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नए संवत का आगमन 2026 में: जानिए इसका महत्व और आपके लिए क्या संकेत हैं

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार भले ही नया साल 1 जनवरी को आता है, लेकिन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के अनुसार असली नववर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है. वर्ष 2026 में यह शुभ दिन 19 मार्च, गुरुवार को पड़ रहा है. इसी दिन से विक्रम संवत 2083 का आगाज़ होगा. इस बार का नववर्ष न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार भी बेहद खास होने वाला है. आइए जानते हैं क्या है संवत 2083 का नाम, इसके राजा-मंत्री और इसके महत्व के बारे में. संवत 2083 का नाम क्या है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर साल का एक विशिष्ट नाम होता है. विक्रम संवत 2083 को रौद्र संवत्सर के नाम से जाना जाएगा. रौद्र भगवान शिव का एक रूप है, जो अनुशासन, शक्ति और परिवर्तन का प्रतीक है. माना जा रहा है कि यह साल वैश्विक स्तर पर बड़े नीतिगत बदलावों और साहसिक निर्णयों का गवाह बनेगा. इस बार राजा गुरु और मंत्री मंगल इस बार नववर्ष गुरुवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इस साल के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे. गुरु के राजा होने से शिक्षा, धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में प्रगति होगी. समाज में नैतिकता बढ़ेगी और ज्ञान का प्रसार होगा. वहीं इस साल के मंत्री मंगल देव होंगे. राजा गुरु और मंत्री मंगल का यह मेल बताता है कि इस साल दुनिया भर में कड़े और अनुशासन प्रिय फैसले लिए जाएंगे. सैन्य शक्ति और तकनीक के क्षेत्र में भारत का दबदबा बढ़ सकता है. 12 नहीं, इस बार होंगे 13 महीने संवत 2083 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह 13 महीनों का साल होगा. गणना के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ का अधिक मास (मलमास) जुड़ रहा है. अधिक मास के कारण यह साल 354 दिनों के बजाय लगभग 384 दिनों का होगा. यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और दान-पुण्य के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है. नववर्ष का पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है? मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने ब्रह्मांड की रचना शुरू की थी. यह वह समय है जब पेड़ों पर नई पत्तियां आती हैं और फसलें पककर तैयार होती हैं. वैज्ञानिक रूप से भी यह ऋतु परिवर्तन का काल है जो नई ऊर्जा का संचार करता है. इसी दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, दक्षिण भारत में उगादी और उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि का महापर्व शुरू होता है. राशियों पर क्या प्रभाव होगा? ज्योतिषियों के अनुसार, राजा गुरु और मंत्री मंगल की यह जुगलबंदी मिथुन, तुला, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से फलदायी रहने वाली है. इन राशियों को करियर में तरक्की और आर्थिक लाभ के प्रबल योग बनेंगे. कुल मिलाकर नया हिंदू नववर्ष नई उम्मीदों और बदलावों के साथ आ रहा है.

गलती से भी शेयर न करें परिवार की ये 4 बातें, नहीं तो उठानी पड़ सकती है बड़ी मुसीबत!

हर फैमिली की कुछ प्राइवेट बातें होती हैं, जो घर की चारदीवारी तक ही रहें तो बेहतर होता है। लेकिन कई बार हम अपने पड़ोसी, रिश्तेदारों या दोस्तों के साथ इन्हें शेयर कर बैठते हैं। उस समय तो सिर्फ यही लगता है कि मन हल्का हो रहा है और शायद बात इतनी सीरियस भी नहीं है। लेकिन फिर बाद में यही बातें जब आपके खिलाफ काम करने लगती हैं, तब पछतावे के सिवा कुछ और बचता ही नहीं है। अगर जीवन में सफलता और सम्मान चाहिए तो एक बात गांठ बांध लें कि परिवार से जुड़ी कुछ बातें खुद तक ही रखें ताकि लोगों को आपके खिलाफ ताकत ना मिले। ऐसी ही कुछ 4 जरूरी बातें हैं जो अपने तक रखना बहुत जरूरी है, भले ही ये आपको नॉर्मल लगें लेकिन जरा सी चूक और लोग आपको जज करने में समय नहीं लगाते। आइए जानते हैं कौन सी वो बातें हैं। अपने परिवार की आर्थिक स्थिति कभी किसी को ना बताएं पहली और सबसे जरूरी बात है कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति किसी और के साथ साझा ना करें। चाहे घर की आर्थिक स्थिति मजबूत चल रही हो या कमजोर, दोनों ही बातें सिर्फ खुद तक रखनी चाहिए। इससे लोग आपके सामर्थ्य का गलत अनुमान लगा सकते हैं, जो आगे चलकर नुकसान का कारण बन सकता है। घर के अंदर होने वाले कलेश या विवाद अपना मन हल्का करने के लिए अगर आप भी बाहर वालों के साथ घर में चल रहे कलेश या विवाद शेयर कर देते हैं, तो ये आदत भारी पड़ सकती है। यही वो बातें हैं जो समय आने पर आपके खिलाफ काम कर सकती हैं और परिवार में फूट डालने का कारण भी बन सकती हैं। लोग आपके कलेश सुन तो लेते हैं और सामने से सहानुभूति भी दिखाते हैं, लेकिन पीठ पीछे अक्सर मजाक बनाते हैं और आपके लड़ाई-झगड़े उनके लिए सिर्फ एंटरटेनमेंट का एक सोर्स होते हैं। अपने परिवार की फ्यूचर प्लानिंग अगले कुछ सालों में घर खरीदना हो, बच्चों के करियर से जुड़ी कोई प्लानिंग हो या नया बिजनेस शुरू करना हो; परिवार से जुड़ी फ्यूचर प्लानिंग लोगों के साथ कभी शेयर नहीं करनी चाहिए। नजर लगने जैसी चीज भले ही अंधविश्वास हो लेकिन ये भी सच है कि हर कोई आपकी सफलता से खुश नहीं होता है। ज्यादा चर्चा से दबाव भी बढ़ता है और फिर असफल होने पर अक्सर लोगों के ताने और मजाक भी झेलने पड़ते हैं। इसलिए बेहतर रहेगा कि जब तक काम पूरा ना हो जाए, योजनाओं को अपने तक ही सीमित रखें। हर परिवार में कुछ ना कुछ कमजोरियां होती हैं, भले ही वह आर्थिक हों, भावनात्मक हों या फिर आपस के मतभेद हों। लेकिन इन कमजोरियों को कभी भी बाहर वालों के साथ शेयर नहीं करना चाहिए, भले भी वो आपके कितनी भी करीबी हों। ये बातें सामने आने से लोगों को आपके खिलाफ पावर मिलती है, जिसका लोग कभी भी फायदा उठा सकते हैं।

नवरात्रि 2026: पंचक और खरमास के कारण सीमित समय में होगी कलश स्थापना

कल यानी 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू होने जा रही है. नवरात्रि की शुभ शुरुआत पहले दिन कलश स्थापना के साथ होगी. फिर 27 मार्च को महानवमी के साथ चैत्र नवरात्रि की समाप्ति हो जाएगी. इस नवरात्रि की शुरुआत बड़े ही दुर्लभ संयोग में होगी. इस समय खरमास लग चुका है. पंचक भी लगा हुआ है. नवरात्रि की कलश स्थापना पंचक और खरमास में होगी. खरमास 15 मार्च से लगा है, जोकि 14 अप्रैल तक रहेगा. जबकि पंचक 16 मार्च से लगा है और ये 20 मार्च तक रहेगा. चैत्र नवरात्रि तिथि नवरात्रि के पहले दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन कलश स्थापना होती है. इस साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी. ये तिथि 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 25 मिनट तक रहेगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, नवरात्रि की कलश स्थापना कल की जाएगी. कलश स्थापना शुभ मुहूर्त     चैत्र नवरात्रि की कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी. ये मुहूर्त सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.     अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. अगर किसी वजह से सुबह कलश स्थपना न कर पाएं तो इस मुहूर्त में करें. खरमास और पंचक से कलश स्थापना में विघ्न नहीं ज्योतिषविदों के अनुसार, खरमास में शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं, लेकिन इसमें देवी की पूजा, धार्मिक अनुष्ठान या फिर कलश स्थापना जैसे शुभ कार्यों को लेकर कोई मनाही नहीं होती. आप निश्चिंत होकर तय मुहूर्त में कलश स्थापना करें. बता दें कि कलश स्थापना करके माता दुर्गा का आवाहन किया जाता है. फिर पूजन शुरू होता है. इस विधि से करें कलश स्थापना     ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में कलश स्थापना करें.     चैत्र नवरात्रि के पहले दिन स्नान कर लें.     इसके बाद एक चौकी रखें. उस पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें.     मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डालकर जौ बोएं.     इसके बाद एक मिट्टी या तांबे का कलश लें. उसमें जल भरकर सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें.     कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते बांधें और ऊपर से एक नारियल रख दें.     इसके बाद इस कलश को देवी की चौकी के पास स्थापित कर दें.  

Chaitra Navratri 2026 Vastu Tips: मां दुर्गा की चौकी रखने की सही दिशा और जरूरी नियम

हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। इस दौरान मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही जीवन में खुशियों के आगमन के लिए व्रत भी किया जाता है। चैत्र नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा की चौकी लगाई जाती है। इस दौरान वास्तु के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि गलत दिशा में मां दुर्गा की चौकी लगाने से साधक पूजा के पूर्ण फल की प्राप्ति से वंचित रहता है। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि किस दिशा में लगाएं मां दुर्गा की चौकी। चौकी के लिए कौन-सी दिशा है शुभ? वास्तु शास्त्र के अनुसार, चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा की चौकी के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में मां दुर्गा की चौकी लगाने से पूजा सफल होती है और साधक पर मां दुर्गा की कृपा बरसती है। इसके अलावा उत्तर-पूर्व दिशा में भी मां दुर्गा की चौकी लगा सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा में चौकी लगाने से घर में सुख-शांति का वास होता है। साथ ही मां दुर्गा की कृपा से साधक की सभी मुरादें पूरी होती हैं। इस दिशा में न लगाएं चौकी वास्तु शास्त्र की मानें तो दक्षिण दिशा को यमराज की मानी जाती है। इसलिए इस दिशा में मां दुर्गा की चौकी न लगाएं। इस दिशा में चौकी लगाने से साधक को सुख-शांति और समृद्धि में बाधा का सामना करना पड़ सकता है। इन बातों का रखें ध्यान     चौकी लगाते समय ध्यान रखें कि साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे।     पूजा की सामग्री को चौकी पर रखें। नीचे न रखें।     चौकी पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाएं, क्योंकि मां दुर्गा को लाल कपड़ा बेहद प्रिय है और लाल रंग को शक्ति का प्रतीक माना जाता है।     इसके अलावा कलश को मां दुर्गा की मूर्ति की प्रतिमा के दाईं तरफ स्थापित करना चाहिए।     मां दुर्गा की चौकी के आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।     मां दुर्गा को विराजमान करने से पहले उस स्थान को गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें।  

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत: घटस्थापना का मुहूर्त कल सुबह, समय नोट कर लें

इंदौर हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र बहुत ही पवित्र त्योहार माना जाता है. यह नौ दिनों तक चलने वाला पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित होता है. इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है. यह त्योहार हमें अच्छाई की बुराई पर जीत का संदेश भी देता है. इन 9 दिनों में भक्त मां दुर्गा के लिए व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और मां दुर्गा को भोग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।  द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होगी और 27 मार्च, राम नवमी के दिन समाप्त होगी. इन 9 दिनों में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है और हर दिन का अपना एक खास रंग और भोग भी होता है. तो आइए अब पंडित प्रवीण मिश्र से जानते हैं कि चैत्र नवरात्र पर कल कितने बजे से घटस्थापना का मुहूर्त शुरू होगा और किस विधि के साथ कलश को स्थापित किया जाएगा. इन दोनों बातों के अलावा, चैत्र नवरात्र की पूजा की पूजन सामग्री भी जानेंगे।  चैत्र नवरात्र 2026 घटस्थापना का मुहूर्त  चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च यानी कल सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर होगा। इसी तिथि के चलते चैत्र नवरात्र की कलशस्थापना का पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. दूसरा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जो दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। नवरात्र पर कैसे होगी कलश स्थापना? नवरात्र की पूजा शुरू करने से पहले स्नान करें. फिर, मां दुर्गा के स्वागत के लिए घर व पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और पास में पानी से भरा कलश रखकर उसके ऊपर नारियल रखें. शुभ मुहूर्त में घट स्थापना या कलश स्थापना करें. फिर मां दुर्गा के आगे देसी घी का दीपक जलाएं, मां को फूलों की माला चढ़ाएं और फल, सूखे मेवे, मीठा पान, सुपारी, लौंग व इलायची का भोग लगाएं। इसके बाद, मां दुर्गा को कम से कम सात श्रृंगार की चीजें अर्पित करें और उनके मंत्रों का जाप करके आह्वान करें. फिर, दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें. शाम के समय भी रोजाना मां की पूजा करें और भोग लगाएं. भोग अर्पित करने के बाद भक्त सात्विक भोजन करके अपना व्रत खोल सकते हैं। घटस्थापना की विशेष सामग्री (Chaitra Navratri 2026 Pujan Samagri)  चैत्र नवरात्र की घटस्थापना कुछ आवश्यक सामग्री के बिना अधूरी मानी जाती है. जिसमें लकड़ी की चौकी, मिट्टी का एक बर्तन, मिट्टी का कलश, पवित्र स्थान की मिट्टी, 7 प्रकार के अनाज, गंगाजल, कलावा या मौली, सुपारी, आम या अशोक के पत्ते, अक्षत (साबुत चावल), जटा वाला नारियल, लाल कपड़ा, पुष्प और पुष्पमाला। चैत्र नवरात्र के 9 दिन पहनें ये सभी शुभ रंग पहला दिन 19 मार्च 2026 पीला मां शैलपुत्री दूसरा दिन 20 मार्च 2026 हरा मां ब्रह्मचारिणी तीसरा दिन 21 मार्च 2026 ग्रे (धूसर) मां चंद्रघंटा चौथा दिन 22 मार्च 2026 नारंगी मां कूष्मांडा पांचवा दिन 23 मार्च 2026 सफेद मां स्कंदमाता छठा दिन 24 मार्च 2026 लाल मां कात्यायनी सातवां दिन 25 मार्च 2026 रॉयल ब्लू मां कालरात्रि आठवां दिन 26 मार्च 2026 गुलाबी मां महागौरी नौवां दिन 27 मार्च 2026 बैंगनी मां सिद्धिदात्री

Shani Gochar 2026: 21 मार्च को शनि की चाल में होगा बदलाव, जानिए कौन सी 3 राशियों का होगा भाग्य उज्जवल

 वैदिक ज्योतिष में शनि को कर्म, न्याय और अनुशासन का ग्रह माना जाता है. यह सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है, जो एक राशि में करीब ढाई साल तक रहता है. इसी वजह से इसका प्रभाव लंबे समय तक सभी 12 राशियों और दुनिया पर देखने को मिलता है. वर्तमान में शनि गुरु की राशि मीन में स्थित हैं और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में विराजमान हैं. अब 21 मार्च 2026, शनिवार को शाम 4 बजे शनि इसी नक्षत्र के तीसरे पद में प्रवेश करने जा रहे हैं. इस दौरान शनि अस्त अवस्था में रहेंगे, जिससे कुछ राशियों पर इसका असर खास तौर पर दिखाई दे सकता है. ज्योतिष के अनुसार, शनि का नक्षत्र पद परिवर्तन हर राशि के जीवन में बदलाव लाता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन पर साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही हो. इस बार शनि की स्थिति बदलने से कुछ राशियों के जीवन में राहत और तरक्की के संकेत मिल रहे हैं. आइए जानते हैं किन राशियों को फायदा हो सकता है- मेष राशि मेष राशि वालों के लिए शनि बारहवें भाव में मौजूद हैं और साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है. ऐसे में शनि के नक्षत्र बदलने और अस्त होने से स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में कमी आ सकती है. जो समस्याएं लंबे समय से चल रही थीं, उनमें सुधार देखने को मिल सकता है. साथ ही धन लाभ के अवसर बन सकते हैं और किस्मत भी कुछ मामलों में साथ दे सकती है. कर्ज से राहत मिलने के संकेत भी नजर आ रहे हैं. सिंह राशि सिंह राशि के जातकों के लिए शनि अष्टम भाव में स्थित हैं. यह भाव अचानक घटनाओं और उतार-चढ़ाव से जुड़ा होता है. लेकिन शनि के इस बदलाव से अब स्थिति बेहतर हो सकती है. नौकरी और व्यापार में लाभ मिलने की संभावना है. लंबे समय से चली आ रही चिंताएं कम हो सकती हैं और परिवार, खासकर संतान से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है. नई नौकरी के मौके भी सामने आ सकते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. धनु राशि धनु राशि के लिए शनि चौथे भाव में अस्त अवस्था में हैं और इस समय ढैय्या चल रही है. ऐसे में शनि के नक्षत्र पद परिवर्तन से जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं. व्यापार में आ रही रुकावटें दूर हो सकती हैं और मानसिक तनाव कम हो सकता है. माता के स्वास्थ्य में सुधार के संकेत हैं. नौकरी करने वालों को फायदा मिल सकता है और मनचाही जगह ट्रांसफर होने के योग भी बन रहे हैं. साथ ही विरोधियों पर जीत हासिल करने में सफलता मिल सकती है.

18 मार्च 2026 का राशिफल: किस राशि का भाग्य चमकेगा, और किसे सतर्क रहने की जरूरत होगी

मेष : आज मेष राशि वालों के लिए समय मध्यम है। आपका मन परेशान रहेगा। आपका बिजनेस अच्छा है,बिजनेस के लिए आपको विदेश जाना पड़ सकता है, कुल मिलाकर लाभ के संकेत हैं। खर्च बढ़ेंगे। परिवार की सेहत का ध्यान रखें, खासकर माता-पिता की सेहत को देखें। वृषभ: कोई बात है जो पर्सनल लाइफ में आपको परेशान कर सकती है। मन परेशान हो सकता है। आत्मविश्वास में कमी भी रहेगी। धैर्यशीलता से लवलाइफ में काम लें। अफसरों से सद्भाव बनाकर रखें। तरक्की के मौके मिल सकते हैं। मिथुन: आपके लिए इस समय मीठा बोलना जरूरी हैष सभी से प्यार से बात करें। नौकरी में बदलाव के साथ तरक्की के मौके मिल सकते हैं। इस समय आपकी इनकम में वृद्धि भी होगी। परिवार का सपोर्ट हर जगह आपको मिलेगा। कर्क: कर्क राशि वालों के आत्मविश्वास में कमी रहेगी। आप किसी बात को लेकर दुखी हो सकते हैं, मन में उतार-चढ़ाव भी हो सकते हैं। शैक्षिक व शोधादि कार्यों में सफल रहेंगे, खासतौर पर इनमें तरक्की मिलेगी। नौकरी में बदलाव के साथ तरक्की हो सकती है। सिंह : इस राशि के लोगों को आज खुश होने का मौका लवलाइफ में मिल सकता है। दाम्पत्य सुख में वृद्धि होगी, आपको इस समय पार्टनर की केयर करनी है। शैक्षिक कार्यों में दिक्कतें आ सकते हैं। सचेत रहें। किसी मित्र के सपोर्ट से कारोबार में लाभ के मौके मिलेंगे। कन्या : आज आपको प्रोफेशनल लाइफ में आत्मविश्वास तो भरपूर रहेगा, परंतु धैर्यशीलता में कमी आ सकती है। इस समय कुछ भी करके संयत रहें। किसी दोस्त से धन मिलने के चांस हो सकते है। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। तुला राशि वालों के लिए इस समय कम्युनिकेशन खास रहेगा, इसलिए जो भी बोलें बैलेंस करके बोलें।मन प्रसन्न रहेगा। आपका आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। पिता की सेहत का ध्यान रखें। भागदौड़ अधिक रहेगी। खर्च भी बढ़ेंगे। वृश्चिक : आपको मानसिक तौर पर तनाव हो सकता है, इसलिए आप थोड़े परेशान हो सकते हैं। कारोबार के लिए माता से धन की प्राप्ति हो सकती है। कारोबार के लिए परिवार से दूर किसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। धनु : इस सम आपको प्रोफेशनल लाइफ में काबिलियत साबित करने के लिए कई मौके मिल सकते हैं। हालांकि आपके आत्मविश्वास में भी कमी रहेगी। इस समय नौकरी में कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। आय में वृद्धि भी होगी। मकर: मकर राशि वालों के लिए अच्छे योग हैं, प्रोपर्टी या स्टॉक मार्केट से निवेश के मौके आएंगे। आत्मविश्वास से लबरेज रहेंगे। कारोबार में वृद्धि होगी। वाहन सुख में वृद्धि भी हो सकती है। पिता की सेहत का ध्यान रखें। कुंभ : कुंभ राशि वालों को हेल्थ को लेकर चिंता हो सकती है, आपका मन परेशान रहेगा। मानसिक शांति बनाए रखने की कोशिश करें। परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। पार्टनर की तरफ से सरप्राइज गिफ्ट मिल सकते हैं। भागदौड़ अधिक रहेगी। मीन : महत्वपूर्ण पेशेवर कामों को पूरा करते समय अहंकार को त्याग दें। वित्तीय समृद्धि आपको स्मार्ट निवेश करने में मदद करती है। लव लाइफ में आज ज्यादा से ज्यादा बातचीत की जरूरत है। अतिरिक्त पेशेवर जिम्मेदारियां लें। आपकी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी निवेश का समर्थन करती है।

रात के सन्नाटे में गूंजती घंटियां—मैहर माता मंदिर की अनसुनी कहानी

मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर माता मंदिर (मां शारदा धाम) आस्था, चमत्कार और रहस्यों का अनोखा संगम माना जाता है. विंध्य पर्वतमाला की त्रिकूट पहाड़ी पर बसे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 1063 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. नवरात्रि के दौरान यहां लाखों भक्त मां शारदा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इस मंदिर की सबसे खास बात है रात में अपने आप बजने वाली घंटियां. जिसका रहस्य आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है. आइए चैत्र नवरात्रि के खास मौके पर जानते हैं इस प्राचीन मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के बारे में. रात में अपने आप बजती हैं घंटियां, क्या है रहस्य? स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी रात में घंटियों के बजने की आवाज सुनाई देती है. कहा जाता है कि इस समय कोई भी इंसान मंदिर के अंदर मौजूद नहीं होता, फिर भी घंटियां बजती रहती हैं. भक्तों का मानना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि दैवीय संकेत है. माना जाता है कि रात के समय मां शारदा स्वयं मंदिर में विराजमान रहती हैं और उनकी पूजा होती है, जिसकी वजह से घंटियां बजती हैं. आल्हा-ऊदल से जुड़ी है मान्यता मैहर माता मंदिर का संबंध वीर योद्धा आल्हा-ऊदल से भी जोड़ा जाता है. लोककथाओं के अनुसार, आल्हा आज भी अमर हैं और वे रोज़ ब्रह्म मुहूर्त में सबसे पहले मंदिर पहुंचकर मां शारदा की पूजा करते हैं. कहा जाता है कि जब सुबह मंदिर के पुजारी दरवाजे खोलते हैं, तो वहां ताजे फूल और पूजा के निशान मिलते हैं, जिससे इस रहस्य को और भी गहराई मिलती है. त्रिकूट पर्वत पर बसा पवित्र धाम यह मंदिर त्रिकूट पर्वत की ऊंचाई पर स्थित है, जहां से पूरे मैहर शहर का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है. भक्त पैदल सीढ़ियों से या रोपवे के जरिए भी मंदिर तक पहुंच सकते हैं. यहां विराजमान मां शारदा को विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का स्वरूप माना जाता है, इसलिए छात्र-छात्राएं विशेष रूप से यहां दर्शन के लिए आते हैं. नवरात्रि में उमड़ता है आस्था का सैलाब चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मैहर माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. भक्त मां से मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं और मान्यता है कि सच्चे मन से मां को पुकारने पर हर इच्छा पूरी होती है. इसलिए मैहर माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्यमयी घटनाओं का केंद्र भी है. रात में बजती घंटियां, आल्हा-ऊदल की कहानी और दैवीय उपस्थिति की मान्यताएं इस मंदिर को और भी खास बनाती हैं.

किन लोगों पर भरोसा करना है खतरनाक? नित्यानंद चरण दास ने बताए 6 संकेत

जीवन में सही लोगों की संगति आपको आगे बढ़ाती है, जबकि गलत संगति भीतर से कमजोर कर देती है। नित्यानंद चरण दास बताते हैं कि किन 6 तरह के लोगों से दूरी बनाकर रखना ही आत्मरक्षा है। जीवन हो या अध्यात्म- संगति का प्रभाव सबसे गहरा होता है। जिन लोगों के साथ हम रोज उठते-बैठते हैं, उनकी सोच, आदतें और ऊर्जा धीरे-धीरे हमारी अपनी बन जाती हैं। अगर आपकी संगति आपको प्रेरित करने के बजाय थका रही है, आत्मविश्वास कम कर रही है या मानसिक शांति छीन रही है, तो यह एक बड़ी चेतावनी हो सकती है। प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता और इस्कॉन साउथ मुंबई के संयोजक Nityanand Charan Das कहते हैं कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ सही रास्ता नहीं, बल्कि सही लोग भी जरूरी होते हैं। उनके अनुसार, कुछ लोगों से दूरी बनाना नकारात्मकता नहीं, बल्कि स्वयं की रक्षा करना है। उनके अनुसार, इन 6 तरह के लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए- जो दूसरों की चुगली करता है जो व्यक्ति आपकी मौजूदगी में किसी तीसरे की बुराई करता है, वह भरोसे के काबिल नहीं होता। चुगली करने वाला इंसान रिश्तों को सच नहीं, मसाले से चलाता है। ऐसे लोग ना तो सच्चे दोस्त होते हैं और ना ही वफादार साथी। आज आप उनके सामने हैं, इसलिए आप सुरक्षित हैं- लेकिन जैसे ही आप पीछे मुड़ेंगे, वही बातें आपके बारे में कही जाएंगी। यह आदत व्यक्ति की सोच और नैतिकता को दर्शाती है। जो जरूरत से ज्यादा मीठा बोलता है अत्यधिक तारीफ, बनावटी अपनापन और हर बात में “आप ही सबसे अच्छे हैं” कहना अक्सर किसी स्वार्थ का संकेत होता है। सच्चे रिश्तों में ईमानदारी होती है, चापलूसी नहीं। ऐसे लोग तब तक मीठे रहते हैं, जब तक उन्हें आपसे कुछ चाहिए। काम निकलते ही उनका व्यवहार बदल जाता है। जो कभी अपनी गलती नहीं मानता जो इंसान हर परिस्थिति में खुद को सही साबित करता है और दोष हमेशा दूसरों पर डालता है, वह रिश्तों में जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। ऐसे लोगों के साथ विवाद कभी सुलझते नहीं, क्योंकि वे आत्ममंथन करना ही नहीं जानते। जहां गलती मानने की क्षमता नहीं, वहां सुधार और भरोसे की भी कोई जगह नहीं। जो ताकतवर लोगों के सामने व्यवहार बदल ले जो व्यक्ति पद, पैसे या पावर देखकर झुक जाता है और आम लोगों को नजरंदाज करता है, वह स्थिर चरित्र वाला नहीं होता। ऐसे लोग रिश्तों को इंसान से नहीं, फायदे से जोड़कर देखते हैं। आज आप उपयोगी हैं, इसलिए आप महत्वपूर्ण हैं- कल कोई और ज्यादा प्रभावशाली मिला, तो आप पीछे छूट जाएंगे। जो किसी के दर्द पर हंसता है जिस इंसान में करुणा और संवेदना नहीं होती, वह कभी सच्चा सहारा नहीं बन सकता। किसी के दुख में मजाक उड़ाना या उसे कमजोरी समझना दर्शाता है कि उस व्यक्ति में समानुभूति (empathy) की कमी है। नित्यानंद चरण दास के अनुसार, जहां एक बार संवेदना नहीं दिखी, वहां आगे भी उम्मीद रखना व्यर्थ है। जो राज नहीं रख सकता जो व्यक्ति दूसरों की निजी बातें, रहस्य या विश्वास को हल्के में लेता है, वह भरोसे के लायक नहीं होता। अगर कोई किसी तीसरे का राज आपके साथ शेयर कर रहा है, तो याद रखें- आपका नंबर भी आएगा। विश्वास एक बार टूटा तो रिश्ते हमेशा के लिए कमजोर हो जाते हैं।  

रसोई में जूते-चप्पल पहनना सही या गलत? वास्तु शास्त्र की चेतावनी जानें

भारतीय संस्कृति में रसोईघर को घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है। आखिर क्यों हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा रसोई में चप्पल ले जाने से मना करते थे और वास्तु शास्त्र इस बारे में क्या चेतावनी देता है। किचन सिर्फ खाना पकाने की जगह नहीं है, बल्कि यहां धन और धान्य की देवी मां अन्नपूर्णा का वास होता है। जब हम बाहर से गंदे जूते-चप्पल पहनकर किचन में जाते हैं, तो हम अनजाने में देवी का अपमान कर रहे होते हैं। प्राचीन वास्तु ग्रंथों जैसे 'वास्तु राजवल्लभ' और 'समरांगण सूत्रधार' में घर के दो हिस्सों को हमेशा सबसे शुद्ध रखने पर जोर दिया गया है- पहला पूजा घर और दूसरा रसोईघर। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जूते-चप्पलों के साथ राहु और केतु (नकारात्मक ऊर्जा) का प्रभाव जुड़ा होता है। जब यह नकारात्मक ऊर्जा किचन में पहुंचती है, तो खाने के जरिए पूरे परिवार के शरीर में प्रवेश कर जाती है। इससे घर में बीमारियां बढ़ती हैं, बेवजह के झगड़े होते हैं और घर की बरकत (धन) रुक जाती है। वैज्ञानिक नजरिया क्या है? अगर धार्मिक नजरिए से हटकर देखें, तो भी यह आदत बहुत नुकसानदायक है। हमारे जूतों में बाहर की सड़कों की गंदगी, कीटाणु और बैक्टीरिया चिपके होते हैं। जब वही चप्पलें किचन में जाती हैं, तो वह गंदगी हमारे खाने तक पहुंच सकती है, जिससे परिवार का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। अगर पहनना मजबूरी हो तो क्या करें? कई बार सर्दियों के मौसम में फर्श बहुत ठंडा होता है या किसी को जोड़ों के दर्द (Medical Issue) की वजह से चप्पल पहनना जरूरी होता है। ऐसे में वास्तु का एक आसान सा उपाय है:     अपने किचन के लिए एक अलग, साफ 'कपड़े या ऊन की चप्पल' रखें।     इस चप्पल को पहनकर घर के बाहर या बाथरूम में बिल्कुल न जाएं।     किचन में देवी अन्नपूर्णा और अग्नि देव का वास होता है, अशुद्ध पैरों से वहां जाना उनका सीधा अपमान है।     बाहर की चप्पलें किचन में ले जाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे आर्थिक तंगी (पैसे की कमी) आ सकती है।