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सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ाना है? तो आज ही छोड़ें ये 5 गलत आदतें

हर इंसान में सेल्फ कॉन्फिडेंस का होना जरूरी है। ये एक ऐसी जरूरी चीज है जिसके बल पर वो दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकता है। जिस इंसान में सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी होती है वो ज्यादातर सक्सेज नहीं पाते। अगर आपके अंदर भी सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी रहती है तो जरा इन 5 आदतों पर गौर करें। अगर ये आदते आपकी लाइफ का हिस्सा हैं तो फौरन इन्हें दूर कर दें। तभी आत्मविश्वास बढ़ पाएगा। खुद के बारे में निगेटिव सोचना अगर आप खुद के बारे में हमेशा निगेटिव बातें बोलते और सोचते हैं। खुद की कमियां निकालते हैं तो इससे आपकी सेल्फ एस्टीम प्रभावित होती है। और आपके अंदर का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है। आपको खुद पर विश्वास नहीं रहता कि कोई काम आप अकेले कर सकते हैं। इसलिए सेल्फ वैल्यूएशन करने और खुद को क्रिटिसाइज करने के बीच का फर्क समझकर निगेटिव सोचना बंद करें। हमेशा परफेक्ट बनने की चाह किसी भी काम में परफेक्शन अच्छी बात है लेकिन यहीं परफेक्शन की चाह कई बार आत्मविश्वास को कमजोर कर देती है। क्योंकि जरा सी कमी भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और कई बार सेल्फ कॉन्फिडेंस पर निगेटिव असर पड़ता है। दूसरों से तुलना दूसरों से तुलना करना अगर आदत बन जाती है तो खुद में केवल कमियां ही कमियां नजर आती हैं। जिसकी वजह से आत्मविश्वास कमजोर होता है। नए चैलेंज एक्सेप्ट ना करना अगर आप लाइफ में आने वाले नए चैलेंज को एक्सेप्ट नहीं करते हैं तो ये आपकी ग्रोथ को रोक सकती है। क्योंकि मन में बात आती है कि मुझसे ये काम नहीं होगा, जो कि पूरी तरह से कमजोर आत्मविश्वास की निशानी है। खुद को जिम्मेदार ठहराना लाइफ में और अपने आसपास आपसे जुड़े लोगों के जीवन में हो रही किसी भी समस्या के लिए अगर आप खुद को जिम्मेदार ठहराते हैं, तो ये सेल्फ कॉन्फिडेंस को कमजोर बना देती है।  

नेगेटिविटी दूर, पॉजिटिविटी भरपूर: घर को महकाएँ इन सुगंधित इत्रों से

वास्तु शास्त्र में, आपके घर का माहौल और ऊर्जा केवल वस्तुओं की स्थिति पर ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद सुगंध पर भी निर्भर करती है। सुगंध में इतनी शक्ति होती है कि यह तुरंत घर की नकारात्मकता को दूर करके एक शांत और सकारात्मक वातावरण बना सकती है। यदि आप अपने घर में खुशहाली, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाना चाहते हैं, तो वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार, कुछ विशेष प्रकार के इत्र या सुगंधित तेलों का उपयोग करना बहुत ही प्रभावी माना जाता है। तो आइए जानते हैं कि घर में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा बनाएं रखने के लिए कौन से इत्र का इस्तेमाल करना चाहिए। चंदन का इत्र चंदन का इत्र  शुद्धता, शांति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। चंदन की भीनी खुशबू घर में सात्विक ऊर्जा लाती है और मानसिक शांति बढ़ाती है। इसे पूजा घर या ध्यान वाले स्थान पर इस्तेमाल करने से एकाग्रता बढ़ती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। यह तनाव को कम करने में भी सहायक है। गुलाब का इत्र गुलाब का इत्र प्रेम, मधुरता और कोमलता का प्रतीक है। गुलाब की सुगंध घर के भावनात्मक वातावरण को शुद्ध करती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बढ़ाती है। इसे लिविंग रूम और बेडरूम में उपयोग करने से रिश्ते मजबूत होते हैं और मन प्रसन्न रहता है। लैवेंडर का इत्र लैवेंडर का इत्र शांति, विश्राम और आराम का प्रतीक है। लैवेंडर की खुशबू विशेष रूप से अनिद्रा और मानसिक बेचैनी को दूर करने में सहायक है। यह घर में शांतिपूर्ण ऊर्जा का संचार करता है। इसे बेडरूम में छिड़कने या डिफ्यूज़र में इस्तेमाल करने से नींद की गुणवत्ता सुधरती है और दिनभर का तनाव कम होता है। मोगरा या चमेली का इत्र मोगरा या चमेली का इत्र समृद्धि, आकर्षण और उत्साह का प्रतीक है। मोगरा या चमेली की सुगंध धन और सौभाग्य को आकर्षित करने वाली मानी जाती है, जिससे घर में समृद्धि का प्रवाह बढ़ता है। इसे घर के मुख्य द्वार के आस-पास या उस क्षेत्र में इस्तेमाल करें जहाँ से ऊर्जा का प्रवेश होता है।

बुधवार का चमत्कारी उपाय: सही दिशा में दूर्वा रखने से खुलेंगे किस्मत के दरवाज़े

हिंदू धर्म में, प्रत्येक वार किसी न किसी देवी-देवता या ग्रह को समर्पित होता है। बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय व्यक्ति के जीवन में बुद्धि, समृद्धि और धन-वैभव को बढ़ाने में अत्यंत सहायक होते हैं।इस संदर्भ में, हरी घास का प्रयोग एक अत्यंत सरल, फिर भी शक्तिशाली उपाय माना जाता है। दूर्वा को भगवान गणेश को सबसे प्रिय माना जाता है और यह बुध ग्रह से भी जुड़ी हुई है क्योंकि बुध का संबंध हरियाली, वृद्धि और व्यापार से है। बुधवार के दिन, घर के एक विशेष स्थान पर थोड़ी सी दूर्वा रखने मात्र से धन-वैभव में अद्भुत वृद्धि देखी जा सकती है। पूजा स्थल या ईशान कोण- यह स्थान घर का सबसे पवित्र और ऊर्जावान क्षेत्र होता हैजो देवी-देवताओं और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश से जुड़ा है। बुधवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद, ताज़ी और साफ दूर्वा लें। इसे भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने अर्पित करें। यदि आप इसे किसी स्थान पर रखना चाहते हैं, तो पूजा स्थल के पास, एक छोटी साफ कटोरी में थोड़ी सी दूर्वा रखें। भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने से वह तुरंत प्रसन्न होते हैं। माना जाता है कि जहां गणेशजी वास करते हैं, वहां रिद्धि और सिद्धि  स्वतः ही आ जाती है। ईशान कोण को देवों का स्थान माना जाता है इसलिए यहां हरियाली रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, जो धन को आकर्षित करता है।यह उपाय बुद्धि में वृद्धि करता है, व्यापार और करियर में आ रही बाधाओं को दूर करता है, और धन आगमन के नए रास्ते खोलता है। तिजोरी या धन रखने का स्थान यह उपाय सीधे तौर पर आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है और बरकत लाता है। बुधवार के दिन दूर्वा की एक छोटी गांठ बनाएं। इसे एक लाल कपड़े में लपेटें और अपनी तिजोरी, कैश बॉक्स, या उस स्थान पर रखें जहां आप अपना धन, गहने, या महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज रखते हैं।  यह उपाय बुध ग्रह को मजबूत करता है, जो व्यापार और आर्थिक लेन-देन का कारक है। यह धन की हानि को रोकता है और घर में बरकत को सुनिश्चित करता है। माना जाता है कि दूर्वा की पवित्रता धन को बुरे प्रभाव से बचाती है। मुख्य द्वार के पास घर का मुख्य द्वार वह स्थान है, जहां से ऊर्जा और अवसर दोनों प्रवेश करते हैं। बुधवार को सुबह मुख्य द्वार की सफाई करें। द्वार के ठीक सामने, दहलीज के पास एक छोटे से गमले में ताज़ी दूर्वा या किसी अन्य हरे पौधे को रखें। यदि गमला रखना संभव न हो, तो ताज़ी दूर्वा को एक छोटे से कलश में पानी के साथ रखकर मुख्य द्वार के पास रख दें। दूर्वा की हरियाली नकारात्मक ऊर्जा को द्वार पर ही रोक देती है और घर में सिर्फ सकारात्मकता का प्रवेश सुनिश्चित करती है। यह उपाय घर के मुखिया के लिए नए व्यापारिक अवसर और सौभाग्य लाता है।

पौष मास 5 दिसंबर से आरंभ: इस महीने में विवाह रुक जाते हैं, क्या है धार्मिक कारण?

  हिंदू कैलेंडर का दसवां महीना पौष है, जिसे पूस माह भी कहते हैं. मार्गशीर्ष पूर्णिमा के बाद यह महीना शुरू होता है और इसके बाद माघ माह शुरू हो जाता है. पंचांग के अनुसार, इस बार यह माह 5 दिसंबर 2025 से शुरू होने जा रहा है. फिर अगले साल 3 जनवरी 2025 को इसका समापन होगा. यह महीना वैसे तो धार्मिक और ज्योतिष की दृष्टि से खास है. लेकिन इसमें कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. आइए जानते हैं कि पौष मास में विवाह क्यों नहीं होता है. पौष मास का महत्व पौष मास को सूर्य देव का महीना कहा जाता है. इस महीने में सूर्य देव की उपासना करना विशेष महत्व है, जिससे ऊर्जा, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. साथ ही, पौष मास महीना पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए बहुत शुभ है. इस दौरान किए गए तर्पण से पितरों को संतुष्टि और शांति मिलती है, जिससे पितृ दोष दूर होता है. पौष माह में मध्य रात्रि की साधना तुरंत फलदायी मानी गई है. पौष मास में शुभ कार्य क्यों नहीं होते हैं? धार्मिक मान्यता के अनुसार, पौष महीने में विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. इसका मुख्य कारण है सूर्य का धनु राशि में प्रवेश करना. सूर्य के धनु राशि में गोचर के कारण पौष मास अशुभ माना जाता है, जो खरमास कहलाता है. खरमास 1 महीने तक चलता है और इस दौरान सूर्य का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन आदि नहीं किए जाते हैं. खरमास का समय देवताओं के लिए विश्राम काल भी माना जाता है. पौष महीना अशुभ क्यों है? सूर्य का प्रभाव कम: पौष महीने में सूर्य धनु राशि में होते हैं, जो ज्योतिष में अशुभ माना जाता है. खरमास: सूर्य की इस स्थिति के कारण इस पूरे महीने को खरमास या मलमास कहा जाता है. छोटे दिन और लंबी रातें: खरमास के दौरान सूर्य दक्षिणायन होते हैं, जिससे दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं. मांगलिक कार्यों पर रोक: सूर्य के शुभ प्रभाव में कमी आने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक और शुभ कार्य इस महीने में करना वर्जित होता है. पौष महीने में क्या करना शुभ है? आध्यात्मिक कार्य: पौष महीने में पूजा-पाठ, हवन और आध्यात्मिक कार्यों को करना बहुत शुभ माना जाता है. तीर्थ यात्रा: पौष के महीने में किसी तीर्थ स्थल की यात्रा करना भी बहुत फलदायी माना जाता है. सूर्य की पूजा: इस महीने में रोज तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित करना और सूर्य पूजा करना लाभकारी होता है. दान-पुण्य: पौष महीने में दान-पुण्य और स्नान का विशेष महत्व माना गया है. पौष मास में क्या नहीं करना चाहिए?     पौष मास में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ जैसे शुभ कार्यों से बचना चाहिए.     पौष में शराब, मांस और किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए.     पौष के महीने में भारी और गरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए.     पौष मास में उड़द और मसूर की दाल, मूली, बैंगन, फूलगोभी और तली हुई चीजें नहीं खानी चाहिए.     पौष के महीने में नमक का सेवन कम करना चाहिए या इससे बचना चाहिए.     पौष मास में बहुत ज्यादा चीनी और तेल या घी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.  

आज का राशिफल 3 दिसंबर: जानें अपनी राशि का दिनभर का हाल

मेष 3 दिसंबर के दिन प्यार के मामले में आज आप कॉन्फिडेंस से भरपूर रहेंगे। आप में सफल होने की शक्ति है। उन गतिविधियों के लिए समय निकालना महत्वपूर्ण है, जो आपको अच्छा महसूस कराएं। फाइनेंशियल सिचुएशन पॉजिटिव दिख रही है। वृषभ 3 दिसंबर के दिन में आपको रोमांचक अवसर मिल सकते हैं। केंद्रित रहें और दूसरों का नेतृत्व करने से न डरें। अपने खर्च पर लगाम लगाएं। फ्यूचर के लिए बचत पर ध्यान जरूर दें। देखभाल को प्राथमिकता दें। मिथुन 3 दिसंबर के दिन सिंगल मिथुन राशि के जातकों को किसी स्पेशल इंसान से मुलाकात होगी। कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले अपने विकल्पों पर विचार अवश्य कर लें। फालतू की खरीदारी से बचें। कर्क 3 दिसंबर के दिन में आय में वृद्धि के अप्रत्याशित अवसर आपके सामने आ सकते हैं। आपका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य आपस में जुड़े हुए हैं। नए अनुभवों के लिए खुद को तैयार रखें। सिंह 3 दिसंबर के दिन में अपने पार्टनर से ईमानदारी के साथ बात करें। करियर में नई चुनौतियों का सामना करें क्योंकि इससे बड़ी सफलता मिलेगी। आज आपकी आर्थिक स्थिति आशाजनक दिख रही है। कन्या 3 दिसंबर के दिन में फालतू के खर्चों से बचें। थोड़ी बहुत दिक्कतें आ सकती हैं, जिसे आप अपनी सूझ-बूझ के साथ आसानी से निपटा लेंगे। अपने इंट्यूशन को फॉलो करें और ओपन माइंडेड रहें। तुला 3 दिसंबर के दिन में अपनी गट फीलिंग को ट्रस्ट करें और रिस्क लें। सरप्राइज के लिए तैयार रहें और अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलें। आप रिजल्ट्स से आश्चर्यचकित हो सकते हैं। रिश्तों में संतुलन बनाए रखने का समय है। वृश्चिक 3 दिसंबर के दिन पूरे दृढ़ संकल्प के साथ सफलता की राह पर चलें। चाहे वह प्यार, काम या धन का मामला हो, वृश्चिक राशि वालों को आत्मविश्वास और ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सितारे एक साथ हैं। धनु 3 दिसंबर को उत्साह और अप्रत्याशित मोड़ से भरे दिन के लिए तैयार हो जाइए, धनु राशि। आपका इंट्यूशन हाई रहने वाला है। चाहे कुछ नया प्रयास करना हो या नया रास्ता अपनाना हो, आज का दिन बदलाव को अपनाने और नए अवसरों का स्वागत करने का है। मकर 3 दिसंबर के दिन में भाग्य आपके साथ है। स्वयं के प्रति सच्चे रहकर और अपने प्राकृतिक उपहारों को अपनाने से, मकर राशि वालों को पता चलेगा की आज आकाश ही उनकी सीमा है। कुंभ 3 दिसंबर के दिन सरप्राइज के लिए रहें तैयार। याद रखें की आपके पास हर वह पावर है, जिससे आप किसी भी मुश्किल को आसानी से सॉल्व कर सकते हैं। आपको मदद की जरूरत हो तो मदद मांगने से न डरें। मीन 3 दिसंबर का दिन आपके लिए आश्चर्य, चुनौतियों और विकास के अवसरों से भरा रहेगा। मीन राशि के विद्यार्थियों को आज पढ़ाई पर फोकस करने की जरूरत है। आज आप स्ट्रांग और कॉन्फिडेंट महसूस करेंगे।

मंगलवार के भौम प्रदोष की कथा: क्यों कहा जाता है कर्ज से छुटकारे का दिन?

हर महीने की त्रयोदशी तिथि देवों के देव महादेव को बेहद प्रिय मानी गई है, क्योंकि इस तिथि पर प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है. त्रयोदशी तिथि पर और प्रदोष काल में ही देवताओं ने भगवान शिव का जल से अभिषेक और स्तुति की थी, जब भोलेनाथ ने समुद्र मंथन से निकले विष को अपने गले में धारण किया था. इसी वजह इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है. आज 2 दिसंबर को प्रदोष व्रत है और मंगलवार पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जा रहा है. प्रदोष व्रत की कथा का पाठ किए बिना पूजा पूर्ण नहीं माना जाता है. ऐसे में आइए भौम प्रदोष व्रत की कथा पाठ करते हैं. भौम प्रदोष व्रत महत्व भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और हनुमान जी दोनों की पूजा की जाती है. यह व्रत रखने से भगवान शिव और हनुमान जी दोनों की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही, इस व्रत के प्रभाव से जीवन की बाधाएं और दुख-दर्द दूर होते हैं. भौम प्रदोष व्रत करने से मंगल ग्रह से संबंधित दोषों का निवारण होता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत को करने से आर्थिक तंगी दूर होती है, सुख-समृद्धि आती है और मन को शांति मिलती है. साथ ही, यह संतान सुख की इच्छा रखने वालों के लिए भी लाभकारी माना जाता है. भौम प्रदोष व्रत कथा 2025 भौम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा एक वृद्धा की कहानी से जुड़ी है जो हनुमान जी की भक्त थी. एक नगर में एक वृद्धा रहती थी जिसका एक पुत्र था. वह वृद्धा हनुमान जी की बहुत बड़ी भक्त थी और हर मंगलवार को उनका व्रत किया करती थी. एक बार हनुमान जी ने उसकी भक्ति की परीक्षा लेने का फैसला किया. हनुमान जी एक साधु के वेश में वृद्धा के घर आए और भोजन मांगा. साधु बनकर हनुमान जी ने उस वृद्धा से कहा कि वह जमीन लीपे, लेकिन वृद्धा ने मना कर दिया और कोई दूसरा काम करने को कहें. फिर साधु ने उस वृद्धा से कहा कि वह अपने पुत्र को बुलाए, क्योंकि वह उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाना चाहते हैं. यह सुनकर वृद्धा दुविधा में पड़ गई, लेकिन वचनबद्ध होने के कारण उसने अपने बेटे को साधु को सौंप दिया. फिर वृद्धा के हाथों से उसके बेटे की पीठ पर आग जलाई गई और वृद्धा दुखी मन से घर में चली गई. जब भोजन के बाद साधु ने वृद्धा को अपने पुत्र को बुलाने के लिए कहा, तो उसने मना कर दिया. लेकिन जब साधु नहीं माने, तो वृद्धा ने अपने बेटे को पुकारा. जब वृद्धा ने अपने पुत्र को जीवित देखा तो उसे देखकर बहुत आश्चर्य हुआ और वह साधु के चरणों में गिर पड़ी. तब हनुमान जी ने अपने असली रूप में आकर वृद्धा को आशीर्वाद दिया.

पूजा में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा: जानें मंदिर की सही दिशा और वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि सही दिशा का पालन करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और जीवन में कोई संकट नहीं आता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की शुभ दिशा में मंदिर होने से परिवार के सदस्यों को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में मंदिर के लिए शुभ दिशा का वर्णन किया गया है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि मंदिर से जुड़े नियम के बारे में। किस दिशा में होना चाहिए मंदिर वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर के लिए पूर्व दिशा को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिशा में मंदिर होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसके अलावा पूर्व-उत्तर दिशा को भी मंदिर के लिए उत्तम माना जाता है। इससे पूजा सफल होती है। कैसा होना चाहिए मंदिर घर में मंदिर बनवाने के लिए ऐसी जगह का चयन करें, जहां बाथरूम पास न हो और स्वच्छता के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। मंदिर लकड़ी या पत्थर का बनवा सकते हैं। कहां नहीं होना चाहिए मंदिर वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार, मंदिर को भूलकर भी सीढ़ियों के नीचे नहीं बनवाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सीढ़ियों के नीचे मंदिर होने से जातक को जीवन में परेशनियों का सामना करना पड़ सकता है और घर में क्‍लेश की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा मंदिर को बेडरूम में भी नहीं बनवाना चाहिए। किस रंग का बनवाएं मंदिर मंदिर के रंग का विशेष ध्यान रखें। मंदिर सफेद, पीला या लाल रंग का होना चाहिए। इन रंग को शुभता का प्रतीक माना जाता है। इन बातों का रखें विशेष ध्यान पूजा के दौरान भगवान को फूल अर्पित किए जाते हैं। कुछ समय के बाद फूल सुख जाते हैं। सूखे हुए फूलों को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में सूखे फूल रखने से जातक को वास्तु दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए फूल सुख जाने पर किसी बहते हुए पवित्र नदी में बहा दें या फर किसी पौधे में ड़ाल दें। मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमा को विराजमान करने से पहले उनके नीचे लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके ऊपर प्रतिमा को स्थापित करें।  

दिसंबर में शादी के 3 शुभ दिन तय, साथ ही देखें नामकरण व गृह प्रवेश मुहूर्त

हिंदू धर्म में कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखने के बाद ही किए जाते हैं। क्योंकि यह माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य शुभ परिणाम देते हैं। साल 2025 के आखिरी माह यानी दिसंबर में विवाह  के लिए केवल 3 ही दिन शुभ बताए जा रहे हैं। विवाह मुहूर्त – दिसंबर में विवाह के लिए बस 3 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं जो 4, 5 और 6 दिसंबर को रहने वाले हैं। गृह प्रवेश मुहूर्त – हिंदू पंचांग के अनुसार गृह प्रवेश के लिए 1, 5 और 6 दिसंबर का दिन शुभ रहने वाला है। नामकरण संस्कार मुहूर्त – दिसंबर में नामकरण संस्कार के लिए 4, 8, 13, 14, 17, 22, 24, और 28 दिसंबर का दिन शुभ रहने वाला है। प्रॉपर्टी खरीद के लिए शुभ मुहूर्त – दिसंबर में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए 5, 11, 18, 19, और 26 दिसंबर की तिथियां शुभ मानी जा रही हैं। नया काम शुरू करने का मुहूर्त – अगर आप दिसंबर में नया काम शुरू करने का मन बना रहे हैं, तो इसके लिए 3, 11, 17, 21, 26 और 27 दिसंबर का दिन शुभ रहेगा। इन दिन से बंद हो जाएंगे शुभ काम 16 दिसंबर 2025 को सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिससे खरमास की शुरुआत हो जाएगी। वहीं खरमास का समापन 14 जनवरी 2026 को होने जा रहा है। ऐसे माना जाता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों में देवगुरु बृहस्पति और सूर्य देव की कृपा प्राप्त नहीं होती, जिससे उस कार्य से शुभ परिणाम नहीं मिलते। ऐसे में इस दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश आदि जैसे कार्य करने की मनाही होती है।  

आज का राशिफल 2 दिसंबर: सभी 12 राशियों के लिए दिन कैसा रहेगा, पढ़ें पूरी भविष्यवाणी

मेष 2 दिसंबर के दिन आज किसी भी अवसर को हाथ से न जाने दें। अपने करियर के बेहतरीन पलों पर फोकस रखें। पैसों के मामले में आप महत्वपूर्ण डिसीजन लेने में अच्छे हैं। जो लोग किसी रिलेशन में हैं, उनके लिए आज की एनर्जी पार्टनर के साथ आपके रिश्ते में फिर से रोमांस जगा सकती है। वृषभ 2 दिसंबर के दिन ऑफिस में खुशनुमा और उत्पादक जीवन जिएं। वित्तीय समृद्धि आज के दिन की विशेषता रहेगी। स्वास्थ्य अच्छा है। अगर आप आज डेट पर नहीं जा रहे हैं तो ज्यादा स्ट्रेस न लें। मेंटल हेल्थ पर गौर करें। मिथुन 2 दिसंबर के दिन प्रोफेशनल सफलता भी मिल सकती है। समृद्धि के कारण आप समझदारी से फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं। आज स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। रिश्ते में प्यार के नए पहलू तलाशें। कर्क 2 दिसंबर के दिन बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए ऑफिस में नई जिम्मेदारियां लें। वित्तीय स्थिति अच्छी है और निवेश पर विचार कर सकते हैं। अपने पार्टनर की गुड क्वालिटीज पर फोकस करें, जिससे आपका रिलेशन मजबूत बना रहेगा। सिंह 2 दिसंबर के दिन पैसों का मैनेजमेंट समझदारी से करें। आज कोई बड़ी बीमारी भी आपको परेशान नहीं करेगी। आपको परेशानियां पसंद हैं क्योंकि वे आपको मजबूत बनाती हैं। प्रेम-संबंधी समस्याओं को सुलझाएं। कन्या 2 दिसंबर के दिन मुश्किल परिस्थितियों पर गौर करें। छिपी हुई जानकारी खोजने में आपका कौशल इस समय विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगा। उन पदों के बारे में सोचें, जिनके लिए रिसर्च, योजना या अन्य लोगों के साथ काम करने की आवश्यकता होती है। तुला 2 दिसंबर के दिन आपका प्रेम जीवन अधिक गंभीर हो सकता है। ऐसी नौकरी के बारे में सोचें, जिनमें समस्या-समाधान, प्रोडक्ट या स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता होती है।सिंगल लोग दफ्तर या जिम में अपनी डेट से मिल सकते हैं। वृश्चिक 2 दिसंबर के दिन समृद्धि के कारण आप समझदारी भरे पैसों से जुड़े डिसीजन ले सकते हैं। आज आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। आप अपने साथी को संतुष्ट और खुश रखने के लिए प्रेम संबंधों में समस्याओं का समाधान करेंगे। धनु 2 दिसंबर के दिन सफल पेशेवर जीवन का आनंद लें। वित्तीय स्थिति भी अच्छी रहेगी। लव के मामले में आज आपको अपने पार्टनर की अच्छे से केयर करनी चाहिए। प्रोफेशनल रूप से अपनी योग्यता साबित करने के लिए ऑफिस में चुनौतियों पर विजय पाएं। मकर 2 दिसंबर के दिन आर्थिक रूप से निवेश के अवसर मिल सकते हैं। अपने जीवन की वास्तविकता पर ध्यान केंद्रित करें। अपने काम की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ठोस बदलाव करें। कपल्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे एक हेल्दी लाइफस्टाइल पाने की दिशा में काम करें। कुंभ 2 दिसंबर के दिन अपने पाचन और सामान्य स्वास्थ्य की स्थिति पर ध्यान दें। अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए दफ्तर में अवसरों का लाभ उठाएं। अपने पार्टनर के साथ टाइम बिताते हुए प्रेमी को खुश रखें। मीन 2 दिसंबर के दिन सिंगल लोग ऑफिस पर संभावित पार्टनर से मिल सकते हैं। पेशेवर जीवन के दबाव से बचने बचने के लिए जरूरी एक्टिविटी करें। आज इमोशनल संतुलन को प्रभावित करने वाले पिछले मुद्दों से निपटने का एक अच्छा समय है।

रविवार को करें सूर्यदेव का व्रत एवं पूजन और पायें शुभ फल

जो लोग अच्छेे स्वावसथ्यज और घर में सुख समृद्धि की कामना करते हैं उन्हें  पूरी श्रद्धा के साथ रविवार का व्रत एवं पूजन करना चाहिए। इस दिन सूर्य देव की पूजा का विधान है। इसलिए नहाने के बाद सूर्यनारायण को तीन बार अर्घ्य देकर प्रणाम करें। सूर्य के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें, और आदित्य हृदय का पाठ करें। पूजा के बाद भगवान सूर्यदेव का स्मंरण करते हुए व्रत का संकल्प् लें। इस व्रत में बिना तेल और नमक के भोजन करना चाहिये। मान्यनता है कि एक वर्ष तक नियमित रूप से उपवास रखने के पश्चात व्रत का उद्यापन करने वाला जीवन में सभी सुखों को भोगता है और मृत्यु बाद मोक्ष को पाता है। इस दिन संध्या के समय भी सूर्य को अर्घ्य देकर प्रणाम करना उत्ताम होता है। कहते हैं कि रविवार को सूर्यदेव के नाम का उपवास कर उनकी आराधना करने वाले की सारी द्ररिद्रता दूर हो जाती है। रविवार के व्रत की कथा इस प्रकार है। रविवार को सूर्योदय से पहले शुद्ध होकर स्नान आदि करने के बाद इस कथा का श्रवण करना चाहिए। इस प्रकार है रविवार व्रत कथा रविवार की कथा में बताया गया है कि एक बुढ़िया हर रविवार प्रात:काल उठकर नहा धोकर अपने घर आंगन को गाय के गोबर से लीपती फिर सूर्य देव की पूजा करती और उन्हें भोग लगाकर ही भोजन करती थी। बुढ़िया के पास गाय नहीं इसलिये पड़ोसियों के यहां से गाय का गोबर लाती। उसकी इस आस्ज्ञाु    से उस पर सूर्यदेव के अनुग्रह से उसका घर धन धान्य से संपन्न रहने लगा। बुढ़िया के दिन फिरते देख उसकी पड़ोसन जलने लगी। उसने अपनी गाय को सामने से हटा दिया जिससे बुढ़िया को गोबर नहीं मिला और घर की लिपाई नहीं हुई और बुढ़िया ने कुछ नहीं खाया और निराहार रही। सपने में सूर्य देव ने उससे पूछा कि आज आपने मुझे भोग क्यों नहीं लगाया। बुढ़िया ने कहा कि उसके पास गाय नहीं है और वह पड़ोसन की गाय का गोबर लाकर लिपाई करती थी। पड़ोसन ने अपनी गाय अंदर बांध ली जिस कारण वह घर की लिपाई नहीं कर सकी और इसीलिए ना भोजन बना पाई ना भोग लगा सकी। इस पर सूर्य देव ने कहा वे उनकी श्रद्धा व भक्ति से बहुत प्रसन्न है और उसे एक इच्छास पूर्ण करने वाली गाय दी। बुढ़िया बड़ी श्रद्धा के साथ गाय की सेवा करने लगी। पड़ोसन की ईष्याक तब और बढ़ गई जब उसने देखा कि गाय सोने का गोबर कर रही है। बुढ़िया के वहां ना होने का फायदा उठा कर वो सोने का गोबर उठा लाई और सामान्या गोबर उसके स्थाुन पर रख दिया। अब वो रोज ही ऐसा करती और सोने की मदद से अमीर होती गई। तब सूर्य देव ने सोचा कि उन्हें ही कुछ करना पड़ेगा। उन्होंने शाम को तेज आंधी चलवा दी, आंधी के कारण बुढिया ने गाय को अंदर बांध दिया सुबह उसने देखा कि गाय तो सोने का गोबर करती है। फिर वह हर रोज गाय को अंदर बांधने लगी। जब पड़ोसन को सोना नहीं मिलार तो जल कर उसने नगर के राजा को बता दिया कि बुढ़िया के पास सोने का गोबर करने वाली गाय है। राजा ने अपने सैनिक भेजकर बुढ़िया के यहां से गाय लाने का हुक्म दिया। सैनिक गाय ले आये। देखते ही देखते गोबर से सारा महल भर गया, और बदबू फैल गई। राजा को सपने में सूर्य देव ने दर्शन दे कर कहा कि मूर्ख यह गाय उस वृद्धा के लिये ही है। वह हर रविवार नियम पूर्वक व्रत रखती है। इस गाय को वापस लौटाने में ही तुम्हारी भलाई। राजा ने बुढ़िया को बुलाकर बहुत सारा धन दिया और क्षमा मांगते हुए सम्मान पूर्वक वापस भेजा। साथ पड़ोसन को दंडित किया। इसके अलावा उसने पूरे राज्य में घोषणा करवाई की आज से सारी प्रजा रविवार के दिन उपवास रखेगी व सूर्य देव की पूजा करेगी। उसके प्रताप से राजा का राज्य भी धन्य धान्य से संपन्न हुआ और प्रजा में सुख शांति रहने लगी।