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प्रदोष काल के दौरान मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का एक सरल उपाय, मिलेगा धन लाभ

 हिंदू धर्म में प्रदोष काल को बहुत ही शुभ और पवित्र समय माना जाता है. यह वह विशेष समय है जब दिन और रात आपस में मिलते हैं. मान्यता है कि इस समय ब्रह्मांड में दिव्य ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है, और जो भी पूजा या साधना की जाए, उसका फल कई गुना अधिक मिलता है. प्रदोष काल की अवधि सूर्यास्त से शुरू होती है और लगभग 2 घड़ी 48 मिनट तक रहती है. कुछ विद्वान इसे सूर्यास्त के दो घड़ी बाद तक भी मानते हैं. यह पूरा समय भगवान शिव को समर्पित माना गया है. कहा जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं. इसी कारण, इस समय की गई पूजा विशेष फल देने वाली होती है.  प्रदोष काल में क्या करें? प्रदोष काल को शिव आराधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है. इस दौरान कुछ सरल उपाय करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और मन को शांति मिलती है.   शिवलिंग की पूजा करें प्रदोष काल शुरू होते ही स्नान करके शिव मंदिर जाएं. अगर मंदिर जाना संभव न हो, तो घर पर ही शिवलिंग की पूजा करें. मान्यता है कि इस पूजा से विवाह में आ रही रुकावटें, व्यापार संबंधी समस्याएं और स्वास्थ्य से जुड़े कष्ट दूर होते हैं. बेलपत्र पर सफेद चंदन से "ॐ" लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें. इसके बाद एक लोटा स्वच्छ जल या कच्चा दूध शिवलिंग पर चढ़ाएं. भगवान शिव को खीर, गुड़ या अपनी सामर्थ्य अनुसार कोई भी भोग लगाएं.  महामृत्युंजय मंत्र का जाप प्रदोष काल में किसी शांत जगह पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है. यह मंत्र मानसिक शांति देता है, भय दूर करता है और स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है.  घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं जैसे ही प्रदोष काल शुरू हो, अपने घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर शुद्ध घी के दीपक जलाएं. माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और लक्ष्मी कृपा भी बनी रहती है. 

Rahu Budh Yuti 2026: 2026 से इन राशियों के लिए आएगा शानदार समय, सबसे दुर्लभ संयोग बनेगा

ज्योतिषियों के नजरिए से साल 2026 बहुत ही खास रहने वाला है, जिसमें कई बड़े ग्रहों का गोचर और संयोग बनने वाला है. द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत में ही राहु-बुध का दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि और शिक्षा का कारकग्रह माना जाता है और बुध सभी ग्रहों का राजकुमार भी कहा जाता है. राहु को उल्टी चाल चलने वाला माना जाता है और कठोर वाणी, भ्रमित करने वाला माना जाता है.  ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह संयोग 18 साल बाद कुंभ राशि में बनेगा. इस संयोग से नौकरी, धन और प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में तरक्की मिलेगी. चलिए अब जानते हैं कि साल 2026 की शुरुआत में राहु-बुध की युति से किन राशियों को फायदा होगा.  मेष मेष राशि वालों के राहु-बुध की युति बहुत ही लाभकारी सिद्ध हो सकती है. ये युति मेष राशि वालों के 11वें भाव में बनेगी, जो कि लाभ भाव कहलाता है. आय में तगड़ा मुनाफा पाएंगे. निवेश के क्षेत्र से अच्छा परिणाम पा सकते हैं. शेयर मार्केट या किसी कंपनी में इन्वेस्टमेंट करने से भी लाभ के योग बनेंगे. पति-पत्नी का रिश्ता मजबूत होगा. परिवार के साथ अच्छा वक्त बिताएंगे.   वृषभ राहु-बुध की युति वृषभ राशि वालों के लिए भी बहुत ही सकारात्मक साबित होगी. यह युति वृषभ राशि वालों के कर्मस्थान में बनेगी. करियर और शिक्षा में अच्छे अवसर देखने को मिलेंगे. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. सैलरी बढ़ने का योग बन रहा है. नौकरी में पदोन्नति प्राप्त होगी. बिजनेस तरक्की पर पहुंचेगा.  मकर राहु-बुध की युति मकर राशि वालों के लिए भी बहुत ही फायदेमंद मानी जा रही है. रुका हुआ धन प्राप्त होगा. आर्थिक स्थिति अच्छी हो जाएगी. परिवार में सामंजस्य बैठेगा. धन कमाने के योग बन रहे हैं और आकस्मिक लाभ प्राप्त करने का भी योग बन रहा है.

11 दिसंबर 2025 का राशिफल: सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा दिन, क्या मिलेगा लाभ?

मेष राशि: कल का दिन आपके लिए नए एनर्जी लेकर आएगा। कल आप पहले से भी ज्यादा कॉन्फिडेंस फील करने वाले हैं, जिसकी वजह से पूरा दिन सही जाने वाला है। ऑफिस में काम से जुड़े फैसले आपके फेवर में जाएंगे और आने वाले दिनों में आपको कई नए मौके भी मिलेंगे। किसी खास शख्स से मुलाकात होने के योग हैं, जो आने वाले समय में लाभ दे सकती है। परिवार में माहौल शांत रहेगा। कपल्स के लिए आज का दिन सही है। आपकी सेहत सही रहेगी। वृषभ राशि: कल आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और कहीं से आपका रुका हुआ पैसा वापस आ सकता है। परिवार में कोई गुड न्यूज मिल सकती है। कामकाजी लोगों को ऑफिस में बॉस से तारीफ मिल सकती है, जिससे आगे चलकर अच्छे मौके मिल सकते हैं। रिलेशनशिप में समझ बढ़ने के संकेत है। आपका पार्टनर आपको सपोर्ट करेगा। आपकी जिंदगी में सकारात्मकता बढ़ेगी। सेहत आपकी सही रहने वाली है। मिथुन राशि: कल का दिन आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। आप अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देख सकते हैं। किसी भी तरह के फैसले लेने में कोई भी जल्दबाजी ना करें। काम का प्रेशर आप पर बहुत रहेगा। हालांकि शाम तक सब कुछ फिर से ट्रैक पर आ जाएगा। लव लाइफ में सुधार आएगा। कल किसी खास शख्स से आपकी बात हो सकती है। आने वाले समय में आप कहीं पर ट्रैवल भी कर सकते हैं। कर्क राशि: घर में खुशियों का माहौल होगा। सभी के साथ अच्छा समय बीतेगा। प्रोफेशनल लाइफ में आपको सफलता मिलने वाली है। आपके शांत स्वभाव और समझदारी की तारीफ की जाएगी। जो लोग सिंगल है उनका ध्यान किसी खास की ओर जा सकता है। बिजनेस से जुड़े लोगों को लाभ मिलने वाला है। सेहत में सुधार देखने को मिलने वाला है। सिंह राशि: कल का दिन आपके लिए शुभ है। कल आप चमकने वाले हैं। लोग आपकी सलाह को गंभीरता से सुनते हैं। प्रोफेशनल लाइफ में आपको नए मौके मिलेंगे। कोई प्रोजेक्ट सफल होने वाला है। रिश्ते के मामले में भी कल का दिन आपके लिए लकी है। कल धन लाभ के योग है। सेहत सही रहने वाली है। कन्या राशि: कल का दिन आपके लिए बिजी रहने वाला है। आपकी मेहनत अब जाकर रंग लाने वाली है। अगर आप अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में बैलेंस बनाकर रखेंगे तो लाभ मिलेगा। आज कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। आज पार्टनर से संभलकर बात करें क्योंकि बहसबाजी हो सकती है। हालांकि आप के बीच सब कुछ सही हो जाएगा। आपको अपनी सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। तुला राशि: कल का दिन आपके लिए पॉजिटिव आउटकम लेकर आएगा। रिश्तों में मिठास बढ़ेगी। आज किसी ऐसे शख्स का साथ मिल सकता है, जिसकी आपको जरूरत महसूस हो रही थी। ऑफिस में आज नए मौके मिल सकते हैं। आप अपनी क्रिएटिविटी से हर किसी को इम्प्रेस करने वाले हैं। पैसों के मामले में स्थिति सही रहेगी और लव लाइफ भी स्मूद होगी। धनु राशि: कल आप कहीं पर ट्रैवल कर सकते हैं और ये शुभ भी रहेगा। नया जगह आपको नया अनुभव देने वाला है। करियर में नए मौके मिलेंगे। कल आपको किसी एक्सपीरियंस इंसान से सलाह मिल सकती है, जो आपके फ्यूचर में बहुत काम आने वाली है। पार्टनर के साथ रिश्ता मजबूत होगा। सेहत भी सही रहने वाली है। मकर राशि: कल का दिन बहुत सही जाने वाला है। कल आप कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं, जिसका रास्ता सफलता की ओर ही जाता है। ऑफिस में आपकी वाहवाही होगी। परिवार में भी लोगों को सपोर्ट और प्यार मिलने वाला है। लव लाइफ भी सही जाएगी। पैसों की स्थिति बेहतर होगी। सेहत में सुधार आएगा। कुंभ राशि: आपकी क्रिएटिविटी कल सबको पसंद आएगी। सबको आपका आइडिया भी पसंद आने वाला है। आपको कल हर काम में सफलता मिलने वाली है। साथ ही आपको अपने दोस्तों का पूरा सपोर्ट मिलने वाला है। कल के दिन कोई पुराना विवाद खत्म हो सकता है। पैसों के मामले में कल का दिन सही जाने वाला है। वृश्चिक राशि: कल आपके सीक्रेट प्लान सफल होने वाले है। आपकी मेहनत रंग लाने वाली है। किसी पुरानी समस्या का हल मिलने वाला है। लवर्स के लिए अच्छा दिन रहेगा। करियर में नए मौके मिलेंगे। सेहत के मामले में आज का दिन सही रहेगा। मीन राशि: कल आप भावनात्मक रूप से मजबूत होंगे। शांति की ओर आपका रूझान बढ़ने वाला है। धन लाभ के पूरे-पूरे योग है। आपको पार्टनर का जबरदस्त सपोर्ट मिलने वाला है। काम में बहुत मन लगेगा और आप शांति से अपना काम कर पाएंगे। सेहत सही रहेगी।

Brahma Muhurat: ब्रह्म मुहूर्त में 4 विशेष काम करने से मां लक्ष्मी देंगी धन और समृद्धि

Brahma Muhurat: ब्रह्म मुहूर्त सुबह का वह अत्यंत पवित्र समय होता है, जो सूर्योदय से करीब डेढ़ घंटा पहले शुरू होता है. यह समय आमतौर पर सुबह 4 बजे से 5:30 बजे के बीच होता है. आयुर्वेद और योग परंपरा के अनुसार, यह समय अध्यात्म, साधना और रचनात्मक कार्यों के लिए सबसे शुभ माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त को अमृत वेला के नाम से भी जाना जाता है.  इस वक्त वातावरण एकदम शांत होता है, मन स्वाभाविक रूप से स्थिर रहता है और शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है. इसलिए ध्यान, प्रार्थना, मंत्रजप जैसे शुभ कार्यों के लिए यह समय बहुत ही लाभकारी माना जाता है. अध्यात्म के अलावा आयुर्वेद के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में जागने से पाचन बहुत ही अच्छा रहता है. चलिए अब जानते हैं कि ब्रह्म मुहूर्त में कौन से शुभ काम करने चाहिए. ब्रह्म मुहूर्त में करें ये खास उपाय ध्यान ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से पहले ध्यान जरूर करना चाहिए. ध्यान का मतलब है मन को शांत करना है. इससे तनाव कम होता है और मन स्थिर रहता है. ध्यान करते समय मंत्र जाप करें या केवल शांति में बैठें.  धार्मिक ग्रंथ पढ़ना ब्रह्म मुहूर्त में अपनी पसंद की किताब पढ़ना, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना या मंत्र-भजन करना बहुत लाभकारी माना जाता है. सुबह की यह आदत मन को सकारात्मक ऊर्जा और अच्छे विचारों से भर देती है.  दिन की योजना बनाना इस समय दिनभर के कामों की सूची बनाना भी बहुत शुभ माना गया है. इससे मन व्यवस्थित रहता है, समय की बचत होती है और दिन बिना तनाव के गुजरता है. माता-पिता, गुरु और ईश्वर को याद करना ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त वह समय है जब किसी की शुभकामनाएं और प्रार्थना बहुत जल्दी फल देती है. इस समय अपने माता-पिता, गुरु, प्रियजनों और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और उनके लिए मंगलकामना करना बेहद शक्तिशाली माना गया है. यह समय ब्रह्मांड को धन्यवाद देने और नए दिन के लिए मार्गदर्शन मांगने का भी होता है.

रणजीत महोत्सव: 51 हजार दीपों से रोशन होगा हनुमान मंदिर, भजन संध्या और प्रभात फेरी का आयोजन

इंदौर  इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर की प्रभातफेरी 12 दिसंबर को सुबह चार बजे निकलेगी। इसमें दो लाख से अधिक लोग जुटेंगे। इसकी तैयारियाँ जोरों पर हैं। पश्चिमी क्षेत्र के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर की यह प्रभातफेरी मंदिर से उषा नगर, महूनाका चौराहा, अन्नपूर्णा मंदिर, नरेंद्र तिवारी मार्ग होते हुए फिर मंदिर पहुँचेगी। इस बार तय हुआ है कि प्रभातफेरी में डीजे की गाड़ियाँ नहीं होंगी। भजन मंडलियाँ और नर्तक दल, नासिक बैंड शामिल होंगे। मंदिर समिति प्रभातफेरी के लिए रामायण पर आधारित दो झाँकियों का निर्माण भी करवा रही है। 9 दिसंबर से मंदिर में चार दिवसीय महोत्सव की शुरुआत होगी। प्रभातफेरी के लिए पारंपरिक स्वर्ण रथ का रखरखाव भी किया जा रहा है। धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा फूल बंगला भी सजाया जाएगा। प्रभातफेरी की तैयारियों को लेकर तीन बैठकें हो चुकी हैं। इंदौर में रणजीत हनुमान प्रभात फेरी 12 दिसंबर शुक्रवार को निकाली जाएगी। आज बजे मंदिर में ध्वजा पूजन किया जाएगा। कलेक्टर शिवम वर्मा सहित अन्य अधिकारी इसमें शामिल होंगे। इस अवसर पर 11 हजार ध्वजाओं का पूजन किया जाएगा। जिन्हें बाद में प्रभातफेरी में भक्तों (मातृ शक्ति और पुरुषों) को दिया जाएगा। पं.दीपेश व्यास ने बताया कि, ये ध्वजा 12 दिसंबर को निकलने वाली प्रभातफेरी में मातृ शक्तियों और पुरुषों के हाथों में रहेगी। इन ध्वजाओं के साथ मातृ शक्तियां और पुरुष प्रभातफेरी में शामिल होकर चलेंगे। पं. व्यास ने बताया कि यह प्रभात फेरी का 140वां वर्ष है। चार दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन बुधवार को मंदिर परिसर को 51 हजार दीपों से रोशन किया जाएगा। इस दिन भजन संध्या होगी। तीसरे दिन गुरुवार को विग्रहों का महाभिषेक और सवा लाख रक्षा सूत्रों का अभिमंत्रित कर भक्तों में वितरित किया जाएगा। इसके बाद शुक्रवार सुबह 5 बजे स्वर्ण रथ में प्रभात फेरी निकाली जाएगी। इस वर्ष किए जा रहे नवाचार में पहला मौका होगा जब दो नवीन विषयों पर भक्त झांकियों को निहार सकेंगे। इसमें पहली झांकी में माता अंजनी की गोद में बाल स्वरूप में हनुमान भक्तों को दर्शन देंगे।राम राज्य की कल्पना पर आधारित झांकी भी आकर्षण का केंद्र होगी। रणजीत बाबा के रथ को 500 सदस्य खीचेंगे। प्रभात फेरी का करीब 4 किमी लंबा यात्रा मार्ग रहेगा। प्रभातफेरी मंदिर परिसर से शुरू होकर द्रविड़ नगर चौराहे से महू नाका चौराहा। महू नाका चौराहे से दशहरा मैदान होते हुए अन्नपूर्णा मंदिर पहुंचेगी। अन्नपूर्णा मंदिर से यात्रा नरेंद्र तिवारी मार्ग होते हुए वापस मंदिर परिसर पर समाप्त होगी। पिछले साल यात्रा में करीब 5 लाख भक्त शामिल हुए थे। इस बार उम्मीद है कि 5 लाख से ज्यादा भक्त प्रभातफेरी में शामिल होंगे। तरह-तरह के पकवानों से होता है स्वागत प्रभातफेरी में शामिल लोगों के स्वागत के लिए रहवासी खुद रातभर जागे रहते हैं और तरह-तरह के पकवान चार किलोमीटर लंबे रूट पर सजाए जाते हैं। चाय, पोहे से लेकर कलाकंद, गाजर का हलवा, सूप, बिस्किट, केसरिया दूध सहित अन्य तरह के व्यंजन भक्तों को पूरे रूट पर मिलते हैं। रहवासी संघ, भक्त मंडलियाँ खुद अपने स्तर पर उन्हें तैयार कराती हैं। इस बार स्वागत मंचों को लेकर भी गाइडलाइन तय की गई है। मंच सड़क के ज्यादा हिस्से को घेरकर नहीं बनाए जा सकेंगे। 1985 में ठेले पर निकली थी प्रभातफेरी रणजीत हनुमान मंदिर की प्रभातफेरी वर्ष 1985 में पहली बार ठेले पर निकली थी। उससे पहले भक्त बाबा की तस्वीर लेकर निकलते थे। तब यात्रा मंदिर से महूनाका चौराहे तक निकाली जाती थी। वर्ष 2008 में प्रभातफेरी बग्घी पर निकली। फिर भक्तों ने बाबा के लिए रथ बनाने का फैसला लिया। वर्ष 2015 में पहली बार रथ पर रणजीत बाबा की प्रभातफेरी निकली। अगले ही वर्ष प्रभातफेरी में भक्तों की संख्या हजारों में हो गई। बीते तीन साल से भक्तों की संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा हो रही है। सुबह चार बजे पश्चिमी क्षेत्र में यात्रा के लिए भक्तों का सैलाब नज़र आता है। यात्रा मार्ग सजता है ध्वजों से जिस मार्ग से प्रभातफेरी निकलती है, उसे भगवा पताका और ध्वजों से सजाया जाता है। 10 दिसंबर से यह काम शुरू होगा। जब मंदिर परिसर से बाबा का रथ निकलता है, तो आकर्षक आतिशबाजी होती है। इसके अलावा स्वागत मंचों पर भी आतिशबाजी का दौर चलता है। प्रभातफेरी के दौरान दीपावली जैसा नज़ारा रहता है। अब इस प्रभातफेरी में इंदौर के अलावा आसपास के शहरों से भी लोग आने लगे हैं।  

Vastu Tips: समझें, मां लक्ष्मी की नाराजगी के संकेत, सुख-समृद्धि के लिए क्या करें

हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को बहुत ही पूजनीय माना जाता है, इनको धन की देवी के नाम से भी जाना जाता है. कहते हैं कि जिसपर भी मां लक्ष्मी अपनी कृपादृष्टि बरसाती है, उस जातक का जीवन खुशियों और धन-दौलत से भर जाता है. मां लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति न केवल सुख-समृद्धि हासिल करता है बल्कि ऐश्वर्य भी करता है. लेकिन, अगर मां लक्ष्मी जातक से रुष्ट हो जाए तो उस व्यक्ति जीवन में कष्टों का सामना भी करना पड़ता है. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जब भी मां लक्ष्मी नाराज होती हैं तो जातक को कुछ अशुभ संकेत दिखने लगते हैं. आइए जानते हैं उन संकेतों के बारे में.  सोना-चांदी का खोना वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर बार बार आपकी सोने-चांदी की वस्तुएं खो रही हैं तो इसे बिल्कुल भी शुभ संकेत नहीं माना जाता है. बल्कि, यह मां लक्ष्मी के नाराज होने का संकेत माना जाता है.  घर में अचानक खर्चो का बढ़ जाना अगर अचानक घर में बिना वजह खर्च बढ़ने लगें, पैसे आते ही खत्म हो जाएं या बचत न हो पाए, तो यह भी मां लक्ष्मी की नाराजगी का संकेत है. यह संकेत भविष्य में आने वाली समस्याओं की ओर भी इशारा देता है.   धन हानि से जुड़े स्वप्न आना वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर आपको धन की हानि या नुकसान से जुड़े कोई स्वप्न आ रहे हैं तो यह भी बहुत ही अशुभ संकेत माना जाता है. इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में  को पैसों से जुड़ा कोई नुकसान होने वाला है. तुलसी का सूखना वास्तु शास्त्र के मुताबिक, तुलसी या घर के अन्य शुभ पौधे बिना वजह सूखने लगें, पत्तियां पीली हो जाएं या पौधे बढ़ना बंद कर दें, तो यह मां लक्ष्मी की कृपा कम होने का संकेत माना जाता है.  घर में लगातार झगड़े या तनाव परिवार में छोटी-छोटी बातों पर बहस या झगड़े होने लग जाएं तो यह भी मां लक्ष्मी की अप्रसन्नता का संकेत माना गया है. जहां कलह होता है, वहां लक्ष्मी ठहरती नहीं हैं. यह मान्यता शास्त्रों में भी मिलती है.

हनुमान मंदिर से लौटते समय उसी रास्ते से आना चाहिए या नहीं? जानें इसके जीवन पर प्रभाव

हनुमान जी को संकटमोचन और शक्ति के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. उनके भक्त अक्सर उनके मंदिर जाते समय विशेष नियमों का पालन करते हैं. इनमें से एक नियम यह है कि जिस रास्ते से हनुमान मंदिर जाते हैं, उसी रास्ते से लौटकर नहीं आना चाहिए. यह नियम केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीवन और ऊर्जा से जुड़े गहरे अर्थ छिपे हैं. मंदिर जाने और लौटने की इस क्रिया के पीछे धार्मिक, ज्योतिषीय और मानसिक दृष्टिकोण से समझने योग्य कारण हैं. हनुमान जी की पूजा में मान्यता है कि वे अपने भक्तों को संकट, अशुभ प्रभाव और दुर्भाग्य से सुरक्षित रखते हैं. विशेष रूप से शनि के दोषों, साढ़े साती या ढैया से जुड़े प्रभावों को कम करने में हनुमान जी का स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है. जब कोई व्यक्ति हनुमान मंदिर जाता है, तो यह माना जाता है कि वह अपने साथ दुख, चिंता, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा लेकर जाता है. मंदिर में दर्शन और पूजा करने से यह नकारात्मक ऊर्जा मंदिर में ही रह जाती है और भक्त उसे छोड़कर वापस लौटता है. यदि भक्त वही रास्ता वापसी के लिए अपनाता है, तो वह नकारात्मकता और बाधाओं को फिर से अपने साथ घर ले आता है. इसलिए, अलग रास्ता अपनाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव और पुराने दुःखों को पीछे छोड़ने का प्रतीक है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा. अलग रास्ता अपनाने का अर्थ है नई शुरुआत करना. यह दर्शाता है कि भक्त ने हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया है और अब वह एक नए, सुरक्षित और शुभ मार्ग पर आगे बढ़ रहा है. पुराने संकट और दुर्भाग्य को वहीं छोड़कर घर लौटना जीवन में आगे बढ़ने और मानसिक शांति पाने का संकेत देता है. इस प्रकार, अलग रास्ता जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का एक साधन बन जाता है. हनुमान जी को प्रसन्न करने से शनिदेव भी संतुष्ट होते हैं. शनि का प्रभाव जीवन में कई बार बाधा और असुविधा पैदा करता है. मंदिर से लौटते समय अलग मार्ग अपनाना इस अशुभ प्रभाव को कम करने का तरीका माना जाता है. यह क्रिया यह सुनिश्चित करती है कि भक्त अब शनि के दोषों से मुक्त होकर एक सुरक्षित और शुभ मार्ग पर चल रहा है. इसके अलावा, अलग रास्ता अपनाना मानसिक दृष्टि से भी लाभकारी है. जब व्यक्ति जानबूझकर किसी नए मार्ग से घर लौटता है, तो यह उसकी सोच में सकारात्मक बदलाव लाता है. यह चेतना का संकेत है कि अब पुराने संकट और नकारात्मक अनुभव जीवन पर हावी नहीं होंगे. धार्मिक मान्यता और मानसिक शांति का यह मेल भक्त को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है. हनुमान मंदिर जाने के इस नियम का पालन केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं है. यह जीवन और ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखने का मार्ग भी है. भक्त का यह निर्णय कि वह अलग मार्ग से लौटेगा, उसे मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है. यह परंपरा यह याद दिलाती है कि पूजा केवल धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो व्यक्ति को मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से बदलता है. इस नियम का पालन करने वाले भक्त अक्सर महसूस करते हैं कि जीवन में बाधाएं कम हो जाती हैं, मानसिक तनाव घटता है और एक नई ऊर्जा प्राप्त होती है. यही कारण है कि अधिकांश भक्त मंदिर जाने और लौटने के समय अलग रास्ता अपनाते हैं. इस प्रकार, यह न केवल धार्मिक मान्यता का पालन है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और सुरक्षा बनाए रखने का एक सरल और प्रभावशाली तरीका भी है.

10 दिसंबर 2023: जानें हर राशि का दैनिक भविष्यफल

मेष राशि- आज आपका आत्मविश्वास और साहस दोनों ही मजबूत बने रहेंगे। पराक्रम का फल साफ दिखाई देगा और रोज़गार में नई तरक्कियों के रास्ते खुलेंगे। सेहत में सुधार रहेगा और मानसिक ऊर्जा भी बढ़ेगी। प्रेम जीवन में स्थिरता बनी रहेगी और संतान पक्ष से संतोष मिलेगा। व्यापार में लगातार नई उपलब्धियां सामने आएंगी और आप एक-एक कदम आगे बढ़ते दिखेंगे। परिवार का सहयोग भी बड़े निर्णयों में काम आएगा। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से व्यावसायिक खुशी मिलने के योग बन रहे हैं। वृषभ राशि- आप आज बहुत विनम्र और सभ्य तरीके से व्यवहार करेंगे, जिससे आपका प्रभाव भी बढ़ेगा। आर्थिक स्थिति मजबूती की ओर जाएगी और आय में वृद्धि के संकेत हैं। परिवार में कोई नई खुशी या सदस्य आने की संभावना है, जिससे घर का माहौल प्रसन्न रहेगा। सेहत अच्छी रहेगी और प्रेम-संतान का साथ भी सुखद रहेगा। व्यापार वालों के लिए दिन स्थिर और लाभ देने वाला साबित हो सकता है। कार्यों में सहजता बनी रहेगी। मिथुन राशि- आज आपका व्यवहार और सोच दोनों ही सकारात्मक रहेंगे, जिससे लोग आपकी तरफ आकर्षित होंगे। सेहत में पहले से ज्यादा सुधार महसूस होगा। प्रेम-संतान के साथ रिश्तों में मिठास बनी रहेगी। व्यापार में फायदे के अवसर मिलेंगे, साथ ही कुछ अच्छे और समय पर लिए गए निर्णय आगे बड़ी सफलता दिला सकते हैं। आपकी सूझबूझ और निर्णय क्षमता आज काफी मजबूत रहेगी। कर्क राशि- आज खर्चों की अधिकता आपको मानसिक रूप से परेशान कर सकती है। हालांकि ज्यादातर खर्च शुभ और जरूरी कामों पर होंगे, लेकिन ध्यान न रखने पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। अनावश्यक खर्च आपको कर्ज की स्थिति तक ले जा सकता है, इसलिए थोड़ी सावधानी जरूरी है। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन मानसिक थकान महसूस हो सकती है। प्रेम-संतान का साथ अच्छा मिलेगा और व्यापार भी सामान्य रूप से चलता रहेगा। सिंह राशि- आज आपके लिए आय के नए स्रोत बनेंगे। रुका हुआ धन वापस मिलने की प्रबल संभावना है और किसी नए काम या संपर्क से भी पैसे आने के योग बन रहे हैं। यात्रा से शुभ समाचार या लाभ मिल सकता है। समय आपके लिए काफी अनुकूल बन चुका है, जो आपको आगे बढ़ने और नए अवसरों को पकड़ने का मौका देगा। सेहत अच्छी रहेगी, प्रेम-संतान का सहयोग रहेगा और व्यापार में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। आज सूर्य देव को जल चढ़ाना आपके लिए विशेष शुभ रहेगा। तुला राशि- आज आपका झुकाव धर्म-कर्म और शुभ कार्यों की ओर रहेगा। प्रोफेशनल सेक्टर में बड़ी सफलता के योग हैं। यदि कोई मामला कोर्ट-कचहरी में चल रहा है तो जीत आपके पक्ष में रहने की पूरी संभावना है। उच्च पदों पर बैठे लोगों से सहयोग और आशीर्वाद मिलेगा, जिससे आपके अधूरे कार्य पूरे होने लगेंगे। सेहत में सुधार होगा और प्रेम-संतान का सहयोग भी मजबूत रहेगा। व्यापारियों के लिए दिन लाभकारी है। धनु राशि- आपके समय में पहले की तुलना में काफी सुधार हो चुका है। अब आप पुराने जोखिमों से बाहर आ चुके हैं और नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं। सेहत मजबूत रहेगी और परिवार में सामंजस्य बना रहेगा। प्रेम-संतान का सहयोग आपके मन को शांत और संतुष्ट रखेगा। व्यापार की गति अच्छी और स्थिर रहेगी, जिससे आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। मकर राशि- आज आपको विशेष सावधानी की जरूरत है। चोट या किसी अनचाही परेशानी का संकेत मिल रहा है, इसलिए कोई भी जोखिम भरा काम न करें। इसके बावजूद सेहत स्थिर रहेगी और प्रेम-संतान की स्थिति भी बढ़िया रहेगी। व्यापार में सकारात्मकता बनी रहेगी और कार्य सामान्य रूप से आगे बढ़ते रहेंगे। कुंभ राशि- आज जीवनसाथी का पूरा सहयोग और स्नेह मिलेगा। रोजगार में तरक्की होगी और नौकरी में आपकी स्थिति और मजबूत होगी। सेहत में सुधार होगा और मन प्रसन्न रहेगा। प्रेम-संतान की स्थिति संतोषजनक रहेगी। व्यापार में लाभ और स्थिरता दोनों मिलेंगे। कन्या राशि- आज शत्रुओं पर आपका प्रभाव इतना मजबूत रहेगा कि वे भी आपके साथ नरमी से पेश आएंगे। आपमें ज्ञान को समझने और सीखने की ऊर्जा बढ़ेगी। बुजुर्गों का आशीर्वाद आपके हर काम में मदद करेगा। सेहत, प्रेम और व्यापार की स्थिति काफी मजबूत रहेगी, हालांकि हल्का-सा स्वास्थ्य ध्यान मांग सकता है। किसी भी प्रकार का रिस्क लेने से बचें। वृश्चिक राशि- विद्यार्थियों के लिए यह समय बेहद शानदार है। पढ़ाई, लिखाई, क्रिएटिविटी और निर्णय लेने के लिए दिन उत्तम है। लेखक, कवि और रचनात्मक लोग आज अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे। सेहत, प्रेम और व्यापार स्थिर और सकारात्मक रहेंगे। मीन राशि- भूमि, भवन या वाहन खरीदने का मजबूत योग बन रहा है। भौतिक सुविधाओं में वृद्धि होगी और परिवार में किसी शुभ कार्यक्रम का संकेत भी मिल रहा है। हालांकि घर में हल्का-सा विवाद हो सकता है, इसलिए संयम रखें। सेहत में सुधार होगा और प्रेम-संतान का सहयोग भी अच्छा मिलेगा। व्यापार में प्रगति दिखेगी। आज गणेश जी को प्रणाम करना शुभ रहेगा।

खरमास की शुरुआत 7 दिन बाद, जानें इस दौरान कौन-सी 4 गलतियां नहीं करनी चाहिए

हर वर्ष में दो बार खरमास लगता है जिसको मलमास भी कहा जाता है. जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है तो उस समय को खरमास कहा जाता है. यही कारण है कि इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए. बल्कि, यह वक्त धार्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है. द्रिक पंचांग के अनुसार, खरमास इस बार 16 दिसंबर 2025, मंगलवार से शुरू होगा. उसके बाद 15 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास की समाप्ति हो जाएगी. ज्योतिषियों के अनुसार, इस समय कुछ कार्यों को करने में सावधानी दिखानी चाहिए.  खरमास में न करें ये कार्य विवाह खरमास के दौरान शादी या रिश्ते तय करने से बचना चाहिए. ऐसा माना गया है कि इस समय विवाह शुरू करने पर दांपत्य जीवन में समस्याएं और मानसिक तनाव की संभावना बढ़ सकती है. गृह प्रवेश खरमास नए घर में प्रवेश या मकान बदलने के लिए बहुत ही अशुभ महीना माना गया है. मान्यता है कि इससे घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है. नया व्यवसाय शुरू करना खरमास में व्यापार या बिजनेस शुरू करना उचित नहीं माना जाता है. ऐसा करने से आर्थिक अड़चनें और नुकसान की आशंका अधिक रहती है. लग्न, मुंडन व नामकरण खरमास में शुभ संस्कार जैसे नामकरण, मुंडन आदि भी टालने की परंपरा है. माना जाता है कि ये कर्म शुभ फल नहीं देते. नए साल 2026 में कब से शुरू होंगे विवाह मुहूर्त साल 2026 में सभी शुभ काम 14 जनवरी तक बंद रहेंगे. इस समय कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होगा. दरअसल, 11 दिसंबर को शुक्र अस्त होंगे, 16 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने से खरमास की शुरुआत हो जाएगी. साथ ही, शुक्र के अस्त होने का प्रभाव 31 जनवरी तक रहेगा. यानी सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत पुन: फरवरी माह से होगी. 

2026 में 13 महीने का साल और दो-दो ज्येष्ठ का दुर्लभ संयोग, आचार्य से जानें इसके खास मायने

अधिक मास हिंदू धर्म की अत्यंत पवित्र अवधि है। जिस तरह अंग्रेजी कैलेंडर में लीप ईयर होता है, उसी तरह हिंदू कैलेंडर में अधिक मास होता है। लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के लीप ईयर में सिर्फ एक दिन की वृद्धि होती है, वहीं अधिक मास होने पर साल में पूरा एक महीना बढ़ जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास या मलमास आदि नामों से भी जाना जाता है। हिंदू वर्ष में हर तीन साल में अधिक मास जुड़ता है। अधिक मास जुड़ने पर हिंदू वर्ष 12 नहीं 13 महीनों का हो जाता है। अधिक मास में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किया जाता है। हिंदू धर्म में अधिक मास के समय विवाह, गृह प्रवेश, नई चीजें या नया काम शुरू करने जैसे सभी शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं। अधिक मास में पूजा, व्रत और दान आदि करने का बहुत महत्व है। यह माह भगवान पुरुषोत्तम को समर्पित है जो भगवान विष्णु का ही एक अन्य रूप हैं। इस बार अधिक मास अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार साल 2026 यानी नए साल में होगा। आइए जानें इसका समय, महत्व और क्या होता है अधिक मास? क्या है अधिक मास? नए साल यानी 2026 में हिंदू वर्ष विक्रम संवत 2083 होगा। इसमें एक अतिरिक्त चंद्र मास जुड़ेगा। इसी वजह से साल 2026 में ज्येष्ठ महीने में अधिक मास पड़ेगा। इस दुर्लभ स्थिति की वजह से ज्येष्ठ मास लगभग 60 दिनों का होगा। इसके कारण यह साल 13 महीनों का बन जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह स्थिति तब बनती है जब चंद्र कैलेंडर और सूर्य कैलेंडर की गणना में अंतर होता है। चंद्रमा और सूर्य की गणना में जो फर्क समय-समय पर बढ़ता रहता है, उसे संतुलित करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। लगभग हर 32 महीने में करीब 16 दिन और कुछ घंटे मिलकर एक पूरे महीने के बराबर हो जाते हैं। इसी अतिरिक्त समय को सनातन धर्म में अधिक मास कहा जाता है। कब लगेगा अधिक मास? पंचांग के अनुसार, साल 2026 में ज्येष्ठ महीना 22 मई से शुरू हो कर 29 जून 2026 तक चलेगा। इससे पहले 17 मई 2026 से अधिक मास की शुरुआत होगी, जो 15 जून 2026 को समाप्त होगा। जब पंचांग में एक ही महीना दो बार आता है, तो उसे पुरुषोत्तम मास या अधिक मास कहा जाता है। यह समय बहुत खास और धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। कैसे होगे 2026 में 13 महीने? हिंदू पंचांग के अनुसार नया साल 2026 बेहद खास रहेगा, क्योंकि इस बार ज्येष्ठ मास बढ़ रहा है. मतलब, एक की जगह दो- सामान्य ज्येष्ठ और अधिक ज्येष्ठ रहेंगे. अधिमास के कारण इस बार ज्येष्ठ का काल लगभग 58 से 59 दिनों तक फैल जाएगा. इसे ही अधिकमास या मलमास कहा जाता है, जिसे विशेष धार्मिक कर्मों और पुण्य कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. इस संयोग के चलते विक्रम संवत 2083 में कुल 13 महीने होंगे, जो अपने आप में एक दुर्लभ घटना है. कितने दिन का होगा अधिकमास  साल 2026 में ज्येष्ठ माह का शुभारंभ 22 मई से होगा और यह 29 जून तक चलेगा. इसी दौरान एक महत्वपूर्ण खगोलीय संयोग भी बन रहा है. अधिमास का आगमन, 17 मई 2026, रविवार से शुरू होकर 15 जून 2026, सोमवार को समाप्त होगा यानी आने वाले वर्ष में 17 मई से 15 जून तक का समय अधिकमास का विशेष काल रहेगा, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यफलदायी माना जाता है. अधिकमास क्या होता है? हिंदू पंचांग में अधिकमास एक ऐसा विशेष महीना है, जो तब बनता है जब पूरे महीने के दौरान सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करता. दरअसल, चंद्र मास और सौर मास की गणना में जो अंतर होता है, उसी को संतुलित करने के लिए हर 2–3 साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है, जिसे अधिकमास या अध्याय मास कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं में अधिकमास का महत्व बेहद पवित्र माना गया है. इस माह में किए गए व्रत, जप, तप, दान–पुण्य और पूजा-पाठ का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है. इसलिए अधिकमास को आत्मिक शुद्धि, संकल्प और पुण्य अर्जित करने का श्रेष्ठ समय बताया गया है. अधिक मास में करें ये खास उपाय धार्मिक मान्यता के अनुसार, अधिक मास का समय बहुत पवित्र माना जाता है। लेकिन इस दौरान की गई छोटी सी गलती भी व्यक्ति के पूरे वर्ष पर असर डाल सकती है। इसी वजह से इस दौरान कुछ खास उपाय करने चाहिए, जो कि पूरे वर्ष को ही नहीं जीवन को भी खुशियों से भर सकता है। घर में रोज सुबह दीपक जलाएं : अधिक मास के दौरान तुलसी के पास या भगवान विष्णु के सामने सरसों के तेल या घी का दीपक रोजाना जलाएं। इससे घर का वातावरण पवित्र, शांत और सकारात्मक रहेगा। पक्षियों को दाना और पानी देना : अधिक मास में छत या बालकनी में मिट्टी के बर्तन में पानी भरें और दाना डालें। पक्षियों की सेवा अधिक मास में बहुत पुण्यदायी मानी जाती है। जरूरतमंद को भोजन कराना : इस दौरान गरीब, मजदूर या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। यह सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है।