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महाभारत की वो वीरांगनाएं, जिनकी शक्तियां इतिहास के पन्नों में छिप गईं

महाभारत काल की जब भी बात होती है, तो अक्सर वीर पुरुषों के नाम और उनके पराक्रम की कहानियां ही सामने आती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस समय कुछ ऐसी वीर और शक्तिशाली स्त्रियां भी थीं, जिनकी अद्भुत शक्तियां इतिहास के पन्नों में कहीं दबकर रह गईं. आखिर कौन थीं ये स्त्रियां और क्यों इनकी चर्चा कम होती है, आइए जानते हैं. 1. हिडिंबा इसमें सबसे पहला नाम आता है हिडिंबा का. वह एक भयानक राक्षस हिडिंब की बहन थी और खुद भी कई मायावी शक्तियों की स्वामिनी थी. वह रूप बदलने में माहिर थी और एक साथ कई लोगों को आकाश में उठा सकती थी. महाभारत के मुताबिक, लाक्षागृह से बचने के बाद जब पांडव जंगल में रुके थे, तब हिडिंब ने अपनी बहन को उन्हें मारने भेजा. लेकिन भीम को देखकर हिडिंबा मोहित हो गई और सुंदर स्त्री का रूप धारण कर लिया. बाद में भीम और हिडिंब के बीच युद्ध हुआ, जिसमें हिडिंब मारा गया और भीम ने हिडिंबा से विवाह कर लिया. हिडिंबा के पास एक और अद्भुत शक्ति थी, वह गर्भ धारण करते ही तुरंत संतान को जन्म दे सकती थी. इसी से घटोत्कच का जन्म हुआ था. 2. गांधारी गांधार देश के राजा सुबल की पुत्री होने के कारण उनका नाम गांधारी पड़ा था. वह भगवान शिव की महान भक्त थीं और उन्हें 100 पुत्रों का वरदान मिला था. उनकी आंखों में अद्भुत शक्ति थी. उन्होंने अपने तप और शक्ति से दुर्योधन के शरीर को वज्र समान मजबूत बना दिया था. हालांकि, श्रीकृष्ण की रणनीति के कारण उसकी जांघ कमजोर रह गई. महाभारत युद्ध के बाद गांधारी ने पांडवों को क्षमा कर दिया, लेकिन श्रीकृष्ण को पूरे वंश के नाश का श्राप दिया था. इससे उनकी शक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता है. 3. कुंती कुंती एक तपस्वी और अत्यंत बुद्धिमान स्त्री थीं. उन्हें ऋषि दुर्वासा से एक चमत्कारी मंत्र प्राप्त हुआ था, जिससे वह किसी भी देवता का आह्वान कर सकती थीं. इसी मंत्र के प्रभाव से कर्ण का जन्म हुआ. बाद में उन्होंने यह मंत्र माद्री को भी दिया था. पति की मृत्यु के बाद कुंती ने अपने पुत्रों का पालन-पोषण किया और उन्हें योग्य शिक्षा दिलाई. उन्होंने पांडवों को उनका अधिकार दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी राजनीतिक समझ और धैर्य उन्हें विशेष बनाता है. 4. उलूपी उलूपी नागराज वासुकी की दत्तक पुत्री थीं और उन्हें नागकन्या व जलपरी दोनों रूपों में जाना जाता है. अर्जुन जब अपने अभियान पर थे, तब उनकी मुलाकात उलूपी से हुई. उलूपी अर्जुन को पाताल लोक ले गई और उनसे विवाह किया. उसने अर्जुन को जल में अजेय होने का वरदान दिया था. 5. भानुमती भानुमती कंबोज के राजा की पुत्री थीं. वह बेहद सुंदर, बलशाली और बुद्धिमान थीं. उनके स्वयंवर में कई राजा आए थे, लेकिन दुर्योधन ने उनसे बलपूर्वक विवाह किया था. कहा जाता है कि भानुमती कुश्ती में निपुण थीं और कई बार दुर्योधन को भी हरा देती थीं. उनकी ताकत और बुद्धिमत्ता उन्हें खास बनाती है. 6. सत्यवती सत्यवती, राजा शांतनु की पत्नी थीं. उनका जन्म मछली के गर्भ से हुआ था, इसलिए उन्हें मत्स्यगंधा कहा जाता था. ऋषि पराशर ने उन्हें वरदान दिया, जिससे उनके शरीर से सुगंध आने लगी और उनका नाम सत्यवती पड़ा था. सत्यवती राजनीति और कूटनीति में निपुण थीं. उनके कारण ही भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया, जो आगे चलकर महाभारत युद्ध की नींव बना.

नीम करोली बाबा के 4 जीवन सूत्र, जो बदल सकते हैं आपकी सोच और जीवन

नीम करोली बाबा के 4 जीवन-बदलने वाले सूत्र नीम करोली बाबा सादगी और भक्ति के प्रतीक थे.  उनका मानना था कि सुख-समृद्धि पाने के लिए किसी कठिन अनुष्ठान की जरूरत नहीं है, बस कुछ छोटी बातों को जीवन में उतारना काफी है. 1. हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें बाबा हनुमान जी के परम भक्त थे.  उनका कहना था कि हनुमान चालीसा की हर पंक्ति एक मंत्र की तरह है.  जो व्यक्ति रोजाना पूरी श्रद्धा के साथ सुबह-शाम हनुमान चालीसा पढ़ता है, उसके जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं. 2. गुरु का आशीर्वाद और मार्गदर्शन लें जीवन में एक गुरु का होना बहुत जरूरी है.  उनके अनुसार, जिसने गुरु चुन लिया, उसे उनके सानिध्य में रहते हुए उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए.  गुरु का आशीर्वाद ही सबसे बड़ी पूंजी है, जो इंसान को सही दिशा दिखा कर उसे भटकने नहीं देता. 3. बुरे वक्त में धैर्य रखें जीवन है तो उतार-चढ़ाव तो आएंगे ही. बाबा सिखाते थे कि कठिन समय में घबराना नहीं चाहिए.  हर अंधेरी रात के बाद सवेरा जरूर होता है. यदि आप अपनी ईश्वर/शक्ति पर पूरा भरोसा रखेंगे, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी आसान हो जाएगी. 4. धन का सही इस्तेमाल करें असली अमीर वह नहीं है जिसके पास बहुत पैसा है, बल्कि वह है जो धन को सही जगह खर्च करता है. नीम करोली बाबा कहते थे कि अपने धन का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों की सेवा और परोपकार में लगाना चाहिए.  जो पैसा दूसरों की भलाई में काम आता है, वह कभी कम नहीं होता, बल्कि बरकत लेकर आता है.

देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मास, 25 जुलाई से चार महीने तक शुभ कार्यों पर विराम

हिंदू धर्म में चातुर्मास के चार महीने बहुत ही शुभ माने जाते हैं. इन शुभ दिनों की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है और समापन प्रबोधिनी यानी देवउठनी एकादशी पर होती है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी, जिसके चार महीने भगवान विष्णु को समर्पित हैं. जिसका समापन देवउठनी एकादशी पर 20 नवंबर को होगा. इस चातुर्मास में सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के महीनों का आगमन होगा.    क्या है चातुर्मास? देवशयनी एकादशी पर शुरू होने वाले चातुर्मास से भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा में चले जाते हैं. जिसके बाद उन चार महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. इसके बाद जैसे ही श्रीहरि देवउठनी एकादशी पर जागते हैं, उसी वक्त से सभी मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं. पौराणिक कथा के मुताबिक, चातुर्मास की कथा राजा बलि और श्रीहरि से जुड़ी हुई है. राजा बलि, जो असुरों के राजा थे, उन्होंने इंद्र से सत्ता छीनकर पूरे ब्रह्मांड पर राज करना शुरू कर दिया था. तब सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए. भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया, जो एक बौने ब्राह्मण के रूप में थे, और राजा बलि से तीन पग जमीन मांगी. फिर उन्होंने विशाल रूप धारण किया. पहले पग में पूरी पृथ्वी नाप ली, दूसरे पग में आकाश (मध्य लोक) को माप लिया. तीसरे पग के लिए जगह नहीं बची, तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया और भगवान से कहा कि वे तीसरा पग उनके सिर पर रख दें. पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु इन चार महीनों तक राजा बलि के द्वार पर ही रहते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन वापस आते हैं. इन चार महीनों में, जब देवता सोते हैं, तब असुर ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और लोगों को परेशान करते हैं. इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय हर व्यक्ति को कोई न कोई व्रत जरूर करना चाहिए. चातुर्मास वही सुरक्षा कवच है, जो अनुशासन और भक्ति से हमें बचाता है. क्या चातुर्मास में मांगलिक कार्य होते हैं? चातुर्मास के दौरान, यज्ञ, विवाह, जनेऊ (उपनयन), गृह प्रवेश और अन्य शुभ काम नहीं किए जाते है. इस समय शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य करना अशुभ माना जाता है. इसके बजाय, गृहस्थ लोगों के लिए यह समय अपनी आस्था को मजबूत करने का होता है. वे ध्यान करते हैं और व्रत रखते हैं. लेकिन रोज की पूजा, सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक और भक्ति से जुड़े काम चातुर्मास में पूरी तरह किए जा सकते हैं, बल्कि इन्हें करना और भी अच्छा माना जाता है. यानि, इस दौरान शुभ कामों पर रोक लगाना आध्यात्मिक रुकावट नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा को भक्ति और साधना की ओर मोड़ना है. चातुर्मास में क्या खाना और क्या नहीं खाना चाहिए? चातुर्मास में भक्त कुछ खास चीजों का सेवन नहीं करते, जैसे गुड़, तेल, बैंगन और हरी पत्तेदार सब्जियां. साथ ही नमकीन और मसालेदार भोजन से भी परहेज किया जाता है. खासकर वैष्णव परंपरा को मानने वाले लोग इस दौरान तैलीय, ज्यादा नमक या मीठा खाने से बचते हैं. इसके अलावा प्याज, लहसुन और बैंगन भी नहीं खाते हैं. हर महीने के हिसाब से भी कुछ चीजों से परहेज किया जाता है- श्रावण में पालक और हरी सब्जियां नहीं खानी चाहिए. भाद्रपद में दही से बचना चाहिए. आश्विन में दूध नहीं पीना चाहिए. कार्तिक में मांसाहार, खासकर मछली नहीं खानी चाहिए. कैसे करें चातुर्मास में पूजा? चातुर्मास मनाने के लिए आपको कहीं बाहर जाने या मंदिर में रहने की जरूरत नहीं है. आप घर पर ही आसान तरीके से इसका पालन कर सकते हैं. – सुबह सूर्योदय से पहले उठें और भगवान विष्णु को दीपक जलाकर ताज़ी तुलसी के पत्ते अर्पित करें. – विष्णु सहस्रनाम या हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें. अगर आप एक माला भी जप लेते हैं, तो वह भी काफी माना जाता है. – इन चार महीनों में कम से कम एकादशी का व्रत जरूर रखें. – अपनी इच्छा से किसी एक चीज़ या आदत का त्याग करें, यही आपका व्यक्तिगत व्रत होगा. – भागवत पुराण या रामायण का पाठ करें या उनकी कथा सुनें. – दान-पुण्य करें, जैसे अन्नदान, गरीबों को भोजन कराना या मंदिर में सेवा करना.

बुध का कर्क राशि में प्रवेश, कई राशियों के लिए बदलेगा भाग्य का रास्ता

 वैदिक ज्योतिष के सभी ग्रहों में बुध अत्यंत प्रभावशाली ग्रहों में गिना जाता है. बुध को मिथुन और कन्या राशि का स्वामी माना जाता है और यह ग्रह विशेष रूप से बुद्धि, वाणी, संवाद क्षमता, व्यापारिक समझ और मानसिक चेतना से जुड़ा होता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, बुध 22 जून यानी आज दोपहर 3 बजकर 9 मिनट पर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. बुध का यह राशि परिवर्तन बहुत ही विशेष माना जा रहा है. ऐसे में कुछ राशियों के लिए यह गोचर बहुत ही शुभ है और कुछ राशियों को सावधान रहना होगा. 1. मेष बुध का गोचर मेष राशि के चौथे भाव में होगा. घर का माहौल सकारात्मक बना रहेगा. करियर और कार्यक्षेत्र के संदर्भ में यह समय मेहनत का फल देने वाला रहेगा. बेहतर परिणाम मिलने की संभावना है. वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों का सहयोग भी मिल सकता है. आर्थिक मामलों में जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद सामने आ सकते हैं. यह समय जीवनसाथी के लिए प्रगति लेकर आ सकता है. करियर में उन्नति या पदोन्नति मिलने की संभावना बन सकती है. 2. वृषभ बुध का गोचर वृषभ राशि के तीसरे भाव में होगा. अधूरे काम पूरे हो सकते हैं. आपके प्रयासों को सफलता मिल सकती है. आर्थिक मामले सही रहेंगे. रिश्ते मजबूत हो सकते हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अच्छे परिणाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है. 3. मिथुन बुध का गोचर मिथुन राशि के दूसरे भाव में होगा. कम्युनिकेशन स्किल इस समय आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है. यह समय धन अर्जित करने के लिए बढ़िया माना जा रहा है. नई संपत्ति या प्रॉपर्टी खरीदने का विचार कर सकते हैं. 4. कर्क बुध आज कर्क राशि में ही जाने वाले हैं. सेहत का सबसे ज्यादा ध्यान रखना होगा. हालांकि, आर्थिक दृष्टि यह समय सकारात्मक रहेगा. विदेशी स्रोतों, विदेशी कंपनियों या विदेश से जुड़े कार्यों से लाभ मिलने की संभावना बन सकती है. परिवार में मानसिक बनी रहेगी. करियर के क्षेत्र में नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समय अच्छा साबित हो सकता है. 5. सिंह बुध का गोचर सिंह राशि वालों के बारहवें भाव में होगा, जो खर्च, विदेश, एकांत, शोध और मानसिक चिंतन से जुड़ा होता है. आर्थिक योजना बनाकर चलना बेहद जरूरी रहेगा. अनावश्यक खर्चे बढ़ सकते हैं. इस दौरान लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ सकती है, जो भविष्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. 6. कन्या बुध कन्या राशि वालों के ग्यारहवें भाव में होगा. आपकी कोई पुरानी इच्छा पूरी हो सकती है. लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा हो सकता है. सेहत अच्छी रहेगी. आप खुद को ऊर्जा से भरपूर और शारीरिक रूप से मजबूत महसूस कर सकते हैं. सामाजिक जीवन में इस दौरान आपकी सक्रियता बढ़ सकती है. नए रिश्तों की शुरुआत होने की संभावना भी बन सकती है. 7. तुला बुध का गोचर तुला राशि वालों के दसवें भाव में होगा. यह अवधि तुला राशि के जातकों के लिए सकारात्मक अवसर लेकर आ सकती है. कार्यक्षेत्र या बिजनेस से जुड़ी कोई ऐसी खुशखबरी मिल सकती है. करियर में पदोन्नति मिलने की संभावना बन सकती है. समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ सकता है. पारिवारिक जीवन में भी यह समय सुखद रह सकता है. भाग्य का साथ मिलेगा. 8. वृश्चिक बुध का गोचर वृश्चिक राशि वालों के नौवें भाव में होगा. इस दौरान कई मामलों में अप्रत्याशित लाभ मिलने की संभावना भी बन सकती है. इस दौरान अचानक यात्रा के योग भी बन सकते हैं, जो किसी जरूरी कार्य या अवसर के कारण हो सकती है. 9. धनु बुध का गोचर धनु राशि वालों के आठवें भाव में होगा. स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव आ सकता है. इस दौरान जीवनसाथी के साथ किसी बात को लेकर मतभेद हो सकता है. पिता से जुड़े आर्थिक मामलों में थोड़ी परेशानी आ सकती है. 10. मकर बुध का गोचर मकर राशि वालों के सातवें भाव में होगा. पदोन्नति या आय में वृद्धि होने की संभावना बन सकती है. पेशेवर जीवन में स्थिरता और प्रगति देने वाला साबित हो सकता है. पारिवारिक जीवन में भी सकारात्मक माहौल बना रह सकता है. आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. 11. कुंभ बुध कुंभ राशि वालों के छठे भाव में प्रवेश करेंगे. पुराने कर्ज से मुक्ति मिलने की संभावना बन सकती है. खर्चों में बढ़ोतरी होने की संभावना भी बन सकती है. आर्थिक योजना बनाकर चलना जरूरी होगा. कानूनी मामला चल रहा है तो इस दौरान निर्णय आपके पक्ष में आने की संभावना बन सकती है. 12. मीन बुध मीन राशि वालों के पांचवें भाव में होगा. इस दौरान नई चीजें सीखने और ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा बढ़ सकती है. आर्थिक दृष्टि से यह समय आय में वृद्धि के संकेत दे सकता है. यदि आप विवाहित हैं तो जीवनसाथी को करियर में कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि मिल सकती है. प्रेम विवाह के योग भी बन सकते हैं. 

बुधादित्य योग और भद्र राजयोग का शुभ संयोग, मिथुन-कन्या समेत इन राशियों पर बरसेगी किस्मत की मेहरबानी

मेष: 22 जून के दिन फाइनेंशियल दिक्कतों से छुटकारा पाने के लिए अपने पार्टनर से सलह लें। आज काफी मोटिवेटेड फील करेंगे। सही दृष्टिकोण के साथ आप अपने रोमांटिक सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं। वर्क प्रेशर आज ज्यादा फील हो सकता है। वृषभ: 22 जून के दिन सिनीयर्स के साथ नोक-झोक से बचना बेहतर रहेगा। धन के मामले में लकी रहने वाले हैं आज आप। वर्क प्रेशर ज्यादा हो सकता है। अर्थीक स्थिति मजबूत रहेगी। करियर में कुछ नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। मिथुन: 22 जून के दिन उत्साह से भरा रहेगा दिन। आज आपको काम पर फोकस करने की सलाह दी जाती है। अपनी डाइट को हेल्दी रखें। आगे बढ़ने और दुनिया को यह दिखाने से न डरें कि आप क्या कर सकते हैं। कर्क: 22 जून के दिन फाइनेंशियल स्थिति में थोड़े-बहुत उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। स्किल्स में सुधार करना चाहते हैं, तो अब कदम उठाने का सही समय आ गया है। आज का दिन थोड़ा बिजी फील हो सकता है। सिंह: 22 जून का दिन आपके लिए काफी लकी माना जा रहा है। अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलें। बिजनेस कर रहे लोगों की किस्मत साथ देगी। अपने रास्ते में आने वाले अवसरों का लाभ उठाने का दिन है। कन्या: 22 जून के दिन मजाकिया बातचीत में खुद को शामिल करने के लिए तैयार रहें। आज के दिन कुछ ऐसा करें, जो आप हमेशा से करना चाहते थे। आपका अच्छा मूड होगा और यह उन लोगों को आकर्षित करेगा, जो कनेक्शन बनाने के लिए तैयार हैं। तुला: 22 जून के दिन आपको अपने फाइनेंस को मैनेज करने में आपका पार्टनर मदद कर सकता है। हेल्थ पर आज कड़ी नजर रखें। जो लोग रिलेशन में हैं, उनके लिए आज अपने जुनून को जगाने और अपनी पार्ट्नर्शिप में फिर से स्पार्क लाने का सही समय है। वृश्चिक: 22 जून के दिन अपने साथी की बात ध्यान से सुनें। विवाद को निपटाने के लिए समझौता करना जरूरी है। एक-दूसरे के साथ फिर से जुड़ने के लिए समय निकालें और हर पल का आनंद उठाएं। अपने रोज के कार्यक्रम से कुछ समय निकालें। धनु: 22 जून के दिन धैर्य रखें और टकराव को रोकने के लिए खुद को समझाएं। शाम होते-होते आपकी सभी मुश्किलें कम हो जाएंगी। अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए आज का दिन शुभ है। थोड़ा इमोशनल फील कर सकते हैं। मकर: 22 जून के दिन आप प्यार और परिवार के बीच फंसा हुआ महसूस कर सकते हैं। जबकि आपका दिल नई दोस्ती के लिए तरस सकता है। अपने ऊपर अत्यधिक बोझ डालने से बचने के लिए अपने जीवन में इन चीजों को संतुलित करने का तरीका खोजना अनिवार्य है। कुंभ: 22 जून के दिन ऐसी एक्टिविटी करें, जो आपको खुश और कॉन्फिडेंट बनाती है। आपकी आनंदमय ऊर्जा को बढ़ाने और उन लोगों को आकर्षित करने का सबसे अच्छा तरीका है, जो आपके जैसा ही महसूस करते हैं। मीन: 22 जून के दिन आपको कुछ मुश्किलों से जूझना पड़ सकता है। अगर आप अपने पार्टनर के साथ कोई प्लान बना रहे हैं, तो बातचीत के दौरान विवाद हो सकता है, जो तीखी बहस में बदल सकता है। खुलकर बातचीत करने की कोशिश करें। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।  

वास्तु शास्त्र के अनुसार फ्रिज के ऊपर ये चीजें रखना हो सकता है अशुभ, बढ़ती है नकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु का अपना महत्व होता है, और फ्रिज भी इससे अछूता नहीं है. रसोई में रखा फ्रिज न केवल भोजन को ताज़ा रखता है, बल्कि यह घर की ऊर्जा और आर्थिक स्थिति पर भी असर डालता  है.  वास्तु के अनुसार, फ्रिज जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसे सही दिशा में रखना और इसके ऊपर रखी जाने वाली चीजों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. फ्रिज के ऊपर क्या न रखें? फ्रिज के ऊपर सामान रखने की आदत अक्सर घर में नकारात्मक ऊर्जा को खींच कर वास्तु दोष का कारण बनती है. इसलिए कुछ चीजों को फ्रिज के ऊपर कभी न रखें: दवाइयां: फ्रिज के ऊपर दवाइयां रखने से उनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है. इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा vibrations) बढ़ते हैं. धन और कीमती वस्तुएं: नकदी, सिक्के या गहने फ्रिज के ऊपर रखने से धन के आगमन में रुकावट आती है. अनावश्यक आर्थिक हानि हो सकती है. इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: माइक्रोवेव या टोस्टर जैसे भारी बिजली के उपकरण फ्रिज के ऊपर रखने से ऊर्जाओं में टकराव होता है.  साथ ही, फ्रिज के कंपन से इनके गिरने का खतरा भी बना रहता है. मृत पौधे: सूखे फूल, बोनसाई या मुरझाए हुए पौधे कभी न रखें. ये घर में मृत और नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं. खाने-पीने की चीजें: फ्रिज के मोटर से निकलने वाली गर्मी के कारण ऊपर रखे ब्रेड, अनाज या शराब जैसे खाने-पीने की चीजें जल्दी खराब हो जाती हैं, जिससे घर में वास्तु दोष पैदा होता है. फ्रिज के ऊपर/अंदर क्या रखें (सकारात्मक ऊर्जा के लिए) घर की सकारात्मकता और समृद्धि बढ़ाने के लिए आप ये उपाय अपना सकते हैं: आध्यात्मिक प्रतीक: फ्रिज के दरवाजे पर स्वास्तिक जैसे शुभ प्रतीक या वास्तु के मुताबिक मैग्नेट लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है. क्लीयर क्वार्ट्ज क्रिस्टल: फ्रिज के ऊपर एक छोटा, साफ क्लीयर क्वार्ट्ज क्रिस्टल रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. यह रसोई में सुरक्षा घेरा बनता है. प्रकाश: वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज के पास एक छोटा घी का दीपक या सुगंधित मोमबत्ती रखना तत्वों को संतुलित करने और ऊर्जा को शुद्ध करने में मदद करता है. सेंधा नमक (Rock Salt): एक छोटी कांच की कटोरी में थोड़ा सेंधा नमक रखें. यह रसोई की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है. इसे हर 15-20 दिन में बदलते रहें. सुगंधित मोमबत्ती: एक छोटी सुगंधित मोमबत्ती (बिना जलाए) रखने से भी वातावरण ताज़ा बना रहता है. फ्रिज के लिए कुछ महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स दिशा का चुनाव (Ideal Placement): वास्तु के अनुसार, फ्रिज को हमेशा रसोई या डाइनिंग रूम के दक्षिण-पश्चिम (South-West) या दक्षिण-पूर्व (South-East) कोने में रखें. फ्रिज को कभी भी उत्तर-पूर्व (North-East) दिशा में न रखें. साफ-सफाई: फ्रिज को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें. उसे गैरजरूरी सामानों से न भरें (Overstuffing न करें). एक्सपायरी चेक करें: फ्रिज में रखा बासी या खराब भोजन ऊर्जा के प्रवाह को रोकता है. इसलिए, समय-समय पर फ्रिज चेक करें , एक्सपायर हो चुके सामान को तुरंत बाहर निकालें.

शुक्र का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश, वृषभ समेत 4 राशियों को मिलेगा बड़ा आर्थिक लाभ

शुक्र देव का नक्षत्र परिवर्तन ज्योतिष शास्त्र में भौतिक सुख-सुविधाओं, धन, वैभव और ऐश्वर्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. 23 जून को शुक्र ग्रह बुध की ओनरशिप वाले अश्लेषा नक्षत्र (Ashlesha Nakshatra) में प्रवेश करने जा रहे हैं. अश्लेषा नक्षत्र में शुक्र का आना कई राशियों के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आएगा, लेकिन मुख्य रूप से 4 राशियां ऐसी हैं जिन्हें इस दौरान जबरदस्त आर्थिक लाभ और करियर में तरक्की मिलने वाली है. आइए जानते हैं उन लकी राशियों के बारे में. 1. वृषभ राशि (Taurus) शुक्र आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए इनका नक्षत्र परिवर्तन आपके लिए बेहद शुभ और फलदायी रहने वाला है. करियर व व्यापार: नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई और बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. व्यापारियों के लिए मुनाफे के नए स्रोत बनेंगे. आर्थिक लाभ: आपकी सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी. यदि आप प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो समय अनुकूल है. लव लाइफ: पार्टनर के साथ रिश्ते मजबूत होंगे और सिंगल लोगों के जीवन में किसी खास की एंट्री हो सकती है. 2. मिथुन राशि (Gemini) चूंकि अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं और बुध की मिथुन राशि के साथ गहरी मित्रता है, इसलिए यह गोचर आपके लिए भाग्यशाली रहेगा. वाणी से लाभ: मीडिया, राइटिंग, मार्केटिंग या कंसल्टेंसी से जुड़े लोगों को अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स के दम पर बड़ा फायदा होगा. धन लाभ: फंसा हुआ पैसा वापस मिल सकता है. अचानक से धन लाभ होने के योग बनेंगे, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. पारिवारिक सहयोग: भाई-बहनों और परिवार के सदस्यों का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे आपके रुके हुए काम पूरे होंगे. 3. कर्क राशि (Cancer) शुक्र का यह नक्षत्र परिवर्तन कर्क राशि के जातकों के लिए मान-सम्मान और सुख लेकर आ रहा है. व्यक्तित्व में निखार: आपके आकर्षण में वृद्धि होगी और समाज में आपका कद बढ़ेगा. लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे. करियर में ग्रोथ: ऑफिस में सीनियर्स और बॉस आपके काम की तारीफ करेंगे. क्रिएटिव फील्ड से जुड़े लोगों के लिए यह समय गोल्डन पीरियड साबित हो सकता है. मानसिक शांति: पिछले कुछ समय से चल रहा तनाव दूर होगा और आप खुद को काफी रिलैक्स महसूस करेंगे. 4. कन्या राशि (Virgo) बुध की दूसरी राशि कन्या के लिए भी शुक्र का अश्लेषा नक्षत्र में जाना बेहद लाभकारी सिद्ध होगा. आर्थिक पक्ष: आपकी इनकम के साधनों में बढ़ोतरी होगी. निवेश (Investment) से अच्छा रिटर्न मिलने की पूरी संभावना है. बिजनेस में मुनाफा: अगर आप पार्टनरशिप में कोई बिजनेस कर रहे हैं, तो कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है जो भविष्य में तगड़ा मुनाफा देगी. इच्छाओं की पूर्ति: लंबे समय से अटकी हुई कोई इच्छा इस दौरान पूरी हो सकती है, जिससे घर में खुशियों का माहौल रहेगा.

पौराणिक कथाओं में हनुमान जी और मच्छिंद्रनाथ के बीच योग-शक्ति संघर्ष का उल्लेख

हिंदू धार्मिक ग्रंथों में पवनपुत्र हनुमान जी को सबसे शक्तिशाली माना गया है. मान्यता है कि उनके बिना न तो राम कथा पूर्ण है और न ही रामायण. राम-रावण युद्ध में हनुमान जी ऐसे योद्धा थे, जिन्हें कोई भी किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचा सका. उनके पराक्रम, सेवा, दया और शक्ति की अनगिनत गाथाएं प्रसिद्ध हैं. लेकिन कुछ कथाओं के अनुसार, तीन ऐसे योद्धा भी हुए हैं, जिनके सामने हनुमान जी को भी झुकना पड़ा. यह सुनने में भले ही आश्चर्यजनक लगे, लेकिन पुराणों और लोक कथाओं में इसका उल्लेख मिलता है. 1. मच्छिंद्रनाथ रामायण के अनुसार, मच्छिंद्रनाथ एक महान सिद्ध योगी और तपस्वी थे. एक बार वे रामेश्वरम पहुंचे और राम सेतु को देखकर भावविभोर हो गए. इसके बाद वे समुद्र में स्नान करते हुए भगवान राम की भक्ति में लीन हो गए. उसी समय हनुमान जी, जो वानर रूप में वहाँ उपस्थित थे, उनकी परीक्षा लेना चाहते थे. उन्होंने तेज वर्षा उत्पन्न कर दी और स्वयं एक वानर के रूप में पर्वत पर गुफा बनाने का अभिनय करने लगे. मच्छिंद्रनाथ ने उन्हें समझाते हुए कहा कि संकट आने से पहले ही सुरक्षित स्थान खोज लेना चाहिए. इस पर हनुमान जी ने उनसे उनकी शक्ति का परिचय मांगा और युद्ध की चुनौती दे दी. इसके बाद दोनों के बीच युद्ध हुआ, जिसमें मच्छिंद्रनाथ की योग शक्ति के सामने हनुमान जी की शक्ति निष्फल हो गई. अंत में वायुदेव के हस्तक्षेप के बाद यह युद्ध समाप्त हुआ और इस कथा में हनुमान जी की हार मानी जाती है. 2. मेघनाद (इंद्रजीत) जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तो उन्होंने अशोक वाटिका में उत्पात मचाया और रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध कर दिया था. इसके बाद रावण ने अपने शक्तिशाली पुत्र मेघनाद को हनुमान जी को पकड़ने के लिए भेजा. मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया. हनुमान जी को वरदान प्राप्त था, इसलिए उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन ब्रह्मास्त्र का सम्मान करते हुए उन्होंने स्वयं को उसके बंधन में जाने दिया. इस प्रकार, तकनीकी रूप से यह भी एक स्थिति थी जहां हनुमान जी को रोका गया था. 3. लव और कुश यह घटना उस समय की है जब भगवान श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ किया था. यज्ञ का घोड़ा जंगल में छोड़ा गया, जिसे लव और कुश ने पकड़ लिया और चुनौती स्वीकार कर ली. श्रीराम की सेना से युद्ध में लव-कुश ने शत्रुघ्न और लक्ष्मण तक को पराजित कर दिया. इसके बाद भरत, सुग्रीव और हनुमान जी भी युद्ध के लिए पहुंचे. जब हनुमान जी ने लव-कुश का पराक्रम देखा, तो उन्हें संदेह हुआ. ध्यान लगाने पर उन्हें ज्ञात हुआ कि ये दोनों श्रीराम और माता सीता के पुत्र हैं. यह जानने के बाद हनुमान जी ने युद्ध करना उचित नहीं समझा और शांत भाव से खड़े रहे. इसके बावजूद लव-कुश ने उन पर प्रहार किया, लेकिन हनुमान जी ने प्रतिकार नहीं किया था.

12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण, यूरोप और आर्कटिक क्षेत्रों में दिखेगा अद्भुत नजारा

दुनिया भर के वैज्ञानिकों और आसमान में होने वाली घटना को देखने के शौकीन लोगों के लिए अगस्त 2026 का महीना बहुत खास होने वाला है.  इस साल 12 अगस्त को एक अद्भुत खगोलीय घटना होने जा रही है, जिसे हम पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं.  आइए जानते हैं कि यह क्या है और इसका क्या मतलब है. क्या होता है पूर्ण सूर्य ग्रहण? सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चाँद, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है. जब चांद, सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है और दिन के उजाले में कुछ देर के लिए अंधेरा छा जाता है, तो उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं.  उस समय सूर्य के चारों ओर एक चमकती हुई रिंग (छल्ला) दिखाई देती है, जो देखने में किसी जादुई नजारे जैसी लगती है. क्या यह भारत में दिखाई देगा? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत में रहने वाले लोग इसे देख पाएंगे? तो इसका जवाब है नहीं.  यह सूर्य ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देग.  यह मुख्य रूप से यूरोप (जैसे स्पेन), ग्रीनलैंड, आइसलैंड और आर्कटिक के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. भारत में इसका असर? चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका कोई असर नहीं होगा.  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण हमारे देश में नहीं दिखता, उसका सूतक काल (नियम-कानून) भी मान्य नहीं होता.  इसलिए भारत के लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और पूजा-पाठ बिना किसी चिंता के सामान्य रूप से कर सकते हैं. सावधानी: ग्रहण कैसे देखें? अगर आप ऐसी जगह पर हैं जहां ग्रहण दिखने वाला है, तो एक बात का हमेशा ध्यान रखें: ग्रहण को कभी भी अपनी आंखों से सीधा न देखें. सूर्य की रोशनी इतनी तेज होती है कि वह आपकी आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा सकती है. इसे देखने के लिए हमेशा बाजार में मिलने वाले खास सोलर फिल्टर वाले चश्मों का ही इस्तेमाल करना चाहिए.  साधारण चश्मे या आंखों के सामने हाथ रखकर इसे देखना बहुत खतरनाक हो सकता है.

मंगल का वृषभ राशि में प्रवेश, 42 दिनों तक सभी राशियों पर पड़ेगा गहरा प्रभाव

 ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल का हमारे जीवन पर गहरा और सीधा प्रभाव पड़ता है.  साहस, पराक्रम और ऊर्जा के कारक ग्रह मंगल (Mars) का राशि परिवर्तन एक अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटना मानी जाती है. आज, 21 जून 2026 को मंगल अपनी राशि बदलकर वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं. मंगल का यह गोचर 2 अगस्त 2026 तक रहेगा, यानी इसका प्रभाव कुल 42 दिनों तक बना रहेगा. ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, मंगल का यह गोचर सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े बदलाव लाने वाला है.  जहां यह गोचर कुछ लोगों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा, वहीं कुछ राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष सावधानी और सतर्कता बरतने का है. मंगल गोचर: क्यों है यह महत्वपूर्ण? मंगल को ग्रहों का सेनापति कहा जाता है. 42 दिनों तक वृषभ राशि में इनका प्रवास ग्रहों की स्थिति में बड़ा फेरबदल लाएगा, जो मुख्य रूप से हमारे आर्थिक निर्णयों, कार्यक्षमता और साहस को प्रभावित करता है. इस दौरान ऊर्जा में उतार-चढ़ाव महसूस किया जा सकता है. इन राशियों को रहना होगा बेहद सतर्क ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल के वृषभ राशि में रहने के दौरान 4  राशियों के जातकों को  विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है: 1. मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय चुनौतियों से भरा हो सकता है. कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाने में समस्या आ सकती है. इस अवधि में अहंकार से दूर रहना और वाणी पर नियंत्रण रखना आपके लिए हितकर होगा. कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले सोच-विचार अवश्य करें. 2. तुला राशि: मंगल का गोचर तुला राशि के जातकों के लिए भी तनावपूर्ण रह सकता है.  कार्यक्षेत्र में वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है. पारिवारिक जीवन में भी संवेदनशीलता बनी रहेगी, इसलिए धैर्य से काम लेना ही समझदारी है. फिजूलखर्चों पर लगाम लगाएं. 3. अन्य चार राशियां: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इसके अतिरिक्त अन्य चार राशियां सिंह, मकर, वृश्चिक और कुंभ मंगल की इस स्थिति से प्रभावित होंगी. इन जातकों को अपने निवेश, व्यक्तिगत संबंधों और स्वास्थ्य के प्रति विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है. इस अवधि में क्या करें? (विशेष सलाह) आर्थिक योजना: मंगल के प्रभाव से आक्रामक निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, इसलिए निवेश करते समय पूरी तरह सतर्क रहें. क्रोध पर नियंत्रण: मंगल ऊर्जा का कारक है, ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना स्वाभाविक है. योग और ध्यान का सहारा लें. वाणी में संयम: घर और कार्यस्थल पर बहस से बचें. अपनी बात को विनम्रता से रखने का प्रयास करें. स्वास्थ्य: अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाएं और संतुलित दिनचर्या का पालन करें.