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पूर्व CPI नेता सुरवरम सुधाकर रेड्डी के निधन पर CM स्टालिन का शोक संदेश

चेन्नई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूर्व सीपीआई नेता सुरवरम सुधाकर रेड्डी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सुधाकर रेड्डी का जाना एक बड़ी क्षति है। एमके स्टालिन ने कहा कि सुधाकर रेड्डी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र नेता के रूप में की थी और बाद में संसद सदस्य और भाकपा के राष्ट्रीय नेता के तौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। उन्होंने बताया कि सुधाकर रेड्डी ने हमेशा मजदूरों, किसानों और समाज के हाशिए पर पड़े लोगों के लिए अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी। सीएम ने कहा, “मैंने तमिलनाडु में उनकी कई यात्राओं में उनके साथ समय बिताया है। इनमें गठबंधन की बातचीत और थलाइवर कलैगनार की स्मृति समारोह जैसी महत्वपूर्ण घटनाएं शामिल थीं। इन मौकों पर मैंने उनकी गर्मजोशी और स्पष्ट विचारों को देखा है।” एमके स्टालिन ने आगे कहा कि सुधाकर रेड्डी का जीवन न्याय और सम्मान के लिए संघर्ष की प्रेरणा बना रहेगा। उन्होंने उनके परिवार, सहयोगियों और साथियों के प्रति संवेदनाएं भी प्रकट कीं। सुरवरम सुधाकर रेड्डी एक सशक्त छात्र नेता, संसद सदस्य और पार्टी कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया, और उनकी नीतियां और कार्य लोगों के दिलों में आज भी जीवित हैं। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। तमिलनाडु सहित पूरे देश के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें याद करते हुए अपनी संवेदना व्यक्त की है। सीपीआई नेता सुरवरम सुधाकर रेड्डी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र आंदोलन से की और बाद में संसद सदस्य और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राष्ट्रीय नेता बने। सुधाकर रेड्डी ने मजदूरों, किसानों और हाशिए पर पड़े समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए पूरी जिंदगी समर्पित की। उनके नेतृत्व में कई सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों को बल मिला। वे अपने स्पष्ट विचारों और संघर्षशील व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे।  

खास दूत के माध्यम से अमेरिका का भारत को संदेश, जानें ट्रंप की मंशा 6 पॉइंट में

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बड़ा ऐलान किया. उन्होंने बताया कि सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के अगले राजदूत होंगे. वे भारत और अमेरिका के बीच बिगड़ते रिश्तों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जो अगले हफ्ते भारत से आने वाले सामान पर अमेरिकी टैरिफ को दोगुना करने के फैसले के बाद और तनावपूर्ण हो गए हैं. गोर को दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत की जिम्मेदारी भी दी गई है. ट्रंप ने यह ऐलान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर किया. उन्होंने गोर को सरकार में हजारों राजनीतिक पदों पर नियुक्तियों में अहम भूमिका निभाने का श्रेय दिया और कहा कि गोर का काम प्रशासन के लक्ष्यों को लागू करने में बेहद महत्वपूर्ण रहा है. ट्रंप ने बताया 'बेहतरीन दोस्त' ट्रंप ने लिखा, 'सर्जियो मेरे बेहतरीन दोस्त हैं, जो कई सालों से मेरे साथ है. उन्होंने मेरे ऐतिहासिक इलेक्शन कैंपेन पर काम किया, मेरी बेस्टसेलिंग किताबें पब्लिश कीं और हमारे आंदोलन का समर्थन करने वाले सबसे बड़े सुपर PACs में से एक चलाया. उन्होंने मेरे दूसरे कार्यकाल के लिए स्टाफ चुनने में अहम योगदान दिया.' एलन मस्क से पुरानी अदावत ट्रंप और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के बीच हुए टकराव में भी सर्जियो गोर की भूमिका काफी अहम थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्क और गोर के बीच महीनों से मतभेद चल रहे थे, जिसके बाद मई में मस्क ने ट्रंप प्रशासन से इस्तीफा दे दिया था. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च में कैबिनेट की एक गरमागरम बैठक के दौरान मस्क और अन्य अधिकारियों में बहस हुई थी. गोर का नाम सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया, लेकिन अंदरखाने कहा गया कि वे मस्क के स्टाफिंग पर प्रभाव के खिलाफ थे.  सर्जियो गोर की छवि ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा के कट्टर समर्थक और डोनाल्‍ड ट्रंप के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि अमेरिका अब भारत के साथ अपने रिश्तों को ज्यादा लेन-देन आधारित नजरिए से देखेगा. 1. लेन-देन आधारित कूटनीति का दौर सर्जियो गोर को व्हाइट हाउस का ‘हार्डलाइन लॉयलिस्ट’ माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी नियुक्ति का अर्थ है कि अमेरिकी कूटनीति में लॉन्‍ग टर्म साझेदारी की जगह तात्कालिक अमेरिकी हितों को प्राथमिकता मिलेगी. यह भारत के लिए चुनौती होगी क्योंकि अब वार्ता में सहयोग से ज्यादा दबाव और शर्तें प्रमुख भूमिका निभा सकती हैं. 2. टैरिफ का दबाव और आर्थिक जोखिम अमेरिका ने हाल ही में भारतीय टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण और तेल से जुड़े उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा की है. यह निर्णय भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों और लाखों नौकरियों पर खतरा बन गया है. जानकारों के मुताबिक, यह कदम केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव का हिस्सा है, जिससे भारत को रूस और चीन के साथ उसके बढ़ते व्यापार पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया जा सके. लेकिन इसका उलटा असर भी हो सकता है. भारत ने हाल के महीनों में मॉस्को और बीजिंग के साथ संबंध और मजबूत किए हैं, जो अमेरिकी प्रभाव को कमजोर कर सकते हैं. 3. जियो-पॉलिटिकल बैलेंस पर असर सर्जियो गोर को राजदूत के साथ-साथ विशेष दूत की भूमिका भी सौंपी गई है. इसका मकसद भारत की भू-राजनीतिक दिशा को अमेरिकी हितों के अनुरूप ढालना है. लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि आक्रामक कूटनीतिक रणनीति से उल्टा असर हो सकता है और भारत रूस और चीन की ओर और ज्यादा झुक सकता है. इससे दक्षिण एशिया में अमेरिकी प्रभाव सीमित होने का खतरा है. 4. रक्षा, तकनीक और व्यापार में संभावनाएं इसके बावजूद सर्जियो गोर का कार्यकाल कुछ अवसर भी ला सकता है. भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को तेज गति मिलने की संभावना है. फार्मास्युटिकल्स, आईटी और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग गहरा सकता है. साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और रक्षा उत्पादन में निवेश व साझेदारी के नए रास्ते खुल सकते हैं. हालांकि, इन संभावनाओं को वास्तविकता में बदलने के लिए दोनों देशों को टकराव और तनाव से बचना होगा. 5. विदेश नीति का सीमित अनुभव सर्जियो गोर की निष्ठा और प्रशासनिक क्षमता पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन उनके पास विदेश नीति का प्रत्यक्ष अनुभव बेहद कम है. इससे अमेरिकी कूटनीतिक सर्कल और थिंक टैंकों में असहजता देखी जा रही है. राजनयिकों का मानना है कि यह नियुक्ति भारत के साथ संवाद को और जटिल बना सकती है. 6. निवेशकों और कारोबारी जगत के लिए चेतावनी भारतीय वस्त्र, रत्न और तकनीक से जुड़े कारोबारी क्षेत्रों में निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ गया है. क्षेत्र-विशेष टैरिफ और अस्थिर कूटनीतिक वातावरण सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-अमेरिका रिश्तों में अगले कुछ महीने निवेश और व्यापार जगत के लिए बेहद अनिश्चित रहने वाले हैं. कुल मिलाकर सर्जियो गोर की नियुक्ति भारत-अमेरिका संबंधों में संभावनाओं और जोखिमों दोनों का संकेत है. जहां एक ओर रक्षा और तकनीक में सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं, वहीं लेन-देन आधारित अमेरिकी कूटनीति और ऊंचे टैरिफ भारत के लिए बड़ी चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं.

गाजा पीड़ित बनकर मस्जिदों से पैसा वसूलने वाले सीरियाई गैंग को पुलिस ने पकड़ा

अहमदाबाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक सीरियाई गिरोह का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह गाजा पीड़ितों के रूप में मस्जिदों से पैसे वसूल रहा था. मामले में पुलिस ने अली मेघात अलजाहर नाम के एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है. वह टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था. पूछताछ के दौरान पता चला कि वह पैसों का इस्तेमाल ऐशो-आराम की ज़िंदगी जीने में कर रहा था. पुलिस कार्रवाई के बाद उसके तीन साथी फरार हैं. जिनकी तलाश की जा रही है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही तीनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. ऐसी गतिविधियां देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए हैं खतरा: पुलिस क्राइम ब्रांच ने कहा है कि ये गतिविधियां देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं. वे वीजा नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं. हालांकि एकत्रित धन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था, इसका पता लगाने के लिए जांच चल रही है.  मामले की जांच राज्य और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है. फिलहाल अली को हिरासत में लेकर ब्लैकलिस्ट करने और डिपोर्ट करने की कार्रवाई की जा रही है. पुलिस द्वारा ऐसे अन्य गैंग का भी पता लगाया जा रहा है.  मेधात अल-ज़हर दमास्क्स का रहने वाला है अली मेधात पुलिस ने बताया कि क्राइम ब्रांच द्वारा पकड़ा गया अली मेधात, अल-ज़हर दमास्क्स का रहने वाला है और खुद को सीया मुस्लिम बता रहा है. वह अहमदाबाद की एक होटल में रुका था, जहां से उसे पकड़ा गया. क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि आरोपी के शरीर पर घाव के निशान हैं, जिसे वह युद्ध में लगे चोट होने का दावा कर रहा है.  आरोपी के गैंग में शामिल झकरीया अलजर, अहमदा अल्हबश, युसेफ अलजहर अभी फरार हैं. पुलिस उन्हें ढूंढ रही है. यह लोग लेबनान में एकत्रित हुए और फिर वहां से भारत आए थे.

US ने ईरानी तेल ट्रेड को किया निशाना, चीन और ग्रीस के नेटवर्क पर प्रतिबंध लागू

वाशिंगटन अमेरिका ईरान के अवैध क्रूड ऑयल (Iran Crude Oil) निर्यात पर शिकंजा कसने के लिए सख्त रुख अपना रहा है और इसके तहत US ने ईरानी तेल एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए चीन के दो ऑयल टर्मिनल पर कार्रवाई करते हुए उन्हें बैन कर दिया है. इसके अलावा एक ग्रीक शिपिंग नेटवर्थ ऑपरेटर एंटोनियोस मार्गारिटिस पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. अमेरिका के इस एक्शन का उद्देश्य तेहरान के हथियार कार्यक्रमों और आतंकवाद से होने वाले राजस्व में कटौती करना है. विदेश विभाग ने बताई बैन की वजह अमेरिका के विदेश विभाग (US Department of State) ने चीन स्थित दो कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट टर्मिनल्स संचालकों पर प्रतिबंधों का ऐलान किया है. उनपर यह कार्रवाई इन आरोपों के तहत की गई है, कि उन्होंने कई अमेरिकी-निर्धारित टैंकरों पर लाखों बैरल अवैध ईरानी तेल आयात करने में मदद की थी. यह ईरान के तेल व्यापार नेटवर्क में चीनी संचालकों को टारगेट करते हुए अमेरिका प्रतिबंधों का चौथा चरण है. विदेश विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक, ये दोनों टर्मिनल ऑपरेटर Iranian Crude Oil के व्यापार नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, जो विदेशों में ईरान के आतंकवाद को वित्तपोषित करता है और क्षेत्र को अस्थिर करता है. दोनों टर्मिनल के बारे में विस्तार से बात करें, तो मार्शल आइलैंड स्थित चांगबाई ग्लोरी शिपिंग लिमिटेड, लाइबेरियाई फ्लैग्ड वाले LAFIT (IMO 9379698) का रजिस्टर्ड ऑनर है, जिसने मार्च 2025 से अब तक चीन में ग्राहकों तक 4 मिलियन बैरल से ज्यादा ईरानी तेल पहुंचाया है. वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड स्थित रीगल लिबर्टी लिमिटेड, हांगकांग फ्लैग्ड GIANT (IMO 9238868) का मालिक है, जिसने 2025 की शुरुआत में OFAC द्वारा स्वीकृत SALVIA (IMO 9297319) के साथ लगभग 2 मिलियन बैरल ईरानी तेल चीन पहुंचाया. ग्रीक नागरिक निभा रहा था अहम रोल China के दो ऑयल टर्मिनल पर बैन लगाने के साथ ही विदेश विभाग की ओर से ग्रीक मूल के नागरिक एंटोनियोस मार्गारिटिस, उसकी कंपनियों के नेटवर्क और ईरान के सीक्रेट बेड़े से जुड़े करीब एक दर्जन जहाजों पर भी कार्रवाई की गई है. इस ग्रीक नागरिक ने कथित तौर पर शिपिंग के अपने लंबे एक्सपीरियंस का इस्तेमाल ईरानी पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की अवैध बिक्री और ट्रांसपोर्टेशन को सुगम बनाने के लिए किया है. इस संबंध में जानकारी देते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री (Finance Minister Of US) ने कहा कि Antonios Margaritis और उसके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेहरान (Tehran) के हथियार कार्यक्रमों को वित्तीय मदद करने, आतंकवादी समूहों का समर्थन करने के चलते की गई है.  ईरान पर आर्थिक दबाव के लिए एक्शन Scott Bessent के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के नेतृत्व में वित्त मंत्रालय उन सभी लोगों को जवाबदेह ठहराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, जो ईरानी शासन की सहायता करना चाहते हैं और वैश्विक सुरक्षा (Global security) के लिए खतरा हैं. इन प्रतिबंध को कार्यकारी आदेश 13902 के तहत लगाया जा रहा है और ये राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति ज्ञापन 2 (NSPM-2) के तहत शुरू किए गए व्यापक अभियान का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य ईरानी शासन पर आर्थिक दबाव को अधिकतम करना है.

उत्तराखंड के थराली में बादल फटने से हड़कंप, मलबे में दबे कई घर और लोग

चमोली  उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली क्षेत्र में शुक्रवार की आधी रात के बाद बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई. इस घटना से थराली कस्बे, आसपास के गांवों और बाजारों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. भारी बारिश और मलबे से कई घरों, दुकानों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है. प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. बादल फटने का सबसे ज्यादा असर थराली बाजार, कोटदीप और तहसील परिसर में देखने को मिला. यहां तहसील परिसर, एसडीएम आवास और कई घरों में मलबा घुस गया. तहसील परिसर में खड़ी कई गाड़ियां मलबे में दब गईं. कस्बे की सड़कों पर इतना मलबा भर गया कि वह तालाब जैसी नजर आने लगीं. पास के सागवाड़ा गांव में मलबे के कारण एक युवती की दबकर मौत हो गई. इस घटना से क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. पुलिस और प्रशासन की टीमें तुरंत गांव में राहत कार्य के लिए पहुंचीं. चेपड़ों बाजार में मलबे की चपेट में आने से कई दुकानें क्षतिग्रस्त हुईं. साथ ही, एक व्यक्ति के लापता होने की सूचना भी है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है. यातायात पूरी तरह बाधित भारी बारिश और मलबे के कारण थराली-ग्वालदम मार्ग मिंग्गदेरा के पास बंद हो गया है. इनके अलावा, थराली-सागवाड़ा मार्ग भी बाधित है. इन दोनों मार्गों के बंद होने से क्षेत्र में आवाजाही ठप हो गई है और लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. गौचर से स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) की टीम घटनास्थल पर है. प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं. बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीम मिंग्गदेरा के पास सड़क खोलने की कोशिशों में जुटी है, ताकि यातायात और राहत कार्यों को जल्द सुचारू किया जा सके. स्कूल और आंगनबाड़ी बंद जिला प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए थराली तहसील के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को शनिवार (23 अगस्त 2025) के लिए बंद रखने का आदेश दिया है. जिलाधिकारी डॉक्टर संदीप तिवारी ने बताया कि पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार मौके पर मौजूद हैं और राहत एवं बचाव कार्य में तेजी से जुटी हैं. उत्तरकाशी से रुद्रप्रयाग तक बादल फटने से तबाही उत्तराखंड में इस मॉनसून सीजन के दौरान कई बड़े बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है. सबसे गंभीर घटना 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धराली और हर्षिलल क्षेत्रों में हुई. उत्तरकाशी में बादल फटने से आई अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने धराली और हर्षिल इलाके को तहस-नहस कर दिया. कई घर, होटल और इंफ्रास्ट्रक्चर पानी में बह गए. इस हादसे में कम से कम चार लोगों की मौत हुई, जबकि दर्जनों लोग लापता हुए. सुखी और बगोरी समेत कई गांव प्रभावित हुए, जहां घरों और कृषि संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ. वही रुद्रप्रयाग में जुलाई के आखिर में केदारघाटी क्षेत्र में बादल फटने से आई बाढ़ ने यहां भी कहर बरपाया. कई घर और गाड़ियां मलबे में दब गईं और नदियां उफान पर आ गईं.

टोल प्लाजा पर नई राहत: इलेक्ट्रिक वाहन अब बिना टोल भुगतान के कर सकेंगे सफर

नई दिल्ली मुंबई के अटल सेतु पर अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों को टोल टैक्स नहीं देना होगा। राज्य सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अटल सेतु को पहले मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक या MTHL कहा जाता था और यह देश का सबसे लंबा समुद्री-पुल है। किन गाड़ियों को मिलेगी छूट शहरी विकास विभाग ने गुरुवार को नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि यह छूट इलेक्ट्रिक चार-पहिया गाड़ियों और इलेक्ट्रिक बसों पर लागू होगी। इसमें राज्य परिवहन की बसों के साथ-साथ निजी ऑपरेटरों की इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं। पुराने नियम में बदलाव महाराष्ट्र मोटर व्हीकल टैक्स एक्ट, 1958 के तहत यह फैसला लिया गया है। इससे पहले 31 जनवरी 2024 को जारी नोटिफिकेशन में अटल सेतु पर चलने वाले सभी तरह के वाहनों पर टोल लगाने का नियम बना था। लेकिन अब उसमें आंशिक बदलाव करते हुए इलेक्ट्रिक गाड़ियों को टोल से राहत दी गई है। मई में हुआ था फैसला, अब लागू दरअसल, इस साल मई में ही राज्य के गृह विभाग ने सार्वजनिक हित में इलेक्ट्रिक कार और बसों को टोल छूट देने का निर्णय लिया था। अब गुरुवार को जारी आदेश के बाद यह नियम शिवाजी नगर और गावन टोल प्लाजा पर लागू कर दिया गया है। यातायात के लिए अहम कड़ी अटल सेतु का उद्घाटन जनवरी 2024 में हुआ था। यह पुल मुंबई के दक्षिणी हिस्से सेवरी को नवी मुंबई के न्हावा शेवा से जोड़ता है। 21.8 किलोमीटर लंबा यह सी-ब्रिज अब यात्री और मालवाहक ट्रैफिक के लिए बेहद अहम कड़ी बन चुका है।

दुनिया की जनसंख्या में शॉकिंग बढ़ोतरी, भारत का आंकड़ा सबसे हैरान करने वाला

 नई दिल्ली इतिहास, भूगोल की तरह ही जनसांख्यिकी भी एक रोचक विषय है। कैसे दुनिया की आबादी बढ़ी क्या कारण रहे और फिर किसी एक दौर में आकर इसमें कैसे ठहराव आता है और गिरावट की स्थिति नजर आने लगती है। यह दिलचस्प विषय रहा है। बीते कुछ समय से भारत में जनसंख्या के असंतुलन की बातें की जा रही हैं। इसके अलावा यह भी चिंता जताई जा रही है कि वर्ष 2100 के बाद से भारत में आबादी में तेजी से गिरावट आएगी। इसकी वजह है कि फिलहाल लोग परिवार बढ़ाने में पहले की पीढ़ियों की तुलना में कम रुचि ले रहे हैं। इसके बाद भी दुनिया की आबादी फिलहाल 8 अरब है और इस सदी के अंत तक आंकड़ा 11 अरब तक पहुंचने की बात की जा रही है। यह उच्चतम लेवल होगा और उसके बाद एक बार फिर से गिरावट का दौर शुरू होगा। इस बीच एक दिलचस्प तथ्य यह है कि भारत 1947 में जब आजाद हुआ था, तब उसकी आबादी 33 करोड़ ही थी। आज देश की जनसंख्या 1 अरब 40 करोड़ है। इस तरह अकेले भारत में ही आबादी एक अरब से ज्यादा बढ़ गई है। ऐसा ही पूरी दुनिया में 20वीं सदी में देखने को मिला। 1900 में दुनिया की आबादी 1 अरब 60 करोड़ ही थी, जो अब 4 गुना से ज्यादा तेजी से बढ़कर 8 अरब के पार है। दिलचस्प है कि वर्ष 1700 में तो पूरी दुनिया की आबादी ही 61 करोड़ थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आबादी में इतनी तेजी से इजाफा इन 100 सालों में ही क्यों हुआ। वर्ष 1600 के मुकाबले 15 गुना बढ़ गई है आबादी यदि वर्ष 1600 से तुलना करें तो अब तक दुनिया की आबादी में 15 गुना का इजाफा हुआ है। आखिर 20वीं सदी में ही इतनी आबादी क्यों बढ़ी? इसका जवाब यह है कि मेडिकल की दुनिया में कई बड़े आविष्कार हुए हैं। इसके कारण मृत्यु दर में कमी आई है और जन्म दर बढ़ी है। शिशु मृत्यु दर भी कम हुई है और इसके चलते भी आबादी बढ़ी है। एशिया और अफ्रीका में तेज है आबादी बढ़ने की गति यही नहीं औद्योगिक विकास के कारण आय हेतु भी परिवारों में ज्यादा बच्चे पैदा करने का चलन शुरू हुआ। इसके अलावा औद्योगिक विकास से आय में इजाफा हुआ तो चिकित्सा क्षेत्र में कई रिसर्च हुए। कई जानलेवा रोगों से मुक्ति पाने में भी सरकारों को मदद मिली है। इसके कारण भी आबादी में इजाफा देखा गया है। हालांकि बीते 200 सालों में आबादी बढ़ने की गति अफ्रीका और एशिया की ज्यादा रही है। अब भी देखा जा रहा है कि दक्षिण एशिया, अफ्रीका जैसे इलाकों में आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन कई देशों में गिरावट की स्थिति है।

भयंकर हादसा: गंगास्नान कर लौट रहे दोस्तों की कार एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाग्रस्त

दादरी दादरी क्षेत्र में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर बृहस्पतिवार रात वैगन आर कार और ट्रक में टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में वैगन आर कार चालक सहित तीन की मौत हो गई, जबकि कार में सवार तीन अन्य लोग घायल हो गए। कार में कुल छह लोग सवार थे। ये सभी आपस में दोस्त थे। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने पीड़ित के स्वजन को सूचित कर मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। टक्कर इतनी जोरदार थी की कार के परखच्चे उड़ गए। हाइड्रा की मदद से कार को ट्रक से अलग किया गया। वहीं घायलों को बचाने के लिए पुलिसकर्मियों ने राहत व बचाव कार्य के अलावा अस्पताल में रक्तदान भी किया। पुलिस के अनुसार कोसीकलां मथुरा का रहने वाला कार चालक गौरव अपनी टैक्सी में पांच लोगों को लेकर हरिद्वार से फरीदाबाद लौट रहा था। वह बृहस्पतिवार रात करीब साढ़े दस बजे दादरी क्षेत्र के बील अकबरपुर के पास ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के पास पहुंचा तो वहीं सड़क किनारे खड़े ट्रक में कार की जबरदस्त टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। राहगीरों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कार की स्थिति देखकर हाइड्रा मंगाई और कार की बाडी को काटकर लोगों को बाहर निकाला। चालक गौरव समेत लोकेश निवासी हनुमान नगर खेड़ीपुल, गौतम निवासी जंवा छांयसा फरीदाबाद को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कोंडला होडल पलवल निवासी ललित की हालत गंभीर है। हरविंदर निवासी छांयसा फरीदाबाद हरियाणा, कुलदीप निवासी जंवा छायंसा फरीदाबाद घायल हैं। सभी का उपचार चल रहा है। घायलों की जान बचाने के लिए चार पुलिसकर्मियों ने रक्तदान भी किया। इधर, घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। ट्रक व कार को पुलिस ने कब्जे में ले लिया। दादरी कोतवाली प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया कि कार सवार हरिद्वार से गंगा स्नान कर फरीदाबाद वापस लौट रहे थे। इसी दौरान हादसा हुआ है। दो घायलों को शारदा अस्पताल व एक को फरीदाबाद में भर्ती कराया गया है। प्रथम दृष्टया जांच में वैगन आर कार खड़े ट्रक में पीछे से टकरा गई है। वास्तविक स्थिति का पता ट्रक चालक की गिरफ्तारी के बाद चलेगा। पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।  

पाकिस्तान ने फिर जताई बातचीत की इच्छा, कश्मीर और आतंकवाद मुद्दा मुख्य

नई दिल्ली पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत के साथ बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान न सिर्फ कश्मीर, बल्कि सभी लंबित मुद्दों पर भारत से बातचीत करने को तैयार है। इशाक डार ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने कभी मध्यस्थता की मांग नहीं की, लेकिन अगर किसी तटस्थ जगह पर बातचीत का प्रस्ताव मिलता है तो वह तैयार हैं। भारत का दो टूक जवाब हालांकि, भारत ने कई बार यह साफ किया है कि पाकिस्तान से बातचीत सिर्फ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की वापसी और आतंकवाद पर ही होगी। भारत ने कहा है कि कश्मीर पर किसी तरह की चर्चा नहीं होगी। इशाक डार ने खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें अमेरिका से भारत के साथ सीजफायर के लिए फोन आया था। उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता है। बता दें, 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला किया था। यह हमला 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई थी। चार दिनों तक चला संघर्ष भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए भारत के कई इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन भारत के डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के सभी ड्रोन और मिसाइल अटैक को नष्ट कर दिया था। लगातार चार दिनों तक दोनों देशों के बीच चले संघर्ष के बाद 10 मई को सीजफायर पर सहमति बनी थी। इशाक डार ने कहा कि यह समझौता अभी भी कायम है।

पूर्व NSA के घर हुई FBI रेड, भारत को लेकर ट्रंप की टिप्पणियों का मामला उजागर

नई दिल्ली अमेरिका में अचानक से राजनीतिक उथल-पुथल मच गया है। FBI ने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत रह चुके जॉन बोल्टन के घर पर छापेमारी की है। मामला उनकी किताब 'The Room Where It Happened' में गुप्त सूचनाओं के खुलासे से जुड़ा बताया जा रहा है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार सुबह 7 बजे के करीब एफबीआई एजेंट्स ने मैरीलैंड के बेथेस्डा इलाके में बोल्टन के घर पर छापा मारा। FBI डायरेक्टर ने क्या कहा? यह कार्रवाई एफबीआई के डायरेक्टर काश पटेल के आदेश पर की गई है। छापे के बाद काश पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। एफबीआई एजेंट्स मिशन पर हैं।" बता दें, बोल्टन डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। लेकिन ट्रंप से मतभेद के बाद से वे लगातार उनकी नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। कब का है मामला? यह पूरा मामला बोल्टन की 2020 में आई किताब से जुड़ा है। किताब में ट्रंप प्रशासन के दौरान की कई गोपनीय बातें लिखी गई थीं। ट्रंप ने इसकी रिलीज रोकने की भी कोशिश की थी, लेकिन किताब छप गई थी। क्या है आरोप? सितंबर 2020 में ट्रंप सरकार के न्याय विभाग ने इस किताब को लेकर जांच शुरू की थी। अब इसी जांच को आगे बढ़ाते हुए एफबीआई ने छापेमारी की है। बोल्टन पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां सार्वजनिक कर दी। ट्रंप की आलोचना हाल ही में बोल्टन ने ट्रंप के उस बयान पर टिप्पणी की थी, जिसमें ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराया था। बोल्टन ने कहा था कि यह सिर्फ ट्रंप की आदत है कि वह हर चीज का श्रेय लेना चाहते हैं। इसका भारत से कोई लेना-देना नहीं है।