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ट्रेन में सफर कर रहीं 56 लड़कियां, टिकट चेकिंग में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में 56 लड़कियों को रेलवे पुलिस ने बचाया है और दो लोगों को अरेस्ट किया गया है। इन लड़कियों को न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन से बचाया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन युवतियों को टिकट चेकिंग के दौरान पकड़ा गया तो पता चला कि इन्हें जानकारी भी नहीं है कि आखिर इन्हें कहां ले जाया जा रहा है। इनती सारी लड़कियों को एक साथ यात्रा करते देखकर संदेह हुआ। जांच पर पता चला कि इन लोगों को बेंगलुरु में नौकरी दिलाने का वादा किया गया था। ऐसे में सवाल है कि बेंगलुरु में नौकरी का वादा था तो फिर बिहार क्यों ले जाया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि इन युवतियों को सोमवार देर रात न्यू जलपाईगुड़ी-पटना कैपिटल एक्सप्रेस से बचाया गया। बचाई गई इन युवतियों की आयु 18 से 31 वर्ष के बीच है। अधिकारियों ने बताया कि ये महिलाएं पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलीपुरद्वार जिलों की रहने वाली हैं और उन्हें बेंगलुरु की एक कंपनी में नौकरी दिलाने का कथित तौर पर झूठा वादा करके बहकाया गया था। उन्होंने बताया कि उन्हें ट्रेन से बिहार भेजा जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी महिला के पास वैध टिकट नहीं था और उनके हाथों पर केवल कोच एवं बर्थ संख्या की मुहर लगी हुई थी। एक महिला और एक पुरुष को किया गया गिरफ्तार उन्होंने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कर्मियों को ट्रेन की नियमित जांच के दौरान इतनी सारी युवतियों को एक साथ यात्रा करते देखकर संदेह हुआ। इसके बाद में पूछताछ हुई तो गंभीर विसंगतियां सामने आईं। अधिकारियों ने बताया कि एक पुरुष और एक महिला को विरोधाभासी बयान देने पर मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि जब महिलाओं को बेंगलुरु में नौकरी दिलाने का वादा किया गया था तो उन्हें बिहार क्यों भेजा जा रहा था। मानव तस्करी का संदेह, जांच में जुटा रेलवे प्रशासन अधिकारियों ने बताया कि वे नौकरी की पेशकश या यात्रा के वैध कारणों की पुष्टि करने वाले कोई भी दस्तावेज पेश करने में विफल रहे। उन्होंने बताया कि जीआरपी और राजकीय रेलवे पुलिस (आरपीएफ) खासकर मानव तस्करी के पहलू से मामले की संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं। आरपीएफ ने बताया कि लड़कियों को उनके परिवारों को सौंप दिया गया है।  

भारत-मालदीव रिश्तों में गर्माहट: स्वतंत्रता समारोह में प्रधानमंत्री मोदी होंगे मुख्य अतिथि

नई दिल्ली मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार दो दिवसीय मालदीव की यात्रा पर जा रहे हैं। वह मालदीव की आजादी की 60वीं सालगिरह के जश्न में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। प्रधानमंत्री 25 और 26 जुलाई को मालदीव में रहगें। राष्ट्रपति मुइज्जू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मालदीव आने का न्योता दिया था। अपने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्य अतिथि बनाना इस बात की ओर संकेत करता है कि मालदीव और भारत के रिश्ते फिर से पटरी पर लौट रहे हैं। वहीं मालदीव को अपनी पिछली गलतियों का अहसास भी हो गया है। इस यात्रा का उद्देश्य भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। मुक्त व्यापार समझौते से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 60 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना करने का मार्ग प्रशस्त होगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी पहले चरण में दो दिवसीय यात्रा पर ब्रिटेन जाएंगे और फिर मालदीव की यात्रा करेंगे। क्यों अहम है पीएम मोदी की यह यात्रा प्रधानमंत्री की 25 से 26 जुलाई तक होने वाली मालदीव यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह द्विपक्षीय संबंधों को पुनः स्थापित करने का प्रतीक है। चीन समर्थक माने जाने वाले मोहम्मद मुइज्जू के नवंबर 2023 में सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा हो गया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अपनी यात्रा के पहले चरण में मोदी 23 से 24 जुलाई को ब्रिटेन की यात्रा पर जाएंगे और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर के साथ व्यापक वार्ता करेंगे। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की लंदन यात्रा के दौरान भारत और ब्रिटेन द्वारा मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किये जाने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन ने समझौते पर हस्ताक्षर करने की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली है। मई में भारत और ब्रिटेन ने मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया था, जिससे 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को टैरिफ से लाभ मिलने की उम्मीद है और इससे ब्रिटिश कंपनियों के लिए भारत में व्हिस्की, कार और अन्य उत्पादों का निर्यात आसान हो जाएगा, साथ ही समग्र व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। यूरोपीय संघ छोड़ने के बाद ब्रिटेन द्वारा किए गए सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के साथ-साथ, दोनों पक्षों ने दोहरे योगदान समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। यह भारतीय कामगारों के नियोक्ताओं को ब्रिटेन में सामाजिक सुरक्षा अंशदान देने से छूट प्रदान करता है। अधिकारियों के अनुसार, तीन वर्षों की बातचीत के बाद तय हुए इस व्यापार समझौते से सभी क्षेत्रों में भारतीय वस्तुओं के लिए व्यापक बाजार पहुंच सुनिश्चित होने की उम्मीद है और भारत को लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइन (उत्पाद श्रेणियों) पर टैरिफ हटने से लाभ होगा, जो लगभग 100 प्रतिशत व्यापार मूल्यों को कवर करेगा। ब्रिटेन सरकार के एक बयान में कहा गया था कि भारतीय टैरिफ में कटौती की जाएगी, जिससे 90 प्रतिशत टैरिफ लाइन में कटौती सुनिश्चित हो जाएगी, तथा इनमें से 85 प्रतिशत एक दशक के भीतर पूरी तरह टैरिफ मुक्त हो जाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक वर्तमान 60 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना हो जाएगा। विदेश मंत्रालय ने  दो देशों की यात्रा की घोषणा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, स्टॉर्मर के साथ भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण पहलुओं पर व्यापक चर्चा करेंगे, साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी करेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन की चौथी यात्रा होगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के महाराजा चार्ल्स तृतीय से भी मुलाकात करने की संभावना है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "यात्रा के दौरान दोनों पक्ष व्यापार और अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और नवाचार, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु, स्वास्थ्य, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों पर विशेष ध्यान देते हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे।" लंदन से मोदी मालदीव जाएंगे। वह मुख्य रूप से 26 जुलाई को मालदीव की स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित होने वाले समारोह में शामिल होंगे। यह मोदी की मालदीव की तीसरी यात्रा होगी तथा नवंबर 2023 में राष्ट्रपति मुइज्जू के पदभार ग्रहण करने के बाद भारतीय शासनाध्यक्ष की पहली यात्रा होगी। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुइज्जू आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा करेंगे और 'व्यापक आर्थिक एवं समुद्री सुरक्षा साझेदारी' के लिए भारत-मालदीव संयुक्त दृष्टिकोण के कार्यान्वयन में प्रगति का जायजा लेंगे। यह संयुक्त दृष्टिकोण पिछले साल अक्टूबर में मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान अपनाया गया था। विदेश मंत्रालय ने कहा, “यह यात्रा भारत द्वारा अपने समुद्री पड़ोसी, मालदीव को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है, जो भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और ‘विजन महासागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) में एक विशेष स्थान रखता है।” मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा दोनों पक्षों को घनिष्ठ द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।

देवेंद्र फडणवीस को उनके जन्मदिन पर देश के शीर्ष नेताओं और सहयोगियों ने हार्दिक शुभकामनाएं दीं

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को उनके जन्मदिन पर देश के शीर्ष नेताओं और सहयोगियों ने हार्दिक शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित कई प्रमुख नेताओं ने देवेंद्र फडणवीस के योगदान की सराहना की और उनके दीर्घायु व स्वस्थ जीवन की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। वे महाराष्ट्र की प्रगति और गरीबों व वंचितों के सशक्तिकरण के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। ईश्वर उन्हें दीर्घायु और स्वस्थ जीवन प्रदान करे।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फडणवीस के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा, “मोदी जी के नेतृत्व में आप महाराष्ट्र में जनकल्याण और सांस्कृतिक विरासत के पुनरोत्थान के लिए प्रशंसनीय कार्य कर रहे हैं। आप पारदर्शी तरीके से गरीबों और वंचितों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचा रहे हैं। गणपति बाप्पा आपको लंबी आयु और स्वस्थ जीवन दें।” केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने संदेश में कहा, “महाराष्ट्र के यशस्वी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। मैं ईश्वर से उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की प्रार्थना करता हूं।” महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने फडणवीस को “महाराष्ट्र की विकास यात्रा का गुमनाम नायक” बताते हुए कहा, “आप एक कुशल प्रशासक, अर्थशास्त्र और कानून के जानकार, दूरदर्शी नेता और महायुति के मजबूत सहयोगी हैं। आप जनता की आवाज बुलंद करते हुए महाराष्ट्र की समृद्धि के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। ईश्वर आपको दीर्घायु और स्वस्थ जीवन दे।” देवेंद्र फडणवीस का जन्म 22 जुलाई 1970 को नागपुर, महाराष्ट्र में हुआ। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से कानून और व्यवसाय प्रबंधन की पढ़ाई की। राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1992 में नागपुर नगर निगम के पार्षद के रूप में हुई। 1999 में वे पहली बार नागपुर दक्षिण-पश्चिम से विधायक बने और लगातार चार बार जीते। 2014 में वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने, जो 2019 तक रहे। 2022 में वे फिर से मुख्यमंत्री बने। फडणवीस ने बुनियादी ढांचा, ग्रामीण विकास और पारदर्शी शासन पर जोर देकर महाराष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को उनके जन्मदिन पर देश के शीर्ष नेताओं और सहयोगियों ने हार्दिक शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) नेता सुप्रिया सुले ने उनके योगदान की सराहना की और दीर्घायु की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “अजित पवार जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। वे महाराष्ट्र में एनडीए के सुशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ईश्वर उन्हें स्वस्थ और दीर्घायु रखे।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में कहा, “महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को जन्मदिन की शुभकामनाएं। आप महायुति सरकार के कार्यों को जमीन पर उतारने में सराहनीय भूमिका निभा रहे हैं। मैं आपके उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करता हूं।” केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा, “आप दीर्घायु हों।” उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अजित पवार को जन्मदिन की बधाई दी और कहा, “महायुति के मजबूत सहयोगी अजित दादा पवार को जन्मदिन की शुभकामनाएं। अर्थशास्त्र में उनकी गहरी समझ और महाराष्ट्र के विकास के प्रति समर्पण अनुकरणीय है। मैं उनके स्वस्थ और दीर्घ जीवन की प्रार्थना करता हूं।” सुप्रिया सुले ने अपने संदेश में कहा, “अजित दादा को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आने वाला वर्ष आपके लिए खुशहाली लाए।” अजित पवार महाराष्ट्र के प्रमुख राजनेता और वर्तमान उपमुख्यमंत्री हैं। उनका जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर के देवलाली प्रवरा में हुआ था। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता हैं और अपने चाचा शरद पवार के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे। लेकिन, 2023 में उन्होंने एनसीपी से अलग होकर महायुति गठबंधन में शामिल हो गए। वे 1991 से बारामती विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अजित पवार ने वित्त, जल संसाधन मंत्री के रूप में भी कार्य किया है।  

उप राष्ट्रपति के इस्तीफे पर पीएम मोदी का भावुक संदेश: आपकी सेहत बनी रहे उत्तम

नई दिल्ली जगदीप धनखड़ के एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की है। पीएम मोदी ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि श्री धनखड़ को उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है । पीएम ने क्या लिखा प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। उल्लेखनीय है कि धनखड़ ने सोमवार देर शाम अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखे त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि वह स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहे हैं। हाल ही में हुई थी एंजियोप्लास्टी धनखड़ (74) ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था। राज्यसभा के सभापति धनखड़ का इस्तीफा संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आया। हाल में उनकी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एंजियोप्लास्टी हुई थी और इस वर्ष मार्च में उन्हें कुछ दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ अवसरों पर उनकी हालत ठीक नहीं दिखी थी, लेकिन संसद सहित सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह अक्सर ऊर्जावान ही दिखे। वहीं, विपक्ष उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर सवाल उठा रहा है। कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ सोमवार को कार्यकाल के बीच में पद से इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए। इससे पहले, वीवी गिरि ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, जिन्होंने तीन मई 1969 को तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभाला था। वहीं, भैरों सिंह शेखावत ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव में हारने के बाद 21 जुलाई 2007 को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया।  

मुंबई ब्लास्ट के दोषियों की रिहाई के खिलाफ केंद्र सुप्रीम कोर्ट में, अगली सुनवाई 24 को

मुंबई महाराष्ट्र सरकार ने 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में बंबई उच्च न्यायालय के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस आतंकी हमले में 180 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 24 जुलाई की तारीख निर्धारित की है। 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इन हमलों में कई ट्रेनों को निशाना बनाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप भारी जनहानि हुई। मामले की जांच के बाद 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन हाल ही में बंबई उच्च न्यायालय ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को "न्याय के हित में अनुचित" बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। सरकार का तर्क है कि इस मामले में पुख्ता सबूत मौजूद हैं और हाईकोर्ट का फैसला पीड़ितों के साथ न्याय करने में विफल रहा है। पूरा मामला समझिए मुंबई उच्च न्यायालय ने 11 जुलाई 2006 को मुंबई में कई ट्रेन में किए गए सात बम धमाकों के मामले में सोमवार को सभी 12 आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है तथा यह विश्वास करना कठिन है कि आरोपियों ने यह अपराध किया है। यह फैसला शहर के पश्चिमी रेलवे नेटवर्क को हिला देने वाले आतंकवादी हमले के 19 साल बाद आया है। इस हमले में 180 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे। अदालत का यह फैसला महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के लिए अत्यंत शर्मिंदगी की बात है, जिसने इस मामले की जांच की थी। एजेंसी ने दावा किया था कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया’ (सिमी) के सदस्य थे और उन्होंने आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के पाकिस्तानी सदस्यों के साथ मिलकर यह साजिश रची थी। उच्च न्यायालय ने आरोपियों के सभी इकबालिया बयानों को ‘नकल’ करने का संकेत देते हुए अस्वीकार्य घोषित कर दिया। अदालत ने इकबालिया बयान की विश्वसनीयता को और अधिक कम करते हुए कहा कि अभियुक्तों ने सफलतापूर्वक यह स्थापित कर दिया है कि इन इकबालिया बयानों के लिए उन पर अत्याचार किया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण सिंडिकेट (मकोका) के प्रावधान इस मामले में लागू नहीं होंगे और इसके लिए मंजूरी ‘बिना सोचे-समझे यांत्रिक तरीके से’ दी गई थी। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की विशेष पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपराध में प्रयुक्त बमों के प्रकार को रिकार्ड में लाने में भी असफल रहा है तथा जिन साक्ष्यों पर उसने भरोसा किया वे आरोपियों को दोषी ठहराने में विफल रहे हैं। उच्च न्यायालय ने 671 पन्नों के अपने निर्णय में कहा, ‘‘किसी अपराध के वास्तविक अपराधी को सजा देना, आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने, कानून के राज को बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा व संरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस और आवश्यक कदम है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘लेकिन किसी मामले को हल करने का झूठा दिखावा करना- यह दिखाना कि आरोपियों को न्याय के कठघरे में लाया गया है केवल एक भ्रमपूर्ण समाधान की भावना पैदा करता है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘ऐसा भ्रामक निष्कर्ष न केवल जनता के विश्वास को कमजोर करता है, बल्कि समाज को झूठी तसल्ली देता है, जबकि वास्तव में असली खतरा अब भी आज़ाद घूम रहा होता है। मूल रूप से, यही इस मामले की सच्चाई को दर्शाता है।’’ उच्च न्यायालय ने 12 व्यक्तियों की दोषसिद्धि को रद्द करते हुए कहा कि गवाहों के बयान और आरोपियों के पास से कथित तौर पर की गई बरामदगी का कोई साक्ष्य मूल्य नहीं है। इनमें से पांच आरोपियों को विशेष अदालत ने सजा-ए-मौत और सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पश्चिमी लाइन पर विभिन्न स्थानों पर मुंबई की लोकल ट्रेन में 11 जुलाई, 2006 को सात विस्फोट हुए थे, जिनमें 180 से अधिक लोग मारे गए थे और कई अन्य लोग घायल हुए थे। विशेष अदालत ने जिन दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी, उनमें कमाल अंसारी (अब मृत), मोहम्मद फैसल अताउर रहमान शेख, एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी, नवीद हुसैन खान और आसिफ खान शामिल थे। विशेष अदालत ने उन्हें बम रखने और कई अन्य आरोपों में दोषी पाया था। इसने तनवीर अहमद मोहम्मद इब्राहिम अंसारी, मोहम्मद मजीद मोहम्मद शफी, शेख मोहम्मद अली आलम शेख, मोहम्मद साजिद मरगूब अंसारी, मुजम्मिल अताउर रहमान शेख, सुहैल महमूद शेख और ज़मीर अहमद लतीउर रहमान शेख को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। एक आरोपी, वाहिद शेख को 2015 में निचली अदालत ने बरी कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। यह विश्वास करना कठिन है कि आरोपियों ने यह अपराध किया है, इसलिए उनकी दोषसिद्धि रद्द की जाती है।’’ पीठ ने 2015 में विशेष अदालत द्वारा पांच लोगों को मृत्युदंड और शेष सात आरोपियों को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा की पुष्टि करने से इनकार कर दिया और उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अगर आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें जेल से तुरंत रिहा कर दिया जाए। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य, गवाहों के बयान और आरोपियों के पास से कथित तौर पर की गई बरामदगी का कोई साक्ष्य मूल्य नहीं है और इसलिये इसे दोषसिद्धि के लिये निर्णायक प्रमाण नहीं कहा जा सकता। इस मामले में 2015 में एक विशेष अदालत ने 12 लोगों को दोषी ठहराया था, जिनमें से पांच को मृत्युदंड और शेष सात को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अपील की सुनवाई लंबित रहने के दौरान एक दोषी की मृत्यु हो गई थी।

उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा राष्ट्रपति ने स्वीकारा, गृह मंत्रालय को भेजी आगे की कार्रवाई के लिए फाइल

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा मंजूर किया। सोमवार शाम को ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा राष्ट्रपति मुर्मू को भेजा था। इसी के बाद से सियासी पारा चढ़ गया था। उनका कार्यकाल अगस्त 2027 में पूरा होना था.राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजे इस्तीफे में धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों को का इसका कारण बताया है. धनखड़ के इस्तीफे के बाद अब उनके उत्तराधिकारी की तलाश करनी होगी. नियमानुसार इसकी कोई समय सीमा तो नहीं है, लेकिन चुनाव जल्द से जल्द कराना होगा. धनखड़ ने इस्तीफा ऐसे समय दिया है, जब बीजेपी अपने नए अध्यक्ष की तलाश कर रही है. धनखड़ के इस्तीफे से बीजेपी का काम बढ़ गया है.  धनखड़ के इस्तीफे पर बोले PM मोदी- उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना जगदीप धनखड़ के एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की है। पीएम मोदी ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि श्री धनखड़ को उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है । पीएम ने क्या लिखा प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। उल्लेखनीय है कि धनखड़ ने सोमवार देर शाम अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखे त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि वह स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहे हैं। हाल ही में हुई थी एंजियोप्लास्टी धनखड़ (74) ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था। राज्यसभा के सभापति धनखड़ का इस्तीफा संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आया। हाल में उनकी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एंजियोप्लास्टी हुई थी और इस वर्ष मार्च में उन्हें कुछ दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ अवसरों पर उनकी हालत ठीक नहीं दिखी थी, लेकिन संसद सहित सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह अक्सर ऊर्जावान ही दिखे। वहीं, विपक्ष उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर सवाल उठा रहा है। कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ सोमवार को कार्यकाल के बीच में पद से इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए। इससे पहले, वीवी गिरि ने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, जिन्होंने तीन मई 1969 को तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभाला था। वहीं, भैरों सिंह शेखावत ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव में हारने के बाद 21 जुलाई 2007 को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। अब बीजेपी क्या करेगी जगदीप धनखड़ जनता दल और कांग्रेस से होते हुए बीजेपी में शामिल हुए थे. धनखड़ के इस्तीफे के बाद बीजेपी को उनके उत्तराधिकारी की तलाश करनी होगी. उसके पास अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश के साथ ही नए उपराष्ट्रपति के तलाश का भी काम आ गया है. बीजेपी इस समय केंद्र में गठबंधन की सरकार चला रही है. उसे चंद्रबाबू नायडू के तेदेपा, नीतीश कुमार के जेडीयू और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ-साथ कई और छोटे दलों का समर्थन हासिल हैं. इसलिए बीजेपी को उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार की तलाश में सहयोगी दलों के हितों का भी ध्यान रखना होगा. नए उम्मीदवार में उसे संसदीय परंपराओं की जानकारी के साथ-साथ सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की क्षमता का भी ध्यान रखना होगा. संसद के मानसून सत्र में सरकार कई विधयेक लेकर आने वाली है, वहीं वन नेशन, वन इलेक्शन, जैसा बिल भी लाया जाना है. इसे पास कराने में नए उपराष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.  बीजेपी के अध्यक्ष की तलाश बीजेपी को ये दोनों काम ऐसे समय करने पड़ रहे हैं, जब लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है. ऐसे में बीजेपी को एक ऐसे अध्यक्ष की तलाश है, जो लगातार चौथी बार पार्टी की जीत का रास्ता बना सके. बीजेपी के नए अध्यक्ष पर उम्मीदों का बड़ा बोझ होगा. उसके सामने अमित शाह जैसे प्रदर्शन की चुनौती होगी. वहीं बीजेपी को एक ऐसे उपराष्ट्रपति पद के लिए एक ऐसे व्यक्ति की तलाश करनी होगी, जिसमें सदन के सुचारु रूप से चलाने की क्षमता हो.क्योंकि आने वाला समय बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण है. नरेंद्र मोदी सरकार कई ऐसे बिल लेकर आ रही है, जिन्हें सुचारू रूप से पास कराना चुनौती होगी.  इन सबके बाद संगठन और सरकार में भी नए बदलाव की उम्मीद की जा रही है. कैबिनेट में विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं. ऐसी भी चर्चाएं हैं कि कुछ मंत्रियों को संगठन और कुछ नेताओं को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है.इसकी संभावना काफी दिनों से जताई जा रही है.  कब और कैसे मिलेगा देश को नया उपराष्ट्रपति? जानिए जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने सियासी भूचाल ला दिया है. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है. मानसून सत्र के पहले दिन ही धनखड़ के इस्तीफे से हलचल बढ़ गई. इस इस्तीफे के बाद अब सवाल है कि आगे क्या होगा? चलिए इसे विस्तार से समझते हैं. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने से उनके उत्तराधिकारी की दौड़ शुरू हो गई है. अब सवाल है कि जगदीप धनखड़ का उत्तराधिकारी कौन होगा? दरअसल, भाजपा नीत एनडीए को निर्वाचक मंडल में बहुमत प्राप्त है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं. आगामी दिनों में संभावित नामों पर विचार किए जाने की संभावना है. भाजपा के पास इस पद पर चुनने के लिए नेताओं का एक बड़ा समूह है. राज्यपालों में से या संगठन के अनुभवी नेताओं अथवा केंद्रीय मंत्रियों में से किसी का चुनाव किया जा सकता है. जगदीप धनखड़ भी उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे. अब कौन संभालेगा कमान? संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत राष्ट्रपति मुर्मू ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया. अब राज्यसभा में सभापति … Read more

श्रीलंकाई नौसेना ने भारतीय मछुआरों को किया गिरफ्तार, तमिलनाडु में रोष

चेन्नई श्रीलंकाई नौसेना ने तमिलनाडु के रामेश्वरम से चार भारतीय मछुआरों को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार करने और श्रीलंकाई जलक्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया। इन मछुआरों को मंगलवार तड़के गिरफ्तार किया गया। उस समय मछुआरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए मोटर चालित नावों के साथ समुद्र में उतरे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, मछुआरे रामेश्वरम फिशिंग हार्बर से समुद्र में उतरे थे। जब श्रीलंकाई नौसेना ने उन्हें रोका, उस वक्त वह समुद्र के बीच मछलियां पकड़ रहे थे। नौसेना ने उन पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) का उल्लंघन करने और श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने का आरोप लगाया है। श्रीलंकाई नौसेना ने चारों मछुआरों को गिरफ्तार करने के साथ उनकी नाव को भी जब्त कर लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, हिरासत में लिए गए सभी मछुआरों को आगे की पूछताछ के लिए श्रीलंका के मन्नार नौसेना कैंप ले जाया गया है। यह घटना एक सतत क्रम का हिस्सा है, जिसमें श्रीलंकाई अधिकारी कथित तौर पर अपने जलक्षेत्र में प्रवेश करने वाले भारतीय मछुआरों पर कार्रवाई तेज कर रहे हैं। मछुआरों ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी के अलावा, श्रीलंकाई सरकार अक्सर उनकी मोटर से चलने वाली नाव को जब्त कर लेती है। इनमें से कई नाव को बाद में राज्य की संपत्ति घोषित कर दिया जाता है। ऐसे घटनाक्रमों ने तमिलनाडु के मछुआरा समुदायों, खासकर रामनाथपुरम जैसे तटीय जिलों में, गहरी चिंता पैदा कर दी है। ये मछुआरे आजीविका के लिए गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को मजबूर हैं। फिशरमैन एसोसिएशन ने श्रीलंकाई नौसेना की कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है। इसके साथ ही केंद्र और तमिलनाडु सरकार, दोनों से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। स्थानीय फिशरमैन एसोसिएशन के प्रतिनिधि जॉन थॉमस ने कहा, “इस पुराने विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीतिक प्रयास होने चाहिए। बार-बार होने वाली गिरफ्तारियों से हमारी जिंदगियां और आजीविका दोनों खतरे में पड़ गई हैं।” इस तरह की गिरफ्तारियों के चलते मछुआरों के समुदाय भय के साये में जी रहे हैं। भारत और श्रीलंका के बीच स्थायी समाधान के लिए राजनयिक प्रयास अभी तक बेनतीजा रहे हैं।  

पाक सीमा पर मंडराएगा अपाचे का कहर: अमेरिका ने भारत को सौंपे खतरनाक युद्धक हेलीकॉप्टर

नई दिल्ली भारतीय सेना की रक्षा क्षमताओं को और मजबूती मिली है। अमेरिका से बोइंग एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों का पहला जत्था आज भारत को सौंप दिया। इन अत्याधुनिक युद्धक हेलीकॉप्टरों को राजस्थान के जोधपुर में तैनात किया जाएगा, जो भारतीय सेना की सामरिक शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। इस उपलब्धि को रक्षा क्षेत्र में एक ‘मील का पत्थर’ माना जा रहा है, क्योंकि ये हेलीकॉप्टर सेना को युद्धक्षेत्र में अभूतपूर्व ताकत और सटीकता प्रदान करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी एयरोस्पेस दिग्गज ‘बोइंग’ ने मंगलवार को भारतीय सेना को तीन अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर सौंपे। एएच-64 अपाचे दुनिया के सबसे एडवांस बहुउद्देशीय लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से एक है और इसे अमेरिकी सेना भी उड़ाती है। सेना की मारक क्षमता में इजाफा ये हेलीकॉप्टर भारतीय सेना के लिए खरीदे गए छह अपाचे हेलीकॉप्टरों की पहली खेप हैं। बता दें कि हेलीकॉप्टरों 5,691 करोड़ रुपये के सौदे का हिस्सा हैं। इनकी तैनाती जोधपुर में की जाएगी, जहां सेना ने करीब 15 महीने पहले अपना पहला अपाचे स्क्वाड्रन खड़ा किया था। सेना के अधिकारियों ने पुष्टि करते हुए कहा, “भारतीय सेना के लिए खरीदे गए पहले अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर भारत पहुंच चुके हैं। इन्हें जोधपुर में तैनात किया जाएगा।” बचे हुई तीन हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी वर्ष 2025 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। अपाचे AH-64E गार्जियन को "आसमान का टैंक" कहा जाता है, क्योंकि ये घातक मारक क्षमता, लंबी दूरी तक अभियान चलाने की क्षमता और नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर जैसी तकनीकों से लैस हैं। यह हेलीकॉप्टर विशेष रूप से उन अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां दुश्मन की स्थिति चुनौतीपूर्ण हो। इसमें एडवांस नाइट विजन, हर मौसम में लक्ष्य साधने की क्षमता और श्रेष्ठ नेविगेशन सिस्टम मौजूद हैं, जो इसे किसी भी तरह के हमले या रक्षा अभियान के लिए बेहद कारगर बनाते हैं। सेना में अपाचे हेलीकॉप्टरों की तैनाती वायुसेना के साथ संयुक्त अभियानों में भी एक बड़ी रणनीतिक बढ़त मानी जा रही है। भारतीय वायुसेना पहले से ही दो स्क्वाड्रन अपाचे चला रही है- एक पठानकोट में और दूसरा जोरहाट, असम में। डिलीवरी में हुई देरी इस डिलीवरी में देरी वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं और बदलते भू-राजनीतिक हालातों के कारण हुई। ये हेलीकॉप्टर मई-जून 2024 तक भारत आने वाले थे, लेकिन डिलीवरी में विलंब हो गया। इन हेलीकॉप्टरों की खरीद का समझौता वर्ष 2020 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान हुआ था, जिसकी कुल कीमत लगभग 600 मिलियन डॉलर (5,691 करोड़ रुपये) थी। गौरतलब है कि इससे पहले 2015 में भारत सरकार ने भारतीय वायुसेना के लिए 22 अपाचे हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए अलग समझौता किया था, जिसकी डिलीवरी 2020 के मध्य तक पूरी कर ली गई थी। इन नई अपाचे हेलीकॉप्टरों की तैनाती के साथ भारतीय सेना की हमलावर शक्ति और समन्वित युद्ध क्षमता को नया बल मिलेगा, खासकर पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर। अपाचे हेलीकॉप्टरों की फीचर्स बोइंग एएच-64ई अपाचे को दुनिया के सबसे उन्नत हमलावर हेलीकॉप्टरों में से एक माना जाता है। ये हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं। शक्तिशाली हथियार प्रणाली: हेलीकॉप्टर में हेलफायर मिसाइलें, रॉकेट और 30 मिमी ऑटोमैटिक तोप शामिल हैं, जो दुश्मन के ठिकानों को सटीकता से नष्ट करने में सक्षम हैं। एडवांस सेंसर और नेविगेशन: रात में और प्रतिकूल मौसम में भी ऑपरेशन की क्षमता, जिससे यह हर स्थिति में प्रभावी है। उच्च गतिशीलता: अपाचे की डिजाइन इसे तेज और फुर्तीला बनाती है, जो युद्धक्षेत्र में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आदर्श है। आधुनिक संचार प्रणाली: यह हेलीकॉप्टर अन्य सैन्य इकाइयों के साथ समन्वय में बेहतर प्रदर्शन करता है। इन हेलीकॉप्टरों को जोधपुर में तैनात करने का निर्णय सामरिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। जोधपुर, पश्चिमी सीमा के करीब होने के कारण, एक रणनीतिक स्थान है। यह क्षेत्र भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट है, जहां सेना को तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। अपाचे हेलीकॉप्टरों की तैनाती से इस क्षेत्र में सेना की ऑपरेशनल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यूक्रेनी विमान से भारत लाए गए अपाचे हेलीकॉप्टर इन अत्याधुनिक हेलीकॉप्टरों को यूक्रेन की एंटोनोव एयरलाइंस के विशाल एंटोनोव एन-124 रुसलान द्वारा अमेरिका के एरिजोना से सीधे भारत के हिंडन एयर बेस पर लाया गया। इस विमान पर "बी ब्रेव लाइक बुचा" लिखा हुआ था, जो यूक्रेन के बुचा शहर के साहस और प्रतिरोध का प्रतीक है। एंटोनोव एन-124 दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य परिवहन विमान है, जो भारी और विशाल कार्गो को लंबी दूरी तक ले जाने में सक्षम है। एंटोनोव एन-124 पर लिखा "बी ब्रेव लाइक बुचा" नारा यूक्रेन के बुचा शहर की वीरता और रूसी आक्रमण के खिलाफ प्रतिरोध को श्रद्धांजलि देता है। एंटोनोव एयरलाइंस ने अपनी विमान बेड़े को यूक्रेन के उन शहरों के नाम पर समर्पित किया है, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान प्रभावित हुए। यह नारा न केवल यूक्रेनी लोगों की बहादुरी को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर उनकी एकजुटता और दृढ़ता का प्रतीक भी है। एंटोनोव एन-124 रुसलान, जिसे 1980 के दशक में यूक्रेन के एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित किया गया था, दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य परिवहन विमान है।

राजौरी में मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, जलभराव के चलते स्कूलों में छुट्टी

जम्मू जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जहां एक ओर बारिश से जगह-जगह भूस्खलन (Jammu Kashmir Flood) हो रहा है तो वहीं, राजौरी में लगातार बारिश के बाद धरहाली और सकतोह नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। राजौरी जिला प्रशासन ने आज जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद करने की घोषणा की है। अगले 72 घंटे मुश्किल भरे होंगे आईएमडी ने अगले 72 घंटों में जम्मू संभाग और उधमपुर जिले में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया है। प्रशासन ने लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। जिसमें जनता को बाढ़/भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी गई। सहायता के लिए प्रशासन ने कुछ नंबर भी जारी किए हैं। डीईओसी: 01992-272727, 01992-272728। पीसीआर: 01992-276915 | ईआरएसएस: 112 पर संपर्क कर सकते हैं। जम्मू में भूस्खलन में पुलिस अधिकारी घायल अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को एक पुलिस अधिकारी अपनी निजी कार के जम्मू के पास बारिश के कारण हुए भूस्खलन की चपेट में आने से घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि प्रोबेशनरी डीएसपी सांबा में अपनी तैनाती स्थल जा रहे थे, तभी जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नगरोटा इलाके में बान टोल प्लाजा के पास एक सुरंग के बाहर भूस्खलन से उनकी कार क्षतिग्रस्त हो गई। उन्होंने बताया कि अधिकारी को बचा लिया गया और अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई गई है।  सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त अधिकारी स्थिति पर कड़ी नज़र रख रहे हैं क्योंकि लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया है और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अभी तक किसी के हताहत होने या किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया है और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नालियां जाम रहने से जलभराव की समस्या इस बीच, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) राजौरी के पीर पंजाल क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण कार्य कर रहा है ताकि संपर्क में सुधार हो और कोटरंका, समोट और बुधल जैसे बाजार क्षेत्रों में जलभराव को कम किया जा सके। बीआरओ के एक इंजीनियर संजय शर्मा ने कहा, “जहाँ भी जलभराव की समस्या है, खासकर बाज़ार वाले इलाकों में, हम कंक्रीट के फुटपाथ बना रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “बाज़ार में नालियाँ अक्सर जाम रहती थीं, जिससे सड़कों पर पानी भर जाता था। अब हमने उन इलाकों को कंक्रीट के फुटपाथों से ढक दिया है और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत भी कर रहे हैं।” भूस्खलन में दो लोगों की मौत शर्मा ने आगे कहा कि इस पहल का उद्देश्य सुगम यात्रा सुनिश्चित करना और नियमित रखरखाव के साथ सड़क सुरक्षा बनाए रखना है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में, सोमवार को चंबा ज़िले में बारिश के कारण हुए भूस्खलन में दो लोगों की मौत हो गई। भारी बारिश के दौरान एक घर पर एक पत्थर गिर गया। पटवारी अश्वनी ने एएनआई से बात करते हुए कहा, “बारिश के कारण कल रात भूस्खलन हुआ। परिणामस्वरूप, एक घर पर एक बड़ा पत्थर गिर गया और इस घटना में दो लोगों की दुखद मौत हो गई। पुलिस की मदद से उनके शव मलबे से निकाले गए और चंबा अस्पताल ले जाया गया। सरकार ने पीड़ितों को तत्काल राहत भी प्रदान की। वर्तमान में, हम क्षेत्र में खतरे का आकलन कर रहे हैं और नुकसान पर एक रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।”  

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की शिकायत, इशाक डार ने फिलेमोन के सामने सिंधु संधि पर जताई चिंता

इस्लामाबाद पाकिस्तान की ओर से सिंधु जल संधि विवाद का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाने की तैयारी हो रही है। पाक के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने इस मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष फिलेमोन यांग से मुलाकात की है। डार ने सोमवार को न्यूयॉर्क में यांग से मिलकर सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत का सिंधु जल संधि से हटने जैसे फैसले क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। डार ने यांग से कहा कि भारत की ओर से इस संधि का उल्लंघन किया जा रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और दुनिया की संस्थाओं को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और भारत पर दबाव डाला जाना चाहिए। पाक मीडिया के मुताबिक, इशाक डार ने फिलेमोन यांग से अपनी बैठक में खासतौर से भारत को चर्चा का केंद्र रखा। डार ने भारत के आक्रामक रुख, ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि से पाकिस्तान को हो रही परेशानी से यांग को अवगत बताया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है पाक पाकिस्तान फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है। उसे रोटेशन के आधार पर ये पद मिला है। ऐसे में उसकी कोशिश इसका फायदा भारत विरोधी रुख को बढ़ाने के लिए करने की है। पाक चाहता है कि कश्मीर और सिंधु जल संधि को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर उठाया जाए। इसके लिए पाकिस्तान की कोशिश जारी है। इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष के सामने एक बार फिर कश्मीर कैा मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पाकिस्तान की पुरानी बयानबाजी को दोहराते हुए कहा कि कश्मीर में भारत की ओर से लगातार मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। शांति से हो जाए समाधान इशाक डार ने अंतर्राष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के माध्यम से बातचीत के माध्यम से पाकिस्तान और भारत के बीच सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। पहलगाम के बाद शुरू हुआ विवाद भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव की शुरुआत 22 अप्रैल के बाद हुई। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की बर्बरता से हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई स्तरों पर संबंध तोड़ने का फैसला लिया। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय भी लिया है। ये संधि भारत-पाक में नदियों का पानी बांटती है। भारत ने इस समझौते से हटते हुए पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकने की बात कही है। इससे पाकिस्तान में चिंता बढ़ी हुई है।