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ग्लोबल वार्मिंग के बीच समंदर का अनोखा ठंडा हिस्सा बना पहेली

नई दिल्ली जहां एक तरफ ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण पूरी दुनिया तप रही है और अल-नीनो जैसी घटनाओं ने समंदरों के तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है, वहीं अटलांटिक महासागर में ग्रीनलैंड के ठीक दक्षिण में एक ऐसी जगह है जो लगातार ठंडी होती जा रही है. दुनिया के नक्शे पर जहां हर तरफ बढ़ते तापमान को दिखाने वाले लाल और नारंगी रंग के धब्बे नजर आते हैं, वहीं यह हिस्सा एक गहरे नीले धब्बे की तरह चमकता है. वैज्ञानिक इस अजीबोगरीब घटना से हैरान हैं और इसे 'कोल्ड ब्लॉब' या 'नॉर्थ अटलांटिक वार्मिंग होल' का नाम दिया गया है. नासा के आंकड़ों से यह साफ हुआ है कि साल 1880 से लेकर 2025 तक इस पूरे इलाके में तापमान लगातार गिरा है. जब पूरी दुनिया का औसत तापमान बीते एक दशक में लगभग 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है, तब इस ठंडे हिस्से का तापमान करीब 0.9 डिग्री सेल्सियस तक कम हो गया है, जो वैज्ञानिकों के लिए एक गहरी चिंता और रिसर्च का विषय बन गया है. क्या है समंदर का 'ग्लोबल कनवर्टर बेल्ट' (AMOC)? इस रहस्यमयी ठंडक के पीछे की मुख्य वजह महासागरीय धाराओं के एक विशाल नेटवर्क को माना जा रहा है, जिसे अटलांटिक मेरिडियोनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC) कहा जाता है. यह समंदर के भीतर बहने वाली पानी की एक ऐसी बेल्ट है जो दुनिया भर के मौसम को कंट्रोल करती है. इसका मुख्य काम भूमध्य रेखा के गर्म पानी को उत्तर दिशा (यूरोप और ध्रुवीय क्षेत्रों) की ओर ले जाना और वहां के ठंडे व खारे पानी को नीचे की ओर धकेलते हुए वापस दक्षिण की ओर लाना है. पानी का यह चक्र इतना विशाल है कि इसे पूरा होने में लगभग 1,000 साल का समय लगता है. यह धारा इतनी शक्तिशाली है कि इसका जलप्रवाह अमेज़न नदी के मुहाने से बहने वाले पानी की तुलना में करीब 90 से 100 गुना अधिक होता है. ब्रिटेन और उत्तर-पश्चिमी यूरोप में सर्दियों के मौसम में जो हल्की नरमी देखी जाती है, वह इसी AMOC द्वारा दक्षिण से लाई जाने वाली गर्मी के कारण ही संभव हो पाती है. सुस्त पड़ रहा है समंदर का इंजन जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स (2026) और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (2025) द्वारा प्रकाशित नए रिसर्चों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह 'कोल्ड ब्लॉब' असल में AMOC के कमजोर होने का एक सीधा और खतरनाक लक्षण है. ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्रीनलैंड की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे महासागर में बड़े पैमाने पर मीठा पानी मिल रहा है. यह मीठा पानी समंदर के खारे पानी को हल्का कर देता है, जिसकी वजह से ठंडा पानी भारी होकर नीचे नहीं बैठ पाता और यह दुनिया की 'कनवर्टर बेल्ट' सुस्त पड़ने लगती है. चूंकि यह बेल्ट अब उत्तर की ओर उतनी गर्मी नहीं भेज पा रही है, इसलिए ग्रीनलैंड के दक्षिण का यह हिस्सा गर्म होने के बजाय लगातार ठंडा होता जा रहा है. अगर यह प्रणाली इसी तरह कमजोर होती रही, तो समंदर की वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता भी घट जाएगी, जिससे धरती पर ग्रीनहाउस गैसों का प्रभाव और अधिक विनाशकारी हो जाएगा. भारतीय मॉनसून और दुनिया पर होने वाला भयानक असर यदि AMOC का यह चक्र पूरी तरह ठप हो जाता है, तो इसके परिणाम हॉलीवुड की डरावनी साइंस-फिक्शन फिल्म (जैसे The Day After Tomorrow) जैसे हो सकते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन और पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि मौजूदा उत्सर्जन इसी तरह जारी रहा, तो इसी सदी में यह महासागरीय धारा पूरी तरह बंद हो सकती है. इसके बंद होने से जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जिससे वहां भयंकर बर्फीला तूफान और अत्यधिक ठंड का दौर शुरू हो जाएगा. इसका सबसे घातक असर भारत सहित दक्षिण एशिया के मॉनसून सिस्टम पर पड़ेगा. समंदर के तापमान में इस उथल-पुथल के कारण अल-नीनो की घटनाएं और अधिक शक्तिशाली हो जाएंगी, जो भारतीय मॉनसून को पूरी तरह तबाह कर सकती हैं. भारत की आधी से अधिक कृषि भूमि सिंचाई के लिए मॉनसूनी बारिश पर निर्भर है, ऐसे में मॉनसून का बिगड़ना करोड़ों किसानों की आजीविका और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर देगा.

नई आर्मी यूनिफॉर्म-2026 मैनुअल जारी, बंडी जैकेट और नए ड्रेस कोड को मंजूरी

नई दिल्ली भारतीय सेना ने गुलामी के दौर की परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए अपने यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग नियमों में बड़े ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत अब फॉर्मल कार्यक्रमों में बंद गले की बंडी जैकेट पहनने की मंजूरी दे दी गई है, जबकि पारंपरिक पाउच बेल्ट को हटा दिया गया है। इसके अलावा, परेड के दौरान समीक्षा अधिकारियों के लिए तलवार ले जाने की अनिवार्यता को भी वैकल्पिक बना दिया गया है। ये सभी बदलाव सेना द्वारा जारी आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026 (Army Uniforms-2026) नाम के एक नए 174 पन्नों के मैनुअल में दिए गए हैं। इससे पहले सेना ने करीब आठ साल पहले अपनी वर्दी को लेकर ऐसा कोई व्यापक मैनुअल जारी किया था। इस मैनुअल के एक खंड में कहा गया है कि देश की भावनाओं और बदलती संप्रभु पहचान को ध्यान में रखते हुए ये बदलाव किए गए हैं। ये सुधार भारतीय सेना की गरिमा, कार्यक्षमता और स्थायी परंपराओं को बनाए रखते हुए औपनिवेशिक काल के बचे हुए प्रतीकों को हटाने का एक प्रगतिशील प्रयास हैं। सेना में पुराने समय से चले आ रहे रॉयल जैसे ब्रिटिशकालीन शब्दों के इस्तेमाल को भी अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। मैनुअल की प्रस्तावना में एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक ने कहा कि यह संस्करण औपनिवेशिक काल की प्रथाओं, सामानों और शब्दावली को धीरे-धीरे हटाकर सेना के ड्रेस नियमों को समकालीन भारतीय लोकाचार के अनुरूप बनाने की दिशा में एक विचारशील कदम है। यूनिफॉर्म में हुए मुख्य बदलाव बंडी जैकेट की एंट्री: अधिकारियों को पहली बार औपचारिक आयोजनों में बंद गले की बंडी जैकेट पहनने की अनुमति दी गई है। इसे पूरी आस्तीन की शर्ट के ऊपर पहना जा सकता है। यह जैकेट ठोस और सौम्य रंग की होगी, जिसे बिना हुक या हुक के साथ (दोनों पैटर्न) पहना जा सकता है। महिला अधिकारियों के लिए नियम: महिला अधिकारियों को सौम्य रंगों की साड़ी, कुर्ता-सलवार या दुपट्टे के साथ टखने तक की सीधी पैंट पहनने की अनुमति दी गई है। हालांकि, स्लीवलेस कुर्ते, प्लाजो और सिगरेट पैंट जैसे कैजुअल कपड़ों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। नया विंटर ड्रेस: सेना ने सभी रैंकों के लिए एक नई विंटर ड्रेस '3B' पेश की है, जिसमें अंगोला शर्ट के साथ बैटल जैकेट और बेरेट (टोपी) शामिल है। पाउच बेल्ट पर रोक: मेस ड्रेस नंबर 5 और 6 से चमकीली पाउच बेल्ट को हटा दिया गया है। ये ड्रेस राष्ट्रपति भवन, राजभवन के राजकीय कार्यक्रमों या प्रधानमंत्री और सेना कमांडरों के आवासों पर आयोजित होने वाले औपचारिक भोज के दौरान पहनी जाती हैं। हालांकि, बख्तरबंद कोर, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, आर्टिलरी रेजिमेंट, राइफल रेजिमेंट और सिग्नल्स कोर के कर्नल रैंक तक के अधिकारी अभी भी रेजिमेंटल कार्यक्रमों में इसे पहन सकेंगे। मूंछों पर भी कड़े दिशा-निर्देश नए मैनुअल में सैनिकों के रहन-सहन, ग्रूमिंग और सजने-संवरने के मानकों को भी कड़ाई से परिभाषित किया गया है। शरीर पर टैटू बनवाने और बॉडी पियर्सिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। वर्दी में किसी भी प्रकार का ब्रेसलेट पहनने की अनुमति नहीं होगी। केवल पूजा के दिन कलाई पर एक पवित्र धागा यानी कि कलावा बांधने की छूट होगी। सिख सैनिकों को छोड़कर किसी भी अन्य सैनिक को धार्मिक चिह्न प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है। सैनिकों की मूंछों का आकार 12 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। वर्दी में रहते हुए डियोड्रेंट या परफ्यूम लगाने पर पाबंदी होगी, हालांकि आफ्टर-शेव लोशन का उपयोग किया जा सकता है। महिला सैनिकों और सैन्य अधिकारियों के लिए लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी और नोज पिन पहनने पर सख्त रोक लगाई गई है। महिला कर्मी सिंदूर लगा सकती हैं, बशर्ते वह इस तरह लगाया जाए कि बेरेट या पीक कैप पहनने के बाद बाहर से दिखाई न दे।

अमेरिका में फायरिंग से दहशत, वांछित आरोपी विक्टर माटा विलेरियल मुठभेड़ में मारा गया

 टेक्सस  टेक्सस के मिडलैंड में हुई गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई और कम से कम 10 लोग घायल हो गए। संदिग्ध हमलावर, जिसकी पहचान 45 साल के विक्टर माटा विलेरियल के रूप में हुई है, बाद में पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद मृत पाया गया। अधिकारियों ने बताया कि हमला स्थानीय समयानुसार, सुबह करीब 8 बजे शुरू हुआ, जब पुलिस को एक शूटर की जानकारी मिली। टेक्सस डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक सेफ्टी के अनुसार, संदिग्ध ने राहगीरों और अधिकारियों पर गोलीबारी की। संदिग्ध ने पहले भी चलाई थी पुलिस पर गोली अधिकारियों ने बताया कि विलेरियल पहले से ही 'कैपिटल मर्डर' के प्रयास के मामले में वांछित था, क्योंकि उसने सप्ताह की शुरुआत में कार का पीछा किए जाने के दौरान कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई थी। पुलिस ने बताया कि अधिकारी ने बुधवार को उसे रोकने की कोशिश की थी, लेकिन विलेरियल ने कई बार गोली चलाई और भाग गया। बाद में उसकी गाड़ी लावारिस हालत में मिली। अधिकारियों ने कहा कि यह वह व्यक्ति था जिसकी हम पहले से ही तलाश कर रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार की गोलीबारी पिछली घटना से ज्यादा दूर नहीं हुई थी। हमलावर ने खुद को क्लिनिक में बंद किया शुक्रवार की गोलीबारी के बाद, विलेरियल ने खुद को एक बंद पड़े पशु चिकित्सा क्लिनिक के अंदर बंद कर लिया। पुलिस ने इमारत को घेर लिया और इलाके को खाली कराने का काम किया। मिडलैंड पुलिस प्रमुख ग्रेग स्नो ने बताया कि जब अधिकारी वहां पहुंचे तो उन पर गोलीबारी की गई। उन्होंने कहा कि कई अधिकारियों को अपनी गश्ती गाड़ियों के पीछे छिपना पड़ा और उन्हें बचाने के लिए बख्तरबंद गाड़ी का इस्तेमाल करना पड़ा। किसी भी अधिकारी को चोट नहीं आई। अधिकारियों ने इमारत में घुसने के लिए रोबोट और ड्रोन का इस्तेमाल किया और बाद में पुष्टि की कि संदिग्ध अंदर मृत पाया गया। 10 लोग घायल घायल हुए दस लोगों को मिडलैंड मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया। चार लोगों को सर्जरी की जरूरत पड़ी, जबकि अन्य की हालत स्थिर बताई गई। कुछ लोगों को बाद में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अधिकारियों ने पीड़ितों के बारे में या गोलीबारी की वजह के बारे में कोई जानकारी जारी नहीं की है। मिडलैंड की मेयर लोरी ब्लॉन्ग ने समुदाय से प्रभावित लोगों का समर्थन करने का आग्रह किया।

एमटी सेलेस्टियल सी पर तैनात भारतीय अधिकारी की मौत, रेस्क्यू में देरी पर विवाद

मस्कट  ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक पोत पर सवार एक भारतीय नागरिक की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण मौत हो गई। भारतीय दूतावास ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर बताया कि मृतक की पहचान निशांत उर्थनाथन के रूप में की गई है। उसने बताया कि जब निशांत की मौत हुई उस समय वह मोटर टैंकर (एमटी) सेलेस्टियल सी पर सवार थे। खुलासा हुआ है कि एमटी सेलेस्टियल के क्रू ने रेडियो कम्युनिकेशन के जरिए अमेरिकी नौसेना के बार-बार मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया। अब दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना मृतक नाविक निशांत उर्थनाथन के शव को निकालने की अनुमति नहीं दे रही है अमेरिकी नौसेना से कई बार मांगी गई मदद स्पुतनिक इंडिया ने एमटी सेलेस्टियल सी शिप के रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया है कि उसने अमेरिकी नौसेना को मदद के लिए बार-बार कॉल किया। इसमें भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन को बहुत ज्यादा उल्टी होने की रिपोर्ट दी गई। लेकिन, अमेरिकी नौसेना की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। बाद में 11 जून को निशांत उर्थनाथन की सांसें रुक गई। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी नौसेना अभी भी लाश को निकालने की इजाजत नहीं दे रही है। एमटी सेलेस्टियल शिप के कैप्टेन ने घटना के बारे में बताया रिपोर्ट में एमटी सेलेस्टियल सी शिप पर हुई घटना को लेकर एक लेटर भी शेयर किया गया है। इसमें जहाज के कप्तान राजेंद्र यादव समेत कई दूसरे कर्मचारियों के हस्ताक्षर भी हैं। इसमें लिखा है, "यह सूचित किया जाता है कि निशांत उर्थनाथन, पीपी क्रमांक 58104330, रैंक द्वितीय अधिकारी, ने 08.06.2026 को दोपहर 12:00 बजे अस्वस्थता और लगातार उल्टी होने की सूचना दी। उन्होंने कंपनी कार्यालय को सूचित किया और वीएचएफ चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना को फोन करके रोगी की स्थिति के बारे में बताया लगातार उल्टी से पीड़ित था भारतीय नाविक उन्होंने आगे लिखा, "शाम तक द्वितीय अधिकारी के स्वास्थ्य के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उल्टी की तीव्रता बढ़कर हर 5-10 मिनट में होने लगी। उन्हें ओन्डेट-एमडी की गोली दी गई। शाम 4:00 बजे उन्होंने फिर से उल्टी कर दी। शाम 7:00 बजे उन्हें फिर से ओन्डेट-एमडी की गोली दी गई। रात 11:00 बजे एक बार उल्टी हुई। उस रात उल्टी नहीं हुई। 09.06.2026 को भी उल्टी नहीं हुई, केवल पेट और शरीर में दर्द था। उसे तरल दाल, चावल, ओआरएस और पानी पिलाया जा रहा था।" अमेरिकी नौसेना ने नहीं की मदद लेटर में आगे लिखा है, "10.06.2026 को हमने उन्हें तरल पदार्थ, भोजन और पानी दिया। हमने कंपनी को लगातार सूचित किया और वीएचएफ चैनल 16 पर अमेरिकी नौसेना को भी लगातार फोन करके बीमार मरीज की स्थिति के बारे में बताया, लेकिन फिर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। डॉक्टर की सलाह के अनुसार, हमने दवाएं दीं और वीएचएफ चैनल 16 के माध्यम से एजेंटों/अमेरिकी नौसेना के ज़रिए तटवर्ती सहायता का प्रयास किया।" शिप ने कई बार अमेरिकी नौसेना से संपर्क साधा लेटर के अनुसार, "11 जून 2026 की सुबह 6 बजे उन्होंने पानी और भोजन लेना बंद कर दिया। डीआई की सलाह के अनुसार, कंपनी को लगातार सूचना दी गई। हमने दवाइयां दीं और एजेंटों/अमेरिकी नौसेना के माध्यम से वीएचएफ चैनल 16 पर तटवर्ती सहायता का प्रयास किया। दोपहर 12 बजे लंगर उठाकर ओमान के निकटतम बंदरगाह दुकुम की ओर बढ़ना शुरू किया। दुकुम, ओमान के बंदरगाह नियंत्रण को फोन करके द्वितीय अधिकारी के चिकित्सा निकासी की आवश्यकता बताई गई।" जहाज पर फंसा है भारतीय नाविक का शव जहाज के कप्तान ने बताया, "बंदरगाह नियंत्रण ने दुकुम में स्थानीय एजेंट से संपर्क किया। दोपहर 2 बजे तक कंपनी ने हमें एजेंट का विवरण दिया। हमने यह जानकारी दुकुम बंदरगाह नियंत्रण को दे दी। दोपहर 3 बजे के बाद वह बेहोश हो गया, शाम 5 बजे पता चला कि उसकी सांसें रुक गई हैं। उसे कई बार सीपीआर दिया गया, ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और उसकी नब्ज जांची गई, जो उस समय ठीक थी। बाद में शाम 6 बजे पता चला कि उसकी नब्ज भी रुक गई है। कंपनी से लगातार संपर्क में है लेकिन हेलीकॉप्टर से बचाव नहीं हो पाया है।"  

ईरान को 25 अरब डॉलर फ्रीज्ड फंड मिलने का दावा, होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर भी सहमति की बात

नई दिल्ली अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील को लेकर महीनों से चल रही खींचतान अब खत्म होती नजर आ रही है. दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते (पीस डील) का एक ड्राफ्ट सामने आया है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम से लेकर तेल कारोबार, होर्मुज स्ट्रेट और अरबों डॉलर फ्रीज किए हुए तक कई बड़े मुद्दों पर सहमति बनने का दावा किया गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान ने यह वादा किया है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही किसी अन्य तरीके से उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा. यह अमेरिका की सबसे बड़ी मांगों में से एक रही है. ड्राफ्ट के मुताबिक, ईरान के पास मौजूद उच्च स्तर पर संवर्धित (हाईली एनरिच्ड) यूरेनियम का संवर्धन स्तर भी कम किया जाएगा. हालांकि यह प्रक्रिया कैसे होगी, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. दोनों पक्ष अगले 60 दिनों के भीतर इसकी तकनीकी रूपरेखा तय करेंगे. 25 अरब डॉलर फ्रीज्ड फंड ईरान कर पाएगा हासिल इस समझौते का सबसे बड़ा आकर्षण ईरान के फ्रीज्ड फंड को लेकर है. ईरानी अधिकारी का दावा है कि अमेरिका करीब 25 अरब डॉलर फ्रीज किए गए फंड को जारी करने पर सहमत हो गया है. इसमें डायरेक्ट कैश ट्रांसफर, क्षेत्रीय देशों के सहयोग और वित्तीय क्रेडिट लाइन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं. इसके अलावा अमेरिका कुछ समय के लिए ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में भी छूट देगा. इससे ईरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा तेल बेच सकेगा और उससे होने वाली कमाई अपने पास रख सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत दे सकता है, जो वर्षों से पश्चिमी प्रतिबंधों की मार झेल रही है. डील पर साइन होने के बाद खुल जाएगा होर्मुज स्ट्रेट डील में होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी शामिल है. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोल देगा. इसके बदले अमेरिका ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करेगा. अगर यह समझौता लागू होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी राहत मिल सकती है. पिछले कई महीनों से होर्मुज में तनाव के कारण तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है. निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों की नजरें इस समझौते पर टिकी हुई हैं. समझौते की टाइमिंग अब भी तय नहीं! समझौते को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं. वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हस्ताक्षर की तैयारियां चल रही हैं और इसके बाद तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी. लेकिन दूसरी तरफ ईरान के भीतर इस समझौते को लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है. कट्टरपंथी समूहों और कुछ राजनीतिक धड़ों ने डील के समय और शर्तों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता. फिलहाल यह ड्राफ्ट समझौता अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है, लेकिन अगर दोनों पक्ष इस पर सहमत हो जाते हैं तो यह हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी. इससे न सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है.

एमटी सेलेस्टियल जहाज पर भारतीय क्रू मेंबर की मेडिकल वजहों से मौत

 नई दिल्ली मस्कट में भारतीय दूतावास ने शनिवार देर रात बताया कि ओमान के डुक्म पोर्ट पर खड़े जहाज 'एमटी सेलेस्टियल' पर एक भारतीय नागरिक की मेडिकल दिक्कतों के कारण मौत हो गई। दूतावास ने मृतक की पहचान निशांत उर्थनाथन के तौर पर की है। दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "मृतक के शव को जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।" साथ ही यह भी बताया गया कि उनका शव अभी डुक्म पोर्ट पर मौजूद जहाज पर ही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर के शिपिंग बेड़े में 3,00,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम करते हैं। देश के शिपिंग मंत्रालय के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते बताया था कि मिडिल ईस्ट में 18,000 से ज्यादा भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। अमेरिकी हमले में मारे गए थे तीन भारतीय नाविक यह मौत ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही ओमान के पास एक टैंकर पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए थे, जिसकी वजह से जनता और विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की थी। विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे इस हफ्ते के आखिर में होने वाले 'ग्रुप ऑफ सेवन' (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सामने यह मुद्दा उठाएं। विदेश मंत्रालय ने क्या बताया? भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने "नागरिक शिपिंग के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल पर अपनी गहरी चिंता" जाहिर करने के लिए अमेरिका के 'चार्ज डी'अफेयर्स' (राजनयिक प्रतिनिधि) को तलब किया था। 'फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया' ने शनिवार को सोशल मीडिया पर बताया कि 35 वर्षीय निशांत उर्थनाथन की 11 जून को मौत हो गई थी। उनका शव बिना सही रेफ्रिजरेशन के दो दिन से ज्यादा समय तक जहाज पर ही रखा रहा। यूनियन ने कहा, "क्रू सदस्य शव को सड़ने से बचाने की कोशिश में ठंडे पानी की बोतलों का इस्तेमाल कर रहे हैं यह एक डरावनी और स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी स्थिति है।"

होर्मुज विवाद पर जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से जताई कड़ी आपत्ति

नई दिल्ली ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले कमर्शल शिप को निशाना बनाए जाने और तीन भारतीयों की मौत के बाद अमेरिका के साथ एक बार फिर कहासुनी शुरू हो गई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि उन्होंने फोन पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बात करके कड़ी आपत्ति जताई है। तो दूसरे ही दिन रूबियो का बयान आ गया कि होर्मुज में नाकेबंदी का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी बीच ईरान में फंसे कुछ नाविकों ने वीडियो जारी करके सवाल किया है कि आखिर भारतीय शिप को ही क्यो निशाना बनाया जा रहा है। भारतीय नाविक क्यों निशाने पर? वीडियो में एक नाविक कहता है, भारतीय नाविकों पर हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, हम लोग ईरान में हैं। सिर्फ भारतीय जहाजों पर हमला हो रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है। हम लोग किसी सेना से तो हैं नहीं। हमें लड़ने की ट्रेनिंग नहीं मिली है। हम केवल देश का बिजनेस बढ़ा रहे हैं। हम कॉन्ट्रैक्ट बेस पर काम कर रहे हैं। हमारी क्या गलती है। कल एक शिप पर अटैक हुआ। उस शिप पर मैंने काम किया था। कैप्टन साहब से बात की तो उन्होंने बताया कि एक वॉर्निंग दी गई और फिर तुरंत मिसाइल से हमला कर दिया गया। आखिर उनकी क्या गलती थी।   उन्होंने कहा, हम लोगों को बीच में क्यों घसीटा जा रहा है। हम 13 लाख सीफेरर्स हैं। हम एक दूसरे की आवाज उठा सकते हैं। सवाल यह है कि सिर्फ भारतीय नाविकों को ही क्यो निशाना बनाया जा रहा है। बता दें कि अमेरिका ने 24 भारतीय चालक दल वाले एक जहाज पर ओमान तट पर हमला कर दिया था। इसमें तीन नाविकों की मौत हो गई थी और 21 को सुरक्षित निकाला जा सका था। कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला कांग्रेस का कहना है कि भारतीय नाविकों की मौत पर सरकार की प्रतिक्रिया शर्मनाक है। राहुल गांधी ने कहा कि मार्को रूबियो अफसोस जताने की बजाय आदेश देने वाली भाषा बोल रहे हैं। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि अमेरिकी कृत्य को अवैध एवं अस्वीकार्य कहा जाना चाहिए था और उससे माफी की मांग की जानी चाहिए थी। इसको लेकर खेड़ा ने 'एक्स' पर लिखा, "भारत को अमेरिकी सैन्य हमले में तीन युवा भारतीय नाविकों की हत्या के लिए बिना शर्त माफ़ी की मांग करनी चाहिए थी। इसके बजाय, अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने कथित तौर पर एक चेतावनी जारी करने का फैसला किया, जिसमें घोषणा की गई कि अमेरिकी सेना के आदेशों का पालन न करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

डील से पहले ईरान में बढ़ता विरोध आखिर क्या संकेत दे रहा है?

तेहरान  अमेरिका से शांति समझौता करने के खिलाफ ईरानी लोगों का एक वर्ग सड़क पर उतर गया है। ईरान के कई शहरों में डील के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ईरानी हितों के खिलाफ जाकर डील की जा रही है, जो नहीं होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के निशाने पर खासतौर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ हैं। अमेरिका से समझौते में ईरान की ओर से मुख्य वार्ताकार गालिबाफ और अराघची के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई है। तेहरान के इब्न सिना स्क्वायर में शनिवार को रैली हुई है। मशहद शहर में विदेश मंत्रालय के सामने भी दर्जनों लोग अब्बास अराघची के विरोध में जमा हुए। फार्स न्यूज एजेंसी ने वीडियो जारी किया है, जिसमें मशहद में प्रदर्शनकारी अराघची के खिलाफ नारे लगाते दिख रहे हैं। विरोध करने वालों का मानना है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव कमजोर होगा। अराघची और गालिबाफ निशाने पर मशहद में महिलाओं को झंडे लहराते हुए और 'बेईमान घुसपैठिए अराघची मुर्दाबाद और अराघची हाय हाय' के नारे लगाते हुए देखा गया है। एक और वीडियो में प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि अराघची का समझौता ईरान को बेइज्जत करने वला है। उन्होंने उस समझौते में अमेरिका को बहुत ज्यादा और गैरजरूरी रियायतें दी हैं। ऐसे में गालिबाफ और अराघची इस्तीफा दें। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि समझौते से ईरान के हितों की रक्षा नहीं होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर देश अपनी पकड़ खो देगा। शुक्रवार को एक इंटरव्यू में अराघची ने कहा था कि प्रस्तावित समझौते में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की बात कही गई है। साथ ही समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने का दावा भी किया जा रहा है। ईरान अमेरिका समझौता ईरान लोग ऐसे समय प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे हैं, जब अमेरिका से उनके देश का समझौता बेहद करीब है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर रविवार को दस्तखत हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान ने कहा है कि दोनों पक्ष रविवार को डील साइन कर सकते हैं। ईरानी नेताओं ने रविवार को समझौते पर दस्तखत होने की बात नहीं कही है लेकिन माना है कि अमेरिका के साथ समझौते पर बातचीत आगे बढ़ी है। ईरान ने संकेत दिया है कि डील में अभी कुछ समय लग सकता है। ईरानी पक्ष के बयानों से रविवार को समझौता होना मुश्किल नजर आ रहा है लेकिन जल्दी ही डील होने की उम्मीद है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खुल जाएगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को कहा कि 24 घंटे के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। उन्होंने इशारा किया कि रविवार को दस्तखत हो सकते हैं।  

‘झुकना बंद करो’अमेरिका से डील पर ईरान में बवाल, अराघची और गालिबाफ बने निशाने पर

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी जंग सुलझती नजर आ रही है, लेकिन अब ईरान में अमेरिका के साथ शांति समझौते के खिलाफ विरोध के सुर फूट रहे हैं। कट्टरपंथी ईरानियों का गुस्सा इस डील में मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा रहे विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सांसद गालिबाफ के खिलाफ निकल रहा है। शनिवार को ईरान के कई शहरों में इन दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी हई और शांति समझौते का विरोध किया गया। ईरान में यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं, जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर शेखी बघार रहा है। ट्रंप ने यहां तक कहा है कि ईरान के साथ समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि ईरान ने इससे इनकार किया है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में शांति समझौते को लेकर दो पक्ष बंटे हुए हैं। एक तरफ कुछ लोग शांति समझौते के लिए राजी हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इस युद्ध में शहीद सुप्रीम लीडर और तमाम साथियों का बदला चाहते हैं। शनिवार को जब विदेश मंत्री अराघची मसहद शहर में एक सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे। उसी दौरान सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने नारे बाजी शुरू कर दी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों में कई महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने काले चाहत पहने हुए थे और वह लाल झंडे लिए नारे लगा रही थीं। इस प्रदर्शन की एक वीडियो भी वायरल हुई है, जिसमें प्रदर्शन कारी डेथ टू अराघची, अराघची शर्म करो, झुकना बंद करो और अराघची इस्तीफा दो' जैसे नारे लगाती सुनी जा सकती हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मसहद के एक निवासी ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारी लगातार अराघची का विरोध कर रहे थे। अराघची के खिलाफ बढ़ रहा गुस्सा एएफपी की रिपोर्ट के मताबिक, ईरान में इस शांति समझौते को लेकर लगातार गुस्सा बढ़ रहा है। दरअसल, प्रदर्शनकारियों का तर्क यह है कि जब युद्ध हो ही चुका है और अमेरिका झुक गया है तो फिर ट्रंप की शर्तों के आधार पर समझौता करने की जरूरत क्या है। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अराघची और गालिबाफ जिस समझौते को स्वीकार करने की तैयारी कर रहे हैं, वह ईरान के हितों को नहीं साधता। इससे होर्मुज पर भी ईरान की पकड़ कमजोर हो सकती है। भले ही प्रदर्शनकारी अराघची के ऊपर ईरान के साथ धोखेबाजी का आरोप लगा रहे हों लेकिन अराघची लगातार ईरान के पक्ष में बातचीत करने का दावा कर रहे हैं। अराघची और गालिबेफ के खिलाफ यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब दोनों ही पक्षों की तरफ से शांति समझौते को लेकर आम राय बन रही है। ईरान की तरफ से कहा गया है कि जल्दी ही अमेरिका के साथ 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। वहीं, इस समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि जल्दी ही समझौता हो सकता है। ट्रंप ने भी अपने 80वें जन्मदिन के दिन समझौता करने दावा किया है।

बैरागीवाला गांव में दो समुदायों की झड़प का CCTV आया सामने, एक की मौत से बढ़ा तनाव

उत्तराखंड उत्तराखंड के विकासनगर स्थित बैरागीवाला गांव में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प में युवक की मौत के बाद बवाल बढ़ता जा रहा है. यहां आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके घरों पर ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में पत्थराव कर दिया. आरोपी के घर को आग के हवाले कर दिया गया. वहीं प्रशासन ने मामले को देखते हुए इंटरनेट बंद कर दिया है. अब इस मामले को लेकर 12 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. वहीं इस घटना के बाद बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया है. इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें कई लोग लाठी-डंडों के साथ एक-दूसरे पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं. बैरागीवाला गांव से सामने आए CCTV फुटेज ने घटना के खौफनाक मंजर को कैमरे में कैद कर लिया है. वीडियो में लाठी-डंडों से लैस लोग सड़कों पर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं. कुछ लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, तो कहीं चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल नजर आ रहा है. इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया. पुलिस का कहना है कि विवाद की शुरुआत खेत में पानी लगाने को लेकर हुई थी, लेकिन कुछ ही देर में मामूली कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई. अब सामने आए CCTV फुटेज में वो हिंसा दिखाई दे रही है. वीडियो में देखा जा सकता है कि गांव की गलियों में अचानक हलचल बढ़ जाती है. कुछ लोग हाथों में लाठियां लेकर दौड़ते नजर आते हैं. इसके बाद हमला शुरू हो जाता है. लोग इधर-उधर भागने लगते हैं. महिलाएं और बच्चे भी डर के साये में सुरक्षित जगह तलाशते दिखाई देते हैं. इस हिंसक झड़प में एक हिंदू युवक की मौत हो गई, जबकि महिला समेत तीन लोग घायल हुए हैं. युवक की मौत की खबर फैलते ही गांव का माहौल और ज्यादा गर्म हो गया. देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए. घटना के बाद गुस्साए हिंदूवादी संगठन के लोगों ने गांव में पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के एनकाउंटर समेत उनके घरों पर बुलडोजर एक्शन की मांग की और हाइवे जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समुदाय विशेष देवभूमि को कश्मीर बनाना चाहता है. यह घटना कोई मामूली घटना नहीं है कि यह एक हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग की गई. गुस्साए लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नेशनल हाइवे जाम कर दिया. कई घंटों तक सड़क पर प्रदर्शन चलता रहा. लोगों का कहना था कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को पूरे इलाके को छावनी में बदलना पड़ा. अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और हर गतिविधि पर नजर रखी जाने लगी. प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली. घटना के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा विधायक घटना के बाद भाजपा विधायक मुन्ना चौहान पहले घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे. फिर वहां से सीधे बैरागीवाला गांव पहुंचे, जहां उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए मौके पर मौजूद पुलिस के आला अधिकारियों को सख्त एक्शन के निर्देश दिए. विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने पीड़ित परिवार से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया. इस मामले में सहसपुर कोतवाली पुलिस के मौजूदा थाना प्रभारी को सख्त लहजे में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया. अब इस पूरे मामले में CCTV फुटेज पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी बन गया है. वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. हालांकि गांव में माहौल अब भी संवेदनशील बना हुआ है. एक तरफ परिवार अपने बेटे की मौत का इंसाफ मांग रहा है, दूसरी तरफ पूरा गांव CCTV में कैद उस हिंसा को देखकर सहमा हुआ है. घटना को लेकर एसपी ग्रामीण ने क्या कहा? इस घटना को लेकर एसपी देहात पंकज गैरोला ने कहा कि खेत में पानी लगाने को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुए मामूली विवाद के बाद कुछ युवकों ने विनोद नाम के युवक को पीट-पीटकर मार डाला. वहीं तीन लोगों पर जानलेवा हमला कर उन्हें घायल कर दिया. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रदर्शनकारियों से बात की जा रही है, आरोपियों की धड़पकड़ के लिए पुलिस टीम दबिश दे रही है. जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.