तेज गति से चल सकती है, इसकी वजह से दुनिया का कोई भी एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम इसे इंटरसेप्ट कर पाने में नाकाम रह सकता है। चीन के अत्याधुनिक हथियारों के प्रदर्शन ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन एक साझेदार देश के अलावा एक बड़ी चुनौती भी रहा है।  

आतंकी फंडिंग का पर्दाफाश! TRF ने मलेशिया से जुटाए लाखों रुपये, NIA जांच में खुलासा

नई दिल्ली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन, द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) के खिलाफ अपनी जांच में महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं। एनआईए ने श्रीनगर के एक व्यक्ति के मोबाइल फोन से 450 से अधिक कॉन्टैक्ट लिस्ट हासिल की है, जिससे टीआरएफ को धन मुहैया कराने वालों की पहचान करने में मदद मिली है। बता दें कि यह संगठन 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद बाद इससे पीछे हट गया था। जांच के दौरान, एनआईए को मलेशिया के जरिए हवाला मार्ग के संभावित इस्तेमाल का पता चला है जिससे टीआरएफ को फंडिंग की जा रही थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच में मलेशिया निवासी सज्जाद अहमद मीर का नाम सामने आया है। एक अन्य संदिग्ध, यासिर हयात के फोन कॉल डिटेल से पता चला कि वह मीर के संपर्क में था और पैसों की व्यवस्था कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, हयात ने टीआरएफ के लिए धन जुटाने के लिए कई बार मलेशिया की यात्रा की। हयात ने मीर की मदद से टीआरएफ के लिए 9 लाख रुपये जुटाए, जो संगठन के एक अन्य ऑपरेटिव शफात वानी को दिए गए। वानी टीआरएफ का एक प्रमुख ऑपरेटिव है और संगठन की गतिविधियों को संचालित करता है। यह भी पता चला कि वानी ने मलेशिया में एक विश्वविद्यालय में सम्मेलन में भाग लेने के बहाने यात्रा की थी, हालांकि विश्वविद्यालय ने इस यात्रा को स्पॉन्सर नहीं किया था। एनआईए की जांच में यह भी सामने आया कि हयात न केवल मीर के संपर्क में था, बल्कि वह दो पाकिस्तानी नागरिकों के साथ भी संपर्क में था। उसका मुख्य काम विदेशी ऑपरेटिव्स से संपर्क बनाए रखना और आतंकी संगठन के लिए धन जुटाना था। 13 अगस्त को, एनआईए ने कहा था कि उसने विदेशी फंडिंग के एक निशान का पता लगाया है, जिसकी गहन जांच की जा रही है। टीआरएफ को 2019 में लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी के रूप में बनाया गया था, ताकि इसे जम्मू-कश्मीर का स्थानीय संगठन दिखाया जा सके। इसका उद्देश्य हिजबुल मुजाहिदीन को रिप्लेस करना और स्थानीय आतंकी गतिविधियों को नई पहचान देना था। पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा को जवाबदेही से बचाने के लिए टीआरएफ को बनाया गया था, ताकि कश्मीर में कथित संघर्ष को स्थानीय दिखाया जा सके। इसके अलावा, पाकिस्तान चाहता था कि आतंकी हमले जारी रहें और साथ ही वह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी से भी बच सके। भारत ने टीआरएफ को एक आतंकी संगठन घोषित किया है और पाकिस्तान पर इसका समर्थन करने का आरोप लगाया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद, अमेरिका ने टीआरएफ को एक विदेशी आतंकी संगठन और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकी इकाई घोषित किया, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था। इस कदम ने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क को उजागर कर दिया। एनआईए की जांच अभी भी जारी है, और एजेंसी इस आतंकी संगठन के नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।  

आरक्षण विवाद गहराया: मंत्री नाराज, OBC संगठनों ने महाराष्ट्र सरकार को घेरा

मुंबई  अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कार्यकर्ता लक्ष्मण हाके ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार को मराठों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने की मांग स्वीकार करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ओबीसी समुदाय इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा। इधर, राज्य सरकार के फैसले पर कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल पहले ही नाराजगी दर्ज करा चुके हैं। हाके ओबीसी समूह के तहत मराठों को आरक्षण दिए जाने का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को कम करना चाहते हैं। उन्होंने पहले मराठों को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण दिए जाने की मनोज जरांगे की मांग के खिलाफ आंदोलन किया था। देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा पात्र मराठों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने सहित अधिकतर मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मंगलवार शाम को मुंबई में अपना पांच दिन से जारी अनशन समाप्त कर दिया। महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को मराठा समुदाय के सदस्यों को उनकी कुनबी विरासत के ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एक समिति के गठन की घोषणा की। कुनबी राज्य में एक पारंपरिक कृषक समुदाय है और उन्हें नौकरियों एवं शिक्षा में सरकारी आरक्षण का पात्र बनाने के लिए महाराष्ट्र में ओबीसी श्रेणी की सूची में शामिल किया गया है। सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश (जीआर) में हैदराबाद राजपत्र को लागू करने का भी उल्लेख किया गया है। हाके ने जीआर और वंशावली दस्तावेज वाले पात्र मराठों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दावा किया कि सरकार को आरक्षण के संबंध में इस तरह का जीआर जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राजपत्र में यह नहीं लिखा है कि मराठा सामाजिक रूप से पिछड़े हैं और उन्हें आरक्षण दिया जाना चाहिए। कार्यकर्ता ने पूछा, 'कौन कहता है कि राजपत्र में दर्ज राजस्व रिकॉर्ड उन्हें आरक्षण के योग्य बनाते हैं?' उन्होंने कहा, 'हैदराबाद राजपत्र में बंजारा को अनुसूचित जनजाति बताया गया है। क्या सरकार बंजारों को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण देगी? सरकार को एक मुद्दे को सुलझाने के लिए 10 और मुद्दे नहीं पैदा करने चाहिए। ओबीसी और वीजेएनटी (विमुक्त जाति और घुमंतू जनजातियां) अब सड़कों पर उतरेंगे।' उन्होंने कहा कि नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे ओबीसी आरक्षण में कटौती को तैयार हैं।  

दुनिया भर में चर्चा बटोर रही किम जोंग उन की 12 साल की बेटी किम जू, क्यों ले गए थे चीन

बीजिंग उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की बीजिंग यात्रा की काफी चर्चा है। व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ उनकी तस्वीरें इंटरनेशनल मीडिया में सुर्खियां बटोर रही हैं। कहा जा रहा है कि किम जोंग उन को इस तरह महत्व मिलना उन्हें दुनिया के एकांतवास से बाहर निकालने वाला है। यही नहीं उनकी 12 साल की बेटी और संभावित उत्तराधिकारी किम जू ए भी चर्चा में हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि किम जोंग उन पहली बार किसी विदेश दौरे पर बेटी को लेकर गए थे। किम जोंग उन के साथ ही उनकी बेटी नजर आईं और उनका परिचय खुद पिता ने पुतिन और शी जिनपिंग जैसे नेताओं से कराया। चीन की राजधानी बीजिंग में हुई विक्ट्री डे परेड में भी वह किम जोंग उन के आसपास ही बनी रहीं। यह पहला मौका था, जब किम जोंग उन की बेटी को दुनिया ने किसी सार्वजनिक आयोजन में देखा। जानकारों का कहना है कि जिस तरह वह पिता के साथ-साथ दिखीं और उनका परिचय वैश्विक नेताओं से कराया गया, इससे संकेत मिलता है कि वही किम जोंग उन की उत्तराधिकारी होंगी। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि किम जोंग उन की आयु फिलहाल 41 साल ही है। किम जोंग उन और उनके परिवार को लेकर दुनिया को बहुत कम ही जानकारी ही है। वजह है कि उत्तर कोरिया में मीडिया पर काफी पाबंदियां हैं और वहां से जानकारियां बाहर कम ही आती हैं। किम जोंग उन की बेटी जू ए के बारे में दुनिया को पहली बार पहली बार 2022 में ही जानकारी मिली थी। जब वह अपने पिता के साथ एक बलिस्टिक मिसाइल लॉन्च के कार्यक्रम में गई थीं। पूर्व एनबीए स्टार डेनिस रॉडमैन ने दुनिया को बताया था कि वह किम की बेटी हैं। रॉडमैन ने कहा था कि 2013 में वह प्योंगयांग गए थे और इस दौरान उनकी किम से मुलाकात हुई थी। इस मीटिंग के दौरान किम जोंग उन ने अपनी पत्नी रि सोल जू और एक छोटी बच्ची से भी परिचय कराया था। तब उन्होंने कहा था कि यह मेरी बेटी है। प्योंगयांग का सरकारी मीडिया कभी भी बेटी का नाम नहीं लिखता, लेकिन साउथ कोरिया के खुफिया सूत्रों के अनुसार जू ए किम की बेटी ही हैं। वैश्विक नेताओं से मिलतीं किम जू ए उत्तर कोरिया के नेता की शादी 2009 में हुई थी। बीते कुछ सालों में उत्तर कोरिया के मीडिया में किम जू ए के बारे में रिपोर्टिंग होती रही है, लेकिन उन्हें प्यारी बच्ची या फिर होनहार बच्ची कहके संबोधित किया जाता रहा है। उत्तर कोरिया से आई तस्वीरों में अकसर दिखता है कि बड़ी आयु के लोग भी बच्ची के आगे सिर झुकाते हैं। इससे भी अनुमान लगाया गया कि शायद वही किम जोंग उन की बेटी और सत्ता की वारिस हैं। यही नहीं सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह अकसर अपनी बुआ किम यो जोंग और मां से आगे चलती दिखती हैं।

शहबाज शरीफ पर हो रही खिल्ली, पुतिन के सामने 3 साल बाद फिर повтор हुआ हादसा

नई दिल्ली  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मियां शहबाज शरीफ इन दिनों चीन के दौरे पर हैं। वहां उनकी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती हुई है। पाक पीएम को तब शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, जब वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन से इतर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक मीटिंग कर रहे थे। हुआ यूं कि इस बातचीत के दौरान शहबाज शरीफ बार-बार ईयर फोन लगाने की कोशिश करते दिखे, जबकि सामने बैठे रूसी राष्ट्रपति उन्हें इशारों में ईयर फोन लगाने के लिए बताते रहे। बड़ी बात ये है कि राष्ट्रपति पुतिन से सामने पाक पीएम की यह बेइज्जती दूसरी बार हुई है। तीन साल पहले जब उज्बेकिस्तान में दोनों नेता मिले थे, तब उस वक्त भी शहबाज शरीफ को इसी तरह के शर्मनाक वाकये का सामना करना पड़ा था। अब इस वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुतिन इशारों में समझाते रहे वायरल वीडियो में दिख रहा है कि शहबाज शरीफ का ईयरफोन हेडसेट कानों में लगाने की कोशिश करने के बावजूद फिसलकर बार-बार गिर जा रहा है। इस दौरान पुतिन कुछ सेकंड तक जद्दोजहद करते शहबाज़ शरीफ को देखकर मुस्कुराते नजर आए। वैश्विक मंच पर शर्मिंदगी से बचने की कोशिश में, रूसी नेता ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति को अपना ईयरफोन उठाकर दिखाया कि उसे कैसे लगाया जाता है। सोशल मीडिया पर उड़ रही खिल्ली सोशल मीडिया यूजर्स इस वाकए पर शहबाज शरीफ की खिल्ली उड़ा रहे हैं। एक एक्स यूज़र ने ईयरफ़ोन में आई गड़बड़ी का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "बीजिंग में शहबाज़ शरीफ़ का ईयरफोन फिसलने पर पुतिन फिर से हँस पड़े।" एक अन्य यूजर ने पूछा, "ये पुराना वीडियो है या फिर से हुआ?" एक अन्य ने पूछा, "पुतिन के सामने वो हमेशा इतना नर्वस क्यों हो जाते हैं?" एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, "पुतिन उसे ईयरफोन लगाना सिखा रहे हैं। हाहा।" अन्य ने लिखा, "बार-बार!" पहले भी इसी तरह का वाकया बहरहाल, यह पहली बार नहीं है जब शरीफ़ को ईयरफ़ोन लगाने में परेशानी हुई हो। उज़्बेकिस्तान में 2022 के शिखर सम्मेलन के दौरान भी उन्हें इसी पुतिन के सामने इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा था। जब उनकी बातचीत शुरू होने वाली थी, तभी उनके ईयरफ़ोन बार-बार फिसल रहे थे, और उनके अधिकारियों द्वारा उन्हें ठीक करने की कोशिश के बावजूद यह सिलसिला चलता रहा था। इस वाकये पर विदेशी टिप्पणीकारों के साथ-साथ पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने भी इसकी आलोचना की थी। कॉमेडियन जिमी फॉलन ने मज़ाक में कहा था, "आश्चर्यजनक बात यह है कि शहबाज़ शरीफ़ दुनिया की 22 करोड़ आबादी के प्रधानमंत्री हैं।"