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बिहार वोटर विवाद: शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को लगाई फटकार, मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग (ईसी) को निर्देश दिया है कि वह बिहार के ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 65 लाख मतदाताओं की पूरी जानकारी 9 अगस्त तक पेश करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह जानकारी उन राजनीतिक दलों के साथ-साथ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) नाम की एनजीओ को भी दी जाए, जिसने इस मुद्दे पर याचिका दाखिल की है। क्या है मामला? चुनाव आयोग ने बिहार में 24 जून को 'विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर)' शुरू किया था। इसके तहत 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई, जिसमें 7.24 करोड़ मतदाता दिखाए गए। लेकिन इसमें से 65 लाख से अधिक वोटरों के नाम हटा दिए गए। चुनाव आयोग का कहना है कि ये लोग या तो मर चुके हैं, दूसरी जगह स्थायी रूप से चले गए हैं, या दो जगहों पर नाम था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ? जस्टिस सूर्यकांत, उज्जल भुयान और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने चुनाव आयोग से कहा, 'हमें हर उस वोटर की जानकारी चाहिए जिसका नाम हटाया गया है। ये देखें कि किस आधार पर नाम हटे हैं।' वहीं एनजीओ की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि, 'राजनीतिक पार्टियों को हटाए गए वोटरों की लिस्ट दी गई है, लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया कि कौन मरा है, कौन शिफ्ट हुआ है, या किसका नाम गलत तरीके से हटा।' कोर्ट ने चुनाव आयोग को कहा कि वह 9 अगस्त तक जवाब दाखिल करे, ताकि 12-13 अगस्त को इस मामले पर पूरी सुनवाई हो सके। एडीआर की याचिका में क्या मांग की गई? एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने मांग की है कि 65 लाख हटाए गए नामों की पूरी सूची प्रकाशित की जाए। हर नाम के साथ यह भी बताया जाए कि उसे क्यों हटाया गया, मौत, स्थायी स्थानांतरण या कोई अन्य वजह। चुनाव आयोग ने कोर्ट में क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने हलफनामा देकर कहा, 'हम वोटर लिस्ट को साफ करने का काम कर रहे हैं। हमारा मकसद है कि अपात्र लोग हटें और केवल सही लोग वोटर लिस्ट में रहें।' एसआईआर के दौरान आयोग ने क्या दिया आंकड़ा इसमें मौत की वजह से करीब 22.34 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। वहीं स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए करीब 36.28 लाख मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची से हटाए घए हैं। वहीं जिन मतदाताओं के नाम दो जगहों पर थे उनकी संख्या करीब 7.01 लाख है। सुप्रीम कोर्ट ने की पहले क्या की थी टिप्पणी इससे पहले 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि आधार कार्ड और वोटर आईडी को गंभीरता से मान्य दस्तावेज माना जाए और इनसे नाम हटाने की बजाय जोड़ने की प्रक्रिया पर जोर दिया जाए।

ट्रंप की ट्रेड वॉर जारी: भारत पर टैरिफ दोगुना, अब देना होगा 50% शुल्क

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एक बार फिर झटका दिया है। अमेरिकी सरकार ने भारत पर 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ की घोषणा की है। ट्रंप सरकार पिछले कुछ दिनों से भारत पर रूसी तेल खरीदने और यूक्रेन युद्ध में रूस को फंडिंग का आरोप लगा रहा है। ट्रंप ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि वो 24 घंटे के भीतर भारत पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं। ट्रंप सरकार पहले ही भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा चुकी है। पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और भारत में व्यापारिक तनाव देखने को मिल रहा है। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन ने भारत पर रूसी तेल खरीदने का आरोप लगाया था। ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल ऐलान किया था कि वो 24 घंटे के भीतर भारत पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगाएंगे। बुधवार को ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ की घोषणा कर दी। इसके तहत अब भारत पर अमेरिका ने 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। भारत पर टैरिफ से घर में ही घिरे ट्रंप ट्रंप के भारत को लेकर दी जा रही टैरिफ धमकी उनके ही घर अमेरिका में बवाल कर रही है। रिपब्लिकन नेता और पूर्व गवर्नर निक्की हेली ने ट्रंप के फैसले की आलोचना की थी। हेली ने दो टूक शब्दों में ट्रंप को सलाह दी थी कि वो भारत से संबंध खराब न करे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि भारत से तनाव की स्थिति में सीधा-सीधा फायदा चीन को होगा। निक्की हेली ने कहा था कि ट्रंप को भारत और चीन को एक समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। बता दें कि ट्रंप ने पहले चीन से व्यापारिक युद्ध में 125 फीसदी तक टैरिफ बढ़ा दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों में बातचीत हुई और फिर ट्रंप सरकार ने चीन को टैरिफ पर 90 दिन की मोहलत दी। भारत दिखा चुका सख्ती ट्रंप के आरोपों और टैरिफ धमकियों पर भारत अमेरिका को सख्त जवाब दे चुका है। बीते दिनों भारतीय विदेश मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में कहा था कि अमेरिका और यूरोपीय संघ खुद रूस से व्यापार कर रहा है और वो भारत को कैसे ऐसा करने से रोक सकता है। भारत ने यह भी कहा कि 2022 में यूक्रेन युद्ध के दौरान जब भारत ने रूस से तेल व्यापार शुरू किया, तब अमेरिका ने ही उसका प्रोत्साहन किया था। भारत ने यह भी कहा कि उसके लिए देश के नागरिकों के हित और सुरक्षा सर्वोपरी हैं, सरकार अपने मूल्यों से समझौता नहीं करेगी।  

CISF भर्ती को मिली हरी झंडी, 700 जवान करेंगे इस खास स्थल की निगरानी

नई दिल्ली सरकार ने कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरियट (सीसीएस) की सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक बल (सीआईएसएफ) को 700 से ज्यादा कर्मियों की भर्ती की मंजूरी दे दी है। सीसीएस के पहले भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बुधवार, (06 अगस्त, 2025) को किया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सभी 10 सीसीएस बिल्डिगों की सुरक्षा सीआईएसएफ की केंद्र सरकार भवन सुरक्षा (सीजीबीएस) यूनिट करेगी। ये यूनिट गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। सीआईएसएफ विंग देश की राजधानी में सभी मौजूदा केंद्रीय सरकारी मंत्रालयों और उससे जुड़े विभागों की सुरक्षा करता है।   735 अतिरिक्त कर्मियों की नियुक्ति को दी मंजूरी सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में सीजीबीएस इकाई के लिए 735 अतिरिक्त कर्मियों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। ये कर्मी बिल्डिंग नंबर 1, 2 और 3 की सुरक्षा करेंगे। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे सीसीएस बिल्डिंग चालू होंगी, यूनिट को ज्यादा मानव संसाधनों की जरूरत होगी और उम्मीद है कि जल्द ही वो उपलब्ध कराए जाएंगे। कितनी हो जाएगी यूनिट की क्षमता नए मानव संसाधन के साथ सीजीबीएस यूनिट की क्षमता लगभग 5 हजार कर्मियों की हो जाएगी। सूत्रों ने ये भी बताया कि यूनिट को तालकटोरा स्टेडियम स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के विस्तार कार्यालय और चाणक्यपुरी स्थित सुषमा स्वराज भवन की सुरक्षा के लिए लगभग 200 अतिरिक्त कर्मियों की भी मंजूरी दी गई है। सीसीएस बिल्डिंग संख्या 1 और 2 का निर्माण अगले महीने तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि सीसीएस 10 का निर्माण अगले साल अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा। सीसीएस बिल्डिंग नंबर 6 और 7 का प्रोजेक्ट अक्टूबर 2026 तक पूरा होगा। कर्तव्य भवन-03 में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय स्थित है।

टोल से अरबों की कमाई! भारत में किस राज्य का योगदान सबसे ज्यादा?

नई दिल्ली  जब भी आप अपनी गाड़ी से किसी राष्ट्रीय राजमार्ग या एक्सप्रेसवे पर निकलते हैं तो एक चीज का सामना जरूर करते हैं – टोल प्लाजा। यह सिर्फ एक टैक्स नहीं है बल्कि भारत सरकार की कमाई का एक बड़ा जरिया भी बन चुका है। अब सवाल ये उठता है कि देश में कुल कितने टोल प्लाजा हैं और इनसे हर दिन कितनी कमाई होती है? इस सवाल का जवाब जानकर आप चौंक सकते हैं। क्योंकि टोल टैक्स से हर दिन करोड़ों की कमाई हो रही है जो सीधे देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में इस्तेमाल हो रही है। देश में कितने टोल प्लाजा हैं? सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 तक देशभर में कुल 1,087 टोल प्लाजा सक्रिय हैं। ये टोल प्लाजा भारत के विशाल 1.5 लाख किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा हैं। हालांकि, इन सभी सड़कों पर टोल नहीं लिया जाता। वर्तमान में करीब 45,000 किलोमीटर सड़क नेटवर्क पर टोल वसूली होती है। पिछले कुछ वर्षों में टोल प्लाजा की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। पिछले 5 सालों में ही 457 नए टोल प्लाजा बनाए गए हैं। यह बढ़ोतरी न सिर्फ नए सड़कों के निर्माण का संकेत देती है बल्कि देशभर में फास्टैग टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग का भी परिणाम है। हर दिन कितनी होती है टोल से कमाई? अगर आप सोचते हैं कि टोल प्लाजा से मामूली कमाई होती होगी तो आप गलत हैं। लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, देश के 1,087 टोल प्लाजा से हर दिन औसतन 168.24 करोड़ रुपये की कमाई होती है। यह आंकड़ा सालाना आधार पर 61,408.15 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। इस रकम का उपयोग सड़कों के रखरखाव, नए निर्माण और आधारभूत संरचना को मजबूत करने में किया जाता है। फास्टैग से बढ़ी टोल की वसूली फास्टैग सिस्टम लागू होने के बाद से टोल वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। अब टोल प्लाजा पर डिजिटल पेमेंट के माध्यम से न सिर्फ समय की बचत हो रही है बल्कि टोल चोरी जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी तरीके से लगाम लगी है। इसका सीधा असर टोल संग्रह पर पड़ा है। अगर आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2019-20 में टोल वसूली जहां 27,504 करोड़ रुपये थी वहीं वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 55,882 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यानी मात्र चार वर्षों में टोल से होने वाली कमाई लगभग दोगुनी हो चुकी है। पिछले पांच वर्षों में कुल टोल वसूली का आंकड़ा 1.93 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है, जो यह दर्शाता है कि फास्टैग ने किस तरह से देश के टोल सिस्टम को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाया है।   देश के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल प्लाजा हर टोल प्लाजा से होने वाली कमाई समान नहीं होती। देश में कुछ ऐसे मार्ग हैं जहां से भारी संख्या में वाहन गुजरते हैं और इन मार्गों पर स्थित टोल प्लाजा सबसे अधिक कमाई करते हैं। इन रूट्स पर खासतौर से औद्योगिक ट्रैफिक, भारी वाणिज्यिक वाहन और हाई डिमांड यात्रा मार्ग होने के कारण टोल वसूली काफी अधिक होती है। सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल प्लाजा में गुजरात के वडोदरा-भरूच खंड पर स्थित भरथना टोल प्लाजा पहले स्थान पर है, जिसने वर्ष 2023-24 में अकेले 472.65 करोड़ रुपये की कमाई की। इसके बाद राजस्थान का शाहजहांपुर टोल प्लाजा, पश्चिम बंगाल का जलाधुलागोरी टोल प्लाजा, उत्तर प्रदेश का बड़ाजोर टोल प्लाजा और हरियाणा का घरौंडा टोल प्लाजा क्रमशः दूसरे से पांचवें स्थान पर आते हैं। इन सभी टोल प्लाजा से प्रतिवर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये की कमाई होती है जो देश के राजमार्गों के वित्तीय योगदान को दर्शाती है। टोल टैक्स से कैसे बदल रहा है भारत का रोड नेटवर्क? टोल वसूली से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग केवल राजस्व जुटाने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य देश के सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना है। इस राशि का इस्तेमाल सड़कों के नियमित रखरखाव और मरम्मत, नई सड़कों और एक्सप्रेसवे के निर्माण, सड़क सुरक्षा में सुधार और डिजिटल टोलिंग सिस्टम को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है। इससे न केवल देशभर में यात्रा अधिक सहज और सुरक्षित हुई है बल्कि फास्टैग जैसी तकनीकों के कारण यात्रियों का कीमती समय भी बच रहा है, जिससे सड़क परिवहन पहले से कहीं अधिक कुशल और तेज़ बन चुका है।  

पटियाला में संकट की आहट, सतर्क रहने की अपील

पटियाला हिमाचल प्रदेश में हो रही भारी बारिश के कारण जहां पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, वहीं पटियाला में भी खतरे की घंटी बज चुकी है। दरअसल, घग्गर नदी में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पिछले 24 घंटों में यह तेजी से बढ़ा है। इसी को देखते हुए पटियाला प्रशासन ने घग्गर नदी के आसपास बसे एक दर्जन से अधिक गांवों के लिए एडवाइजरी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच चुका है, जिस कारण राजपुरा, घनौर और अन्य आसपास के इलाकों के लोगों से नदी की ओर न जाने की अपील की गई है। इस दौरान पटियाला की उपायुक्त (डीसी) प्रीति यादव ने नागरिकों से सतर्क रहने, अफवाहें न फैलाने और पानी से संबंधित किसी भी आपात स्थिति की तुरंत सूचना जिला कंट्रोल रूम के नंबर 0175-2350550 पर देने की अपील की है। दूसरी ओर, पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश के चलते ब्यास और सतलुज नदियों में भी जलस्तर बढ़ रहा है। हरीके हेड से लेकर हुसैनीवाला हेड तक 20,000 से 25,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। हुसैनीवाला हेड पर तीन से चार गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है, जो फाजिल्का की ओर जाएगा। इधर, कांगड़ा और होशियारपुर जिले के तलवाड़ा में ब्यास नदी पर बने पोंग डैम का जलस्तर भी केवल 24 घंटे में तीन फीट तक बढ़ गया है। बुधवार शाम पांच बजे यहां भी डैम के गेट खोलने की तैयारी है। प्रशासन ने निचले इलाकों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। 

श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर: वैष्णो देवी बोर्ड को मिला नया CEO, जानिए नाम

श्रीनगर/जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल Manoj Sinha के निर्देश पर प्रशासन में बड़ा फेरबदल किया गया है जिसके तहत 14 अधिकारियों को ट्रांसफर किया गया है जिनमें जिला उपायुक्त भी शामिल हैं। मंगलवार को प्रशासनिक स्तर पर हुए फेरबदल में 10 आई.ए.एस. और 4 जे.के.ए.एस. अधिकारियों को बदला गया है। सामान्य प्रशासनिक विभाग (जी.ए.डी.) के आयुक्त सचिव एम. राजू की ओर से जारी आदेश के तहत श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के  CEO Anshul Garg को डिवीजनल कमिश्नर कश्मीर के पद पर नियुक्त किया गया है जबकि जिला उपायुक्त Sachin Kumar Vaishya को श्री माता वैष्णो देवी श्राईन बोर्ड का CEO नियुक्त किया गया है। कठुआ के डिप्टी कमिश्नर डॉ. राकेश मिन्हास को जम्मू का नया जिला उपायुक्त बनाया गया है। 

शिमला ट्रैजेडी: तेज रफ्तार ने छीने तीन युवा जीवन, पब्बर नदी बना काल

हिमाचल  शिमला जिले के रोहड़ू क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है। चिड़गांव के पास एक कार पब्बर नदी में गिर गई, जिसमें तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है। यह हादसा रात करीब 12 बजे हुआ, जब चार युवक स्थानीय लैला मेले से रोहड़ू की तरफ लौट रहे थे। पुलिस को आशंका है कि खराब मौसम और तेज बारिश के कारण कार सड़क से फिसलकर नदी में जा गिरी। सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद नदी से तीनों युवकों के शव बाहर निकाले गए। मृतकों की पहचान चिड़गांव क्षेत्र के रहने वाले विशाल ठाकुर, अभय खंडियान और हिमांशू के तौर पर हुई है। इस हादसे में घायल हुए चौथे युवक हर्ष चौहान को तुरंत रोहड़ू अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना से पूरे इलाके में शोक का माहौल है। यह दुर्घटना स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ी त्रासदी है, क्योंकि चारों युवक एक ही क्षेत्र के रहने वाले थे। पुलिस का कहना है कि वे इस दुखद घटना के कारणों की पूरी तरह से जांच कर रहे हैं।  

इमरजेंसी मिशन बना काल: मेडिकल विमान क्रैश में किसी की नहीं बची जान

वाशिंगटन  अमेरिका के उत्तरी एरिजोना के नवाजो नेशन में मंगलवार को एक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने और फिर उसमें आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने एक बयान में यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, यह चिकित्सीय परिवहन विमान था जिसमें बीमार, घायल या जरूरतमंद मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता था। न्यू मेक्सिको के अल्बुर्क की सीएसआई विमानन कंपनी से संबंधित यह विमान चिनले के हवाई अड्डे के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान में चिकित्साकर्मी सवार थे और वे एक मरीज को लेने अस्पताल जा रहे थे। संघीय विमानन प्रशासन के अधिकारियों ने एक ईमेल में बताया कि विमान दोपहर में हवाई अड्डे पर उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें बताया गया कि राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड और एफएए मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के कारण का पता नहीं चल पाया है। नवाजो नेशन के शीर्ष नेता बुउ न्यग्रेन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस हादसे के बारे में जानकर उन्हें दुख हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘ये वे लोग थे जिन्होंने दूसरों को बचाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और नवाजो नेशन में उनकी कमी हमेशा खलेगी।''   

दिल्ली समेत पूरे देश में बिजली बिल में बढ़ोतरी तय, सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त अनुमति

नई दिल्ली  देश की राजधानी दिल्ली में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दिल्ली में बिजली की दरें बढ़ाने की अनुमति दे दी है। यह फैसला उन बकाया भुगतानों से जुड़ा है, जो बिजली वितरण कंपनियों को सरकार से मिलने थे। क्या हैं सुप्रीम कोर्ट की शर्तें? सुप्रीम कोर्ट ने बिजली की कीमतें बढ़ाने की मंजूरी देते हुए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं। कोर्ट ने कहा कि बढ़ोतरी Reasonable and Affordable होनी चाहिए। इसके अलावा कीमतें दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) द्वारा तय की गई सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने DERC को एक विस्तृत रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह बताया जाए कि बिजली की दरें कैसे, कब और कितनी बढ़ाई जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार ये बढ़ी हुई दरें सभी तरह के उपभोक्ताओं – व्यक्तिगत, आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक  पर लागू होंगी। अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा असर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे देश के अन्य राज्यों पर भी पड़ सकता है। दरअसल यह मामला बिजली वितरण कंपनियों के Regulatory assets के बकाया भुगतानों को लेकर था। कोर्ट ने सभी लंबित भुगतानों को अगले चार साल के भीतर चुकाने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि जिन राज्यों में लंबे समय से ये भुगतान अटके हुए हैं, वहां भी आने वाले चार सालों में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। नियामक परिसंपत्तियों का मतलब उन बकाया भुगतानों से है, जो बिजली वितरण कंपनियां राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली सप्लाई के बदले मांगती हैं। 

अमेरिकी दबाव को भारत ने किया खारिज, रूस से दोस्ती में नहीं आएगी कोई रुकावट

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को  25% टैरिफ लगाने की धमकी  और रूस से तेल खरीद को लेकर  प्रतिबंधों की चेतावनी के बावजूद, भारत ने साफ किया है कि वह  रूस के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक सहयोग को कमजोर नहीं होने देगा । मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार और रूस के उप रक्षा मंत्री कर्नल जनरल अलेक्जेंडर फोमिन के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने मजबूत रक्षा सहयोग की पुन: पुष्टि की। ट्रंप की सख्त भाषा: "भारत को कीमत चुकानी होगी" हाल ही में ट्रंप ने दो कड़े रुख अपनाए।    ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि भारत रूस से तेल और हथियार खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका भारत से आयात होने वाले कई प्रमुख उत्पादों पर  25% आयात शुल्क (Tariff) लगा सकता है। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि रूस से कच्चा तेल और रक्षा उपकरण खरीदने पर भारत को CAATSA के तहत सजा दी जा सकती है।  ट्रंप ने कहा कि "भारत अगर रूस को समर्थन देता है, तो उसे अमेरिका से व्यापार में इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।"    भारत का दो टूक जवाब  भारत ने दो टूक कहा है कि उसकी नीति "रणनीतिक स्वायत्तता"  पर आधारित है, और वह  किसी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा। रूस से भारत की दोस्ती गहरी और पुरानी है और हमेशा रहेगी। भारत और रूस के संबंध ऐतिहासिक और विश्वसनीय रक्षा साझेदारी पर आधारित हैं। भारत रूस से Su-30MKI,  S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, पनडुब्बी तकनीक, और ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली सहित कई सामरिक रक्षा सौदे कर चुका है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत के राजदूत विनय कुमार और रूसी उप रक्षा मंत्री फोमिन की यह बैठक "पारंपरिक गर्मजोशी और दोस्ती के माहौल में" हुई जिसमे रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मज़बूत करने की रणनीति,  हथियार प्रणालियों के संयुक्त विकास और विनिर्माण पर चर्चा की गई तथा  भारत-रूस के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग को लंबी अवधि तक बनाए रखने का संकल्प लिया।   भारत की संतुलित नीति  अमेरिका और पश्चिमी देशों की नाराज़गी के बावजूद भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल आयात  करना जारी रखा। भारत संयुक्त राष्ट्र और अन्य मंचों पर  यूक्रेन युद्ध पर संतुलित रुख अपनाता रहा है।  विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की यह रणनीति उसे बहुध्रुवीय वैश्विक शक्ति** के रूप में उभार रही है। भारत का मानना है कि रूस के साथ रक्षा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करते हैं।रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta)  को बढ़ावा देते हैं और  पश्चिमी दबाव के बावजूद  वैश्विक स्तर पर स्वतंत्र कूटनीति को दर्शाते हैं।